Market cues : मोमेंटम इंडिकेटर अभी भी दे रहे कंसोलिडेशन के संकेत, निफ्टी के लिए 24000-23950 के जोन में तत्काल सपोर्ट

Trade setup for today : 16 जुलाई को निफ्टी लगातार दूसरे सेशन में सोमवार की 260 अंको की रेंज के अंदर ही ट्रेड करता रहा और आखिर में मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। इस दौरान कैंडलस्टिक पैटर्न से कोई साफ संकेत नहीं मिला। बाजार US-ईरान के बीच तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रहा। तकनीकी तौर पर,मोमेंटम इंडिकेटर अभी भी कंसोलिडेशन का संकेत दे रहे हैं। 24,000-23,950 का जोन (20 डे और 50 डे EMA) इंडेक्स के लिए मजबूत और तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है।

अगर इंडेक्स इन लेवल से नीचे गिरता है,तो यह कंसोलिडेशन फेज में जा सकता है। हालांकि,अगर इंडेक्स इस सपोर्ट जोन को बनाए रखता है,तो अपट्रेंड की संभावना बढ़ जाएगी। जानकारों के मुताबिक,ऐसी स्थिति में 24,300 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है और इसके बाद 24,500-24,600 का लेवल एक अहम रेजिस्टेंस बन सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,023, 23,974 और 23,893

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,183, 24,233 और 24,313

सोमवार की लॉन्ग ग्रीन कैंडल के अंदर,डेली टाइमफ्रेम पर निफ्टी ने डोजि कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया,जो बुल्स और बेयर्स के बीच अनिश्चितता का संकेत है। इंडेक्स ने क्लोजिंग के आधार पर अपने 20-दिन के EMA को बनाए रखा और 50-दिन के EMA से काफी ऊपर रहा। हालांकि,यह क्लोजिंग के आधार पर 10-दिन और 100-दिन के EMA से ऊपर टिक नहीं पाया।

इसके अलावा,8 जुलाई को एक लंबी बेयरिश कैंडल बनने के बाद से यह फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक के करेक्शन के 50% और 38.2% फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के बीच ट्रेड कर रहा है। RSI 52.31 पर है और MACD अपनी-अपनी सिग्नल लाइनों से नीचे बने हुए हैं,हालांकि पिछले एक हफ्ते से दोनों साइडवेज चल रहे हैं। ये सभी बातें किसी खास दिशा में तेजी की कमी और लगातार कंसोलिडेशन का संकेत देती हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,048, 58,190 और 58,421

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,587, 57,444 और 57,214

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,717

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,305, 56,441

बैंक निफ्टी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद होने से पहले ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया। इसने एक छोटी बॉडी वाली हरी कैंडल बनाई,जिसकी ऊपरी विक (wick)लंबी थी। यह रेजिस्टेंस जोन के पास बिकवाली के दबाव का संकेत है। प्रॉफ़िट बुकिंग के बावजूद,बैंकिंग इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। 50-दिन का EMA भी लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है,जो मार्केट के बेहतर स्ट्रक्चर का संकेत है।

यह लगातार चौथे सेशन में भी 1,000-पॉइंट की रेंज में ट्रेड कर रहा है। RSI 55.05 पर अपनी सिग्नल लाइन से नीचे बना रहा और साइडवेज चलता रहा, जबकि MACD भी अपनी सिग्नल लाइन से नीचे रहा और नीचे की ओर बढ़ता रहा। हिस्टोग्राम लगातार सातवें सेशन में भी रेड ज़ोन में रहा। ये सभी बातें कंसोलिडेशन का संकेत देती हैं,हालांकि ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

15 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 735 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार छठे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और 704 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले संभावित उतार-चढ़ाव को मापने वाले India VIX में कल 3.49% की गिरावट आई और यह 13.27 पर आ गया। साथ ही यह अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के आसपास बना रहा। जब तक यह 15 के लेवल से नीचे रहता है,तब तक बुल्स को किसी बड़े जोखिम का सामना करने की संभावना कम है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 15 जुलाई को पिछले सेशन के 1.02 से गिरकर 0.95 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

