रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्द आ रही हैं 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें! अब रात का सफर होगा और आरामदायक

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे और ज्यादा वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करके अपने प्रीमियम लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। लॉन्च के बाद से अभी तक वंदे भारत एक्सप्रेस ज्यादातर दिन में चलने वाली चेयर कार ट्रेन के तौर पर संचालित होती रही है, लेकिन लंबे समय से यात्री रात के सफर के लिए इसके स्लीपर वर्जन की मांग कर रहे थे। वहीं, अब यात्रियों की इस मांग को पूरा करने के लिए चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 24 कोच होंगे। उम्मीद है कि नए ट्रेनसेट से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ेगी और पूरे भारत में लंबी दूरी के और रूट पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने में मदद मिलेगी।

यह कदम भारतीय रेलवे की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसका मकसद रात भर और इंटरसिटी यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज, ज्यादा आरामदायक और आधुनिक यात्रा के विकल्प देना है। इस प्रस्तावित विस्तार के साथ, उम्मीद है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें देश के प्रीमियम रेल यात्रा सेगमेंट में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

ICF के जनरल मैनेजर मनीष अग्रवाल के अनुसार, देश में बनी 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग पूरी हो गई हैं। इन डिजाइनों में कोच का स्ट्रक्चर, कोच को जोड़ने वाले सिस्टम और उनके नीचे लगाए जाने वाले उपकरण शामिल हैं।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के बारे में मुख्य बातें

  • 50 ट्रेनसेट की योजना: ICF चेन्नई 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी।
  • हर ट्रेन में 24 कोच: आने वाले ट्रेनसेट में 24 कोच होंगे, जबकि अभी चल रही स्लीपर ट्रेन में 16 कोच हैं।
  • ज्यादा यात्री क्षमता: उम्मीद है कि 24 कोच वाली ट्रेन में 16 कोच वाली ट्रेन के मुकाबले लगभग 1.5 गुना ज्यादा यात्री यात्रा कर सकेंगे।
  • प्रोडक्शन के लिए डिजाइन तैयार: कोच के स्ट्रक्चर, कोच कनेक्शन और अंडरफ्रेम इक्विपमेंट से जुड़े डिजाइन पूरे हो चुके हैं।
  • और रूटों पर चलने की उम्मीद: अतिरिक्त ट्रेनसेट से रेलवे को लंबी दूरी के और रूटों पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने पर विचार करने में मदद मिलेगी।
  • लंबी यात्राओं के लिए डिजाइन: स्लीपर सुविधा का मकसद रात भर और लंबी दूरी की यात्रा के लिए तेज़ और ज्यादा आरामदायक विकल्प देना है।
  • कोच की संख्या अभी तय नहीं: भारतीय रेलवे ने अभी तक कोच की अंतिम संख्या के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, हालांकि खबरों के मुताबिक 24-कोच वाली ट्रेनसेट में 17 AC 3-टियर कोच, पांच AC 2-टियर कोच, एक AC फर्स्ट क्लास कोच और एक पैंट्री कार हो सकती है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी

अभी देश में चलने वाली वंदे भारत स्लीपर सर्विस हावड़ा और कामाख्या के बीच चलती है। मौजूदा ट्रेन में 11 थर्ड AC कोच, चार सेकंड AC कोच और एक फर्स्ट AC कोच है।

24 कोच वाली प्रस्तावित ट्रेनों से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। हालांकि, रेलवे ने अभी तक इन नई ट्रेनों में कोच के अंतिम कॉम्बिनेशन की घोषणा नहीं की है।

बता दें कि यह कदम लंबी दूरी के यात्रियों के लिए तेज और ज्यादा आरामदायक ट्रेनें उपलब्ध कराने की रेलवे की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

अमृत ​​भारत एक्सप्रेस 3.0 के बारे में भी अपडेट आया है

ICF ने अगली पीढ़ी की अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के बारे में भी जानकारी दी है। उम्मीद है कि अमृत भारत 3.0 में AC, जनरल और स्लीपर क्लास के कोच होंगे। इससे यात्रियों को बेहतर आराम के साथ यात्रा का एक और सस्ता विकल्प मिलेगा।

