अमेरिका में पहली बार सजा-ए-मौत टीवी पर लाइव होगी:16 साल पहले जहां 13 लोगों की जान ली, दोषी को वहीं गोली मारी जाएगी

अमेरिका में पहली बार मौत की सजा को लाइव टीवी पर दिखाया जाएगा। पूर्व आर्मी मेजर निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि इस सजा का लाइव टेलिकास्ट किया जाएगा, ताकि आम लोग इसे देख सकें। BBC के मुताबिक, 100 साल में यह अमेरिका में पहली सार्वजनिक तौर पर दी गई मौत की सजा होगी। हसन ने 2009 में टेक्सास के सैन्य अड्डे पर धार्मिक नारा लगाते हुए गोलीबारी की थी, जिसमें 13 सैनिकों की मौत हो गई थी। अब 3 दिसंबर को यहीं मौत की सजा दी जाएगी। 65 साल बाद सैनिक को मौत की सजा का पहला ऐसा मामला 1961 के बाद अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था के तहत मौत की सजा पाने वाला निदाल हसन पहला व्यक्ति होगा। सैन्य व्यवस्था में आखिरी बार प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को मौत की सजा दी गई थी। हेगसेथ ने एक इंटरव्यू में कहा कि हसन को सैनिकों की एक टुकड़ी गोली मारकर मौत की सजा देगी। हेगसेथ ने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि लोग इसे देख सकें और यह सार्वजनिक हो। लोगों को समझना चाहिए कि इस तरह के कामों के गंभीर नतीजे होते हैं।’ हमले के बाद माना था- जिहाद के लिए किया 5 नवंबर 2009 को सेना के मनोचिकित्सक मेजर निदाल हसन निजी पिस्तौल लेकर फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पहुंचा और सैनिकों व अन्य लोगों पर अचानक गोलीबारी कर दी। यह अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुई सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी थी। उस समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में युद्ध लड़ रहा था। हसन ने बाद में कहा कि वह इन युद्धों को गैरकानूनी और अनैतिक मानता था और जिहाद के लिए हमला किया था। गोलीबारी में हसन भी घायल हुआ और कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। सैन्य अदालत में उसने हत्याओं की बात स्वीकार की। 2013 में उसे पहले से हत्या की योजना बनाने और हत्या की कोशिश के कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया गया। हसन ने हमले पर कोई पछतावा नहीं जताया। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कहा कि वह चाहता था कि हमले में उसकी भी मौत हो जाती, ताकि वह शहीद बन सके। उसका यह तक कहा कि मौत की सजा मिलने पर भी वह खुद को शहीद मानेगा। अदालत में अपील करने से सजा अब भी टल सकती है सैन्य व्यवस्था में किसी कैदी को तब तक मौत की सजा नहीं दी जा सकती, जब तक राष्ट्रपति खुद उस सजा की पुष्टि न करें। इसके बाद भी कानूनी अपील के कारण सजा पर रोक लग सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार को हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने का आदेश मंजूर कर दिया था। वकील जॉन मिल्स के मुताबिक, हसन के मामले में अपील की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। हसन अपने दोषी ठहराए जाने और मौत की सजा के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है। ऐसी स्थिति में सजा पर रोक लगने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘गोली मारकर दी जाने वाली मौत की सजा का लाइव प्रसारण करने की कोशिश ट्रम्प प्रशासन का सिर्फ ध्यान खींचने का तरीका है। इसकी संभावना भी कम है कि सजा दी जा सकेगी, न्याय मिलना तो दूर की बात है।’ ——————– यह खबर भी पढ़ें… ओबामा के करीबी थे, अब ट्रम्प के खास बने जुकरबर्ग:राष्ट्रपति ने जेल भेजने की धमकी दी थी, अब साथ मिलकर AI के नियम बना रहे मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ओबामा के करीबी थे, अब ट्रम्प के खास बने जुकरबर्ग:राष्ट्रपति ने जेल भेजने की धमकी दी थी, अब साथ मिलकर AI के नियम बना रहे

मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी। दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था। जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं। ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया? ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया। पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है। हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है। ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा। ———————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे: मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने विपक्ष को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प ने AI का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस किया:बड़ी टेक कंपनियों के CEO से बोले- ये आर्टिफिशियल नहीं, इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (SI) करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। ट्रम्प ने हाल ही में हुई UN महासभा में AI को सुपर इंटेलिजेंस (SI) कहने की बात कही थी। व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि AI को आर्टिफिशियल (बनावटी) कहना ठीक नहीं है। यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। ट्रम्प ने AI आधारित एक पोर्टल भी लॉन्च किया है। इसमें एक ही जगह से अमेरिकी सरकार की जानकारी और सरकारी सेवाएं मिलेंगी। ट्रम्प ने कहा कि अब पूरी अमेरिकी सरकार लोगों की हथेली में होगी। ट्रम्प ने बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों (CEO) के साथ बैठक की है। इसमें एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और जेन्सेन हुआंग समेत कई टेक दिग्गज शामिल हुए। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक नैतिक रूप से बाध्यकारी समझौते पर भी साइन किए हैं। इसका मकसद AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और विकास को लेकर कुछ नियम और दिशा तय करना है। बैठक के दौरान ट्रम्प ने दोहराया कि अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब सुपर इंटेलिजेंस कहा जाएगा। डेटा सेंटर के लिए स्थानीय लोगों के साथ काम करेंगी कंपनियां बैठक में AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा भी उठा। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां की स्थानीय कम्युनिटी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियां इन समुदायों की मदद करेंगी। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प ने कहा कि कंपनियों को डेटा सेंटर बनाने से पहले स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों को भी इसका फायदा मिले। टेक कंपनियों ने कहा- सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना जरूरी बैठक में AI के सुरक्षित इस्तेमाल और इसके गलत इस्तेमाल को रोकने पर भी चर्चा हुई। मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को भरोसा होना चाहिए कि यह तकनीक उसी तरह काम करेगी, जिस तरह इसे बनाया गया है। एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इस तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो। ट्रम्प बोले- गलत इस्तेमाल हुआ तो कार्रवाई करेंगे ट्रम्प ने AI सिस्टम की जटिलता और संभावित गलत इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इन मॉडलों का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए होगा। अगर इनका गलत इस्तेमाल किया गया तो सरकार कार्रवाई कर सकेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा में AI को अहम बताया अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन ने कहा कि AI में अमेरिका का नेतृत्व करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि AI और उससे जुड़ी नई तकनीकों का विकास सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। ट्रम्प ने बैठक को बेहद खास बताते हुए कहा कि अमेरिका AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार तथा टेक कंपनियां मिलकर इस तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित करना चाहती हैं। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन ने जंग में विस्फोटकों से लैस रोबोट सैनिक उतारे: रूस के 3000 सैनिकों को मारने का दावा रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Xi-Trump Dinner: व्हाइट हाउस में शाही डिनर पर अपना ‘थर्मस’ लेकर पहुंचे जिनपिंग! सोशल मीडिया पर छा गईं ये 2 तस्वीरें

White House Dinner: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में आयोजित व्हाइट हाउस स्टेट बैंकवेट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। टेक और वॉल स्ट्रीट के दिग्गजों से सजी इस दावत से जुड़ी दो ऐसी बातें और तस्वीरें सामने आई हैं, जो इंटरनेट पर तेजी से ट्रेंड कर रही हैं।

डिनर टेबल पर जिनपिंग की ‘थर्मस’ बनी चर्चा का विषय

व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में सजी भव्य रेड-थीम वाली मुख्य टेबल पर मेहमानों का ध्यान एक अनोखी चीज ने खींचा। टेबल पर महंगी वाइन ग्लासेज और शाही क्रॉकरी के बीच दो थर्मस बोतलें रखी दिखाई दीं। एक काले रंग की और दूसरी सफेद रंग की।तस्वीरों के मुताबिक, काली थर्मस बोतल शी जिनपिंग के पास और सफेद थर्मस बोतल उनकी पत्नी पेंग लियुआन के पास रखी थी।

चीन में पारंपरिक रूप से सेहत के लिए गुनगुना या गर्म पानी पीना दैनिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है। सोशल मीडिया पर यूजर चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि ‘शायद जिनपिंग इसमें गोजी बेरीज (Goji Berries) या अपनी खास ग्रीन टी लेकर आए थे।’

वैसे कूटनीतिक हलकों में विदेशी दौरों पर राष्ट्राध्यक्षों द्वारा अपना पानी या चाय इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन व्हाइट हाउस के आधिकारिक स्टेट डिनर की टेबल पर थर्मस का इस तरह नजर आना लोगों को काफी दिलचस्प लगा।

‘चलो कंस्ट्रक्शन साइट देखने चलते हैं…’ ट्रंप के बयान पर लगे ठहाके

डिनर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने खास अंदाज में माहौल को हल्का-फुल्का बनाते नजर आए। ट्रंप ने शी जिनपिंग को अमेरिका के राष्ट्रीय प्रतीक ‘बाल्ड ईगल’ (Bald Eagle) की एक खास मूर्ति भेंट की।

अपने टोस्ट स्पीच के दौरान ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस का मौजूदा बैंक्वेट हॉल काफी छोटा पड़ता है, इसलिए वह $400 मिलियन की लागत से 1,000 लोगों की क्षमता वाला नया विशाल बॉलरूम बनवा रहे हैं।

ट्रंप ने मुस्कुराते हुए शी जिनपिंग और वहां मौजूद मेहमानों को आमंत्रित किया कि ‘डिनर के बाद चलिए, चलकर नए बॉलरूम की कंस्ट्रक्शन साइट देखते हैं, आप लोग इसके फर्श पर कदम रखने वाले पहले इंसान होंगे।’

