IDFC First Bank Q1 Results: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का प्रॉफिट जून तिमाही में हुआ दोगुना, एसेट क्वालिटी भी बेहतर हुई

IDFC First Bank Q1 Results: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 25 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट बढ़कर दोगुना यानी 1,075 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में बैंक का प्रॉफिट 465 करोड़ रुपये था। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों पर नतीजों का असर सोमवार यानी 27 जुलाई को दिखेगा।

नेट इंटरेस्ट मार्जिन 21 फीसदी बढ़ा

जून तिमाही में IDFC First Bank का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NII) 21 फीसदी बढ़कर 5,972.3 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,933 करोड़ रुपये था। इस दौरान बैंक की एसेट क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट आया। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) तिमाही दर तिमाही आधार पर 1.61 फीसदी से घटकर 1.51 फीसदी पर आ गया। नेट एनपीए 0.48 फीसदी से घटकर 0.44 फीसदी पर आ गया।

इस साल 5 फीसदी से ज्यादा गिरा है शेयर 

जून तिमाही में बैंक को NCGTC से CGFMU स्कीम के तहत 514.82 करोड़ रुपये मिले। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक प्राइवेट बैंक है। 24 जुलाई यानी शुक्रवार को बैंक का शेयर 1.3 फीसदी चढ़कर 80.95 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर 5.4 फीसदी गिरा है। इसके मुकाबले निफ्टी में इस दौरान 9 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है।

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शेयर बाजारों में 24 जुलाई को गिरावट 

24 जुलाई को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार पांचवें दिन गिरावट आई। यह बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा गिरावट वाला हफ्ता रहा। इसकी वजह मध्यूपूर्व में चल रही लड़ाई है। इस लड़ाई की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

AU Small Finance Bank Q1 Results: मुनाफा 37% बढ़कर हुआ ₹796 करोड़, NII में 32% का इजाफा; NPA घटा

प्राइवेट सेक्टर के एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 37 प्रतिशत बढ़कर 795.95 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 580.86 करोड़ रुपये था। बैंक की कुल इनकम करीब 15.5 प्रतिशत बढ़कर 5991.95 करोड़ रुपये हो गई। जून 2025 तिमाही में यह 5189.05 करोड़ रुपये थी। बैंक ने 25 जुलाई को शेयर बाजारों को बताया कि जून 2026 तिमाही में उसकी शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2695 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 47 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 5.9 प्रतिशत हो गया।

जून 2026 तिमाही में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखा गया। एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, ग्रॉस NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) रेशियो घटकर 2.10 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 2.47 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी कम होकर 0.76 प्रतिशत हो गया, जो जून 2025 तिमाही में यह 0.88 प्रतिशत था। एसेट्स पर एवरेज रिटर्न बढ़कर 0.42 प्रतिशत रहा, जो कि जून 2025 तिमाही में 0.37 प्रतिशत था।

डिपॉजिट और लोन

जून 2026 तिमाही के दौरान बैंक के कुल डिपॉजिट का आंकड़ा 1,57,727 करोड़ रुपये रहा। यह सालाना आधार पर 24 प्रतिशत ज्यादा है। CASA (करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट) डिपॉजिट 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 45,399 करोड़ रुपये के हो गए। CASA रेशियो 29 प्रतिशत रहा। ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर जून 2026 तिमाही में 1,44,250 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

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AU Small Finance Bank का शेयर एक साल में 34 प्रतिशत मजबूत

अच्छे तिमाही नतीजों के बाद सोमवार, 27 जुलाई को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर में तेजी आने की उम्मीद है। शुक्रवार को बीएसई पर शेयर 1002.25 रुपये पर बंद हुआ था। बैंक का मार्केट कैप 75000 करोड़ रुपये है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक साल में 34 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹4 लाख से कम सैलरी वाले सावधान! टैक्स तो नहीं लगेगा, पर ITR भरना है जरूरी; जानिए ये 6 कड़े नियम

