Flood News: बिहार के 13 जिलों में खतरे के निशान को पार कर गईं गंगा! कोसी नदी भी उफान पर, अलर्ट मोड में NDRF-SDRF

Flood News: बिहार में शुक्रवार को भी हाई अलर्ट जारी रहा क्योंकि नेपाल और पड़ोसी राज्य झारखंड में हुई भारी बारिश के बाद गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और बचाव, राहत और तटबंधों की सुरक्षा के इंतजामों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है।

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं, पटना में दीघा घाट, गांधी घाट, हथिदह और मनेर के अलावा बक्सर, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।

खतरे के निशान पर गंगा नदी

गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 1 सितंबर की सुबह 49.40 मीटर था, जो 2 सितंबर की शाम बढ़कर 49.98 मीटर और 3 सितंबर की सुबह 50.18 मीटर हो गया। गुरुवार दोपहर तक जलस्तर 50.25 मीटर पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से करीब 1.65 मीटर ऊपर है। विभाग ने अनुमान जताया था कि गुरुवार रात गांधी घाट पर गंगा का पानी सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर सकता है। वहीं, मोकामा के हथिदह में शुक्रवार दोपहर तक यह स्तर पार होने की आशंका जताई गई थी।

News 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ जैसे हालात ने पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, भोजपुर, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के निचले इलाकों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, आठ जिलों – भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद – को हाई अलर्ट पर रखा गया है और अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को चेतावनी देने का निर्देश दिया गया है।

मुंगेर में, गंगा का जलस्तर 39.33 मीटर के चेतावनी स्तर को पार करते हुए 39.36 मीटर (खतरे का निशान) तक पहुंच गया, जिससे सात पंचायतें जलमग्न हो गईं और घरों में पानी घुस गया। News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, समस्तीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.95 मीटर ऊपर पहुंचने के बाद 15 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया।

अरवल में पुनपुन नदी के बढ़ने से 30 गांव डूबे

अरवल में भी हालात गंभीर बताए गए, जहां पुनपुन नदी के पानी से कुर्था और बंसी ब्लॉक के लगभग 30 गांव डूब गए, जिससे सड़क संपर्क टूट गया और बंसी पुलिस स्टेशन में भी पानी भर गया। सारण में सोनपुर, छपरा सदर, दिघा और रेवेलगंज को संवेदनशील इलाकों के तौर पर चिह्नित किया गया।

अमर उजाला के अनुसार, बेगूसराय के मटिहानी ब्लॉक में बाढ़ का पानी 17 सरकारी स्कूलों तक पहुंच गया, जबकि गया के मानपुर ब्लॉक में पेमार नदी के पानी ने अमरी और बरसाना गांवों तक जाने वाली सड़क को डुबो दिया।

प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और मेडिकल की सुविधाएं की गई

वहीं, अधिकारियों ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं, पीने का पानी, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था की है। बचाव कार्य के लिए SDRF और NDRF की टीमें, गोताखोर और नावें तैनात की गई हैं। विस्थापित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई भी शुरू की जा रही हैं।

सोनपुर में 25 नावें चल रही हैं। इसके अलावा वहां 1,000 पॉलीथिन शीट भेजी गई हैं, जबकि 500 पॉलीथिन शीट दीघा भेजी गई हैं।

पटना में 108 जगहों को सील किया गया

पटना में, शहर की सुरक्षा दीवार के पास 108 जगहों को सील किया गया, 13 स्लुइस-गेट के लीकेज को ठीक किया गया और पंपिंग स्टेशनों को तैयार रखा गया। पुनपुन नदी पर बना एक रिंग तटबंध भी टूट गया, जिससे मुख्य बांध को खतरा पैदा हो गया।

आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सलाह दी कि वे नदियों, घाटों, तटबंधों और पानी से भरे इलाकों में बेवजह न जाएं। साथ ही, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को ऐसी जगहों से दूर रखने की अपील की। ​​विभाग ने नदियों के पास तैरने, बेवजह नाव की सवारी करने और सेल्फी लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी।

