Sukhbir Singh Badal Attack: सुखबीर सिंह बादल पर हमला करने वाला आरोपी गिरफ्तार, CM फडणवीस ने दिए जांच के आदेश

Sukhbir Singh Badal Attack: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार को नांदेड़ स्थित हजूर साहिब गुरुद्वारे में हमला किया गया। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक रोहन नीलाभ ने IANS को बताया कि आरोपी की पहचान निहंग जसपाल सिंह के रूप में हुई है और उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

घटना के वक्त सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल भी मौके पर मौजूद थीं। हालांकि, उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं।

गुरुद्वारे में हुआ दौरान हमला

सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल गुरुद्वारे में थे और मत्था टेकने के बाद लंगर की ओर जा रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ।

हमले में कथित तौर पर जसपाल सिंह ने कृपाण का इस्तेमाल किया, जो पिछले दो साल से गुरुद्वारे में काम कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि हमलावर ने सुखबीर सिंह बादल के पेट में चाकू घोंपने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव कर उसे रोक दिया।

हालांकि, हमले के पीछे की वजह अभी साफ नहीं है। वहीं, आरोपी जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और घटना से जुड़े हालात की जांच की जा रही है।

बता दें कि खतरे की आशंका को देखते हुए बादल को Z-प्लस कैटेगरी की कड़ी सुरक्षा मिली हुई है।

हमलावर के बारे में क्या पता चला?

आरोपी की पहचान 62 साल के जसपाल सिंह के तौर पर हुई है, जो मूल रूप से पुणे का रहने वाला है और वह पहले पुणे की अदालत में वकील के तौर पर काम कर चुका है। पिछले दो सालों से वह नांदेड़ के पास मुगत में माता साहिब गुरुद्वारे में सेवा कर रहा था।

आज, जब सुखबीर सिंह बादल माता साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेककर बाहर निकले, तो जसपाल सिंह ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया। हालांकि, मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस अभी उससे पूछताछ कर रही है।

फडणवीस ने जांच के आदेश दिए

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और घटना के बारे में जानकारी मांगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने घटना के पीछे के मकसद की जांच के भी आदेश दिए हैं।

हमले के बाद बादल की हालत स्थिर

इस घटना के बाद सुखबीर सिंह बादल की हालत स्थिर है। बता दें कि यह हमला तब हुआ जब वह हजूर साहिब गुरुद्वारे में थे। उस समय उनकी पत्नी हरसिमरत कौर भी वहां मौजूद थीं, लेकिन उन पर कोई हमला नहीं हुआ और वह सुरक्षित हैं।

नांदेड़ के SP रोहन नीलाभ ने जसपाल सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। हालांकि, हमले के पीछे का मकसद अभी तक साफ नहीं हो पाया है।

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LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी LG Electronics India ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 27.2% बढ़कर ₹652.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹513.2 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 15.5% बढ़कर ₹7,233.3 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹6,262.9 करोड़ था। यानी कमाई और मुनाफा दोनों में अच्छी बढ़त दिखी।

ऑपरेटिंग कमाई भी मजबूत रही

LG Electronics India का EBITDA 26.2% बढ़कर ₹904.2 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹716.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.4% से बढ़कर 12.5% हो गया। यानी कंपनी पहले से बेहतर कमाई कर रही है।

AC की बिक्री ने बढ़ाया भरोसा

एयर कंडीशनर की मजबूत मांग कंपनी के लिए बड़ा सहारा बनी। साल 2026 की पहली तिमाही में LG ने 10 लाख से ज्यादा AC बेचे। अब कंपनी को पूरे साल में 20 लाख से ज्यादा यूनिट बेचने की उम्मीद है।

कंपनी के डायरेक्टर और को-चीफ सेल्स एंड मार्केटिंग ऑफिसर संजय चिटकारा ने कहा कि डीलरों के पास स्टॉक अब सामान्य स्तर पर है। रिटेलर भी त्योहारी सीजन की तैयारी में जुट गए हैं। अगर मांग ऐसे ही बनी रही, तो कंपनी अपने सालाना अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

LG Electronics India के शेयर

LG Electronics का शेयर गुरुवार को 1580 रुपये पर लगभग फ्लैट बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 4.55% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 1.07 लाख करोड़ रुपये है।

LG Electronics India का कारोबार

LG Electronics India, LG Electronics की सब्सिडियरी है। कंपनी भारत में टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, IT प्रोडक्ट्स और व्हीकल सॉल्यूशंस बनाती और बेचती है। यह एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sahana Systems को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, CEL के साथ 10 साल की डील

Sahana Systems Defence Deal: IT और डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Sahana Systems Ltd की सब्सिडियरी Sahana Defence Ltd को बड़ा डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने भारत सरकार के मिनी रत्न Central Electronics Limited (CEL) के साथ लंबी अवधि का समझौता किया है। यह डील सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हुई है।

समझौते के तहत उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में CEL के परिसर में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इक्विपमेंट और वेपन पेरिफेरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाई जाएगी और उसका संचालन भी किया जाएगा।

10 साल की होगी डील

यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर 10 साल के लिए है। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो कॉन्ट्रैक्ट 5 साल और बढ़ाया जा सकता है।

Sahana Defence इस फैसिलिटी को बनाने, चलाने, मेंटेनेंस करने, मार्केटिंग करने और यहां बने प्रोडक्ट्स को कमर्शियल स्तर पर बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेगी।

क्या बनेगा इस फैसिलिटी में?