LPG Price Today: गैस सिलेंडर के ग्राहकों को बड़ी राहत! बुकिंग से पहले जानें आपके शहर में क्या है नया रेट

LPG Price Today 15 July 2026: अगर आप आज यानी 15 जुलाई को घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जान लें। सरकारी तेल कंपनियों ने 15 जुलाई 2026 के लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें जारी कर दी हैं। आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है।

वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 1 जुलाई से पहले ही ₹183.50 की कटौती लागू की जा चुकी है, जिसका फायदा होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिल रहा है। भले ही आज की कीमतें स्थिर हैं। लेकिन व्यावसायिक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं (जैसे होटल और रेस्तरां) को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी ₹183.50 की बड़ी कटौती का सीधा लाभ मिल रहा है।

घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) के ताजा रेट

दिल्ली- ₹942

नोएडा- ₹939.50

मुंबई- ₹941.50

कोलकाता- ₹968

पटना- ₹1,031.50

लखनऊ- ₹979.50

चेन्नई- ₹957.50

चंडीगढ़- ₹951.50

जयपुर- ₹945.50

हरियाणा- ₹943.50

असम- ₹991

कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलोग्राम) के ताजा रेट

दिल्ली- ₹2,930

नोएडा- ₹2,930

मुंबई- ₹2,885.50

कोलकाता- ₹3,081.50

पटना- ₹3,227

लखनऊ- ₹3,052.50

चेन्नई- ₹3,106

चंडीगढ़- ₹2,954.50

जयपुर- ₹2,957.50

हरियाणा- ₹2,932

असम- ₹3,173.50

1 जुलाई को मिली थी राहत

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भले ही आज कोई बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन 1 जुलाई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की गई थी। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत में कमी आई है।

कब बदलती हैं LPG की कीमतें?

सरकारी तेल कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। नई कीमतें तय करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, परिवहन लागत और अन्य परिचालन खर्चों को ध्यान में रखा जाता है।

अपने शहर का ताजा रेट कैसे देखें?

उपभोक्ता इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर अपने शहर की एलपीजी कीमत देख सकते हैं। सिलेंडर बुकिंग के समय भी अपडेटेड कीमत दिखाई जाती है।

क्या अगले महीने बदल सकते हैं दाम?

फिलहाल, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं। हालांकि, अगले महीने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति, डॉलर-रुपया रेट और सरकार की नीति की समीक्षा के बाद कीमतों में बढ़ोतरी या कटौती की घोषणा की जा सकती है। हाल ही में 1 जुलाई 2026 को तेल कंपनियों ने व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों में ₹183.50 की बड़ी कटौती की थी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई थी।

यदि वैश्विक बाजार में यह राहत जारी रहती है, तो अगले महीने भी कीमतों में गिरावट या स्थिरता देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तनाव या सप्लाई की कमी होती है, तो मामूली बढ़ोतरी से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

GIFT Nifty Indictor: ग्लोबल बाजारों की तेजी क्या भारतीय बाजार पर दिखाएगी अपना असर या करेगी निराश, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे संकेत

GIFT Nifty Indictor: भारतीय स्टॉक मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50, बुधवार को मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के साथ धीमी शुरुआत कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों से मिले पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों ने मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर चिंताओं को कम कर दिया।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8:15 बजे 28.50 पॉइंट यानी 0.12 फीसदी की बढ़त के साथ 24,047 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे पता चलता है कि निफ्टी 50 मंगलवार के 24,052.05 के बंद स्तर के पास खुल सकता है।

यह सुस्त संकेत मंगलवार को भारतीय इक्विटी के तेजी से नीचे बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 561.46 पॉइंट या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर आ गया, जबकि निफ्टी 158.95 पॉइंट या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर ग्लोबल संकेतों से बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई, खासकर IT, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में।

कम महंगाई और बैंकों की अच्छी कमाई से वॉल स्ट्रीट में सुधार

महंगाई के अच्छे आंकड़ों और बड़े बैंकों की अच्छी कमाई की वजह से US स्टॉक्स में बढ़त के बाद रातों-रात ग्लोबल सेंटिमेंट में सुधार हुआ। नैस्डैक 0.90 परसेंट बढ़ा, S&P 500 0.38 परसेंट बढ़ा, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.02 परसेंट बढ़ा।

