विदेशी फिल्ममेकर ने पहली बार Vande Bharat में किया सफर, 8 घंटे बाद दिया ऐसा रिएक्शन

भारत घूमने आए इंटरनेशनल फिल्ममेकर माइक नून ने वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर का अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया है। बेंगलुरु से हैदराबाद तक करीब आठ घंटे की यात्रा के बाद उन्होंने ट्रेन की जमकर तारीफ की। माइक ने कहा कि वह भारत में यात्रा का एक अलग अनुभव दिखाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने वंदे भारत को चुना।

उन्होंने वीडियो में इसे भारत की सबसे शानदार पैसेंजर ट्रेन बताया और कहा कि आमतौर पर कंटेंट क्रिएटर्स भारत में यात्रा के मुश्किल या खराब अनुभव दिखाते हैं, लेकिन वह कुछ अलग दिखाना चाहते थे।

सीट से लेकर खाने तक, हर चीज ने खींचा ध्यान

यात्रा शुरू होते ही माइक को ट्रेन में मिलने वाली जानकारी वाली बुकलेट ने आकर्षित किया। इसमें अलग-अलग शहरों के मशहूर खाने के बारे में बताया गया था। हैदराबाद की बिरयानी, बेंगलुरु के कबाब और कोलकाता की मछली का भी जिक्र था। कोलकाता की मछली देखकर माइक ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद बंगालियों को मछली पसंद है। उनके इस कमेंट ने बाद में सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा।

घूमने वाली सीट देखकर हुए इम्प्रेस

वंदे भारत की सीटों ने भी माइक को खासा प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि सीटों को बाहर की तरफ घुमाया जा सकता है, जिससे यात्री खिड़की की ओर मुड़कर बाहर का नजारा आराम से देख सकते हैं।माइक ने अपने अंदाज में सीट पर बैठकर किताब पढ़ने को लेकर भी मजाक किया, जिससे वीडियो और हल्का-फुल्का हो गया।

खाने की तारीफ, सूप पर भी किया मजेदार कमेंट

सफर के दौरान यात्रियों को स्नैक्स और खाना परोसा गया। माइक ने खाने का स्वाद लेते हुए मजाक किया कि उनके चेहरे से ही पता चल रहा है कि खाना कितना अच्छा है। इसके बाद इंस्टेंट सूप भी सर्व किया गया। सूप के पैकेट पर रणवीर सिंह की तस्वीर देखकर उन्होंने फिर मजाकिया अंदाज में कहा कि पैकेट पर अभिनेता के चेहरे से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सूप कितना स्वादिष्ट होगा।

दक्षिण भारत के नजारों ने जीता दिल

खाने और आरामदायक सीटों के अलावा ट्रेन से बाहर दिख रहे दक्षिण भारत के खूबसूरत नजारे माइक को सबसे ज्यादा पसंद आए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के ग्रामीण इलाकों की खूबसूरती को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। रास्ते के प्राकृतिक नजारे देखते हुए उनकी यात्रा और भी यादगार बन गई।

डिनर के बाद मिली आइसक्रीम, सफर हुआ पूरा

यात्रा के दौरान डिनर भी परोसा गया, जिसकी माइक ने तारीफ की। उन्हें लगा कि अब इससे बेहतर क्या हो सकता है, तभी आइसक्रीम भी सर्व कर दी गई।

करीब आठ घंटे की यात्रा के बाद ट्रेन हैदराबाद पहुंची। स्टेशन पर काफी भीड़ थी, लेकिन माइक के मुताबिक पूरा सफर इतना शानदार रहा कि वहां पहुंचने के बाद भी वह काफी संतुष्ट महसूस कर रहे थे।

उन्होंने वीडियो के अंत में वंदे भारत को धन्यवाद देते हुए कहा, “Thanks for the lift, Vande Bharat.”

