चमोली में हाइड्रो प्रोजेक्ट पर बड़ा हादसा, सुरंग में गले तक भरा पानी और गाद, 7 मजदूरों की मौत, 6 लापता

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट साइट पर बन रही सुरंग में पानी और मलबा घुसने से सात मजदूरों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, अभी 6 लापता मजदूरों की तलाश जारी है।

शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, पिपलकोटी इलाके में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर कुल 22 मजदूर फंस गए थे। बाद में सभी 22 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात की मौत की पुष्टि हुई है और 11 घायल हैं। फिलहाल, घायल मजदूरों का इलाज पास के अस्पताल में चल रहा है।

वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट का निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) कर रही है।

रेस्क्यू टीमों ने ऑपरेशन तेज किया

घटना के बाद पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और दूसरी एजेंसियां ​​मौके पर पहुंचीं। ऑपरेशन में मदद के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस और सेना की टीमों को भी तैनात किया गया।

NDRF इंस्पेक्टर अमृत लाल मीणा ने बताया कि सुरंग में पानी काफी ज्यादा भरा हुआ था और पानी का स्तर छाती तक पहुंच गया था। बचाव दल के सदस्य सुरंग के अंदर गए और उन शवों को बाहर निकाला जो पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे।

मीणा ने मीडिया को बताया, “हम पानी के बीच से गुजरे और टीम के कुछ सदस्यों के पास पानी के अंदर ऑपरेशन करने के लिए खास उपकरण थे। चारों शव पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे, इसलिए हम अंदर गए और घटना स्थल से चारों शवों को बाहर निकाला।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर चिंता जताई। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए।

आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटरों से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : बाजार के लिए मिले-जुले संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की नरमी देखने को मिल रही है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर 720 करोड़ की बिकवाली देखने को मिली है। FIIs की नेट शॉर्ट पोजिशन भी बढ़ी है। उधर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का मुद्दा सुलझाने की डिप्लोमैटिक कोशिशों की बीच कच्चे तेल में करीब दो फीसदी की गिरावट आई है। इसके भाव 87 डॉलर के नीचे आ गए हैं।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

13 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में निचले स्तरों पर खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स दिन के निचले स्तरों से उबर कर लगभग सपाट बंद हुए। निफ्टी 24,400 के स्तर के आसपास बंद हुआ। बैंकिंग,मेटल और फार्मा शेयरों में बिकवाली के दबाव की भरपाई FMCG,ITऔर रियल्टी शेयरों में खरीदारी से काफी हद तक हो गई। कारोबारी सेशन के अंत में सेंसेक्स 113.61 अंक या 0.15% बढ़कर 78,079.96 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 40.10 अंक या 0.16% गिरकर 24,395.85 पर बंद हुआ। ब्रॉडर मार्केट ने बेहतर प्रदर्शन किया और निफ्टी मिडकैप व स्मॉलकैप,दोनों इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

अमेरिकी बाजारों में अच्छी तेजी, एशिया में भी रौनक

टेक शेयरों में खरीदारी से अमेरिकी बाजारों में कल अच्छी तेजी दिखी। S&P 500 नए शिखर पर पहुंच गया। डाओ जोंस भी इंट्राडे में 54000 के ऊपर निकल गया। मेटा, माइक्रॉन और Netflix जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी से नैस्डैक ने आउटपरफॉर्म किया। उधर सुबह एशियाई बाजारों में भी रौनक देखने को मिली कोस्पी और निक्केई में करीब एक फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है।

सोने और चांदी की तेजी पर ब्रेक, US बॉन्ड यील्ड में भी नरमी

फेडरल रिजर्व की ओर से सितंबर में ब्याज बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने से सोने और चांदी की तेजी पर ब्रेक लगा है। कल के शिखर से सोने और चांदी में तीन फीसदी की गिरावट आई है। उधर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी नरमी दिखी है। डॉलर इंडेक्स 100 के करीब आ गया है।

टाटा मोटर्स PV के नतीजे मिलेजुले

टाटा मोटर्स PV के पहली तिमाही के नतीजे मिलेजुले रहे हैं। JLR के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद आय 9 फीसदी बढ़ी है। लेकिन ऊंची रॉ मटेरियल कॉस्ट से मार्जिन 230 बेसिस प्वाइंट्स घटकर 6.5% पर रहे हैं। कंपनी को इस अवधि में 150 करोड़ का फॉरेक्स घाटा भी हुआ है। कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि EV मांग बढ़ने से कुल घरेलू डिमांड बहुत मजबूत रही है।