तेजस्वी यादव ने  NDA सरकार पर साधा निशाना

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर बाढ़ से निपटने की अपर्याप्त तैयारी और राहत कार्यों में कमी का आरोप लगाया और कहा कि 15 से ज्यादा जिले प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कटाव और बाढ़ से मक्का और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गईं, जबकि बिजली कटौती, पीने के पानी की कमी और कनेक्टिविटी बाधित होने से ग्रामीणों को जरूरी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने दियारा इलाकों को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की भी मांग की।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा से लौटने के बाद चौधरी के साथ हालात का जायजा लिया और केंद्र व बिहार सरकार “युद्ध स्तर पर” काम कर रही हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में और बारिश व गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। इससे नदियों का जलस्तर और बढ़ने की चिंता बढ़ गई है। बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन इलाकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं, गुरुवार को देश के करीब 20 राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान को लेकर चेतावनी जारी की गई थी।

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Coimbatore Incident: कोयंबटूर में एक चौंकाने वाली घटना का CCTV फुटेज वायरल हो रहा है। जिसमें दो आवारा कुत्ते तब बीच-बचाव करते दिखे जब एक 17 साल के लड़के ने कथित तौर पर मानसिक रूप से बीमार महिला के साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश की। यह घटना गुरुवार सुबह थुडियालुर के पास रेलवे ओवरब्रिज की सर्विस रोड पर हुई। खबरों के मुताबिक, बाद में लड़के की पहचान हुई और उसी दिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, महिला सड़क किनारे दो आवारा कुत्तों के पास बैठी थी, तभी शराब के नशे में धुत लड़का उसके पास पहुंचा। CCTV फुटेज में कथित तौर पर उसे महिला से बात करते और फिर पत्थर उठाकर कुत्तों को भगाने की कोशिश करते देखा गया। कुत्ते वहां से हट तो गए, लेकिन उस पर भौंकते रहे।

इसके बाद लड़के ने कथित तौर पर महिला के साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश की। महिला मदद के लिए चिल्लाई, जिसके बाद दो कुत्तों ने कथित तौर पर उस पर झपट्टा मारा, उसके पैरों को काटा और उसे महिला से दूर खींच लिया।

इसके बाद वह लड़का वहां से भाग गया और कथित तौर पर एक कुत्ता उसके पीछे भागा। बाद में पुलिस ने CCTV फुटेज की मदद से लड़के की पहचान की और उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल, मामले की आगे जांच चल रही है।

इंटरनेट पर प्रतिक्रिया

इस घटना ने ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू कर दिया है। कई यूजर्स आवारा कुत्तों की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने बीच-बचाव किया और साथ ही समाज द्वारा कम्युनिटी जानवरों के साथ किए जाने वाले व्यवहार पर सवाल भी उठा रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “भारत, जरा ध्यान से देखो कि हम किसे ‘खतरा’ कहते हैं।” कोयंबटूर में रात करीब 2:30 बजे, दो कम्युनिटी डॉग्स तब हीरो बन गए जब एक आदमी ने कथित तौर पर एक कमजोर महिला के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। भगाए जाने के बाद, कुत्ते वापस आए और उनमें से एक ने कथित तौर पर आरोपी पर हमला कर दिया, जिससे उसे भागना पड़ा और महिला की जान बच गई। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। कम्युनिटी डॉग्स बेकार चीज नहीं हैं। वे सुरक्षा करते हैं, साथ रहते हैं और अक्सर इंसानों से ज्यादा इंसानियत दिखाते हैं।

एक और यूजर ने भी देसी कुत्तों की तारीफ की। “हमारे गली के कुत्ते सच में बहुत समझदार होते हैं! यह उन अनगिनत मामलों में से एक है जहां उन्होंने गली में महिलाओं को बुरे लोगों से बचाया है। यहां इन कुत्तों ने एक मानसिक रूप से कमजोर महिला को उस आदमी से बचाया जो उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था। देसी कुत्ते सबसे अच्छे होते हैं।”

कुछ यूज़र्स ने महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सरकार की बेरुखी पर भी सवाल उठाए। “डोगेशभाई सरकार और अधिकारियों, दोनों का काम अकेले कर रहे हैं… सोचता हूं कि ये कौन से ‘मर्द’ हैं जो चाहते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा करने वालों को ‘हटा’ दिया जाए?”