ITR Filing Rules Below Exemption Limit: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना लेट फीस इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है जो बेहद करीब है। आयकर विभाग के अनुसार, अब तक 3 करोड़ से अधिक करदाता अपना ITR फाइल कर चुके हैं।

आमतौर पर माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹4 लाख और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ₹2.5 लाख से अधिक की सालाना कमाई पर ही आईटीआर भरना अनिवार्य होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सालाना कमाई इस बेसिक छूट सीमा से कम होने के बावजूद भी आपको जेल या पेनल्टी से बचने के लिए ITR दाखिल करना पड़ सकता है?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के तहत ऐसे 6 विशेष नियम तय किए गए हैं, जिनके दायरे में आने पर आईटीआर भरना अनिवार्य हो जाता है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

इन 6 स्थितियों में कम कमाई पर भी अनिवार्य है ITR भरना

अगर आपकी सालाना आय बेसिक छूट सीमा से कम है, फिर भी इनमें से कोई एक शर्त पूरी होने पर आपको ITR दाखिल करना ही होगा:

1- करंट अकाउंट में ₹1 करोड़ से ज्यादा का डिपॉजिट: अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक चालू खातों में ₹1 करोड़ या उससे अधिक की नकदी जमा की है।

2- विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक का खर्च: अगर आपने अपने या किसी अन्य व्यक्ति के फॉरेन ट्रैवल जैसे- हवाई टिकट, टूर पैकेज आदि पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं।

3- ₹1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल: अगर पूरे साल में आपका बिजली बिल कुल मिलाकर ₹1 लाख से अधिक आया है।

4- TDS या TCS की सीमा पार होना: अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका कुल TDS/TCS कटान ₹25,000 या उससे अधिक है (60 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए)। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे ऊपर) के लिए यह सीमा ₹50,000 रखी गई है।

5- सेविंग्स अकाउंट में ₹50 लाख या उससे अधिक जमा: अगर वित्त वर्ष में आपके एक या एक से अधिक बचत खातों में कुल ₹50 लाख या उससे ज्यादा जमा हुए हैं।

6- विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खाते में साइनिंग अथॉरिटी: अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेश में कोई संपत्ति, फाइनेंशियल शेयर या किसी विदेशी बैंक खाते का साइनिंग राइट रखते हैं।

कम कमाई के बावजूद ITR फाइल करने के 4 बड़े फायदे

भले ही कानूनन आपके लिए आईटीआर भरना अनिवार्य न हो, फिर भी वॉलंटरी रिटर्न दाखिल करने के कई बड़े फायदे मिलते हैं:

लोन मिलने में आसानी: होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के आवेदन के दौरान ITR सबसे मजबूत ‘इनकम प्रूफ’ का काम करता है।

वीजा प्रोसेसिंग: कई देशों जैसे- अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन देश का वीजा हासिल करने के लिए पिछले 2-3 सालों का ITR जमा करना अनिवार्य होता है।

TDS रिफंड का दावा: अगर आपका टीडीएस कटा है, तो उसे वापस पाने के लिए रिटर्न भरना ही एकमात्र तरीका है।

नुकसान को आगे ले जाना: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए समय पर ITR फाइल करना जरूरी होता है।

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में ₹999 की छोटी SIP से तैयार होगा लाखों का फंड, देखें 10, 15 और 25 साल का कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में ₹999 की छोटी SIP से तैयार होगा लाखों का फंड, देखें 10, 15 और 25 साल का कैलकुलेशन

SIP Investment Calculation: क्या आप सोचते हैं कि शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में बड़ा फंड बनाने के लिए हर महीने भारी-भरकम रकम का निवेश करना जरूरी है? अगर हां, तो यह खबर आपकी इस सोच को बदल देगी। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आप रोजाना महज ₹33 की बचत यानी हर महीने सिर्फ ₹999 का निवेश करके भी लाखों रुपये का बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