जैसे ही दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के डिनर के बाद ‘कंस्ट्रक्शन साइट का मुआयना’ करने की बात सामने आई, टेबल पर बैठे एलन मस्क, टिम कुक, जेन्सन हुआंग और सैम ऑल्टमैन समेत तमाम बड़े उद्योगपति ठहाका लगाकर हंस पड़े।

White House Dinner

टेक जगत के दिग्गजों की रही मौजूदगी 

यह डिनर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सिलिकॉन वैली के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे। टेस्ला के एलन मस्क, एपल के टिम कुक, एनवीडिया के जेन्सन हुआंग, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई और मेटा के मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गजों ने इसमें शिरकत की।

अमेरिका में AI को लेकर तीन खेमे:मस्क को सभ्यता मिटने का डर, ट्रम्प को चीन से पिछड़ने की चिंता, तीसरा पक्ष इंसानी कंट्रोल चाहता

अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। नेताओं से लेकर टेक दिग्गजों तक अलग-अलग राय AI को लेकर अमेरिका में छिड़ी यह बहस अब टेक कंपनियों से निकलकर राजनीति के केंद्र में पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के कुछ नेता AI को लेकर चिंता जता रहे हैं। आम तौर पर एक-दूसरे से अलग रहने वाले इन दोनों खेमों में बहुत कम मुद्दों पर सहमति दिखती है। लेकिन AI की यह बहस सिर्फ राजनीति या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में इसके फैसले हमारी नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, यह भी तय होगा कि AI के इस्तेमाल को लेकर नियम कैसे बनाए जाएंगे। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वे लंबे समय से AI पर सरकारी नियम बनाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का प्रस्ताव रखा है। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे की चेतावनी वाले बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इसी साल उन्होंने अमेरिकी सीनेट में ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया। बाद में उनका रुख कुछ नरम पड़ा। 2025 के बीच तक ऑल्टमैन का कहना था कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव है। फिर जुलाई 2026 में OpenAI ने बताया कि उसके दो AI मॉडल टेस्टिंग के दौरान बिना इंसानी मदद के सिस्टम से बाहर निकल गए। उन्होंने चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर Hugging Face के सर्वर तक पहुंच बनाई। इस घटना के बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस मांग का भी समर्थन किया कि AI मॉडल का विकास कुछ धीमा किया जाना चाहिए। इलॉन मस्क लंबे समय से AI के खतरों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनका अनुमान है कि AI के इंसानों के लिए खतरनाक साबित होने की संभावना 10 से 20% तक है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते इसके लिए नियम बनाने की मांग की है। मस्क ने खुद AI कंपनी xAI शुरू की है और ट्रम्प के चुनाव अभियान में बड़ी रकम दी थी। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक सरकारी नियमों में बदलाव से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को उन्होंने अमोडेई की AI विकास धीमा करने की मांग का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर मस्क ने लिखा, “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। AI की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट OpenAI के साथ बड़ी साझेदारी कर चुका है और अब अपने AI टूल्स पर भी तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, नडेला AI को बिना रोक-टोक आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इसका विकास सोच-समझकर और इंसानी निगरानी में होना चाहिए। उनका तर्क है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस का कोई फायदा नहीं, जो इंसानों के कंट्रोल से बाहर हो या लोगों के काम न आए। इसके साथ ही नडेला AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गूगल के CEO हैं। वह AI के खतरों को मानते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत कड़े नियमों के पक्ष में नहीं हैं। पिचाई का कहना है कि AI के इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग नियम बनाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, AI के जोखिम से निपटना जरूरी है, लेकिन इसके फायदों से पीछे रह जाना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI अगर कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहा तो यह ज्यादा बड़ा खतरा हो सकता है। इसके बजाय वह AI को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने को सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में AI मॉडल बनाने और जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को भी मानते हैं। इसी वजह से मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी न करने का फैसला कर सकती है। एलेक्जेंडर वेंग 2025 में मेटा से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के AI असिस्टेंट एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी जुड़े हैं। वेंग ने एक स्ट्रैटिजी पेपर में सुपरइंटेलिजेंस को परमाणु बम के बाद सबसे खतरनाक चीज बताया। उनका कहना है कि अमेरिका को AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरे देशों को रोकने की रणनीति के नजरिए से भी देखना चाहिए। AI का विकास तेजी से जारी रखने के पक्ष में जेनसन हुआंग एनवीडिया के को-फाउंडर और CEO हैं। एनवीडिया के चिप्स का इस्तेमाल AI बनाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां करती हैं। हुआंग AI के तेज विकास के प्रमुख समर्थकों में हैं। उनका कहना है कि कंपनियों को सरकार से AI पर ज्यादा नियम बनाने की मांग नहीं करनी चाहिए। AI से नौकरियां जाने और अमेरिकी चिप्स दूसरे देशों को बेचने जैसे मुद्दों पर उनका एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई से सार्वजनिक मतभेद भी रहा है। डेविड सैक्स टेक निवेशक हैं। ट्रम्प प्रशासन में वह AI और क्रिप्टो से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह AI के डर के आधार पर सख्त नियम बनाने के खिलाफ हैं। सैक्स अमेरिकी राज्यों के अलग-अलग AI कानून बनाने का भी विरोध करते हैं। इसके बजाय वह कम सरकारी दखल वाली नीति चाहते हैं। उनका कहना है कि AI कंपनियां तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, इसलिए उनकी रफ्तार रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी राजनीति में भी AI को लेकर दो राय नियम बनाने के पक्ष में… बर्नी सैंडर्स निर्दलीय अमेरिकी सीनेटर हैं। AI के तेज विकास के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि AI से बड़ी कंपनियों की ताकत बढ़ सकती है और इसका असर कामगारों पर पड़ सकता है। सैंडर्स ने नए AI डेटा सेंटर बनाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, बड़ी AI कंपनियों पर 50% टैक्स लगाने और उससे सार्वजनिक फंड बनाने की बात कही है। उन्होंने सुपरइंटेलिजेंस पर स्थायी रोक लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उनका प्रस्ताव है कि तब तक AI के एडवांस विकास पर रोक रहे, जब तक ऐसे सिस्टम को लेकर सुरक्षा इंतजाम तय नहीं हो जाते। नियमों के विरोध में… माइक जॉनसन अमेरिकी स्पीकर मानते हैं कि AI के खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन वह जल्दबाजी में नियम बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे कहते हैं कि जल्दबाजी में ऐसे नियम नहीं बनाने चाहिए जिनसे चीन को फायदा मिल सकता है। जॉनसन ने AI के कारण इंसानों के खत्म हो जाने की आशंकाओं को खारिज किया है। डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि AI के मामले में अमेरिका चीन से आगे रहे। उन्होंने AI में अमेरिका की बढ़त बनाए रखना अपनी प्राथमिकता बनाई है। इसके लिए वह AI को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसमें AI डेटा सेंटर के लिए ज्यादा बिजली की व्यवस्था करना और ऐसे AI मॉडल को बढ़ावा देना शामिल है, जिनका इस्तेमाल ज्यादा लोग कर सकें। एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग के साथ एक कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने यह भी कहा था कि AI के विकास में सरकार को ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। ———————- यह खबर भी पढ़ें… ओपनएआई का 90 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा: यह दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में एक; 88 घंटे में जवाब ढूंढा ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया के सबसे मुश्किल सवालों में से एक को सॉल्व कर दिया है। AI को इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर पढ़ें…

