इस भारतीय मूल के कपल की शादी के लिए गीजा पिरामिड में रोकी गई पर्यटकों की एंट्री, जानें कौन हैं दोनों

शादी को यादगार बनाने के लिए लोग अक्सर खूबसूरत जगहों का चुनाव करते हैं, लेकिन लंदन में रहने वाले भारतीय मूल के एक कपल ने ऐसा ठिकाना चुना, जहां शादी करना लगभग नामुमकिन माना जाता है। डॉ. मोनिका नय्यर और इन्वेस्टमेंट बैंकर विवेक नंदा ने मिस्र के मशहूर गीजा पिरामिड के पास अपनी शादी का जश्न मनाया। खास बात यह रही कि इसके लिए उन्हें मिस्र के अधिकारियों से बेहद दुर्लभ अनुमति मिली।

सिर्फ तीन कपल को मिली है ऐसी इजाजत

कपल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अब तक सिर्फ तीन कपल को गीजा पिरामिड परिसर में निजी समारोह करने की अनुमति मिली है। मोनिका और विवेक इस खास अनुमति पाने वाले भारतीय मूल के पहले कपल बताए जा रहे हैं। इस आयोजन के लिए मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय के साथ लंबी प्रक्रिया चली। ऐतिहासिक स्थल होने की वजह से शादी के हर हिस्से की बारीकी से समीक्षा की गई और अधिकारियों की निगरानी में कार्यक्रम को मंजूरी मिली।

रात में तैयार होता था शादी का पूरा सेटअप

इस शादी की तैयारी भी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। जानकारी के अनुसार, मेहमानों के लिए खास आयोजन स्थल तैयार करने में टीम को लगातार 10 रातें लगीं। हर शाम पर्यटकों के लिए पिरामिड परिसर बंद होने के बाद टीम वहां पहुंचती थी। रातभर मंच, रसोई, रोशनी और दूसरी अस्थायी सुविधाएं तैयार की जाती थीं। कार्यक्रम खत्म होने के बाद इस पूरे अस्थायी ढांचे को हटाने की भी व्यवस्था की गई। यानी दिन में जहां दुनिया भर से पर्यटक इतिहास देखने पहुंचते हैं, उसी जगह रात के समय एक खास शादी की तैयारियां चलती रहीं।

स्फिंक्स के सामने हुआ सबसे खास जश्न

तीन दिन तक चले इस समारोह का सबसे खास हिस्सा गीजा के स्फिंक्स के सामने आयोजित रिसेप्शन था। मेहमानों को एक निजी प्रवेश द्वार से अंदर लाया गया। रोशनी से जगमगाते पिरामिडों के बीच कपल ने अपनी एंट्री की और इसके बाद डिनर का आयोजन हुआ। दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले ऐतिहासिक स्थलों में से एक के सामने ऐसा निजी समारोह अपने आप में बेहद खास था।

कई देशों से पहुंचे 170 मेहमान

इस खास शादी में करीब 170 मेहमान शामिल हुए, जो अलग-अलग देशों से मिस्र पहुंचे थे। समारोह में भारतीय शादी की पारंपरिक रस्में भी हुईं और इसके बाद पिरामिड परिसर में भव्य जश्न के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कपल ने मिस्र को चुनने की वजह भी खास बताई। उनके मुताबिक, देश के इतिहास और वहां से उनके निजी जुड़ाव ने इस जगह को उनके लिए और खास बना दिया। विवेक नंदा अपने करियर के शुरुआती दौर में मिस्र में काम भी कर चुके हैं।

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हिमाचल प्रदेश को बड़ी सौगात! 11 सितंबर को खुल रही हैं 2 नई सुरंगें, 2 घंटे का सफर अब सिर्फ 60 मिनट में कराने की तैयारी

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पंडोह-तकोली सेक्शन के NH-03 पर देवड़ और हनोगी की दो प्रमुख सुरंगों को 11 सितंबर 2026 से ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। इससे कुल्लू-मनाली और आगे लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के तहत 2.8 किलोमीटर लंबी देवड़ टनल (T4-01) और 650 मीटर लंबी हनोगी टनल (T4-02) तैयार की गई हैं। ये दोनों सुरंगें इस मार्ग के दो बेहद महत्वपूर्ण जाम वाले हिस्सों को खत्म करने में मदद करेंगी।