एक और यूजर ने कहा, “कुत्ते इंसानों के वफादार दोस्त और रक्षक होते हैं।” वहीं एक और यूजर ने कमेंट किया, “सड़क किनारे सड़ा-गला और कचरा खाना खाने वाले आवारा देसी कुत्तों में, हर समय ताजा बनी बिरयानी खाने वाले इंसानों के मुकाबले ज्यादा इंसानियत, नागरिक समझ और आम नागरिक वाली समझ होती है। अब समय आ गया है कि इंसानी सभ्यता खत्म हो जाए।”

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Mirzapur Viral Dialogues: ‘मिर्जापुर द मूवी’ हुई रिलीज, सोशल मीडिया पर वायरल हुए डायलॉग

Mirzapur Viral Dialogues: अमेजन प्राइम वीडियो की सबसे पॉपुलर सीरीज ‘मिर्जापुर’ का प्रीक्वल आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। अली फजल, पंकज त्रिपाठी, श्वेता त्रिपाठी, दिव्येंदु, अभिषेक बनर्जी, रवि किशन और श्रिया पिलगांवकर जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म ने फैंस के बीच खूब एक्साइटमेंट बनाकर रखा हुआ है। रिलीज के बीच सोशल मीडिया पर इस सीरीज के फेमस डायलॉग तेजी से वायरल हो रहे हैं।

1-बंदूकों की मदद से डर नहीं बढ़ाना है, डर की मदद से बंदूकें बढ़ाना है….

2-अटैक में भी गन, डिफेंस में भी गन, हम बनाएंगे मिर्जापुर को अमेरिका…..

3-माता जी यहां है, बहन यहां है, मां बहन करने में आसानी होगी…

4-डर की यही दिक्कत है कि कभी भी खतम हो सकता है….

5-सुरू मजबूरी में किये थे, अब मजा आ रहा है….

6-इज्जत नहीं करते हैं, डरते हैं सब….

7-अब चाहे सांप आके घर में दोस्ती करले..रहता तो जहरीला ही है ना….

8-कुछ लोग बाहुबली पैदा होते हैं, और कुछ बनाना पढ़ते हैं…इनको बनाएंगे…..

9-अगर नेता बनना है तो गुंडे पालो, गुंडे बनो मत…..

10-जो आया है, वो जाएगा भी बस मर्जी हमारी होगी….

Video: भगवान को अकेला नहीं छोड़ सकता… चित्रकूट बाढ़ के बीच भावुक करने वाला नजारा! DM-SP जोड़ते रहे हाथ फिर भी मंदिर से नहीं निकले पुजारी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ के बीच सामने आई एक तस्वीर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ गया और कई इलाकों में पानी भर गया। इसी दौरान एक मंदिर में मौजूद पुजारी ने वहां से निकलने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए समझाया, लेकिन वह अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हुए। पुजारी का कहना था कि वह अपने आराध्य को अकेला छोड़कर नहीं जा सकते। बाढ़ के बीच उनका यह फैसला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

वीडियो देखने के बाद लोग उनकी आस्था और समर्पण की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जता रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रहा है। जलस्तर बढ़ने से रामघाट समेत कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

चारों तरफ पानी, मंदिर में क्या हुआ?

लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। इसी दौरान प्रशासन की टीम बाढ़ प्रभावित मंदिरों का जायजा लेने पहुंची। एक मंदिर में पुजारी मौजूद मिले। अधिकारियों ने उन्हें बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने मंदिर छोड़ने से इनकार कर दिया।

अधिकारियों ने पुजारी को क्यों समझाया?

बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसी वजह से अधिकारियों ने मंदिर में मौजूद पुजारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें वहां से निकलने के लिए कहा। प्रशासन की कोशिश प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की है।

चित्रकूट में बिगड़े बाढ़ के हालात

मंदाकिनी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण रामघाट समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निर्मोही अखाड़ा और टेम्पो स्टैंड के आसपास भी पानी पहुंच गया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

रामघाट में 400 से ज्यादा दुकानें प्रभावित

बाढ़ का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ा है। रामघाट और आसपास की 400 से अधिक दुकानें पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है। करीब 20 से 25 होटल भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। दुकानदारों और स्थानीय लोगों के सामने कारोबार के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर भी परेशानी खड़ी हो गई है।

लोगों की आवाजाही भी हुई मुश्किल

जलभराव के कारण सामान्य रास्तों से आवाजाही प्रभावित हुई है। कई लोगों को कामदगिरि परिक्रमा मार्ग के आसपास हाथ ठेलों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ ने स्थानीय जनजीवन को किस तरह प्रभावित किया है।

वीडियो वायरल होने के बाद छिड़ी चर्चा

पुजारी और प्रशासन के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। जहां कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि बाढ़ जैसी स्थिति में सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।

Viral Robot Video: रोबोट को धक्का देना पड़ा भारी! मशीन ने ‘किक’ मारने के लिए बढ़ाया पैर, वीडियो वायरल

ये खाना है या चूहे की दावत? सूरत रेलवे स्टेशन के फूड स्टॉल का VIDEO देख भड़के लोग

सूरत रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने यात्रियों का ध्यान खींच लिया है। इसमें एक चूहा कांच के फूड काउंटर के अंदर रखा आलू पेटिज खाते हुए दिखाई दे रहा है। एक यात्री ने इस घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों ने तुरंत संबंधित स्टॉल पर कार्रवाई की। इस घटना ने रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले खाने की साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यात्रियों के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि खाने के सामान को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है और फूड स्टॉल्स की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है। घटना के बाद रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

सुबह-सुबह यात्री ने देखा पूरा मंजर

यह घटना 29 अगस्त की सुबह के शुरुआती घंटों की बताई जा रही है। एक यात्री ने देखा कि चूहा कांच के डिस्प्ले काउंटर के अंदर आराम से घूम रहा था और वहां रखे खाने में से पफ कुतर रहा था। काउंटर में यात्रियों के लिए दूसरे खाद्य पदार्थ भी रखे हुए थे। यात्री ने तुरंत इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया रेलवे

वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों तक मामला पहुंचा। इसके बाद संबंधित स्टॉल को तुरंत बंद करा दिया गया। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के मुताबिक, रेलवे को घटना की जानकारी मिलते ही स्टॉल पर कार्रवाई की गई। बंद किए गए काउंटर की सफाई भी कराई गई।

स्टॉल संचालक पर भी शुरू हुई कार्रवाई

मामले को सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रखा गया है। रेलवे के कमर्शियल विभाग ने स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे की ओर से आगे ऐसी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे संबंधित स्टॉल का कॉन्ट्रैक्ट स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

खास सफाई अभियान के बीच सामने आया मामला

हैरानी की बात यह है कि यह घटना रेलवे के एक विशेष सफाई अभियान के कुछ ही दिनों बाद सामने आई। वेस्टर्न रेलवे ने सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के फूड स्टॉल्स में डीप क्लीनिंग और सैनिटाइजेशन अभियान चलाने की घोषणा की थी। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे के खानपान केंद्रों में साफ-सफाई और हाइजीन के स्तर को बेहतर बनाना था।

16 अगस्त को भी हुआ था पेस्ट कंट्रोल

रेलवे अधिकारी के अनुसार, 16 अगस्त को स्टेशन पर पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल भी कराया गया था। इसके बावजूद फूड काउंटर के अंदर चूहे के पहुंचने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

