Bill Gates AI Warning: AI की रफ्तार देख सन्न रह गए बिल गेट्स! नौकरियों को लेकर दे दी ये बड़ी चेतावनी

Bill Gates AI Warning: माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दी है। एक इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि AI की तरक्की जिस तेज रफ्तार से हो रही है, वह उनकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा आगे निकल चुकी है। उन्होंने आगाह किया कि अगर सरकारों और टेक कंपनियों ने समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए, तो दुनिया को बड़े पैमाने पर नौकरियों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

‘मैं खुद हैरान हूं’: कोडिंग में AI ने दी मात

‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में दशकों का अनुभव रखने वाले बिल गेट्स ने स्वीकार किया कि Anthropic के Claude जैसे AI टूल्स की क्षमताओं ने उन्हें पूरी तरह चौंका दिया है।

गेट्स ने कहा, ‘यह विचार कि अब ये AI टूल्स कई मामलों में मुझसे भी बेहतर काम कर रहे हैं, यह मेरे लिए हैरान कर देने वाला है।’

गेट्स के मुताबिक, AI क्रांति पुरानी औद्योगिक या डिजिटल क्रांतियों से बिल्कुल अलग है। पहले की तकनीकों ने पुरानी नौकरियां खत्म करके नए रोजगार पैदा किए थे, लेकिन AI जिस पैमाने पर इंसानों को रिप्लेस कर रहा है, उससे दूसरे क्षेत्रों में नई नौकरियां बच पाना मुश्किल होगा।

टेक कंपनियां क्यों छुपा रही हैं AI का असली खतरा?

गेट्स ने टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनियां भारी फंड जुटाने के चक्कर में इसके खतरों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘प्राइवेट में AI समझने वाले लोग बेहद डरे हुए हैं। लेकिन कोई खुलकर नहीं बोल रहा क्योंकि इससे अगली ट्रिलियन डॉलर की फंडिंग रुकने का डर है।’

कंपनियां बिना किसी सुरक्षा मानकों के सिर्फ इस उम्मीद में आगे बढ़ रही हैं कि AI का अच्छा पहलू इसके बुरे असर को ढक लेगा।

गेट्स ने क्या सुझाया AI का समाधान?

AI के बढ़ते खतरे से आम जनता और नौकरियों को बचाने के लिए बिल गेट्स ने दो प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं:

AI Tax: कंपनियों द्वारा इंसानों की जगह AI का इस्तेमाल करने पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। इस टैक्स से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल नौकरियां गंवाने वाले लोगों की मदद के लिए किया जाए।

‘Human Reserved’ जॉब्स: कुछ संवेदनशील पेशों (जैसे- केयरगिविंग, नर्सिंग और व्यक्तिगत देखभाल) को पूरी तरह ‘ह्यूमन रिजर्व्ड’ घोषित किया जाए, ताकि इन क्षेत्रों में AI के प्रवेश पर बैन रहे और इंसानी नौकरियां सुरक्षित रहें।

जैविक हथियारों का बड़ा खतरा

नौकरियों के अलावा, बिल गेट्स ने एडवांस AI से उत्पन्न होने वाले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर भी चिंता जताई। गेट्स ने चेतावनी दी कि अगर AI का इस्तेमाल नए मॉलिक्यूल्स या खतरनाक बायोलॉजिकल हथियार बनाने में किया गया, तो यह तबाही ला सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त समझौते और मैंडेटरी रिव्यू की मांग की है, ताकि AI का दुरुपयोग बायो-टेररिज्म के लिए न हो सके।

बिल गेट्स का मानना है कि AI सुरक्षा का मुद्दा अब वैश्विक स्वास्थ्य जितना ही गंभीर हो चुका है और वे इसे दुनिया भर के नेताओं के सामने उठाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि इनोवेशन हमेशा सही हो ऐसा जरूरी नहीं, और फिलहाल AI जिस दिशा में जा रहा है, वह एक बड़ी चेतावनी है।

‘फ्री लग्जरी पोर्न कंपनी…’ Anthropic CEO की पत्नी और जेफरी एपस्टीन के बीच ईमेल्स लीक! AI की दुनिया में मचा हड़कंप

Anthropic CEO Wife Cami Clark Epstein Emails: दुनिया की सबसे बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों में से एक एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई (Dario Amodei) की पत्नी कैमी क्लार्क (Cami Clark) को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन और कैमी क्लार्क के बीच 2011-2012 की पुरानी ईमेल बातचीत इंटरनेट पर लीक हो गई है।

अमरीकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों और ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, शादी से पहले कैमी क्लार्क ने अपने एक बिजनेस प्रोजेक्ट के लिए जेफरी एपस्टीन से फंडिंग मांगी थी। इस खुलासे के बाद सिलिकॉन वैली और सोशल मीडिया पर जबरदस्त बवाल खड़ा हो गया है।

‘हमारे पास फ्री लग्जरी पोर्न कंपनी है…’ लीक ईमेल्स में क्या-क्या है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ईमेल बातचीत साल 2011 और 2012 के दौरान की है, जब कैमी क्लार्क अपनी एक बिजनेस पार्टनर मिशेल कैपोसेफालो के साथ महिलाओं पर केंद्रित एडल्ट-कंटेंट वेंचर शुरू करने की योजना बना रही थीं।

एक साहित्यिक एजेंट जॉन ब्रॉकमैन के जरिए कैमी की पहचान एपस्टीन से हुई थी। कैमी ने एपस्टीन को याद दिलाते हुए लिखा, ‘हमारे पास फ्री लग्जरी पोर्न कंपनी है। क्या आपको कुछ याद आया?’ इस पर एपस्टीन ने जवाब दिया, ‘हां, बिल्कुल याद है।’

कैमी ने आगे पूछा कि क्या वे इस बिजनेस में निवेश करने के इच्छुक हैं? हालांकि, एपस्टीन ने आखिरकार यह कहते हुए मना कर दिया, ‘कैंट डू सेक्स टीवी यानी Sex TV नहीं कर सकता।’

ईमेल्स से साफ है कि एपस्टीन ने इस वेंचर में कोई पैसा नहीं लगाया था। लेकिन इसके बाद भी कैमी ने उन्हें हाउसवार्मिंग पार्टी में इनवाइट किया और प्रोफेशनल नेटवर्किंग के जरिए उनसे जुड़ी रहीं।

एपस्टीन के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं

लीक हुए दस्तावेजों और रिपोर्ट में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि कैमी क्लार्क जेफरी एपस्टीन की किसी भी गैर-कानूनी या आपराधिक गतिविधियों में शामिल थीं। न ही उन्हें एपस्टीन के काले कारनामों की जानकारी होने का कोई जिक्र है। ईमेल्स केवल एक शुरुआती बिजनेस प्रोजेक्ट और फंडिंग मांगने तक ही सीमित थे।

एंथ्रोपिक और सिलिकॉन वैली में कैमी क्लार्क का प्रभाव

भले ही कैमी क्लार्क के पास ‘एंथ्रोपिक’ में कोई आधिकारिक पद नहीं है, लेकिन वे अपने पति डारियो अमोदेई की सबसे करीबी सलाहकार मानी जाती हैं। सिलिकॉन वैली नेटवर्क में उनकी भूमिका काफी अहम रही है:

कैमी ने ही गूगल के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एरिक श्मिट की मुलाकात अपने पति से कराई थी। इसके बाद एरिक श्मिट ने साल 2021 में एन्थ्रोपिक की 12.4 करोड़ डॉलर फंडिंग राउंड में शुरुआती निवेशक के रूप में पैसा लगाया था।

एथिकल AI का दावा करने वाली कंपनी के लिए संवेदनशील समय

एंथ्रोपिक वही कंपनी है जो गूगल और ओपनएआई (OpenAI) को सीधी टक्कर देने वाला AI मॉडल ‘क्लॉड’ (Claude) बनाती है। कंपनी ने बाजार में अपनी पहचान ‘सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक AI’ (Ethical AI) विकसित करने वाले ब्रांड के रूप में बनाई है। ऐसे संवेदनशील समय में सीईओ की पत्नी का नाम इस तरह के पुराने विवाद से जुड़ने के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

यह पुरानी ईमेल बातचीत डारियो अमोदेई से शादी और एंथ्रोपिक की स्थापना से सालों पुरानी है, लेकिन जेफरी एपस्टीन का नाम सामने आने के चलते यह खबर वैश्विक टेक जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।

डिस्क्लेमर: यह खबर द वॉल स्ट्रीट जर्नल और अमरीकी न्याय विभाग द्वारा जारी सार्वजनिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें संबंधित व्यक्ति द्वारा किए गए पत्राचार की जानकारी दी गई है, इसे किसी प्रकार का आपराधिक आरोप न माना जाए।

ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini ने 1 अरब यूजर्स का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि, यूजर बेस के मामले में ChatGPT अभी भी आगे है, लेकिन Gemini तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और OpenAI की बढ़त को लगातार कम कर रहा है।

 

ChatGPT और Gemini के 1 अरब यूजर्स

OpenAI और Google दोनों अपने जनरेटिव AI टूल्स के साथ 1 अरब यूजर्स के आंकड़े तक पहुंच चुके हैं। Google के CEO सुंदर पिचाई ने बताया कि Gemini के मासिक यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच गई है। उन्होंने इसे Google का अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रोडक्ट बताया। यह घोषणा OpenAI के उस बयान के कुछ सप्ताह बाद आई है, जिसमें कंपनी ने कहा था कि ChatGPT भी 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा पार कर चुका है।

 

हालांकि, दोनों कंपनियां यूजर्स की संख्या को अलग-अलग तरीके और अलग-अलग समय अवधि के आधार पर मापती हैं। इसके बावजूद एक बात स्पष्ट है कि AI असिस्टेंट बेहद तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं।

 

ChatGPT के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा Gemini

 

Gemini के यूजर्स की संख्या फरवरी में करीब 75 करोड़ थी, जो जुलाई के अंत तक बढ़कर 95 करोड़ हो गई और इसके बाद 1 अरब के आंकड़े को पार कर गई। वहीं, OpenAI ने फरवरी में ChatGPT के 90 करोड़ साप्ताहिक एक्टिव यूजर्स होने की जानकारी दी थी। बाद में कंपनी ने बताया कि ChatGPT के मासिक यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो गई है। हालांकि, OpenAI ने हाल का मासिक यूजर आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।

 

दोनों कंपनियों द्वारा अलग-अलग टाइमफ्रेम में यूजर डेटा जारी किए जाने के कारण सीधे तौर पर तुलना करना आसान नहीं है। फिर भी मौजूदा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ChatGPT की पहुंच फिलहाल ज्यादा है, जबकि Gemini बेहद तेजी से इस अंतर को कम कर रहा है।

 

Google के इकोसिस्टम से Gemini को बड़ा फायदा

Gemini की तेज ग्रोथ की एक बड़ी वजह Google का विशाल इकोसिस्टम है। Gemini को Android और Google की कई सेवाओं में गहराई से जोड़ा गया है। इसका मतलब है कि ऐसे लोग भी Gemini का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो खास तौर पर किसी AI चैटबॉट की तलाश में नहीं आए थे।

 

Google ने यह भी बताया कि Gemini के 10 करोड़ से ज्यादा एक्टिव iPhone यूजर्स हैं। इससे संकेत मिलता है कि Gemini के कुल यूजर बेस का बड़ा हिस्सा Android से आता है। Google के लिए यह एक महत्वपूर्ण बढ़त है, क्योंकि कंपनी Gemini को लगातार ज्यादा डिवाइस और सेवाओं में शामिल कर रही है।

 

AI हार्डवेयर पर भी OpenAI की नजर

 

OpenAI अब केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी की AI-स्पेसिफिक हार्डवेयर में भी दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे भविष्य में ChatGPT के इस्तेमाल का दायरा स्मार्टफोन और कंप्यूटर से आगे बढ़ने की संभावना बन रही है।

 

अब AI की रेस सिर्फ ChatGPT तक सीमित नहीं

 

AI की प्रतिस्पर्धा अब केवल ChatGPT और Gemini तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में इस क्षेत्र में मुकाबला काफी तेज हुआ है। Google का Gemini, Anthropic का Claude, OpenAI का Codex और चीन की कई AI कंपनियों ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है। ChatGPT आज भी AI की दुनिया में सबसे चर्चित नामों में से एक है, लेकिन उसकी बढ़त पहले जितनी सुरक्षित नहीं दिख रही। ChatGPT और Gemini दोनों के 1 अरब यूजर्स के आंकड़े तक पहुंचने के बाद AI की अगली जंग सिर्फ नए यूजर्स जोड़ने की नहीं होगी।

 

अब कंपनियों के सामने यूजर्स को लंबे समय तक अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना, नए AI फीचर्स पेश करना और इतने बड़े यूजर बेस को मजबूत बिजनेस में बदलना बड़ी चुनौती होगी।

AI Bubble: क्या AI का बबल फूट रहा? इन 5 बड़े ‘क्रैश’ ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार को नई रफ्तार दी है। AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। दुनिया भर के बाजारों में AI शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI का बूम भी डॉट-कॉम बबल की तरह खत्म होने वाला है?

