Swiggy ने नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ नियुक्त किया, शेयर बने रॉकेट

स्विगी ने नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ नियुक्त किया है। वह अमितेश झा की जगह लेंगी। वह 3 अगस्त को नई जिम्मेदारी संभालेंगी। सिन्हा मिंत्रा की सीईओ रह चुकी हैं। 29 जुलाई को स्विगी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल दिखा। 13:10 बजे शेयर 7.40 फीसदी उछाल के साथ 288.40 रुपये पर चल रहा था।

क्विक कॉमर्स बिजनेस में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

Swiggy ने सोच-समझकर नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ बनाया है। देश में क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में प्रतियोगिता तेजी से बढ़ रही है। इस फील्ड में पहले से Blinkit, Zepto, Flipkart और Amazon जैसी कंपनियां मौजूद हैं। मनीकंट्रोल ने मार्च में खबर दी थी कि सिन्हा मिंत्रा के सीईओ पद को छोड़ रही हैं। इसके कुछ दिन पहले फ्लिपकार्ट ग्रुप के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने उन्हें वॉलमार्ट की कंपनी में बनाए रखने की संभावनाओं पर विचार किया था।

सिन्हा के नेतृत्व में मिंत्रा घाटे से फायदे में आई

सिन्हा फ्लिपकार्ट में 12 साल रहीं। इसमें से 4 साल से ज्यादा समय उन्होंने Myntra का नेतृत्व किया। उन्हें मिंत्रा के फैशन बिजनेस को चार चांद लगाने का श्रेय जाता है। उनके नेतृत्व में मिंत्रा चार साल तक लॉस उठाने के बाद फायदे में आ गई। FY24 में कंपनी ने 31 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया। एक साल पहले कंपनी ने 782 करोड़ रुपये का लॉस उठाया था।

स्विगी के कई एंप्लॉयीज फ्लिपकार्ट में रह चुके हैं

FY25 में कंपनी का प्रॉफिट बढ़कर 18 गुना यानी 548 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान ऑपरेटिंग रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़ा। अब स्विगी सिन्हा से इंस्टामार्ट में इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। मनीकंट्रोल की लिंक्डइन की एनालिसिस के मुताबिक, स्विगी के 7,500 एंप्लॉयीज हैं। इनमें से अभी 350 से ज्यादा ऐसे एंप्लॉयीज हैं, जो अपने करियर में किसी समय फ्लिपकार्ट में काम कर चुके हैं।

सबसे पहले इंस्टामार्ट की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ानी होगी

सिन्हा पर सबसे पहले इंस्टामार्ट की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी है। नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) के लिहाज से Instamart दूसरे नंबर पर रही है। कभी यह तो कभी जेप्टो दूसरे नंबर पर रही हैं। ऑर्डर वॉल्यूम के लिहाज से इस्टामार्ट ब्लिंकिट और जेप्टो से काफी पिछड़ चुकी है। ब्लिंकिट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट मिनट्स, एमेजॉन नाउ और फर्स्टक्लब ने प्रतियोगिता बढ़ने की वजह से प्रॉफिट टारगेट को पीछे कर दिया है।

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स्विगी का इंस्टामार्ट के लिए लंबी अवधि का विजन

नूडल्स ब्रांड नेचुरली योर्स के फाउंडर विनोद चेनधिल ने सिन्हा की नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे उम्मीद है कि नई टीम प्रीमियम ऑफरिंग्स को लाएगी, जिसके लिए वह जानी जाती है।” स्विगी पहले कह चुकी है कि कीमतों को लेकर प्रतिस्पर्धा सिर्फ समस्या का समाधान नहीं है। उसने कहा है कि समाधान ऐसा बिजनेस बनाने में है, जो सिर्फ कीमतों के लिहाज से आगे न हो। क्विक बिजनेस की उपयोगिता बढ़ रही है।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले सख्ती, DJ, हथियार और नॉन-वेज पर रोक, जानें नए नियम और ट्रैफिक एडवाइजरी

Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के बॉर्डर वाले जिलों की पुलिस ने तीर्थ मार्गों पर बहुत बड़े DJ सेटअप, हथियारों और मांसाहारी दुकानों पर रोक लगा दी है। इसी बीच, मेरठ के NH-58 पर नए डायवर्जन के कारण संकरे हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर घंटों लंबे जाम की स्थिति बन गई है।

बता दें कि यह धार्मिक यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि तक चलती है। इसमें लाखों कांवड़िये पैदल या गाड़ियों से हरिद्वार और गंगोत्री जैसी जगहों पर गंगाजल लेने जाते हैं और फिर वापस आकर उसे स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं।

वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बागपत, आगरा और दिल्ली से सटे जिलों की पुलिस ने कई इंतजाम किए हैं। इनमें रूट डायवर्जन, अलग पार्किंग जोन और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक शामिल है। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा मार्गों पर मौजूद खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा जांच भी की जा रही है।

