मारुति सुजुकी 4 बायोगैस प्लांट बनाएगी, ₹561 करोड़ के निवेश से किसानों को भी फायदा होगा

Maruti Suzuki Biogas Plant: देश की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल कंपनी मारुति सुजुकी अब बायोगैस पर बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी 561 करोड़ रुपये के निवेश से पहले चरण में 4 बायोगैस प्लांट लगाएगी। इसका मकसद अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाना है।

खारखोदा प्लांट से होगी शुरुआत

पहले चरण में हरियाणा के खारखोदा प्लांट में 10 टन प्रतिदिन (10 TPD) क्षमता का बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा। इसके FY27 में शुरू होने की उम्मीद है। पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद यह प्लांट फैक्ट्री की करीब 20% गैस जरूरत पूरी करेगा।

कंपनी ने मानेसर प्लांट में भी बायोगैस क्षमता 0.2 TPD से बढ़ाकर 0.7 TPD कर दी है। यहां से हर साल करीब 3.6 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर बायोगैस बनने की उम्मीद है। इस प्लांट में खाने का बचा हुआ कचरा, नेपियर घास और धान का पुआल इस्तेमाल होता है। जरूरत पड़ने पर गोबर भी मिलाया जा सकता है।

FY31 तक बड़ा लक्ष्य

मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर. सी. भार्गव ने कहा कि पहले चरण में चार बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। इसके बाद तकनीक और अनुभव के आधार पर इस क्षेत्र में और बड़ा निवेश किया जाएगा।

कंपनी का लक्ष्य FY31 तक हर दिन 20 टन से ज्यादा बायोगैस का इस्तेमाल करना है। कंपनी ने हंसलपुर प्लांट में भी प्राकृतिक गैस की जगह करीब 10% ऊर्जा जरूरत बायोगैस से पूरी करनी शुरू कर दी है।

किसानों को भी होगा फायदा

आर. सी. भार्गव का कहना है कि भारत को नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए कई तरह की तकनीकों की जरूरत होगी। बायोगैस स्थानीय संसाधनों से बनाई जा सकती है। इससे आयातित CNG पर निर्भरता कम होगी। साथ ही यह पूरी तरह स्वच्छ ईंधन है।

उन्होंने कहा कि बायोगैस बनाने के बाद बचने वाली जैविक खाद खेतों की उपज बढ़ाने में मदद करेगी। इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधरेगी। फसल जलाने की जरूरत कम होगी। प्रदूषण घटेगा। किसानों की आय बढ़ेगी। खेती में मशीनों का इस्तेमाल भी बढ़ेगा।

सरकार भी दे रही है बढ़ावा

Maruti Suzuki पिछले दो साल से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के साथ इस क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं।

इसी बीच केंद्र सरकार ने 6 अगस्त को GOBARdhan योजना को मंजूरी दी है। 23,731 करोड़ रुपये की यह योजना FY27 से FY36 तक चलेगी। इसका मकसद गोबर, कृषि अवशेष, जैविक कचरे और दूसरे बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाना है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण इलाकों में आय के नए अवसर भी बनेंगे।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

प्लेटफॉर्म टिकट से भी सस्ता! भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन का किराया जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत ने अपनी पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन शुरू करके ग्रीन रेल ट्रांसपोर्ट के एक नए दौर में कदम रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह सेवा क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी और इंडियन रेलवे नेटवर्क पर सबसे सस्ते टिकट दामों में से एक का मेल है।

नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलने वाली यह ट्रेन भारत को उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल करती है, जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर रेल सर्विस शुरू की है। स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से विकसित इस प्रोजेक्ट का मकसद पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हुए साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है।

लॉन्च के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा ट्रेन के किराए को लेकर हो रही है। कम से कम टिकट की कीमत 5 रुपये तय की गई है। जबकि ज़्यादा से ज़्यादा किराया 25 रुपये है। यह तय की गई दूरी पर निर्भर करता है। उद्घाटन सेवा में यात्रा करने वाले यात्रियों ने भी 5 रुपये वाले टिकट ही खरीदे। इसका शुरुआती किराया कई रेलवे स्टेशनों पर लगने वाले प्लेटफ़ॉर्म टिकट से भी कम है, जिससे यह सेवा भविष्य की तकनीक वाली और सस्ती दोनों बन जाती है।