दक्षिण कोरिया का Kospi Index गुरुवार को 6% से ज्यादा टूट गया। AI चिप बनाने वाली SK Hynix के शेयर 11% और Samsung Electronics के शेयर 8% गिर गए। निवेशकों को अब कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई की चिंता सता रही है।

आइए जानते हैं हाल के समय में AI थीम से जुड़े 5 बड़े झटकों के बारे में।

IBM

आईटी और कंसल्टिंग कंपनी IBM के शेयर जुलाई 2026 में करीब 25% टूट गए। इससे कंपनी का करीब 70 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया। कमजोर शुरुआती नतीजों के साथ यह चिंता भी बढ़ी कि AI कंपनी के पारंपरिक कंसल्टिंग कारोबार पर असर डाल सकता है।

SaaS सेक्टर

सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर फरवरी 2026 में बुरी तरह टूटे। इसकी वजह Anthropic का नया Agentic AI प्लेटफॉर्म रहा। इसके बाद Salesforce, Adobe और ServiceNow जैसे शेयरों में तेज बिकवाली हुई। निवेशकों को लगा कि AI पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदल सकता है।

Nvidia

AI चिप बनाने वाली कंपनी Nvidia को जनवरी 2025 में बड़ा झटका लगा। कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 600 अरब डॉलर घट गया। इसकी वजह चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek का सस्ता AI मॉडल था। इसके बाद निवेशकों को डर सताने लगा कि महंगे AI चिप्स की मांग उम्मीद से कम हो सकती है।

Alphabet और Big Tech

टेक दिग्गज कंपनियों Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft के शेयर जून 2026 में फिसल गए। Alphabet करीब 6% और Amazon लगभग 5% टूट गया। निवेशकों को चिंता थी कि AI पर हो रहा भारी खर्च कब मुनाफे में बदलेगा।

भारतीय आईटी सेक्टर

भारतीय आईटी कंपनियां भी इस दबाव से नहीं बचीं। IBM की गिरावट के बाद AI को लेकर चिंता बढ़ गई। Infosys, TCS, Wipro, HCLTech, Persistent Systems, Coforge और LTIMindtree जैसे शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। Nifty IT Index करीब 2% टूट गया। जबकि Nifty 50 और Sensex बढ़त के साथ बंद हुए।

फिलहाल AI सेक्टर की लंबी अवधि की कहानी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन ऊंची वैल्यूएशन, मुनाफे को लेकर सवाल और AI से बदलते कारोबार की वजह से इस सेक्टर में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टाटा की TCS 8900 खास इंजीनियरों की टीम बनाएगी, OpenAI और माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने की तैयारी

देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। टाटा ग्रुप की यह कंपनी AI से जुड़ी नई सर्विसेज को बढ़ाने के लिए 5,900 से 8,900 तक फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) की टीम तैयार करेगी। इसके साथ ही AI से जुड़ी कंपनियों को खरीदने (Acquisition) के विकल्प भी तलाश रही है।

आखिर FDE क्या होते हैं?

फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते हैं, जो सिर्फ कंपनी के ऑफिस में बैठकर कोड नहीं लिखते। वे सीधे क्लाइंट के साथ काम करते हैं और उसकी समस्याओं के हिसाब से AI या टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन तैयार करते हैं।

अब मान लीजिए किसी बैंक को AI से अपने कस्टमर सर्विस सिस्टम को बेहतर बनाना है। ऐसे में TCS का FDE उस बैंक के साथ मिलकर काम करेगा। वह बैंक के मौजूदा सॉफ्टवेयर, डेटा और बिजनेस प्रोसेस को समझेगा। फिर AI मॉडल को उसी हिसाब से जोड़ेगा और उसे लागू करेगा।

इन इंजीनियरों का काम क्या होगा?

