
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रक्रिया को अतार्किक, अनुचित और मनमाना बताते हुए 13 से 14 करोड़ नाम हटाने का दावा किया। ALSO READ: Top News 7 September: सागर में जहरीली शराब से 11 मौतें; 199 दवा नमूने फेल, SIR पर उठे सवाल
करीब 15 प्रतिशत आबादी को मतदाता सूची से बाहर
कुरैशी ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने एक 'स्कैम' बताते हुए दावा किया कि एक कृत्रिम प्रक्रिया के जरिए करीब 15 प्रतिशत आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में करीब 13 से 14 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। ALSO READ: अमेठी हार को स्मृति ईरानी ने किया याद, टीवी पर वापसी का किया खुलासा, जानें किसे फोन कर कहा था- मैं बेरोजगार हूं…
हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत लोग मतदान के योग्य
पूर्व CEC ने कहा कि अदालत ने इस मामले में बहुत नरम रुख अपनाया, जिससे यह प्रक्रिया जारी रह सकी। उन्होंने कहा कि हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत लोग मतदान के योग्य हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी लोग दूसरे स्थानों पर चले गए हैं?
कुरैशी के अनुसार, अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया है, तो उसका नाम नई जगह की मतदाता सूची में जोड़ा जाना चाहिए। केवल नाम हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर कुछ मतदाता पलायन कर गए हैं, तो उनके नाम नई जगह पर जोड़े जाने चाहिए। हैरानी की बात है कि केवल नाम हटाए जा रहे हैं। क्या कोई दूसरी जगह से यहां नहीं आ रहा? क्या सिर्फ बाहर जाना ही हो रहा है?
हर नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार
एसवाई कुरैशी ने कहा कि भारत के हर नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी योग्य व्यक्ति का नाम किसी कारण या बहाने से हटाया जाता है, तो यह असांविधानिक और गैरकानूनी है।