नई यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हथियारों से जुड़े पेरिफेरी इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसका मकसद भारत में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और रणनीतिक तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।

कंपनी का कहना है कि CEL के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर वह डिफेंस सेक्टर के लिए मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

Sahana Systems के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतीक काकड़िया ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के लिए बड़ा मील का पत्थर है। उनके मुताबिक, इससे डिफेंस कारोबार में लंबे समय तक रेवेन्यू की बेहतर दृश्यता मिलेगी और भविष्य की ग्रोथ को मजबूत आधार मिलेगा।

Sahana Systems क्या काम करती है?

साल 2013 में स्थापित Sahana Systems का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, IoT, ब्लॉकचेन, बिजनेस इंटेलिजेंस और IT आउटसोर्सिंग जैसी तकनीकी सेवाएं देती है।

इसके अलावा कंपनी डिफेंसटेक, फिनटेक, हेल्थटेक और एडुटेक सेक्टर में भी काम करती है। Sahana Systems का दावा है कि वह सरकारी संस्थानों, रक्षा संगठनों और वित्तीय संस्थानों के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारतीय नौसेना का किलर ड्रोन प्लान, वॉरशिप से 1000 किमी दूर से ही दुश्मन का जहाज होगा तबाह! समझिए कैसे करेगा काम

लाल सागर में हाल के दिनों में हुए ड्रोन हमलों के बाद दुनियाभर की नौसेनाएं अपनी बेड़े की सुरक्षा और हमला करने की क्षमताओं की समीक्षा कर रही हैं। इसी बीच भारतीय नौसेना ने भी अपनी युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। नौसेना अपने युद्धपोतों के लिए 1000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले शिप-लॉन्च्ड लॉइटरिंग म्यूनिशंस हासिल करने की योजना बना रही है। इस कदम से नौसेना को नौसैनिक चुनौतियों से निपटने और तटीय इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की जबरदस्त क्षमता हासिल हो जाएगी।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने इन मध्यम दूरी के ड्रोनों की जरूरतों को हरी झंडी दे दी है। आपको बता दें कि 1000 किलोमीटर की विशाल रेंज से भारतीय नौसेना के सर्फेस फ्लीट की परिचालन पहुंच काफी हद तक बढ़ जाएगी। इसके जरिए भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक इलाकों में तैनात रहकर परिचालन कर सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस क्षमता की बदौलत भारतीय युद्धपोत दुश्मन की तटीय मिसाइलों की पहुंच से काफी बाहर रहते हुए भी दुश्मन के तटीय और जमीनी ठिकानों पर विनाशकारी हमला कर पाएंगे।

हवा में 9 घंटे की स्टेमिना और 200 नॉट्स से अधिक गोता लगाने की रफ्तार

भारतीय नौसेना ऐसे स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की तलाश में है जो हवा में 9 घंटे तक लगातार मंडरा सकें। लक्ष्य की पहचान होने पर ये ड्रोन 200 नॉट्स से अधिक की रफ्तार से दुश्मन पर सीधे गोता लगाकर हमला कर सकेंगे। इन किलर ड्रोनों में दिन और रात दोनों समय काम करने वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सीकर लगे होंगे ताकि दिन हो या रात दुश्मन की पहचान कर उसे तबाह किया जा सके। नौसेना की शर्त है कि ये हथियार वन मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल के साथ अचूक और सटीक हमला करने में सक्षम होने चाहिए।

सबसे खास विशेषता यह है कि ये ड्रोन ऐसे कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करेंगे जहां सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नल को जाम कर दिया गया हो, स्पूफ किया गया हो या उनका सिग्नल पूरी तरह बंद कर दिया गया हो।

ऑपरेटर एक साथ नियंत्रित करेगा 10 ड्रोन

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया जाना जरूरी है कि जहाज पर मौजूद सिर्फ एक ऑपरेटर एक मॉड्यूलर कंट्रोल कंसोल के जरिए एक साथ 10 ड्रोनों को नियंत्रित कर सके। हवा में उड़ रहे इन ड्रोनों का नियंत्रण एक जहाज से दूसरे जहाज या फिर जमीन पर बने स्टेशन के बीच भी आसानी से स्थानांतरित किया जा सकेगा।

