पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं! जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कितना सख्‍त है नया कानून

jitendra singh on paper leak in parliament

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके। ALSO READ: “छात्रों पर पैलेट गन किसके आदेश से चली?” लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवाल, NTA और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

उन्होंने कहा कि धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सजा की यही अवधि कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपए तक कर दिया गया है। 2024 के कानून में, सर्विस प्रोवाइडर के लिए सजा 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना थी। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है… अंत में, संगठित अपराध करने वालों, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, के मामले में पहले सज़ा 5-10 साल थी। इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

 

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने उसमें भी समय सीमा तय की है। जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी हो या विशेष कार्य बल। ALSO READ: कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

 

यूपीए राज में भी लीक होते थे पेपर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले भी पेपर लिक होते थे। 2009, 2011, 2012 और 2013 में पेपर लीक हुए। यह सिर्फ एक राज्य तक सिमित नहीं। पीएम ने जल्द न्याय का फैसला किया है। नए बिल में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है।  

नौकरी ढूंढ़ने नहीं, नौकरी देने की सोच पैदा कर रहा ‘यूथ अड्डा’

CM Yuva Yojana: आज की जेनरेशन जेड (Gen Z) पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह पीढ़ी नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और आत्मनिर्भरता में अपना भविष्य देखती है। जिन युवाओं का जन्म 1997 के बाद हुआ, वे इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि अवसर, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम चाहिए।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बहुत पहले समझ लिया था। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने केवल रोजगार योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने की सोच के साथ सीएम युवा और यूथ अड्डा जैसी अभिनव अवधारणा को विकसित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इस पहल का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विचार, कौशल, तकनीक, मार्गदर्शन और बाजार सभी को एक मंच पर उपलब्ध करवा कर युवाओं के लिए उद्यमिता का नया इकोसिस्टम तैयार करना है। 

 

Gen Z की क्षमता और भविष्य की कार्यशक्ति में उसकी अहम भूमिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक वर्ष पहले ही पहचान लिया था। इसी सोच के तहत युवाओं और उद्यमिता के बीच मौजूद दूरी को कम करने की पहल की गई। कॉफी या चाय पर सहज, खुले और व्यावहारिक संवाद के माध्यम से युवाओं को कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास हुआ। इसी अनौपचारिक लेकिन प्रभावी मॉडल को ‘यूथ अड्डा’ नाम दिया गया, जहां कॉफी शॉप जैसे माहौल में युवा अपने विचार साझा कर सकें, विशेषज्ञों से संवाद कर सकें और अपने उद्यमी सपनों को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

Gen Z की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ यूथ अड्डा

आज का युवा केवल ऋण या अनुदान नहीं चाहता। वह चाहता है कि कोई उसके विचार को समझे, बिजनेस मॉडल बनाने में मदद करे, अनुभवी मेंटर्स से जोड़े, बैंकिंग प्रक्रिया आसान बनाए और बाजार तक पहुंच दिलाए। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ अड्डा को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र के बजाय एक समग्र उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, फ्रेंचाइजी मॉडल, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

 

यूथ अड्डा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सरकारी सेवा वितरण की पारंपरिक सोच को बदलता है। यहां युवा केवल किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि अवसर का आकांक्षी है, जिसकी जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

कॉलेज से सीधे स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर

प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि उद्यमिता की शुरुआत नौकरी मिलने के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज और तकनीकी संस्थानों के दिनों से ही होनी चाहिए। इसलिए यूथ अड्डा का फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विद्यार्थियों पर रखा गया है। यहां छात्रों को प्रेरित किया जाता है कि वे डिग्री पूरी होने के बाद केवल नौकरी के लिए आवेदन करने की बजाय यह सोचें कि वे किस समस्या का समाधान कर सकते हैं और उससे किस प्रकार सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है। योगी सरकार ने यह भी समझा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी। इसी कारण यूथ अड्डा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और आधुनिक डिजिटल टूल्स पर विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रदेश का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, पूरे बिजनेस सफर में साथ

यूथ अड्डा केवल प्रशिक्षण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यहां युवाओं को बिजनेस आइडिया तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, डिजिटल ब्रांडिंग, गूगल बिजनेस प्रोफाइल, वॉट्सएप बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और व्यवसाय विस्तार तक लगातार मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही 100 से अधिक तैयार फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं का जोखिम काफी कम हो सके।

ग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

यूथ अड्डा की अवधारणा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सहयोग देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूरे वर्ष चलता रहेगा उद्यमिता का अभियान

