SIP Calculator: क्या ₹50,000 महीने की सैलरी में बन सकते हैं करोड़पति? जानें एक्सपर्ट का SIP वाला ये फॉर्मूला

Mutual Fund SIP Calculator: ₹1 करोड़ का फंड तैयार करना हर किसी का सपना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहला करोड़ बनने के बाद संपत्ति की रफ्तार तेजी से बढ़ती है। लेकिन क्या ₹50,000 महीने की कमाई करने वाला कोई सामान्य व्यक्ति ₹1 करोड़ का कॉर्पस बना सकता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बिल्कुल संभव है, बशर्ते आप अनुशासन, धैर्य और सही रणनीति के साथ लंबी अवधि के लिए निवेशित रहें। आइए समझते हैं एसआईपी (SIP) के जरिए करोड़पति बनने का पूरा गणित।

₹50,000 की सैलरी में कैसे बनेगा ₹1 करोड़ का फंड?

KAARMIKA Wealth Mentors के डायरेक्टर किरण गांधी का कहना है कि अगर आप हर महीने ₹50,000 कमाते हैं, तो भी अनुशासित निवेश से करोड़पति बना जा सकता है। उन्होंने इसके लिए कुछ जरूरी नियम बताए हैं:

सैलरी का 20-30% निवेश: अपनी मासिक आय का कम से कम 20 से 30 फीसदी हिस्सा हर महीने म्यूचुअल फंड SIP में लगाएं।

स्टेप-अप एसआईपी: हर साल जब आपकी सैलरी बढ़े, तो अपने एसआईपी निवेश में भी 10% से 15% की बढ़ोतरी करें।

इमरजेंसी फंड तैयार रखें: अपने निवेश को बीच में टूटने से बचाने के लिए इमरजेंसी फंड अलग बनाकर रखें और बेवजह के कर्ज से बचें।

हाई रिटर्न का लालच न करें: केवल ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें और हर साल अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें।

SIP Calculator: ₹12,000 प्रति महीने का गणित

किरण गांधी के अनुसार, अगर आप ₹12,000 महीने की एसआईपी शुरू करते हैं और इस पर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलते हैं, तो करीब 20 साल में आपका फंड लगभग ₹1 करोड़ हो जाएगा।

अगर आप हर साल अपनी एसआईपी की रकम में केवल 10% की बढ़ोतरी यानी स्टेप-अप SIP का रास्ता चुना, तो ₹1 करोड़ का यह लक्ष्य 20 साल से भी काफी पहले हासिल किया जा सकता है।

इस कैलकुलेशन के हिसाब से ₹50,000 महीने की सैलरी में करोड़पति बनना कोई नामुमकिन सपना नहीं है। इसके लिए सिर्फ एक सही रणनीति, अनुशासन और समय की जरूरत है। अगर आप 25-30 साल की उम्र से ही 15-20 सालों के लिए ₹10,000 से ₹12,000 की अनुशासित एसआईपी शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत से ₹1 करोड़ का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।

भारत में SIP का नया रिकॉर्ड, जून में ₹31,781 करोड़ का निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में छोटे निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जून 2026 में मंथली एसआईपी योगदान ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह मई 2026 के मुकाबले 2.7% और जून 2025 के मुकाबले 16.5% ज्यादा है। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 9.78 करोड़ हो गई है, जो एक साल पहले 8.64 करोड़ थी। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल SIP AUM बढ़कर ₹17.70 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जो पूरी इंडस्ट्री के कुल एसेट का 21.5% है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

13 मैचों में 21 कैच ड्रॉप, सुनील गावस्कर ने कहा बाहर करो खराब फील्डर्स को (Video)

भारत का यूरोप दौरा और जिम्बाब्वे दौरे को मिलाकर 13 मैच खेले गए। इसमें से 10 मैच टी-20 के थे और 3 मैच वनडे के थे। कुल 13 मैचों में भारत ने 21 कैच ड्रॉप किए। इसमें से यूरोप (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) भारत ने 11 कैच ड्रॉप किए। वहीं जिम्बाब्वे दौरे पर टीम ने 3 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही 10 कैच ड्रॉप किए। इसमें से 4 कैच अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में आए।