दिल्ली में दौड़ेगी भारत की पहली 3-कोच वाली मेट्रो! लाजपत नगर से साकेत तक बनेगा नया रूट, जानें पूरा प्लान

Delhi Metro: दिल्ली में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। जल्द ही लाजपत नगर से साकेत जी ब्लॉक के बीच एक नया मेट्रो कॉरिडोर बनने जा रहा है। इस नए रूट के शुरू होने से दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। खास बात यह है कि इस कॉरिडोर पर तीन कोच वाली छोटी मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना है।

बता दें की नया लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो के फेज-4 विस्तार का हिस्सा है। करीब 8 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का पूरा हिस्सा एलिवेटेड होगा और इसमें कुल 8 स्टेशन बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट का मकसद दक्षिण दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करना है, ताकि रिहायशी, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल इलाकों के बीच आने-जाने वाले लोगों को ज्यादा सुविधाजनक सफर मिल सके।

इन 8 स्टेशनों से जुड़ेगा नया मेट्रो रूट

प्रस्तावित कॉरिडोर पर लाजपत नगर, एंड्रयूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्पा भवन, साकेत कोर्ट, पुष्प विहार और साकेत जी ब्लॉक स्टेशन होंगे। इस नए रूट से ग्रेटर कैलाश-1, पुष्प विहार और साकेत जैसे प्रमुख इलाकों को सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

इस कॉरिडोर की सबसे खास बातों में से एक है भारत की पहली तीन-कोच वाली मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना। कई व्यस्त रूटों पर चलने वाली लंबी मेट्रो ट्रेनों के उलट, ये ट्रेनें कम दूरी की शहरी यात्रा के लिए बनाई गई हैं। हर ट्रेन में लगभग 900 यात्रियों के बैठने की जगह होगी, जिसमें हर कोच में करीब 300 यात्री आ सकेंगे। छोटी ट्रेन का यह कॉन्फिगरेशन इस अपेक्षाकृत छोटे कॉरिडोर पर होने वाली संभावित मांग को ध्यान में रखकर तय किया गया है।

नया कॉरिडोर लाजपत नगर में एक और मेट्रो कनेक्शन जोड़ेगा। यह स्टेशन गोल्डन लाइन को मौजूदा वॉयलेट और पिंक लाइनों से जोड़ेगा, जिससे यह एक ट्रिपल इंटरचेंज स्टेशन बन जाएगा। इससे यात्रियों को लाइन बदलने और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