US में उम्मीद से कम महंगाई की रीडिंग से इन्वेस्टर्स सेंटिमेंट को सपोर्ट मिला, जिससे तेज़ मॉनेटरी सख्ती की चिंता कम हुई। CPI रिपोर्ट के बाद, मार्केट में उम्मीद बढ़ गई कि फेडरल रिजर्व जुलाई की मीटिंग में इंटरेस्ट रेट्स में कोई बदलाव नहीं करेगा, हालांकि ट्रेडर्स को अभी भी साल खत्म होने से पहले कम से कम एक बार रेट हाइक की उम्मीद है।

बैंक की कमाई से भी सपोर्ट मिला, जबकि सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेजी आई, जिससे टेक्नोलॉजी-हैवी नैस्डैक को ऊपर उठने में मदद मिली।

एशियाई मार्केट्स में तेजी

बुधवार को एशियाई इक्विटीज ने पॉजिटिव मोमेंटम को बढ़ाया, जिसकी वजह US में कम महंगाई से ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स पर दबाव कम होने के बाद साउथ कोरियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मजबूत बढ़त रही। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 1.7 फीसदी बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI 6 परसेंट और जापान का निक्केई 0.4 परसेंट बढ़ा। शुरुआती एशियाई ट्रेड में US इक्विटी फ्यूचर्स भी थोड़ी ज़्यादा तेज़ी से ट्रेड हुए।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन से एनर्जी की बढ़ती कीमतों को सपोर्ट मिलता रहा, इसलिए मार्केट सतर्क रहे।

मिडिल ईस्ट में टेंशन जारी रहने से तेल $86 से ऊपर चढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच नई मिलिट्री कार्रवाई से होर्मुज स्ट्रेट से एनर्जी सप्लाई में रुकावट को लेकर चिंता बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में हाल की तेज़ी और बढ़ गई।ब्रेंट क्रूड 1.7 परसेंट बढ़कर लगभग $86.20 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $80 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था। इस हफ़्ते तेल अब 12 परसेंट से ज़्यादा बढ़ गया है, और ब्रेंट जून के बीच के बाद अपने सबसे ऊंचे लेवल पर बंद हुआ।

यह बढ़त तब हुई जब प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी पोर्ट्स पर फिर से नेवल ब्लॉकेड लगा दिया और ईरान ने उस इलाके में US इंफ्रास्ट्रक्चर पर जवाबी हमले किए, जिससे ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

जियोपॉलिटिक्स और क्रूड पर शिफ्ट हुआ बाजार का फोकस

मंगलवार को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स नेट सेलर बने रहे, उन्होंने Rs 739 करोड़ के भारतीय इक्विटी बेचे। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने सपोर्ट देना जारी रखा, Rs 2,927 करोड़ के इक्विटी खरीदे, जिससे विदेशों में बिकवाली को एब्जॉर्ब करने में मदद मिली।

हालांकि US में महंगाई कम होने और उम्मीद से ज़्यादा बैंक अर्निंग्स के बाद ग्लोबल इक्विटी सेंटिमेंट में सुधार हुआ है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय मार्केट के लिए मुख्य शॉर्ट-टर्म रिस्क बनी हुई हैं। एनर्जी की ऊंची कीमतें महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं, भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा सकती हैं और अगर जियोपॉलिटिकल हालात और बिगड़ते हैं तो कॉर्पोरेट प्रॉफिट पर असर डाल सकती हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल की ताजा कीमतें अपडेट, जानें आपके शहर का रेट

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 15 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 15 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के हल्की बढ़त के साथ सपाट खुलने की संभावना दिख है,क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 24,045.50 के आसपास हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

14 जुलाई को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में भारी गिरावट आई। इसकी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत रहे। कल बाजार की शुरुआत कमजोर रही और निफ्टी गिरकर 24,100 के नीचे आ गया। पूरे सेशन के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ता दिखा। खासकर IT,ऑटो और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी रही,जिससे इंडेक्स 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। आखिर में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही दिन के अपने निचले स्तरों के आस-पास बंद हुए। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर और निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ।

