Stocks to Watch: सोमवार 27 जुलाई को फोकस में रहेंगे 27 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: सोमवार के कारोबारी सत्र में कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी। कई कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जबकि कुछ को बड़े ऑर्डर मिले हैं और कुछ ने नए निवेश का ऐलान किया है। ऐसे में इन खबरों का असर सोमवार को इन शेयरों की चाल पर दिख सकता है। आइए जानते हैं किन 27 स्टॉक्स पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा।

Bank of Baroda

सरकारी बैंक Bank of Baroda का जून तिमाही का मुनाफा 81% गिरकर ₹1,278 करोड़ रह गया। यह CNBC-TV18 के अनुमान से भी काफी कम रहा। NMC मुकदमे के निपटारे से जुड़े ₹5,680 करोड़ के एकमुश्त नुकसान का असर नतीजों पर पड़ा। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 10% बढ़कर ₹12,525 करोड़ रही। वहीं, एसेट क्वालिटी में मामूली गिरावट आई।

NTPC

सरकारी बिजली कंपनी NTPC का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 11.9% बढ़कर ₹5,342.4 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹4,774 करोड़ का मुनाफा कमाया था। कंपनी ने तिमाही के दौरान स्थिर प्रदर्शन दर्ज किया।

IDFC First Bank

प्राइवेट सेक्टर बैंक IDFC First Bank का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹1,075 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 21.1% बढ़कर ₹5,972.3 करोड़ रही। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA घटकर 1.51% और नेट NPA 0.44% रह गया, जबकि प्रोविजन घटकर ₹1,144 करोड़ हो गया।

SBI Card

फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी SBI Card का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 19.5% बढ़कर ₹664.4 करोड़ हो गया। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) लगभग स्थिर रही। यह मामूली घटकर ₹1,676 करोड़ रह गई, जो पिछले साल ₹1,681 करोड़ थी।

Sarda Energy and Minerals

मेटल और माइनिंग कंपनी Sarda Energy and Minerals की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Sarda Metals & Alloys ने ₹300 करोड़ के कैपेक्स को मंजूरी दी है। यह निवेश वेस्ट हीट रिकवरी पावर प्लांट लगाने और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम स्थित मौजूदा प्लांट में मिनरल वूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर किया जाएगा।

NBCC

सरकारी निर्माण कंपनी NBCC (India) को करीब ₹108.85 करोड़ (GST छोड़कर) के दो नए ऑर्डर मिले हैं। इनमें सबसे बड़ा ₹88.43 करोड़ का ठेका ओडिशा के तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय ने दिया है। इसके तहत राज्य के विभिन्न स्थानों पर लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल बनाए जाएंगे।

Orient Technologies

आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सर्विसेज कंपनी Orient Technologies को NPCI से ₹76.20 करोड़ का सर्वर सप्लाई ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में सर्वर की सप्लाई के साथ 7 साल की वारंटी और OEM सपोर्ट भी शामिल है। कंपनी को यह प्रोजेक्ट 18 हफ्तों में पूरा करना होगा।

Dodla Dairy

डेयरी कंपनी Dodla Dairy का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 35.6% घटकर ₹41 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 19% बढ़कर ₹1,198 करोड़ हो गया। EBITDA 21.4% घटकर ₹65 करोड़ रहा और EBITDA मार्जिन 8.2% से घटकर 5.4% पर आ गया।

Lodha Developers

रियल एस्टेट कंपनी Lodha Developers ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹1,372.1 करोड़ पहुंच गया। रेवेन्यू 43.1% बढ़कर ₹4,997 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA 95.3% उछलकर ₹1,922.4 करोड़ हो गया और मार्जिन बढ़कर 38.5% पहुंच गया।

AU Small Finance Bank

स्मॉल फाइनेंस बैंक AU Small Finance Bank का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 37% बढ़कर ₹796 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 31.8% बढ़कर ₹2,695.5 करोड़ रही। हालांकि, एसेट क्वालिटी में हल्की कमजोरी दिखी। ग्रॉस NPA बढ़कर 2.1% और नेट NPA 0.76% हो गया, जबकि प्रोविजन घटकर ₹371.5 करोड़ रह गया।

Birla Corporation

सीमेंट कंपनी Birla Corporation का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 3.2% घटकर ₹115.7 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 7.8% बढ़कर ₹2,646.5 करोड़ हो गया। EBITDA 1.3% घटकर ₹342.3 करोड़ रहा और EBITDA मार्जिन 14.1% से घटकर 12.9% पर आ गया।

KFin Technologies

फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और रजिस्ट्रार सर्विसेज कंपनी KFin Technologies के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 2.6% घटकर ₹75.2 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 30.1% बढ़कर ₹356.5 करोड़ हो गया। EBITDA बढ़ा, लेकिन EBITDA मार्जिन 41.5% से घटकर 34.2% रह गया।

Jindal Steel

स्टील कंपनी Jindal Steel का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 43.6% घटकर ₹844 करोड़ रह गया। यह बाजार के अनुमान से भी कमजोर रहा। हालांकि, रेवेन्यू 25.9% बढ़कर ₹15,482 करोड़ पहुंच गया। EBITDA में 11.5% की गिरावट आई और मार्जिन घटकर 17.18% रह गया।

Tata Consumer Products

टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Consumer Products का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 27.8% बढ़कर ₹427 करोड़ हो गया। यह बाजार के अनुमान से बेहतर रहा। रेवेन्यू 11.9% बढ़कर ₹5,348.8 करोड़ पहुंचा। EBITDA 19.9% बढ़ा और मार्जिन 13.5% हो गया। भारत में ब्रांडेड कारोबार की वॉल्यूम ग्रोथ 13% रही।

Vedant Fashions

एथनिक वियर कंपनी Vedant Fashions का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 14.7% बढ़कर ₹80.6 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 7.2% बढ़कर ₹301.4 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA 8.6% बढ़कर ₹131 करोड़ पहुंच गया और EBITDA मार्जिन 42.9% से बढ़कर 43.5% हो गया।