चिराग दिल्ली इस रूट का एक और अहम स्टेशन है। यह मैजेंटा लाइन के साथ इंटरचेंज की सुविधा देगा, जिससे यात्री एक और बड़े मेट्रो कॉरिडोर से जुड़ सकेंगे। उम्मीद है कि इस कनेक्शन से दक्षिण दिल्ली से गुजरकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाने वाले यात्रियों के लिए सफर ज्यादा आसान हो जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कॉरिडोर पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों के आने-जाने की उम्मीद है क्योंकि यह घनी आबादी वाले इलाकों और ज्यादा भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों को जोड़ता है। दिल्ली मेट्रो का अनुमान है कि रोजाना लगभग 60,000 से 80,000 यात्री इस पर सफर करेंगे और ट्रेन की फ्रीक्वेंसी में सुधार के बाद 2041 तक यह संख्या 1.2 लाख से ज्यादा हो सकती है। ये आंकड़े अनुमान हैं, न कि यात्रियों की असल संख्या।

बता दें कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने दिसंबर 2025 में इस कॉरिडोर पर निर्माण कार्य शुरू किया था। साकेत इलाके में पुष्पा भवन के पास पहला टेस्ट पाइल और शिलान्यास समारोह हुआ। यह कॉरिडोर बड़े ‘गोल्डन लाइन’ विस्तार से भी जुड़ा है, जिसमें तुगलकाबाद-एरोसिटी रूट भी शामिल है।

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नीम करौली बाबा के कैंची धाम में ऐसा क्या खास, दुनिया भर से खिंचे चले आते हैं लोग?

भारत में नीम करोली बाबा को मानने वाले लोगों की संख्या लंबे समय से रही है और उनकी सादगी, सेवा और आध्यात्मिक सोच लोगों को अपनी ओर खींचती है। लेकिन अब इन्हें विदेशों में भी काफी जाना जाता है। बाबा के जीवन और उनकी बातों से प्रभावित होकर देश-विदेश के कई लोग उनके आश्रमों तक पहुंचे। यही वजह है कि उत्तराखंड का कैंची धाम भी आज श्रद्धालुओं और बाबा को जानने वाले लोगों के लिए खास जगह बन चुका है। नीम करोली बाबा से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनके भक्तों में आम लोगों के साथ कई बड़ी विदेशी हस्तियों के नाम भी बताए जाते हैं। बाबा का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों की दिलचस्पी का कारण बनी हुई हैं और उनके आश्रम में पहुंचने वाले लोग उनके विचारों और आध्यात्मिक जीवन के बारे में जानना चाहते हैं।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा पहुंचे कैंची धाम

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और एक्टर-प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा ने नवंबर 2022 में उत्तराखंड के कैंची धाम का दौरा किया था। दोनों ने यहां नीम करोली बाबा के दर्शन किए और आश्रम में कुछ समय बिताया। बाबा की सादगी, शांति और प्रेम से जुड़ी शिक्षाएं आज भी लोगों को अट्रैक्ट करती हैं।

लैरी पेज और जेफरी स्कॉल भी आए

कैंची धाम पहुंचने वाली विदेशी हस्तियों में गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज और ईबे के को-फाउंडर जेफरी स्कॉल भी है। डॉ. लैरी ब्रिलियंट भी कुछ समय आश्रम में रहे थे। बाद में उन्होंने गूगल के परोपकार से जुड़े काम में भी भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, यह जगह लोगों को खुद को समझने और दुनिया को एक अलग नजरिए से देखने का मौका देती है।

स्टीव जॉब्स की आध्यात्मिक यात्राएप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स सिर्फ 19 साल की उम्र में भारत आए थे। साल 1974 में उन्होंने कई महीने भारत में घूमते हुए एक आध्यात्मिक गुरु की तलाश की। इसी दौरान वह नीम करोली बाबा के कैंची धाम आश्रम भी पहुंचे, लेकिन तब तक बाबा का निधन हो चुका था। उनके बायोग्राफर वॉल्टर इसाकसन के अनुसार, भारत और कैंची धाम की इस यात्रा ने जॉब्स की सोच पर गहरा असर डाला।

मार्क जुकरबर्ग ने किये दर्शन

मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने साल 2015 में कैंची धाम का दौरा किया था। उस समय वह फेसबुक के काम को लेकर एक मुश्किल दौर से गुजर रहे थे और कुछ समय रुककर चीजों को समझना चाहते थे। बताया जाता है कि स्टीव जॉब्स ने ही उन्हें भारत और इस आश्रम की यात्रा करने की सलाह दी थी। बाद में जुकरबर्ग ने भी माना कि भारत की इस यात्रा ने उन्हें फेसबुक के असली मकसद को समझने में मदद की।

कैंची धाम की खासियत और वहां का माहौल

उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच बना कैंची धाम चारों तरफ से हरियाली और शांत माहौल से घिरा हुआ है। यहां पहुंचते ही शहर की भागदौड़ से अलग एक सुकून भरा माहौल महसूस होता है। आश्रम में नीम करोली बाबा की याद से जुड़ें मंदिर हैं, जहां भक्त बाबा की शिक्षाओं के बारे में जानने आते हैं। यही कारण है कि कैंची धाम सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों से आने वाले लोगों के बीच भी खास पहचान रखता है।

क्या है कैंची धाम जाने का सही समय और आसान रास्ता?

