Petrol Diesel Price Today: सुबह 6 बजे जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर का भाव

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 14 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

‘हॉर्मुज स्ट्रेट कब्जे में लेगा अमेरिका’, ट्रंप बोले- जहाजों से वसूलेंगे पेट्रोलिंग चार्ज; ईरान पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया

Trump Iran Conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा। उन्होंने ईरान पर दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते को तोड़ने का आरोप भी लगाया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।

ट्रंप ने ईरान पर क्या कहा?

Fox News से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करेगा। उन्होंने कहा, “हम हॉर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले रहे हैं। हम इसकी रक्षा करेंगे। हो सकता है कि भविष्य में यहां से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा के बदले शुल्क भी लिया जाए।”

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया समझौते को ईरान ने तोड़ा। उनके मुताबिक, समझौता होने के बेहद करीब था, लेकिन ईरान ने बाद में ड्रोन हमला कर दिया।

दोनों देशों के बीच फिर हमले

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ईरान ने ओमान में रडार सिस्टम और जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस के ईंधन भंडार और गोला-बारूद डिपो को भी निशाना बनाने का दावा किया। वहीं, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।

दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ-साथ छोटी नौकाओं को भी निशाना बनाया। इन हमलों में लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा

दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई हॉर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ा तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है।

ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि उसकी नौसेना ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की और उन्हें रोक दिया। वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसकी सुरक्षा में इस रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी है।

तेल की कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड एक समय 5% तक चढ़ गया, जबकि बाद में इसकी बढ़त करीब 3.5% रह गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निवेशकों को डर है कि अगर हॉर्मुज में संकट और गहराया, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

बातचीत के दरवाजे अभी खुले

सैन्य तनाव के बीच ईरान ने कहा है कि वह कतर, पाकिस्तान और ओमान के मध्यस्थों के संपर्क में है और संघर्ष को और बढ़ने से रोकने की कोशिश जारी है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। वहीं, ट्रंप अब भी दावा कर रहे हैं कि समझौता लगभग हो चुका था, लेकिन ईरान ने उसे तोड़ दिया।

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Strait of Hormuz : ईरान को ट्रंप की चेतावनी, अमेरिका बनेगा ‘हॉर्मुज का गार्जियन’, मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ा तनाव

iran stops pakistan ship in hormuz

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) दोबारा शुरू करेगा और अब से खुद को 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संरक्षक' के रूप में स्थापित करेगा। ट्रंप ने यह घोषणा Fox News को दिए एक इंटरव्यू और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य हमलों का दौर तेज हो गया है।

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ट्रंप बोले- ईरान की नाकाबंदी फिर होगी लागू

ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि अमेरिका “ईरानी नाकाबंदी” को फिर से लागू कर रहा है, जिसके तहत ईरान के जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों की आवाजाही पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अब से अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का जिम्मा संभालेगा। इसके बदले इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा, ताकि सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई की जा सके। ट्रंप ने कहा कि इस योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर होने वाले करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत, ओमान और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय बंदरगाह वाले इलाकों पर हमले किए। इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच चल रही संघर्ष विराम (Ceasefire) वार्ता पर भी संकट गहरा गया है।

donald trump

पहले हुआ था समझौता

दोनों देशों ने पिछले महीने एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लड़ाई रोकने, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने पर सहमति बनी थी। हालांकि, अमेरिका द्वारा नाकाबंदी दोबारा लागू करने की घोषणा से इस समझौते के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान के संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह किसी भी स्थिति में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में अमेरिकी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी सेना ने कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने ईरान की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की या व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डाली, तो इसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ईरान ने क्षेत्रीय देशों को भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अमेरिका को किसी प्रकार का सैन्य या लॉजिस्टिक सहयोग दिया, तो उसे ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ युद्ध जैसी कार्रवाई माना जाएगा।