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

माइक के वीडियो पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। कई यूजर्स ने ट्रेन को आरामदायक और शानदार बताया। एक यूजर ने लिखा कि सफर काफी कूल और कंफर्टेबल लग रहा है। वहीं, एक अन्य यूजर ने उन्हें एर्नाकुलम से बेंगलुरु वाली वंदे भारत में सफर करने की सलाह दी।

बंगालियों और मछली वाले उनके मजाक पर भी लोगों ने प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने बताया कि बंगालियों के मछली और चावल खाने को लेकर यह एक आम धारणा है।

कुछ लोगों ने भविष्य में भारत में आने वाली बुलेट ट्रेन का जिक्र करते हुए माइक को दोबारा भारत आने का न्योता भी दिया।

वंदे भारत का सफर बना यादगार

माइक नून के लिए बेंगलुरु से हैदराबाद तक का यह सफर सिर्फ एक ट्रेन यात्रा नहीं रहा। आरामदायक सीटों, खाने और दक्षिण भारत के खूबसूरत नजारों ने उनके अनुभव को खास बना दिया। उनके वीडियो ने यह भी दिखाया कि भारत की आधुनिक रेल यात्रा विदेशी यात्रियों के लिए कितनी दिलचस्प हो सकती है।

आप कितने साल जिएंगे? रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला कनेक्शन

राम मंदिर को कल मिल सकता है पहला CEO! 5500 लोगों ने किया था आवेदन, सेलेक्शन कमेटी ने 3 नाम किए शॉर्टलिस्ट

Ayodhya Ram Temple CEO Update: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राम मंदिर को बुधवार को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल सकता है। चयन समिति ने मंगलवार को इस पद के लिए तीन शीर्ष उम्मीदवारों के नामों का एक पैनल तैयार कर सिफारिश दी है। राम मंदिर के पहले सीईओ की दौड़ में रिटायर ब्यूरोक्रेट सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर के नए सीईओ का चयन बुधवार को मणिरामदास छावनी स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास पर आयोजित होने वाली बैठक में किया जाएगा।

3 सदस्यीय सर्च कमेटी ने छांटे नाम, 5,500 आवेदनों की हुई स्क्रीनिंग

तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अयोध्या पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि वह बैठक से पहले ट्रस्ट को अपनी अंतिम शॉर्टलिस्ट सौंप देगी। इस समिति में रिटायर जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावरे शामिल हैं। बुधवार को दोपहर 2 बजे से प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना है।

मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर का श्रेष्ठ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए हम एक उत्कृष्ट सीईओ की तलाश में थे। इसके लिए हमने जस्टिस (प्रमोद) कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावरे से मार्गदर्शन मांगा था। इस तीन सदस्यीय चयन समिति ने सुबह से शाम तक अथक परिश्रम करते हुए साक्षात्कार लिए।

गोविंद देव गिरि ने बताया कि देश भर से लगभग 5500 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एनजीओ से जुड़े प्रोफेशनल शामिल थे। चयन समिति ने चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत पहले 3500, फिर 1500 और अंत में 300 उम्मीदवारों को छांटा। प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए गए। इसके बाद 3 अंतिम शॉर्टलिस्ट किए गए नामों का पैनल तैयार किया गया।

दान के पैसों की चोरी के आरोपों के बाद लिया गया फैसला

राम मंदिर में चंदे के प्रबंधन और दान की चोरी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट की वित्तीय देखरेख पर सवाल खड़े हुए थे। ट्रस्ट ने खुद माना था कि दान की चोरी से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक कामकाज और दैनिक संचालन की देखरेख के लिए एक पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया था।

सेक्रेटरी और अन्य पदों का भी हो सकता है आधिकारिक ऐलान

बुधवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में सीईओ के अलावा दो सदस्यों और जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) के पदों के लिए भी नामों की घोषणा की जा सकती है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के सचिव के पद पर भी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। जगदीश आफले मंदिर ट्रस्ट के पहले सचिव होंगे। जब गोविंद देव गिरि से पूछा गया कि क्या बुधवार को नए सीईओ के नाम की घोषणा होगी तो उन्होंने कहा कि यह तय करना ट्रस्ट पर निर्भर है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा, लेकिन ट्रस्टी बोर्ड तय करेगा कि इसे अभी करना है या नहीं।

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वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