ऐसे में टीम के खराब फील्डिंग मानकों पर सुनील गावस्कर ने कहा है कि औसत फील्डर को टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तान को उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। ना कि यह सोचना चाहिए कि किसी तरह गेंद उन 3 से 4 खिलाड़ियों के पास ना जाए।

भारतीय टीम ने इन 13 मैचों में 47 कैच पकड़े हैं जिससे टीम का कैच प्रतिशत 69.1 है। गौरतलब है कि भारत को आयरलैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 0-2 और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। एकदिवसीय श्रृंखला में भी भारत को इंग्लैंड के हाथों 2-1 की हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद टीम ने हालांकि जिम्बाब्वे को में 3-0 से हराया।

भारतीय टीम की ग्राउंड फील्डिगं भी कई समय से आलोचनाओं के घेरे में है। यूरोप दौरा (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) कई बार यह देखने में आया कि टीम ने ना केवल आसान कैच छोड़े बल्कि आसान चौके भी दे दिए। वहीं इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाड़ियों ने ना केवल शानदार कैच पकड़े बल्कि ग्राउंड फील्डिंग भी उम्दा की।

इसके अलावा सुनील गावस्कर ने एकदिवसीय विश्वकप 2027 को ध्यान में रखकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सलाह भी दी है कि वह मैदान की सीमा को लंबा करें ताकि विदेशी दौरे और खासकर विश्वकप तक भारत बड़े मैदानों पर खेलने का आदि हो जाए। भारत को अब अगली एकदिवसीय श्रृंखला वेस्टइंडीज के खिलाफ अक्टूबर में खेलनी है।

IIP Growth: औद्योगिक उत्पादन जून में 7.3% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर में दमदार ग्रोथ

IIP Growth: जून 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन (IIP) 7.3% बढ़ा है। यह मई के 5.1% के मुकाबले काफी बेहतर रहा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के मुताबिक, जून में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का क्विक एस्टिमेट 123.1 रहा। पिछले साल जून में यह 114.7 था।

सभी बड़े सेक्टरों में बढ़त

जून में चारों बड़े सेक्टरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। बिजली और गैस सप्लाई सबसे आगे रही। इसमें 10.6% की ग्रोथ दर्ज हुई। मैन्युफैक्चरिंग 7.8% बढ़ा। वॉटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट में 6.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, माइनिंग और क्वैरींग सेक्टर 1% बढ़ा।

किन सेक्टरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया?

मैन्युफैक्चरिंग के 23 में से 19 इंडस्ट्री ग्रुप में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर सबसे आगे रहा। इसमें 34% की शानदार ग्रोथ हुई। स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, UPS, सॉलिड-स्टेट ड्राइव और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टर की मांग बढ़ने से यह तेजी आई।

इसके बाद मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर सेक्टर में 17.5% की बढ़ोतरी हुई। ऑटो पार्ट्स, पैसेंजर कार और कमर्शियल व्हीकल्स की मजबूत मांग इसका बड़ा कारण रही। फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर भी 10.8% बढ़ा। इसमें चाय, नॉन-बासमती चावल और स्टार्च का अहम योगदान रहा।

कैपिटल गुड्स में सबसे तेज बढ़त

इस्तेमाल के आधार पर देखें तो कैपिटल गुड्स में सबसे ज्यादा 14.2% की ग्रोथ दर्ज की गई। इंटरमीडिएट गुड्स 9.3%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 7.7% और इन्फ्रास्ट्रक्चर/कंस्ट्रक्शन गुड्स 7.5% बढ़े। वहीं, प्राइमरी गुड्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स दोनों में 4.9% की बढ़ोतरी हुई। कुल IIP ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान इंटरमीडिएट गुड्स, प्राइमरी गुड्स और कैपिटल गुड्स का रहा।

IIP की गणना का तरीका बदला

MoSPI ने 2022-23 बेस ईयर वाली नई IIP सीरीज में बड़ा बदलाव किया है। अब होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Output PPI) का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बदलाव IIP बास्केट के 463 में से 234 आइटम ग्रुप पर लागू होगा, जिनकी कुल हिस्सेदारी 36.02% है।