Gold Silver Price Today: सोना ₹1500 सस्ता हुआ, ₹2000 गिरा चांदी का भाव; जानिए लेटेस्ट रेट

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को दिल्ली में बड़ी गिरावट देखने को मिली। 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹1,500 टूटकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी ₹2,000 गिरकर ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2.37 लाख प्रति किलो था।

सोना-चांदी क्यों हुए सस्ते?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता फिर गहरा गई है। साथ ही अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है। इन दोनों वजहों का दबाव सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं, जिसका असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी रही। स्पॉट गोल्ड 1.3% गिरकर 4,067.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 2.32% टूटकर 58.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह का कहना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि सोने पर दबाव बना हुआ है।

अब किस पर रहेगी बाजार की नजर?

अब निवेशकों की नजर मंगलवार को आने वाले अमेरिका के CPI (Consumer Price Index) आंकड़ों पर रहेगी। इससे यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठा सकता है।

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर अमेरिका में महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है। इससे सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर महंगाई के आंकड़े नरम आते हैं, तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

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Trading Plan: क्या US-ईरान तनाव और तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद निफ्टी 24000 और बैंक निफ्टी 57300 के स्तर को बनाए रख पाएगा?

Trading Plan : पिछले दो सेशन में देखने को मिली अच्छी रिकवरी के बावजूद,निफ्टी लॉन्ग बेयरिश कैंडलस्टिक के दायरे में और पिछले बुधवार को बने बेयरिश गैप के नीचे ही बना रहा। इसलिए,जब तक इंडेक्स बेयरिश गैप को भर नहीं लेता और उसके ऊपर टिक नहीं जाता और साथ ही US-ईरान तनाव कम होने से तेल की कीमतें नीचे नहीं आ जातीं, तब तक मौजूदा कंसोलिडेशन और सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (रेंज-बाउंड ट्रेड) के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी के लिए 24,000 पर त्तकाल सपोर्ट और उसके बाद 23,800 पर अगला बड़ा सपोर्ट देखने को मिल सकता है। अगर निफ्टी 24,400 के लेवल से ऊपर जाकर मजबूती दिखाता है तो अपट्रेंड के फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

उधर बैंक निफ्टी में और तेजी की पुष्टि के लिए 58,600-58,700 के जोन से ऊपर लगातार क्लोजिंग की जरूरत है। जानकारों के मुताबिक,तब तक कंसोलिडेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसमें 57,500-57,300 के जोन में तत्काल सपोर्ट और उसके बाद 56,500 पर अगला अहम सपोर्ट दिख रहा है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

एक्सिस सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड राजेश पालविया का कहना है कि पिछले हफ्ते निफ्टी में काफी उतार-चढ़ाव रहा,क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर टूटने से जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ गया और ब्रेंट क्रूड की कीमत $80 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। उतार-चढ़ाव के बावजूद,हफ्ते के आखिर में इंडेक्स 64 अंक गिरकर बंद हुआ। वीकली चार्ट पर,इंडेक्स ने एक छोटी ‘बेयरिश कैंडल’ बनाई, जिसके दोनों तरफ लंबी शैडो (परछाई) थीं। यह मार्केट में तेज उतार-चढ़ाव और दुविधा की स्थिति को दिखाता है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो पिछले हफ्ते के 24,521 के हाई से ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट से खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 24,750 की ओर जा सकता है। यह लेवल फरवरी-अप्रैल 2026 की गिरावट के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के बराबर है। इसके बाद 24,846 पर स्थित 200-डे SMA अगला अहम लेवल होगा। नीचे की तरफ, 24,000 एक अहम सपोर्ट लेवल बना हुआ है। इस लेवल के नीचे जाने पर 23,817-23,650 का बुलिश गैप जोन दोबारा टेस्ट हो सकता है।

वीकली RSI अपनी रेफरेंस लाइन से ऊपर बना हुआ है,जो दिखाता है कि मार्केट का ओवरऑल रुख पॉजिटिव है। हालांकि,अमेरिका-ईरान विवाद और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव ही आने वाले समय में मार्केट की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे।