Vadodara-Mumbai

अहमदाबाद-मुंबई के बीच शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन के पहले चरण से पहले ही वाहन चालकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त, 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की पूरी संभावना है। यह नया रूट शुरू होने से गुजरात और महाराष्ट्र के बीच सड़क मार्ग ज्यादा तेज़ और सुविधाजनक बन जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य के हिस्से में आने वाला 157 किलोमीटर का पूरा सेक्शन 31 अगस्त तक ट्रैफिक के लिए खोलने की योजना है। लगभग ₹24,000 करोड़ की लागत से बन रहे इस सेक्शन के 7 में से 5 निर्माण पैकेज का काम पूरा हो चुका है और बाकी के दो पैकेज का काम अंतिम चरण में है।

सफर का समय घटकर आधा रह जाएगा : इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही वडोदरा से मुंबई के बीच की 403 किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ 4 घंटे में तय की जा सकेगी। अब तक इसी दूरी को तय करने में यात्रियों को लगभग 8 घंटे का समय लगता था। यात्रा का समय आधा हो जाने से यात्रियों को न केवल आसानी होगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल की भी भारी बचत होगी।

प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट : 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, जो देश के 5 राज्यों को आपस में जोड़ता है। इस विशाल कॉरिडोर का अहम हिस्सा वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे चालू होने से उत्तर और पश्चिम भारत के बीच व्यापार, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स बिजनेस को नई रफ्तार मिलेगी।

Business idea: 1 करोड़ की नौकरी छोड़ भारत लौटा इंजीनियर! सिर्फ ₹90,000 से शुरू किया बिजनेस, 6 साल में हासिल किया बड़ा मुकाम

Business idea: अमेरिका में करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर पारिवारिक जीवन, भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसर और कुछ नया करने की चाह लोगों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के युवा उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Qubit Fitness के संस्थापक और CEO विवेक तिरुवेंगदम ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ चेन्नई लौट आए। उस समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। लेकिन उन्होंने इसी रकम से अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

विवेक ने इंस्टाग्राम पर अपनी छह साल की यात्रा साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला अचानक नहीं था। उनका मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं। बल्कि परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना था, जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 11 महीने की बेटी के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर कुछ नया और सार्थक बनाना किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Qubit Fitness की कैसे हुई शुरुआत?

जनवरी 2021 में विवेक ने बिना किसी ऑफिस, निवेशक या टीम के Qubit Fitness की शुरुआत की। उनके पास सिर्फ एक लैपटॉप, अपना समय और 90 हजार रुपये की बचत थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, जो अमेरिका में उनकी सालाना आय की तुलना में काफी कम था।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। समय के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। नए ग्राहक जुड़े, कामकाज बेहतर हुआ और कारोबार बढ़ता गया। भारत लौटने के छह साल बाद विवेक ने वह वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया था।

अपने अनुभव शेयर करते हुए विवेक ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें सिखाया कि लगातार मेहनत, प्रतिभा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। धैर्य का फल देर से मिलता है। लेकिन मिलता जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य के साथ काम करके कमाया गया पैसा अलग तरह की संतुष्टि देता है।

सफलता का श्रेय परिवार को दिया

विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में उनका साथ देने वाले लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के भरोसे और सहयोग की वजह से वह अपने सपने को हकीकत में बदल पाए। सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को लोगों ने खूब सराहा। एक यूजर ने लिखा कि आपकी सफलता के पीछे आपकी अच्छाई और सोच सबसे बड़ी ताकत है।

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वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि आपका ब्रांड और सोच लोगों के लिए प्रेरणा है। परिवार के साथ रहकर आगे बढ़ने का आपका फैसला शानदार है। कई अन्य लोगों ने भी विवेक की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें बधाई दी। विवेक का कहना है कि कभी-कभी विश्वास ही आपका इकलौता बिजनेस प्लान होता है। इस यात्रा ने उन्हें सिखाया कि प्रतिभा से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। उद्देश्यपूर्ण काम से मिलने वाली संतुष्टि अलग ही होती है।

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Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, 30 मीटर नीचे बन रहा BKC स्टेशन, सूरत स्टेशन ने लिया भव्य आकार