इस साल क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (Do’s)क्या न करें (Don’ts)
यात्रा के दौरान हमेशा अपना पहचान पत्र (ID Proof) साथ रखें।हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडा, तलवार या किसी भी तरह का हथियार साथ न रखें।
केवल प्रशासन द्वारा तय कांवड़ मार्ग का ही इस्तेमाल करें।दोपहिया वाहन पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल न करें।
बागपत: कांवड़/DJ की ऊंचाई 10 फीट, चौड़ाई 12 फीट से कम रखें और आवाज 75 डेसिबल से ज्यादा न हो।कांवड़ मार्ग के भोजनालयों में नॉन-वेज, प्याज और लहसुन का सेवन या परोसना प्रतिबंधित है।
आगरा: कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट से कम रखें और DJ तय मानकों के अनुसार ही बजाएं।कांवड़ मार्ग और मंदिरों के आसपास मांस की दुकानें बंद रहेंगी।
शिविर (कैंप) आयोजक CCTV, अग्नि सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें।ढाबों और होटल में खाना या पानी खरीदने से पहले रेट लिस्ट जरूर देखें, तय कीमत से ज्यादा भुगतान न करें।

अलग-अलग शहरों में DJ और कांवड़ की ऊंचाई को लेकर क्या नियम हैं?

बागपत पुलिस ने कांवड़ और DJ सेटअप की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तक सीमित कर दी है, साथ ही DJ और दूसरे सिस्टम के लिए आवाज का लेवल 75 डेसिबल तक ही रखने का नियम बनाया है। हथियार – जैसे हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडे या तलवार लेकर कांवड़ ले जाने की इजाजत नहीं होगी, और दो-पहिया वाहनों पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।

आगरा में, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई एक अलग कोऑर्डिनेशन मीटिंग में कांवड़ की ऊंचाई की सीमा 12 फीट तय की गई और DJ की आवाज तय नियमों के दायरे में रखने का निर्देश दिया गया। बैठक में कांवड़ रूट और मंदिरों के आस-पास मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, खाद्य विभाग की टीमें ढाबों और होटलों की जांच करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वहां रेट लिस्ट लगी हो।

कहां लग रहा है सबसे ज्यादा जाम?

फिलहाल, सबसे ज्यादा बुरा हाल मेरठ के पास हस्तिनापुर-चांदपुर रास्ते का है। 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच NH-58 पर भारी गाड़ियों के चलने पर रोक होने के कारण, ट्रकों को हस्तिनापुर के खादर (नदी के किनारे वाले इलाके) से होकर इस संकरी सड़क पर भेजा जा रहा है। इससे गाड़ियों की लंबी लाइनें लग रही हैं और दिन भर लगभग लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता पहले से ही खराब हालत में था। अब कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़े ट्रैफिक ने परेशानी और बढ़ा दी है।

लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात करने की मांग की है, क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान और व्यापारी घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं।

किन शहरों में लागू किए गए हैं रूट डायवर्जन?

शहर/मार्गक्या बदलाव किए गए हैं?
मेरठ (NH-58)28 जुलाई से 10 अगस्त तक भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। ट्रकों को हस्तिनापुर खादर-चांदपुर मार्ग से भेजा जाएगा, जिससे इस रूट पर जाम की स्थिति बन सकती है।
मुजफ्फरनगर (NH-58)29 जुलाई की मध्यरात्रि से 12 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। 4 अगस्त तक हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि उसके बाद दोनों लेन कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।
हरिद्वारसहारनपुर, दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर से आने वाले वाहनों को मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
देहरादून-ऋषिकेश मार्गवाहनों को नेपाली तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर के रास्ते चमगादड़ टापू और लालजीवाला पार्किंग भेजा जाएगा। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
दिल्ली से सटे जिलेमेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस के साथ संयुक्त समन्वय किया गया है। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इमरजेंसी पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है।

रास्ते में खाने-पीने की जगहों के लिए क्या नियम हैं?

अधिकारियों के मुताबिक, फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने यात्रा के रास्तों पर पड़ने वाले होटलों और ढाबों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अकेले हापुड़ में ही ऐसे लगभग 130 होटल और ढाबे हैं।

मुजफ्फरनगर में, असिस्टेंट कमिश्नर (फूड) अर्चना धीरन ने PTI को बताया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों में नॉन-वेज खाना, प्याज और लहसुन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि यह नियम हर साल लागू किया जाता है और छह टीमें बासी खाने की जांच करती हैं।

इसके अलावा, यात्रियों से अधिक कीमत न वसूला जाए इसके लिए 21 जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम भी तय कर दिए हैं। साथ ही, खाने-पीने की जगहों पर मालिक की जानकारी, लाइसेंस और फूड-सेफ्टी QR कोड दिखाना जरूरी होगा। वहीं, खाना बनाने वाले कर्मचारियों के लिए दस्ताने (ग्लव्स) पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

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Gold Silver price Today: फेड फैसले से पहले सोने-चांदी में उठा-पटक, चांदी ‌₹2200 हुई महंगी, अब क्या करें निवेशक

Gold Silver price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आज 29 जुलाई को उठा- पटक देखने को मिल रही है। बुधवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 158 रुपये गिरकर 1,41,465 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। उसके विपरीत, चांदी की कीमतें 0.69 फीसदी बढ़कर 2.17 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी के लिए सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स 158 रुपये या 0.11 प्रतिशत गिरकर 1,41,465 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुए, जिसमें 375 लॉट का कारोबार हुआ। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी की कीमतें 2250 रुपये या 1.04 फीसदी बढ़कर 2,18,649 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

बाजार जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है। ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स 4,031.22 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर ट्रेड कर रहे थे। मार्केट में नई पोजीशन बनने से चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।

