Gold Outlook: सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4600 डॉलर के पार, लेकिन क्या यह तेजी जारी रहेगी?

Gold Outlook: गोल्ड की कीमत 4,600 डॉलर के पार हो गई है। मई के बाद पहली बार सोने का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। इसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का बड़ा हाथ है। अनुमान है कि लंबी अवधि में कर्ज की कॉस्ट कम करने के लिए अमेरिकी सरकार बॉन्ड बाजार में हस्तक्षेप बढ़ा सकती है। इसका असर सोने की कीमतों पर दिखा है।

25 अगस्त यानी मंगलवार को स्पॉट 4,668 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। भारतीय समय के मुताबिक, 4:15 बजे सोने का भाव 4,637 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए बड़ा एलान किया था। उसने कहा था कि सरकार लंबी अवधि के ज्यादा बॉन्ड बायबैक करेगी।

सरकार के इस कदम का मतलब है कि वह लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड को नियंत्रण में रखेगी। इससे इनवेस्टर्स के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या बॉन्ड मार्केट हाई यील्ड के साथ पूरी तरह से एडजस्ट नहीं होगा और इस एडजस्टमेंट का कुछ असर आखिर में डॉलर पर पड़ेगा? चूंकि गोल्ड के लिए सरकार या करेंसी से जुड़ा कोई रिस्क नहीं है, जिससे आखिर में इससे फायदा होगा।

सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त को अमेरिकी बाजार के ओपन होने के 20 मिनट के अंदर एक इनवेस्टर ने ऑप्शंस में एक बड़ा सौदा (Trade) किया। इसमें एसपीडीआर गोल्ड शेयर्स ईटीएफ या जीएलडी के 1,16,000 कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल थे। ट्रेडर ने 18 सितंबर के 420 डॉलर के कॉल के करीब 1,16,000 कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे। इससे 20.2 करोड़ डॉलर का प्रीमियम कलेक्ट हुआ। उसने इस पैसा का इस्तेमाल 430 डॉलर के कॉल के उतने ही कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदने के लिए किया।

इस ट्रांजेक्शन में 5.8 करोड़ डॉलर का नेट क्रेडिट बना। यह दरअसल GLD के शॉर्ट टर्म आउटलुक पर आधारित एक बेयरिश कॉल स्प्रेड था। इसमें ट्रेडर ने 420 डॉलर का कॉल बेचा, जो ट्रेड एग्जिक्यूट होने के समय पहले से मार्केट में थे। इससे इफेक्टिव ब्रेक इवन करीब 425 डॉलर आता है।

इस बड़े पोजीशन से जो संकेत निकलता है उसका मतलब यह नहीं है कि सोना पक्के तौर पर क्रैश की तरफ बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि लगातार तेजी के बाद ट्रेडर को जीएलडी में गिरावट आने का अनुमान है या कम से कम सितंबर एक्सपायरी तक इसके करीब 425 डॉलर के नीचे जाने का अनुमान है। सीएनबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह मतलब निकाला है।

बाजार तब कंट्रेरियन दांव ऐसे वक्त लगा रहा है, जब गोल्ड में तेजी दिख रही है। गोल्ड में तेजी के लिए अनुकूल स्थिति अभी खत्म नहीं हुई है। बॉन्ड बाजार में जो उथल-पुथल दिख रही है, उससे यील्ड को काबू में रखने और डॉलर पर दबाव के बगैर अपने कर्ज को संभालने की अमेरिकी सरकार की क्षमता पर नए सवाल उठे हैं। इससे एक बार फिर सुरक्षित निवेश के गोल्ड में दिलचस्पी बढ़ी है।

कई एनालिस्ट्स का मानना है कि गोल्ड में आई हालिया तेजी का संबंध डिबेसमेंट ट्रेड (debasement trade) की वापसी से है। इसका मतलब है कि डॉलर से जुड़ी चिंता के चलते गोल्ड को सपोर्ट मिलता रहेगा। लेकिन, इसमें एक बाधा है। इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा होने पर सोने जैसा नॉन-यील्डिंग एसेट रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि छोटी अवधि में सोने के आउटलुक के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?