अहम रेजिस्टेंस: 24,250, 24,400

अहम सपोर्ट: 24,100, 23,900

स्ट्रेटेजी: 24,080 के आसपास निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें, स्टॉप-लॉस 23,950 रखें और 24,250–24,350 के जोन का टारगेट सेट करें।

Market cues : बाजार में रेंज-बाउंड ट्रेडिंग जारी रहने की उम्मीद, निफ्टी के लिए 24000 पर तत्काल सपोर्ट

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

राजेश पालविया का कहना है कि वीकली चार्ट पर बैंक निफ्टी ने दोनों तरफ शैडो वाली एक छोटी बुलिश कैंडल बनाई है,जो मार्केट में अनिश्चितता को दिखाती है। 58,500 और 57,000 के बीच चल रहा कंसोलिडेशन यह बताता है कि इंडेक्स अपनी अगली चाल के लिए किसी मजबूत ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। तकनीकी तौर पर अगर इंडेक्स 58,500 के ऊपर बना रहता है, तो खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 58,700–60,000 के जोन की ओर जा सकता है। इसके उलट,अगर यह 57,500 के नीचे जाता है तो प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो सकती है और इंडेक्स 57,000–56,500 के सपोर्ट एरिया की ओर गिर सकता है।

तकनीकी तौर पर अगर बैंक निफ्टी 58,500 के ऊपर बना रहता है तो खरीदारी का मोमेंटम फिर से बढ़ सकता है और इंडेक्स 58,700–60,000 के जोन की ओर जा सकता है। इसके उलट,अगर यह 57,500 के नीचे जाता है तो प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो सकती है और इंडेक्स 57,000–56,500 के सपोर्ट एरिया की ओर गिर सकता है।

अहम रेजिस्टेंस: 58,350, 58,550

अहम सपोर्ट: 57,800, 57,500

रणनीति: 57,850 के आसपास बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,57,600 पर स्टॉप-लॉस और 58,200–58,400 के जोन का टारगेट रखें।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today: Bull या Bear बाजार पर आज किसकी होगी पकड़, जानें Gift Nifty से क्या मिल रहा संकेत

Stock Market Today: हफ्ते के पहले दिन सोमवार 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी के गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी लगभग 208.50 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 24,024 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है जो बड़े गैप -डाउन के संकेत दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से मिलिट्री तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और ग्लोबल मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता कम हो गई है।

गिफ्ट निफ्टी लाइव चार्ट क्या संकेत देता है?

गिफ्ट निफ्टी सुबह करीब 8.20 बजे 24,024 पर ट्रेड कर रहा था, जो 210.50 पॉइंट्स या 0.88 प्रतिशत नीचे था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 शुक्रवार के 24,206.90 के बंद होने से काफी नीचे खुल सकता है। यह कमज़ोर संकेत तब आया है जब पिछले हफ़्ते भारतीय इक्विटीज मजबूती के साथ बंद हुए थे। सेंसेक्स 827.6 पॉइंट्स या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.4 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 244.1 पॉइंट्स या 1.02 प्रतिशत चढ़कर 24,206.9 पर पहुंच गया।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट सावधानी से खुलने की उम्मीद है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों के बाद जियोपॉलिटिकल टेंशन फिर से बढ़ गई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और फाइनेंशियल मार्केट में रिस्क से बचने की सोच बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी से कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से उछाल आया है, जिससे कुल मिलाकर इन्वेस्टर सेंटिमेंट पर असर पड़ा है। गिफ्ट निफ्टी अभी 24,100 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो शुक्रवार के निफ्टी क्लोजिंग 24,206.90 से नीचे है, जो घरेलू इक्विटी के लिए गैप-डाउन शुरुआत का संकेत देता है।