हॉर्मुज पर 20% टोल टैक्स से पलटे ट्रंप

हॉर्मुज पर 20 परसेंट टोल से ट्रंप पलट गए हैं। उन्होंने खाड़ी देशों के दबाव के बाद फैसला बदला है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में गल्फ के देश US में बड़ा निवेश करेंगे। इधर अमेरिका ने फिर ईरान की नाकेबंदी कर दी है। 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात करते हुए ईरानी ठिकानों पर भीषण हमले जारी हैं।

कच्चा तेल $86 के करीब कायम, सोने में करीब 1% की बढ़त

ट्रंप के टोल टैक्स से पीछे हटने के बावजूद कच्चे तेल में तेजी कायम है। इसका भाव 86 डॉलर के करीब दिख रहा है। उधर US में अनुमान से कम रिटेल महंगाई के आंकड़ों के बाद सोने में करीब एक फीसदी की बढ़त है।

एक दिन में 25% फिसला IBM, 3% से ज्यादा फिसले इंफोसिस और विप्रो के ADR

IT शेयरों पर आज बाजार की नजर रहेगी। Q2 के कमजोर कारोबारी अपडेट के बाद IBM एक दिन में ही 25% टूट गया। इस स्टॉक में 58 साल में पहली बार एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट आई। इंफोसिस और विप्रो के ADR भी तीन फीसदी से ज्यादा फिसले हैं।

टाटा एलेक्सी का Q1 मुनाफा 22.6% घटा

पहली तिमाही में टाटा एलेक्सी के नतीजे कमजोर रहे हैं। तिमाही आधार पर इसके मुनाफे में 23 फीसदी की कमी आई है। मार्जिन पर भी करीब 3 फीसदी का दबाव दिखा है। हालांकि आय में 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आज आएंगे HDFC LIFE के नतीजे, वायदा की 5 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार

नतीजों के लिहाज से आज का दिन अहम है। आज निफ्टी में शामिल HDFC LIFE के नतीजे आएंगे। Q1 में इसका Annual Premium Equivalent 7% बढ़ सकता है। हालांकि VNB MARGIN पर दबाव दिख सकता है। साथ ही ICICI PRU, HDFC AMC समेत वायदा की 5 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:25 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 20.50 अंक यानी 0.09 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 24,037 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए सुस्ती का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में बढ़त के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 0.59 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.38 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंग सेंग में 1.07 फीसदी की बढ़त दिख रही है। ताइवान के बाजार में भी 1.72 फीसदी की मजबूती नजर आ रही है। वहीं,कोस्पी 6.23 फीसदी भागा है। शांघाई कंपोजिट में 0.05 फीसदी की हल्की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

मंगलवार को S&P 500 और नैस्डैक में बढ़त देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद,बड़े बैंकों के अच्छे नतीजों और उम्मीद से कम महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों की जोखिम लेने की भूख बढ़ाई। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 10.02 अंक या 0.02% बढ़कर 52,508.66 पर पहुंच गया। S&P 500 में 28.55 अंक या 0.38% की बढ़त हुई और यह 7,543.89 पर बंद हुआ। जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 233.83 अंक या 0.90% बढ़कर 26,107.01 पर पहुंच गया।

MF Investment : जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने जमकर किया निवेश, इनका कैश लेवल 19 महीने के निचले स्तर पर आया

डॉलर इंडेक्स

डॉलर अपने सभी ‘ग्रुप-ऑफ-10’साथियों के मुकाबले कमजोर हुआ है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.80 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में बुधवार को शुरुआती कारोबार में 10 ईयर और 2 ईयर के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से घटकर 4.58% और 4.18% हो गई है।