TCS के CEO के. कृतिवासन ने रॉयटर्स से कहा कि कंपनी अपने कुल कर्मचारियों में से 1% से 1.5% को फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर बनाना चाहती है।

ये इंजीनियर सीधे क्लाइंट के साथ काम करेंगे। उनका काम कंपनियों में AI टूल्स को लागू करना, उन्हें मौजूदा सिस्टम से जोड़ना और कारोबार की जरूरत के हिसाब से AI सॉल्यूशन तैयार करना होगा।

OpenAI और Microsoft से मुकाबला

TCS की यह रणनीति ऐसे समय आई है, जब OpenAI, Anthropic और Microsoft जैसी कंपनियां भी फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स की भर्ती बढ़ा रही हैं। इन इंजीनियरों की मदद से कंपनियां अपने ग्राहकों के यहां AI को तेजी से लागू कर रही हैं।

AI, डेटा सिक्योरिटी में अधिग्रहण की तैयारी

TCS अब AI, डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े अधिग्रहणों पर भी विचार कर रही है। TCS के CFO समीर सेक्सरिया ने कहा कि कंपनी ऐसे कारोबार तलाश रही है, जो उसकी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत बना सकें।

AI से आउटसोर्सिंग मॉडल को खतरा नहीं

कई निवेशकों को डर है कि AI की वजह से आईटी कंपनियों को मिलने वाले प्रोजेक्ट कम हो सकते हैं। लेकिन TCS के CEO का मानना है कि ऐसा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को AI अपनाने के लिए ऐसे पार्टनर की जरूरत होगी, जो उनके मौजूदा सिस्टम, डेटा और प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझते हों। यही TCS की सबसे बड़ी ताकत है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ कम लागत का मामला नहीं, बल्कि कंपनी के अनुभव और प्रतिभा का फायदा है।

AI कारोबार की ग्रोथ धीमी हुई

हालांकि, जून तिमाही में TCS के AI कारोबार की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। पहली तिमाही में AI से होने वाली सालाना आय की ग्रोथ 13% रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 28% थी।

CEO ने कहा कि लंबी अवधि में वह AI कारोबार में करीब 25% तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ देखना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि यह बढ़ोतरी हर तिमाही एक जैसी नहीं रहेगी।

AI पर ₹8,500 करोड़ खर्च

TCS हर साल करीब 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,500 करोड़) टैलेंट डेवलपमेंट और AI पर खर्च करती है। इसमें कर्मचारियों की ट्रेनिंग, AI स्किल्स डेवलप करना और नई AI तकनीकों के लिए एक्सपर्ट्स की हायरिंग शामिल है।

*रॉयटर्स से इनपुट के साथ

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Google में ₹9.3 करोड़ की नौकरी छोड़ शुरू किया AI स्टार्टअप! अब मालामाल हुए यूसुफ इमरान, युवाओं की दी ये सलाह

Startup News: गूगल (Google) के एक पूर्व कर्मचारी ने करीब 9.3 करोड़ रुपये (लगभग 10 लाख डॉलर) सालाना की नौकरी छोड़कर अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप शुरू किया है। 41 वर्षीय यूसुफ इमरान (Yousuf Imran) का कहना है कि AI ने लोगों के लिए अपना बिजनेस शुरू करने और नए अवसर बनाने के रास्ते खोल दिए हैं।

पूर्व गूगल अकाउंट एग्जीक्यूटिव यूसुफ इमरान ने कहा कि Google में अच्छी कमाई के बावजूद उन्हें FOMO (कुछ छूट जाने का डर) महसूस हुआ क्योंकि OpenAI और Anthropic जैसी AI कंपनियाँ ऐसे स्टॉक पैकेज दे रही थीं जिनमें जिंदगी बदलने की क्षमता थी।

एक साल में कमाए करीब 9.3 करोड़ रुपये

Business Insider में प्रकाशित एक आर्टिकल के अनुसार, यूसुफ इमरान ने बताया कि उन्होंने पिछले साल Google में अकाउंट एग्जीक्यूटिव के तौर पर करीब 9.86 लाख डॉलर (लगभग 9.3 करोड़ रुपये) कमाए थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेस सैलरी करीब 1.70 लाख डॉलर (करीब 1.6 करोड़ रुपये) थी। जबकि उनकी अधिकांश कमाई कमीशन से हुई।

AI बूम के बीच महसूस हुआ ‘FOMO’

इमरान ने कहा कि Google में अच्छी कमाई के बावजूद उन्हें AI इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ते अवसरों को लेकर फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) महसूस होने लगा। उन्होंने कहा कि OpenAI और Anthropic जैसी AI कंपनियां कर्मचारियों को ऐसे स्टॉक विकल्प दे रही थीं। इनकी भविष्य में बड़ी वैल्यू हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने नौकरी की सुरक्षा के बजाय अपने स्टार्टअप में हिस्सेदारी को ज्यादा महत्वपूर्ण माना।

बिना इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के शुरू किया AI प्रोजेक्ट