मंत्रालय का कहना है कि Output PPI कीमतों का ज्यादा सटीक आकलन करता है। इससे वैल्यू के आधार पर रिपोर्ट होने वाले उत्पादों के वास्तविक उत्पादन का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा। साथ ही, भारत की औद्योगिक उत्पादन मापने की प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच जाएगी।

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Bentley taking Bentayga orders at reduced prices after India-UK FTA

bentley bentayga ewb

With the India-UK FTA now in effect, Bentley is accepting orders at reduced prices for the Bentayga EWB SUV, according our dealer sources. The Bentayga EWB is the only Bentley model in India to fulfill the criteria for immediate price drops under the terms of the India-UK FTA.

Bentayga EWB qualifies for slashed 30 percent import duty

Only for a limited number of units, though

The last recorded India price of the Bentley Bentayga EWB was Rs 5.9 crore, before options. Bentley India has not confirmed the exact price reduction, but according to the final terms of the India-UK FTA, import duty on British-made petrol vehicles with engines above 3,000cc will drop from 110 percent to 30 percent.

 Bentayga EWB price in India (Rs, crore)Import tariff
Pre-FTA5.90110 percent
Post-FTA3.65 (estimated)30 percent

Taking that into account, the new India price of the Bentley Bentayga EWB could be in the ballpark of Rs 3.65 crore, before options – a projected price reduction of around Rs 2.25 crore. It should be noted, though, that these slashed prices are applicable only for a quota of 10,000 imported units, which include diesel cars with engines above 2,500cc. The full 110 percent tariff applies to units imported beyond that quota.

PHEV-only Continental GT and Flying Spur won’t see FTA price reduction

In India, the Bentayga EWB is powered by a 4.0-litre twin-turbo V8 with no electric assist whatsoever, making it the only pure-petrol Bentley available here. Other Bentley India offerings, namely the Continental GT and Flying Spur, come with V8 plug-in hybrid powertrains only.

Since the India-UK FTA disallows tariff cuts on British-made hybrids, EVs, and hydrogen-powered vehicles for the first five years after implementation, the Continental GT and Flying Spur don’t see any price reductions at the moment.

All prices are ex-showroom, India.

Market Outlook : हल्के लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जुलाई को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 28 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे एक्सपायरी सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुए। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर और निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। लगभग 1539 शेयरों में बढ़त हुई,2543 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

TCS सबसे ज़्यादा बढ़त (4.466%) के साथ टॉप गेनर रहा,इसके बाद एटरनल (4.23%), टेक महिंद्रा (3.82%),नेस्ले इंडिया (3%) और सिप्ला (2.5%) रहे। दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनीलीवर (HUL) सबसे ज्यादा गिरावट वाला शेयर रहा। Q1 नतीजों के बाद इसमें 7% की गिरावट आई। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) (-4.24%), कोल इंडिया (-4%),टाटा कंज्यूमर (-2.2%) और NTPC (-2%) रहे।

सेक्टर के हिसाब से मिला-जुला प्रदर्शन रहा। निफ्टी IT सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 3.2% की बढ़त हुई; इसके बाद निफ्टी रियल्टी (2%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.08%) रहे। निफ्टी ऑटो भी बढ़त के साथ बंद हुआ (0.69%), जबकि निफ्टी फार्मा में 0.2% की बढ़त हुई।

दूसरी ओर,निफ्टी एनर्जी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.7% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी (-1.4%) और निफ्टी पीएसयू बैंक (-0.9%) रहे। निफ्टी मेटल में 0.6% की गिरावट आई,जबकि निफ्टी बैंक 0.58% गिरा। निफ्टी इंफ्रा (-0.5%),निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.4%) और निफ्टी मीडिया (-0.34%) में भी गिरावट रही।

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.1% की मामूली बढ़त हुई,जबकि निफ्टी स्मॉल कैप 100 इंडेक्स में 0.2% की गिरावट आई।

निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी आज दिन भर एक सीमित दायरे में रहा और मंथली एक्सपायरी के समय आमतौर पर दिखने वाली उतार-चढ़ाव की स्थिति नहीं दिखी। निफ्टी लगातार दूसरे दिन 50EMA के आसपास बंद हुआ,जो ट्रेडर्स के बीच असमंजस की स्थिति को दिखाता है। ऊपरी स्तर पर 24,050 एक मजबूत रेजिस्टेंस बना रहा,जबकि निचले स्तर पर 23,920 के आसपास सपोर्ट देखा गया। अगर इंडेक्स जल्द ही 24,050 के स्तर को पार कर जाता है तो उसे 24,500 की ओर बढ़ने के लिए जरूरी मजबूती मिल सकती है। निचले स्तर पर सपोर्ट 23,800 पर है।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह ने कहा कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24120-24150 के जोन में है,जो 100 डे EMA के पास स्थित है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 24300 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 24450 तक बढ़ सकता है। वहीं,निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23850-23820 के जोन में है।

बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर’बेयरिश कैंडलस्टिक’के साथ सेशन खत्म किया,जो थोड़े नेगेटिव टेक्निकल सेटअप का संकेत है। आवरली चार्ट पर,RSI’बेयरिश क्रॉसओवर’में आ गया है और 50 के लेवल से नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि इंडेक्स अपने 20-पीरियड SMA से नीचे बना हुआ है,जो शॉर्ट टर्म के लिए कमजोर मोमेंटम दिखाता है। बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,200 पर है,जबकि 57,300–57,500 का जोन मजबूत रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। जब तक इंडेक्स इस रेंज से बाहर नहीं निकलता,तब तक ट्रेडर्स को सलाह होगी कि वे लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग अप्रोच अपनाएं और एग्रेसिव डायरेक्शनल पोजीशन लेने से बचें।

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में यह नीचे की ओर गया। दिन के दौरान तेजी से हुई रिकवरी ने इंडेक्स को दिन के उच्चतम स्तर की ओर धकेला,लेकिन 57,030–57,060 का जोन एक मज़बूत रेजिस्टेंस के तौर पर उभरा,जिससे फिर से बिकवाली का दबाव बना। आखिर में इंडेक्स 0.58% गिरकर 56,756 पर बंद हुआ।

टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी ने एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें ऊपर की ओर एक लंबी विक (wick) दिखी जो ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग को दिखाती है। इंडेक्स रिलेटिव रोटेशन ग्राफ (RRG) के ‘लैगिंग क्वाड्रेंट’में भी बना हुआ है जो बेंचमार्क की तुलना में कमजोर रिलेटिव स्ट्रेंथ और मोमेंटम को दर्शाता है।

आगे की बात करें तो बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57,200-57,300 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57,700 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58,000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की ओर बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,300-56,200 के जोन में है।

 

Trading Plan : एक्सपायरी के दिन 80 अंकों के छोटे से दायरे में फंसा निफ्टी, जानिए कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Manipal Health IPO: पैसों का कर लें इंतजाम! कल से खुल रहा है मणिपाल हेल्थ का मेगा इश्यू , जानें ब्रोकरेज की राय

Manipal Health Enterprises IPO: देश की प्रमुख अस्पताल चेन मणिपाल हॉस्पिटल्स का संचालन करने वाली कंपनी मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का आईपीओ कल यानी 29 जुलाई से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। अगर आप भी इस IPO में दांव लगाने की योजना बना रहे हैं, तो निवेश करने से पहले इसका प्राइस बैंड, जीएमपी, लॉट साइज और ब्रोकरेज रिपोर्ट जान लें।

Manipal Health IPO: प्राइस बैंड और इश्यू साइज

  • प्राइस बैंड: ₹560 से ₹590 प्रति शेयर।
  • ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 29-31 जुलाई
  • अलाटमेंट: 3 अगस्त
  • लिस्टिंग: 5 अगस्त
  • न्यूनतम निवेश: रिटेल निवेशक कम से कम 1 लॉट (25 शेयर) के लिए बोली लगा सकते हैं। अपर प्राइस बैंड (₹590) के हिसाब से 1 लॉट के लिए ₹14,750 का निवेश करना होगा।
  • इश्यू साइज: ₹9,275 करोड़ (₹8,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,275 करोड़ का ऑफर फॉर सेल)