जाम से मिलेगी राहत

इन दोनों टनल के शुरू होने के बाद प्रभावित सड़क का हिस्सा 6 किलोमीटर से घटकर करीब 3.5 किलोमीटर रह जाएगा। इससे जोगनी माता मंदिर, देवड़ और हनोगी के पास लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। खासकर टूरिस्ट सीजन में इन जगहों पर लोगों को 1 से 2 घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है।

समय की बचत

ये टनल NH-21 के एंड ऑफ पंडोह बाईपास-टकोली सेक्शन के ₹4,465.94 करोड़ के 4-लेन प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। 18.908 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है। सड़क पर ट्रैफिक बेहतर होने के बाद सामान्य परिस्थितियों में मंडी से कुल्लू का सफर करीब 2 घंटे से घटकर लगभग 60 मिनट रह जाएगा।

नितिन गडकरी ने X पर पोस्ट कर दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, ” माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए सुरक्षित, तेज और ज्या भरोसेमंद कनेक्टिविटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बता दें कि केंद्र सरकार के इस प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश में ट्रैफिक व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय लोगों की आवाजाही को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

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भारतीय रेलवे का मेगा प्लान आया सामने, इन 5 राज्यों में बिछेगी 656 किमी नई पटरी, 10783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाएं मंजूर

Indian Railways Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के विस्तार को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने देश के 5 राज्यों में कनेक्टिविटी सुधारने और ट्रेनों की भीड़कम करने के लिए ₹10,783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मंजूर की गई इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा मिलेगा। इसके तहत कुल 656 किलोमीटर लंबी नई रेल पटरियां बिछाई जाएंगी, जिन्हें साल 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जानिए इस मेगा प्लान की 5 सबसे बड़ी बातें।

किन 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी?

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने जिन तीन रेल लाइनों के विस्तार को मंजूरी दी है, वे निम्नलिखित हैं:

  • खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागडीही): चौथी नई रेल लाइन।
  • कटनी से पेंड्रा रोड: चौथी नई रेल लाइन।
  • बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड: तीसरी नई रेल लाइन।

2. 14 जिलों के 4,790 गांवों को सीधा फायदा

यह रेल विस्तार 5 राज्यों के 14 जिलों में फैले लगभग 4,790 गांवों को भारतीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगा। इससे क्षेत्र की लगभग 56 लाख आबादी को आवागमन में सीधी राहत मिलेगी और यात्रा का समय घटेगा।

3. धार्मिक और पर्यटन स्थलों का सफर होगा आसान

इन नई रेल पटरियों के बिछने से कई प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्व और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंचना काफी सुगम हो जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश)
  • अमरकंटक मंदिर (मध्य प्रदेश)
  • अचानकमार टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़)
  • भगवान जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा)
  • रतनपुर महामाया मंदिर (छत्तीसगढ़)

4. माल ढुलाई में तेजी और कम होगी लॉजिस्टिक्स लागत

यह पूरा रूट औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से कोयला, सीमेंट, लोहा और स्टील जैसी भारी औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति होती है। इन नई लाइनों के शुरू होने से रेलवे सालाना 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई करने में सक्षम होगी। पटरियों की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे ट्रकों पर निर्भरता घटेगी और रसद/लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी।

5. पर्यावरण को बंपर फायदा: 12 करोड़ लीटर तेल की बचत

सरकार के अनुमान के मुताबिक, सड़कों के बजाय रेलवे से माल ढुलाई बढ़ने से पर्यावरण को बहुत बड़ा फायदा होगा। हर साल लगभग 12 करोड़ लीटर तेल की खपत कम होगी। पर्यावरण में 62 करोड़ किलोग्राम (CO2) कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटेगा। यह लाभ लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा।

 

रेल यात्रियों को क्या फायदा होगा, 7 हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क को फोर-लेन करने की मिली मंजूरी

रेल यात्रियों को क्या फायदा होगा, 7 हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क को फोर-लेन करने की मिली मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज रेलवे के सात हाई-डेंसिटी रेलवे नेटवर्क को फोर-लेन करने की मंजूरी दे दी। इनमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली जैसे देश के प्रमुख रेल मार्ग शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये सात कॉरिडोर रेलवे के कुल ट्रैफिक का करीब 40 प्रतिशत वहन करते हैं। इन मार्गों पर करीब 2,000 किलोमीटर की फोर-लेनिंग का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