यूथ अड्डा को केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि वर्षभर सक्रिय रहने वाले उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया गया है। यहां बैंकर्स मीट, टेक फेस्ट, स्टार्टअप क्लिनिक, बिजनेस आइडिएशन वर्कशॉप, फाउंडर्स टॉक, नारी शक्ति श्रृंखला, कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम और सफल उद्यमियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पांच लाख युवाओं को इस पहल से जोड़ना, ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराना, 10,000 से अधिक नए उद्यम एवं फ्रेंचाइजी स्थापित करना तथा 25,000 से अधिक एमएसएमई को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनते हैं, तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

यूपीकॉन निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी पहल के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीकॉन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह के मुताबिक,  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के अंतर्गत यूपीकॉन द्वारा संचालित यूथ अड्डा को प्रदेश में उद्यमिता के एक सशक्त मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूपीकॉन युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, परियोजना परामर्श, बैंकिंग सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल योजनाओं का लाभ दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में सहभागी बनाना है।

Avenue Supermarts Share Price : मैनेजमेंट के कमजोर गाइडेंस ने दिया झटका, 6% से ज्यादा टूटा शेयर

Avenue Supermarts Shares Price : हाइपरमार्केट चेन डीमार्ट की पैरेंट कंपनी,एवेन्यू सुपरमार्ट्स (Avenue Supermarts) के शेयरों में मंगलवार,28 जुलाई को 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। यह गिरावट एनालिस्ट्स के एक ग्रुप के साथ हुई मीटिंग में मैनेजमेंट की तरफ से दिए गए कमजोर गाइडेंस की वजह से आई है। यह अक्टूबर 2024 के बाद से Avenue Supermarts के शेयरों में किसी एक ही सेशन में आई अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। बाजार को नए स्टोर जोड़ने का गाइडेंस नहीं पसंद आया है। कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि अगले साल सेम स्टोर सेल्स ग्रोथ में तेज उछाल की उम्मीद भी नहीं है। इसके अलावा क्विक कॉमर्स को स्थायी खतरा भी बताया गया है।

एनालिस्ट मीट के दौरान D-Mart के मैनेजमेंट ने कहा कि कंपनी अपने स्टोर की संख्या में 15% की बढ़ोतरी करना चाहती है। यह संख्या लगभग 75 स्टोर के बराबर है, जो मार्केट की उम्मीदों से थोड़ी कम है। मार्केट का अनुमान 80 से 100 स्टोर का था। नए स्टोर खोलने की रफ्तार में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, हर साल 80-100 नए स्टोर जोड़ने का प्लान बरकरार है।

मीटिंग में मौजूद एनालिस्ट्स के मुताबिक कंपनी के मैनेजमेंट का मानना है कि क्विक-कॉमर्स कंपनी के लिए एक स्ट्रक्चरल खतरा है और आने वाले सालों में सेम स्टोर सेल्स ग्रोथ में कोई बड़ी रिकवरी देखने को नहीं मिलेगी। कंपनी के मैनेजमेंट ने ऑपरेटिंग कैश फ्लो और फ्री कैश फ्लो पर दबाव जारी रहने के संकेत दिए हैं।

D-Mart ने बताया है कि जून तिमाही में उसकी सेम स्टोर सेल्स में 5% की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कंपनी के गाइडेंस में यह भी बताया गया है कि एवेन्यू सुपरमार्ट्स लीज़ पर लिए गए स्टोर की संख्या बढ़ाने की भी योजना पर भी काम कर रही है,जिसकी वजह शायद ऑपरेटिंग कैश फ्लो और फ्री कैश फ्लो पर दबाव हो सकता है। इसके चलते,एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि एवेन्यू सुपरमार्ट्स की कमाई के अनुमानों में लो-सिंगल-डिजिट की कटौती हो सकती है।

स्टॉक पर एनालिस्ट्स की राय

फिलहाल, यह स्टॉक 31 एनालिस्ट्स के राडार पर है। इनमें से सिर्फ 11 एनालिस्ट्स ने इस स्टॉक स्टॉक में खरीदारी की सलाह दी है। वहीं, 12 एनालिस्ट्स ने स्टॉक पर “होल्ड” रेटिंग दी है। जबकि आठ ने इस शेयर में बिकवाली की सलाह दी है।