निफ्टी के लिए क्या लेवल होंगे अहम

आज निफ्टी 50 के आउटलुक पर बात करते हुए, रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी 50 ने 23,800 सपोर्ट ज़ोन को बचाने के बाद तेजी से वापसी की है और एक बार फिर 24150 के आसपास 100 DEMA मार्क को वापस पा लिया है, जो निचले लेवल पर खरीदारी में नई दिलचस्पी का संकेत देता है। 24,150 जोन से ऊपर लगातार मूव करने से 24,400–24,600 रीजन की ओर बढ़ने का रास्ता बन सकता है। नीचे की तरफ, 24,000 मार्क से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, इसके बाद 23,800 ज़ोन मिलेगा।

58,200–58,300 के ऊपर बैंक निफ्टी देगा मजबूती

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना ​​है कि 58,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को वापस पाने के बाद बैंक निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव टेक्निकल स्ट्रक्चर दिखाना जारी रखेगा। टेक्निकल नजरिए से, 58,200–58,300 ज़ोन अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रीजन से ऊपर लगातार मूव करने से बुलिश मोमेंटम मजबूत होगा और रिकवरी 58,600–58,700 ज़ोन की ओर बढ़ सकती है, इसके बाद 59,000 का साइकोलॉजिकल मार्क मिलेगा।

नीचे की तरफ, 58,000 लेवल से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, इसके बाद 57,800–57,700 जोन मिलेगा। मौजूदा रिकवरी स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए इन लेवल से ऊपर बने रहना जरूरी होगा। हालांकि, 57,700 से नीचे एक बड़ा ब्रेक प्रॉफिट बुकिंग को ट्रिगर कर सकता है और इंडेक्स को 57,500–57,300 सपोर्ट रीजन की ओर खींच सकता है।

मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने से क्रूड ऑयल में उछाल

वीकेंड में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच नए दुश्मनी के बाद इन्वेस्टर्स का सेंटिमेंट तेज़ी से सतर्क हो गया, जिससे पिछले महीने हुए नाजुक शांति समझौते को खतरा पैदा हो गया। ईरान ने कहा कि उसने US सेना के साथ भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है, जिससे दुनिया के सबसे ज़रूरी ऑयल शिपिंग रूट्स में से एक में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसके ज़रिए ग्लोबल पेट्रोलियम का लगभग पांचवां हिस्सा…

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4 परसेंट से ज़्यादा बढ़कर लगभग $79 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड $74 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया, जिससे महंगाई और ग्लोबल इंटरेस्ट-रेट आउटलुक को लेकर चिंताएँ फिर से बढ़ गईं।

रिस्क लेने की क्षमता कम होने से एशियाई मार्केट में गिरावट

सोमवार को एशियाई इक्विटी में गिरावट आई क्योंकि क्रूड की कीमतों में उछाल और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के नए दौर ने इन्वेस्टर्स को रिस्क एसेट्स में अपना एक्सपोजर कम करने के लिए मजबूर किया। जापान का निक्केई 1.6 परसेंट गिरा, जबकि जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.9 परसेंट गिरा।

US इक्विटी फ्यूचर्स भी कमजोर हुए, S&P 500 फ्यूचर्स 0.4 परसेंट और नैस्डैक फ्यूचर्स 0.9 परसेंट नीचे गिरे। यूरोपियन फ्यूचर्स ने नरम ओपनिंग का संकेत दिया, जिसमें यूरो स्टॉक्स 50 और DAX फ्यूचर्स दोनों 0.6 परसेंट नीचे थे।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol Diesel Price Today: आज के पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम जारी, जानें आपके शहर में क्या है कीमत

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 12 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी करीब 200 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट दिखा रहा है। जो भारतीय बाजार के कमजोर खुलने के संकेत दे रहा है। 07.26 बजे गिफ्ट निफ्टी 24,026.00 पर ट्रेड कर रहा था। इधर  एशियाई बाजारों में भी दबाव दिख रहा है। निक्केई 1 फीसदी तो कोस्पी 3 फीसदी फिसला है।