आज रात US फेड पॉलिसी को होगा ऐलान

US फेड का पॉलिसी फ़ैसला आज रात 11:30 बजे (IST) आएगा, जबकि फेड चेयर केविन वॉर्श की टिप्पणी रात 12:00 बजे (IST) होनी है।

जून में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहने के बाद, ऐसी पूरी उम्मीद है कि US सेंट्रल बैंक आज ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण महंगाई बढ़ने की नई चिंताओं की वजह से फेड सितंबर और दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, FedWatch टूल बताता है कि बाज़ार को सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 76% संभावना और 29 जुलाई को 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की 30% संभावना दिख रही है।

क्या कहते है बाजार जानकार

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ के चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह ने कहा, “बाज़ार अभी ब्याज दरें बढ़ने की लगभग एक-तिहाई संभावना मानकर चल रहा है। सख़्त मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों ने US डॉलर इंडेक्स को 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे बुलियन (सोने-चांदी) पर दबाव पड़ा है।” US फेड के अलावा, बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (BoE) और बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) भी क्रमशः गुरुवार और शुक्रवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं।

बढ़ी हुई ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक होती हैं, क्योंकि ऊंची दरों से इस पीली धातु (जो कोई रिटर्न नहीं देती) को अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है।

इस बीच, डॉलर इंडेक्स 0.10% गिरकर 101.30 पर आ गया, जबकि US 10-साल के बॉन्ड का यील्ड पिछले सेशन के 4.60% से बढ़कर 4.61% हो गया।

अब क्या हो रणनीति

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के अनुसार, आज के सेशन में सोने के लिए $4,010 और $3,974 पर सपोर्ट और $4,070 और $4,110 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी के लिए $56.80 और $56 पर सपोर्ट और $58.40 और $59.10 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है।

MCX पर, जैन ने बताया कि सोने के लिए सपोर्ट ₹1,40,800 और ₹1,40,000 पर है और रेजिस्टेंस ₹1,42,200 और ₹1,43,100 पर है, जबकि चांदी के लिए सपोर्ट ₹2,14,000 और ₹2,12,200 पर है और रेजिस्टेंस ₹2,17,700 और ₹2,20,000 पर है।जैन ने कहा, “हम लंबे समय के निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे बाजार में आई इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी खरीदें, और ट्रेडर्स FOMC मीटिंग के नतीजों से पहले इससे दूर रहें।

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इन 6 कपड़ों को रोज-रोज धोना पड़ सकता है भारी, एक्सपर्ट्स ने बताई सही वॉशिंग टाइमिंग

क्या आप भी हर बार कपड़े पहनने के बाद उन्हें सीधे वॉशिंग मशीन (washing machine) में डाल देते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपके पसंदीदा कपड़ों की उम्र कम कर सकती है। लॉन्ड्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि जरूरत से ज्यादा धुलाई से कपड़ों का रंग, फिटिंग और फैब्रिक खराब हो सकता है, साथ ही पानी, बिजली और डिटर्जेंट की भी गैर जरुरी खर्च होता है। आइए जानते हैं ऐसे कौन-से कपड़े हैं जिन्हें हर बार पहनने के बाद धोने की जरूरत नहीं होती और जिन्हें 2–3 बार पहनने के बाद ही साफ करना बेहतर माना जाता है:

Formal Pants and Trousers (फॉर्मल पैंट और ट्राउजर)

ऑफिस (office) या मीटिंग (meetings) में पहने जाने वाले ट्राउजर और ड्रेस पैंट रोजाना धोने की जरूरत नहीं होती। बार-बार वॉश करने से इनकी क्रीज, फिटिंग और फिनिशिंग खराब हो सकती है। यदि कपड़े साफ हैं और उन पर दाग नहीं लगे हैं, तो इन्हें 5–10 बार पहनने के बाद साफ किया जा सकता है।

Sweaters and Cardigans (स्वेटर और कार्डिगन)

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स्वेटर और कार्डिगन अक्सर टी-शर्ट या शर्ट के ऊपर पहने जाते हैं, इसलिए ये सीधे स्किन के कांटेक्ट में कम आते हैं। इसी वजह से इनमें जल्दी गंदगी या पसीना नहीं लगता। इन्हें हर बार धोने की बजाय हवा में कुछ देर टांग देना भी काफी होता है। सामान्य तौर पर 5–7 बार पहनने के बाद इन्हें धोना सही माना जाता है।

Jackets and Blazers (जैकेट और ब्लेजर)

जैकेट और ब्लेजर भी बाहरी लेयर के कपड़े होते हैं, इसलिए इन्हें हर इस्तेमाल के बाद वॉश करने की जरूरत नहीं पड़ती। ज्यादा धुलाई से इनके फैब्रिक (fabric), शेप और स्टाइल पर असर पड़ सकता है। अगर कोई दाग न हो, तो इन्हें कई बार पहनने के बाद या सीजन खत्म होने पर ड्राई क्लीन या साफ कराना ठीक रहता है।

Avoid Washing Jeans Frequently (जींस को बार-बार धोने से बचें)

डेनिम (Denim) का कपड़ा काफी मजबूत होता है और यह रेगुलर कपड़ों की तुलना में जल्दी खराब नहीं होता। अगर जींस पर दाग नहीं हैं और उसमें किसी तरह की बदबू नहीं आ रही है, तो हर बार पहनने के बाद उसे धोना जरूरी नहीं है। जरूरत से ज्यादा धुलाई करने से उसका रंग फीका पड़ सकता है और फैब्रिक की क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है। आमतौर पर 4–6 बार पहनने के बाद इसे धोना बेहतर माना जाता है।