US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।

वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।

सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी

एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।

चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।

क्या रूस से मिलेगा सहारा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।

महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।

ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव

भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।

कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।

बिना मेकअप लुक को निखारने का आसान तरीका, बालों में करवाएं ये 5 हेयरकलर!

बालों का रंग बदलते ही पूरा लुक काफी अलग और फ्रेश नजर आ सकता है। इस कारण आजकल कई लोग अपने बालों में नया कलर या हाइलाइट्स करवाना पसंद करते हैं। लेकिन सिर्फ ट्रेंड देखकर कोई भी हेयर कलर चुन लेना सही नहीं होता। जो रंग किसी और पर बहुत खूबसूरत लग रहा है, जरूरी नहीं कि वह आपकी स्किन पर भी उतना ही अच्छा लगे।

हेयर कलर चुनते समय अपनी स्किन की अंडरटोन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। भारतीय स्किन टोन अलग-अलग तरह के होते हैं और इनमें वॉर्म, कूल और न्यूट्रल अंडरटोन भी हो सकती हैं। सही शेड चुनने से चेहरा ज्यादा फ्रेश और निखरा हुआ दिख सकता है।

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कैरामेल ब्राउन (Caramel Brown)

अपने काले या गहरे बालों में हल्का और खूबसूरत बदलाव चाहती हैं, तो कैरामेल ब्राउन एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इसे पूरे बालों पर लगाने की बजाय हल्के हाइलाइट्स के रूप में भी करवाया जा सकता है। चेहरे के आसपास कैरामेल हाइलाइट्स करवाने से बालों के साथ चेहरा भी ज्यादा निखरा हुआ नजर आ सकता है। धूप में इसका गोल्डन-ब्राउन रंग और ज्यादा उभरकर दिखाई देता है, जिससे बाल चमकदार और स्टाइलिश लगते हैं। यह शेड खासकर वॉर्म अंडरटोन वाली स्किन पर अच्छा लगता है और भारतीय गहरे बालों के साथ भी आसानी से मैच हो जाता है।

मोका ब्राउन (Mocha Brown)

ज्यादा चमकीला या गोल्डन कलर पसंद नहीं है, तो मोका ब्राउन चुन सकती हैं। यह ब्राउन का थोड़ा डार्क, सॉफ्ट और नेचुरल शेड है, जो बालों को बिना ज्यादा लाल या पीला दिखाए एक अच्छा लुक देता है। इससे काले बालों में हल्की डेप्थ और चमक आती है, लेकिन रंग बहुत ज्यादा अलग नजर नहीं आता। कूल या न्यूट्रल अंडरटोन वाली स्किन पर यह शेड खास तौर पर खूबसूरत लग सकता है।

डीप ऑबर्न (Deep Auburn)

बालों में हल्का रेड टच चाहती हैं, लेकिन बहुत चमकीला लाल या कॉपर कलर नहीं चाहतीं, तो डीप ऑबर्न अच्छा रहेगा। इसमें ब्राउन और रेड दोनों रंगों का खूबसूरत ब्लेंड होता है, इसलिए यह बालों को एक साथ नेचुरल और स्टाइलिश लुक देता है। मीडियम से लेकर गहरी स्किन टोन पर इसका डार्क रेड-ब्राउन रंग काफी अच्छा लगता है। भारतीय बालों के गहरे रंग के साथ यह शेड आसानी से घुल-मिल जाता है। धूप में इसके रेड टोन हल्के से उभरते हैं, जिससे बालों में अच्छी चमक दिखाई देती है।

चॉकलेट ब्राउन (Chocolate Brown)