शेयर की चाल पर एक नजर

2 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 174.70 रुपए यानी 4.34 फीसदी की गिरावट के साथ 3853 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का लो 3,755.10 रुपए और दिन का हाई 4,094.20 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 4,949.50 रुपए और 52 वीक लो 3,529 रुपए है। इस शेयर ने 1 हफ्ते में 3.01 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, इस साल अब तक इसमें 1.97 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। 1 साल में इसने 2.34 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है।

 

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SpaceX आया रिकॉर्ड हाई से 50% नीचे, इस कारण कमजोर हो रहा Elon Musk का शेयर

Elon Musk’s SpaceX Big Fall: एलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री की। इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और अमीर हो गए और वह दुनिया के इकलौते ट्रिलेनियनर यानी कि एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ की दौलत वाले शख्स बन गए। हालांकि अब स्पेसएक्स के शेयरों की भारी गिरावट ने मस्क की दौलत गिरा दी और अब वह ट्रिलेनियनर नहीं रह गए। 24 जुलाई को एलॉन मस्क ने X (पूर्व नाम Twitter) पर मजाकिया अंदाज में लिखा, पूर्व ट्रिलेनियर।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को $135 के भाव पर जारी हुए थे। 12 जून को मार्केट में इसकी $150 के भाव पर एंट्री हुई थी और पहले ही कारोबारी दिन $176.52 के हाई पर पहुंचने के बाद $160.95 के भाव पर बंद हुआ। इसके दो ही दिन बाद 16 जून को यह $225.64 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन अब नास्डाक पर यह $113.50 पर यानी कि हाई लेवल से यह 49.70% नीचे आ चुका है। वैसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर $108.66 है जो इसने 27 जुलाई को इंट्रा-डे में छुआ।

क्यों टूट रहा SpaceX का शेयर?

स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग में सामने आया था कि कंपनी कितना खर्च कर रही है और इसका टारगेट क्या है। अब जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे से लेटेस्ट तस्वीर सामने आई है जैसे कि कंपनी को जून तिमाही में करीब $430 करोड़ का नेट लॉस हुआ, $470 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, कैपिटल एक्सपेंडिचर $1010 करोड़ रहा जिसमें से $772 करोड़ सिर्फ एआई पर खर्च हुए। जब शेयर चढ़ रहे थे तो निवेशकों ने इन खर्चों पर ध्यान नहीं दिया और इसे एलॉन मस्क के उस अनुमान से भी सपोर्ट मिला जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2030 के आखिरी तक स्पेसएक्स सालाना $1 ट्रिलियन रेवेन्यू हासिल कर सकती है जोकि साल 2025 के $1870 करोड़ के रेवेन्यू से 50 गुना से भी अधिक है।

हालांकि निवेशक अब इसके खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं जिसके चलते शेयरों पर दबाव दिखा। इसके अलावा स्टारशिप की 13वीं टेस्ट फ्लाइट रद्द होने से इसके मार्केट कैप में करीब $10 हजार करोड़ की गिरावट आई। स्पेसएक्स के लिए स्टारशिप काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की एआई और मंगल ग्रह से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अब आगे कैसी रहेगी चाल?

निवेशकों की नजरें अब 4 अगस्त को आने वाले स्पेसएक्स के कारोबारी नतीजे पर हैं। यह पहली बार होगा, जब एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी के तौर पर यह अपना रिजल्ट पेश करेगी। इसके अवावा 6 अगस्त को लॉक-अप एक्सपायरी होने को लेकर भी निवेशकों की नजर है। लॉक-अप एक्सपायरी से लाखों शेयर मार्केट में आ सकते हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडिंगकी की रिपोर्ट के मुताबिक इसे कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स ने 12 महीने के लिए इसका औसत टारगेट प्राइस $235.18 तय किया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक हाइएस्ट टारगेट प्राइस $800 और लोएस्ट टारगेट $115 का है। स्पेसएक्स में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले और Atreides Management के सीआईओ गैविन बेकर ने सीएनबीसी पर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि आईपीओ के बाद शुरुआती दौर में गिरावट सामान्य बात है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Coforge Share Price: कोफोर्ज का शेयर बना रॉकेट, जून तिमाही के नतीजों का असर

कोफोर्ज का शेयर 28 जुलाई को रॉकेट बन गया। सुबह में शेयर मजबूत खुले। कुछ ही देर बाद शेयर में जबर्दस्त उछाल दिखा। 1:18 बजे शेयर का प्राइस 10.15 फीसदी के उछाल के साथ 1,683.90 रुपये पर चल रहा था। शेयरों में तेजी की वजह कंपनी के जून तिमाही के नतीजे हैं। कंपनी ने 27 जुलाई की देर रात नतीजों का ऐलान किया। इसका असर 28 जुलाई को शेयरों पर दिखा।