कंपनी प्रोफाइल और फंड का इस्तेमाल

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज बेड क्षमता के आधार पर भारत का सबसे बड़ा पैन-इंडिया मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल नेटवर्क है। मार्च 2026 तक कंपनी 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 49 अस्पतालों और 13,037 लाइसेंस प्राप्त बेड्स का संचालन करती है।

कंपनी आईपीओ से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल अपनी सहायक कंपनी मणिपाल हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड के बकाए कर्ज को चुकाने, सह्याद्री हॉस्पिटल्स में माइनॉरिटी हिस्सेदारी खरीदने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत

FY26 में कंपनी की कुल आय 26% बढ़कर ₹10,520.52 करोड़ हो गई, जो FY25 में ₹8,362.79 करोड़ थी। EBITDA भी बढ़कर ₹2,795.94 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹2,247.07 करोड़ था। हालांकि, कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) घटकर ₹916.52 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹1,081.67 करोड़ था।

ब्रोकरेज की राय: Subscribe करें या नहीं?

ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी के मुताबिक, अपर प्राइस बैंड ₹590 पर कंपनी का वैल्यूएशन FY26 की कमाई के आधार पर 85.4x PE पर है और इश्यू के बाद मार्केट कैप ₹77,605.6 करोड़ बैठता है। ब्रोकरेज का मानना है कि आईपीओ का वैल्यूएशन पूरी तरह से प्राइज्ड-इन है। ब्रोकरेज ने इस आईपीओ को ‘Subscribe – Long Term’ यानी लंबी अवधि के लिए सब्सक्राइब की रेटिंग दी है।

ग्रे मार्केट में क्या है रुझान?

आईपीओ मार्केट ट्रैकर्स के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 को मणिपाल हेल्थ का जीएमपी ₹13.5 दर्ज किया गया है। ₹590 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर की लिस्टिंग ₹603.5 के आसपास हो सकती है। यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम फिलहाल लगभग 2.29% के मामूली लिस्टिंग गेन का इशारा कर रहा है।

डिक्लेमर: मनीकंट्रोल हिंदी पर दिए गए विचार और निवेश की सलाह एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स के अपने निजी होते हैं। शेयर बाजार या आईपीओ में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

Aurionpro Solutions Share Price: अपने पीक से 62% नीचे ये स्टॉक आज 12% गिरा, तिमाही नतीजों का दिखा असर

Aurionpro Solutions Share Price: सॉफ्टवेयर एंड आईटी सर्विसेस सेक्टर की कंपनी Aurionpro Solutions के शेयरों में आज भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर आज 12.10% गिरकर ₹735.40 प्रति शेयर पर बंद हुआ। शेयर में यह गिरावट कंपनी के जून तिमाही के बाद आई। शेयर 11 जून के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।

जून तिमाही के लिए, Aurionpro ने ₹358 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹337 करोड़ से 6.3% और पिछली तिमाही के ₹346 करोड़ से 3.6% अधिक है। हालांकि, EBITDA सालाना आधार पर 9.1% घटकर ₹61 करोड़ रह गया, जबकि EBITDA मार्जिन 300 बेसिस पॉइंट्स घटकर 17.2% हो गया। नेट प्रॉफिट (PAT) सालाना आधार पर 12.6% घटकर ₹45 करोड़ रह गया (जो पहले ₹51 करोड़ था), और PAT मार्जिन भी एक साल पहले के 15.3% से घटकर 12.6% हो गया।

मार्जिन पर दबाव के बावजूद, कंपनी ने तिमाही के दौरान 23 नए कस्टमर जोड़े। रेवेन्यू में बढ़ोतरी को बैंकिंग और फिनटेक बिजनेस से सहारा मिला, जो सालाना आधार पर 4.7% बढ़कर ₹201 करोड़ हो गया, जबकि टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप ने 8.4% की बढ़ोतरी के साथ ₹157 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।

तिमाही के दौरान, कंपनी ने बताया कि उसे अमेरिका से अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है। उसने एक प्रमुख डिजिटल इंश्योरेंस पेमेंट प्लेटफॉर्म के साथ 33 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। Aurionpro ने Ujjivan Small Finance Bank से अपने प्रमुख iCashpro+ इंटीग्रेटेड ट्रांजैक्शन बैंकिंग प्लेटफॉर्म को लागू करने के लिए 6 साल का कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया।