कैंची धाम उत्तराखंड की कुमाऊं पहाड़ियों में है और नैनीताल से करीब 38 किलोमीटर दूर बताया जाता है। यहां सड़क मार्ग से नैनीताल, हल्द्वानी और काठगोदाम से आसानी से पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से आने वालों के लिए काठगोदाम सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी या लोकल ट्रांसपोर्ट लेकर कैंची धाम पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग से आने पर पंतनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीक है, जो करीब 65 किलोमीटर दूर है और वहां से कैब लेकर आश्रम पहुंचा जा सकता है। कैंची धाम जाने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। जुलाई और अगस्त में भारी बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर सफर मुश्किल हो सकता है, इसलिए इस समय यात्रा करने से बचना बेहतर है। जून में होने वाले सालाना भंडारे में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। आश्रम आमतौर पर सुबह जल्दी खुलता है और शाम की आखिरी प्रार्थना के बाद बंद हो जाता है, लेकिन मौसम के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।

मेटा ने पर्सनल AI एजेंट म्यूज लॉन्च किया:18+ उम्र के यूजर्स शेड्यूल, शॉपिंग-बिजनेस प्लानिंग में मदद ले सकेंगे, अभी केवल अमेरिका में उपलब्ध

मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में मदद करेगा। मेटा के मुताबिक, यह लंबे समय के टारगेट को एक्शन प्लान में बदलने में भी मदद कर सकता है। म्यूज अभी सिर्फ US में उपलब्ध है। मेटा ने इसके सेफ्टी और प्राइवेसी फीचर्स पर जोर दिया है। कंपनी के अनुसार, यह एजेंट एक अलग और सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसमें एजेंट और यूजर का डेटा दोनों सुरक्षित रहते हैं। यूजर म्यूज के अलग ऐप पर या वॉट्सऐप के जरिए उससे बात कर सकते हैं। यह ईमेल भेजने और यात्रा बुक करने जैसे छोटे काम कर सकता है। साथ ही, सालभर का एक्सरसाइज प्लान बनाने या नया बिजनेस शुरू करने जैसे लंबे समय के लक्ष्यों पर भी काम कर सकता है। ऐसे काम करेगा म्यूज यूजर जब म्यूज के साथ अपना लक्ष्य शेयर करेगा, तो यह उसके लिए पर्सनलाइज्ड प्लान बनाने में मदद करेगा। इसके बाद यह यूजर के समय और संसाधनों को व्यवस्थित कर काम को आगे बढ़ाएगा। मेटा ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि म्यूज ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है और यूजर की ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन भी कर सकता है। टेक कंपनियां AI एजेंट्स को चैटबॉट्स के बाद की अगली तकनीक बता रही हैं। चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं और जानकारी खोज सकते हैं, लेकिन वे यूजर की ओर से काम नहीं करते। चैटबॉट से कैसे अलग है AI एजेंट अपने सबसे सामान्य रूप में AI एजेंट एक पारंपरिक कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह काम करता है। ऐसा प्रोग्राम किसी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जैसे कोई ऐप खोलना। जब इसे AI के लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ जोड़ा जाता है, तो यह बिना हर कदम का निर्देश दिए काम पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी खोज सकता है। उदाहरण के लिए, यह सिर्फ ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद नहीं करेगा। यह सहकर्मी का मैसेज पढ़कर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि यूजर क्या जवाब देना चाहता है और फिर अपने आप जवाब भेज सकता है। मार्क जुकरबर्ग का AI विजन मेटा के लिए यह एजेंट CEO मार्क जुकरबर्ग के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें AI सुपरइंटेलिजेंस हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो। उन्होंने पिछले महीने ऑनलाइन प्रकाशित 6,500 शब्दों के एक निबंध में अपना विजन बताया था। आलोचकों ने इस दस्तावेज को कल्पनाओं से भरा हुआ बताया। जुकरबर्ग ने इसमें लिखा कि मेटा ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां हर व्यक्ति के पास नए बिजनेस बनाने, Ph.D.-स्तर की पढ़ाई में मदद लेने और अपनी जरूरत के मुताबिक लाइफस्टाइल सलाह पाने के टूल होंगे। जुकरबर्ग ने लिखा, “हर व्यक्ति के पास एक बेहद सक्षम पर्सनल एजेंट होगा, जो आपको, आपके लक्ष्यों और आपकी हर अहम चीज को समझेगा। आपका एजेंट आपके रिश्तों, सेहत, करियर, वित्त, घर के काम, शौक और दूसरी चीजों को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपकी ओर से काम करेगा।” उन्होंने आगे लिखा कि यह एजेंट उन चीजों के लिए समय बचाएगा, जिन्हें लोग पसंद करते हैं और उन्हें वह हासिल करने में मदद करेगा, जो वे इसके बिना नहीं कर पाते। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या लोग वास्तव में इसका इस्तेमाल करेंगे। यह जानकारी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट पर आधारित है।