Night Suits or Pajamas (नाइट सूट या पायजामा)

अगर आप सोने से पहले नहाते हैं और रात में ज्यादा पसीना नहीं आता, तो नाइट सूट को रोज धोने की जरूरत नहीं होती। इसे 3–4 बार पहनने के बाद धोना ठीक माना जाता है। लेकिन गर्मियों में ज्यादा पसीना आने पर इसे जल्दी धोना बेहतर रहेगा।

Bra Care is Also Important (ब्रा की देखभाल भी जरूरी)

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ब्रा को हर बार धोने से उसका इलास्टिक और शेप जल्दी ढीला पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो सामान्य स्थिति में 3–4 बार पहनने के बाद इसे धोना ठीक रहता है। अगर ज्यादा पसीना आया हो या लंबे समय तक पहना हो, तो इसे पहले भी साफ किया जा सकता है।

Momentum Stocks: नेस्ले ने हिट किया नया हाई, फीनिक्स मिल्स,मंगलम ऑर्गेनिक्स और वायसराय होटल्स को पड़ी तगड़ी मार

Momentum Stocks : एक ऐसे बाज़ार में जहां किन्ही नए ट्रिगर्स की कमी दिख रही है,29 जुलाई को कई शेयरों ने चुपचाप सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसकी वजह रही इनमें आया टेक्निकल ब्रेकआउट,मज़बूत प्राइस एक्शन और लगातार कायम खरीदारी। चुनिंदा स्टॉक्स में तेज़ी का मज़बूत रुझान दिख रहा है और ये अपने अहम शॉर्ट से मीडियम टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहे हैं,जो शॉर्ट टर्म के लिए पॉजिटिव संकेत है।

Almondz Global के शेयर 15.04% बढ़कर ₹15.07 पर पहुंच गए हैं। यह अपने 30-दिन (₹13.10), 50-दिन (₹13.38) और 150-दिन (₹14.77) के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से ऊपर ट्रेड कर रहा है,हालांकि यह अभी भी अपने 200-दिन के SMA (₹15.41) से थोड़ा नीचे है, जो इसकी बेहतर होती टेक्निकल पोजीशन का संकेत है।

केन एंटरप्राइजेज का शेयर 10.30% बढ़कर ₹39.50 पर पहुंच गया और अपने 30-दिन (₹35.81), 50-दिन (₹35.08) और 150-दिन (₹38.62) के मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा। हालांकि,यह शेयर अपने 200-दिन के SMA (₹40.77) से थोड़ा नीचे ट्रेड करता रहा,जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल का संकेत है।

Expleo Solutions के शेयर 9.88% बढ़कर ₹893.70 पर पहुंच गए। यह शेयर अपने सभी अहम मूविंग एवरेज जैसे 30-दिन (₹813.31), 50-दिन (₹835.37), 150-दिन (₹842.98) और 200-दिन (₹889.94) के SMA से ऊपर ट्रेड कर रहा है। सभी अहम एवरेज से ऊपर ट्रेड करना मज़बूत अपवर्ड मोमेंटम और पॉज़िटिव लॉन्ग-टर्म टेक्निकल ट्रेंड का संकेत है।

कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर बिकवाली का दबाव दिख रहा है। यह बाज़ार के सतर्क रुख को दर्शाता है। फीनिक्स मिल्स का शेयर 5.14% गिरकर ₹1,906.30 पर आ गया है। यह अपने 30-दिन के SMA (₹2,009.63) से नीचे और 50-दिन के SMA (₹1,908.97) से थोड़ा नीचे फिसल गया। हालांकि,शेयर अपने 150-दिन (₹1,792.18) और 200-दिन (₹1,770.94) के सिंपल मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड करता रहा है,जिससे पता चलता है कि हालिया कमजोरी के बावजूद इसका लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

मंगलम ऑर्गेनिक्स का शेयर 3.53% गिरकर ₹524.95 पर आ गया और यह अपने 30-दिन (₹544.17)और 50-दिन (₹535.13)के सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। गिरावट के बावजूद,यह शेयर अपने 150-दिन (₹481.53) और 200-दिन (₹485.54) के मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है,जिससे पता चलता है कि इसका लॉन्ग-टर्म ट्रेंड अभी भी बरकरार है।

वायसराय होटल्स के शेयर 3.44% गिरकर ₹127.05 पर आ गए। यह अपने 30-दिन के SMA (₹131.58) से नीचे चला गया,लेकिन अपने 50-दिन (₹107.23), 150-दिन (₹37.29) और 200-दिन (₹28.47) के सिंपल मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना हुआ है। शेयर अभी भी अपने लंबे समय के एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो दिन की गिरावट के बावजूद लॉन्ग टर्म ट्रेंड में मज़बूती को दिखाता है।

इस बीच,कई शेयरों ने 52-हफ्ते का नया उच्चतम स्तर छुआ जो लगातार जारी खरीदारी को दिखाता है। नए एक-साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने वाले प्रमुख शेयरों में रैडिको खेतान,कल्याण ज्वैलर्स,लॉरस लैब्स,डिविस लैब्स,मण्णापुरम फाइनेंस,यूनाइटेड स्पिरिट्स,टीवीएस मोटर,बजाज ऑटो,साई लाइफ साइंसेज, नेस्ले,फेडरल बैंक और टाइटन कंपनी शामिल हैं।