एशियन करेंसी

ज्यादातर एशियाई करेंसी में पिछली क्लोज़िंग के मुकाबले मामूली बढ़त दिख रही है। इसमें मलेशियाई रिंगित सबसे आगे है,जिसमें 0.34% की बढ़त हुई है। ताइवान डॉलर में 0.196% और जापानी येन में 0.154% की बढ़त हुई है। फिलीपीन पेसो में 0.123 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इसके बाद सिंगापुर डॉलर (0.109 प्रतिशत),इंडोनेशियाई रुपया (0.099 प्रतिशत), चीनी रेनमिनबी (0.097 प्रतिशत) और दक्षिण कोरियाई वॉन (0.088 प्रतिशत) का नंबर है। थाई बहत में सबसे कम बढ़त देखी जा रही है। यह अपने पिछले क्लोजिंग भाव से 0.045 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 14 जुलाई को 739 करोड़ रुपये के शेयर बेचे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,927 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में रौनक, कोस्पी 7% चढ़ा, US में कमजोर CPI डेटा और AI ट्रेड में नई तेजी से मिल रहा सपोर्ट

Asian Market Today: आज ग्लोबल बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है। निक्केई एक परसेंट तो कॉस्पी 7% से ज्यादा उछला है। उधर चिप शेयरों में खरीदारी लौटने से नैस्डैक करीब 1 फीसदी चढ़ा है। डाओ और S&P में भी बढ़त देखने को मिली। दरअसल, उम्मीद से कम US महंगाई के आंकड़ों से फेड इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद कम होने और AI ट्रेड में नई तेजी से इन्वेस्टर्स के सेटीमेंट को सपोर्ट मिला है। यहीं वजह है कि आज एशिया बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है।

जापान का निक्केई 225 0.87% और टॉपिक्स 0.23% बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6.95% उछला, जबकि कोसडैक 5.08% चढ़ा। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स 1.10 फीसदी ऊपर ट्रेड करता नजर आ रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.57 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.43 फीसदी चढ़कर 45,379.03 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.08 फीसदी की बढ़त के साथ 3,974.02 के स्तर पर दिख रहा है।

कैसा रहा अमेरिकी बाजारों का हाल

अमेरिकी स्टॉक मार्केट मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुआ क्योंकि बैंकों की अच्छी कमाई और उम्मीद से कम महंगाई रिपोर्ट ने सेंटिमेंट को बढ़ावा दिया।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 10.02 पॉइंट्स या 0.02% बढ़कर 52,508.66 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 28.55 पॉइंट्स या 0.38% बढ़कर 7,543.89 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 233.83 पॉइंट्स या 0.90% बढ़कर 26,107.01 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के शेयर की कीमत 4.06% बढ़ी, AMD के शेयर 2.57% बढ़े, इंटेल के शेयर 4.50% बढ़े, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 4.92% उछले, SK हाइनिक्स ADR 27.29% उछला, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.55% गिरे, एप्पल के शेयर 0.77% गिरे, टेस्ला के शेयर 0.36% बढ़े, जबकि IBM के शेयर 25.21% गिरे।

US-ईरान युद्ध

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सभी पोर्ट्स पर फिर से नेवल ब्लॉकेड लगा दिया और धमकी दी कि अगर तेहरान ने बातचीत फिर से शुरू नहीं की तो अगले हफ़्ते पावर प्लांट्स और पुलों पर हमला किया जाएगा। US मिलिट्री ने भी लगातार चौथे दिन ईरान पर नए हमले किए। इस बीच, ईरान का कहना है कि पिछले हफ़्ते दुश्मनी फिर से शुरू होने के बाद उसने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है।

US इन्फ्लेशन

US कंज्यूमर इन्फ्लेशन जून में उम्मीद से ज़्यादा धीमी हुई। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स जून तक 12 महीनों में 3.5% बढ़ा, जो अब भी सबसे ज़्यादा है, मई में 4.2% बढ़ने के बाद। CPI मई में 0.5% बढ़ने के बाद महीने में 0.4% गिरा। रॉयटर्स के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने अनुमान लगाया था कि CPI साल-दर-साल 3.8% बढ़ेगा और महीने के आधार पर 0.1% गिरेगा।

IBM शेयर्स

कंपनी के दूसरी तिमाही के निराशाजनक शुरुआती नतीजे जारी करने के बाद IBM के शेयर की कीमत 25% से ज़्यादा गिर गई। US की बड़ी टेक कंपनी ने कहा कि वह सॉफ्टवेयर से डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में कॉर्पोरेट खर्च में बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में “लड़खड़ा” गई है और दूसरी तिमाही में उसकी कमाई में बड़ा नुकसान होगा।