Coforge के जून तिमाही के नतीजों में पहली बार Encore Holdings का भी प्रदर्शन शामिल रहा। इसलिए यह ध्यान में रखना जरूरी है कि जून तिमाही के नतीजों की तुलना मार्च तिमाही के नतीजों और एक साल पहले के जून तिमाही के नतीजों से नहीं की जा सकती। कोफोर्ज आईटी सॉल्यूशंस ऑफर करती है।

जून तिमाही में कोफोर्ज का रेवेन्यू डॉलर में 21.1 फीसदी बढ़कर 59.2 करोड़ डॉलर रहा। मार्च तिमाही में रेवेन्यू 48.91 करोड़ डॉलर था। जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट तिमाही दर तिमाही आधार पर 15.3 फीसदी गिरकर 518.6 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रॉफिट पर कुछ खास खर्चों का असर पड़ा। इसमें Encora के अधिग्रहण और इंटिग्रेशन पर 61.3 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। कंपनी का लीगल खर्च 5 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कस्टमर रिसीवएबल्स के लिए 10.8 करोड़ का प्रोविजन किया। इन वजहों से 22.1 करोड़ रुपये के फॉरेंस गेंस का फायदा नहीं मिला।

जून तिमाही में रुपये में कंपनी का रेवेन्यू मार्च तिमाही के मुकाबले 24.2 फीसदी बढ़कर 5,527.7 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का मार्जिन 16 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 16.5 फीसदी था। अगर अधिग्रहण पर हुआ खर्च हटा दिया जाए तो कंपनी की ऑर्गेनिक कॉन्स्टैंट करेंसी ग्रोथ 1.1 फीसदी रही। एग्जिटेड बिजनेसेज को छोड़ दिया जाए तो यह 5.2 फीसदी रहता।

कोफोर्ज ने नतीजों के बाद अपनी रिलीज में बताया कि कम मार्जिन वाले 1.5 करोड़ डॉलर के इंडियन गवर्नमेंट पोर्टफोलियो का एग्जिट प्लान के मुताबिक था। इसके अलावा जून तिमाही के प्रदर्शन पर डेटा सेंटर के 40 लाख डॉलर के डिसइनवेस्टमेंट का असर पड़ा। कंबाइंड EBIT मार्जिन 16 फीसदी रहा, जो कंपनी के 15.5 फीसदी के पूरे साल के गाइडेंस से ज्यादा है।

कोफोर्ज ने जून तिमाही में 69.1 करोड़ डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए। इससे कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 222.8 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया। इसकी रिकॉर्ड डेट 2 अगस्त होगी। इस साल कोफोर्ज का शेयर 3 फीसदी गिरा है। यह 52 हफ्तों के अपने 1,938 रुपये के हाई से करीब 20 फीसदी नीचे है।

जापान के कुमामोटो में 7.1 तीव्रता का भूकंप:सुनामी की चेतावनी जारी, 10 किमी की गहराई में केंद्र था

जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोटो इलाके में मंगलवार देर शाम भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 7.1 मापी गई है। झटकों के बाद प्रशासन ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके महसूस होते ही स्थानीय स्तर पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। फिलहाल, एजेंसी की ओर से सुनामी को लेकर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इस घटना को लेकर अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की जानकारी सामने नहीं आई है। एजेंसी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भूकंप से जुड़े फुटेज… खबर अपडेट हो रही है….

बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

controversial statement

भारत-जहां बुद्ध की शांति, महावीर की अहिंसा, कबीर का भ्रातृभाव और गांधी का सत्याग्रह पला-बढ़ा, आज वही देश कड़वे, विवादास्पद और घृणास्पद बयानों के तीर से बार-बार छलनी हो रहा है। हाल के समय में, चाहे वह राजनीति का गलियारा हो, धार्मिक मंच हों, या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स- ऐसे बयानों की एक बाढ़ सी आ गई है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा भारत को अराजक रास्ते पर ले जा रही है। इस बाढ़ में सभी बह रहे हैं।

 

“शब्द यदि विचारपूर्वक न बोले जाएं, तो वे बाण से भी अधिक घातक सिद्ध होते हैं। बाण शरीर को बेधता है, किंतु अनुचित शब्द देश और समाज की आत्मा को घायल कर देते हैं।”