Hirect

रेलवे और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी Hirect को भारतीय रेलवे की Modern Coach Factory (MCF) से करीब ₹60 करोड़ का पहला ऑर्डर मिला है। कंपनी चार MEMU ट्रेनसेट के लिए प्रोपल्शन सिस्टम की सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर 24 महीने में पूरा किया जाएगा और इसके साथ कंपनी ने MEMU प्रोपल्शन सेगमेंट में एंट्री कर ली है।

Devyani International

क्विक सर्विस रेस्तरां (QSR) कंपनी Devyani International के मुताबिक, उसके फ्रेंचाइजी ब्रांड Costa Coffee के भारत में स्टोर्स की संख्या FY26 में घटकर 198 रह गई, जो एक साल पहले 220 थी। हालांकि, स्टोर घटने के बावजूद Costa Coffee का रेवेन्यू 7% बढ़कर ₹212.5 करोड़ हो गया।

Five Star Business Finance

एनबीएफसी कंपनी Five Star Business Finance का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 2% बढ़कर ₹271.4 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 10.2% बढ़कर ₹636.1 करोड़ रही। वहीं, कुल आय 6% बढ़कर ₹839 करोड़ और प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 2% बढ़कर ₹362 करोड़ हो गया।

CONCOR

सरकारी लॉजिस्टिक्स और रेल माल ढुलाई कंपनी CONCOR का शुद्ध मुनाफा लगभग स्थिर रहा। यह ₹266.5 करोड़ पर रहा। रेवेन्यू 0.3% बढ़कर ₹2,160 करोड़ हुआ। EBITDA 2.7% बढ़ा और EBITDA मार्जिन 20.1% से बढ़कर 21% हो गया।

Shree Digvijay Cement

सीमेंट कंपनी Shree Digvijay Cement का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 50.5% गिरकर ₹6.8 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 72.1% बढ़कर ₹337.3 करोड़ पहुंच गया। EBITDA बढ़ा, लेकिन EBITDA मार्जिन 12.14% से घटकर 8.66% रह गया।

REC Ltd

सरकारी एनबीएफसी और पावर सेक्टर फाइनेंस कंपनी REC का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 6% घटकर ₹4,192.7 करोड़ रह गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 4% घटकर ₹5,453 करोड़ रही। कंपनी के नतीजे पिछले साल के मुकाबले कमजोर रहे।

Bank of India

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक Bank of India का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 36% बढ़कर ₹3,068 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 13% बढ़कर ₹6,833 करोड़ रही। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA घटकर 1.81% और नेट NPA 0.51% रह गया।

DCB Bank

प्राइवेट सेक्टर बैंक DCB Bank का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 35.6% बढ़कर ₹213.2 करोड़ पहुंच गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.8% बढ़कर ₹684 करोड़ रही। बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ। वहीं, प्रोविजन लगभग आधा होकर ₹57.1 करोड़ रह गया।

Zen Technologies

डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Zen Technologies का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 27.8% घटकर ₹34.4 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 10.5% घटकर ₹141.6 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA 40.2% गिरकर ₹38.7 करोड़ पर आ गया और EBITDA मार्जिन 40.9% से घटकर 27.3% रह गया।

Piramal Pharma

फार्मा कंपनी Piramal Pharma ने अहमदाबाद स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में काम अस्थायी रूप से रोक दिया है। गुजरात में भारी बारिश और जलभराव के चलते एहतियातन यह फैसला लिया गया। कंपनी ने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद परिचालन दोबारा शुरू किया जाएगा।

Zydus Lifesciences

फार्मा कंपनी Zydus Lifesciences ने अहमदाबाद स्थित अपनी कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में काम अस्थायी रूप से रोक दिया है। लगातार भारी बारिश और जलभराव के चलते एहतियातन यह फैसला लिया गया। कंपनी ने कहा कि हालात सामान्य होने पर परिचालन फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

Hindustan Zinc

जिंक और चांदी उत्पादन करने वाली कंपनी Hindustan Zinc चालू वित्त वर्ष में ₹5,000 करोड़ तक का कैपेक्स करने की योजना बना रही है। कंपनी के CEO अरुण मिश्रा के मुताबिक, करीब 80% निवेश पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर होगा। बाकी 20% राशि जल्द घोषित होने वाले नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च की जाएगी।

Q1FY27 Earnings

अलग-अळग सेक्टरों की कंपनियां सोमवार को अपने जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें BKM Industries, Canara Bank, CCL Products (India), Capri Global Capital, Coal India और Coforge जैसी कंपनियां शामिल हैं। निवेशकों की नजर इन कंपनियों के नतीजों पर रहेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vande Bharat चलाने वाले पायलट की सैलरी जानकर रह जाएंगे हैरान, इतनी होती है महीने की कमाई!

वंदे भारत एक्सप्रेस सिर्फ अपनी रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए ही नहीं, बल्कि इसे चलाने वाले लोको पायलटों की जिम्मेदारी और कौशल के लिए भी चर्चा में रहती है। देश की इस प्रीमियम ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए रेलवे अनुभवी और प्रशिक्षित लोको पायलटों का चयन करता है। यात्रियों को समय पर और सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के पीछे इन पायलटों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि जिस ट्रेन को देश की सबसे खास ट्रेनों में गिना जाता है, उसे चलाने वाले लोको पायलट की कमाई कितनी होती है।

उनकी सैलरी सिर्फ बेसिक वेतन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई तरह के भत्तों और सुविधाओं के साथ उनकी मासिक आय काफी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में।

वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी कितनी होती है?