मैक्स फाइनेंशियल के Q1 नतीजे अच्छे

पहली तिमाही में मैक्स फाइनेंशियल ने अच्छे नतीजे पेश किए हैं। VNB यानी वैल्यू फॉर न्यू बिजनेस में उम्मीद से ज्यादा 33 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। VNB मार्जिन भी अनुमान अधिक 20.1फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी के पार निकल गया है। वहीं, इसकी AUM 2 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।

वायदा की 8 कंपनियों के नतीजे आज

अशोक लेलैंड,वोल्टास,NMDC समेत वायदा की 8 कंपनियों के नतीजे आज आएंगे। वोल्टास का मुनाफा 59 फीसदी बढ़ सकता है। मार्जिन में भी सुधार की उम्मीद है।

पीरामल फार्मा में 1750 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

पीरामल फार्मा में आज बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। 6% हिस्सेदारी के लिए 1750 करोड़ का सौदा हो सकता है।

 रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को अच्छा रिस्पॉस

सरकार की 7,280 करोड़ रुपए की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इसमें L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई है। इस योजना के जरिए हर साल 6,000 मीट्रिक टन इंटीग्रेटेड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (Integrated Rare Earth Permanent Magnet) बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।

FII और DII फंड फ्लो

FIIs ने लगातार दूसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 510 करोड़ रुपये के शेयर बेचे,जबकि DIIs ने भारतीय इक्विटी मार्केट में खरीदारी का सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रखा और 4,353 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

Indian Overseas Bank Recruitment 2026: आईओबी 250 लोकल बैंक ऑफिसरों की भर्ती, जानें कब से कब तक कर सकेंगे आवेदन

Indian Overseas Bank Recruitment 2026: इंडियन ओवरसीज बैंक ने 2026-27 के भर्ती चक्र के तहत 250 लोकल बैंक ऑफिसर के पदों के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके मुताबिक, ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया 8 अगस्त से शुरू हो गई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 24 अगस्त, 2026 तक बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

चयनित उम्मीदवारों को जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-I में लोकल बैंक ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। उन्हें उसी राज्य में पोस्ट किया जाएगा जिसके लिए वे आवेदन करेंगे। कैंडिडेट सिर्फ एक राज्य में वैकेंसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती में तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात में खाली पद शामिल हैं। आईओबी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में आवेदन सिर्फ ऑनलाइन मोड से ही लिए जाएंगे।

इंडियन ओवरसीज बैंक लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026: जरूरी तारीखें

लोकल बैंक ऑफिसर पदों के लिए आवेदन करते समय कैंडिडेट्स को इन तारीखों का ध्यान रखना चाहिए:

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू : 8 अगस्त, 2026

एप्लीकेशन फीस पेमेंट शुरू : 8 अगस्त, 2026

ऑनलाइन अप्लाई करने की आखिरी तारीख : 24 अगस्त, 2026

एप्लीकेशन फीस पेमेंट की आखिरी तारीख : 24 अगस्त, 2026

आईओबी लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026: सिर्फ चार राज्यों में होगी

बैंक ने चार राज्यों में कुल 250 वैकेंसी निकाली हैं। कैंडिडेट्स को अपने चुने हुए राज्य की बताई गई लोकल भाषा में अच्छी जानकारी होनी चाहिए।

तमिलनाडु : 100 पद; तमिल जरूरी भाषा है।

कर्नाटक : 50 वैकेंसी; कन्नड़ जरूरी भाषा है।

महाराष्ट्र : 50 वैकेंसी; मराठी जरूरी भाषा है।

गुजरात : 50 वैकेंसी; गुजराती जरूरी भाषा है।

उम्मीदवार सिर्फ एक राज्य के लिए आवेदन कर सकते हैं। मेरिट लिस्ट राज्य वार और श्रेणी वार अलग-अलग तैयार की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को उनके चुने हुए राज्य में सेवा के पहले 12 साल या बताए गए सीनियर ग्रेड में प्रमोशन होने तक, जो भी पहले हो, नियुक्त किया जाएगा।