 

1. भाषा का गिरता स्तर और राजनीतिक मर्यादाएं

हाल के दौर में हमने देखा है कि सार्वजनिक संवाद में गरिमा की जगह तीखे व्यक्तिगत हमलों और भड़काऊ बयानबाजी ने ले ली है।

ध्रुवीकरण की राजनीति: चुनावी रैलियों और जनसभाओं के दौरान अक्सर ऐसे बयान देखने को मिलते हैं जहाँ विरोधी दल के नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल होता है।

पहचान पर प्रहार: हालिया बहसों और भाषणों में अक्सर किसी वर्ग, क्षेत्र या धर्म विशेष के लोगों को 'फर्जी', 'घुसपैठिया' या 'अराष्ट्रीय' करार देने की होड़ दिखाई देती है। राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली यह बयानबाजी समाज में स्थायी दरार पैदा करती है।

 

2. नफ़रत भरे बयान (Hate Speech) और सामाजिक दरार

विभिन्न रिसर्च और रिपोर्टों (जैसे इंडिया हेट लैब और मानवाधिकार अध्ययन) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में घृणास्पद भाषणों (Hate Speech) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

आस्था बनाम उकसावा: धार्मिक आयोजनों और रैलियों के मंचों से कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं, जहाँ एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काया जाता है या उनके बहिष्कार की बात की जाती है।

सहिष्णुता का ह्रास: जब ऐसे बयान सामने आते हैं, तो यह सदियों पुरानी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और आपसी भाईचारे की भावना को गहराई से चोट पहुँचाते हैं।

 

3. सोशल मीडिया: आग में घी का काम

आज के डिजिटल युग में एक भड़काऊ बयान केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहाँ वह बोला गया।

टीआरपी और एल्गोरिदम का खेल: सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) विवादित बयानों को मिनटों में वायरल कर देते हैं।

अधूरी जानकारी और नफ़रत का प्रसार: भ्रामक संदर्भों और विवादित वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल युवाओं के मन में आक्रोश और ज़हर घोलने के लिए किया जा रहा है।

 

4. बयानों से भारत को होने वाले नुकसान

सामाजिक समरसता: समाज में अविश्वास और भय का माहौल बनता है, जिससे आपसी सौहार्द नष्ट होता है।

वैश्विक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक लोकतांत्रिक और सहिष्णु राष्ट्र की छवि को आघात पहुँचता है।

आर्थिक प्रगति: जिस देश या राज्य में सामाजिक अस्थिरता होती है, वहाँ निवेशक और उद्योग आने से हिचकिचाते हैं।

युवाओं पर प्रभाव: संवाद की आक्रामकता देखकर भावी पीढ़ी तर्क और विचारशीलता के स्थान पर नफ़रत को सामान्य मानने लगती है।

 

5. समाधान का मार्ग: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिक को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) इसके साथ युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) भी जोड़ता है- अर्थात् यह स्वतंत्रता किसी को नफ़रत फैलाने या लोक व्यवस्था (Public Order) को बिगाड़ने का अधिकार नहीं देती।

कानूनी सख्त कार्रवाई: हेट स्पीच पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव से परे हटकर निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेताओं और जिम्मेदार पदों का आत्म-नियमन: सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों को समझना होगा कि उनके हर एक शब्द का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल साक्षरता और संयम: आम जनता को भी सोशल मीडिया पर किसी भड़काऊ बयान को बढ़ावा देने या शेयर करने से बचना चाहिए।

 

शब्द ही जोड़ते हैं और शब्द ही तोड़ते हैं। भारत अगर विभिन्नताओं में एकता की विशाल मिसाल है, तो इस मिसाल को बनाए रखने का दायित्व हम सभी का है। जब तक सार्वजनिक जीवन में भाषण की गरिमा, मर्यादा और सत्य निष्ठा वापस नहीं लौटती, तब तक देश की आत्मा बयानों के इस ज़हर से घायल होती रहेगी। अब समय आ गया है कि हम “बोलो, पर जोड़ने के लिए; तोड़ो, पर केवल नफ़रत के बंधनों को” का विचार अपनाएं। चलिए अब जान लेते हैं 10 विवादित बयान।

 

10 विवादित बयान: 