भारतीय रेलवे में वंदे भारत लोको पायलट के लिए अलग से कोई विशेष पे-स्केल तय नहीं है। आमतौर पर इस ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-6 के अनुभवी कर्मचारी होते हैं। इनका बेसिक पे करीब ₹35,400 से शुरू होता है, लेकिन भत्तों और अन्य सुविधाओं को जोड़ने के बाद उनकी कुल आय काफी बढ़ जाती है। अनुभव और पोस्टिंग के आधार पर उनकी बेसिक सैलरी लगभग ₹56,000 से ₹60,000 तक पहुंच सकती है।

भत्तों से बढ़ जाती है लाखों तक कमाई

लोको पायलट की कमाई सिर्फ मूल वेतन तक सीमित नहीं होती। उन्हें कई तरह के सरकारी भत्ते मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • महंगाई भत्ता (DA)
  • मकान किराया भत्ता (HRA)
  • रनिंग अलाउंस
  • नाइट ड्यूटी अलाउंस
  • ट्रांसपोर्ट अलाउंस
  • मेडिकल सुविधाएं और अन्य सरकारी लाभ

इन सभी को मिलाकर वंदे भारत के अनुभवी लोको पायलट की मासिक आय करीब ₹90,000 से ₹1.30 लाख या इससे ज्यादा तक पहुंच सकती है।

वंदे भारत चलाने वालों को ज्यादा सुविधाएं क्यों मिलती हैं?

वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेन चलाना बेहद जिम्मेदारी वाला काम है। लोको पायलट को तेज रफ्तार के दौरान सिग्नल, ट्रैक की स्थिति, मौसम और सुरक्षा नियमों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें रनिंग अलाउंस समेत कई अतिरिक्त लाभ दिए जाते हैं।

कैसे बनते हैं वंदे भारत के लोको पायलट?

कोई भी व्यक्ति सीधे वंदे भारत ट्रेन का ड्राइवर नहीं बन सकता। इसके लिए सबसे पहले रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के जरिए असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद पर चयन होता है। इसके बाद वर्षों का अनुभव, विभागीय प्रमोशन, मेडिकल फिटनेस और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही किसी लोको पायलट को वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन चलाने का मौका मिलता है।

कितनी मुश्किल होती है लोको पायलट की नौकरी?

वंदे भारत के लोको पायलट का काम सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं होता। उन्हें लंबे समय तक सतर्क रहकर ड्यूटी करनी पड़ती है। मौसम चाहे गर्मी का हो, सर्दी का या बारिश का, यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमेशा उनके कंधों पर रहती है। यही कारण है कि रेलवे इस जिम्मेदारी भरे पद के लिए अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को ही चुनता है।

सैलरी के साथ मिलता है सम्मान भी

वंदे भारत ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की कमाई अनुभव, ड्यूटी घंटे, पोस्टिंग और मिलने वाले भत्तों के आधार पर बदलती रहती है। अच्छी सैलरी के साथ यह भारतीय रेलवे की सबसे जिम्मेदार और प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक मानी जाती है।

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Indian Railways: AC कोच में 2 बेडशीट क्यों देता है? जानिए इसके पीछे की असली वजह

भारतीय रेलवे में AC कोच से सफर करने वाले यात्रियों को मिलने वाली बेडरोल किट में कई चीजें शामिल होती हैं, लेकिन एक बात अक्सर लोगों का ध्यान खींचती है दो बेडशीट। ज्यादातर यात्री इसे अतिरिक्त सुविधा मानते हैं, जबकि इसके पीछे एक खास वजह छिपी है। हाल ही में संसद में इस मुद्दे पर सवाल पूछे जाने के बाद रेलवे ने इसकी पूरी जानकारी दी। साथ ही लिनेन की सफाई, कंबलों के इस्तेमाल और यात्रियों की स्वच्छता से जुड़े नियमों पर भी स्थिति स्पष्ट की गई। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि रेलवे सिर्फ सफर को आरामदायक ही नहीं, बल्कि अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए भी कई व्यवस्थाएं अपनाता है।

बेडरोल किट में क्या-क्या मिलता है?

भारतीय रेलवे First AC, Second AC, Third AC और AC Economy में सफर करने वाले यात्रियों को टिकट के साथ बेडरोल किट उपलब्ध कराता है। इसकी अलग से कोई कीमत नहीं ली जाती क्योंकि इसका खर्च टिकट में शामिल होता है।

एक बेडरोल किट में आमतौर पर ये सामान मिलता है

  • 2 बेडशीट
  • 1 तकिए का कवर
  • 1 हैंड टॉवल
  • 1 कंबल

आखिर 2 बेडशीट क्यों दी जाती हैं?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि दोनों बेडशीट का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्य के लिए होता है।

  • पहली बेडशीट सीट या बर्थ पर बिछाने के लिए होती है।
  • दूसरी बेडशीट कंबल के नीचे ओढ़ने से पहले इस्तेमाल की जाती है, ताकि कंबल सीधे यात्री के शरीर के संपर्क में न आए।

उन्होंने बताया कि यह अतिरिक्त बेडशीट स्वच्छता बनाए रखने के लिए दी जाती है और इसे हर इस्तेमाल के बाद धोया जाता है।

कंबल हर बार क्यों नहीं धोए जाते?

संसद में यह सवाल भी पूछा गया कि जब बेडशीट हर यात्रा के बाद धुलती है, तो ऊनी कंबलों को महीने में केवल एक बार ही क्यों साफ किया जाता है।

इसके जवाब में रेलवे ने बताया कि यात्रियों और कंबल के बीच अतिरिक्त बेडशीट का इस्तेमाल करने से सीधे संपर्क से बचाव होता है, जिससे स्वच्छता बेहतर बनी रहती है।

अब AI करेगा लिनेन की जांच

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे ने लिनेन की सफाई की गुणवत्ता जांचने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

  • सभी मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में Whito-Meter से बेडशीट की सफाई जांची जाती है।
  • लॉन्ड्री की निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
  • पुणे, जयपुर और जोधपुर में AI Camera Stain Detection तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है, जिससे बेडशीट पर बचे दाग की पहचान की जा सके।

किन ट्रेनों में शुरू हुई नई व्यवस्था?

रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता बढ़ाने के लिए फिलहाल कुछ ट्रेनों में कंबल कवर उपलब्ध कराने की शुरुआत की है।

यह सुविधा अभी North Western Railway की ट्रेनों और कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है।

कब बदली जाती हैं बेडशीट और कंबल?

रेलवे के तय नियमों के अनुसार अलग-अलग लिनेन की एक निश्चित उपयोग अवधि होती है। समय पूरा होने या खराब होने पर इन्हें बदल दिया जाता है।

तकिए का कवर 9 महीने तक इस्तेमाल किया जाता है।

फेस टॉवल की निर्धारित अवधि भी 9 महीने है।

हैंडलूम बेडशीट को 12 महीने बाद बदल दिया जाता है।

Polyvastra (KVIC) बेडशीट की उपयोग अवधि 24 महीने तय है।

तकिए को 24 महीने तक इस्तेमाल किया जाता है।

वहीं, ऊनी कंबल भी सामान्य तौर पर 24 महीने की निर्धारित अवधि पूरी होने या खराब होने पर बदल दिए जाते हैं।

रेलवे का फोकस अब सफाई और आराम दोनों पर

भारतीय रेलवे का कहना है कि यात्रियों को साफ-सुथरा और सुरक्षित सफर देने के लिए लिनेन की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा रही है। नई तकनीक, नियमित जांच और समय पर लिनेन बदलने जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर स्वच्छता और आराम उपलब्ध कराना है।

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Udhna Station: सूरत के उधना स्टेशन पर बना देश का पहला स्टील सबवे! सिर्फ 8 घंटे में हुआ तैयार, रेलवे ने रचा इतिहास

Udhna Station: भारतीय रेलवे ने इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा काम कर दिखाया है। गुजरात में सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रेलवे पटरियों के नीचे देश का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे बनाने में सफलता हासिल हुई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्टके मुताबिक, पश्चिम रेलवे द्वारा चलाए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को बिल्कुल नई और आधुनिक ट्रैक कट-एंड-कवर तकनीक का इस्तेमाल करके मात्र 8 घंटे के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है।

इस सबवे के बन जाने से अब प्लेटफॉर्म बदलने के लिए पटरियों को पार करने की खतरनाक प्रथा पर लगाम लगेगी और यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार होगा।

कैसे हुआ यह कारनामा? जानिए क्या है ट्रैक Cut-and-Cover तकनीक

पश्चिम रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) पंकज सिंह ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस तकनीक के तहत निर्धारित ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान रेलवे पटरी को काटा जाता है और पटरियों के नीचे की जमीन की खुदाई की जाती है। खुदाई के बाद फैक्ट्री में तैयार स्टील आर्च स्ट्रक्चर को नीचे स्थापित कर दिया जाता है और फिर गड्ढे को भरकर पटरी को तुरंत चालू स्थिति में बहाल कर दिया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड 8 घंटे के भीतर पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया था ताकि ट्रेन संचालन पर कम से कम असर पड़े। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस काम को तय 8 घंटे की विंडो में बिना किसी बड़े ट्रेन प्रभाव के पूरा कर लिया गया।

इस ऑपरेशन के दौरान गुजरात के उधना को महाराष्ट्र के जलगांव से जोड़ने वाली रेलवे पटरियों को अस्थायी रूप से हटाया गया, मिट्टी की खुदाई की गई, प्रीफैब्रिकेटेड स्टील आर्च स्ट्रक्चर को रखा गया और फिर लाइन को तुरंत बहाल कर दिया गया।

कितना बड़ा है यह स्टील सबवे?

पारंपरिक प्रबलित सीमेंट कंक्रीट संरचनाओं की तुलना में इसके निर्माण में काफी कम समय लगा है। इसकी लंबानी करीब 12 मीटर, चौड़ाई 4.8 मीटर और ऊंचाई 2.7 मीटर है। इसमें स्टील आर्च और प्रीकास्ट कंक्रीट नींव का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में तैयार संरचना होने के कारण गुणवत्ता बेहतर रही और ट्रैक ब्लॉक की समयसीमा को न्यूनतम करने में मदद मिली।

उधना स्टेशन पर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

उधना रेलवे स्टेशन पर रोजाना करीब 10000 यात्री आवाजाही करते हैं। त्योहारों के सीजन में यहां यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आता है। इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के दौरान जब बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों को लौटे थे तब उधना स्टेशन पर यात्रियों की संख्या रोजाना 30000 को पार कर गई थी।

पटरियों को पार करके प्लेटफॉर्म बदलना या बाईपास लाइन पर जाना बेहद खतरनाक होता है, खासकर उन जगहों पर जहां मुड़े हुए ट्रैक होते हैं और विजिबिलिटी सीमित होती है। उधना बाईपास लाइन पर भी ऐसी ही खतरनाक स्थिति बनी रहती थी, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती थीं। इसी खतरे को देखते हुए और यात्रियों व कुलियों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म बदलने की सुविधा देने के लिए रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस तकनीक को अपनाया गया।

देश भर के व्यस्त स्टेशनों पर लागू हो सकता है यह मॉडल

पश्चिम रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उधना में इस पायलट प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद अब देश भर के अन्य व्यस्त रेलवे स्टेशनों और रेल सेक्शनों पर भी इस तरह के स्टील सबवे बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। एक बार इस सबवे के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद उधना में बाईपास लाइन पर खतरनाक तरीके से पटरी पार करने की समस्या खत्म हो जाएगी और दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सस्ती है या महंगी? यहां जान लें किराया, टाइमिंग, रूट की पूरी जानकारी

भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन रविवार, 19 जुलाई से हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर नियमित यात्री सेवा शुरू करेगी। यह भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की दिशा में अहम कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। “नमो ग्रीन रेल” थीम पर शुरू की गई इस सेवा का संचालन और रखरखाव उत्तर रेलवे का दिल्ली मंडल करेगा।

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन 19 जुलाई से जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर नियमित व्यावसायिक सेवा शुरू कर देगी।