कंपाउंडिंग की ताकत और लंबी अवधि के अनुशासन के चलते छोटा सा निवेश भी समय के साथ एक बड़ी संपत्ति में तब्दील हो जाता है। आइए एसआईपी कैलकुलेटर के जरिए समझते हैं कि ₹999 महीना जमा करने पर 15, 20 और 25 सालों में कितना रिटर्न मिल सकता है।

₹999 की मासिक SIP: 12% और 15% रिटर्न का गणित

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में औसतन 12% से 15% तक का सालाना रिटर्न देखा जाता है। अगर आप हर महीने ₹999 बिना रुके एसआईपी करते हैं, तो आपकी वेल्थ कैसे बढ़ेगी:

12% अनुमानित सालाना रिटर्न पर इतना बनेगा फंड

12% अनुमानित सालाना रिटर्न पर इतना बनेगा फंड

15% अनुमानित सालाना रिटर्न पर (एग्रेसिव फंड्स)

20 साल में: आपका कुल निवेश ₹2.39 लाख होगा, लेकिन 15% रिटर्न के हिसाब से यह फंड बढ़कर ₹15.13 लाख बन सकता है।

25 साल में: ₹2.99 लाख का कुल निवेश बढ़कर ₹32.81 लाख के बड़े कॉर्पस में तब्दील हो सकता है।

कंपाउंडिंग की ताकत कैसे काम करती है?

इस कैलकुलेशन की सबसे खास बात यह है कि जैसे-जैसे समय बीतता है, आपकी जेब से लगने वाला पैसा कम रहता है, जबकि ब्याज पर मिलने वाला ब्याज आपके फंड को तेजी से बढ़ाता है। 20 साल के दौरान आपका अपना निवेश केवल ₹2.39 लाख रहेगा, लेकिन कंपाउंडिंग के कारण आपको ₹7.5 लाख से अधिक का केवल शुद्ध मुनाफा मिलेगा।

‘स्टेप-अप SIP’ से फंड को बनाएं दोगुना

अगर आप हर साल अपनी एसआईपी रकम में केवल 10% का इजाफा करते हैं (जैसे- पहले साल ₹999/महीना, दूसरे साल ₹1,100/महीना), तो 20 साल बाद आपका यही फंड ₹10 लाख के बजाय बढ़कर ₹22 लाख से अधिक हो सकता है। जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, वैसे-वैसे एसआईपी अमाउंट बढ़ाना पैसे जुटाने का सबसे स्मार्ट तरीका है।

निवेश शुरू करने से पहले 3 जरूरी बातें

कंसिस्टेंसी: बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर एसआईपी कभी बंद न करें। मंदी के दौर में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।

लक्ष्य तय करें: अपने रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में एसआईपी चुनें।

सही फंड का चुनाव: अपनी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप या इंडेक्स फंड्स में निवेश शुरू करें।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Rate: सोने की कीमत फिर टूटी, क्या ये एक लाख रुपये तक गिर जाएगा? एक्सपर्ट्स ने 3 बड़ी बातें बताईं

इस साल सोना खरीदने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कीमत और गिरने का इंतजार करना चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि सोने की कीमत कितनी नीचे जाएगी। इसलिए सिर्फ सस्ता होने की उम्मीद में खरीदारी टालना सही फैसला नहीं हो सकता। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 तक भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत कभी भी 1 लाख रुपये से ऊपर नहीं गई थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने की कीमत 1.43 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार की अपील के बावजूद देश में सोने का कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है। हालांकि, कई खरीदार फिलहाल ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमत फिर से 1 लाख रुपये के आसपास आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध जैसे वैश्विक हालात के कारण महंगाई बढ़ी है। ऐसे में लोग पेट्रोल और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों पर खर्च के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं, इसलिए सोने की खरीदारी को लेकर भी सावधानी बरत रहे हैं।

क्या सोने की कीमत और गिरेगी? 

ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की कीमत आगे और कम होगी या अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल बहुत कम है। ऑगमॉन्ट की रिसर्च प्रमुख रेनिशा चैनानी के मुताबिक, ज्यादातर विशेषज्ञों को नहीं लगता कि सोना जल्द ही फिर से 10 ग्राम के लिए 1 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूत सहारा मिल रहा है। उनके अनुसार, सोने का 1 लाख रुपये तक गिरना सिर्फ एक बहुत कम संभावना वाली स्थिति है, न कि सामान्य अनुमान।

उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, जिसका असर सोने पर भी पड़ा। मार्च से ही सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली और 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.43 लाख रुपये के आसपास रहा। रेनिशा चैनानी का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आना सामान्य बात है। उनका अनुमान है कि 2026 तक सोना 10 ग्राम के लिए 1.40 लाख से 1.50 लाख रुपये के दायरे से ऊपर ही बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि 5 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट बाजार में सामान्य उतार-चढ़ाव है, इसे बड़ी गिरावट या क्रैश नहीं माना जाना चाहिए।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपना पैसा सिर्फ सोने में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि अलग-अलग निवेश विकल्पों में निवेश करना चाहिए। उनका कहना है कि खबरों या अफवाहों को देखकर जल्दबाजी में सोना खरीदने या बेचने का फैसला नहीं लेना चाहिए। सबसे कम कीमत का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

कब आ सकती है सोने में बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट तभी आ सकती है जब कोई बड़ा आर्थिक बदलाव हो। जैसे अमेरिकी डॉलर बहुत मजबूत हो जाए, ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी हो या फिर सोने की मांग में भारी कमी आ जाए। फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिख रहे हैं।

क्या सोना फिर 1 लाख रुपये तक आ सकता है?

बोनांजा के वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि 10 ग्राम सोने की कीमत का फिर से 1 लाख रुपये तक पहुंचना पूरी तरह असंभव नहीं है। हालांकि, मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए ऐसा जल्द होने की संभावना नहीं है। अगर ऐसा होता भी है, तो यह आने वाले मध्यम या लंबे समय में ही संभव हो सकता है।

किन वजहों से सस्ता हो सकता है सोना?

वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी, यह दुनिया की आर्थिक स्थिति, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर करेगा।

उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों में सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है:

  • अगर दुनिया में युद्ध या दूसरे अंतरराष्ट्रीय तनाव कम हो जाते हैं, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट सकती है।
  • अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं या अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने में देरी करता है, तो सोने में निवेश कम आकर्षक हो सकता है।
  • अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो इसका असर सोने जैसी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
  • अगर दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक सोना खरीदना कम कर देते हैं, तो कीमतों में कमजोरी आ सकती है।
  • अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर जा सकते हैं।

निरपेंद्र यादव ने कहा कि इतिहास बताता है कि अपने सबसे ऊंचे स्तर से 10 से 20 फीसदी तक गिरना सोने के लिए कोई असामान्य बात नहीं है। हालांकि, लंबे समय में इसकी दिशा दुनिया की आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। उन्होंने सलाह दी कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अगर सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आती है, तो इसे धीरे-धीरे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा सकता है। वहीं, कम समय के लिए निवेश करने वालों को कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और उसी के अनुसार अपनी निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

दिल्ली में सोना 2000 रुपये गिरा, चांदी 5000 रुपये फिसली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों में तेजी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। सोना 2000 रुपये गिरकर 1,47,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 5000 रुपये गिरकर 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। इसकी वजह मुनाफावसूली बताई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन मे तेजी

ट्रेडर्स ने कहा कि बुलियन की कीमतों पर कमजोर सेंटिमेंट का भी असर पड़ा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड में हल्की तेजी दिखी। इससे भाव बढ़कर 4,063 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी भी 2 फीसदी के उछाल के साथ 58.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इसकी वजह ब्रेंट क्रूड की कीमतों गिरावट है। 23 जुलाई को ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया था। 24 जुलाई को इसमें गिरावट दिखी।