मौसम की मार झेलने की क्षमता और 20 साल तक लाइफ

नौसेना ने इन प्रणालियों के लिए बहुत ही कड़े पर्यावरणीय मानक तय किए हैं। वेंडरों को यह साबित करना होगा कि ये ड्रोन बेहद कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं ताकि 50 नॉट्स की तेज हवाओं और 95% की नमी के स्तर के दौरान भी इन्हें लॉन्च किया जा सके। ड्रोन के क्रिटिकल कंपोनेंट की लाइफ पर भी कम से कम 10 सालों की गारंटी होनी चाहिए, जिसे जरूरत पड़ने पर 20 सालों तक बढ़ाया जा सके।

बाय इंडियन कैटिगरी के तहत होगी खरीद, बढ़ेगी स्वदेशी ताकत

रक्षा मंत्रालय इन प्रणालियों को बाय इंडियन-आईडीडीएम (Buy Indian-IDDM – Indigenously Designed, Developed and Manufactured) कैटिगरी के तहत खरीदने की योजना बना रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इंडिजिनस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट और देश के अंदर ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

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SIP या Lump Sum? जानें कहां मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न! रिटायरमेंट के लिए एक्सपर्ट्स ने बताए ये धांसू फंड्स!

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ने म्यूचुअल फंड के निवेशकों को अपने इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर दोबारा विचार करने को मजबूर कर दिया है। इसकी वजह यह है कि सिप के कई निवेशकों की शिकायत है कि पिछले दो साल में सिप से लगातार निवेश करने के बावजूद उनका पैसा ज्यादा नहीं बढ़ा है। कई इनवेस्टर्स तो सिप बंद करने के बारे में सोचने लगे हैं। सवाल है कि क्या सिप की जगह एकमुश्त निवेश करने से ज्यादा रिटर्न मिलेगा?

एकमुश्त और सिप दोनों तरीके निवेश के लिए सही

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश के दोनों ही तरीके ठीक हैं। दोनों में कौन सा तरीका ज्यादा सही है, यह निवेशक के रिस्क लेने की क्षमता और निवेश करने की कपैसिटी पर निर्भर करता है। जो निवेशक एक बार में बड़े अमाउंट का निवेश नहीं कर सकते, उनके लिए सिप हमेशा निवेश का ज्यादा सुविधाजनक तरीका है। आज सिप के रास्ते म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीमों में काफी ज्यादा पैसा आ रहा है। इनमें से कई निवेशकों के लिए एकमुश्त निवेश करना मुश्किल हो सकता है।

एकमुश्त निवेश के लिए बड़ा फंड जरूरी है

एकमुश्त निवेश के लिए बड़ा अमाउंट जरूरी है। अगर किसी के पास बोनस या किसी दूसरे तरीके से बड़ा फंड आया है तो वह एकमुश्त निवेश म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में कर सकता है। एकमुश्त निवेश करना तब फायदेमंद होता है, जब बाजार में स्टैबिलिटी होती है या बाजार चढ़ रहा होता है। ऐसा होने पर निवेशक को अपने पैसे पर अच्छा रिटर्न मिलता है। लेकिन, उतार-चढ़ाव वाले बाजार में एकमुश्त निवेश करना रिस्की हो सकता है।

रिटायरमेंट के लिए मल्टी एसेट फंड में निवेश समझदारी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति रिटायरमेंट के लिए म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में आज निवेश करना चाहता है तो वह मल्टी एसेट फंड में निवेश कर सकता है। इसकी वजह यह है कि यह स्कीम कई तरह के एसेट्स में निवेश करती है। यह एक तरह की हाइब्रिड स्कीम है। यह इक्विटी, डेट और कमोडिटी खासकर गोल्ड और सिल्वर में निवेश करती है। लंबी अवधि में हर एसेट में निवेश से अच्छा रिटर्न मिलता है। इस फंड के लिए हर एसेट में कम से कम 10 फीसदी निवेश करना जरूरी है।

मल्टी एसेट फंड में डायवर्सिफिकेशन का फायदा 

मल्टी एसेट फंड में निवेश करना का दूसरा फायदा यह है कि इससे डायवर्सिफिकेशन का मकसद पूरा हो जाता है। डायवर्सिफिकेशन से निवेश से जुड़ा रिस्क कम हो जाता है। इसकी वजह है कि आम तौर पर हर एसेट क्लास में एक साल साथ गिरावट नहीं आती है।

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एक एसेट का रिटर्न कमजोर होने पर दूसरे का रिटर्न अच्छा रहता है

कई बार इक्विटी मार्केट जब बेयरिश फेज में होता है तो गोल्ड और सिल्वर का प्रदर्शन अच्छा होता है। पिछले दो सालों में निवेशकों को शेयर बाजार से ज्यादा रिटर्न नहीं मिला है, लेकिन गोल्ड और सिल्वर ने बहुत अच्छे रिटर्न दिए हैं। ऐसे पीरियड में मल्टी एसेट फंड का प्रदर्शन अच्छा रहता है।