जींद-सोनीपत के बीच चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद जंक्शन और सोनीपत के बीच चलेगी। इसे ट्रेन नंबर 74010 और 74009 के रूप में चलाया जाएगा। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार की गई यह ट्रेन 89 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में पूरी करेगी। इसकी अधिकतम परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) ट्रेन के रूप में सोमवार से रविवार तक हर दिन सेवा देगी।

इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

यह ट्रेन जींद जंक्शन से सोनीपत के बीच कुल 14 स्टेशनों पर रुकेगी। रास्ते में पांडु पिंडारा सहित कई छोटे स्टेशनों पर भी यात्रियों को सुविधा मिलेगी। ट्रेन जिन स्टेशनों पर रुकेगी, वे हैं— जींद जंक्शन, जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडारी हॉल्ट, गोहाना, राभड़ा हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना हरियाणा, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत।

टिकट का किराया कितना होगा?

जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को सामान्य डीएमयू ट्रेन जितना ही किराया देना होगा। यानी इस ट्रेन के लिए कोई अलग या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। रेलवन (RailOne) मोबाइल ऐप के अनुसार, जींद जंक्शन से जींद सिटी तक सामान्य श्रेणी का टिकट 10 रुपये का है। वहीं, जींद से सोनीपत तक पूरे 89 किलोमीटर के सफर के लिए सामान्य श्रेणी का किराया 25 रुपये रखा गया है। यानी इस हाइड्रोजन ट्रेन में सामान्य श्रेणी का न्यूनतम किराया 10 रुपये और अधिकतम किराया 25 रुपये होगा।

हाइड्रोजन ट्रेन का समय

ट्रेन नंबर 74010 सुबह 7:40 बजे जींद जंक्शन से रवाना होगी और सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन जींद सिटी (7:47 बजे), पांडु पिंडारा (7:55 बजे), ललित खेड़ा हॉल्ट (8:08 बजे), भंभेवा (8:18 बजे), ईशापुर खेड़ी हॉल्ट (8:25 बजे), बुटाना हॉल्ट (8:32 बजे), खंडारी हॉल्ट (8:40 बजे), गोहाना (8:48 बजे), राभड़ा हॉल्ट (8:57 बजे), लाठ हॉल्ट (9:06 बजे), मोहाना हरियाणा (9:15 बजे) और बरवासनी हॉल्ट (9:26 बजे) पर रुकेगी।

वापसी का समय

वापसी में ट्रेन नंबर 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर 1:00 बजे जींद जंक्शन पहुंचेगी। इस दौरान ट्रेन बरवासनी हॉल्ट, मोहाना हरियाणा, लाठ हॉल्ट, राभड़ा हॉल्ट, गोहाना, खंडारी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, ईशापुर खेड़ी हॉल्ट, भंभेवा, ललित खेड़ा हॉल्ट, पांडु पिंडारा और जींद सिटी स्टेशन पर भी रुकेगी। यह नई समय-सारणी 19 जुलाई 2026 से लागू होगी। यह ट्रेन रोजाना चलेगी और इसमें यात्री सामान्य अनारक्षित टिकट लेकर सफर कर सकेंगे।

प्लेटफॉर्म टिकट से भी सस्ता! भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन का किराया जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत ने अपनी पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन शुरू करके ग्रीन रेल ट्रांसपोर्ट के एक नए दौर में कदम रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह सेवा क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी और इंडियन रेलवे नेटवर्क पर सबसे सस्ते टिकट दामों में से एक का मेल है।

नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलने वाली यह ट्रेन भारत को उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल करती है, जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर रेल सर्विस शुरू की है। स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से विकसित इस प्रोजेक्ट का मकसद पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हुए साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है।

लॉन्च के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा ट्रेन के किराए को लेकर हो रही है। कम से कम टिकट की कीमत 5 रुपये तय की गई है। जबकि ज़्यादा से ज़्यादा किराया 25 रुपये है। यह तय की गई दूरी पर निर्भर करता है। उद्घाटन सेवा में यात्रा करने वाले यात्रियों ने भी 5 रुपये वाले टिकट ही खरीदे। इसका शुरुआती किराया कई रेलवे स्टेशनों पर लगने वाले प्लेटफ़ॉर्म टिकट से भी कम है, जिससे यह सेवा भविष्य की तकनीक वाली और सस्ती दोनों बन जाती है।

किराये पर एक नज़र

• कम से कम किराया- ₹5

• ज़्यादा से ज़्यादा किराया- ₹25

• किराया इस पर निर्भर करता है- तय की गई दूरी

रूट, स्टॉप और यात्रियों की क्षमता

हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन जींद जंक्शन और सोनीपत के बीच चलेगी और लगभग दो घंटे में करीब 90 किलोमीटर का सफ़र तय करेगी। इसे ज़्यादा से ज़्यादा 75 किमी/घंटा की रफ़्तार से चलाने की मंज़ूरी मिली है, जबकि इसकी डिज़ाइन स्पीड 110 किमी/घंटा है।

रूट पर पड़ने वाले स्टेशन

•जींद जंक्शन

•जींद सिटी

•पांडु पिंडारा

•ललित खेड़ा हॉल्ट

•भंभेवा

•ईसापुर खेड़ी हॉल्ट

•बुटाना हॉल्ट

•खांडराई हॉल्ट

•राबराह हॉल्ट

•लाठ

•मोहाना

•बरवासनी हॉल्ट

•सोनीपत

10 कोच वाली इस ट्रेन में लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं और उम्मीद है कि यह इस रूट पर रोज़ाना यात्रा करने वालों के काम आएगी।

यह ट्रेन दूसरों से अलग क्यों है?