मेटा का पर्सनल AI एजेंट लॉन्च, अभी केवल अमेरिका में:खुद ईमेल भेजेगा, पेमेंट करेगा म्यूज; यूजर्स को खरीदारी-बिजनेस प्लानिंग में भी मदद मिलेगी

मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में मदद करेगा। मेटा के मुताबिक, यह लंबे समय के टारगेट को एक्शन प्लान में बदलने में भी मदद कर सकता है। म्यूज अभी सिर्फ US में उपलब्ध है। मेट का कहना है कि इसके सेफ्टी-प्राइवेसी फीचर्स को खास हैं। एजेंट सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसमें एजेंट और यूजर का डेटा दोनों सुरक्षित रहते हैं। यूजर म्यूज के अलग ऐप पर या वॉट्सऐप के जरिए उससे बात कर सकते हैं। यह ईमेल भेजने और यात्रा बुक करने जैसे छोटे काम कर सकता है। साथ ही, सालभर का एक्सरसाइज प्लान बनाने या नया बिजनेस शुरू करने जैसे लंबे समय के टारगेट पर भी काम कर सकता है। ऐसी रहेगी म्यूज की वर्किंग यूजर जब म्यूज के साथ अपना टारगेट शेयर करेगा, तो यह उसके लिए पर्सनलाइज्ड प्लान बनाने में मदद करेगा। इसके बाद यह यूजर के समय और संसाधनों को व्यवस्थित कर काम को आगे बढ़ाएगा। म्यूज ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है। यूजर की ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन भी कर सकता है। टेक कंपनियां AI एजेंट्स को चैटबॉट्स के बाद की अगली तकनीक बता रही हैं। चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं और जानकारी खोज सकते हैं, लेकिन वे यूजर की ओर से काम नहीं करते। चैटबॉट से कैसे अलग है AI एजेंट अपने सबसे सामान्य रूप में AI एजेंट एक ट्रेडीशनल कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह काम करता है। ऐसा प्रोग्राम किसी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जैसे कोई ऐप खोलना। जब इसे AI के लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ जोड़ा जाता है, तो यह बिना हर कदम का निर्देश दिए काम पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी खोज सकता है। मसलन, यह सिर्फ ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद नहीं करेगा। यह मैसेज पढ़कर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि यूजर क्या जवाब देना चाहता है और फिर अपने आप जवाब भेज सकता है। मार्क जुकरबर्ग का AI विजन मेटा के लिए यह एजेंट CEO मार्क जुकरबर्ग के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें AI सुपरइंटेलिजेंस हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो। उन्होंने पिछले महीने ऑनलाइन प्रकाशित 6,500 शब्दों के एक निबंध में अपना विजन बताया था। आलोचकों ने इस दस्तावेज को कल्पनाओं से भरा हुआ बताया। जुकरबर्ग ने इसमें लिखा कि मेटा ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां हर व्यक्ति के पास नए बिजनेस बनाने, Ph.D लेवल की पढ़ाई में मदद लेने और अपनी जरूरत के मुताबिक लाइफस्टाइल सलाह पाने के टूल होंगे। जुकरबर्ग ने लिखा, “हर व्यक्ति के पास एक बेहद सक्षम पर्सनल एजेंट होगा, जो आपको, आपके लक्ष्यों और आपकी हर अहम चीज को समझेगा। आपका एजेंट आपके रिश्तों, सेहत, करियर, वित्त, घर के काम, शौक और दूसरी चीजों को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपकी ओर से काम करेगा।” यह एजेंट उन चीजों के लिए समय बचाएगा, जिन्हें लोग पसंद करते हैं और उन्हें वह हासिल करने में मदद करेगा, जो वे इसके बिना नहीं कर पाते। —————– ये खबर भी पढ़ें… मस्क बोले- अगले साल इंसानों से ज्यादा समझदार हो जाएगा AI, डिजिटल काम चुटकियों में करेगा, इंटरनेट और हैकिंग के लिए बनेगा बड़ा खतरा दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क का कहना है कि AI बहुत तेजी से इंसानों जैसी समझ हासिल कर रहा है। अगले साल के अंत तक यह कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े कामों में इंसानों से भी आगे निकल जाएगा। मस्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए यह बात कही। पढ़ें पूरी खबर…

World’s 10 Richest Person: एलन मस्क से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक…ये हैं दुनिया के 10 सबसे अमीर लोग, जानें किसके पास है कितनी संपत्ति