इसके अलावा,आलमंड्ज़ ग्लोबल सिक्योरिटीज,बोहरा इंडस्ट्रीज,गैलेंट इस्पात और सयाजी होटल्स अपने अपर सर्किट पर पहुंच गए,जो ज़बरदस्त खरीदारी और निकट भविष्य में इनमें तेजी बने रहने के संकेत हैं।

 

 

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पर्सनल लोन लेने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान

पर्सनल लोन एक फ्लेक्सिबल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है, जो लोगों को बड़े खर्चों जैसे शिक्षा, शादी, वेकेशन, घर का रेनोवेशन, मेडिकल बिल या गैजेट खरीदने में मदद करता है. यह फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट क्रेडिट कार्ड के मुकाबले एक किफायती विकल्प है और लोन अमाउंट को मासिक किस्तों (EMIs) में चुकाने की सुविधा देता है.

हालांकि, इस लोन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रेडिट स्कोर, इंटरेस्ट रेट और एक्स्ट्रा चार्ज जैसे फैक्टर पर ध्यान देना भी जरूरी है. इससे आप कुछ आम गलतियों से बच सकते हैं, जैसे गलत लेंडर चुन लेना, गलत लोन टेन्योर लेना या जरूरत से ज्यादा लोन लेना.

किसी भी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से पर्सनल लोन लेने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें:  

1. अलग-अलग मार्केट इंटरेस्ट रेट की तुलना करें

अलग-अलग लेंडर के इंटरेस्ट रेट की तुलना करने से आपको सबसे कम रेट वाला लोन मिल सकता है. BankBazaar, Paisabazaar और MyLoanCare जैसे प्लेटफॉर्म इस तुलना को आसान बनाते हैं.

सस्ते इंटरेस्ट रेट और सही इंटरेस्ट टाईप (जैसे फिक्स्ड या फ्लोटिंग) चुनने से लोन रीपेमेंट आसान हो जाता है.

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2. लोन अमाउंट, टेन्योर और रीपेमेंट

लोन अमाउंट, टेन्योर और पेमेंट सीधे तौर पर EMI को प्रभावित करते हैं. सही अमाउंट, फ्लेक्सिबल टेन्योर और मैनेज करने योग्य EMI चुनने से आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सही लोन चुन सकते हैं.

3. हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखें

आपकी क्रेडिटवर्थिनेस आपकी क्रेडिट हिस्ट्री से तय होती है, जिसे CIBIL स्कोर कहा जाता है. आपका स्कोर कम-से-कम 700 या इससे ज्यादा होना चाहिए.

कोई भी बकाया समय पर चुकाने से क्रेडिट स्कोर अच्छा बना रहता है. अगर आपका स्कोर कम है तो लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है या आपको ऊंचे इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल सकता है.

4. लोन से जुड़े हर खर्च का आकलन करें

लोन लेने से पहले उससे जुड़े सभी खर्च जैसे प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट पेनल्टी पर गौर करें. इससे आपको कुल खर्च का सही आकलन मिलेगा और आप बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर पाएंगे.

5. सही लोन अमाउंट चुनें

लोन अमाउंट अपनी जरूरत और खर्चों के हिसाब से तय करें. अगर आपकी जरूरतें और खर्च अनिश्चित हैं, तो फ्लेक्सी पर्सनल लोन एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

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6. रीपेमेंट की क्षमता जांचें

लोन अप्लाई करने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी इनकम लोन को समय पर चुकाने के लिए काफी है या नहीं. पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर जैसे टूल का इस्तेमाल करके आप मासिक किस्तों का अंदाजा लगा सकते हैं. ऐसा करने से, बाकी फाइनेंशियल लायबिलिटी से समझौता किए बिना EMI प्लान करना आसान हो जाता है.

7. धोखाधड़ी वाले ऑफर और सर्विस से बचें

ऐसे ऑफर जो बहुत ज्यादा किफायती या आकर्षक लग रहे हैं, उनसे सावधान रहें. ऑफर का फाइन प्रिंट जरूर पढ़ें ताकि हिडन चार्ज या अचानक आने वाले खर्चों से बचा जा सके. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि लोन की शर्तें साफ और समझने योग्य हैं.

कुछ लेंडर सस्ते इंटरेस्ट रेट का दावा करते हैं लेकिन बाद में एक्स्ट्रा फीस जोड़ देते हैं. इसलिए हमेशा ऐसे लेंडर को चुनें जो पारदर्शी और ईमानदार हो.

8. लेंडर की रेप्यूटेशन और कस्टमर सर्विस चेक करें

लोन लेने से पहले लेंडर की मार्केट रेप्यूटेशन और उनकी कस्टमर सर्विस की क्वालिटी पर रिसर्च करें. इसके लिए आप RBI की वेबसाइट, Trustpilot या Google Reviews पर कस्टमर रिव्यू और रेटिंग देख सकते हैं.

एक भरोसेमंद लेंडर का चुनाव आपके लोन एक्सपीरियंस को आसान और सुरक्षित बनाता है.