राज बब्बर, रशीद मसूद, मायावती, अखिलेश यादव, फारूख अब्दुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, चंदन मित्रा, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, बाबा रामदेव, अरविन्द केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, बाल ठाकरे, संजय राउत, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद, लालू यादव, गिरिराज सिंह, डेरेक ओ ब्रायन, ममता बनर्जी, सायली घोष आदि कई लोग हैं जो समय समय पर बयानवीर का खिताब लेते रहे हैं। देश की हर पार्टी में एक से बढ़कर एक बयानवीर भरेपड़े हैं।

 

1. “अनुपवेशकों और अधिक बच्चों वालों को धन बांटने” पर पीएम मोदी का बयान (2024)

बयान: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के घोषणापत्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि संपत्ति का सर्वे कराकर उसे “अनुप्रवेशकर्ताओं” (Infiltrators) और “जिनके ज्यादा बच्चे हैं” को बांट दिया जाएगा।

विवाद: विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और धुव्रीकरण पैदा करने वाला बयान बताया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

 

2. “सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया की तरह है”– उदयनिधि स्टालिन (2023)

बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा कि “सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि डेंगू और मलेरिया की तरह इसे समाप्त कर देना चाहिए।” उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि “कोई भी ऐसा धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता, जो इंसानों में भेदभाव करता है और सम्मान नहीं देता, वह बीमारी के समान है।”

विवाद: इस बयान पर देश भर में भारी आक्रोश फैला। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे बहुसंख्यक आबादी की आस्था का अपमान बताते हुए अदालतों में याचिकाएं दायर कीं। बीजेपी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बयान को सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर सीधा प्रहार बताया। इसके बाद प्रियांक खरगे और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

 

3. “मोदी सरनेम” टिप्पणी– राहुल गांधी (2019/कानूनी कार्रवाई 2023)

बयान: चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “सब चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?”

विवाद: इस बयान के खिलाफ गुजरात में मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ। मार्च 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जिसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहाल) हो गई थी।

 

4. “शक्ति” से लड़ने संबंधी बयान– राहुल गांधी (2024)

बयान: भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में राहुल गांधी ने कहा, “हिंदू धर्म में एक शब्द है 'शक्ति'। हम एक शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

विवाद: प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस बयान को हिंदू आस्था और नारियों की 'शक्ति' के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक घमासान मचा।

 

5. “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” – अनुराग ठाकुर (2020)

बयान: दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली में नारा लगवाया: “देश के गद्दारों को… गोली मारो सा… को।”

विवाद: इस बयान को चुनावी माहौल में नफरत और हिंसा भड़काने वाला माना गया। चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था।

 

6. “अगर रोड खाली नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे”– कपिल मिश्रा (2020)

बयान: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के जाने तक हम शांत हैं, लेकिन अगर रास्ते खाली नहीं कराए गए तो हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।”

विवाद: इस बयान के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसके लिए कई रिपोर्टों में इस भाषण को जिम्मेदार माना गया।

 

7. रामचरितमानस और पांडुलिपियों पर विवादित टिप्पणी– स्वामी प्रसाद मौर्य (2023)

बयान: समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “इनमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान किया गया है, इसलिए इस ग्रंथ या इसके विवादित अंशों पर बैन लगना चाहिए।”

विवाद: इस बयान से साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष पैदा हुआ और देश भर में जगह-जगह मौर्य के पुतले फूंके गए थे।

 

8. किसान आंदोलन और “100-100 रुपये में आने वाली महिलाएं”- कंगना रनौत (2020)

बयान: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने एक बुजुर्ग महिला (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में बैठने आ जाती हैं।” उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंगना ने 'जेन जी' (Gen Z) को गटर जनरेशन कहा है।

विवाद: इस बयान से किसान संगठन बेहद नाराज हुए। इसी बयान के गुस्से के कारण जून 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सुरक्षाकर्मी महिला (CISF कांस्टेबल) ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

 

9. 'कॉकरोच' (Cockroach) शब्द वाली टिप्पणी और विवाद- CJI (2026) 

बयान: कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) की टिप्पणी में कहा गया था कि “बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह सोशल मीडिया, पत्रकारिता और RTI कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं”। उन्होंने कहा था कि कई युवा नौकरी या वकालत के पेशे में जगह न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) एक्टिविज़्म या अन्य माध्यमों से सिस्टम पर हमला करने का जरिया ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह टिप्पणी फर्जी और जाली डिग्रियों (Fake Degrees) के जरिए वकालत या अन्य पेशों में पिछले दरवाजे से घुसे लोगों और फर्जी पत्रकारों/एक्टिविस्टों के लिए थी, न कि देश के ईमानदार छात्रों और युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।