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10,700 करोड़ रुपये से अधिक की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं भी मंजूर

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके अलावा 10,700 करोड़ रुपए से अधिक की कुल लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है।

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इनमें शामिल हैं:

 

  • खड़गपुर-जुड़सुगुड़ा चौथी रेल लाइन
  • कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन
  • बिलासपुर-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन
  • रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, कम होगी ट्रैफिक की समस्या

सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने के साथ भारतीय रेलवे की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सर्विस रिलायबिलिटी में भी सुधार होगा।

 

मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से रेलवे परिचालन को व्यवस्थित करने और व्यस्त रेल मार्गों पर भीड़ एवं ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए रेल नेटवर्क की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रेलवे परियोजनाओं से पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

 

स्वीकृत क्षमता विस्तार परियोजनाओं से देश के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को और बेहतर किया जाएगा। इनमें तिरुपति, सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर (तिरुत्तनी), श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर (तिरुचानूर), कोटिलिंगेश्वर देवालय, श्री सीती बैरवेश्वर स्वामी मंदिर, बंगारू तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल जलप्रपात, होसुर किला, मेट्टूर बांध और कोडाइकनाल की पहाड़ियां शामिल हैं।

 

इसके अलावा सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल अंजनेयर मंदिर, नमक्कल किला, कल्याण पसुपतेश्वर मंदिर, यादाद्रिगुट्टा मंदिर, भोंगीर किला, सुरेंद्रपुरी और स्वर्णगिरि मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को भी इन परियोजनाओं से लाभ मिलेगा।

 

माल ढुलाई की क्षमता में भी होगा बड़ा इजाफा

 

ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिए बेहद अहम हैं। क्षमता विस्तार के बाद रेलवे के जरिए हर साल करीब 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई (47 MTPA) होने की उम्मीद है।

 

तेल आयात और कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी

रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम माना जाता है। इन परियोजनाओं से देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को कम करने और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही करीब 8 करोड़ लीटर तेल की बचत और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। सरकार के अनुसार, CO₂ उत्सर्जन में होने वाली यह कमी करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगी। 

यूपी में NCR की तर्ज पर बनेगा SCR! लखनऊ समेत 6 जिलों का बेस मैप मंजूर, देखें डेवलपमेंट प्लान

UP SCR map: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास को अब शहर की सीमाओं से बाहर ले जाने की तैयारी तेज हो गई है। प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UP SCR) ने मंगलवार (8 सितंबर) को अपनी पहली बड़ी बाधा पार कर ली। यूपी एससीआर ने इसकी रिव्यू कमेटी ने छह जिलों वाले इस क्षेत्र के लिए बेस मैप को मंजूरी दे दी। इसके बाद अब क्षेत्र के लिए GIS आधारित रीजनल मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

UP SCR का उद्देश्य लखनऊ के आसपास एक योजनाबद्ध और आपस में जुड़ा हुआ क्षेत्रीय विकास मॉडल तैयार करना है। इसमें राजधानी के साथ-साथ सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

ये 6 जिले होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UP SCR) में लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जिले शामिल हैं। यह पूरा क्षेत्र करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा। इसका उद्देश्य केवल लखनऊ का विस्तार करना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शहरी विकास, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाना है।

‘बेस मैप’ को मंजूरी देने का फैसला लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के ‘पारिजात सभागार’ में हुई समीक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की। अब इस बेस मैप को UP SCR की कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद रीजनल मास्टर प्लान तैयार करने का काम शुरू होगा।

30 बड़े प्रोजेक्ट पर होगा फोकस

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राज्य सरकार पहले ही UP SCR के लिए बड़े विकास कार्यों की पहचान कर चुकी है। मई में सरकार ने क्षेत्र के लिए प्रमुख परियोजनाओं की सूची तैयार कर संबंधित विभागों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी थीं।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई बैठक में परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था और पर्यटन से जुड़े 29 प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 परियोजनाओं तक पहुंच गई है। LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक, इन परियोजनाओं का चयन क्षेत्र की भविष्य की विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