कुल मिलाकर, पर्सनल लोन लेते समय इंटरेस्ट रेट, टेन्योर, रीपेमेंट क्षमता, हिडन फीस और लेंडर की रेप्यूटेशन जैसे फैक्टर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. अलग-अलग ऑफर की तुलना कर, अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखकर और लोन की शर्तें समझकर आप अपनी फाइनेंशियल जरूरत के लिए सबसे बेहतर फैसला ले सकते हैं.

मनीकंट्रोल के ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर आप 10+ लेंडर से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन ले सकते हैं. इन पर इंटरेस्ट रेट सिर्फ 9.99% सालाना से शुरू होते हैं. यह प्रोसेस 100% पेपरलेस है.

Guru Purnima Essay: हिन्दी निबंध: गुरु पूर्णिमा: गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का महापर्व

A photo of a guru imparting teachings to his disciple on the auspicious occasion of Guru Purnima

Essay on Guru Purnima: प्रस्तावना: भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है-ALSO READ: गुरु पूर्णिमा 2026: आधुनिक भारत के 7 महान गुरु, जिनके ज्ञान ने बदल दी लाखों लोगों की जिंदगी

'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुदेवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः'

– अर्थात् गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही महादेव हैं। वे साक्षात् परमब्रह्म के समान हैं। इसलिए भारतीय परंपरा में गुरु का सम्मान सर्वोच्च माना गया है। इसी सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है।

 

गुरु पूर्णिमा का इतिहास

गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया तथा महाभारत और अनेक पुराणों की रचना की। इसलिए उन्हें आदि गुरु कहा जाता है। उनके जन्मदिवस के रूप में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

यह केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जीवन के सही मार्गदर्शन से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है। वेदव्यास जी ने चारों वेदों का विभाजन किया, महाभारत की रचना की और अठारह पुराणों का संकलन किया। इसी कारण उन्हें 'आदि गुरु' और 'व्यास ऋषि' के नाम से सम्मानित किया जाता है। इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

 

गुरु केवल विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं होते, बल्कि माता-पिता, आध्यात्मिक गुरु, जीवन में सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक और प्रेरणा देने वाले प्रत्येक व्यक्ति गुरु के समान होते हैं। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। वे हमें केवल पुस्तक का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्य, अनुशासन और सही निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करते हैं। अहंकार को त्यागकर गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करना ही इस पावन पर्व का वास्तविक संदेश है।

 

गुरु पूर्णिमा पर क्या करते हैं: गुरु पूर्णिमा के दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं। आश्रमों, विद्यालयों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा, सत्संग, भजन-कीर्तन, प्रवचन तथा गुरु वंदना का आयोजन किया जाता है। अनेक लोग अपने गुरु को पुष्प, वस्त्र, पुस्तकें या अन्य उपयोगी उपहार भेंट कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। कई स्थानों पर गुरु के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

वर्तमान समय में गुरु का महत्व: वर्तमान समय में जब तकनीक और आधुनिक जीवनशैली तेजी से बदल रही है, तब भी गुरु का महत्व पहले की तरह बना हुआ है। आज इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से ज्ञान प्राप्त करना आसान हो गया है, लेकिन सही और गलत का अंतर समझाने, व्यक्तित्व का निर्माण करने तथा जीवन में मूल्यों का विकास करने का कार्य केवल एक सच्चा गुरु ही कर सकता है। इसलिए गुरु का स्थान किसी भी पुस्तक, मशीन या तकनीक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

 

गुरु पूर्णिमा का संदेश: गुरु पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि हमें अपने जीवन में जिन लोगों ने ज्ञान, प्रेरणा और सही दिशा दी है, उनके प्रति सदैव सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

 

उपसंहार: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का ऐसा महान पर्व है, जो गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को मजबूत बनाता है। यह दिन हमें विनम्रता, ज्ञान, संस्कार और कृतज्ञता का महत्व सिखाता है। यदि हम अपने गुरु के आदर्शों और शिक्षाओं को जीवन में अपनाएं, तो निश्चित रूप से सफलता, सम्मान और आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश और महत्व है। गुरु पूर्णिमा हमें याद दिलाती है कि हम अपने जीवन में जिनके भी ऋणी हैं- चाहे वे हमारे शिक्षक हों, माता-पिता हों या मार्गदर्शक, उनके प्रति आभार व्यक्त करें। 

 

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Commonwealth Games में 10 हजार मीटर की दौड़ में एतिहासिक सिल्वर मेडल पाया इस एथलीट ने

commonwealth games

Commonwealth Games 2026 में भारतीय एथलीटों ने यह बता दिया है कि भारत को पदक जीतने के लिए अब सिर्फ नीरज चोपड़ा की तरफ देखने की जरूरत नहीं। अन्य एथलीट भी ओलंपिक नहीं तो कम से कम कॉमनवेल्थ गेम्स जीतने की काबिलियत रखते। 

पांचवें दिन धावक गुलवीर सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन कर पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में रजत पदक जीता ।मंगलवार को गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रच दिया। वे राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।

मौजूदा एशियाई चैंपियन गुलवीर ने स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में 27:49.78 का समय लिया और ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन (27:48.93) के बाद दूसरे स्थान पर रहे, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुल्लार्की ने 27:50.28 के समय के साथ कांस्य पदक जीता।वहीं दूसरी ओर, टीनएज हाई जम्पर पूजा सिंह अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवें स्थान पर रहीं, जबकि विशाल टीके पुरुषों की 400 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में पहुँच गए।