LSEG के इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, IBM ने कहा कि उसे उम्मीद है कि Q2 रेवेन्यू सिर्फ़ 1% बढ़कर $17.2 बिलियन हो जाएगा, जबकि एनालिस्ट्स का अनुमान $17.86 बिलियन था।

आज सोने का रेट

US में महंगाई उम्मीद से कम होने के बाद सोने की कीमतें स्थिर हो गईं। स्पॉट गोल्ड की कीमत थोड़ी बदली और $4,054.36 प्रति औंस रही, जबकि चांदी की कीमतें 0.2% बढ़कर $58.80 प्रति औंस हो गईं।

कच्चे तेल की कीमतें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नेवल नाकाबंदी लगाने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। ब्रेंट तेल की कीमत 1.72% बढ़कर $86.19 प्रति बैरल हो गई, जबकि WTI क्रूड 1.4% बढ़कर $80.40 प्रति बैरल हो गया।

Stock Market Live: “बुल या बीयर” किस तरह होगी बाजार की चाल, जानें ग्लोबल मार्केट से क्या मिल रहे संकेत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 15 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 14 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,100 के नीचे रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर और निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ। लगभग 1422 शेयरों में बढ़त हुई,2632 शेयरों में गिरावट आई और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में शामिल शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,श्रीराम फाइनेंस,HDFC लाइफ,टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे। जबकि, भारती एयरटेल,अपोलो हॉस्पिटल्स,सन फार्मा,TCS और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा गिरा (2%),इसके बाद निफ्टी PSU बैंक (-1.8%),निफ्टी ऑटो (-1.6%),निफ्टी बैंक (-1.1%) और निफ्टी IT (-1%) रहे। अन्य सेक्टरों में,निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.8%,निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.6%,निफ्टी FMCG 0.6%,निफ्टी मीडिया 0.3% और निफ्टी इंफ्रा 0.3% गिरे।

वहीं, दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा ने 1% की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया,इसके बाद निफ्टी मेटल रहा,जिसमें 0.60% की बढ़त हुई। छोटे-मझोले शेयर भी दबाव में रहे। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.4% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1% गिरे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं हैं,जिससे घरेलू इक्विटी पर फिर से दबाव आ गया। इससे यह डर भी पैदा हो गया कि क्या ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट भारत की कॉर्पोरेट कमाई में सुधार को और धीमा कर देगी। रुपये के डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार करने से मुश्किलें और बढ़ गईं। इससे इंपोर्टेड महंगाई की चिंता बढ़ी और अलग-अलग इंडस्ट्रीज में इनपुट कॉस्ट बढ़ने का डर पैदा हो गया।

इसका सबसे ज्यादा असर महंगाई और कॉस्ट-सेंसिटिव सेक्टर पर दिखा। ऑटो,फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर में गिरावट के कारण बाजार नीचे आया। जबकि फार्मा सेक्टर ने इस ट्रेंड के विपरीत प्रदर्शन किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने’डिफेंसिव’शेयरों का सहारा लिया। इससे फार्मा सेक्टर को फायदा हुआ। विदेशी फंड की लगातार निकासी ने भी बाजार में सावधानी का माहौल बनाए रखा और सेंटीमेंट को कमजोर किया। अब सबकी नजरें US फेड चेयर पर हैं,जिनके आने वाले बयान ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं। इस बीच,Q1 अर्निंग्स सीजन तो अच्छा चल रहा है,लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क में तेजी से हुई बढ़ोतरी ने सेंटीमेंट को कुछ हद तक कमजोर कर दिया है।

इक्विरस वेल्थ में MD और बिज़नेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों,कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू करेंसी में भारी गिरावट के कारण बैंकिंग,IT,ऑटोमोबाइल और रियल्टी शेयरों में भारी बिकवाली हुई,जिससे बेंचमार्क इंडेक्स गिर गए।