रेलवे स्टेशन पर लोग सफर के दौरान अक्सर फूड स्टॉल से खाना और नाश्ता खरीदते हैं। ऐसे में खाने के सामान के बीच चूहे का पहुंचना यात्रियों के लिए चिंता की बात है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का सवाल यही है कि अगर कांच के बंद काउंटर के अंदर चूहा पहुंच सकता है, तो वहां रखे खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई कितनी भरोसेमंद है? फिलहाल रेलवे ने स्टॉल बंद कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना स्टेशन के फूड आउटलेट्स में नियमित सफाई और निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

26 तारीख का अनसुलझा खौफ! सुनामी, भुज भूकंप से लेकर नेपाल में तबाही तक… आखिर क्यों बार-बार दोहराया जाता है यह मंजर?

Snakebite in India: सांप के काटने में भारत नंबर-1, हर साल 13 लाख तक मामले; जानें क्यों बढ़ रहा खतरा

भारत में सांप के काटने का खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा एक नए वैश्विक अध्ययन से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल देश में बड़ी संख्या में लोग सांप के जहर का शिकार होते हैं, जिससे यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। खासकर गांवों और खेतों में रहने वाले लोगों के लिए इसका खतरा ज्यादा रहता है। बारिश के मौसम में सांपों के इंसानी इलाकों के करीब आने से घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। सबसे चिंता की बात यह है कि कई मामलों में पीड़ित समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इलाज में देरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाओं की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।

वहीं, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में सांप के काटने के मामलों का आंकड़ा काफी ज्यादा बताया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन इलाकों में खतरा ज्यादा है और कौन से जहरीले सांप सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होते हैं।

भारत के बाद इन देशों में सबसे ज्यादा मामले

अध्ययन में दुनिया के उन देशों की पहचान की गई है जहां सांप के काटने का खतरा सबसे ज्यादा है। अनुमानित सालाना मामलों के हिसाब से भारत सबसे ऊपर है। इसके बाद नाइजीरिया, इंडोनेशिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का नंबर आता है।

भारत: 13 लाख तक मामले

नाइजीरिया: करीब 6.66 लाख मामले

इंडोनेशिया: करीब 4.90 लाख मामले

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो: करीब 4.67 लाख मामले

रिसर्च के अनुसार, दुनिया के लगभग तीन-चौथाई सांप काटने के मामले सिर्फ 20 देशों में केंद्रित हैं।

किसानों और ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा खतरा

भारत में सांप काटने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर खास तौर पर जोखिम में रहते हैं। मानसून के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के समय सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में इंसानी बस्तियों और खेतों की ओर आ जाते हैं। बिना जूते खेतों में काम करना, जमीन पर सोना और कच्चे या खुले घरों में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

इलाज में देरी बनती है जानलेवा

सांप के काटने के बाद समय पर सही इलाज मिलना बेहद जरूरी है। लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अस्पताल दूर होने के कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लग सकता है। कई मामलों में लोग अस्पताल जाने से पहले पारंपरिक इलाज या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। कुछ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है।

भारत के ‘बिग फोर’ जहरीले सांप

भारत में गंभीर सांप काटने के मामलों के लिए चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों को आमतौर पर ‘बिग फोर’ कहा जाता है।

  1. Spectacled Cobra

यह कोबरा खेतों के अलावा कई बार इंसानी बस्तियों के आसपास भी दिखाई देता है। इसके जहर से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  1. Common Krait

कॉमन क्रेट रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। इसके काटने की कई घटनाएं सोते समय होती हैं और पीड़ित को शुरुआत में काटने का पता भी नहीं चल पाता।

  1. Russell’s Viper

रसेल वाइपर को भारत में गंभीर सांप काटने के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। इसके जहर से रक्तस्राव, ऊतकों को नुकसान और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

  1. Saw-scaled Viper

आकार में छोटा होने के बावजूद यह बेहद जहरीला सांप है। इसके जहर से खून बहने और शरीर में रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