क्या हमारी नौकरियां ले सकता है AI? जानें 5 ऐसी फील्ड जहां इंसानों की काबीलियत का मुकाबला नहीं कर सकेगा एआई

आज के दौर में छोटे-बड़े पदों पर काम कर रहे कामगारों को एक सवाल सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या हमारी नौकरियां ले सकता है? कहने को यह सिर्फ मशीन है, लेकिन एंट्री लेवल कर्मचारियों से लेकर सीईओ तक इसके खौफ में जी रहे हैं। आए दिन मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों की छंटनी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में ये सोचना लाजिमी है कि क्या एआई की वजह से इंसानों के काम करने के विकल्प सीमित होंगे या खतरा उतना बड़ा भी नहीं है, जितना इसका खौफ बन गया है? इस विषय पर बीबीसी हिंदी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नई नौकरियां पैदा भी करेगा। जनवरी 2026 में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एआई के कारण लाखों नई नौकरियां बनी हैं। कोई 12वीं छात्र एआई से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है, तो इसके लिए सही कोर्स चुनना होगा। आइए जानें 5 ऐसे करियर विकल्प जहां एआई इंसानों का बाल भी बांका नहीं कर सकता है।

क्या होता है एआई?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन या कंप्यूटर की ऐसी क्षमता, जिससे ऐसा लगे कि वो इंसानों की तरह ही सोचने-समझने के काबिल है।” वह कहते हैं रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर-मोबाइल एप्लिकेशन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम कर रहा है।

एआई के पांच टॉप कोर्स

दिल्ली में टेक पॉलिसी फोकस्ड थिंकटैंक इसिया सेंटर की डायरेक्टर और जानी-मानी एआई एक्सपर्ट मेघना बल कहती हैं, ”एआई उन लोगों के लिए खतरा नहीं है, जो खुद को अपडेट रखते हैं। बल्कि यह उनके लिए मौका है।” मेघना के मुताबिक एआई से संबंधित कुछ बेसिक स्तर के कोर्स सभी को करने चाहिए। सरकार के स्वयं पोर्टल के जरिए कई कोर्स फ्री में किए जा सकते हैं। लेकिन इस फील्ड में करियर बनाने में ये 5 कोर्स आपके काम आएंगे।

एमबीए/पीजी डिप्लोमा इन एआई एंड बिजनेस एनालिटिक्स : आईआईएम, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, और अपग्रैड, या ग्रेट लर्निंग जैसी एडुटेक कंपनियों के साथ जुड़कर ये कोर्स किया जा सकता है। इसकी फीस करीब ढाई से सात लाख रुपये तक हो सकती है। कोर्स करने के बाद संभावित सैलरी छह से बीस लाख रुपये के बीच हो सकती है।

एआई सर्टिफिकेट प्रोग्राम (ऑनलाइन): ये ऑनलाइन एडुटेक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसकी फीस डेढ़ लाख रुपये के आसपास है। ये उनके लिए है, जो एकदम शुरुआती चरण में हैं और एआई की बुनियादी समझ बनाना चाहते हैं। इस कोर्स के बाद सालाना 10 लाख तक सैलरी मिल सकती है।

एमसीए/एम टेक इन एआई एंड मशीन लर्निंग : आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और कई दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालय से ये कोर्स किया जा सकता है। इसके अलावा आईआईटी में एआई से जुड़े कई क्रैश कोर्स भी उपलब्ध हैं। मास्टर्स की फीस सालाना एक लाख से दस लाख के बीच हो सकती है। इसे करने के बाद अनुमानित सैलरी 22 लाख रुपए हो सकती है।

बीएससी/बीटेक इन एआई एंड डेटा साइंस : दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी, सेंट जेवियर्स कॉलेज, एनआईटी जैसे बड़े संस्थानों से ये कोर्स किया जा सकता है। पूरे प्रोग्राम की फीस एक लाख से बीस लाख रुपए के बीच हो सकती है। संभावित सैलरी 6 से 18 लाख रुपये तक जा सकती है।

एआई बूटकैंप और इंडस्ट्री प्रोग्राम : आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और कई बड़े निजी संस्थान में ये कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस करीब 1 लाख से साढ़े तीन लाख रुपये हो सकती है। कोर्स के बाद संभावित पैकेज 6 से 18 लाख रुपए या उससे ज्यादा हो सकता है।

हेल्थ, सीए, कानून के पेशे में कम होगा एआई का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का खतरा उन पेशों पर कम होगा, जहां इंसानी कनेक्ट की जरूरत होगी। मेघना बल कहती हैं, “नर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, टीचर के काम एआई नहीं कर पाएगा। इन कामों के लिए इंसान ही चाहिए। लोग सिर्फ ऑटोमेटेड जवाबों से संतुष्ट नहीं होंगे।”