Bullet Train Update: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) तेजी से आकार ले रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में इस 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट के दो सबसे चुनौतीपूर्ण स्टेशनों मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) और गुजरात के सूरत स्टेशन पर काम महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। BKC टर्मिनल हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के दक्षिणी शुरुआती पॉइंट के तौर पर काम करेगा। बीकेसी (BKC) स्टेशन जमीन से लगभग 30 मीटर गहराई में बनाया जा रहा है।

BKC में देश के सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशनों में से एक तैयार किया जा रहा है। यह पूरे प्रोजेक्ट का सबसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां खुदाई और नींव (फाउंडेशन) का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है, जिससे स्टेशन के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। वहीं, सूरत स्टेशन का ढांचा और छत का काम पूरा हो चुका है। अब वहां फिनिशिंग का काम बुलेट ट्रेन की रफ्तार से चल रहा है।

क्यों अहम है BKC स्टेशन?

News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई का BKC स्टेशन इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनल होगा। इसे जमीन से करीब 30 मीटर नीचे बनाया जा रहा है। यही वजह है कि इसे पूरी परियोजना के सबसे जटिल निर्माण कार्यों में शामिल किया गया है। स्टेशन के लिए खुदाई और फाउंडेशन से जुड़े प्रमुख काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। अंडरग्राउंड स्टेशन होने के कारण यहां निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग, सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। BKC स्टेशन तैयार होने के बाद मुंबई से बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सूरत स्टेशन का स्ट्रक्चर तैयार, अब इंटीरियर का काम जारी

गुजरात के सूरत में बुलेट ट्रेन स्टेशन का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का मुख्य स्ट्रक्चरल फ्रेम और रूफिंग का काम पूरा हो चुका है। अब यहां फर्श, क्लैडिंग और सीलिंग लगाने समेत अन्य इंटीरियर फिनिशिंग का काम चल रहा है। सूरत स्टेशन का डिजाइन भी खास तरीके से तैयार किया गया है। इसकी वास्तुकला में सूरत की पहचान यानी हीरा काटने और पॉलिश करने के उद्योग से प्रेरणा ली गई है। स्टेशन की डिजाइन के जरिए शहर की कारोबारी और औद्योगिक पहचान को दर्शाने की कोशिश की गई है।

508 किमी लंबा होगा पूरा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत की पहली हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है। करीब 508 किलोमीटर लंबी यह समर्पित रेल लाइन मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगी। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इसके रास्ते में कई प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी शहर इससे जुड़ेंगे।

इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन होंगे

मुंबई (BKC)

ठाणे

विरार

बोइसर

वापी

बिलिमोरा

सूरत

भरूच

वडोदरा

आनंद

अहमदाबाद

साबरमती

320 km प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की उम्मीद है। इस रफ्तार से मुंबई से अहमदाबाद के बीच करीब 508 किलोमीटर की दूरी लगभग 2 घंटे में तय की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी लाइन तैयार होने से पहले इसके कुछ हिस्सों पर चरणबद्ध तरीके से सेवा शुरू की जा सकती है। यानी यात्रियों को पूरे कॉरिडोर के पूरा होने का इंतजार जरूरी नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी। इसके साथ ही भारत के हाई-स्पीड रेल युग की शुरुआत हुई।

हर स्टेशन की डिजाइन में दिखेगी शहर की पहचान

इस प्रोजेक्ट से जुड़े रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के स्टेशनों को केवल परिवहन केंद्र के रूप में नहीं। बल्कि संबंधित शहर की पहचान से जोड़कर तैयार किया जा रहा है। स्टेशनों में आधुनिक वास्तुकला, यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और अलग-अलग परिवहन माध्यमों से कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है। साबरमती स्टेशन को विशेष रूप से एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बुलेट ट्रेन के साथ मेट्रो, BRTS और सामान्य रेलवे को जोड़ा जाएगा। स्टेशन के आसपास के क्षेत्र का विकास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के सिद्धांतों के आधार पर किए जाने की योजना है।

कब शुरू होगी देश की पहली बुलेट ट्रेन?