क्रूड में नरमी से विदेश में बुलियन में तेजी

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा, “ब्रेंट क्रूड में गिरावट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड में हल्की तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड करीह 4 फीसदी गिरा। इससे पहले पांच दिन में यह 12 फसदी चढ़ा था।” उन्होंने कहा कि अमेरिका का ईरान पर हमला जारी है। उसने लगातार 14वें रात ईरान पर हमले किए।

क्रूड में तेजी थमी तो सोने-चांदी में आएगी तेजी

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीबी कायनात चेनवाला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 1 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि अगर क्रूड की कीमतों में तेजी पर ब्रेक लगता है और अमेरिकी में बॉन्ड यील्ड में गिरावट आती है तो सोने और चांदी में तेजी दिख सकती है। सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस और चांदी 60 डॉलर प्रति औंस पर जा सकती है।

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शेयर बाजारों में लगातार पांचवें दिन गिरावट 

मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा है। इस हफ्ते घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार पांचवें दिन गिरावट आई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकती है। इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

Tata Consumer Q1 Results: प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 12% बढ़ा

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27.8 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये हा। इस दौरान रेवेन्यू करीब 12 फीसदी बढ़ा। कंपनी के प्रॉफिट और रेवेन्यू दोनों ही एनालिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा रहे। कंपनी का शेयर 24 जुलाई को 1.42 फीसदी चढ़कर 1,092 रुपये पर बंद हुआ।

रेवेन्यू 11.9 फीसदी बढ़कर 5348 करोड़ रुपये रहा

Tata Consumer Products का रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 11.9 फीसदी बढ़कर 5,348.8 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,778.9 करोड़ रुपये था। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने रेवेन्यू 5,340 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। EBITDA जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 19.9 फीसदी बढ़कर 724 करोड़ रुपये रहा।

EBITDA मार्जिन जून तिमाही में 13.5 फीसदी पहुंच गया

कंपनी का EBITDA मार्जिन जून तिमाही में बढ़कर 13.5 फीसदी हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.7 फीसदी था। यह सीएनबीसी-टीवी8 के पोल में एनालिस्ट्स के 13.6 फीसदी के अनुमान से थोड़ा कम है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स टाटा समूह की कंपनी है। यह नमक, चाय, कॉफी सहित कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स बनाती है।

भारत में कंपनी के ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन भी अच्छा रहा

टाटा कंज्यूमर के एमडी एवं सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा, “एक बार फिर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ डबल डिजिट में रही। इसमें वॉल्यूम ग्रोथ का बड़ा हाथ है। इससे कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ग्रोथ 29 फीसदी पहुंच गई। इंडिया में ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी की ग्रोथ बिनजेस की ग्रोथ भी स्ट्रॉन्ग रही।” कंपनी के इंडिया बिजनेस का रेवेन्यू 13 फीसदी बढ़कर 3,540 करोड़ रुपये रहा।

चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही

जून तिमाही में भारत में कंपनी के चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही, जबकि रेवेन्यू कम रहा। कंपनी ने कहा है कि कंपनी ने चाय की कीमतों में कमी का फायदा ग्राहकों को दिया। नमक से रेवेन्यू 7 फीसदी बढ़ा। कॉफी बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ 24 फीसदी रही। कंपनी के रेडी-टू-ड्रिंक बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 35 फीसदी रही।

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट 

24 जुलाई को शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिला। इस हफ्ते लगातार पांचवें दिन बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स गिरकर बंद हुए। निफ्टी 0.43 फीसदी यानी 102 अंक गिरकर 23,767 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.43 फीसदी यानी 331 अंक की कमजोरी के साथ 76,059 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 0.18 फीसदी की तेजी रही।

Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

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