इसके अलावा क्रिएटिव डायरेक्टर्स, लेखक या कॉन्टेंट स्ट्रैटेजिस्ट के काम में एआई मददगार हो सकता है, लेकिन इनकी जगह नहीं ले पाएगा। प्रोफेसर आकाश सिन्हा चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, नर्स, एआई इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, वकील के करियर को एआई से सुरक्षित मानते हैं। लेकिन इसमें अपनी विशेषज्ञता कायम रखनी होगी। ये करियर विकल्प पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन आप खुद एआई टूल का इस्तेमाल करना सीखें, ताकि काम जल्दी कर सकें।

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लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस पर चढ़ा Sprite का रंग, पहली बार किसी ब्रांड के नाम से चलेगी ट्रेन

Lucknow-Delhi Tejas Express: लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस अब करीब तीन महीने के लिए ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से जानी जाएगी। यह ट्रेन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा संचालित की जाती है। इसे भारत की पहली ‘प्राइवेटली ब्रांडेड’ ट्रेन बताया जा रहा है।

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट में रेलवे सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि IRCTC ने ट्रेन की ब्रांडिंग और विज्ञापन के अधिकार M/s स्प्राइट को छह महीने की अवधि के लिए दिए हैं। इसके अनुसार, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे से कहा गया है कि वह 19 अगस्त और 11 नवंबर, 2026 के बीच ट्रेन 82501/82502 को ‘Sprite’ Tejas Express के रूप में घोषित करे।

खबरों के अनुसार, ट्रेन की ब्रांडिंग का यह अधिकार Letter of Acceptance (LOA) के जरिए दिया गया है। रेलवे सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दोनों दिशाओं में यात्रा के दौरान इस प्राइवेट ट्रेन को उसके शुरुआती स्टेशन और रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से अनाउंस किया जाएगा।

किसी ब्रांड के नाम पर रखी जाने वाली पहली ट्रेन

यह पहली बार है जब किसी ट्रेन का नाम किसी ब्रांड के नाम पर रखा जा रहा है। रिपोर्ट में बताए गए रेलवे के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भले ही लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को प्राइवेट ट्रेन कहा जाता है, लेकिन IRCTC रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैक और स्टेशन) के इस्तेमाल के लिए इंडियन रेलवे को पेमेंट करती है।

हालांकि, ब्रांडिंग का यह तरीका इंडियन रेलवे द्वारा ट्रेनों के रेगुलर ऑपरेशन से अलग है।

इस एडवरटाइजिंग मॉडल के तहत, प्राइवेट कंपनियां ट्रेन के बाहरी हिस्से और दूसरी तय जगहों पर अपने ब्रांड दिखा सकती हैं, जबकि रेलवे नेटवर्क जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता रहता है। यानी ट्रेन पर ब्रांड का नाम और विज्ञापन तो नजर आएगा, लेकिन इसका संचालन रेलवे के मौजूदा नेटवर्क के जरिए ही होगा।

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस के बारे में सब कुछ

देश की पहली निजी ट्रेन के तौर पर लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को 3 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

IRCTC द्वारा चलाई जाने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से AC है और इसमें यात्रियों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें ट्रेन के अंदर खाने-पीने की बेहतर सुविधा और मनोरंजन के लिए इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल हैं।

IRCTC इस ट्रेन में ग्रुप बुकिंग की सुविधा भी देता है। यानी कॉर्पोरेट मीटिंग, शादी या किसी अन्य कार्यक्रम के लिए यात्री पूरी AC चेयर कार कोच भी बुक कर सकते हैं। एक कोच में 78 सीटें होती हैं।

Sprite के साथ हुई नई ब्रांडिंग डील से इस सर्विस में एक नया कमर्शियल पहलू जुड़ गया है, जिससे यह देश की पहली ऐसी ट्रेन बन गई है जो विज्ञापन व्यवस्था के तहत आधिकारिक तौर पर किसी कमर्शियल ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर रही है।

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Honasa Consumer Q1 Results: ममाअर्थ की पैरेंट कंपनी का मुनाफा 118% उछला, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Honasa Consumer Q1 Results: FMCG कंपनी Honasa Consumer ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे दर्ज किए हैं। Mamaearth की पैरेंट कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 118.4% बढ़कर ₹90.2 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹41.3 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 27% बढ़कर ₹756 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह ₹595.2 करोड़ था। कंपनी ने पहली बार 11.5% का PAT मार्जिन हासिल किया। Honasa Consumer का EBITDA बढ़कर ₹110.1 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹45.7 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 7.68% से बढ़कर 14.57% हो गया।

