
“उपर वाले के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं” यह उक्ति सारांश जैन के लिए सही साबित हुई जब मंगलवार का दिन था और हर मंगलवार की तरह तब सारांश हनुमान मंदिर में प्रार्थना कर रहे थे जब चयनकर्ताओं ने टीम की घोषणा की। मध्य-प्रदेश के अनुभवी ऑफ स्पिनर सारांश जैन को श्रीलंका में होने वाली श्रृंखला के लिए मंगलवार को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया, जो घरेलू क्रिकेट में पिछले एक दशक में उनके शानदार प्रदर्शन का नतीजा है।
चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य-प्रदेश की रणजी ट्रॉफी विजेता टीम के प्रमुख सदस्य रहे लंबे कद के Off-Spinner सारांश ने हाल ही में भारत A के श्रीलंका दौरे के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए दो मैचों में छह विकेट लेने के साथ एक पारी में नाबाद 70 रन भी बनाए थे।
साल 2014 में जब सारांश जैन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए थे तो उन्होंने घर पर फोन लगाया था। उनके पिता सुबोध मुंह के कैंसर से ग्रसित हो गए थे। लेकिन उनके परिवार ने उनको यह नहीं बताया ताकि उनका प्रदर्शन में गिरावट ना आ जाए। जब सारांश घर पहुंचे तो उनके पिता सुबोध के बारे में जानकर भौंजक्के रह गए।
Saransh Jain has earned his maiden Test call-up
Take a look at the new off-spinner, who set the stage on fire with his stunning 5/49 in the Duleep Trophy final. pic.twitter.com/VIlTxFDhAy
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) July 28, 2026
दिलचस्प बात यह है कि सारांश के पिता सुबोध भी मध्य प्रदेश के पूर्व ऑफ-स्पिनर रहे हैं और उनको यह बात सालती रही कि वह राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। लेकिन उन्होंने अपनी असफलता पर चिंतन करने से बेहतर बेटे की कुशलता पर मेहनत करना समझा। वह ही अपने बेटे के कोच है।
सारांश के पिता सुबोध ने 9 रणजी ट्रॉफी मैचों में 23 विकेट लिए थे। उन्होंने अपने बेटे को कोचिंग देनी शुरु की लेकिन भारतीय टेस्ट गेंदबाजी क्रम खासकर स्पिन गेंदबाजी का- इतना सुदृढ़ था कि इसका किला भेदना असंभव था। रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जड़ेजा ही टीम के लिए इतने विकेट निकाल देते थे कि कुलदीप यादव तक के 10 साल के करियर में 18 मैच हैं।
ऐसे में सारांज को 30 प्लस के बाद जाकर मौका मिला। अमूमन भारतीय चयनकर्ता इतनी उम्र के बाद किसी पर मेहरबान नहीं होते। लेकिन सारांश जैन का केस अलग था।