25-लैप की इस दौड़ के ज़्यादातर हिस्से में लगातार बारिश के बीच दौड़ते हुए, गुलवीर शुरू से ही आगे रहने वाले ग्रुप के साथ बने रहे। उन्होंने 3000 मीटर की दूरी 8:39.2 में पूरी की, पांचवें स्थान पर खिसकने के बावजूद 6000 मीटर तक मुकाबले में बने रहे, और आखिरी लैप का संकेत देने वाली घंटी बजने से पहले तीसरे स्थान पर आ गए। इसके बाद भारत के इस बेहतरीन लंबी दूरी के धावक ने शानदार फ़िनिशिंग की और रजत पदक पक्का किया।

यह 1986 के कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद पहली बार था जब पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में कोई भी अफ़्रीकी एथलीट टॉप तीन में जगह नहीं बना पाया। यह मेडल पिछले दो सालों में गुलवीर की शानदार तरक्की में एक और उपलब्धि है।

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28 वर्षीय भारतीय एथलीट ने 2023 एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, 2024 से कई बार भारतीय 10,000 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा है और उनके नाम 27:00.22 का नेशनल रिकॉर्ड है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने इस इवेंट में वर्ल्ड एथलेटिक्स रैंकिंग के टॉप 10 में भी जगह बनाई थी।गुलवीर ग्लासगो में 5000 मीटर दौड़ में भी हिस्सा लेंगे।

महबूबा मुफ्ती के पेलेट गन वाले बयान पर बवाल, फिर छिड़ी कश्मीर की पुरानी बहस, जानिए पूरा विवाद

 Debate over pellet guns reignites in Kashmir following Mehbooba Mufti's remarks

Mehbooba Mufti : जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की उन टिप्पणियों ने, जिनमें उन्होंने कथित तौर पर कुछ परिस्थितियों में कश्मीर में पेलेट-फायरिंग शाटगन के इस्तेमाल का बचाव किया है, पिछले 15 वर्षों में इस क्षेत्र में इस्तेमाल किए गए सबसे विवादास्पद भीड़ नियंत्रण उपायों में से एक पर लंबे समय से चल रही बहस को फिर से हवा दे दी है।

दरअसल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्‍यक्षा महबूबा मुफ्ती उस समय आलोचनाओं के घेरे में आ गईं, जब उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन का कोई स्थान नहीं है, लेकिन कश्मीर में यह समझ में आता है क्योंकि वहां सुरक्षाबलों को आतंकवाद का सामना करना पड़ता है।

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इन टिप्पणियों पर सत्ताधारी नेशनल कॉन्‍फ्रेंस (नेकां) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और माफी की मांग करते हुए कहा कि ये टिप्पणियां उस हथियार को उचित ठहराती प्रतीत होती हैं जिसके कारण हजारों लोग घायल हुए और सैकड़ों लोगों की आंखों में जीवनभर के लिए गंभीर चोटें आईं।

इस विवाद ने एक बार फिर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि पेलेट गन क्यों पेश की गईं, कश्मीर में भीड़ नियंत्रण के लिए वे किस प्रकार एक महत्वपूर्ण साधन बन गईं और वे आज भी लोगों की राय को क्यों विभाजित करती हैं? 

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वर्ष 2009-10 की अवधि के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने पत्थरबाजी की घटनाओं में सैकड़ों कर्मियों के घायल होने की सूचना दी और इस घटना को आतंकवाद और सीमा पार से आने वाले धन से जुड़ी एक उभरती हुई सुरक्षा चुनौती के रूप में वर्णित किया, इन आरोपों को पाकिस्तान ने नकार दिया है।
 

फिर 2016 के हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन अभूतपूर्व जांच के दायरे में आ गईं, जब महबूबा मुफ्ती पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार की प्रमुख थीं। तब हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की 8 जुलाई 2016 को हुई मौत ने घाटी में महीनों तक चले विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के बीच झड़पों के दौरान सुरक्षा बलों ने बार-बार पेलेट गन का इस्तेमाल किया।

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संसद और पूर्व जम्मू कश्मीर विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों से पता चला कि 2016 के प्रदर्शनों के दौरान 1200 से अधिक लोग आंखों में चोट लगने से घायल हुए, जबकि कई हजार लोगों के शरीर के अन्य हिस्सों में छर्रे लगने से चोटें आईं।
 

डॉक्टरों ने मरीजों की इस भारी संख्या को आंखों में चोट लगने की अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक घटना बताया, जिसके चलते उन्होंने कई महीनों में सैकड़ों आपातकालीन सर्जरी कीं। मानवाधिकार संगठनों ने एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच ने पेलेट गन के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा कि इस हथियार के व्यापक प्रसार के कारण यह स्वाभाविक रूप से अंधाधुंध हमला करने वाला बन जाता है।
 

कश्मीर पर अपनी 2018 की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने भारत से गंभीर चोटों के कारण छर्रे दागने वाली शाटगनों के उपयोग की समीक्षा करने का आग्रह किया था।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

Buying vs Renting Real Estate Guide: बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में घर खरीदना लोगों का सपना होता है। कई लोग इसे ‘इमोशनल ओनरशिप’ से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे केवल ‘फाइनेंशियल रिटर्न’ के नजरिए से देखते हैं।

लेकिन क्या मेट्रो शहरों में आज की तारीख में घर खरीदना फायदे का सौदा है, या फिर किराये पर रहकर पैसों को शेयर बाजार या अन्य ऑप्शन में निवेश करना ज्यादा समझदारी है? आइए इसे EMI-to-Rent Ratio, रेंटल यील्ड और रियल-लाइफ कैलकुलेशन से समझते हैं।

किराए पर रहना vs घर खरीदना: गणित क्या कहता है?