दो प्रोडक्ट का दमदार प्रदर्शन

Honasa Consumer ने बताया कि उसकी फोकस कैटेगरी में 35% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज हुई। Mamaearth की ग्रोथ हाई-टीन्स में रही। Rice Dewy Bright Face Wash कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला फेस क्लींजर बन गया। वहीं Rosemary हेयर रेंज का सालाना रेवेन्यू ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया।

The Derma Co. ने भी बड़ा मुकाम हासिल किया। इस ब्रांड का सालाना नेट सेल्स वैल्यू ₹1,000 करोड़ के पार पहुंच गया। कंपनी का दावा है कि पिछले 10 साल में वह भारत की पहली FMCG कंपनी बनी है, जिसने दो ₹1,000 करोड़ के ब्रांड खड़े किए हैं।

नए ब्रांड और ऑफलाइन कारोबार भी बढ़ा

Honasa Consumer के नए ब्रांड्स में 40% से ज्यादा ग्रोथ रही। BTM Ventures का सालाना रेवेन्यू ₹150 करोड़ के पार पहुंच गया। यह अब दक्षिण भारत से बाहर महाराष्ट्र और दूसरे बाजारों में भी विस्तार कर रहा है।

ऑफलाइन कारोबार भी मजबूत रहा। जनरल ट्रेड और मॉडर्न ट्रेड, दोनों में 40% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई। कंपनी की पहुंच अब करीब 3 लाख FMCG रिटेल आउटलेट तक हो गई है। Honasa ने इसी तिमाही में FIKN नाम से फ्रेगरेंस कैटेगरी में भी एंट्री की है।

आगे क्या है कंपनी का प्लान?

चेयरमैन और CEO वरुण आलाघ ने कहा कि कंपनी की ग्रोथ अब सिर्फ एक ब्रांड पर निर्भर नहीं है। अलग-अलग ब्रांड और कैटेगरी से मजबूत मांग मिल रही है। कंपनी आगे भी नए प्रोडक्ट, डिजिटल विस्तार और ऑफलाइन नेटवर्क पर फोकस रखेगी।

Honasa Consumer का शेयर गुरुवार को 2.48% बढ़कर ₹479 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 67.98% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kangana Ranaut: कंगना रनौत बोलीं जंतर-मंतर पर जमा भीड़ में ‘शबाना आजमी जैसे’ लोग थे, ‘ये Gen Z कैसे हो सकते हैं?’

Kangana Ranaut: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना झेलने के बाद, कंगना रनौत ने अपने विवादित “जेनरेशन गटर” वाले बयान पर एक और स्पष्टीकरण दिया है। एक्टर और बीजेपी सांसद ने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी पूरी पीढ़ी को निशाना नहीं बनाया था और कहा कि उनकी टिप्पणी केवल प्रदर्शनकारियों के एक खास वर्ग के लिए थी, जिन्हें उन्होंने प्रदर्शन के वीडियो में देखा था।

गुरुवार को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने सवाल किया कि इस भीड़ को आम तौर पर ‘जेन जेड’ (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन क्यों कहा जा रहा है और तर्क दिया कि असल में देश की युवा आबादी का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इसमें शामिल हुआ था।

कंगना ने ‘जेन ज़ेड प्रोटेस्ट’ लेबल पर सवाल उठाए

अपने वीडियो में कंगना ने इस बात को चुनौती दी कि यह प्रदर्शन पूरे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जेन ज़ेड आबादी का अनुमान लगभग 30 से 35 करोड़ लगाया और इस संख्या की तुलना जंतर-मंतर पर जमा हुए लोगों की संख्या से की। उन्होंने कहा, “पूरे देश के युवा? अगर आप सिर्फ जेन जेड की बात करते हैं, तो लगभग 30-35 करोड़ के पास इनकी आबादी होने वाली है।”

कंगना ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में लगभग 10,000 लोग मौजूद थे और इस सभा में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी का जिक्र करते हुए, जो मार्च में शामिल हुई थीं, उन्होंने कहा, “जो जंतर-मंतर है वहाँ पर 10,000 लोग एक साथ आए थे जिनमें से आधे से ज्यादा लोग शबाना आज़मी जैसे थे, आपने देखा कि हर तरह के आयु वर्ग के लोग घूम रहे थे।”

इसके बाद उन्होंने दावा किया कि सभा में केवल लगभग 2,000 लोग ही जेनरेशन Z से थे और सवाल किया कि इस विरोध प्रदर्शन को पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधि क्यों बताया जा रहा है। कंगना ने कहा कि “अगर हम युवाओं की बात करते हैं, जेन ज़ेड की हम विशेष रूप से बात करते हैं तो लग भाग वाह 2000 जेन ज़ेड पर, तो कैसे ये लोग इसको जेन ज़ेड विरोध कह रहे हैं? क्या पूरे देश की जेन ज़ेड विरोध कर रहे हैं?”