आईओबी लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026: चयन प्रक्रिया

चयन प्रक्रिया में एक ऑनलाइन परीक्षा, लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट (जहां भी लागू हो), और पर्सनल इंटरव्यू शामिल होगा। ऑनलाइन परीक्षा में 200 अंकों के 140 सवाल होंगे और कुल तीन घंटे का समय होगा। इसमें रीजनिंग और कंप्यूटर एप्टीट्यूड, जनरल/इकोनॉमी/बैंकिंग अवेयरनेस, डेटा एनालिसिस और इंटरप्रिटेशन, और अंग्रेजी पर पकड़ देखी जाएगी। गलत जवाब के लिए पेनल्टी भी होगी। पर्सनल इंटरव्यू 100 मार्क्स का होगा। फाइनल सिलेक्शन ऑनलाइन एग्जाम और इंटरव्यू के आधार पर होगा। इनका वेटेज 80:20 का रहेगा।

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SIP Calculator: SIP की एक किस्त छोड़ दी? यही गलती बाद में लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है

SIP Calculator: SIP शुरू करना आसान है। मुश्किल काम है उसे लगातार जारी रखना। कई बार महीने के आखिर में खर्च बढ़ जाते हैं। बैंक खाते में बैलेंस कम होता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि इस महीने रहने देते हैं, अगले महीने से फिर शुरू कर देंगे।

यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है। SIP में सिर्फ पैसा नहीं बढ़ता, समय भी आपके लिए काम करता है। जितनी जल्दी पैसा निवेश होता है, उतने ज्यादा साल उसे बढ़ने का मौका मिलता है। इसलिए एक किस्त मिस होने का नुकसान सिर्फ उस महीने तक नहीं रहता। कई साल बाद वही रकम बड़ी बन सकती है।

पहले समझिए नुकसान क्यों होता है

SIP की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग है। इसका मतलब है कि आपका पैसा सिर्फ रिटर्न नहीं कमाता, बल्कि उस रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता रहता है। यही वजह है कि शुरुआती सालों की हर किस्त सबसे ज्यादा अहम होती है।

अगर बीच में कोई किस्त नहीं जाती, तो उस पैसे का पूरा बढ़ने वाला सफर रुक जाता है।

₹1,000 की SIP में कितना नुकसान?

मान लीजिए आप हर महीने ₹1,000 की SIP करते हैं। निवेश की अवधि 20 साल है और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

अगर पहले साल की सिर्फ एक किस्त नहीं जाती, तो वह ₹1,000 करीब 20 साल बाद लगभग ₹9,650 बन सकती थी। यानी एक छोटी सी चूक भविष्य के करीब ₹8,650 के मौके को खत्म कर सकती है।

₹2,000 की SIP का हिसाब

यही उदाहरण ₹2,000 की SIP से समझिए। अगर पहले साल की एक किस्त छूट जाती है, तो उसकी संभावित वैल्यू करीब ₹19,300 हो सकती थी। यानी सिर्फ ₹2,000 बचाने के चक्कर में भविष्य के करीब ₹17,300 का नुकसान हो सकता है।

₹5,000 की SIP में असर और बड़ा

अब मान लीजिए आपकी SIP ₹5,000 महीने की है। अगर पहले साल की एक किस्त नहीं जाती, तो वही ₹5,000 करीब ₹48,200 तक पहुंच सकते थे। यानी भविष्य में लगभग ₹43,200 का संभावित अंतर पड़ सकता है।

तीन महीने SIP नहीं गई तो?

अब एक बड़ा उदाहरण देखते हैं। मान लीजिए आपकी SIP ₹5,000 महीने की है। पहले साल लगातार तीन महीने निवेश नहीं हुआ। यानी कुल ₹15,000 निवेश नहीं हो पाया।

अगर यही पैसा 20 साल तक 12% की दर से बढ़ता, तो उसकी संभावित वैल्यू करीब ₹1.45 लाख हो सकती थी। यानी उस वक्त ₹15,000 बचाने का फैसला आगे चलकर लाख रुपये से ज्यादा का फर्क पैदा कर सकता है। अगर शुरुआत में 6 किस्त चूक गए, तो नुकसान करीब 3 लाख तक का हो सकता है।

अलग-अलग SIP में एक किस्त छूटने का असर

मासिक SIP
20 साल बाद 1 छूटी किस्त की संभावित वैल्यू*

₹1,000₹9,650
₹2,000₹19,300
₹5,000₹48,200

*यह अनुमान 20 साल और 12% सालाना रिटर्न के आधार पर है। वास्तविक रिटर्न बाजार के हिसाब से अलग हो सकता है।

पैसे की दिक्कत हो तो क्या करें?