आम ट्रेनों के उलट, जो डीज़ल इंजन या ऊपर लगे तारों से मिलने वाली बिजली पर चलती हैं, यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल करके खुद ही बिजली बनाती है। फ्यूल सेल के अंदर, हाइड्रोजन ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली बनाती है। इस प्रक्रिया में बाई-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है, जिससे यह ट्रांसपोर्ट का ज़ीरो-एमिशन (बिना प्रदूषण वाला) ज़रिया बन जाता है। इसे चलाने के लिए ज़रूरी हाइड्रोजन की सप्लाई जींद में बने एक खास प्लांट से की जाएगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की मुख्य विशेषताएं

• 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन

• हाइड्रोजन से चलने वाली दो ड्राइविंग पावर कारें

• आठ ट्रेलर कोच और 1,200 kW का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम

• लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता और अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड 75 kmph

• डिज़ाइन स्पीड 110 kmph

• हाइड्रोजन लीक, धुआं, आग और ज़्यादा गर्म होने का पता लगाने के लिए एडवांस्ड सिस्टम

• बिना पारंपरिक ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों के चलती है

भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन सुविधा

इस प्रोजेक्ट के तहत जींद में भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा भी बनाई गई है। सरकार के अनुसार, इस सुविधा में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने जाने वाले सुरक्षा मानकों के अनुसार विकसित किया गया है। यात्रियों के लिए सेवा शुरू करने से पहले इसकी स्वतंत्र सुरक्षा जांच भी की गई है।

भारत ग्लोबल हाइड्रोजन रेल नेटवर्क में शामिल हुआ

इस सर्विस के शुरू होने के साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली रेल टेक्नोलॉजी अपनाई है। जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से ही चल रही हैं या उनके ट्रायल चल रहे हैं। इस लॉन्च के साथ भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो अगली पीढ़ी के, कम प्रदूषण वाले रेलवे सिस्टम में निवेश कर रहे हैं।

हरियाणा के CM ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस प्रोजेक्ट को देश की क्लीन एनर्जी यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विज़न को दिखाती है, साथ ही यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मज़बूत करती है और आर्थिक विकास में मदद करती है।

PM मोदी ने दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च किए

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ-साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत नए सिरे से तैयार किए गए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया और देश भर के 75 अपग्रेड किए गए रेलवे स्टेशनों को वर्चुअली देश को समर्पित किया।

उन्होंने अमृतसर और वाराणसी को जोड़ने वाली संत रविदास एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। चंडीगढ़ दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने PGIMER में बड़े हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन किया, जिसमें ‘एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर’ भी शामिल है।

दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन भारत में, जींद से पीएम मोदी ने गिनाईं रेलवे की बड़ी उपलब्धियां

narendra modi hydrogen train

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में भारत की 3200 हॉर्स पावर वाली दुनिया की सबसे ताकतवर और सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात दी। साथ ही रेलवे के विद्युतीकरण, 14 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं और स्वच्छता का संदेश भी दिया। ALSO READ: पानी की भाप छोड़ेगी, धुआं नहीं! पीएम मोदी ने दिखाई देश की पहली Hydrogen Train को हरी झंडी; जानें रूट और टाइमिंग

 

उन्होंने कहा कि भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन के सामर्थ्य के बारे में सुनकर आपको और एक-एक हिंदुस्तानी को गर्व होगा। जींद से चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन है। ये ट्रेन 3200 हॉर्स पॉवर की है और सबसे ताकतवर ही नहीं, बल्कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन सबसे लंबी भी है।

 

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में हाइड्रोजन ट्रेन अभी अभी अस्तित्व में आई है। अभी दुनिया के तीन या चार देश ही हैं, जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का सामर्थ्य है। 19वीं सदी के रेलवे की पहचान स्टीम इंजन से थी। 20वीं सदी की पहचान डीजल और बिजली से चलने वाली रेल बनी और अब 21 वीं सदी की रेल हाइड्रोजन से चलने वाली है। भविष्य में जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र आएगा, तो जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम आएगा ही आएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इतने वर्षों में जींद के घी और जींद के घेवर तो नहीं बदला, लेकिन जींद के तेवर बदल गए हैं। आज जींद भाजपा-NDA के सुशासन मॉडल की तस्वीर बन रहा है। ALSO READ: हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलती है? जानिए 1 किलो हाइड्रोजन में कितना आता है खर्च

 

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे के बिजलीकरण की शुरुआत 1925 में हुई थी, यानी करीब 100 साल पहले। 1925 से लेकर 2014 तक करीब 90 साल में पूरे देश के रेल नेटवर्क का करीब 30% ही बिजलीकरण हो पाया था। 70% क्षेत्र डीजल से चलता था। 2014 में देश का बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा था, जहां हमारी ट्रेनें डीजल से चलती थी। अब आप सोचिए, अगर डीजल आना बंद हो गया होता तो, डीजल से चलने वाली ट्रेन कैसे चलती, देश संकट में आ जाता। लेकिन ये 2014 की स्थिति नहीं है। ये मोदी है, बहुत पहले सोचता भी है और समस्या के समाधान के रास्ते भी जमीन और उतारता है।

 

speciality of hydrogen train

हरियाणा को 14 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अन्य प्रोजेक्ट्स भी हरियाणा को मिले हैं। इसमें रेलवे के, हाईवे के अनेक नए प्रोजेक्ट हैं, हमारी विरासत से जुड़े प्रोजेक्ट्स है और 2 मेडिकल कॉलेज भी हरियाणा की सेवा के लिए समर्पित हैं।

 

जींद वालों से पीएम ने क्या मांगा?