सिर्फ लखनऊ नहीं, पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर जोर

UP SCR का सबसे बड़ा लक्ष्य ऐसा विकास नेटवर्क तैयार करना है जिसमें केवल लखनऊ पर निर्भरता न रहे। इसके लिए क्षेत्र के अलग-अलग जिलों को बेहतर सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित योजनाओं में स्टेट कैपिटल माला रीजनल रोड नेटवर्क, एलिवेटेड पेरीफेरल रोड और मौजूदा सड़कों के अपग्रेडेशन जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की भी योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और हर रोज बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को संभालना और छह जिलों के बीच आवागमन को आसान बनाना है।

इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब भी होंगे विकसित

रीजनल प्लान में आर्थिक विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स पार्क, फूड पार्क और आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। विशेष रूप से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के आसपास कॉरिडोर आधारित विकास को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इससे उद्योगों, कारोबार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

2,239 जगहों पर हुई मैप की जमीनी जांच

UP SCR के बेस मैप को तैयार करने में सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों पर निर्भर नहीं किया गया। मैप की सटीकता जांचने के लिए छह जिलों में बड़े स्तर पर फील्ड वेरिफिकेशन यानी ग्राउंड-ट्रुथिंग की गई।

धिकारियों और कंसल्टेंट्स ने 2,239 स्थानों पर जाकर जमीनी स्थिति की जांच की।

सैटेलाइट इमेजरी और मैप में दर्ज जानकारी की तुलना वास्तविक स्थिति से की गई, ताकि मास्टर प्लान तैयार करते समय जमीन से जुड़ी सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध हो। इस पूरी प्रक्रिया में 22 विभागों और एजेंसियों से भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निकाय, सिंचाई विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन से जुड़े विभाग शामिल रहे।

लखनऊ पर बढ़ता दबाव कम करने की कोशिश

UP SCR की सबसे बड़ी सोच यह है कि विकास का लाभ केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित न रहे। सरकार चाहती है कि आसपास के जिलों में भी रोजगार, कारोबार, शिक्षा, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं का विस्तार हो। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को अपने ही जिले या आसपास रोजगार और कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर अंतर-जिला कनेक्टिविटी होने से लोगों को नौकरी और बेहतर सुविधाओं के लिए लखनऊ की ओर पलायन करने की जरूरत भी कम हो सकती है।

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अब बेस मैप को UP SCR की कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। इसके बाद इसकी अगली प्रक्रिया पूरी होने पर GIS आधारित रीजनल मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। यही मास्टर प्लान आने वाले वर्षों में छह जिलों में सड़क, रेल, मेट्रो, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और शहरी विस्तार जैसी प्रोजेक्ट्स के लिए दिशा तय करेगा।

योगी सरकार की नीतियों से वस्त्र उद्योग नई ऊंचाइयों पर : सचान

योगी सरकार की नीतियों से वस्त्र उद्योग नई ऊंचाइयों पर : सचान

UP Textile Industry Investment

UP Textile Industry Investment: वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि योगी सरकार की नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल से प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उद्योगों को भी नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश से करीब 35 हजार करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात हुआ है, जबकि 2 लाख से अधिक हथकरघा बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं और 110 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जा रहा है। 

5,354 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर

राकेश सचान ने बताया कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार निवेशकों को प्रोत्साहन दे रही है। आज 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। वर्ष 2017 और 2022 की वस्त्र उद्योग नीतियों के तहत करीब 116 निवेशकों को 322 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया गया है। इसके अलावा करीब 96 करोड़ रुपये का इंसेंटिव भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उद्यमियों को कैपिटल सब्सिडी, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी में छूट और 60 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी समेत जमीन आवंटन और बिजली में भी छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग

मंत्री ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद का गारमेंट क्षेत्र, कानपुर का होजरी उद्योग, वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही-मिर्जापुर की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी, पिलखुवा के घरेलू वस्त्र, मेरठ के खेल परिधान और फर्रुखाबाद की वस्त्र छपाई प्रदेश की पहचान बन चुके हैं। प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। योगी सरकार बुनकरों को डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग में मदद दे रही है। वाराणसी में 443 विद्यार्थियों को 84 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देकर आगे बढ़ाने का काम किया गया है। इससे पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क