हालांकि, अभी चल रही अमृत भारत ट्रेनों में मुख्य रूप से जनरल और स्लीपर कोच हैं। अगली पीढ़ी की ट्रेनों में AC कोच जोड़ने से और भी ज्यादा यात्री इन ट्रेनों का फायदा उठा सकेंगे। ICF में हो रही ताजा गतिविधियों से पता चलता है कि वंदे भारत स्लीपर और अगली पीढ़ी की अमृत भारत ट्रेनों के प्रोडक्शन की प्लानिंग आगे बढ़ रही है।

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7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस को रेलवे ने दी मंजूरी! इन शहरों को जोड़ेंगी ट्रेनें, देखें पूरी रूट लिस्ट

भारतीय रेलवे ने देश में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सात नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने की मंजूरी दी है। इन ट्रेनों का मुख्य उद्देश्य कम और मध्यम आय वाले यात्रियों को कम किराए में आरामदायक सफर की सुविधा देना है। इन ट्रेनों का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में कम रखा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लंबी दूरी की यात्रा आसानी से कर सकें।

नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई शहरों को आपस में जोड़ेंगी। इन ट्रेनों के कई रूट लंबी दूरी के होंगे और रास्ते में कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया जाएगा। प्रस्तावित सात ट्रेनों और उनके निर्धारित स्टॉप की जानकारी इस प्रकार है:

धनबाद-कोयंबटूर अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने धनबाद और कोयंबटूर के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के नंबर 22363/22364 होंगे। यह ट्रेन झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई प्रमुख शहरों को जोड़ेगी।

धनबाद से चलने वाली यह ट्रेन गोमो, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा, गया, अनुग्रह नारायण रोड, डेहरी ऑन सोन, सासाराम, भभुआ रोड, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, मिर्जापुर और प्रयागराज छिवकी जैसे स्टेशनों पर रुकेगी।

इसके बाद ट्रेन कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंद्रपुर, बल्हारशाह, सिरपुर कागजनगर, मंचेरियल, पेद्दापल्ली, वारंगल, महबूबाबाद, खम्मम और विजयवाड़ा होते हुए आगे बढ़ेगी।

दक्षिण भारत में इसके ठहराव ओंगोल, नेल्लोर, गुडूर, रेनिगुंटा, तिरुत्तानी, काटपाडी, जोलारपेट्टई, सलेम, इरोड और तिरुपुर में होंगे। इसके बाद ट्रेन अपने अंतिम गंतव्य कोयंबटूर पहुंचेगी।

प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज और लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को भी मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के नंबर 20436/20435 होंगे। यह ट्रेन सप्ताह में एक दिन चलेगी और रास्ते में प्रयागराज, सतना, जबलपुर, इटारसी, भुसावल और कल्याण स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ेगी।

सूबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेल मंत्रालय ने सूबेदारगंज और लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के नंबर 14121/14122 होंगे और यह सप्ताह में एक दिन चलेगी।

यह ट्रेन सूबेदारगंज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, खंडवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण और ठाणे स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन के शुरू होने से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सफर करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी।

गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर और दिल्ली के बीच भी नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दी है। इस ट्रेन के नंबर 15095/15096 होंगे और यह सप्ताह में एक दिन चलेगी।

गोरखपुर से दिल्ली के बीच चलने वाली यह ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बुढ़वल, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली स्टेशनों पर रुकेगी। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को दिल्ली आने-जाने के लिए एक और सुविधाजनक रेल सेवा मिल सकेगी।

प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज और उधना के बीच भी एक नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने की मंजूरी दी है। इस ट्रेन के नंबर 20437/20438 होंगे और यह भी सप्ताह में एक दिन चलेगी।