मल्टीबैगर रिटर्न के बावजूद स्टॉक अपने पीक से 62% नीचे

शेयर पर सितंबर 2024 से लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और इस दौरान इनकी वैल्यू में 55% से ज़्यादा की गिरावट आई है। मार्च 2023 और सितंबर 2024 के बीच आई जबरदस्त तेज़ी के बाद, जब स्टॉक ₹1,975 प्रति शेयर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था, इसकी रफ्तार कम हो गई और उसके बाद के ज़्यादातर महीनों में स्टॉक गिरावट के साथ बंद हुआ।

शेयर अपने पीक से स्टॉक में 62% की गिरावट आई है। कैलेंडर ईयर के हिसाब से देखें तो 2025 में इसमें 40% की गिरावट आई और 2026 में अब तक यह 29% और गिर चुका है।

Lodha Developers Share Price: डबल मुनाफे से शेयर को लगे पंख, 8% चढ़ा शेयर,अभी और लगा सकता है 28% की छलांग

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

इंदौर के ऑलराउंडर को मिली टीम इंडिया में जगह, हनुमान भक्त को मंगलवार को मिली खुशखबरी

“उपर वाले के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं” यह उक्ति सारांश जैन के लिए सही साबित हुई जब मंगलवार का दिन था और हर मंगलवार की तरह तब सारांश हनुमान मंदिर में प्रार्थना कर रहे थे जब चयनकर्ताओं ने टीम की घोषणा की। मध्य-प्रदेश के अनुभवी ऑफ स्पिनर सारांश जैन को श्रीलंका में होने वाली श्रृंखला के लिए मंगलवार को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया, जो घरेलू क्रिकेट में पिछले एक दशक में उनके शानदार प्रदर्शन का नतीजा है।

चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य-प्रदेश की रणजी ट्रॉफी विजेता टीम के प्रमुख सदस्य रहे लंबे कद के Off-Spinner सारांश ने हाल ही में भारत A के श्रीलंका दौरे के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए दो मैचों में छह विकेट लेने के साथ एक पारी में नाबाद 70 रन भी बनाए थे।

साल 2014 में जब सारांश जैन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए थे तो उन्होंने घर पर फोन लगाया था। उनके पिता सुबोध मुंह के कैंसर से ग्रसित हो गए थे। लेकिन उनके परिवार ने उनको यह नहीं बताया ताकि उनका प्रदर्शन में गिरावट ना आ जाए। जब सारांश घर पहुंचे तो उनके पिता सुबोध के बारे में जानकर भौंजक्के रह गए।

दिलचस्प बात यह है कि सारांश के पिता सुबोध भी मध्य प्रदेश के पूर्व ऑफ-स्पिनर रहे हैं और उनको यह बात सालती रही कि वह राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। लेकिन उन्होंने अपनी असफलता पर चिंतन करने से बेहतर बेटे की कुशलता पर मेहनत करना समझा। वह ही अपने बेटे के कोच है।

सारांश के पिता सुबोध ने 9 रणजी ट्रॉफी मैचों में 23 विकेट लिए थे। उन्होंने अपने बेटे को कोचिंग देनी शुरु की लेकिन भारतीय टेस्ट गेंदबाजी क्रम खासकर स्पिन गेंदबाजी का- इतना सुदृढ़ था कि इसका किला भेदना असंभव था। रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जड़ेजा ही टीम के लिए इतने विकेट निकाल देते थे कि कुलदीप यादव तक के 10 साल के करियर में 18 मैच हैं।

ऐसे में सारांज को 30 प्लस के बाद जाकर मौका मिला। अमूमन भारतीय चयनकर्ता इतनी उम्र के बाद किसी पर मेहरबान नहीं होते। लेकिन सारांश जैन का केस अलग था।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Retirement Planning Guide: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय हर इंसान का लक्ष्य अलग होता है। कोई रिटायरमेंट के लिए एक फिक्स्ड रकम तय करना चाहता है, तो कोई किसी खास वित्तीय पड़ाव को हासिल करने के बाद नौकरी छोड़ना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि रिटायरमेंट के लिए कितना फंड या कॉर्पस काफी है?