बालों में बदलाव चाहती हैं, लेकिन बहुत ज्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहतीं, तो चॉकलेट ब्राउन बढ़िया शेड है। इसका रंग काफी हद तक नेचुरल ब्राउन जैसा लगता है, इसलिए यह पहली बार हेयर कलर करवाने वालों के लिए भी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। चॉकलेट ब्राउन बालों को सॉफ्ट, चमकदार और थोड़ा ज्यादा रिच लुक देता है। वॉर्म अंडरटोन वाली स्किन पर इसका गहरा ब्राउन रंग पर अच्छा लगता है और चेहरे को सॉफ्ट लुक दे सकता है। कूल अंडरटोन के लिए ऐसा चॉकलेट ब्राउन चुनना बेहतर हो सकता है, जिसमें गोल्डन टोन कम हो।

बरगंडी (Burgundy)

बालों में थोड़ा बोल्ड लेकिन एलिगेंट चेंज चाहती हैं, तो बरगंडी ट्राई कर सकती हैं। यह गहरे लाल और बैंगनी रंग का खूबसूरत मिक्स होता है, जो बालों को एक अलग और अट्रैक्टिव लुक देता है। भारतीय गहरी और मीडियम स्किन टोन पर यह शेड काफी अच्छा लग सकता है। घर के अंदर बरगंडी बालों का रंग नॉर्मल दिखता है, लेकिन धूप में इसका लाल-बैंगनी रंग साफ दिखाई देता है।

Tempsens Instruments IPO Allotment: 184 गुना सब्सक्राइब, लेटेस्ट GMP के साथ जानिए अलॉटमेंट चेक करने का पूरा प्रोसेस

Tempsens Instruments IPO Allotment: इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट सेक्टर की Tempsens Instruments के IPO के लिए आज, 25 अगस्त को शेयरों का अलॉटमेंट हो सकता है। ₹650 करोड़ के इस IPO को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। इश्यू कुल 184.07 गुना सब्सक्राइब हुआ है।

सबसे ज्यादा दिलचस्पी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी NII की रही। इस कैटेगरी में IPO 314.44 गुना सब्सक्राइब हुआ। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB ने 302.88 गुना बोली लगाई। रिटेल इनवेस्टर्स की कैटेगरी भी 60.69 गुना सब्सक्राइब हुई।

Tempsens Instruments IPO की लिस्टिंग

कंपनी ने IPO के लिए ₹285 से ₹300 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। IPO 20 अगस्त को खुला था। 24 अगस्त को इसकी बोली बंद हो गई। अब निवेशकों की नजर अलॉटमेंट पर है। कंपनी के शेयर 28 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

GMP से लिस्टिंग पर कितना फायदा दिख रहा है?

Tempsens Instruments के शेयर को ग्रे मार्केट में भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। InvestorGain के मुताबिक, 25 अगस्त को इसका GMP करीब ₹317 था।

कंपनी के IPO का अपर प्राइस बैंड ₹300 है। ऐसे में ₹317 का GMP जोड़ें तो अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब ₹617 बनती है। यानी ₹300 के IPO Price के मुकाबले करीब 105.67% प्रीमियम का अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि, यह रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है।

Tempsens Instruments IPO अलॉट स्टेटस कैसे चेक करें?

अगर आपने भी इस IPO में पैसा लगाया है, तो अलॉटमेंट स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। इसके लिए KFin Technologies और NSE की वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

KFin Technologies से कैसे चेक करें?

KFin Technologies इस IPO की Registrar है।

  • स्टेप 1: KFin Technologies की IPO Status वेबसाइट खोलें।
  • स्टेप 2: IPO की लिस्ट में Tempsens Instruments चुनें।
  • स्टेप 3: PAN, Application Number या DP ID/Client ID में से कोई विकल्प चुनें।
  • स्टेप 4: मांगी गई जानकारी भरें।
  • स्टेप 5: Submit पर क्लिक करें।

इसके बाद आपका अलॉटमेंट स्टेटस स्क्रीन पर दिखाई देगा।

NSE से कैसे चेक करें?