यह ट्रेन प्रयागराज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बयाना, हिंडौन सिटी, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, कोटा, रामगंज मंडी, भवानी मंडी, रतलाम, वडोदरा और उधना स्टेशनों पर रुकेगी। इससे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई शहरों के बीच रेल यात्रा आसान होगी।

गोरखपुर-बांद्रा अमृत भारत एक्सप्रेस

एक अन्य  साप्ताहिक ट्रेन गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 15085/15086) है।

ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा किला, बयाना, गंगापुर सिटी, कोटा, भवानी मंडी, शामगढ़, रतलाम, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी, पालघर, बोरीवली और बांद्रा टर्मिनस पर रुकेगी।

चरलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस

सातवीं ट्रेन चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22075/22076) है।

यह प्रस्तावित सर्विस चार्लापल्ली, काज़ीपेट, पेड्डापल्ली, मंचिरयाल, बल्हारशाह, चंद्रपुर, नागपुर, बैतूल, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, पोखरायां, कानपुर सेंट्रल, ऐशबाग, लखनऊ सिटी, गोमतीनगर, बाराबंकी, गोंडा और गोरखपुर में रुकेगी।

ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Mumbai Local Train update: मुंबईकरों के लिए खुशखबरी! अब दौड़ेगी वंदे मेट्रो AC लोकल ट्रेन, जानें कब तक तैयार हो जाएगी ये पूरी फ्लीट

Mumbai Local Train update: मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई को जल्द ही 238 नई वंदे मेट्रो एसी लोकल ट्रेनें (2856 कोच) मिलने जा रही हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन ने ऐलान किया है कि इन नई एसी लोकल ट्रेनों को भारतीय रेलवे की ही तीन अलग-अलग प्रोडक्शन यूनिट में तैयार किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एमआरवीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विलास वाडेकर ने बताया है कि रेलवे की तीन मैन्युफैक्चरिंग सर्विस में बनने वाली पहली 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेन 2027 में मिल जाएगी जबकि 238 ट्रेनों की पूरी फ्लीट 2030 तक उपलब्ध करा दी जाएगी।

19,293 करोड़ रुपये की लागत आएगी

एमआरवीसी के मुताबिक मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MUTP) 3 के तहत खरीदी जा रही इन 238 वंदे मेट्रो उपनगरीय ट्रेनों (2,856 कोच) के रोलिंग-स्टॉक की अनुमानित लागत 19293 करोड़ रुपये है। इन 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेनों का निर्माण रेलवे की तीन प्रमुख इकाइयों इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में किया जाएगा।

पहले इन ट्रेनों को निजी या विदेशी कंपनियों के माध्यम से खरीदने और उनके जीवनकाल के रखरखाव के लिए इंटरनेशनल टेंडर मंगाए गए। इसे लेकर मन लायक रिस्पॉन्स नहीं मिलने की वजह से सरकार ने इसे अपने कारखानों में बनाने का फैसला लिया है।

अंतरराष्ट्रीय टेंडर में आ रही थीं दिक्कतें, रेल मंत्री ने बताया नया प्लान

प्रक्रिया में हुए बदलाव को लेकर बुधवार शाम जारी एक वीडियो संदेश में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पुरानी खरीद प्रक्रिया में कई समस्याएं थीं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने अब इन ट्रेनों का निर्माण अपनी खुद की तीन उत्पादन इकाइयों में करने का निर्णय लिया है। रेल मंत्री ने कहा कि पुरानी योजना के तहत पूरी खरीद 2030 में जाकर पूरी होने वाली थी, जो हमें कतई स्वीकार्य नहीं थी। इसीलिए आज यह नया फैसला लिया गया है कि इनका उत्पादन भारत सरकार की तीन उत्पादन इकाइयों ICF, RCF और MCF में किया जाएगा, ताकि पहली लोकल ट्रेन 2027 तक हर हाल में पटरी पर आ जाए।