अगर किसी महीने आर्थिक दबाव हो, तो पूरी SIP बंद करना जरूरी नहीं है। कई म्यूचुअल फंड SIP की रकम कम करने की सुविधा देते हैं। ऑटो-डेबिट की तारीख बदलना भी एक आसान विकल्प हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश की आदत बनी रहे।

आखिर याद क्या रखना चाहिए?

SIP में बड़ी दौलत अक्सर बड़ी रकम से नहीं बनती। नियमित निवेश से बनती है। कई लोग ₹1,000, ₹2,000 या ₹5,000 जैसी छोटी SIP से भी अच्छा फंड बना लेते हैं, क्योंकि उन्होंने बीच में रुकना नहीं चुना।

इसलिए अगली बार अगर लगे कि “इस महीने SIP छोड़ देते हैं”, तो एक बार यह हिसाब जरूर याद कर लीजिए। हो सकता है आज की ₹5,000 की बचत भविष्य के ₹48,000 बनने वाले हों।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Rashifal Today: आज के दिन बजट पर दें ज्यादा ध्यान, क्या कहता हैं आपका राशिफल

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म की तारीख का हमारे जीवन पर खास प्रभाव माना जाता है। हर मूलांक के लिए आज घर और परिवार से जुड़े खर्च आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं। जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दें और भावनाओं में आकर खरीदारी करने से बचें। बजट को व्यवस्थित रखना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर आर्थिक योजना बनाना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। बेवजह खरीदारी और अचानक होने वाले खर्च से बचें। बजट के हिसाब से चलने पर आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपनी आर्थिक स्थिति पर खास ध्यान देना चाहिए। खर्च करते समय बजट का ध्यान रखें और बिना जरूरत पैसा खर्च करने से बचें। भविष्य के लिए बचत और निवेश की योजना बनाना अच्छा रहेगा। बड़े फायदे के पीछे भागने के बजाय धीरे-धीरे आगे बढ़ना आपके लिए बेहतर होगा।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। अपनी मौजूदा वित्तीय योजनाओं की अच्छी तरह समीक्षा करें और निवेश से जुड़ी नई संभावनाओं पर नजर रखें। किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी जानकारी हासिल करना जरूरी है।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्च आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं। जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दें और भावनाओं में आकर खरीदारी करने से बचें। बजट को व्यवस्थित रखना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा। अगर खर्चों पर सही नियंत्रण रखा तो आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है। आज पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेना ही सही रहेगा।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में योजना बनाकर चलने का दिन है। अपने बजट को सही तरीके से व्यवस्थित करें और गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने से बचें। अगर आप समझदारी से पैसे का इस्तेमाल करेंगे तो आने वाले समय में आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति को व्यवस्थित करने का अच्छा मौका है। अपने खर्चों की समीक्षा करें और जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें। छोटे-छोटे खर्चों पर ध्यान देना भी जरूरी है, क्योंकि यही आगे चलकर बड़ी बचत में मदद कर सकते हैं। निवेश का कोई मौका मिलता है तो जल्दबाजी करने के बजाय अच्छी तरह जांच-पड़ताल करें

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आपका ध्यान आर्थिक स्थिरता पर रहेगा। महंगी और गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने से बचना आपके लिए बेहतर होगा। अपनी बचत और निवेश को भविष्य के लक्ष्यों के साथ जोड़कर चलें। लंबी अवधि की योजनाओं पर ध्यान दें और अपने निवेश की रणनीति को मजबूत बनाएं।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों के लिए दिन सकारात्मक रह सकता है। आपको अपनी पुरानी वित्तीय योजनाओं और निवेश की समीक्षा करनी चाहिए। कोशिश करें कि आज का खर्च आपके भविष्य के लक्ष्यों में बाधा न बने। बिना योजना के पैसा खर्च करने से बचें।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपने पैसों से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नई आर्थिक संभावनाएं सामने आ सकती हैं, लेकिन किसी भी फैसले में जल्दबाजी न करें। लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए योजना बनाएं। अपने मौजूदा वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

