Delhi Building Collapse: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद MCD का बड़ा एक्शन, 4 मंजिल से ऊपर की अवैध इमारतें सील करने का आदेश

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्या निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से छह लोगों की मौत के बाद नगर निगम दिल्ली (MCD) ने राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का आदेश दिया है। MCD ने चार मंजिल से अधिक ऊंची अवैध इमारतों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया गया है, जिनकी लापरवाही या मिलीभगत से अवैध निर्माण खड़े हुए। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर छह हो गई है और मलबे से कुल 11 लोगों को निकाला गया है।

दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि सत्या निकेतन हादसे के जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तत्काल बर्खास्तगी भी शामिल हो सकती है।

करीब 30 साल पुरानी इमारत ढही

साउथ दिल्ली के सत्या निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक लगभग 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। यह इमारत छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) आवास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के समय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत या रेनोवेशन का काम चलने की बात सामने आई है। इसी दौरान पूरा ढांचा भरभराकर गिर गया। इस हादसे में छह लोगों की जान चली गई, जिसके बाद अब MCD ने इलाके समेत राजधानी में अवैध निर्माण को लेकर सख्ती शुरू कर दी है।

सिर्फ एक इमारत नहीं, आसपास के निर्माण भी जांच के घेरे में

MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक हादसे वाली इमारत करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। यह एक पुनर्वास कॉलोनी में स्थित थी, जहां मूल रूप से सिर्फ ग्राउंड फ्लोर+एक मंजिल (G+1) के निर्माण की अनुमति थी। इसके बावजूद यहां G+4 संरचना खड़ी कर दी गई थी। बताया गया है कि इमारत शॉप नंबर 14 में स्थित थी और यहां कथित तौर पर नियमों के विपरीत निर्माण कराया गया था। आसपास के शॉप नंबर 13 और 12 में भी निर्माण नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं। इन निर्माणों की भी जांच की जा रही है।

बिल्डिंग/घर नंबर 13 की जगह पर कब्जा

MCD ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद एक बयान में कहा, “यह देखा गया है कि नई दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग/घर नंबर 13 की जगह पर कब्ज़ा है। यह प्रॉपर्टी जर्जर और खतरनाक हालत में है और इसमें रहने वाले, यहाँ आने-जाने वाले या इसके पास से गुज़रने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, और साथ ही आस-पास के लोगों के लिए भी खतरनाक है।”

बयान में आगे कहा गया है, “DMC एक्ट 1957 की धारा 348 और धारा 491 के तहत आपको आदेश दिया जाता है कि इस आदेश के मिलने के तीन दिनों के भीतर ऊपर बताई गई वजह और मकसद के लिए प्रॉपर्टी को गिरा दें, ताकि उससे होने वाले किसी भी खतरे को रोका जा सके। यह साफ किया जाता है कि अगर आप ऊपर बताई गई समय-सीमा के भीतर इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो खतरनाक इमारत को M.C.D. द्वारा गिरा दिया जाएगा। गिराने का खर्च इस एक्ट के तहत टैक्स की बकाया राशि के तौर पर आपसे वसूला जाएगा।”

महिलाओं के PG को भी खाली कराया गया

हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। बगल की एक इमारत में चल रहे महिलाओं के PG को खाली करा दिया गया। साथ ही परिसर को सील कर दिया गया। इसके अलावा आसपास मौजूद एक अन्य निर्माण को गिराने की तैयारी भी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अवैध निर्माण की अनुमति देने वाले अधिकारी भी रडार पर

MCD के आदेश के बाद अब सिर्फ अवैध निर्माण कराने वालों पर ही नहीं, बल्कि ऐसे निर्माण को अनुमति देने या समय रहते कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। मेयर प्रवेश वाही ने साफ कहा है कि अगर किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाएगा। इससे दिल्ली में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए बहुमंजिला निर्माणों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच तेज होने की संभावना है।

पुलिस ने बिल्डिंग मालिक समेत कई लोगों पर केस दर्ज किया

हादसे के मामले में पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपों में गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसी धाराएं शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक इमारत का इस्तेमाल PG के रूप में हो रहा था और हादसे के वक्त ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन का काम चल रहा था। पुलिस अब उन लोगों की पहचान और तलाश में जुटी है, जो कथित तौर पर निर्माण या मरम्मत कार्य में शामिल थे।

सत्या निकेतन हादसे ने उठाए सुरक्षा पर गंभीर सवाल

हादसे के बाद इमारत की सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। खास तौर पर यह जांच का विषय है कि जिस इमारत को मूल रूप से सीमित निर्माण की अनुमति थी, वह बहुमंजिला संरचना में कैसे बदल गई और वहां छात्रों के रहने के लिए PG कैसे संचालित होता रहा। अब MCD के चार मंजिल से अधिक ऊंचे अवैध निर्माणों को सील करने के आदेश के बाद राजधानी में ऐसे भवनों की जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास स्थित इस इमारत का इस्तेमाल लड़कों के पीजी (पेइंग गेस्ट) आवास के रूप में किया जा रहा था। इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, तभी रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे यह ढह गई। पेइंग गेस्ट वह व्यक्ति होता है जो किसी मकान या आवास में किराया देकर रहता है, जहां अक्सर भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।