NSE की वेबसाइट पर भी IPO से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है।

  • NSE के IPO Bid Details सेक्शन में जाएं।
  • Equity और SME IPO Bid Details का विकल्प चुनें।
  • Tempsens Instruments को चुनें।
  • अपनी एप्लिकेशन डिटेल्स डालें।
  • सबमिट करें और डिटेल देखें।

TCS Share Price: पोर्शे के साथ बड़ी डील के बाद भी क्यों गिरा TCS का शेयर? सिटी और HSBC ने जताई ये बड़ी चिंता

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LPG e-KYC Deadline: LPG ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! e-KYC की डेडलाइन बढ़ी, 31 अगस्त तक निपटा लें ये काम, वरना महंगा पड़ सकता है सिलेंडर

LPG e-KYC Deadline Extended: घरेलू LPG गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अगर आपने अभी तक अपने LPG कनेक्शन की आधार (Aadhaar) आधारित e-KYC पूरी नहीं की है, तो अब आपके पास कुछ और समय है। सरकार ने e-KYC की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है।

इसका फायदा Indane, Bharat Gas और HP Gas के घरेलू ग्राहकों को मिलेगा। इससे पहले e-KYC की डेडलाइन 16 अगस्त थी, जिसे बढ़ाकर 23 अगस्त किया गया था। अब ग्राहकों को एक और मौका दिया गया है।

31 अगस्त तक e-KYC नहीं की तो क्या होगा?

अगर आपने 31 अगस्त तक e-KYC पूरी नहीं की, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपका LPG कनेक्शन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, घरेलू दर पर मिलने वाले LPG सिलेंडर के लाभ में परेशानी आ सकती है। जानकारों का कहना है कि e-KYC लंबित रहने पर सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी में भी दिक्कत आने की संभावना है। कुछ मामलों में ग्राहक को घरेलू कीमत का लाभ नहीं मिल सकता और सत्यापन पूरा होने तक अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यही वजह है कि LPG ग्राहक इस काम को आखिरी तारीख तक टालने के बजाय समय रहते पूरा कर लें।

आखिर सरकार e-KYC क्यों करा रही है?

e-KYC प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू LPG कनेक्शन वास्तविक ग्राहकों के नाम पर ही हों। साथ ही घरेलू इस्तेमाल के लिए मिलने वाले सस्ते सिलेंडरों का गलत इस्तेमाल न हो। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि घरेलू LPG सिलेंडरों को अवैध तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल या दोबारा बेचने के लिए इस्तेमाल न किया जाए। घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में काफी अंतर होने के कारण यह सत्यापन अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Indane LPG की e-KYC घर बैठे कैसे करें?

अगर आपके पास Indane LPG कनेक्शन है, तो e-KYC घर बैठे मोबाइल से की जा सकती है। इसके लिए IndianOil ONE ऐप और Aadhaar FaceRD ऐप की जरूरत होगी।

घर बैठे ऐसे करें e-KYC

1. IndianOil ONE ऐप डाउनलोड करें

Indane ग्राहक IndianOil ONE ऐप और Aadhaar FaceRD ऐप का इस्तेमाल करके घर बैठे e-KYC प्रोसेस पूरा कर सकते हैं। इस प्रोसेस में आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन शामिल है। सबसे पहले अपने उस मोबाइल नंबर और ईमेल से IndianOil ONE ऐप पर रजिस्ट्रेशन करें, जो आपके LPG कनेक्शन से जुड़ा हुआ है।

2. अपना 16 अंकों का LPG ID डालें

अपने LPG अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल का इस्तेमाल करके IndianOil ONE ऐप पर रजिस्टर करें। अपना 16-digit LPG ID दर्ज करें। यह नंबर आपके LPG कैश मेमो या सब्सक्रिप्शन वाउचर पर मिल सकता है।

3. My Profile में जाएं

ऐप में आपकी कंज्यूमर डिटेल दिखाई देने के बाद My Profile खोलें और वहां Re-KYC का विकल्प चुनें।

4. निर्देश पढ़कर सहमति दें

फिर e-KYC से जुड़े निर्देश और जरूरी कंसेप्ट को पढ़ें और स्वीकार करें।

5. Face Authentication पूरा करें

इसके बाद Face Authentication का ऑप्शन चुनें। आधार आधारित फेस वेरिफिकेशन के लिए Aadhaar FaceRD ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

घर से नहीं हो पा रही तो क्या करें?