राकेश सचान ने बताया कि लखनऊ-हरदोई के बीच 1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके लिए योगी सरकार 1,100 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पार्क में सिक्स लेन सड़क, 125 केवी की विद्युत लाइन और पानी की सप्लाई पहुंच चुकी है। मास्टर डेवलपर भी तय हो गया है।

पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन

उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क विकसित करने का लक्ष्य दिया है। इसके तहत अमरोहा, बिजनौर, संत कबीर नगर, बरेली और बनारस में शिल्प पार्क के लिए जमीन उपलब्ध हो चुकी है। करीब 400 एकड़ क्षेत्र में उद्यमियों को निवेश का अवसर मिलेगा और विभाग उन्हें सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराएगा। कानपुर समेत अन्य स्थानों पर टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग पार्क के लिए भी जमीन चिन्हित की जा रही है।

 

उन्होंने कहा कि 2022 की तरह ही 2027 में बनने वाली नई नीति में भी प्रदेश के उद्यमियों के सुझावों को शामिल किया जाएगा। पर्यटन के बढ़ते दायरे और 25 करोड़ की आबादी वाले घरेलू बाजार को देखते हुए वस्त्र एवं ओडीओपी उत्पादों में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए उद्यमियों को यूपी में बड़े स्तर पर निवेश के लिए आमंत्रित किया।

बंगाल में महाअष्टमी पर शराब बैन… DJ पर भी पाबंदी, दुर्गा पूजा को लेकर सुवेंदु सरकार ने जारी की गाइडलाइन

पश्चिम बंगाल में हर साल बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा का त्योहार 10 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इस दौरान कोलकाता समेत राज्य के कई शहरों में खास रौनक देखने को मिलती है। वहीं पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले दुर्गा पूजा उत्सव को लेकर बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं। राज्य सरकार ने पहली बार पूजा के दौरान महा अष्टमी पर शराब की बिक्री पर पूरी तरह से रोक रहेगी। इसी के साथ विसर्जन के दौरान DJ बजाने पर भी पूरी तरह रोक होगी। इन नियमों का मकसद त्योहार के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पूजा समितियों और आम लोगों को सरकार की ओर से जारी इन निर्देशों का पालन करना होगा।

महाअष्टमी के दिन शराब पर होगी रोक

दुर्गा पूजा की तैयारियों को लेकर पूजा समितियों के साथ बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें अधिकारी ने कहा कि, इस बार दुर्गा पूजा को धार्मिक आस्था और पुरानी परंपराओं के अनुसार मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्सव के दौरान संस्कृत और बंगाली संस्कृति से जुड़ी परंपराओं को खास महत्व दिया जाएगा, ताकि त्योहार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्गा पूजा के अष्टमी (आठवें दिन) वाले दिन राज्य में शराब की सभी दुकानें बंद रहेंगी। सीएम ने कहा, “महा अष्टमी के दिन, जब हम राज्य में देवी को फूलों से श्रद्धांजलि देते हैं, तो शराब की सभी दुकानें और बार बंद रहेंगे। अष्टमी के दिन शराब नहीं बेची जा सकती।”

ईडन गार्डन्स में होगा बड़ा शो

अधिकारी ने बताया कि महालया के मौके पर पश्चिम बंगाल का पर्यटन विभाग कोलकाता के ईडन गार्डन्स में एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन करेगा। करीब चार घंटे चलने वाले इस कार्यक्रम में ड्रोन शो भी होगा। वहीं, राज्य सरकार ने रेड रोड पर होने वाले दुर्गा पूजा कार्निवल को बंद करने का फैसला किया है। यह कार्निवल पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू हुआ था। सरकार के इस फैसले के बाद दुर्गा पूजा से जुड़े आयोजनों और विसर्जन की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सीएम ने कहा, “किसी भी व्यक्ति या पूजा समिति को सिर्फ दुर्गा पूजा करने के अधिकार के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाना चाहिए। संविधान हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। पिछले कुछ वर्षों से कार्निवल के नाम पर कुछ खास व्यवस्थाएं लागू की जाती थीं, लेकिन इस साल ऐसा नहीं किया जाएगा।”