कैब ड्राइवर को फोन पर अंग्रेजी बोलते देख पैसेंजर हुआ शॉक, बाद में सच्चाई ने खोला राज

आजकल AI रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, जो लोगों को ऑफिस के काम से लेकर नई स्किल्स सीखने तक में मदद करता है। लेकिन कभी-कभी AI का इस्तेमाल ऐसे मौकों पर भी देखने को मिलता है, जिसकी हम उम्मीद नहीं करते।

ऐसा ही कुछ दिल्ली में सुबह के समय कैब से सफर कर रहे मैनेजमेंट कंसल्टेंट तुषार जेजानी के साथ हुआ। उन्होंने देखा कि उनका कैब ड्राइवर फोन पर अंग्रेजी में बात कर रहा था। शुरुआत में यह देखकर उन्हें लगा कि आखिर फोन पर क्या हो रहा है।

लेकिन जब जेजानी ने ड्राइवर से एक साधारण सा सवाल पूछा, तो उन्हें ऐसी बात पता चली जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। जिसके बाद एक आम कैब यात्रा सीखने, टेक्नोलॉजी और मेहनत से जुड़ी ऐसी कहानी बन गई, जिसने सफर खत्म होने के बाद भी उन्हें काफी समय तक प्रेरित किया।

जेजानी ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा, “सुबह 4:13 बजे, नई दिल्ली। एक ऐसी कैब यात्रा जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।”

उन्होंने आगे बताया, “मेरा ड्राइवर अपने फोन पर अंग्रेजी में बात कर रहा था, अपनी सुबह की दिनचर्या और यात्रा की लोकेशन बता रहा था। मैं थोड़ा घबरा गया और ध्यान से सुनने लगा क्योंकि एक पल के लिए मुझे लगा कि वह हमारी लोकेशन और जानकारी किसी और के साथ साझा कर रहा है। तभी उसने देखा कि मैं असहज महसूस कर रहा हूं। उसने बातचीत शुरू कर दी।”

ड्राइवर ने फिर पूछा, “सर, आप कहां जा रहे हैं?”

जेजानी ने जवाब दिया, “मैं बैंगलोर जा रहा हूं।”

इसके बाद ड्राइवर ने पूछा कि वह वहां काम के सिलसिले में जा रहे हैं या निजी काम से?

जेजानी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हमेशा काम के लिए।”

दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। ड्राइवर अंग्रेजी में बात कर रहा था, जबकि जेजानी उसे हिंदी में जवाब दे रहे थे। हालांकि, जेजानी के मन में अभी भी यह सवाल था कि ड्राइवर फोन पर आखिर किससे बात कर रहा था। आखिरकार उन्होंने सीधे उससे पूछ ही लिया।

तभी ड्राइवर ने जेजानी को बताया कि वह फोन पर किसी और से बात नहीं कर रहा था। बल्कि वह ChatGPT का इस्तेमाल करके अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कर रहा था।

ड्राइवर ने कहा, “नहीं भैया, फोन पर नहीं। मैं ChatGPT पर अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कर रहा था। अभी मैं फर्राटे से अंग्रेजी नहीं बोल पाता। मेरी अभी बेटी हुई है। उसके लिए सीख रहा हूं। जब बड़ी होगी, तो उसे भी सिखाऊंगा।”

इस पल को याद करते हुए जेजानी ने लिखा, “सुबह 5 बजे उस लगभग खाली सड़क पर मुझे एक बात समझ आई। वह सिर्फ अंग्रेजी नहीं सीख रहा था। वह चुपचाप अपनी बेटी के लिए जिंदगी में एक नई शुरुआत की तैयारी कर रहा था। मुझे नहीं पता कि AI किन-किन नौकरियों की जगह लेगा। लेकिन यह जरूर है कि AI ने भारतीय समाज के हर वर्ग के लोगों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच आसान कर दी है।”

इस घटना ने जेजानी को यह सोचने पर भी मजबूर किया कि कैसे टेक्नोलॉजी ने सीखने की राह में आने वाली कुछ रुकावटों को कम किया है। उन्होंने लिखा, “कोई कोचिंग क्लास नहीं। कोई गेटकीपर नहीं। बस सीखने की इच्छा और AI वाला एक स्मार्टफोन। पिछले साल की इस कैब यात्रा को याद करते हुए जेजानी ने AI में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने अंत में लिखा, “क्या सफर था और क्या जबरदस्त सीख मिली। सीखते रहो, सीखते रहो और सीखते रहो।”

सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन

इस पोस्ट के बाद LinkedIn पर AI, सीखने और टेक्नोलॉजी तक पहुंच के बारे में बड़ी चर्चा शुरू हो गई।

एक यूजर ने कमेंट किया, “ड्राइवर की कहानी दिखाती है कि जिज्ञासा, इरादा और टेक्नोलॉजी तक पहुंच नए रास्ते खोल सकती है, चाहे कोई कहीं से भी शुरुआत करे। सीखने के लिए क्लासरूम की जरूरत नहीं होती; कभी-कभी, बस एक स्मार्टफोन और खुद को बेहतर बनाते रहने की इच्छा ही काफी होती है।”

एक और यूजर ने कहा, “कभी-कभी AI का सबसे असरदार इस्तेमाल ऑफिस या स्टार्टअप में नहीं, बल्कि ऐसी रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलता है।”

एक यूजर ने लिखा, “AI का सबसे बड़ा असर शायद ऑटोमेशन नहीं, बल्कि आम लोगों को उन टूल्स तक पहुंच देना हो सकता है, जो पहले मुश्किल से ही मिल पाते थे।”

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14 लाख सैनिक, 6000 टैंक, 3400 विमान… पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की का ये ‘इस्लामिक नाटो’ कितना मजबूत है?

अल जजीरा के एक विश्लेषण के अनुसार, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के तहत अपने सैन्य सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस समझौते के तहत तीनों देश मिलकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैन्य कर्मियों, 3,400 से ज्यादा विमानों और 6,000 से अधिक टैंकों को एक साथ ला रहे हैं।

7 अगस्त को हुआ यह समझौता अब केवल एक राजनीतिक घोषणा से कहीं आगे बढ़ चुका है। तीनों देश एक ऐसी संयुक्त व्यवस्था बनाने की योजना बना रहे हैं जिसमें उनके रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख शामिल होंगे। इसके अलावा, तीनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए जाएंगे। आने वाले समय में यह सहयोग रक्षा उपकरण बनाने और सैन्य तकनीक साझा करने तक भी बढ़ सकता है।

वहीं, इस समझौते को उभरते हुए “इस्लामिक NATO” के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन यह व्यवस्था अभी NATO-जैसी एकीकृत सैन्य गठबंधन बनने से काफी दूर है, क्योंकि किसी भी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में बाकी देश किस तरह सैन्य मदद करेंगे, इसे लेकर अभी कोई निश्चित नियम तय नहीं किया गया है।

तीनों देशों का मिलिट्री ग्रुप कितना ताकतवर है?

अल जजीरा की ओर से 2026 ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के हवाले से बताए गए आंकड़े इनकी मिली-जुली मिलिट्री ताकत का पैमाना दिखाते हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख एक्टिव सैनिक, 3,415 मिलिट्री एयरक्राफ्ट, 6,046 टैंक और 344 नेवल एसेट्स (नौसेना के संसाधन) हैं।

एक्टिव मिलिट्री मैनपावर में पाकिस्तान का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जिसके पास लगभग 6,60,000 सैनिक हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 4,81,000 और सऊदी अरब के पास लगभग 2,47,000 सैनिक हैं।

वहीं, इन तीनों देशों में टैंकों का सबसे बड़ा बेड़ा भी पाकिस्तान के पास है, जिसके पास लगभग 2,677 टैंक हैं। इसके बाद तुर्की (2,284 टैंक) और सऊदी अरब (1,085 टैंक) का नंबर आता है।

एयरक्राफ्ट के मामले में भी पाकिस्तान सबसे आगे है, जिसके पास लगभग 1,397 मिलिट्री एयरक्राफ्ट हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 1,101 और सऊदी अरब के पास 917 एयरक्राफ्ट हैं।

नौसेना के ताकत की बात करें तो, इसका हिसाब-किताब अलग है। तुर्की के पास 192 नेवल एसेट्स हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 120 और सऊदी अरब के पास 32 हैं। वहीं, तीनों देशों के पास कुल मिलाकर 33 फ्रिगेट, 24 कार्वेट और 22 सबमरीन हैं।