एमआरवीसी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, पुरानी खरीद प्रक्रिया के तहत अगर काम होता तो सीरीज प्रोडक्शन शुरू होने में ही करीब तीन साल लग जाते। इस वजह से पहली ट्रेन 2030 में मिलती और पूरी फ्लीट 2034 तक जाकर तैयार हो पाती। जून 2023 में एमआरवीसी ने 238 एसी लोकल ट्रेनों की खरीद और उनके 35 वर्षों के रखरखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय बोलियां आमंत्रित की थीं। मई 2023 में रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी इस टेंडर में दो साल का समय प्रोटोटाइप ट्रेन बनाने के लिए और उसके बाद औसतन 50 ट्रेनें प्रति वर्ष की दर से पांच साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

सफल बोलीदाता को पालघर जिले के वणगांव और रायगढ़ जिले के भिवपुरी में नए रखरखाव डिपो स्थापित करने, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और 35 वर्षों के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने की शर्त रखी गई थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर 22000 करोड़ का निवेश, सफर होगा आरामदायक

एमआरवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए संशोधित विनिर्माण कार्यक्रम से इन एसी ट्रेनों को मुंबई रेल नेटवर्क के नए कॉरिडोर और क्षमता विस्तार कार्यों के शुरू होने के साथ ही पटरी पर उतारा जा सकेगा। क्षमता विस्तार कार्यों में लगभग ₹22,000 करोड़ का भारी निवेश किया जा रहा है। इसमें नए कॉरिडोर बनाना, अतिरिक्त रेलवे लाइनें बिछाना, 15-कोच वाली ट्रेनों को चलाने के लिए प्लेटफॉर्मों की लंबाई बढ़ाना, यार्डों का पुनर्गठन करना और नेटवर्क को मजबूत करने वाले कई काम शामिल हैं।

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Viral Post: RAC टिकट वाली महिला ने सीट खाली करने से किया मना, दर्ज की शिकायत, फिर..

भारतीय रेलवे से हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं। वहीं सफर के लिए हर यात्री को टिकट लेना जरूरी होता है। इसके बावजूद कई यात्री अक्सर बिना टिकट ट्रेन में सफर करते पकड़े जाते हैं। वहीं हाल ही में एक यात्री ने ट्रेन में सफर के दौरान हुई परेशानी का एक्सपीरिएंश शेयर किया। जहां एक महिला किसी दूसरे यात्री की आरक्षित सीट पर बैठी नजर आई। यात्री के मुताबिक, महिला के पास RAC टिकट था, लेकिन उसने उसकी कन्फर्म सीट पर बैठकर उसे खाली करने से इनकार कर दिया। यात्री ने महिला को बताया कि सीट उसके नाम पर रिजर्व है, फिर भी महिला अपनी जगह से नहीं हटी। इस वजह से दोनों के बीच असहज स्थिति बन गई और यात्री काफी परेशान हो गया।

महिला ने सीट छोड़ने से किया मना

X पर अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए संजू चौधरी ने इस स्थिति को “इंडियन रेलवे का पीक” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई दूसरा यात्री कन्फर्म सीट पर कब्जा कर ले और वहां से हटने से मना कर दे, तो कन्फर्म टिकट बुक करने का क्या फायदा है। उन्होंने कहा, “मेरी रिजर्व सीट पर बैठी एक महिला के पास RAC टिकट है, लेकिन वह मुझे उस सीट पर बैठने से मना कर रही है जो असल में मुझे अलॉट की गई है।”

2.5 घंटे तक नहीं हुआ सामाधान

मामले को और मुश्किल बताते हुए यात्री ने कहा कि उसने पहले ही रेलवे अधिकारियों से शिकायत कर दी थी, लेकिन करीब ढाई घंटे बीतने के बाद भी उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। उसने कहा, “2.5 घंटे पहले कंप्लेंट की गई थी। अभी भी कोई सॉल्यूशन नहीं।” यात्री ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, “तो कन्फर्म सीट बुक करने का क्या मतलब है अगर RAC टिकट वाला कोई व्यक्ति बस उस पर कब्जा कर सकता है और हिलने से मना कर सकता है?” पैसेंजर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “बेसिक सॉल्यूशन के लिए 2.5 घंटे इंतजार करना पड़ा। बिल्कुल बेकार” और इस मामले में संबंधित अधिकारियों को भी टैग किया।

