BSE मैनेजमेंट के इस बयान से शेयर धड़ाम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

बीएसई के शेयरों में 2 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। दिन के उच्च स्तर से शेयर 4 फीसदी से ज्यादा गिर गए। इसकी वजह बीएसई का एक बयान है। इस बयान के बाद ही शेयर में तेज गिरावट आई। स्टॉक एक्सचेंज ने कहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (कैश) की शुरुआत के बाद वॉल्यूम में गिरावट आई है।

CAS की वजह से घटा है पार्टिसिपेशन 

BSE के मैनेजमेंट ने जी बिजनेस से बातचीत में कहा, “CAS की वजह से एचएफटी, प्रॉपरायटरी अकाउंट्स, रिटेल ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन घटा है। सीएएस के बाद पार्टिसिपेशन बढ़ना जरूरी है।” बीएसई का शेयर 2 सितंबर को एक समय 3,252 रुपये के लेवल पर पहुंच गया था। 12 बजे शेयर का प्राइस 3 फीसदी गिरकर 3,144.80 रुपये पर चल रहा था।

NSE के शेयरों की लिस्टिंग का भी असर

बीएसई मैनेजमेंट के यह बताने का असर भी उसके शेयरों पर पड़ा कि NSE के शेयरों को खुद के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने की इजाजत मिल सकती है। खबरों के मुताबिक, BSE पर लिस्ट होने के बाद NSE के शेयरों में अपने ही एक्सचेंज पर ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए ट्रेडिंग हो सकती है।

अर्निंग्स में 1-2 फीसदी कमी आ सकती है

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसई के इस कदम से FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर करीब 1-2 फीसदी का असर पड़ सकता है। यह अनुमान एक एनालिसिस पर आधारित है, जिसमें यह माना गया है कि कैश मार्केट की हिस्सेदारी और नहीं बढ़ेगी।

दो ब्रोकरेज फर्मों ने आउटलुक घटाया

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों नुवामा और जेफरीज ने बीएसई के शेयरों पर अपने आउटलुक को घटाया है। PL Capital ने बीसई के शेयरों के लिए 12 महीने के टारगेट प्राइस को 4,850 रुपये से घटाकर 4,025 रुपये कर दिया है। हालांकि, इस शेयर पर उसने ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है।

3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। यह कारोबार के आखिर में होने वाला एक संक्षिप्त ऑक्शन है, जिसमें शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए बाय (Buy) और सेल (Sell) ऑर्डर्स को मैच कराया जाता है। शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए दूसरे एशियाई बाजारों में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इसमें चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार शामिल हैं।

CAS का मतलब क्या है

CAS की व्यवस्था शुरू होने से पहले शेयर के क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण अंतिम 30 मिनट में लगातार होने वाली ट्रेडिंग में ट्रेड्स के औसत प्राइस के आधार पर होता था। रेगुलेटर्स का कहना है कि दुनिया के कई बाजारों में लागू सिस्टम को ध्यान में रख CAS को लागू किया। कैस लागू होने के बाद बाजार और प्रमुख सूचकांकों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

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CAS से पहले क्या था सिस्टम

करीब 20 मिनट के ऑक्शन प्रोसेस में लिक्विडिटी काफी कम रही है और इसमें ज्यादातर संस्थानों की हिस्सेदारी रही है। एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, डेली कैश मार्केट टर्नओवर में CAS ट्रेड्स की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है। कम पार्टिसिपेशन का मतलब अपेक्षाकृत छोटे बाय और सेल ऑर्डर्स से है।

Mahanadi Coalfields IPO: एक और सरकारी कंपनी ने जमा किया ड्राफ्ट, कोल इंडिया बेचेगी 10% हिस्सा

सरकारी कंपनी कोल इंडिया के 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, महानदी कोलफील्ड्स ने IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया है। इस इश्यू में केवल ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा, जिसमें कोल इंडिया अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी या 66.18 करोड़ शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। IPO में नए शेयर जारी नहीं होंगे, लिहाजा महानदी कोलफील्ड्स को इस ऑफरिंग से कोई पैसा नहीं मिलेगा। शेयरों को बेचने से होने वाली पूरी कमाई कोल इंडिया के पास जाएगी।

महानदी कोलफील्ड्स मुख्य रूप से ओडिशा में काम करती है और इसने वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान दिया। कोल इंडिया के उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया का योगदान लगभग 74 प्रतिशत था।

महानदी कोलफील्ड्स के शेयरों को BSE और NSE दोनों पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। SBI कैपिटल मार्केट्स, एक्सिस कैपिटल, BOB कैपिटल मार्केट्स, IDBI कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेज को इस इश्यू के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है। महानदी कोलफील्ड्स का वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध मुनाफा 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10,678 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 30,550 करोड़ रुपये हो गया।