इसे समझने के लिए ₹1 करोड़ की कीमत वाले 2BHK फ्लैट का उदाहरण लेते हैं:

सिनेरियो A: अगर आप घर खरीदते हैं

प्रॉपर्टी की कीमत: ₹1 करोड़

डाउन पेमेंट (20%): ₹20 लाख (अपनी बचत से)

होम लोन (80%): ₹80 लाख (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए)

मासिक EMI: लगभग ₹69,400 प्रति महीना

अन्य खर्च: मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (₹6-8 लाख एक्स्ट्रा)।

20 साल में कुल भुगतान: ₹80 लाख के लोन पर आप 20 साल में लगभग ₹86.5 लाख केवल ब्याज देंगे। यानी कुल भुगतान ₹1.66 करोड़ होगा (प्रिंसिपल + इंटरेस्ट)।

सिनेरियो B: अगर आप किराये पर रहते हैं और बाकी पैसा इन्वेस्ट करते हैं

मासिक किराया: भारत के मेट्रो शहरों में औसतन रेंटल यील्ड 2.5% से 3% होती है। यानी ₹1 करोड़ के मकान का मासिक किराया लगभग ₹22,000 से ₹25,000 होगा।

बचत (EMI vs Rent Diff): EMI (₹69,400) और Rent (₹25,000) के बीच का अंतर = ₹44,400 प्रति महीना।

डाउन पेमेंट की बचत: डाउन पेमेंट के ₹20 लाख भी आपके पास निवेश के लिए बचते हैं।

कंपाउंडिंग का जादू: अगर आप ₹20 लाख जो डाउन पेमेंट की बचत से हुआ है उसे म्यूचुअल फंड में 12% सालाना रिटर्न पर 20 साल के लिए इन्वेस्ट करते हैं, तो यह रकम बढ़कर लगभग ₹1.93 करोड़ हो जाती है।

साथ ही अगर आप हर महीने बची हुई ₹44,400 की SIP (12% रिटर्न के साथ) 20 साल तक करते हैं, तो इससे लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड तैयार होता है। 20 साल बाद आपकी कुल वेल्थ ₹6.36 करोड़ होगी जो टैक्स और सालाना रेंट हाइक एडजस्ट करने के बाद भी एक बड़ा कॉर्पस आपके पास होगा।

EMI-to-Rent Ratio: क्या कहता है यह फॉर्मूला?

EMI-to-Rent Ratio यह तय करने का एक आसान तरीका है कि आपको घर खरीदना चाहिए या किराये पर रहना चाहिए:

EMI-to-Rent Ratio= मंथली Rent/ मंथली EMI

अनुपात 1 से 1.5 के बीच: अगर आपकी EMI और रेंट लगभग बराबर हैं, तो घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

अनुपात 2.5 से अधिक: बड़े शहरों में अक्सर EMI (₹70,000) किराए (₹25,000) से 2.8 गुना अधिक होती है। जब अनुपात इतना ज्यादा हो, तो वित्तीय दृष्टि से किराये पर रहना और सरप्लस पैसे को इन्वेस्ट करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें?

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

इमोशनल ओनरशिप बनाम फाइनेंशियल प्रैक्टिकैलिटी

भारत में घर सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ये रहे खुद के घर के फायदे:

  • सुरक्षा का अहसास: आपको कोई मकान मालिक खाली करने को नहीं कह सकता।
  • अपने हिसाब से बदलाव: आप इंटीरियर, रेनोवेशन या बदलाव अपनी पसंद से कर सकते हैं।
  • रिटायरमेंट एसेट: बुढ़ापे में रहने के लिए सिर पर पक्की छत रहती है।

किराये के घर के फायदे

  • जॉब फ्लेक्सिबिलिटी: अगर आपकी नौकरी बेंगलुरु से गुड़गांव शिफ्ट होती है, तो आप बिना किसी परेशानी के मूव कर सकते हैं।
  • बेहतर लोकेशन: जितने किराए में आप किसी प्रीमियम लोकेशन पर रह सकते हैं, उतना महंगा घर खरीदना आपकी क्षमता से बाहर हो सकता है।

आपके लिए क्या सही है?

आपको घर तब खरीदना चाहिए जब आपके पास इनकम का परमानेंट सोर्स हो, आप अगले 10-15 साल उसी शहर में बसना चाहते हैं, आपके पास डाउन पेमेंट का पर्याप्त फंड है, और आपके लिए मानसिक शांति वित्तीय रिटर्न से ज्यादा मायने रखती है।

वहीं आपको किराये पर तब रहना चाहिए जब आपकी उम्र 20-35 साल के बीच है, करियर में ग्रोथ और सिटी चेंज की संभावना है, और आप बचे हुए पैसों (EMI और रेंट के अंतर) को अनुशासित तरीके से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।