सांप का काटना बना ‘छिपा हुआ’ स्वास्थ्य संकट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने snakebite envenoming को Neglected Tropical Disease यानी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी की प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप काटने के वास्तविक आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचतीं।

बचाव के लिए क्या कदम जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा प्रभावित इलाकों में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को सांप काटने के मामलों के इलाज की बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ग्रामीण मजदूरों को सुरक्षित जूते उपलब्ध कराना, लोगों को सांप काटने के बाद सही प्राथमिक कदमों की जानकारी देना और समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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Viral Video: नेपाल की बाढ़ में बहकर भारत पहुंचे हाथी, पानी में फंसा देख लोगों का पसीजा दिल

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। अचानक आए सैलाब ने बस्तियों, सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया, वहीं बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने और कई लोगों के लापता होने की खबर है। इस भयावह स्थिति के बीच अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में कुछ हाथी तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में फंसे नजर आ रहे हैं। ये बेजुबान जानवर पानी की लहरों के बीच खुद को बचाने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि नेपाल से आए बाढ़ के पानी के कारण हाथी बहकर उत्तर प्रदेश के बहराइच के पास पहुंच गए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स हाथियों की सलामती को लेकर चिंता जता रहे हैं और उनके सुरक्षित रेस्क्यू की उम्मीद कर रहे हैं।

बाढ़ के पानी में फंसे 4-5 हाथी

वायरल वीडियो में कई हाथी तेज बहाव वाले पानी में फंसे नजर आ रहे हैं। वे लगातार खुद को पानी की सतह से ऊपर रखने और बहाव के बीच आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। वीडियो रिकॉर्ड कर रहा एक शख्स बताता है कि नेपाल की तरफ से आए बाढ़ के पानी में बहकर ये हाथी उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित कैलाशपुरी बैराज के आसपास पहुंच गए हैं। उसके मुताबिक, पानी में करीब चार से पांच हाथी फंसे हुए थे और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही थी।

नेपाल से आए सैलाब में बहकर पहुंचे हाथी

बताया जा रहा है कि नेपाल में आई बाढ़ का पानी कर्णाली नदी में पहुंचा, जिसे उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी के नाम से भी जाना जाता है। तेज बहाव के साथ हाथी भी बहकर भारतीय क्षेत्र की तरफ आ गए।हालात की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीमें हाथियों को बचाने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गईं। अधिकारी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के साथ-साथ प्रभावित वन्यजीवों पर भी नजर रख रहे हैं।

‘इंसानों के साथ जानवर भी झेल रहे हैं तबाही’

हाथियों का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए। लोगों ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी त्रासदियों में अक्सर यह भूल जाता है कि जानवर भी उतनी ही तकलीफ झेलते हैं। एक अन्य यूजर ने हाथियों के लिए चिंता जताते हुए कहा कि इन बेजुबान जानवरों का अच्छी तरह ख्याल रखा जाना चाहिए। वहीं, एक व्यक्ति ने लिखा कि इतने सारे जानवरों को बाढ़ में फंसा देखकर उसका दिल टूट गया और आपदा की भयावहता का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

नेपाल में कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

जानकारी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ की शुरुआत करीब सुबह 9 बजे हुई, जब तिब्बत की तरफ से पानी का तेज बहाव भोटे कोशी नदी में पहुंचा। इसके बाद बाढ़ का पानी नेपाल के रसुवा जिले के कई इलाकों में फैल गया। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में सैलाब ने भारी तबाही मचाई। पानी के तेज बहाव ने रास्तों, बस्तियों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।

रेस्क्यू टीमों की नजर अब हाथियों पर

एक तरफ राहत और बचाव दल बाढ़ में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं वन विभाग की टीमें हाथियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। वायरल वीडियो ने यह भी दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जंगल और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Viral Video: दोस्त की शादी में शख्स ने दिया ऐसा गिफ्ट, सीने पर बनवा लिया दूल्हा-दुल्हन का टैटू