बुलेट ट्रेन से सफर करने का सपना देख रहे लोगों को अभी करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल सर्विस अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए केवल स्टेशन और ट्रैक ही नहीं, बल्कि ट्रेनों के रखरखाव की अत्याधुनिक व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इस रेलवे कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ट्रेनों की नियमित जांच, मरम्मत और रखरखाव के लिए तीन अत्याधुनिक रोलिंग स्टॉक डिपो बनाए जा रहे हैं। इनमें एक महाराष्ट्र के ठाणे और दो गुजरात के सूरत और साबरमती में होंगे।

ठाणे डिपो में पहली बार इस्तेमाल होंगी ये टेक्नोलॉजी

मुंबई कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनस होने के कारण ठाणे का रोलिंग स्टॉक डिपो बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसे अत्याधुनिक मशीनरी से लैस किया जा रहा है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, यहां कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें भारत में पहली बार इस्तेमाल किए जाने की योजना है। डिपो में हाई-स्पीड ट्रेन सेट की जांच और रखरखाव किया जाएगा। ताकि ट्रेनें नियमित सेवा के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

साबरमती डिपो में छोटी-बड़ी मरम्मत की पूरी व्यवस्था

गुजरात के साबरमती डिपो में ट्रेनों की छोटी और बड़ी दोनों तरह की मरम्मत की सुविधा होगी। यहां इमरजेंसी रिपेयर एरिया, पहियों की री-प्रोफाइलिंग के लिए उपकरण, कोच बॉडी की मरम्मत और बोगी वर्कशॉप बनाई जाएंगी। ट्रेनों की नियमित जांच के लिए विशेष ट्रैक और इंस्पेक्शन रोड भी तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन की नियमित सफाई के लिए ट्रेन-वॉशिंग प्लांट भी लगाए जाएंगे।

पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान

बुलेट ट्रेन के रखरखाव केंद्रों को तैयार करते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा रहा है। डिपो में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज सिस्टम लगाए जाएंगे। ट्रेन धोने में इस्तेमाल होने वाले पानी को अधिक से अधिक दोबारा इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी, जिससे पानी की खपत कम की जा सके।

जापान में ट्रेनिंग ले रहे रेलवे कर्मचारी

बुलेट ट्रेन के संचालन और रखरखाव के लिए भारतीय कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को जापान में सीधे ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इन कर्मचारियों को जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल सिस्टम के संचालन और रखरखाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है। इस तरह मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी केवल ट्रैक और स्टेशनों तक सीमित नहीं है। स्टेशन, डिपो, रखरखाव व्यवस्था, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है।

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Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एक पैकेज, 7 शहर और अनगिनत यादें! IRCTC का ये नया जापान टूर पैकेज लुभा रहा है कई ट्रैवलर्स को

विदेश घूमने का सपना देखने वालों के लिए IRCTC शानदार मौका लेकर आया है। इंडियन रेलवे 10 दिन और 9 रात का दिल्ली से जापान का टूर पैकेज लेकर आया है, जिसमें टोक्यो से लेकर हिरोशिमा तक कई मशहूर शहरों, सांस्कृतिक स्थलों और अट्रैक्टिव लोकेशन की सैर कराई जाएगी।

 

ट्रैवल की तारीख

IRCTC का यह स्पेशल जापान टूर 6 सितंबर 2026 से शुरू होगा और 15 सितंबर 2026 को खत्म होगा। ट्रैवलर दिल्ली से टोक्यो (हानेडा एयरपोर्ट) के लिए उड़ान भरेंगे और वापसी भी टोक्यो से ही होगी। जर्नी ऑल निप्पॉन एयरवेज (ANA) की फ्लाइट से कराई जाएगी। लेकिन फ्लाइट के समय में एयरलाइन के अनुसार बदलाव हो सकता है।

 

 

पैकेज कीमत

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इस टूर पैकेज की शुरुआती कीमत ₹3,45,999 प्रति व्यक्ति (ट्रिपल शेयरिंग) रखी गई है। ट्विन शेयरिंग के लिए ₹3,49,999 और सिंगल ऑक्यूपेंसी के लिए ₹4,73,999 देने होंगे। बच्चों के लिए भी अलग पैकेज अवेलेबल है, जिसमें 5 से 11 साल तक के बच्चों के लिए बेड के साथ और बिना बेड के अलग-अलग रेट तय किए गए हैं।