सऊदी अरब के पास सबसे ज्यादा पैसा है

हालांकि, सिर्फ मिलिट्री के आंकड़ों से पूरी बात समझ नहीं आती।

हालांकि, सिर्फ सैन्य संख्या से तीनों देशों की पूरी ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए रक्षा बजट बजट भी बहुत भी जरूरी है, जिसमें सऊदी अरब इन तीनों देशों से काफी आगे है।

अल जजीरा के आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों देशों में सऊदी अरब का डिफेंस बजट सबसे ज्यादा है। 2026 में उसका अनुमानित डिफेंस खर्च लगभग 63.9 अरब डॉलर है, जबकि तुर्की का खर्च 51.4 अरब डॉलर और पाकिस्तान का सिर्फ 9.1 अरब डॉलर है।

यह अंतर इस्लामाबाद के लिए अहम है, क्योंकि उसे लगातार आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है और वह बाहरी आर्थिक मदद पर बहुत ज्यादा निर्भर है।

फिर भी, इस समझौते से पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने और साथ ही अपने रक्षा उद्योग के लिए नए बाजार तलाशने का मौका मिलता है।

एकेडमिक और सिक्योरिटी एनालिस्ट एंड्रियास क्रीग ने अल जजीरा को बताया कि सऊदी अरब “पूंजी, भौगोलिक स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक रूप से लोगों को साथ लाने की क्षमता” का योगदान देता है, जबकि तुर्की “लगातार बेहतर होते रक्षा-औद्योगिक आधार, ड्रोन, मिसाइल, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नौसैनिक सिस्टम और NATO-आधारित सैन्य विशेषज्ञता” लाता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का योगदान “मैनपावर, एक बड़ी पेशेवर सैन्य व्यवस्था, ऑपरेशनल अनुभव, रक्षा उत्पादन और परमाणु क्षमता” है।

सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्की से क्या मिलता है?

रियाद के लिए, यह समझौता अमेरिका पर उसकी लंबे समय से चली आ रही निर्भरता के अलावा सुरक्षा का एक और जरिया देता है।

ईरान और उसके सहयोगियों से जुड़े बार-बार होने वाले क्षेत्रीय संघर्षों और हमलों के बीच, सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश की है। तुर्की का रक्षा उद्योग रियाद को ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य तकनीकें उपलब्ध कराता है, जबकि पाकिस्तान एक बड़ा सैन्य ढांचा और परमाणु प्रतिरोध क्षमता प्रदान करता है।

अमेरिकी रक्षा विभाग में अरब प्रायद्वीप मामलों के पूर्व निदेशक डेविड डेस रोशेस ने अल जजीरा को बताया कि इस समझौते से सऊदी अरब को पश्चिमी देशों से हथियारों के निर्यात को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

क्या पाकिस्तान सच में सऊदी अरब के लिए लड़ेगा?

यहीं पर ‘सामूहिक सुरक्षा’ वाली शर्त की सबसे बड़ी परीक्षा हो सकती है।

समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक सदस्य पर हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन इसमें NATO के आर्टिकल 5 की तरह तुरंत सैन्य कार्रवाई करने की कोई बात नहीं कही गई है।

यह फर्क पाकिस्तान के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इस्लामाबाद के ईरान के साथ संबंध हैं और वह बड़े मिडिल ईस्ट संघर्ष में खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश करता रहा है।

इसलिए सवाल यह है कि अगर सऊदी अरब पर सीधे हमला होता है, तो क्या पाकिस्तान सच में ईरान के खिलाफ सेना भेजेगा?

अगर हम पहले की घटनाओं को देखें तो, पता चलता है कि इस्लामाबाद किसी आक्रामक संघर्ष में सीधे शामिल होने के बजाय कूटनीतिक या रक्षात्मक भूमिका निभाना पसंद कर सकता है।

क्या यह अमेरिका के नेतृत्व वाले सुरक्षा ढांचे के लिए चुनौती है?