मार्च और अप्रैल में ये 2 सब्सिडियरी हुई थीं लिस्ट

कोल इंडिया की वर्तमान में 8 सहायक कंपनियां- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, MCL, और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) हैं।

इससे पहले भारत कोकिंग कोल लिमिटेड जनवरी 2026 में स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुई थी। इसका पब्लिक इश्यू 1,068.78 करोड़ रुपये का था। सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड मार्च, 2026 में NSE और BSE पर लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,841.45 करोड़ रुपये का था।

2030 तक CIL की सभी सहायक कंपनियां लिस्ट कराने का है प्लान

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कोयला मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2030 तक कोल इंडिया लिमिटेड की सभी सहायक कंपनियां स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हो जाएं। इस कदम का उद्देश्य निगरानी को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और संपत्तियों के मोनेटाइजेशन के जरिए वैल्यू अनलॉक करना है।

Priority Jewels IPO: 100.45 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के बाद आज, 2 सितंबर को अलॉटमेंट; कैसी रहेगी लिस्टिंग?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Priority Jewels IPO: 100.45 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के बाद आज, 2 सितंबर को अलॉटमेंट; कैसी रहेगी लिस्टिंग?

प्रायोरिटी ज्यूल्स का ₹91.50 करोड़ का IPO 100.45 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हो गया है। अब 2 सितंबर को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 4 सितंबर को हो सकती है। IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 39.87 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 166.49 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 106.76 गुना भरा।

जिन लोगों ने प्रायोरिटी ज्यूल्स के IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Priority Jewels IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से कैसे करें चेक

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Priority Jewels सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

इस IPO में 45.75 लाख नए शेयर जारी हुए। फाइनल इश्यू प्राइस ₹200 प्रति शेयर रहा। कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹27.45 करोड़ जुटाए। ग्रे मार्केट में प्रायोरिटी ज्यूल्स का शेयर 15.50 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

क्या-क्या बनाती है कंपनी

प्रायोरिटी ज्यूल्स हीरे जड़ी सोने और प्लेटिनम की फाइन ज्वेलरी डिजाइन करती है, बनाती है और बेचती है। यह रोज पहनी जाने वाली ज्वेलरी जैसे अंगूठी, झुमके, पेंडेंट, नेकलेस, ब्रेसलेट के साथ-साथ खास मौकों पर पहनी जाने वाली ज्वेलरी भी बेचती है। कंपनी भारत और दुनिया भर में स्वतंत्र ज्वेलर्स और ज्वेलरी चेन्स को अपने प्रोडक्ट बेचती है, जैसे कि कैरटलेन ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, कल्याण ज्वेलर्स, रिलायंस रिटेल, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, त्रिभुवनदास भीमजी झवेरी लिमिटेड, सेनको गोल्ड लिमिटेड।

प्रायोरिटी ज्यूल्स की 21 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अच्छी मौजूदगी है। यह अमेरिका, UAE, हांगकांग और नॉर्वे सहित 13 देशों में अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करती है। इसकी मुंबई में 2 ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी हैं।

IPO के पैसे कैसे इस्तेमाल करेगी Priority Jewels

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू से हुई कमाई का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। प्रायोरिटी ज्यूल्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू ₹147.40 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा ₹6.48 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹110.49 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 24 प्रतिशत बढ़कर ₹539 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹17.65 करोड़ हो गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एथर एनर्जी ने टेस्ला और BYD को पीछे छोड़ा, इस साल शेयर 130% उछला; आगे और तेजी की उम्मीद

Ather Energy Share Price: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ather Energy ने इस साल शेयर बाजार में Tesla, BYD और Xiaomi जैसी दिग्गज कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है। कंपनी के शेयर 2026 में अब तक करीब 130% चढ़ चुके हैं। विश्लेषकों को बढ़ते मार्केट शेयर की वजह से स्टॉक में आगे भी तेजी की उम्मीद है।

Ather के शेयर में तेजी ने ग्लोबल निवेशकों का भी ध्यान खींचा है। सोमवार को BlackRock Global Funds ने ओपन मार्केट से कंपनी में 1% से कम हिस्सेदारी खरीदी है।

इसके उलट EV कंपनियों से जुड़े 104 शेयरों को ट्रैक करने वाला ब्लूमबर्ग इंडेक्स इस साल करीब 1% गिरा है। Tesla, BYD और Xiaomi जैसी बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन का असर इस इंडेक्स पर पड़ा है।

पिछले महीने शेयर 36% से ज्यादा चढ़ा

Hero MotoCorp की हिस्सेदारी वाली Ather Energy इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसिंग करती है। कंपनी का अपना चार्जिंग नेटवर्क भी है। भारत में EV की बढ़ती मांग का कंपनी को फायदा मिल रहा है।