अगर किसी ग्राहक को ऑनलाइन e-KYC करने में परेशानी हो रही है, तो वह अपने नजदीकी LPG डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाकर भी प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इसके अलावा अगली बार LPG सिलेंडर की डिलीवरी के समय ग्राहक LPG डिलीवरी कर्मचारी से e-KYC में मदद भी मांग सकता है।

Bharat Gas और HP Gas ग्राहकों के लिए भी लागू

यह e-KYC की समयसीमा Indane, Bharat Gas और HP Gas के घरेलू ग्राहकों से जुड़ी है। इसलिए अगर आपका कनेक्शन Bharat Gas या HP Gas का है, तो 31 अगस्त की डेडलाइन को नजरअंदाज न करें। अगर LPG का घरेलू कनेक्शन है और e-KYC अभी बाकी है, तो 31 अगस्त 2026 तक यह काम जरूर पूरा कर लें, ताकि आगे घरेलू दर पर सिलेंडर मिलने, बुकिंग या डिलीवरी में परेशानी न हो।

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POCO F9 Pro और F9 Ultra की लॉन्च डेट कंफर्म! 16GB RAM और 5x Optical Zoom के साथ होगी एंट्री

POCO के फैंस काफी समय से कंपनी की F9 सीरीज के लॉन्च का इंतजार कर रहे हैं। अब कंपनी ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि वह 1 सितंबर 2026 को POCO F9 सीरीज को दुनियाभर में लॉन्च करेगी। कंपनी ने यह भी बताया है कि वह POCO F9 Pro और POCO F9 Ultra को लॉन्च करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि ये दोनों फोन Redmi K100 सीरीज के रीब्रांडेड वर्जन हो सकते हैं, जिसे अभी सिर्फ चीन में लॉन्च किया गया है। यहां हम आपको आने वाले इन स्मार्टफोन्स के बारे में अब तक मिली सभी जानकारी बता रहे हैं।

Poco F9 सीरीज 1 सितंबर को होगी लॉन्च

Xiaomi के सब-ब्रांड POCO ने कंफर्म किया है कि Poco F9 Pro और Poco F9 Ultra को ग्लोबल मार्केट में 1 सितंबर को रात 8 बजे GMT (भारत में 2 सितंबर को रात 1:30 बजे) लॉन्च किया जाएगा। खास बात यह है कि कई लीक्स में दावा किया गया है कि कंपनी स्टैंडर्ड Poco F9 को लॉन्च नहीं करेगी।

Poco F9 सीरीज के कलर और स्पेसिफिकेशन्स

टीजर के मुताबिक, Poco F9 सीरीज को White और Dark Cherry कलर ऑप्शन में लॉन्च किया जाएगा, जो Redmi K100 सीरीज जैसा ही है। हैंडसेट के पीछे ‘Sound by Bose’ की ब्रांडिंग दिख रही है, जिससे पता चलता है कि इसकी ऑडियो ट्यूनिंग US कंपनी के साथ मिलकर की गई है।

स्पेसिफिकेशन की बात करें तो, Poco F9 Pro में 185Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.59-इंच का QHD+ प्लास्टिक OLED डिस्प्ले होने की उम्मीद है। जबकि F9 Ultra में इससे भी बड़ी 6.85-इंच की स्क्रीन हो सकती है, जिसका रिजोल्यूशन 2608 × 1200 पिक्सल होगा।

दोनों फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया जा सकता है। इनमें 16GB तक RAM और 512GB तक स्टोरेज भी मिल सकता है।

हालांकि, Pro मॉडल के प्रोसेसर को लेकर कुछ अनिश्चितता है। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि Poco F9 Pro में Snapdragon 8 Elite Gen 5 का एक खास वर्जन (binned version) इस्तेमाल हो सकता है, जिसे Snapdragon 8 Elite Gen 5 V कहा जा रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि यही चिप चीन में Redmi K100 Pro में भी इस्तेमाल होगी।