US-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। FIIs की ओर से घरेलू इक्विटी में नई बिकवाली के चलते निवेशक इक्विटी में निवेश करते समय सावधानी बरतेंगे और चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाएंगे।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि NSE के वीकली ऑप्शन की एक्सपायरी के कारण गैप-डाउन के साथ खुलने के बाद इंडेक्स एक दायरे में ही बना रहा। इसने पिछले दिन के निचले स्तर के आसपास सपोर्ट लिया और गिरती हुई ट्रेंडलाइन के ऊपर बना रहा। इंडेक्स 50 EMA के ऊपर भी बना रहा, जो इसकी अंदरूनी मजबूती को दिखाता है।

शॉर्ट टर्म में,जब तक इंडेक्स 23,950 के ऊपर रहता है,तब तक आउटलुक पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। ऊपर की तरफ यह 24,250–24,300 के जोन की ओर बढ़ सकता है। हालांकि,23,950 के नीचे बड़ी गिरावट मौजूदा तेजी वाले सेटअप को कमजोर कर सकती है और कंसोलिडेशन का दौर शुरू कर सकती है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में US-ईरान युद्धे से जुड़ी घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और Q1FY27 के अर्निंग्स सीजन की अहम भूमिका होगी। कंपनियों के मज़बूत नतीजों से बाजार को सहारा मिल सकता है,लेकिन जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतें निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती हैं।

ISM 2.0 : सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का रास्ता साफ, चिप मैन्युफैक्चरिंग,डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट पर होगा फोकस

बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट,वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडलस्टिक पैटर्न’बनाया है,जो ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव दिखाता है। इंडेक्स अपने 200 डे के मूविंग एवरेज के पास भी बंद हुआ है,इसलिए इस सपोर्ट जोन पर नजर रखना ज़रूरी है। इसके अलावा,RSI ने’लोअर टॉप’बनाया है जो ऊपर की ओर बढ़ने की रफ्तार (मोमेंटम) में कमी का संकेत है।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी बैंक के लिए सपोर्ट 56,800–56,900 के जोनन में है। जबकि, तत्काल रेजिस्टेंस 58,200 के आसपास दिख रहा है। मोमेंटम कमजोर होने को देखते हुए,ट्रेडर्स को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए और नई पोजीशन लेने से पहले किसी साफ चाल(डिसाइसिव मूव)का इंतजार करना चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bank Nifty Trend : बैंक निफ्टी में तीन दिन की बढ़त थमी, 1% से ज्यादा टूटा इंडेक्स, केनरा बैंक और कोटक ने लगाई सबसे तगड़ी चपत

Bank Nifty Trend : कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच 14 जुलाई को बैंक निफ्टी इंडेक्स में 1% से ज्यादा की गिरावट आई है। जिससे इसकी लगातार तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया है। आज ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई,जो 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते के बाद से सबसे ऊंची कीमत है। सोमवार को अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शिपिंग पर रोक फिर से लागू कर दी और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से उधार लेने की लागत बढ़ सकती है,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है और ट्रेजरी से होने वाले मुनाफे में कमी आ सकती है। इसके चलते बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना है।

बैंक निफ्टी की इस गिरावट में केनरा बैंक,कोटक महिंद्रा बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का योगदान सबसे ज्यादा है। इनमें 2%,1.6% और 1.3% की गिरावट आई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और फेडरल बैंक भी उन बैंकों में शामिल थे जिनके शेयरों में गिरावट आई है। फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों श्रीराम फाइनेंस,बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व में 1-2% की कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा है। 1.25 बजे के आसपास बैंक निफ्टी 1.15 फीसदी की गिरावट के साथ 57,475 के आसपास कारोबार कर रहा था।

बैंक निफ्टी व्यू

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ,58,700 (जून का हाई) अभी भी एक तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर मजबूती से बंद होता है,तो इससे चल रहे कंसोलिडेशन से ब्रेकआउट की पुष्टि होगी और आने वाले हफ्तों में 59,300 और फिर 60,000 के लेवल की ओर रैली शुरू हो सकती है। अगर बैंक निफ्टी 58,700 के ऊपर नहीं जा पाता है तो इसका मतलब होगा कि पिछले 4 हफ्तों से चल रहा कंसोलिडेशन और जारी रहेगा।