इस समझौते का असर सिर्फ इन तीन देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा।

पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है और उसे अमेरिकी सुरक्षा सहायता मिलती है। सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, जबकि तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।

हार्डकैसल एडवाइजरी के जैद एम. बेलबागी ने अल जजीरा को बताया कि “पाकिस्तान को अमेरिकी मदद मिलती है, सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा विदेशी खरीदार है, और तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।”

ऐसे में अमेरिका के तीन प्रमुख साझेदारों को शामिल करते हुए एक अलग सुरक्षा व्यवस्था का उभरना, क्षेत्र में तेजी से बदलते रणनीतिक समीकरणों में एक नई परत जोड़ सकता है।

क्या मिस्र इस समझौते में शामिल हो सकता है?

यह सुरक्षा समझौता आगे चलकर और देशों तक फैल सकता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने खुले तौर पर मिस्र के इस समझौते में शामिल होने का समर्थन किया है। उन्होंने मिस्र को इसका “स्वाभाविक साझेदार” बताया है।

मिस्र की मजबूत सैन्य ताकत और उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, खासकर स्वेज नहर पर उसका नियंत्रण, उसे इस गठबंधन के लिए एक अहम सदस्य बना सकता है।

हालांकि, मिस्र को इस तरह के सामूहिक रक्षा समझौते में शामिल होने से पहले कई बातों पर विचार करना होगा। इनमें अमेरिका के साथ उसके संबंध, मौजूदा सैन्य गठबंधन और क्षेत्र में उसकी दूसरी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

फिलहाल, अभी मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की अपनी बड़ी संयुक्त सैन्य क्षमताओं को एक कारगर सुरक्षा तंत्र में बदल सकते हैं।

पाकिस्तान के लिए यह बात खास तौर पर अहम हो सकती है। क्योंकि यह देश इस समूह में सबसे ज्यादा सैनिक बल और परमाणु क्षमता का योगदान देता है, लेकिन इसका रक्षा बजट अपेक्षाकृत कम है और आर्थिक रूप से इसकी निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सैन्य कर्मियों और रणनीतिक प्रतिरोध के अलावा यह कितना योगदान दे सकता है।

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Rare Earth Magnet Scheme: ₹7280 करोड़ की सरकारी योजना, L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई

Rare Earth Magnet Scheme: सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को कंपनियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत 20 कंपनियों ने इस योजना के लिए बोली लगाई है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त थी।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

इस योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India भी शामिल हैं।

इसके अलावा 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है।

सरकार की योजना क्या है?

सरकार इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता चाहती है। इस बंटवारा 5 कंपनियों के बीच किया जाएगा। हर कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिल सकती है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की अवधि 7 साल होगी। इसमें पहले 2 साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद 5 साल तक बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट इतने अहम क्यों हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत में NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

इस सेक्टर में चीन का दबदबा है। भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। साल 2025 में चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे कई उद्योगों में कमी देखने को मिली। सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहती है।

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT Q1 Results: टीएमटी स्टील बार कंपनी को ₹3.16 करोड़ का मुनाफा, क्षमता बढ़ाने पर बड़ा दांव

Rhetan TMT Q1 Results: अहमदाबाद की टीएमटी स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मुनाफे में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 315.7% बढ़कर ₹3.16 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹76 लाख था। हालांकि, ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹5.04 करोड़ से घटकर ₹4.06 करोड़ रहा।

EBITDA और PBT में भी बड़ी बढ़त

Rhetan TMT का EBITDA 195.5% बढ़कर ₹3.79 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹1.28 करोड़ था। वहीं, टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) 335.5% बढ़कर ₹3.31 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹0.76 करोड़ था। कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) भी बढ़कर ₹0.04 हो गई।

मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रही कंपनी

कंपनी अब कड़ी प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 45,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 75,000 मीट्रिक टन कर रही है। मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि इससे कंपनी को TMT स्टील सेगमेंट में नए अवसरों का फायदा उठाने में मदद मिलेगी।

कंपनी का कहना है कि वह क्षमता बढ़ाने, प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर जोर देने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के जरिए लंबे समय की ग्रोथ पर फोकस बनाए रखेगी।

सोलर प्रोजेक्ट और नए सर्टिफिकेशन का फायदा

Rhetan TMT ने अपने 1 मेगावाट कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट की टेस्टिंग और कमीशनिंग पूरी कर ली है। जल्द ही इससे कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा लागत कम करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D TMT बार्स के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल गया है। इससे वह सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है।

Sahana Systems को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, CEL के साथ 10 साल की डील

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