विवाद: जब इस बयान पर देशभर के युवाओं में भारी विरोध और बहस छिड़ी, तो CJI ने स्पष्टीकरण जारी किया कि उनकी इस टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस एक बयान ने CJP पार्टी को जन्म देकर देश में एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा कर दिया और फिर जो हुआ उसे सभी ने देखा है।

 

10. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान: 

बयान: अप्रैल 2023 में कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने सीधे हिंदू धर्म पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए 'सांप' का उदाहरण दिया था। बीजेपी/आरएसएस की विचारधारा एक जहरीले सांप की तरह है। अगर आप सोचेंगे कि यह जहरीला है या नहीं, और इसे चाटकर (जांचकर) देखेंगे, तो आप मारे जाएंगे। इसलिए पहले इस सांप को मारना जरूरी है।'

विवाद: भाजपा ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा और पार्टी का अपमान करने के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

Govt proposes extending PUCC validity for BS6 cars from 1 to 3 years

Bharat Stage 6

The Ministry of Road Transport and Highways has proposed extending the validity of the Pollution Under Control Certificate (PUCC) for BS6 (Bharat Stage 6) private vehicles that are up to six years old. Under the draft notification, these vehicles would need a PUCC update once every three years, instead of the current one-year validity. For BS6 cars between six and 10 years old, the certificate would continue to be renewed annually, while vehicles older than 10 years would require a new PUCC every six months, the draft added.

Bharat Stage emission norms are standards instituted by the government to regulate the emissions of air pollutants from motor vehicles. India introduced the first phase of BS6 norms in April 2020, followed by the second phase in April 2023, which remains in effect today.

What about BS4 and older cars?

The proposed relaxation is limited to up to six-year-old BS6 cars. As per the notification, owners of BS4 cars will still have to renew their PUCC in every six months, and all motor vehicles complying with BS1, BS2 and BS3 emission norms will have to renew their respective certificates in every three months.

Bharat Stage emission norms in India so far

Bharat Stage emission norms timeline
Bharat Stage emission norms timeline.

India introduced Bharat Stage emission norms in 2000 with the official rollout of BS2 standards. BS2 was based on European emission regulations, with the main difference being the test cycle’s top speed – 90kph for BS2 norms compared to 120kph in Europe. India remained one stage behind Europe until 2010, after which the oil industry couldn’t supply the low-sulphur fuel needed to jump to BS5. Europe, meanwhile, moved to BS6 systematically.

Mahindra Scorpio N facelift interior, exterior spied

Mahindra Scorpio N facelift side profile

The Mahindra Scorpio N facelift has been spied undisguised, giving a glimpse at the SUV’s new interior and exterior changes. These spy shots reveal that the facelift will see minor changes outside, while the interior will be revamped with fresh features.

  1. Spy shots show Thar Roxx-like 10.25-inch screens inside
  2. New alloy wheels can be seen, but taillights are the same
  3. Expected to continue with the same powertrain options 

Mahindra Scorpio N facelift spied: What was spotted?

Spy shots reveal new Thar Roxx-like screens, centre AC vents, and switchgear 

Image source: @vikey_root_baba_1008 on Instagram

Spy shots of the Mahindra Scorpio N facelift’s interior suggest that Mahindra is continuing with the same brown-and-black dual-tone cabin theme as the current model. What’s different, however, is a Thar Roxx-like free-standing infotainment system and a fully digital driver’s display. On the Thar Roxx, both screens are 10.25 inches. The centre air vents are now positioned beneath the infotainment system. The switchgear on the centre console also seems to have a fresh design.

Other than these changes, everything else looks identical to the current Scorpio N. On the feature front too, it could get a new panoramic sunroof and continue with a wireless phone charger, dual-zone climate control, a 12-speaker Sony sound system, a powered driver’s seat and ventilated front seats. 

Alloy wheels have a fresh design, but the taillights are the same as the current model

Only the side profile of the Scorpio N facelift can be seen from the spy shots, which suggest redesigned alloy wheels that look more contemporary than those on the current model. Keen-eyed viewers can also catch a glimpse of the taillights, which seem to be the same LED units as the current model. Other elements, including the chrome beading on the window line with a scorpion tail-like tip, silver roof rails, chrome strips on door handles and black cladding on wheel arches and the lower section of the body, are the same as the current Scorpio N. 

Current-spec Scorpio N’s exterior design shown for representative purposes only. 