 

 

पैकेज फैसिलिटी

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पैकेज में आने-जाने का इकॉनमी क्लास एयर टिकट, चार-स्टार होटल में रुकने की व्यवस्था, जापान टूरिस्ट वीजा, रोजाना नाश्ता, लंच और डिनर, एयरपोर्ट ट्रांसफर, एसी कोच से लिकल ट्रिप, 70 वर्ष से कम उम्र के पैसेंजर के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस, अंग्रेजी बोलने वाला टूर गाइड और सभी जरूरी टैक्स शामिल किए गए हैं। इससे ट्रैवलर को अलग-अलग खर्चों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

 

 

 

टूरिस्ट स्पॉट्स 

My eye-opening visit to Hiroshima, 80 years after the bombing

इस 10 दिन की ट्रिप में जापान के कई मशहूर शहरों और टूरिस्ट डेस्टिनेशन को शामिल किया गया है। ट्रवलर टोक्यो, हाकोने, हमामात्सु, क्योटो, ओसाका, नारा और हिरोशिमा की सैर करेंगे। इसके अलावा असाकुसा मंदिर, उएनो पार्क, ओडाइबा, टीमलैब प्लैनेट्स, माउंट फूजी का फिफ्थ स्टेशन (मौसम के अनुसार), ओवाकुदानी घाटी और हाकोने रोपवे जैसी फेमस डेस्टिनेशन का भी एक्सपीरियंस मिलेगा।

 

 

 

स्पेशल अट्रैक्शन

टूर में ट्रैवलर नागोया का टोयोटा म्यूजियम और SCMAGLEV रेलवे म्यूजियम, क्योटो का अराशियामा बैम्बू फॉरेस्ट, किंकाकु-जी मंदिर, फुशिमी इनारी ताइशा, ओसाका कैसल, नारा डियर पार्क, तोदाई-जी मंदिर, हिरोशिमा पीस मेमोरियल पार्क, मियाजिमा आइलैंड और इत्सुकुशिमा श्राइन भी देख सकेंगे। इस टूर का सबसे मेन अट्रैक्शन जापान की वर्ल्ड फेमस शिंकानसेन बुलेट ट्रेन में शिन-ओसाका से हिरोशिमा तक सफर करना होगा।

 

 

 इम्पोर्टेन्ट डॉक्यूमेंट

इस टूर की बुकिंग के लिए ट्रैवलर के पास वापसी की तारीख से कम से कम छह महीने तक वैलिड पासपोर्ट होना जरूरी है। इसके साथ पैन कार्ड, वीजा के लिए जरूरी डाक्यूमेंट्स, बैंक से जुड़ी फाइनेंसियल डिटेल और नौकरी से संबंधित डाक्यूमेंट्स भी जमा करने होंगे। जापान के वीजा नियमों का पालन करना सभी पैसेंजर के लिए अनिवार्य होगा।

 

 

जरूरी जानकारी

IRCTC ने साफ किया है कि ट्रिप प्रोग्राम और फ्लाइट का समय सिचुएशन और एयरलाइन की जरूरतों के हिसाब से बदला जा सकता है। ऐसे में ट्रैवलर को बुकिंग से पहले सभी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

‘राम मंदिर में चंदा चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं’; पप्पू यादव और राहुल गांधी से SP ने बनाई दूरी! राम गोपाल यादव भड़के

Pappu Yadav News: संसद परिसर में बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के भगवा कपड़े पहनकर राम मंदिर चंदा चोरी का नुक्कड़ नाटक करने पर समाजवादी पार्टी (SP) के सीनियर नेता राम गोपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस नाटक को गलत ठहराते हुए कहा कि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। सपा सांसद ने कहा कि पप्पू यादव ने गलत किया। उन्हें संसद परिसर में ऐसा नहीं करना चाहिए था। यादव ने कहा कि संतों का चंदा चोरी से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के कई सांसद भी पप्पू यादव के साथ नाटक कर रहे थे।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, संसद परिसर में पप्पू यादव द्वारा भगवा कपड़े पहनकर नुक्कड़ नाटक पर सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, “वो गलत था क्योंकि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। वो गलत चीज थी, ऐसा नहीं होना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “हम राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सदन में उठाएंगे। ये गंभीर मामला है।”