उन्होंने कहा कि मैं आज जींद वालों से कुछ मांगने आया हूं। क्या इस सफाई और स्वच्छता के लिए मोदी का आना जरूरी है? अगर जींद और हरियाणा के लोग तय कर लें कि अब हम गंदगी नहीं करेंगे। तो जींद और हरियाणा अभी गंदा हो ही नहीं पाएगा। स्वच्छता को हमारा स्वभाव बनाएंगे। स्वच्छता को हमारा संस्कार बनाएंगे। हम स्वच्छता को इसी तरह अपनी हर दिन की जिंदगी का हिस्सा बनाएंगे।

 

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से शुरू: PM मोदी दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए किराया, रूट, स्पीड और इसकी खासियत

hydrogen train

Hydrogen Train : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जींद-सोनीपत के बीच हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। 82 करोड़ में बनी 10 कोच वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी का किराया 25 रुपए होगा। इस ट्रेन का न्यूनतम किराया मात्र 5 रुपए हैं। ALSO READ: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से शुरू: PM मोदी दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए किराया, रूट, स्पीड और इसकी खासियत

 

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि शुक्रवार को जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी, जो जींद और सोनीपत को जोड़ेगी। भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी ट्रेनें हैं। यह रेलवे क्षेत्र में भारत द्वारा स्वच्छ तकनीक अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित इस हाईड्रोजन ट्रेन को भारत में ही डिजाइन किया गया और भारत में ही बनाया गया है। इस ट्रेन में 2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार (DPC) और 8 ट्रेलर कोच लगे हैं। यह पहल भारतीय रेलवे को 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर ले जाएगी।

 

जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली इस ट्रेन में करीब 2600 यात्री पैसेंजर ट्रेनों की तरह सामान्य किराया देकर यात्रा कर सकेंगे। ये ट्रेन 14 स्टेशनों का सफर कराएगी। ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होकर 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। वापसी में सुबह 10:30 बजे सोनीपत से चलकर दोपहर एक बजे जींद पहुंचेगी। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।

जींद में सबसे बड़ा हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सेंटर 

इस ट्रेन के लिए रेलवे ने जींद में भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सेंटर स्थापित किया है। यहीं पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को सुरक्षित रखा जाएगा और ट्रेन में भरा जाएगा। रिफ्यूलिंग के लिए हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है।

 

कैसे हैं सुरक्षा के इंतजाम?

रेलवे ने हाइड्रोजन गैस के सुरक्षित उपयोग के लिए कई सुरक्षा उपाय किए हैं। हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग स्टेशन पर हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर और फ्लेम डिटेक्टर लगाए गए हैं। हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।

India First Hydrogen Train: जींद-सोनीपत के बीच चलने जा रही पहली हाइड्रोजन ट्रेन, इलेक्ट्रिक और डीजल ट्रेन से इसमें क्या फर्क?

India’s First Hydrogen Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक बेहद ऐतिहासिक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद रेलवे स्टेशन से जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के खास क्लब में शामिल हो जाएगा जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें चल रही हैं।

यह ट्रेन पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर चलती है। लेकिन आम लोगों के मन में यह सवाल जरूर है कि आखिर यह ट्रेन पारंपरिक डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों से कितनी और कैसे अलग है? आइए जानते हैं इस हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक, इसके फीचर्स और डीजल-इलेक्ट्रिक ट्रेनों से इसके बड़े अंतर को।

डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेन से यह कितनी अलग है?

पारंपरिक डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन कई मामलों में पूरी तरह से अलग है:-

1- जीरो कार्बन एमिशन

डीजल इंजन भारी मात्रा में धुआं और कार्बन छोड़ता है जिससे एयर पल्यूशन फैलता है। हाइड्रोजन ट्रेन ट्रेन पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। इसमें हाइड्रोजन को बिजली में बदला जाता है। बाई प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इस प्रक्रिया में कार्बन का उत्सर्जन जीरो होता है।

2- ओवरहेड तारों की जरूरत नहीं

बिजली से चलने वाली ट्रेनों को लगातार बिजली सप्लाई के लिए पटरियों के ऊपर ओवरहेड बिजली के तारों की जरूरत होती है। हाइड्रोजन ट्रेन को किसी भी तरह के ओवरहेड तारों की जरूरत नहीं होती है। इसके बजाय ट्रेन के भीतर लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल से ही जरूरत की बिजली खुद जेनरेट होती है। इससे कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन पर आधारित थर्मल पावर प्लांटों से मिलने वाली बिजली पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।

3- बेहद कम शोर

डीजल लोकोमोटिव इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन बेहद कम शोर करती है। इससे यात्रियों का सफर काफी शांत और आरामदायक होगा।

इस हाइड्रोजन ट्रेन में और भी अनोखी बातें

भारतीय रेलवे की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन कई मॉर्डर्न टेक्नोलॉजी से लैस है। इस ट्रेन में कुल 10 कोच दिए गए हैं। ये मौजूदा समय विकसित की गई दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री ट्रेनों में से एक है। यह ट्रेन 3200 HP (हॉर्सपावर) प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। ये ताकत इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों की श्रेणी में खड़ा करता है।

शून्य-उत्सर्जन नियमों का पालन करने के साथ-साथ इसकी हॉर्सपावर और खिंचाव क्षमता काफी मजबूत है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पारंपरिक डीजल इंजनों के प्रदर्शन की बराबरी कर सके। इसका इस्तेमाल औद्योगिक, शंटिंग, इंटरमॉडल और हैवी-हॉल ऑपरेशन्स के लिए भी किया जा सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था और रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

हाइड्रोजन बेहद संवेदनशील ईंधन है, इसलिए ट्रेन और रिफ्यूलिंग केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ट्रेन के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए भारतीय रेलवे ने ईंधन भरने के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम, तकनीकी सहायता इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स स्थापित किए हैं।

इसके अलावा बिना किसी रुकावट के काम सुनिश्चित करने के लिए एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट भी दी गई है। जहां हाइड्रोजन का उत्पादन, स्टोरेज और वितरण (डिस्पेंसिंग) किया जाएगा वहां हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और दूसरे सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं। सुरक्षित और विश्वसनीय कामकाज के लिए इन प्रणालियों की नियमित जांच और सफाई की जाएगी।