Viral Video: दोस्त की शादी में शख्स ने दिया ऐसा गिफ्ट, सीने पर बनवा लिया दूल्हा-दुल्हन का टैटू

शादी में दोस्त को गिफ्ट देना आम बात है, लेकिन एक शख्स ने अपने दोस्त की शादी पर ऐसा तोहफा दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। उसने दोस्त और उसकी नई-नवेली पत्नी के चेहरे का टैटू अपने सीने पर बनवा लिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। किसी को यह दोस्ती की मिसाल लग रही है, तो कोई इसे हद से ज्यादा अजीब बता रहा है। खास बात यह है कि टैटू सामने आते ही दूल्हे का रिएक्शन भी कैमरे में कैद हो गया, जिसे देखकर यूजर्स जमकर मजे ले रहे हैं।

पहले दिया कपल का स्केच

वायरल वीडियो में शादी के जश्न के दौरान शख्स नवविवाहित कपल को उनके चेहरों वाला एक स्केच देता नजर आता है। शुरुआत में यह एक सामान्य और प्यारा दोस्ती वाला तोहफा लगता है। लेकिन कुछ ही देर बाद शख्स अपनी शर्ट उतारकर ऐसा सरप्राइज देता है, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी दंग रह जाते हैं। उसी स्केच में दिख रहे दोस्त और उसकी पत्नी के चेहरे उसने अपने सीने पर स्थायी रूप से टैटू करवाए होते हैं।

दूल्हे का रिएक्शन बना चर्चा की वजह

टैटू से ज्यादा लोगों का ध्यान दूल्हे के चेहरे पर गया। जैसे ही उसने अपने दोस्त के सीने पर अपनी पत्नी का चेहरा देखा, उसके एक्सप्रेशन ने सोशल मीडिया यूजर्स को खूब हंसाया। वायरल पोस्ट में भी मजाकिया अंदाज में कहा गया कि दूल्हा पहले दोस्त के इस भावुक gesture से खुश हुआ होगा, लेकिन पत्नी का चेहरा टैटू में देखकर शायद उसके मन में सवाल आया होगा, “भाई, मेरी पत्नी ही क्यों?”

इंटरनेट पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस अनोखे तोहफे को लेकर अलग-अलग राय दी। कुछ यूजर्स ने इसे सच्ची दोस्ती और भावनाओं से जुड़ा हुआ gesture बताया। वहीं, कई लोगों को यह जरूरत से ज्यादा अजीब और असहज करने वाला लगा। एक यूजर ने इसे creepy तक बताया और सवाल किया कि जब लोग करीबी परिवार वालों के चेहरे तक का टैटू नहीं बनवाते, तो दोस्त की पत्नी का चेहरा सीने पर स्थायी रूप से बनवाना कितना सही है।

‘दोस्त का चेहरा होता तो समझ आता…’

कुछ लोगों का कहना था कि अगर शख्स ने सिर्फ अपने दोस्त का चेहरा टैटू कराया होता तो बात समझ में आती। लेकिन दोस्त की पत्नी का चेहरा भी उसी टैटू में शामिल करना उन्हें असहज लगा। एक अन्य यूजर ने दूल्हे के एक्सप्रेशन पर मजाक करते हुए कहा कि उसके चेहरे से साफ लग रहा था,“दोस्त का चेहरा ठीक था, लेकिन मेरी पत्नी का क्यों?”

अगर रिश्ता बदल गया तो?

बहस का एक दूसरा पहलू भी सामने आया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि दोस्ती और रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहते। अगर भविष्य में दोस्ती में दरार आ जाए या कपल के रिश्ते में कोई बदलाव हो जाए, तो यह स्थायी टैटू बेहद अजीब स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि, वायरल पोस्ट में टैटू बनवाने वाले शख्स की निजी जिंदगी या उसके रिश्ते से जुड़ी कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है।

लोगों को पसंद आया या लगा हद से ज्यादा?