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शुक्रवार को भगवा कपड़े पहनकर संसद परिसर में मकर द्वार के सामने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ नाटक किया था। यह प्रदर्शन अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विरोध में किया गया था। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस और सपा के विभिन्न सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि यादव ने राम मंदिर में हुई चोरी को दिखाने के लिए कथित रूप से पैसे अपनी जेब में रख लिए।

BJP ने विपक्ष से की माफी की मांग

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संसद परिसर में नाटक करके हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई। भगवा पार्टी ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। यादव ने हालांकि कहा कि वह सनातन की रक्षा के लिए विरोध कर रहे हैं। कितनी भी FIR दर्ज हो जाएं। लेकिन वह नहीं झुकेंगे।

BJP नेताओं ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की तरफ ध्यान खींचने के लिए संसद परिसर में नाटक करने को लेकर पप्पू यादव, राहुल गांधी और अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ शनिवार को वाराणसी में शिकायत दर्ज करवाई। जबकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस को तहरीर दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी गांधी और यादव पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के जरिए सनातन धर्म का अपमान किया।

आखिर क्या हुआ था जिस पर मचा है बवाल?

दरअसल, भगवा कपड़े पहने पप्पू यादव ने शुक्रवार को संसद परिसर में ‘मकर द्वार’ के सामने विपक्ष के दूसरे सांसदों के साथ यह राम मंदिर चढ़ावा चोरी का नाटक किया। इस दौरान राहुल गांधी समेत अन्य सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को दिखाने के लिए अपनी जेब में पैसे डाले। BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस तरह के विरोध से लाखों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का काम नहीं था। बल्कि एक सोचा-समझा अपराध था।

चुघ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “राहुल गांधी और इस काम में शामिल हर किसी को, चाहें वह समाजवादी पार्टी से हो या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी से, पूरे देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सबके सामने माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था। राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

VHP नेता सुरेंदर गुप्ता ने भी गांधी और यादव की आलोचना की। इस विरोध को अश्लील प्रदर्शन बताया, जो सनातन धर्म और संतों का अपमान करता है। गुप्ता ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी में संसद के बाहर ऐसा अश्लील प्रदर्शन किया गया। जिस तरह से दो ‘पप्पुओं’ ने सनातन और संतों का अपमान किया। उससे संतों के साथ-साथ हिंदू समुदाय में भी बहुत गुस्सा है।”

पप्पू यादव की सफाई

इस बीच, पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने न तो किसी संत को गाली दी और न ही उनका अपमान किया। यादव ने पीटीआई से कहा, “मैंने किसी को गाली नहीं दी। मैंने किसी संत का नाम नहीं लिया और न ही उनका अपमान किया। सनातन और इस देश के सौ करोड़ लोगों की आस्था की रक्षा के लिए हम एक लाख बार कुर्बानी देने को तैयार हैं। आप हमारे खिलाफ जितने चाहें मुकदमे कर लें और जितना चाहें हमला कर लें।” यादव बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद हैं।

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भारत का बॉर्डर रेल प्रोजेक्ट! चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर 45000 करोड़ खर्च कर बिछेगा रेलवे का जाल

Indian Rail Border Project: बदलती रीजनल मोबिलिटी और रणनीतिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपनी स्ट्रैटिजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के तहत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए लगभग ₹45000 करोड़ ($4.7 बिलियन) के निवेश की योजना बना रहा है। आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर लागू होने वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों के लिए नियोजित कुल रेलवे इंफ्रा आउटले का करीब 22 फीसदी हिस्सा है।

इन सीमावर्ती राज्यों में बिछेगा रेलवे का जाल

रिपोर्ट के मुताबिक इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस खर्च का इस्तेमाल देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में नई पटरियां बिछाने, नए प्लेटफॉर्म बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस योजना में पाकिस्तानी सीमा से लगते पश्चिमी राज्य पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटे पश्चिम बंगाल और असम के रणनीतिक क्षेत्र, चीन सीमा के पास और सुदूर पर्वतीय क्षेत्र वाले हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।