रेलवे ने दिया ध्यान

इसके बाद रेलवे सेवा ने मामले का संज्ञान लिया और यात्री से जरूरी जानकारी शेयर करने को कहा, ताकि शिकायत की जांच की जा सके। लेकिन, चौधरी ने जवाब देते हुए कहा, “आपका TTE आया और कहा कि मुझे उस व्यक्ति से कॉम्प्रोमाइज करना होगा क्योंकि RAC दो सदस्यों को अलॉट किया गया है और मुझे अपनी पूरी यात्रा सोकर करनी होगी।” इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा होने लगी।

लोगों ने किया कमेंट

कई यूजर्स ने रेलवे अधिकारियों से ऐसे मामलों में तुरंत दखल देने और उचित कार्रवाई करने की मांग की। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “बहुत बेकार, आप लोग कोई एक्शन क्यों नहीं ले रहे हैं? रिजर्वेशन नॉन-रिजर्वेशन हो गया है??” एक अन्य यूजर ने लिखा, “भाई बिल्कुल फ्रस्ट्रेट होने वाली बात है। पैसे देकर कन्फर्म टिकट लिया और फिर भी यह नाटक। रेलवे को इस पर सीरियस एक्शन लेना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “सीरियसली, यह खुद के पैसे/टिकट पे मज़ाकिया है। आखिर में सॉल्यूशन यह होगा कि एडजस्ट कर लो, वो लोग दो लोग हैं।”

ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका

Indian Railways Reservation System: इंडियन रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए रिजर्वेशन को तेज एवं सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) शुरू करने जा रहा है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित PRS लगभग चार दशकों से रेलवे रिजर्वेशन की रीढ़ रहा है। 1986 में शुरू किए गए इस सिस्टम ने पुराने मैनुअल रिजर्वेशन सिस्टम की जगह ली थी।

तब से यह ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने के लिए विकसित हुआ है। मई में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने घोषणा की थी कि 40 साल पुराने PRS (Passenger Reservation System) सिस्टम को अगस्त से शुरू करके चरणों में अपग्रेड किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग, सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC और यात्रियों की पूछताछ से जुड़ी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि नया PRS मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सकेगा। रेलवे के मुताबिक, नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा।

जबकि मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। इसी सिस्टम के जरिए टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और यात्रियों की पूछताछ जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। अब रेलवे इस पुराने सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले PRS से बदलने की तैयारी कर रहा है।

भारी ट्रैफिक को संभालने की क्षमता

तत्काल टिकट के समय IRCTC वेबसाइट पर अचानक बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम हो सकता है। Indianexpress.com से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पब्लिक रिलेशंस (PR) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि नए सिस्टम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च की गई IRCTC बीटा वेबसाइट इसी बदलाव का हिस्सा है।

अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा। पुराने PRS को पूरी तरह से बदलने से पहले नए सिस्टम का अलग-अलग यूजर लोड स्तरों पर चरणों में टेस्ट किया जाएगा। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नए यूजर-फ्रेंडली लुक और फील को चरण-दर-चरण लागू करने में लोड-आधारित टे्ट शामिल होगा, क्योंकि हम पुराने PRS से नए PRS की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारतीय रेलवे में अभी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम क्या है?

PRS एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसका उपयोग भारतीय रेलवे रिजर्व-टिकटों के मैनेज के लिए करता है। यह यात्रियों को टिकट बुक करने, बदलने और रद्द करने की सुविधा देता है। साथ ही सीट आवंटन, वेटलिस्ट, RAC स्टेटस, रिजर्वेशन चार्ट और यात्री पूछताछ को भी संभालता है। यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन सेंटरों को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इससे टिकट रिजर्वेशन की प्रक्रिया आसान और अधिक कुशल हो जाती है।

PRS ने रेलवे टिकट बुकिंग को कैसे बदला?