नीचे की तरफ,57,400-57,500 के लेवल के तत्कल सपोर्ट के तौर पर काम करने की उम्मीद है,जो गुरुवार के गैप-अप जोन और सोमवार के निचले स्तर से मेल खाता है। अगला अहम सपोर्ट 56,500 पर है,जहां 20 हफ्ते और 50-हफ्ते के EMA और पिछले हफ्ते का निचला स्तर एक साथ मिलते हैं,जिससे यह एक मजबूत डिमांड जोन बन जाता है।

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा की राय

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए 57,500 पर तत्काल सपोर्ट है। जबकि 57,200 अगला अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। ऊपर की तरफ,58,500 मुख्य रेजिस्टेंस है और इस लेवल के ऊपर ब्रेकआउट से नई तेजी आ सकती है। जब तक इंडेक्स सपोर्ट के ऊपर बना हुआ है ट्रेडर्स को गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार की राय

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि कुछ ऐसी मुश्किलें फिर से सामने आ रही हैं जिनका असर जल्द ही भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। अगर तेल में यह तेजी जारी रहती है, तो इससे भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक हालात पर फिर से खरीब असर पड़ सकता है। BoP (भुगतान संतुलन) की कमजोरी और रुपये पर संभावित असर फिर से ऐसी परेशानियां आ सकती हैं जिनसे बाजार पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि US में 10 ईयर बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 4.61% हो जाना एक और चिंता की बात है,जिसका असर विदेशी निवेश पर पड़ सकता है। जून में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई है और इसके और बढ़ने की संभावना है। इन चुनौतियों को देखते हुए,निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। तेजी से बदलते जियोपॉलिटिकल और आर्थिक माहौल में निवेश से जुड़े फैसले लेना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। निवेशकों इस लगातार बदलते हालात पर नजर बनाए रखनी चाहिए और खासकर कच्चे तेल की कीमतों के मामले में स्थिति साफ होने का इंतजार करना चाहिए।

 

 Stock Of The Day : ब्लॉक डील के बाद बायोकॉन में आई शानदार तेजी, 6% से ज्यादा चढ़कर वायदा का टॉप गेनर बना स्टॉक

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US-Iran War: ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका! मार गिराया 40 लाख डॉलर की कीमत वाला ये ड्रोन

Iran-US War: पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। कुछ दिनों से शांत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से हाहाकार मच गया है। ईरान और अमेरिका में एक बार फिर तन गई है। अमेरिका ने सोमवार रात को फिर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। वहीं अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी बड़ा एक्शन लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने सोमवार को दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे अमेरिका के एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है।

ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका 

ईरान के सरकारी टीवी नेटवर्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “कुछ मिनट पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है।” ईरान के कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने भी इस खबर की जानकारी दी है। हालांकि, इस घटना से जुड़ी ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वहीं, अमेरिका की सेना और व्हाइट हाउस की ओर से भी इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

होर्मुज में लगातार बढ़ रहा है तनाव

अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे को कम करना है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू करने का ऐलान किया है, जो मंगलवार से शुरू होगी। इसके अलावा, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत फीस लगाने का प्लान बना रही है। इन फैसलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर भी पड़ा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।

ईरानी हमले में एक भारतीय की मौत

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को बताया कि ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास ईरानी क्रूज़ मिसाइलों के हमले में यूएई के दो टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए। इस हमले में एक भारतीय चालक दल (क्रू) के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। वहीं, एमक्यू-1 प्रीडेटर अमेरिका का एक मानवरहित विमान (ड्रोन) है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है। यह एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें दागने में भी सक्षम है। एक एमक्यू-1 ड्रोन की कीमत करीब 40 लाख डॉलर (लगभग 4 मिलियन डॉलर) बताई जाती है, जबकि इसके पूरे ऑपरेशनल सिस्टम की लागत करीब 2 करोड़ डॉलर (लगभग 20 मिलियन डॉलर) होती है।