स्मार्ट ऑपरेशन और ड्राइवर-फ्रेंडली डिजाइन

इस ट्रेन में रख-रखाव के खर्च और समय को बचाने के लिए आधुनिक तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। इसमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगा है। यह ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को स्टोर कर लेता है। इससे ट्रेन की कार्यकुशलता और इसकी परिचालन सीमा बढ़ जाती है। ट्रेन में इंटीग्रेटेड हाइड्रोजन फ्यूल सेल मैनेजमेंट सिस्टम दिया गया है। ये लगातार फ्यूल सेल के तापमान और उसकी हेल्थ की निगरानी करता रहता है। रियल टाइम का डेटा, फॉल्ट डिटेक्शन और सेल्फ-डायग्नोस्टिक्स की सुविधा दी गई है ताकि मेंटेनेंस का काम आसान हो सके और ट्रेन का डाउनटाइम कम रहे।

इसके मॉड्यूलर डिजाइन में पहले से असेंबल की गई बैटरी बैंक और कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं। इसे भविष्य में अपग्रेड करना बेहद आसान होगा। कंप्रेशर्स और ट्रैक्शन मोटर ब्लोअर जैसे उपकरण इलेक्ट्रिकली संचालित हैं, जिससे घूमने वाले मैकेनिकल पार्ट्स पर निर्भरता कम होती है और रखरखाव का खर्च भी घटता है।

इस लोकोमोटिव का केबिन ड्राइवरों के अनुकूल डिजाइन किया गया है। इसका ऑपरेटिंग अनुभव काफी हद तक डीजल लोकोमोटिव जैसा ही है। लेकिन ड्राइवरों के लिए अतिरिक्त आरामदायक फीचर्स जोड़े गए हैं। यह प्लेटफॉर्म काफी लचीला है जिससे जरूरत पड़ने पर 4-एक्सल और 6-एक्सल वाले लोकोमोटिव दोनों को बैटरी और चार्जर कॉन्फ़िगरेशन के साथ बदला जा सकता है।

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लोअर बर्थ से व्हीलचेयर बुकिंग तक, बुजुर्गों को मिलेगा सब कुछ, बस अपनाएं IRCTC टिकट बुकिंग के ये स्मार्ट टिप्स!

अगर आप या आपके घर के कोई वरिष्ठ नागरिक 2026 में ट्रेन से सफर करने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो टिकट बुकिंग के समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सही जानकारी भरने, समय पर टिकट बुक करने और अवेलेबल फैसिलिटीज का सही यूज करने से जर्नी ज्यादा आरामदायक और बिना किसी परेशानी के हो सकती है।

 

सीनियर सिटीजन से जुड़े रूल और एलिजिबिलिटी पहले चेक कर लें

क्या भारत में वरिष्ठ नागरिकों/सेवानिवृत्त लोगों को क्रेडिट कार्ड पर विचार करना चाहिए?

टिकट बुक करने से पहले भारतीय रेलवे के मौजूदा नियमों और सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) के लिए अवेलेबल फैसिलिटीज की इनफार्मेशन जरूर लें। समय-समय पर रेलवे की पॉलिसी में बदलाव हो सकता है, इसलिए ट्रेवलिंग से पहले ताजा नियम देखना बेहतर रहता है।

 

 

केवल IRCTC की ऑफिशल वेबसाइट या Rail Connect ऐप से बुकिंग करें

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हमेशा टिकट बुक करने के लिए IRCTC की ऑफिशल वेबसाइट या Rail Connect ऐप का ही इस्तेमाल करें। इससे आपकी बुकिंग सिक्योर रहती है और किसी तरह की धोखाधड़ी या गलत जानकारी की संभावना कम हो जाती है।

 

 

उम्र और आइडेंटिटी से जुड़ी डिटेल सही भरें

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बुकिंग करते समय नाम, उम्र, लिंग और गवर्मेंट आइडेंटिटी प्रूफ (आधार, वोटर ID, पासपोर्ट आदि) की जानकारी बिल्कुल सही दर्ज करें। सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) के लिए उम्र की सही डिटेल देना खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि जर्नी के दौरान इसकी चेकिंग की जा सकती है।

 

 

बुकिंग के समय लोअर बर्थ का ऑप्शन जरूर चुनें

Budget 2026: Government May Reintroduce Railway Concessions For Senior Citizens - Outlook Money

अगर सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) को नीचे वाली सीट की जरूरत है, तो टिकट बुक करते समय लोअर बर्थ का ऑप्शन जरूर चुनें। सीट अलोकेशन अवेलेबिलिटी के बेस पर होता है, लेकिन सही ऑप्शन चुनने से लोअर बर्थ मिलने की संभावना बढ़ जाती है और सफर ज्यादा सुविधाजनक रहता है।

 

 

सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) को प्रायोरिटी

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भारतीय रेलवे सीनियर सिटीजन को प्रिऑरिटीज के बेस पर लोअर बर्थ एलोकेट करती है। कई ट्रेनों में इसके लिए अलग लोअर बर्थ कोटा भी रखा गया होता है, जिससे चढ़ने-उतरने में आसानी हो सके।

जर्नी के दौरान गवर्मेंट फोटो ID साथ रखें

Tatkal ticket को लेकर बदले गए नियम, 1 जुलाई से बिना आधार ऑथन्टिकेशन नहीं होगी बुकिंग

जिस गवर्मेंट फोटो ID का इस्तेमाल टिकट बुकिंग के समय किया गया है, उसे जर्नी के दौरान अपने साथ जरूर रखें। टिकट एग्जामिनर जरूरत पड़ने पर आइडेंटिटी और उम्र का प्रूफ मांग सकते हैं, इसलिए वैलिड आइडेंटिटी साथ होना जरूरी है।

 

एडवांस में टिकट बुक कराएं

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सीनियर सिटीजन के लिए समय रहते टिकट बुक करना सबसे अच्छा ऑप्शन है। जल्दी बुकिंग करने से पसंदीदा ट्रेन, सुविधाजनक सीट और लोअर बर्थ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। त्योहारों, छुट्टियों और पीक सीजन में यह और भी जरुरी हो जाता है।