PRS ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ले लिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ। यह एक राष्ट्रव्यापी रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म बन गया। इससे यात्री कंट्री-वाइड नेटवर्क फॉर कंप्यूटराइज्ड एन्हांस्ड रिजर्वेशन एंड टिकटिंग (CONCERT) के माध्यम से देश भर में अलग-अलग जगहों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।

फिलहाल यात्री रेलवे रिजर्वेशन काउंटर, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से रिजर्वेशन कर सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ-साथ RailOne ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इससे यात्री कहीं से भी टिकट बुक कर सकते हैं।

अगस्त से शुरू हुआ बदलाव, धीरे-धीरे होगा पूरा माइग्रेशन

रेलवे ने मई में घोषणा की थी कि करीब चार दशक पुराने PRS को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। इसका काम अगस्त से शुरू किया जाएगा। धर्मेंद्र तिवारी के मुताबिक, नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू हो चुका है। रेलवे इसे एक साथ पूरी तरह बदलने के बजाय धीरे-धीरे और अलग-अलग चरणों में लागू कर रहा है।

पहले नए सिस्टम को अलग-अलग स्तर के यूजर लोड पर टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जैसे-जैसे सिस्टम स्थिर और सक्षम साबित होगा। फिर पुराने PRS से नए PRS की ओर माइग्रेशन बढ़ाया जाएगा। रेलवे के मुताबिक, नए सिस्टम के यूजर इंटरफेस और सुविधाओं को भी धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा रहा है।

तत्काल टिकट वालों को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग को लेकर होती है। टिकट विंडो खुलते ही लाखों लोग एक साथ बुकिंग की कोशिश करते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट या ऐप पर दबाव बढ़ जाता है। IRCTC के अनुसार, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला।

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल टिकट बुकिंग में 5 प्रतशित से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

प्रति मिनट 1.5 लाख की होगी बुकिंग

रेल मंत्रालय के अनुसार, अपग्रेड किया गया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। जबकि मौजूदा सिस्टम में यह क्षमता लगभग 32,000 टिकट की है। यह प्रति मिनट 40 लाख से ज्यादा पूछताछ को भी प्रोसेस करेगा। जबकि अभी यह संख्या लगभग 4 लाख है। नए सिस्टम में टिकट बुकिंग और पूछताछ के लिए कई भाषाओं वाला और इस्तेमाल में आसान इंटरफेस होगा। इसे रेलवे रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा स्केलेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता होगी

रेल मंत्रालय के अनुसार:-

मौजूदा PRS: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट क्षमता है।

नया PRS: 1.5 लाख से ज्यादा टिकट काटने की प्रति मिनट क्षमता होगी।

मौजूदा पूछताछ क्षमता: करीब 4 लाख प्रति मिनट होगी।

नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से ज्यादा प्रति मिनट होगी।

इसका मतलब है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन, सीट और रिजर्वेशन से जुड़ी बड़ी संख्या में यात्रियों की पूछताछ भी एक साथ संभाल सकेगा।

देशभर में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का दबाव कितना बढ़ गया है?

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए गए। इससे साफ है कि रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में पुराने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

नई व्यवस्था में मिलेगा ज्यादा आसान और मल्टी-लैंग्वेज इंटरफेस

नए PRS में यात्रियों के लिए ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस देने की तैयारी है। यानी टिकट बुकिंग और पूछताछ को ज्यादा आसान बनाने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। नए सिस्टम को ज्यादा स्केलेबल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ने पर भी सिस्टम पर अचानक अत्यधिक दबाव न पड़े।

सिर्फ PRS ही नहीं, रेलवे का पूरा डिजिटल नेटवर्क हो रहा आधुनिक

CRIS ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें UTS, NTES, IRCTC Rail Connect, RailOne, RailMadad, CoachMitra, Rail Sugam और Rail Rajbhasha शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और रेलवे से जुड़ी कई अन्य रेलवे से जुड़ी सर्विस मिलती हैं। नए PRS और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर टेक्नोलॉजी के तालमेल से रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