करीब 15 साल सेल्स सेक्टर में काम करने के बाद इमरान 2020 में Google से जुड़े थे। वहां वे ग्राहकों को Google के AI और मशीन लर्निंग समाधान अपनाने में मदद करते थे। उन्होंने बताया कि नौकरी के बाद रात और वीकेंड में वे ChatGPT, Claude और Gemini जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर ऐप्स और साइड प्रोजेक्ट्स बनाते थे। जबकि उनका सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का कोई औपचारिक अनुभव नहीं था।

छंटनी ने बदल दी सोच

इमरान के मुताबिक, Google में हाल के वर्षों में हुई छंटनी ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि केवल बड़ी कंपनी में नौकरी ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं है। उन्होंने देखा कि कई प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भी नौकरी चली गई। इसके बाद उन्होंने अपना उद्यम शुरू करने का फैसला किया।

सेल्स में लगभग 15 साल बिताने के बाद, इमरान 2020 में गूगल से जुड़े और क्लाइंट्स को गूगल के AI मशीन लर्निंग सॉल्यूशन को लागू करने में मदद की। इमरान ने बताया कि उनकी बेस सैलरी लगभग 170,000 डॉलर (करीब 1.6 करोड़ रुपये) थी, जबकि उनकी ज़्यादातर कमाई कमीशन से होती थी, जिससे उनकी सालाना W-2 कमाई लगभग 986,000 डॉलर (करीब 9.3 करोड़ रुपये) हो गई।

शुरू किया अपना AI स्टार्टअप

अप्रैल 2026 में उन्होंने Google छोड़कर Mangosteen Studio नाम से अपना AI स्टार्टअप शुरू किया। यह कंपनी सेल्स प्रोफेशनल्स के लिए AI आधारित टूल विकसित करती है। इमरान ने बताया कि उन्होंने पहले से पूरी वित्तीय योजना बनाई थी। स्टार्टअप को दो साल तक चलाने के लिए करीब 2 लाख डॉलर अलग रखे थे। जबकि अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए 1.5 लाख डॉलर की बचत भी की थी।

‘AI हर किसी को नया मौका दे रहा है’

इमरान का कहना है कि AI केवल इंजीनियरों के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। उन्होंने कहा, “जो लोग अपने करियर में ठहराव महसूस कर रहे हैं या नई चुनौती चाहते हैं, उनके लिए AI कुछ नया बनाने का अवसर दे रहा है। सबसे जरूरी चीज आपके क्षेत्र का अनुभव है। मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं था, लेकिन मैंने 20 साल तक सेल्स प्रोफेशनल्स की समस्याओं को समझा और उसी अनुभव के आधार पर अपना बिजनेस शुरू किया।”

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CA की छुट्टी… AI ने भरा इनकम टैक्स रिटर्न! ‘Claude’ के इस वायरल प्रॉम्प्ट पर छिड़ी बहस

ITR Filing with AI: टेक्नोलॉजी और AI का दायरा अब केवल कंटेंट लिखने या कोडिंग करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब सीधे आपके टैक्स और फाइनेंस से जुड़े जटिल कामों में भी एंट्री कर चुका है। आजकल देश में टैक्स सीजन चल रहा है और इस दौरान कुछ भारतीय प्रोफेशनल्स ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए AI टूल्स का सहारा लेकर सबको चौंका दिया है।

सोशल मीडिया पर कुछ प्रोफेशनल्स ने इसके जबरदस्त अनुभव साझा किए हैं। एक डेटा सिक्योरिटी एनालिस्ट ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के एआई टूल ‘क्लॉड’ (Claude) का इस्तेमाल करने के बाद अपना एक्सपीरियंस बताते हुए कहा कि इसे यूज करते वक्त ऐसा महसूस हुआ, ‘जैसे कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मेरे बगल में ही बैठा हो’।

NRI एग्जीक्यूटिव बोले: ‘चीजें रटने के बजाय मैंने सीखी पूरी प्रक्रिया’

अमेजन के सीनियर एग्जीक्यूटिव अखिल सूद, जो फिलहाल वाशिंगटन में रहते हैं, उन्होंने पहली बार भारत में अपना ITR फाइल करने के लिए AI असिस्टेंट का इस्तेमाल किया। उनके लिए यह प्रयोग केवल ऑटोमेशन तक सीमित नहीं था, बल्कि टैक्स जैसे उलझाऊ प्रोसेस को स्पष्टता से समझना था।