इस बीच आज हफ्ते के पहले दिन सोमवार 13 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। क्रूड की कीमतें 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार निकल गई है। क्रूड ऑयल में यह तेजी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कंट्रोल को लेकर पश्चिम एशिया में एक फिर तनाव बढ़ने के बाद देखने को मिली है।

 

Crude Oil Price: अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार

Crude Oil Price: आज हफ्ते के पहले दिन सोमवार 13 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। क्रूड की कीमतें 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार निकल गई है। क्रूड ऑयल में यह तेजी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कंट्रोल को लेकर पश्चिम एशिया में एक फिर तनाव बढ़ने के बाद देखने को मिली है।

बता दें कि साइप्रस के कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिका फिर भड़का। ईरान के करीब 140 ठिकानों पर अटैक किया। इधर ईरान ने भी खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया है। ईरान ने हॉर्मुज को बंद करने का एलान किया। वहीं ट्रंप का दावा अभी भी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुला है।

ब्रेंट क्रूड अब सितंबर में एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट के लिए $79 प्रति बैरल के निशान से ऊपर ट्रेड कर रहा है। 4% से ज़्यादा की बढ़त तब हुई जब पिछले हफ्ते कॉन्ट्रैक्ट में 5.5% की बढ़त हुई थी, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) या US क्रूड वेरिएंट भी $74 प्रति बैरल के निशान से ऊपर ट्रेड कर रहा था। वीकेंड ब्रेक के बाद यूरोपियन नेचुरल गैस फ्यूचर्स में भी 2.5% की बढ़त हुई।

होर्मुज स्ट्रेट खुला है या बंद?

हालांकि ईरान ने घोषणा की है कि स्ट्रेट, जो एक मुख्य जलमार्ग है, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 20% कंट्रोल करता है, “अगली सूचना तक” बंद रहेगा, US सेंट्रल कमांड ने इस तरह के दावे से इनकार किया है, और कहा है कि सेना नेविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।

सेंट्रल कमांड ने “X” पर लिखा, “होर्मुज स्ट्रेट उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो कानूनी तौर पर इंटरनेशनल वॉटरवे से गुज़रना चाहते हैं।”

US सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि उसने स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए रविवार को शाम 5 PM ईस्टर्न टाइम पर हमलों का एक नया दौर शुरू किया है।

ईरान युद्ध के दौरान हुए सारे फ़ायदे गंवाने के बाद, कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं। पिछले महीने फ्रांस में G7 समिट के दौरान US और ईरान दोनों ने एक MoU पर साइन किए थे। इसमें युद्ध खत्म करने और स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों का सुरक्षित रास्ता पक्का करने के पॉइंट शामिल थे।

हाल ही में हुए हमलों से पहले, शुक्रवार को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के बयान के मुताबिक, इस हालिया भड़कने से इस साल के आखिर में खत्म हुए तेल के भंडार को फिर से बनाने की कोशिशों पर असर पड़ने का खतरा है।

जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, रविवार को स्ट्रेट से लगभग कोई ट्रैफिक नहीं था, सिर्फ़ दो तेल प्रोडक्ट टैंकर चोकपॉइंट के पास आते देखे गए। हालांकि, JMIC ने आगे कहा कि ओमान द्वारा कोऑर्डिनेट किया गया दक्षिणी रूट अभी भी उपलब्ध है।

ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर और टॉप नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने ऐलान किया है कि “एकतरफ़ा डील” का ज़माना खत्म हो गया है, और ज़ोर देकर कहा है कि बातचीत फिर से शुरू होने से पहले वॉशिंगटन को होर्मुज़ ट्रांज़िट पर पहले किए गए कमिटमेंट को प्राथमिकता देनी चाहिए और ईरान से तेल एक्सपोर्ट को नॉर्मल करना चाहिए।

भारत ने जून में रूस से खरीदा रिकॉर्ड 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल, बना हुआ है फॉसिल फ्यूल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।