कैमरे की बात करें तो, Poco F9 Pro में पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS के साथ 50MP का मेन कैमरा, 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम व OIS वाला 50MP टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

वहीं, Poco F9 Ultra में ज़्यादा बेहतर ज़ूम सेटअप मिल सकता है। इसमें Pro मॉडल जैसा ही 50MP का प्राइमरी कैमरा होने की उम्मीद है, साथ ही 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 5x ऑप्टिकल ज़ूम को सपोर्ट करने वाला एक और 50MP का टेलीफोटो सेंसर भी हो सकता है।

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Flipkart पर ₹69,900 वाला iPhone 16 हुआ सस्ता! मिल रहा आधे से भी कम दाम में, जानें कीमत और ऑफर

Flipkart पर Apple के iPhone 16 की कीमत में बड़ी कटौती की गई है, जिससे यह अभी उपलब्ध सबसे आकर्षक प्रीमियम स्मार्टफोन डील्स में से एक बन गया है। हालांकि, यह हैंडसेट डिस्काउंटेड कीमत पर लिस्टेड है, लेकिन खरीदार एलिजिबल बैंक ऑफर और एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा उठाकर इसकी असल कीमत को और कम कर सकते हैं। मौजूदा ऑफर के अनुसार, एलिजिबिलिटी के आधार पर iPhone 16 को ₹34,817 की प्रभावी कीमत पर खरीदा जा सकता है।

Flipkart पर iPhone 16 की डील

iPhone 16 का 128GB वाला मॉडल अभी Flipkart पर 65,900 रुपये में मिल रहा है, जबकि इसकी असली कीमत 69,900 रुपये थी। यानी फोन पर सीधे 4,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है।

इसके अलावा, Flipkart Axis Bank के योग्य कार्ड से पेमेंट करने पर 3,833 रुपये तक का इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल रहा है। इस ऑफर के बाद iPhone 16 की प्रभावी कीमत घटकर 62,067 रुपये हो जाती है।

एक्सचेंज ऑफर से कीमत ₹35,000 से भी कम

अगर आप पुराने iPhone को अपग्रेड करके नया iPhone 16 खरीदना चाहते हैं, तो Flipkart के Exchange ऑफर के जरिए काफी बचत कर सकते हैं। मौजूदा ऑफर के मुताबिक, अच्छी कंडीशन वाले Apple iPhone 13 को एक्सचेंज करने पर 27,250 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है।

अगर इस अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू के साथ Flipkart Axis Bank कार्ड का डिस्काउंट भी जोड़ दिया जाए, तो iPhone 16 की प्रभावी कीमत घटकर सिर्फ 34,817 रुपये रह जाती है।

हालांकि, ध्यान रखें कि आपको मिलने वाली अंतिम एक्सचेंज वैल्यू फोन की कंडीशन, पिकअप के समय होने वाले वेरिफिकेशन और फोन के सभी फीचर्स व एक्सेसरीज के सही तरीके से काम करने पर निर्भर करेगी।

iPhone 16 की कीमत का पूरा हिसाब

  • ओरिजिनल कीमत: 69,900 रुपये
  • Flipkart पर बिक्री कीमत: 65,900 रुपये
  • इंस्टेंट डिस्काउंट: 4,000 रुपये
  • Flipkart Axis Bank डिस्काउंट: 3,833 रुपये तक
  • बैंक ऑफर के बाद कीमत: 62,067 रुपये
  • Apple iPhone 13 की एक्सचेंज वैल्यू: 27,250 रुपये तक
  • एक्सचेंज के बाद प्रभावी कीमत: 34,817 रुपये

क्या आपको इसे खरीदना चाहिए?

iPhone 16 में Apple का लेटेस्ट जनरेशन चिपसेट, बेहतर कैमरे, Dynamic Island और Apple Intelligence का सपोर्ट मिलता है। ऐसे में पुराने iPhone इस्तेमाल कर रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा अपग्रेड हो सकता है। अगर आप Flipkart Axis Bank ऑफर के लिए एलिजिबल हैं और आपके पास एक्सचेंज करने के लिए iPhone 13 है, तो यह डील काफी फायदेमंद हो सकती है। इस ऑफर के साथ iPhone 16 की प्रभावी कीमत 34,817 रुपये तक आ सकती है, जो Apple के इस स्टैंडर्ड iPhone के लिए फिलहाल मिलने वाली कम कीमतों में से एक है।