किराये पर एक नज़र

• कम से कम किराया- ₹5

• ज़्यादा से ज़्यादा किराया- ₹25

• किराया इस पर निर्भर करता है- तय की गई दूरी

रूट, स्टॉप और यात्रियों की क्षमता

हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन जींद जंक्शन और सोनीपत के बीच चलेगी और लगभग दो घंटे में करीब 90 किलोमीटर का सफ़र तय करेगी। इसे ज़्यादा से ज़्यादा 75 किमी/घंटा की रफ़्तार से चलाने की मंज़ूरी मिली है, जबकि इसकी डिज़ाइन स्पीड 110 किमी/घंटा है।

रूट पर पड़ने वाले स्टेशन

•जींद जंक्शन

•जींद सिटी

•पांडु पिंडारा

•ललित खेड़ा हॉल्ट

•भंभेवा

•ईसापुर खेड़ी हॉल्ट

•बुटाना हॉल्ट

•खांडराई हॉल्ट

•राबराह हॉल्ट

•लाठ

•मोहाना

•बरवासनी हॉल्ट

•सोनीपत

10 कोच वाली इस ट्रेन में लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं और उम्मीद है कि यह इस रूट पर रोज़ाना यात्रा करने वालों के काम आएगी।

यह ट्रेन दूसरों से अलग क्यों है?

आम ट्रेनों के उलट, जो डीज़ल इंजन या ऊपर लगे तारों से मिलने वाली बिजली पर चलती हैं, यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल करके खुद ही बिजली बनाती है। फ्यूल सेल के अंदर, हाइड्रोजन ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली बनाती है। इस प्रक्रिया में बाई-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है, जिससे यह ट्रांसपोर्ट का ज़ीरो-एमिशन (बिना प्रदूषण वाला) ज़रिया बन जाता है। इसे चलाने के लिए ज़रूरी हाइड्रोजन की सप्लाई जींद में बने एक खास प्लांट से की जाएगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की मुख्य विशेषताएं

• 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन

• हाइड्रोजन से चलने वाली दो ड्राइविंग पावर कारें

• आठ ट्रेलर कोच और 1,200 kW का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम

• लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता और अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड 75 kmph

• डिज़ाइन स्पीड 110 kmph

• हाइड्रोजन लीक, धुआं, आग और ज़्यादा गर्म होने का पता लगाने के लिए एडवांस्ड सिस्टम

• बिना पारंपरिक ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों के चलती है

भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन सुविधा

इस प्रोजेक्ट के तहत जींद में भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा भी बनाई गई है। सरकार के अनुसार, इस सुविधा में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने जाने वाले सुरक्षा मानकों के अनुसार विकसित किया गया है। यात्रियों के लिए सेवा शुरू करने से पहले इसकी स्वतंत्र सुरक्षा जांच भी की गई है।

भारत ग्लोबल हाइड्रोजन रेल नेटवर्क में शामिल हुआ

इस सर्विस के शुरू होने के साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली रेल टेक्नोलॉजी अपनाई है। जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से ही चल रही हैं या उनके ट्रायल चल रहे हैं। इस लॉन्च के साथ भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो अगली पीढ़ी के, कम प्रदूषण वाले रेलवे सिस्टम में निवेश कर रहे हैं।

हरियाणा के CM ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस प्रोजेक्ट को देश की क्लीन एनर्जी यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विज़न को दिखाती है, साथ ही यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मज़बूत करती है और आर्थिक विकास में मदद करती है।

PM मोदी ने दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च किए

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ-साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत नए सिरे से तैयार किए गए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया और देश भर के 75 अपग्रेड किए गए रेलवे स्टेशनों को वर्चुअली देश को समर्पित किया।

उन्होंने अमृतसर और वाराणसी को जोड़ने वाली संत रविदास एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। चंडीगढ़ दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने PGIMER में बड़े हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन किया, जिसमें ‘एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर’ भी शामिल है।