World’s 10 Richest Person: दुनिया के सबसे अमीर लोगों में कौन-कौन शामिल है इसकी लिस्ट आ गई है। इस महीने अरबपतियों की लिस्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। अगस्त 2026 के दौरान दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। फोर्ब्स की 1 सितंबर 2026 तक की सूची के मुताबिक दुनिया के टॉप 10 अरबपतियों की कुल संपत्ति करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई। वहीं दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में एलन मस्क टॉप पर है। वहीं जेफ बेजोस, अमानसियो ऑर्टेगा ने टॉप-10 में जगह बना ली है। इस लिस्ट में टेक और बिजनेस की दुनिया के कई बड़े नाम शामिल हैं। आइए जानते हैं सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में मार्क जुकरबर्ग, जेफ बेजोस, स्टीव बाल्मर और अमानसियो ऑर्टेगा किस स्थान पर है।

1- एलन मस्क

फोर्ब्स की 1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 892 अरब डॉलर आंकी गई है। अगस्त के दौरान स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में तेजी का सीधा फायदा उनकी संपत्ति पर पड़ा। इस दौरान उनकी नेट वर्थ में करीब 202 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इससे पहले जून में मस्क कुछ समय के लिए दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर भी बने थे।

2- लैरी पेज

फोर्ब्स की सूची में गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज 277 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। वहीं अगस्त के दौरान उनकी संपत्ति में करीब 15 अरब डॉलर की कमी आई। इस वजह से वह उस महीने टॉप-10 अरबपतियों में सबसे ज्यादा संपत्ति गंवाने वाले व्यक्ति रहे। लैरी पेज ने 1998 में सर्गेई ब्रिन के साथ मिलकर गूगल की शुरुआत की थी।

3- जेफ बेजोस

अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस फोर्ब्स की सूची में 268 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। अगस्त के महीने में उनकी कुल संपत्ति में करीब 10 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले जुलाई में बेजोस ने सर्गेई ब्रिन को पीछे छोड़ते हुए अमीरों की सूची में तीसरा स्थान हासिल किया था।

4- सर्गेई ब्रिन

गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में चौथे स्थान पर हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 256 अरब डॉलर है, जो पिछले महीने की तुलना में 13 अरब डॉलर कम हुई है। ब्रिन ने 1998 में लैरी पेज के साथ मिलकर गूगल की शुरुआत की थी। वह अभी भी अल्फाबेट के बोर्ड में शामिल हैं और कंपनी के प्रमुख शेयरहोल्डर में से एक हैं।

5- माइकल डेल

फोर्ब्स की अमीरों की सूची में डेल टेक्नोलॉजीज के प्रमुख माइकल डेल पांचवें स्थान पर हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 241 अरब डॉलर है और अगस्त के दौरान इसमें लगभग 12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। कॉलेज के दिनों में ही कारोबार शुरू करने के बाद माइकल डेल ने अपने आज डेल टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन और सीईओ के तौर पर कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं।

6- मार्क जुकरबर्ग

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में छठे स्थान पर हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 197 अरब डॉलर है, जो पिछले महीने के मुकाबले 6 अरब डॉलर अधिक है। जुकरबर्ग ने 2004 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान फेसबुक की शुरुआत की थी। समय के साथ कंपनी ने अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया और इंस्टाग्राम व व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म भी इसके कारोबार का हिस्सा बने।

7- लैरी एलिसन

ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी एलिसन फोर्ब्स की अमीरों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 193 अरब डॉलर है। अगस्त के दौरान उनकी संपत्ति में लगभग 25 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जो टॉप-10 अरबपतियों में दूसरी सबसे बड़ी बढ़त रही। एलिसन ने 1977 में ओरेकल की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई थी।

8- जेन्सेन हुआंग

एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में आठवें पायदान पर हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 191 अरब डॉलर है, जिसमें अगस्त के दौरान 17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। हुआंग ने 1993 में एनवीडिया की स्थापना की थी और लंबे समय से कंपनी के सीईओ और प्रेसिडेंट के रूप में इसकी कमान संभाल रहे हैं।

9-स्टीव बाल्मर

माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व सीईओ स्टीव बाल्मर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में नौवें स्थान पर पहुंच गए हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 155 अरब डॉलर है और अगस्त में इसमें 10 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इस बढ़त के साथ बाल्मर 11वें स्थान से ऊपर उठकर टॉप-10 में शामिल हो गए। कारोबार के अलावा वह NBA टीम लॉस एंजिल्स क्लिपर्स के मालिक भी हैं।

10-अमानसियो ओर्टेगा

स्पेन के कारोबारी अमानसियो ओर्टेगा ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में टॉप-10 में जगह बना ली है। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 148 अरब डॉलर है, जिसमें अगस्त के दौरान 5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। संपत्ति बढ़ने के साथ ऑर्टेगा 12वें पायदान से सीधे 10वें स्थान पर पहुंच गए और उन्होंने बर्नार्ड अर्नाल्ट को पीछे छोड़ दिया। ऑर्टेगा फैशन ब्रांड जारा की पैरेंट कंपनी इंडिटेक्स के सह-संस्थापक हैं।