DJ बजाने पर भी बैन

उन्होंने कहा कि मूर्ति विसर्जन के समय घाटों पर क्रेन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही विसर्जन के दौरान DJ बजाने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और व्यवस्था शांतिपूर्ण तरीके से बनी रहे। उन्होंने कहा कि, जो छोटी पूजा कमेटियां पैसों की कमी के कारण त्योहार का आयोजन नहीं कर पाती हैं, उन्हें सरकार की तरफ से 1 लाख रुपये की मदद दी जाएगी।”

वहीं, अधिकारी ने पिछली TMC सरकार के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें सभी पूजा कमेटियों को आर्थिक मदद दी जाती थी। उन्होंने कहा, “मैं बड़ी, पैसे की मदद करने वाली पूजा कमेटियों से अपील करूंगा कि वे अपने त्योहारों के लिए सरकारी ग्रांट न लें।”

नेशनल हाईवे नहीं होगा ब्लॉक

मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि दुर्गा पूजा के दौरान सड़कों और नेशनल हाईवे को बेवजह बंद या जाम नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, “नेशनल हाईवे को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। सड़कें ब्लॉक करके पूजा ऑर्गनाइज नहीं की जा सकती।” पूजा समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आयोजन की वजह से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो और ट्रैफिक व्यवस्था बनी रहे।

Sudivya Kumar Dies: झारखंड के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, 56 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से गई जान

Sudivya Kumar Dies: झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार (5 सितंबर) देर रात निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे। बताया गया कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए गिरिडीह के एक निजी अस्पताल मर्सी ले जाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सुदिव्य कुमार गिरिडीह विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे थे। शनिवार रात उनके आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

हेमंत सोरेन सरकार में संभाली थीं कई अहम जिम्मेदारियां

सुदिव्य कुमार झारखंड सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास नगर विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेल और युवा कार्य जैसे विभाग भी थे। वह झारखंड की राजनीति में JMM के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। सुदिव्य कुमार संगठन के लिए लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

JMM ने जताया गहरा दुख

सुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन पर JMM ने गहरा शोक जताया। राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि अपने समर्पित नेता के असमय निधन से पूरा JMM परिवार स्तब्ध और बेहद दुखी है। पार्टी ने कहा कि सुधिव्या कुमार का जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। JMM ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में शक्ति मिलने की प्रार्थना की।

JMM के आधिकारिक एक्स हैंडल से कहा गया, “जिंदगी की क्षणभंगुरता…कल तक जो साथी हमारे बीच थे, आज उनकी स्मृतियां ही हमारे साथ हैं। जीवन की अनिश्चितता हमें एक बार फिर गहरे दुःख और शोक में छोड़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित साथी एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से पूरा झामुमो परिवार स्तब्ध और मर्माहत है। उनका जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार एवं सभी साथियों को इस कठिन घड़ी में संबल दें। अंतिम जोहार।”

परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ हुए भावुक

झारखंड सरकार के परिवहन मंत्री और JMM नेता दीपक बिरुआ ने भी सुदिव्य सोनू के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अपने सहयोगी और झारखंड सरकार में साथी मंत्री सुधिव्या सोनू के निधन से वह बेहद दुखी हैं। दीपक बिरुआ के मुताबिक, सुदिव्य सोनू की तबीयत रात में अचानक बिगड़ी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की कामना की।

उन्होंने भावुक संदेश में इसे JMM परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया और अपने दिवंगत साथी को अश्रुपूर्ण अंतिम ‘जोहार’ कहा। सुदिव्य कुमार के अचानक निधन की खबर सामने आने के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। महज 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन JMM और राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके निधन से पार्टी ने एक सक्रिय वरिष्ठ नेता और सरकार ने एक महत्वपूर्ण मंत्री खो दिया है।

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी जताया शोक, बताया बड़ा भाई

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने X पर लिखा, “देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। सोनू भैया मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वे बड़े भाई की तरह थे – स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।”

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, “झारखंड आंदोलन के दौर से ही वे स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी।”

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सोरेन ने कहा, “आज उन्हें याद करते हुए मन बार-बार यही सोचता है कि ज़िंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जो आवाज़ हमारे बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है। सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के लिए आपकी प्रतिबद्धता को मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा। आप हमेशा याद आएंगे भैया….”

नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

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