हालांकि, ध्यान रखें कि एक्सचेंज वैल्यू और बैंक डिस्काउंट आपकी एलिजिबिलिटी पर निर्भर करते हैं और बिना किसी पूर्व सूचना के इनमें बदलाव हो सकता है।

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योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें इसका समय, कहां दिखेगा और इसके बुरे प्रभाव से बचने के उपाय

Chandra Grahan 2026: अगस्त के महीने के साथ ही सावन का महीना भी अब समापन की ओर बढ़ रहा है। यह महीना धार्मिक महत्व के साथ ही खगोलीय कारणों से भी खास रहा है। इस अगस्त में हरियाली अमावस्या के दिन साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगा था। इसके बाद अब सावन माह की पूर्णिमा तिथि एक और खगोलीय घटना की गवाह बनेगी।

सावन की पूर्णिमा 28 अगस्त को होगी और इसी दिन साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी होगा। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चांद का ज्यादातर हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाएगा। यह पूरी घटना लगभग 5 घंटे 38 मिनट तक चलेगी। साल का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण लगभग 3 घंटे 18 मिनट तक चलेगा।

भारत में चंद्र ग्रहण 2026 शुरू और खत्म होने का समय

साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण दिन में होगा, इसलिए भारत के ज्यादातर लोग इसे नहीं देख पाएंगे, लेकिन इसके खगोलीय समय को इंडियन स्टैंडर्ड टाइम में बदला जा सकता है। 28 अगस्त 2026 को IST के हिसाब से ग्रहण का शेड्यूल इस तरह है:

पेनमब्रल ग्रहण शुरू : 6:53 AM

पार्शियल लूनर एक्लिप्स शुरू : 8:03 AM

मैक्सिमम एक्लिप्स : 9:42 AM

पार्शियल एक्लिप्स खत्म : 11:21 AM

पेनमब्रल एक्लिप्स खत्म : 12:31 PM

चंद्र ग्रहण 2026 कितने समय तक रहेगा?

ग्रहण तब शुरू होता है जब चांद पृथ्वी की पेनमब्रल शैडो के बिल्कुल किनारे पर आता है, और तब खत्म होता है जब चांद उस शैडो से निकलता है, लगभग साढ़े पांच घंटे बाद – ठीक-ठीक कहें तो पांच घंटे और 38 मिनट।

जो हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है वह बहुत छोटा है। चांद IST के हिसाब से सुबह 8.03 am पर पृथ्वी की अम्ब्रा में आना शुरू करेगा और 11.21 am पर अम्ब्रा से बाहर निकलेगा। आंशिक “चंद्र ग्रहण” लगभग 3 घंटे और 18 मिनट तक रहेगा। इसका मुख्य हिस्सा सुबह करीब 9:42 बजे IST पर होगा। इस समय, पृथ्वी की अम्ब्रल शैडो चांद की सतह का लगभग 96.2% हिस्सा ढक लेगी।

क्या यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा?

नहीं। 28 अगस्त को होने वाली यह घटना सिर्फ नाम का आंशिक चंद्र ग्रहण है। चंद्रमा के आकार का बहुत बड़ा भाग गहरी छाया में चला जाएगा, इसलिए यह लगभग पूर्ण ग्रहण जैसा लग सकता है।

अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण कहां दिखेगा?

अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण की सबसे अच्छी दृश्यता उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में होगी। एशिया के कुछ पश्चिमी हिस्सों में भी घटना के कुछ हिस्से देखे जा सकते हैं। दृश्यता इस बात पर निर्भर करती है कि ग्रहण के हर चरण पर चंद्रमा स्थानीय क्षितिज से ऊपर है या नहीं।

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