अखिल सूद ने लिंक्डइन पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा, ‘एक एनआरआई के रूप में टैक्स फाइलिंग हमेशा से ही जरूरत से ज्यादा जटिल लगती रही है। पहले मुझे किसी सीए को ढूंढने, डॉक्यूमेंट्स भेजने, उनके जवाब का इंतजार करने और ऐसी टैक्स शब्दावली को समझने में घंटों बिताने पड़ते थे, जिससे मैं परिचित नहीं था।’

उन्होंने आगे बताया कि इस AI टूल ने न केवल उनके सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी समझाया कि फॉर्म में हर एक फील्ड क्यों है, उसमें क्या जानकारी भरी जानी चाहिए, इनकम की अलग-अलग कैटेगरी कैसे काम करती हैं और सबमिट करने से पहले किन बातों को वेरीफाई करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘बिना सोचे-समझे फॉर्म भरने के बजाय, मुझे ऐसा लगा कि मैं वास्तव में इस पूरी प्रक्रिया को सीख रहा हूं।’ इसके अलावा एआई ने टैक्स पोर्टल पर आने वाली दिक्कतों को पहचानने और ग्रीवांस दर्ज करने के तरीके भी सुझाए।

बेंगलुरु के सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट ने शेयर किया पूरा ‘AI Prompt’

इस मामले में एक और एडवांस केस बेंगलुरु के इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट उद्देश्य कुमार का सामने आया। उन्होंने केवल गाइडेंस ही नहीं ली, बल्कि Claude के डेस्कटॉप ऐप के जरिए पूरी फाइलिंग प्रोसेस को प्रैक्टिकली एग्जीक्यूट कराया।

उद्देश्य के मुताबिक, इस AI टूल ने खुद उनके Form 16 का विश्लेषण किया, उसकी तुलना Annual Information Statement (AIS) से की, डेटा में अंतर को पकड़ा, साल के बीच में नौकरी बदलने के मामले को अच्छे से संभाला, पोर्टल के एरर्स और सेशन टाइमआउट की समस्या को सुलझाया और अंत में रिटर्न को सफलतापूर्वक सबमिट भी कर दिया।

उद्देश्य कुमार ने उस सटीक AI Prompt यानी कमांड को भी शेयर किया, जिसका इस्तेमाल उन्होंने क्लॉड के ‘Chrome MCP’ (मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल) के जरिए किया था।

डेटा प्राइवेसी को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

जैसे ही उद्देश्य ने यह पोस्ट शेयर की, सोशल मीडिया यूजर्स ने डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक लिंक्डइन यूजर ने लिखा, ‘आपने अपने दस्तावेज किसी ऐसे सीए के साथ साझा नहीं किए जो शायद उनका दुरुपयोग करना न जानता हो बल्कि आपने उन्हें एक एआई कंपनी के साथ साझा किया है जिसके पास ऐसा करने की पूरी तकनीकी क्षमता है।’ एक अन्य यूजर ने डर जताया कि यह सारा डेटा एआई मॉडल को ट्रेन करने के काम आ सकता है, जिससे भविष्य में प्राइवेसी लीक होने का खतरा है।

इन चिंताओं पर उद्देश्य कुमार ने सफाई देते हुए कहा, ‘आमतौर पर लोग अपना पैन और फॉर्म 16 व्हाट्सएप पर सीए के साथ शेयर कर देते हैं या क्रेडेंशियल्स अनजान पोर्टल्स पर डाल देते हैं। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। क्लॉड मेरे अपने ब्राउजर के अंदर चल रहा था और इस पूरी प्रक्रिया में ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ यानी मैं खुद हर कदम पर नजर रख रहा था।’

क्या कहती है कंपनी की पॉलिसी?

एंथ्रोपिक की पॉलिसी के अनुसार, यूजर्स का डेटा पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड होता है और जब तक यूजर खुद सहमति न दे, तब तक उनके डेटा का इस्तेमाल मॉडल को ट्रेन करने के लिए नहीं किया जाता है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: ‘असिस्टेंट’ मानें, ‘रिप्लेसमेंट’ नहीं

टैक्स और तकनीकी जानकारों का मानना है कि एआई का इस्तेमाल रिसर्च या काम को तेज करने के लिए एक सहायक के रूप में तो बेहतरीन है, लेकिन इस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। एआई में भ्रम या गलत जानकारी बना देना की समस्या होती है। इसलिए, अंतिम रूप से रिटर्न सबमिट करने से पहले किसी योग्य प्रोफेशनल या सीए से डेटा को री-वेरीफाई करवाना हमेशा सुरक्षित रहता है।

आखिर क्यों AI की तरफ आकर्षित हो रहे हैं लोग?