While a clear view of the facelifted Scorpio N’s fascia is yet to be seen, numerous test mules have hinted at a slightly revised grille with horizontal slats, dual-pod headlights, and a similar bumper with fog lamps with scorpion tail-like design.

Mahindra Scorpio N facelift: Expected powertrains

Expected to continue with the same direct-injection turbo-petrol and diesel options

Current-spec Scorpio N’s 2.2-litre turbo-petrol engine shown for representative purposes only. 

The facelifted Mahindra Scorpio N is expected to continue with the same engine options as the current model. These include a 2.0-litre direct-injection turbo-petrol engine paired with either a 6-speed manual or a 6-speed automatic transmission. It produces 203hp with both gearbox options, while putting out 370Nm with the manual and 380Nm with the torque converter automatic gearbox.

It also gets a 2.2-litre direct-injection diesel engine, which produces 132hp, 300Nm on the lower variants. On the higher variants, this engine produces 175hp, 370Nm with the 6-speed manual transmission, and 175hp, 400Nm with the 6-speed torque converter automatic transmission. Mahindra is also expected to continue a 4×4 option with a low-range transfer case with both transmission options for this diesel engine.

With the facelift, Mahindra is expected to slightly increase prices of the Scorpio N, which currently range from Rs 13.49 lakh to Rs 24.95 lakh (ex-showroom). It will continue to rival the Mahindra XUV 7XO, Hyundai Alcazar, Tata Safari, and MG Hector.

TVS debuts Apache RR 200 race bike targeted at young riders

TVS Apache RR 200 front three quarter angle on track

TVS has revealed an all-new purpose-built race bike for younger riders aged 10-14, called the Apache RR 200 MiniGP. The track-only RR 200 uses a retuned version of the engine in the road-going Apache RTR 200 4V and this motor sits within a heavily redesigned frame and rolling chassis compared to the road-legal machine.

  1. RR 200 racer far lighter and more powerful than road-going RTR 200
  2. Racing ecosystem being put in place by TVS
  3. 10 units handed to Madras International Karting Arena

TVS Apache RR 200 MiniGP revealed

The Apache RR 200 uses the same air/oil-cooled 197.75cc, single-cylinder engine as the road-going RTR 200 4V but with some noteworthy differences. For starters, fuel is fed to the motor via a 30mm semi flat side carburettor and it breathes through a conical free flow air filter. The RR 200 also has a free flow exhaust which in combination with the aforementioned changes helps raise peak power to 23hp, from the road-going RTR 200’s 20.8hp.

TVS Apache RR 200 race bike rear left three quarter angle on track

Nestling this motor is a heavily revised rolling chassis of the RTR 200 street naked with a sharper rake angle, shorter swingarm as well as wheelbase and smaller 12-inch wheels shod with Eurogrip Bee rubber. Suspending this rolling chassis is fully-adjustable suspension at both ends and stopping duties are handled by a 220mm disc at the fore and a 180mm disc aft.

An aluminium fuel tank and lightweight aerodynamic bodywork – as well as all the changes mentioned above – help in keeping the RR 200’s kerb weight low at just 90 kilos. Compared to the RTR 200, this is a massive 61kg reduction, although both bikes are about as similar as chalk and cheese.  

Feeder programme for TVS One Make Championship

While a lot of effort has been poured into the inception of the machine itself, TVS is also focusing on creating a structured ecosystem for Indian riders who want to get into circuit racing at a young age. TVS will offer bikes for rent as well as provide coaching at the Madras International Karting Arena (MIKA). The company wants to make motorsport more attainable and ensure that even from a young age there is a tool as well as a system in place for riders to hone their skills.

Furthermore, TVS claims that it has built a pathway within its racing ecosystem to ensure that right from the grassroots level all the way to the international stage. In theory, a rider can stay with the brand right from the Junior Program all the way to ARRC (Asia Road Racing Championship), which is the highest level TVS competes at currently.

TVS Apache RR 200 race bike with young riders

For now, the Apache RR 200 MiniGP programme will act as a training ground for TVS. Speaking to Autocar India, Vimal Sumbly (Head – Premium Business, TVS Motor Company) explained, “We are not putting a championship [moniker] to it, we want to train first. Our objective with giving 10 units [to MIKA] is to get people to come here, get trained with our trainers and then eventually over a period of time move towards rookie or professional racing.”

Sumbly further added that this programme will essentially be a feeder series for the TVS One Make Championship’s Rookie category. “It will help us get better rookies, rather than getting a rookie who is just getting into the championship with little experience and they are not able to get their full potential out.”

With inputs from UNNATEE GIDITHURI