‘मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती’

कंगना ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनकी पिछली टिप्पणियां खास तौर पर उन लोगों के बारे में थीं, जिन्हें उन्होंने विरोध प्रदर्शन में देखा था, न कि सभी युवा भारतीयों के बारे में। उन्होंने कहा, “यहां जो भीड़ जमा हुई थी, मैंने खास तौर पर उन्हीं के बारे में कहा था।” इसके बाद एक्ट्रेस ने उन लोगों को “खुली चुनौती” दी जो उन पर पूरी पीढ़ी का अपमान करने का आरोप लगा रहे थे।

उन्होंने कहा, “मैं आपको खुली चुनौती देती हूं, मेरा कोई ऐसा खास बयान बताइए जिसमें मैंने पूरी पीढ़ी को शामिल किया हो? मेरे साथ इस तरह का फालतू एजेंडा मत चलाइए!” कंगना ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि वह युवाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती क्योंकि मैं खुद युवा हूं।”

कंगना ने पहले क्या कहा था

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा था, “मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स देखकर उल्टी आती है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं… मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी हर फ्रेम में सब कुछ इतना अजीब और भद्दा एक साथ नहीं देखा… मैं उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहती हूँ। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं…”

उनकी इन बातों पर लोगों ने नाराज़गी जताई और आलोचकों ने उन पर युवा प्रदर्शनकारियों के बारे में सामान्य और तीखी टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कंगना पहले ही अपनी ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सफाई दे चुकी थीं। आलोचना के बाद, कंगना ने ANI को बताया था कि उनका मकसद विरोध प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों के बारे में कोई सामान्य टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह “कुछ लोगों या कुछ महिलाओं” के बारे में बात कर रही थीं।

अपनी टिप्पणी के एक और विवादित हिस्से पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, और हम कहते हैं कि कॉकरोच गटर से निकलते हैं, तो इसमें क्या गलत है?” कंगना ने आगे कहा कि अगर कोई खुद को कॉकरोच बताता है, तो उन्हें उन्हें गटर से जोड़ने में कोई विरोधाभास नहीं दिखता।

उन्होंने कहा, “मैं खुद को कॉकरोच बिल्कुल नहीं मानती। अगर कोई कहे कि मैं गटर में रहती हूँ, तो मैं इससे इनकार करूँगी। लेकिन अगर कोई खुद को कॉकरोच कहता है, तो ज़ाहिर है कि वह गटर में ही रहेगा और कहां रहेगा?” उन्होंने फिर कहा, “लेकिन यह कहना कि मैं सभी युवाओं की बात कर रही थी, बिल्कुल गलत है।”

शबाना आज़मी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं

शबाना आज़मी उन लोगों में शामिल थीं, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 75 वर्षीय अभिनेत्री ने मार्च की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिनमें उन्हें ट्रक में यात्रा करते और प्रदर्शनकारियों के साथ बैरिकेड पार करते हुए देखा जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान अभिनेता प्रकाश राज भी उनके साथ दिखे

कंगना का ताज़ा बयान उनकी पहले दी गई सफाई को ही और मज़बूत करता है। उनका कहना है कि उनकी बातों की आलोचना करते हुए, एक खास ग्रुप पर की गई टिप्पणी को गलत तरीके से देश की पूरी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) आबादी पर हमले के तौर पर पेश किया गया है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए क्या ₹1 करोड़ का फंड काफी है? एक्सपर्ट से समझें महंगाई और रिटर्न का पूरा गणित

Retirement Planning Calculation: भारतीय निवेशकों के बीच सालों से ₹1 करोड़ को रिटायरमेंट का एक मैजिक नंबर माना जाता रहा है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक बार बैंक खाते या म्यूचुअल फंड में ₹1 करोड़ आ गए, तो उनका बुढ़ापा आराम से कट जाएगा। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

किसी व्यक्ति के लिए ₹1 करोड़ का कॉर्पस काफी हो सकता है, तो किसी के लिए ₹5 करोड़ भी कम पड़ सकते हैं। आपका रिटायरमेंट फंड कितना होना चाहिए, यह किसी राउंड फिगर पर नहीं बल्कि आपकी मासिक खर्चों, महंगाई दर, रिटायरमेंट की उम्र और लाइफ एक्सपेक्टेंसी पर निर्भर करता है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग का पूरा गणित।

क्यों फेल हो सकता है ₹1 करोड़ का ‘मैजिक नंबर’?