  • कम माथापच्ची: डॉक्यूमेंट्स शेयर करने, सीए के फॉलो-अप और लंबे इंतजार की पूरी प्रक्रिया एक सिंगल गाइडेड सेशन में सिमट जाती है।
  • सीखने का मौका: केवल फॉर्म भरने के बजाय लोग टैक्स कंप्लायंस की बारीकियों को लाइव सीख पा रहे हैं।
  • कम लागत: साधारण टैक्सपेयर्स जैसे- ITR-1 भरने वाले के लिए यह एक बेहद किफायती और आत्मनिर्भर विकल्प बनता जा रहा है।
  • महत्वपूर्ण समय: यह बदलाव ऐसे समय में देखा जा रहा है जब इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत भारत का टैक्स फ्रेमवर्क एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जिसका उद्देश्य फॉर्म की नंबरिंग, डिस्क्लोजर और कंप्लायंस को और ज्यादा सरल बनाना है।

OpenAI के सैकड़ों कर्मचारी बने करोड़पति, AI बूम से शेयर बेचकर हुई अरबों की कमाई

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OpenAI के सैकड़ों कर्मचारी अब करोड़पति बन चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर में कंपनी ने कर्मचारियों को 3 करोड़ डॉलर तक के शेयर बेचने की अनुमति दी थी, जिससे वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बूम से सबसे पहले बड़ा फायदा उठाने वालों में शामिल हो गए। AI सेक्टर में तेजी से बढ़ती संपत्ति का यह बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने अपने बचे हुए शेयर दान संबंधी फंड्स में डाल दिए, ताकि सामाजिक कार्यों में योगदान देने के साथ टैक्स छूट का लाभ भी मिल सके।

 

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 600 वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने पिछले साल अपने शेयर बेचे। इस सौदे के तहत निवेशकों को कंपनी के शुरुआती कर्मचारियों के पास मौजूद शेयर खरीदने की अनुमति दी गई थी। सामूहिक रूप से इन कर्मचारियों ने करीब 6.6 अरब डॉलर की कमाई की। The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, 75 कर्मचारियों ने अधिकतम सीमा तक शेयर बेचकर करीब 3 करोड़ डॉलर प्रति व्यक्ति हासिल किए, जबकि औसत भुगतान लगभग 1.1 करोड़ डॉलर रहा।

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The Telegraph के अनुसार, OpenAI कर्मचारियों को अपने शेयर नकद कराने से पहले दो साल तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में पिछले साल का यह सौदा उन शुरुआती मौकों में से एक था, जब निवेशक कर्मचारियों के शेयर खरीद सके। कंपनी ने 2022 के आखिर में अपना चर्चित AI चैटबॉट ChatGPT लॉन्च किया था।

 

OpenAI ने 2019 में अपना लाभ कमाने वाला सब्सिडियरी मॉडल शुरू किया था, तब कंपनी का मूल्यांकन करीब 1 अरब डॉलर था। बाद में Microsoft के निवेश और ChatGPT की सफलता के बाद 2023 में कंपनी की वैल्यू 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में निजी शेयरों की बिक्री के समय कंपनी का मूल्यांकन 500 अरब डॉलर था। वहीं इस साल मार्च में 122 अरब डॉलर का निवेश जुटाने के बाद OpenAI की वैल्यू 852 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी गई है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में अमेरिका के बे एरिया समेत कई टेक शहरों में बड़ी संपत्ति बनने की लहर देखने को मिल सकती है। The Wall Street Journal के अनुसार, OpenAI और Anthropic इतिहास के दो सबसे बड़े IPO की तैयारी कर रहे हैं। इससे इन कंपनियों के कर्मचारियों को अपने शेयर बेचने का मौका मिलेगा और बड़ी संख्या में लोग मल्टीमिलियनेयर बन सकते हैं।

 

एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि AI बूम से पैदा हो रही यह संपत्ति अभूतपूर्व है। डॉट-कॉम दौर में कई कर्मचारियों को IPO के बाद तक इंतजार करना पड़ता था और कई मामलों में बाजार गिरने से उन्हें लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि Google और Facebook के शुरुआती कर्मचारियों ने भी भारी कमाई की थी, लेकिन AI स्टार्टअप्स में इस बार कहीं ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। Edited by : Sudhir Sharma