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दोस्ती जताने के लिए कोई gesture कितना बड़ा होना चाहिए। कुछ लोगों के लिए यह जिंदगीभर याद रहने वाला दोस्ती का प्रतीक है, जबकि दूसरों को लगता है कि किसी दोस्त की पत्नी का चेहरा सीने पर स्थायी रूप से बनवाना दोस्ती से एक कदम आगे है। फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है और सबसे ज्यादा चर्चा उसी पल की हो रही है, जब दूल्हे ने पहली बार अपने दोस्त के सीने पर अपनी पत्नी का चेहरा देखा।

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Viral Video: कानपुर में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड चॉकलेट्स के लिए मची भयंकर लूट, क्या इसे बच्चों को खिलाएंगे?

Kanpur expired chocolate dump: सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के कानपुर का एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कानपुर के पनकी में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड टॉफियों और चॉकलेट्स को उठाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई है। एक फैक्ट्री द्वारा कचरे में फेंकी गई इन मिठाइयों और चॉकलेट्स को इकट्ठा करने के लिए पुरुषों और महिलाएं टूट पड़े हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही फूड सेफ्टी, वेस्ट मैनेजमेंट और गरीबी को लेकर बहस छिड़ गई है कि कोई एक्सपायर्ड चॉकलेट के लिए कैसे क्रेजी हो सकता है और क्या लोग इसे घर ले जाकर अपने बच्चों को खिलाएंगे?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Delhiite नाम के यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे अजीब होड़ बताया है। यूजर का कहना है कि एक्सपायर्ड चॉकलेट लूटने के लिए टूट पड़े लोगों में बुनियादी कॉमन सेंस पूरी तरह से गायब नजर आया।

वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट पर लोगों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने जहां एक्सपायर्ड चीजों को उठाने वालों की आलोचना की और इसके हेल्थ पर पड़ने वाले खराब असर की बात कही, तो दूसरे कुछ लोगों का मानना था कि इस घटना को गरीबी और महंगाई के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।

महंगाई और गरीबी पर छिड़ी तीखी बहस

कचरे के ढेर पर मची इस लूट को लेकर कई यूजर्स ने देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक तंगी पर चिंता जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए तंज कसा कि भाई महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब कचरा भी बजट शॉपिंग डेस्टिनेशन बन गया है। वहीं दूसरे यूजर ने सहानुभूति जताते हुए लिखा कि यह सामान्य समझ की कमी से ज्यादा गरीबी और असमर्थता को दर्शाता है। इसी गरीबी ने लोगों को कचरे से खाना उठाने पर मजबूर किया होगा। एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि सोचिए उस स्तर तक पहुंचने के लिए कितनी तंगी रही होगी कि लोग इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार हो गए।

कुछ यूजर्स ने लोगों के पहनावे को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि जिस तरह से लोगों ने कपड़े पहने हैं, उससे लगता है कि वे सभी स्कूल और कॉलेज गए होंगे। समझ नहीं आता कि उन्हें क्या सिखाया गया है कि वे एक्सपायर्ड सामान उठा रहे हैं। दूसरे यूजर ने लिखा कि लोग फ्री की टॉफियों के लिए इंफेक्शन का खतरा मोल ले रहे हैं, ऐसा लगता है जैसे कॉमन सेंस गायब हो चुका है।

कंपनी और FSSAI पर उठे सवाल, नियमों के उल्लंघन का आरोप

इस पूरी घटना के बाद कंपनियों द्वारा खराब और एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने के तरीके पर भी सवाल उठे हैं। सोशल मीडिया पर एफएसएसएआई और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए एक यूजर ने लिखा कि उस फैक्ट्री मालिक को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और सजा मिलनी चाहिए क्योंकि एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने की एक तय प्रक्रिया होती है। एक दूसरे यूजर ने कहा कि एक्सपायर्ड आइटम को निपटाने का यह मानक तरीका नहीं है और इसके लिए दोषी ब्रांड के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यह लेख यूजर-जनरेटेड कंटेंट और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। ओरिजिनल पोस्ट में किए गए दावों की मनीकंट्रोल द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।)

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