आपको बता दें कि ये नया प्लान भारत सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क, पुल और सुरंगों बनाने के उस $3.4 बिलियन ($340 करोड़) के प्लान से भी बड़ा है, जिसकी जानकारी पहले सामने आई थी।

संवेदनशील सीमाओं पर बदलती रणनीतिक स्थितियां

सीमावर्ती कनेक्टिविटी पर भारत का ये फोकस तब सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ संबंध नए फेज में आगे बढ़े हैं। 6 साल पहले हुई घातक झड़प के बाद चीन के साथ संबंधों में अब स्थिरता आई है। आपको बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक ब्रीफ कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिला था। इसके अलावा साल 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर ने भारत के पहले से स्थिर साझेदारी के संबंधों को जटिल बना दिया है।

नागरिक सुविधा के साथ सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती

इस भारी निवेश से डुअल यूजर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये सिविलियन रेलवे नेटवर्क होंगे जिनका इस्तेमाल आम नागरिकों की आवाजाही के लिए तो होगा ही, साथ ही आपात स्थिति में ये सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी पूरा सहारा देंगे।

हिमालयी क्षेत्रों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसी संवेदनशील सीमाओं तक उच्च क्षमता वाले, ऑल-वेदर रेल नेटवर्क को मजबूत करके ट्रूप मोबलाइजेशन टाइम को भी स्ट्रैटिजकली कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिजनल प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ यह अहम सप्लाई लाइन को भी सुरक्षित करता है।

सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर पीएम मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने इसे लेकर लगातार कदम उठाए हैं। पाकिस्तान सीमा के पास 1450 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। डोकलाम के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है।

पिछले साल कश्मीर घाटी को बाकी भारत से जोड़ने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का उद्घाटन किया गया। पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में लगभग 1700 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गई हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए 1962 से निष्क्रिय पड़े एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से सक्रिय किया गया है।

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चीन की ओर से भी जारी है निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ चीन ने भी 2017 में डोकलाम में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से अपनी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण काफी तेज कर दिया है। चीन अपनी सीमा में एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चीन के इस विस्तार ने उपकरण और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के जरिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भारत के रेल मंत्रालय की ओर से इस निवेश योजना पर कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं आई है।

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में जर्जर इमारत गिरने से 9 लोगों की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार रात चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और आशंका है कि मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं। फिलहाल, अभी बचाव कार्य जारी है और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमें और स्थानीय पुलिस मौके पर मौजूद हैं।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत का बड़ा हिस्सा उस समय गिरा जब वहां काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कमजोर और खराब हालत के कारण इमारत को पहले ही खाली करा लिया गया था, लेकिन आशंका है कि कुछ मजदूर हादसे के समय अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए।

NDRF की टीम ने शुरुआत में मलबे से एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने का काम लगातार जारी है।

अधिकारी खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि मलबे के नीचे और भी लोग दबे हो सकते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की बात कही गई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया, यह संख्या 9 तक पहुंच गई।

देवेंद्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया

अब इस घटना पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तुरंत FIR दर्ज करने और सक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने ‘X’ पर एक ट्वीट में कहा, “भिवंडी में इमारत गिरने से हुई लोगों की मौत की घटना बेहद दुखद है। मैं उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। हम इन परिवारों के दुख में शामिल हैं। म्युनिसिपल कमिश्नर को इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। घायलों का इलाज किया जा रहा है। मैं ईश्वर से उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।”

पीएम मोदी ने मुआवजे का किया ऐलान

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हों।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल्डिंग की पहचान कोहिनूर अपार्टमेंट के तौर पर हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के नगर निगम ने इसे पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया था।

शहर के मेयर नारायण चौधरी ने कहा, “भिवंडी में ऐसी कई इमारतें हैं जिन्हें खतरनाक घोषित किया गया है। हम फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं ऐसी इमारतों में रहने वाले लोगों को सलाह दूंगा कि वे तुरंत इन्हें खाली कर दें।”

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