वाइज फिनसर्व के ग्रुप सीईओ और सीआईओ अजय कुमार यादव के अनुसार, ₹1 करोड़ की समस्या यह नहीं है कि यह छोटा अमाउंट है, बल्कि समस्या यह है कि यह नंबर आपके भविष्य की जीवनशैली के खर्चों को नहीं दर्शाता।

मान लीजिए कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में रिटायर होता है और 90 साल की उम्र (30 साल का रिटायरमेंट) तक का प्लान बनाता है। अगर ₹1 करोड़ पर 7% सालाना रिटर्न मिले, तो व्यक्ति हर महीने ₹66,500 की फिक्स्ड पेंशन ले सकता है।

अगर महंगाई दर केवल 5% सालाना भी मान ली जाए, तो आज का ₹66,500 का खर्च 10 साल बाद बढ़कर ₹1.08 लाख और 20 साल बाद ₹1.76 लाख प्रति माह हो जाएगा। यानी आपके पैसे की क्रय शक्ति तेजी से घटेगी और कुछ ही सालों में ₹1 करोड़ का फंड खत्म हो जाएगा।

इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न का असली गणित

अगर आपका पोर्टफोलियो 7% का रिटर्न देता है और महंगाई दर 5% रहती है, तो आपका वास्तविक या इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न केवल 2% ही रह जाता है। इस 2% वास्तविक रिटर्न के हिसाब से देखें, तो ₹1 करोड़ का फंड 30 सालों के लिए केवल ₹37,000 प्रति माह की ही परचेजिंग पावर दे पाएगा।

अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹1 लाख निकालना चाहता है और वह महंगाई को अनदेखा करता है, तो उसका ₹1 करोड़ का कॉर्पस 12.5 साल में खत्म होगा। लेकिन अगर महंगाई जोड़ दी जाए, तो यह फंड मात्र 9.1 साल यानी करीब 69 साल की उम्र तक में ही पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

आपको रिटायरमेंट के लिए असल में कितने पैसों की जरूरत है?

रिटायरमेंट कॉर्पस की गणना हमेशा उल्टे क्रम से करनी चाहिए। मान लीजिए एक 40 वर्षीय व्यक्ति का आज का मासिक खर्च ₹1 लाख है और वह 60 साल में रिटायर होना चाहता है। 6% महंगाई दर पर 60 साल की उम्र में वही जीवनशैली बनाए रखने के लिए उसे प्रति माह ₹3.21 लाख यानी साल के करीब ₹38.49 लाख की आवश्यकता होगी।

कितना कॉर्पस चाहिए होगा?

बिना महंगाई एडजस्टमेंट (7% रिटर्न पर) 60 साल की उम्र में कम से कम ₹4.82 करोड़ का फंड चाहिए। 5% पोस्ट-रिटायरमेंट महंगाई जोड़ने पर यही फंड बढ़कर ₹8.68 करोड़ हो जाता है।

क्या है 30X रिटायरमेंट रूल?

ट्रैक (Trackk) के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते और अजय कुमार यादव के अनुसार, 30X रूल एक अच्छा शुरुआती अनुमान हो सकता है:

नियम: अपने रिटायरमेंट के पहले साल के कुल अनुमानित खर्च को 30 से गुणा कर दें।

उदाहरण: अगर रिटायरमेंट के पहले साल का खर्च ₹38.49 लाख है, तो ₹38.49 लाख × 30 = लगभग ₹11.55 करोड़ का कॉर्पस चाहिए।

यह बड़ा फंड आपको शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, मेडिकल इमरजेंसी और लंबी उम्र जीने के जोखिम से सुरक्षा का बड़ा कवर देता है।

महंगाई के अलावा इन 3 बातों का रखें खास ध्यान

लाइफ एक्सपेक्टेंसी: अब औसतन लोग लंबा जीवन जी रहे हैं। अपनी वित्तीय योजना 75 या 80 साल के बजाय कम से कम 90 साल की उम्र मानकर बनाएं।

हेल्थकेयर कॉस्ट: इलाज का खर्च आम महंगाई की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ता है। इसके लिए रिटायरमेंट फंड से अलग एक समर्पित मेडिकल एंड इमरजेंसी रिजर्व बनाएं।

कैश फ्लो पर ध्यान दें, गोल नंबर पर नहीं: ₹1 करोड़ या ₹5 करोड़ जैसे गोल नंबरों के पीछे भागने के बजाय यह तय करें कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितना कैश फ्लो चाहिए और आपका घर कहां मेट्रो शहर या टियर-2 शहर है।

आपके लिए क्या है सही रिटायरमेंट नंबर?

भारतीय निवेशकों के लिए कोई एक फिक्स्ड रिटायरमेंट नंबर नहीं हो सकता। ₹1 करोड़ एक शुरुआत का पड़ाव तो हो सकता है, लेकिन यह पूरा रिटायरमेंट प्लान नहीं है। आपका सही नंबर वह है जो आपकी जीवनशैली, स्वास्थ्य जरूरतों, पेंशन/रेंटल इनकम और महंगाई को जोड़कर तैयार होता है ताकि रिटायरमेंट के बाद आपके पैसे कभी खत्म न हों।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।