40 साल पुराने सिस्टम से Next-Generation PRS तक

भारतीय रेलवे का PRS चार दशक पहले मैनुअल रिजर्वेशन की जगह इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग व्यवस्था लेकर आया था। अब वही सिस्टम एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अगर चरणबद्ध तरीके से हो रहा यह माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में ट्रेन टिकट बुकिंग ज्यादा तेज, ज्यादा स्थिर और ज्यादा डिजिटल हो सकती है। यानी रेलवे के इस बदलाव का असली असर सिर्फ वेबसाइट की स्पीड पर नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के टिकट बुकिंग अनुभव पर दिखाई दे सकता है।

रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों ने जून 2025 और जून 2026 के बीच PRS के ज़रिए 65.08 करोड़ रिजर्व्ड टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (यानी 89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। IRCTC ने कहा कि 15 जुलाई को अपनी बीटा वेबसाइट लॉन्च करने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार हुआ है।

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महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े (15-15 दिन के समय) की तुलना करने पर पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। पांच मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में आयोजित 7वें अंतर्राष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में भाग लेते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगा वॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य नवकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण तथा हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। म.प्र. आज देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में शामिल होने के लिए एयरपोर्ट से दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के माध्यम से शिवाजी स्टेडियम तक यात्रा कर स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दिया। दिल्ली मेट्रो अपने संचालन में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उपयोग करती है, इसलिए मुख्यमंत्री ने हरित ऊर्जा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में मेट्रो से यात्रा की।

 

मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का दिया प्रेजेंटेशन-नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 में मध्यप्रदेश ने स्वच्छ एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की कार्य योजना का प्रभावी प्रेजेंटेशन दिया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी तथा भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री एच.ई. ल्योनपो जेम त्शेरिंग तथा श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलका, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा म.प्र.  मनु श्रीवास्तव सहित देश-विदेश के ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में निवेश-अनुकूल नीतियों, सुदृढ़ आधारभूत संरचना और पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार, निवेश और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। यह आयोजन स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने तथा सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावॉट से बढ़कर 11,000 मेगावाट हो गई है, जो लगभग 25 गुना वृद्धि है। पिछले 2 वर्षों में राज्य सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण तथा बायोमास नीतियां लागू कर निवेश और नवाचार को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि 750 मेगावाट रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना ने देश में पहली बार सौर ऊर्जा का टैरिफ कोयला आधारित विद्युत से भी कम स्थापित किया। इस परियोजना को वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेन्ट्स अवार्ड फॉर एक्सीलेंस प्राप्त हुआ तथा इसकी केस स्टडी हावर्ड युनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है। वहीं 1,500 मेगावाट आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रूपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर टैरिफ प्राप्त हुआ है और इससे भारतीय रेलवे को 8 राज्यों में हरित ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 278 मेगावॉट क्षमता की देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इसके साथ ही 'सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना' के अंतर्गत लगभग 14,900 मेगावॉट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें किसानों और एमएसएमई क्षेत्र की उल्लेखनीय भागीदारी रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने के लिए राज्य में बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। मुरैना की 440 मेगावाट सौर ऊर्जा एवं 880 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें प्रतिस्पर्धी दर पर विद्युत क्रय अनुबंध किए गए हैं। साथ ही 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे की सौर-सह-ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रूफटॉप सोलर योजना अंतर्गत 1,300 शासकीय भवनों पर 48 मेगावाट क्षमता विकसित की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश के लगभग 1.5 लाख घरों में 566 मेगावॉट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, हरित ऊर्जा की अपार संभावनाओं और औद्योगिक क्षमताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनेगा।

 

केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश जल्द ही 300 GW स्थापित गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार करेगा तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना से 50 लाख से अधिक परिवार रूफटॉप सोलर का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों ने नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सभी राज्यों से सस्टेनेबल डेवलपमेंट, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