पॉलिसीबाजार के लाइफ इंश्योरेंस चीफ बिजनेस ऑफिसर विवेक जैन के मुताबिक, रिटायरमेंट कॉर्पस का कोई एक फिक्स्ड स्टैंडर्ड नहीं हो सकता। यह आपकी जीवनशैली, रिटायरमेंट की उम्र, लाइफ एक्सपेक्टेंसी, महंगाई दर और हेल्थकेयर के खर्चों पर निर्भर करता है।

भारत में क्यों तेजी से बदल रहा है रिटायरमेंट का गणित?

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए विवेक जैन बताते हैं कि साल 2050 तक भारत में लगभग हर 5 में से 1 व्यक्ति 60 साल से अधिक उम्र का होगा। आज लोग ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं और कई लोग जल्दी रिटायर होना चाहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका रिटायरमेंट का दौर पहले की तुलना में ज्यादा लंबा होगा। इसके लिए ऐसे फंड की जरूरत है जो लंबी अवधि तक महंगाई और मेडिकल खर्चों का मुकाबला कर सके।

सिर्फ ₹5,000 महीना निवेश से बन सकता है ₹3.25 करोड़ का फंड

विवेक जैन एक आसान उदाहरण से समझाते हैं कि कैसे जल्दी शुरुआत करने से बड़ा फायदा होता है। अगर कोई 25 साल का युवा हर महीने ₹5,000 का निवेश शुरू करता है और 60 साल की उम्र तक लगातार निवेश बनाए रखता है, तो 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न के हिसाब से 60 की उम्र में उसके पास करीब ₹3.25 करोड़ का बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

इसमें से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि बाकी 40% हिस्से से एनुटी खरीदकर जीवनभर के लिए हर महीने रेगुलर पेंशन पाई जा सकती है।

महंगाई और हेल्थकेयर खर्चों का चक्रव्यूह

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी चुनौती महंगाई है। आज जो खर्च आपको सामान्य लग रहा है, आने वाले 20-30 सालों में वह कई गुना बढ़ जाएगा। इसके अलावा, मेडिकल इंफ्लेशन सामान्य महंगाई से भी तेजी से बढ़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों और लंबे इलाज का खर्च बढ़ता है। इसलिए रिटायरमेंट फंड बनाते समय हेल्थकेयर के नियमित खर्चों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

40 की उम्र से पहले ही रिटायरमेंट प्लान कर रहे भारतीय

पॉलिसीबाजार के डेटा का विश्लेषण करते हुए विवेक जैन ने कुछ बेहद दिलचस्प ट्रेंड्स सामने रखे हैं:

युवाओं की हिस्सेदारी: रिटायरमेंट पॉलिसी खरीदने वाले लगभग 60% ग्राहक 40 साल से कम उम्र के हैं। वहीं, 50 साल से ऊपर के केवल 11.6% लोग ही इसे खरीद रहे हैं। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी जल्दी वित्तीय आजादी चाहती है।

मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स की पसंद: 98% से अधिक लोग मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स (NPS, रिटायरमेंट ULIPs और पेंशन ULIPs) चुन रहे हैं। लोग अब इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करने से नहीं डरते।

छोटे शहरों का दबदबा: रिटायरमेंट प्लानिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। 75% से ज्यादा रिटायरमेंट पॉलिसियां टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही हैं।

NRIs का भरोसा: कुल रिटायरमेंट पॉलिसी में करीब 10% हिस्सेदारी एनआरआई (NRIs) की है। इनका औसत निवेश साइज (₹2.25 लाख) भारतीय निवेशकों से 2.5 गुना अधिक है। एनआरआई खरीदारी में सबसे बड़ी 38% हिस्सेदारी गल्फ (खाड़ी देशों) क्षेत्र की है।

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कुल मिलाकर विवेक जैन का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग का मकसद सिर्फ सबसे बड़ा कॉर्पस जमा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा फंड बनाना है जो आपको जिंदगीभर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखे। 50 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट प्लान करने का जमाना अब चला गया है; जितना जल्दी शुरुआत करेंगे, आपका भविष्य उतना ही सुरक्षित रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।