 

प्रेजेंटेशन के मुख्य बिन्दु

4 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण : ऐसी परियोजनाएँ जो सौर ऊर्जा को संग्रहित कर सायंकालीन पीक मांग के समय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं तथा ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं।

6 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण : ये परियोजनाएँ अधिक अवधि तक ऊर्जा आपूर्ति प्रदान कर नवकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण, मांग प्रबंधन एवं ग्रिड स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण परियोजनाएँ : सौर ऊर्जा एवं दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण के संयोजन से विकसित ये परियोजनाएँ चौबीसों घंटे स्वच्छ एवं विश्वसनीय विद्युत उपलब्ध कराने में सक्षम हैं, जिससे उद्योगों, वितरण कंपनियों तथा डेटा सेंटर जैसे उच्च मांग वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त होगी।

एनआरईडी  की भूमिका : नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्य प्रदेश शासन राज्य में नवकरणीय ऊर्जा नीति निर्माण, निवेश प्रोत्साहन, परियोजना विकास तथा ऊर्जा संक्रमण से संबंधित कार्यक्रमों के समन्वय हेतु प्रमुख विभाग है। विभाग प्रदेश को स्वच्छ, सुरक्षित एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए कार्यरत है।

रूम्सल की भूमिका : रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड, मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड एवं सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) का संयुक्त उपक्रम है। रूम्सल राज्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर, हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। रूम्सल द्वारा विकसित नवाचार आधारित परियोजनाएँ मध्य प्रदेश को देश में ऊर्जा भंडारण एवं चौबीसों घंटे नवकरणीय ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रही हैं।

RAC यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब AC कोच में मिलेगी पूरी बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किया निर्देश

ट्रेन के एसी कोच में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। रेल मंत्रालय ने एसी कोच में RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को लेकर नया निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन से कहा कि, RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को भी यात्रा के दौरान पूरी बेडरोल किट, यानी चादर, कंबल और तकिया समेत सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाए। ये फैसला लगातार मिल रही शिकायतों के बाद दोबारा स्पष्ट किया गया है, ताकि RAC यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

रेल मंत्रालय ने बताया कि, उसे लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि RAC टिकट पर सफर करने वाले कई यात्रियों को चादर, कंबल और तकिया जैसी बेडरोल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं या पूरी किट उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। RAC में दो यात्रियों को एक ही बर्थ पर यात्रा करनी पड़ती है, जब तक उन्हें कन्फर्म बर्थ नहीं मिल जाती।

RAC यात्रियों को मिले बेडरोल

रेल मंत्रालय ने साफ किया कि, एसी चेयर कार को छोड़कर सभी एसी कोच में RAC टिकट पर सफर करने वाले हर यात्री को भी अन्य कन्फर्म यात्रियों की तरह पूरी बेडरोल किट दी जाए। मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया कि, इस नियम का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी यात्री को असुविधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों को निर्देश दिया कि, मौजूदा नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। मंत्रालय ने कहा कि, एसी कोच में यात्रा करने वाले सभी पात्र RAC यात्रियों को बिना किसी भेदभाव के चादर, कंबल और अन्य बेडरोल का सामान उपलब्ध कराया जाए, ताकि सभी को समान सुविधा मिल सके।

बेड ना मिलने पर किससे करे शिकायत

रेलवे का कहा कि, नए निर्देशों का उद्देश्य ये सुनिश्चित करना कि RAC यात्रियों को भी यात्रा के दौरान पूरी बेडरोल सुविधा मिले और उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो। अगर RAC टिकट पर एसी कोच में सफर के दौरान आपको चादर, कंबल या तकिया नहीं मिलता है, तो सबसे पहले कोच अटेंडेंट या टीटीई से इसकी मांग करें। यदि इसके बाद भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो आप रेलवे के शिकायत पोर्टल या हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।