बेंगलुरु की कंपनी का शेयर पिछले महीने 36% से ज्यादा चढ़ा। मई 2025 में लिस्टिंग के बाद यह किसी एक महीने में कंपनी की सबसे बड़ी तेजी है। बाजार में कंपनी की ग्रोथ को लेकर भरोसा बढ़ा है।

FY28 तक 26% मार्केट शेयर का अनुमान

Emkay Global Financial Services का अनुमान है कि FY28 तक Ather Energy का मार्केट शेयर बढ़कर 26% हो सकता है। मार्च के अंत में कंपनी का मार्केट शेयर करीब 17% था।

ब्रोकरेज का मानना है कि नए प्रोडक्ट लॉन्च और कंपनी की इन-हाउस टेक्नोलॉजी से Ather को फायदा मिल सकता है। इससे कंपनी घरेलू प्रतिद्वंद्वी Ola Electric को कड़ी टक्कर दे सकती है। पिछले हफ्ते Ather ने Konarc इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किया था। इसे कंपनी की अपनी EV आर्किटेक्चर पर बनाया गया है। यह मास मार्केट सेगमेंट के लिए तैयार किया गया है।

Konarc से दोगुना हो सकता है बाजार

Nomura Holdings के एनालिस्ट्स का कहना है कि Konarc की वजह से Ather का एड्रेसेबल मार्केट दोगुना हो सकता है। यानी कंपनी के पास पहले के मुकाबले ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने का मौका होगा।

एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का बाजार अब अहम मोड़ पर पहुंच रहा है। इस सेगमेंट में लंबी अवधि के लिए Ather को सबसे मजबूत विकल्पों में शामिल माना जा रहा है।

लिस्टिंग के बाद 440% चढ़ा शेयर

लिस्टिंग के बाद से Ather Energy का शेयर करीब 440% चढ़ चुका है। पिछले पांच साल में ₹2,500 करोड़ या उससे ज्यादा का IPO लाने वाली भारतीय कंपनियों में Ather Energy का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है।

तेजी के बावजूद एनालिस्ट्स अभी भी स्टॉक को लेकर बुलिश हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी को कवर करने वाले सभी 14 एनालिस्ट्स शेयर पर खरीदारी की सलाह दे रहे हैं।

Axis Capital ने Ather Energy का टारगेट प्राइस ₹2,100 रखा है। सोमवार के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले इसमें करीब 22% की तेजी की संभावना बताई गई है।

अगले 3-4 साल में शेयर दोगुना हो सकता है

Emkay के एनालिस्ट चिराग जैन का मानना है कि अगले तीन से चार साल में मौजूदा स्तर से भी Ather Energy का शेयर दोगुना हो सकता है।

उनका कहना है कि Ather सिर्फ फीचर्स हटाकर कीमत कम करने के पक्ष में नहीं है। कंपनी लागत कम करके कीमत घटाने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि ब्रांड और प्रोडक्ट क्वालिटी पर असर न पड़े।

एथर एनर्जी का शेयर मंगलवार को 1.07% की तेजी के साथ 1,736 रुपये पर बंद हुआ।

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ESDS Software IPO: 28 गुना से ज्यादा भरा, GMP देखकर गदगद हुए निवेशक! आज है बोली लगाने का आखिरी मौका

ESDS Software Solutions IPO: क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस के आईपीओ को बोली लगाने के आखिरी दिन, 1 सितंबर को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पांस मिला है।

NSE के आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर सुबह 10:30 बजे तक यह पब्लिक इश्यू 28.31 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। शेयर बाजार में चल रही भारी मांग को देखते हुए ग्रे मार्केट में भी इस आईपीओ का प्रीमियम (GMP) लगातार ऊंचाई छू रहा है।

आइए आपको बताते हैं ESDS Software IPO का सब्सक्रिप्शन स्टेटस, जीएमपी, कंपनी का बिजनेस और लिस्टिंग से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।

सब्सक्रिप्शन स्टेटस: NII और रिटेल कैटेगरी में बंपर मांग

कंपनी का ₹720 करोड़ का यह आईपीओ ऑफर पर रखे गए 1,23,52,942 शेयरों के मुकाबले 34,97,62,658 शेयरों के लिए बोलियां हासिल कर चुका है:

नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs): एनआईआई हिस्से में सबसे ज्यादा आक्रामक खरीदारी देखी गई और यह कोटा 81.74 गुना भर चुका है।

रिटेल निवेशक: खुदरा निवेशकों का कोटा भी 21.17 गुना सब्सक्राइब हुआ है।

इश्यू से जुड़ी सभी जरूरी बातें

  • आईपीओ साइज: ₹720 करोड़
  • प्राइस बैंड: ₹408 – ₹429 प्रति शेयर
  • ओपनिंग और क्लोजिंग डेट: 28 अगस्त से 1 सितंबर 2026
  • एंकर इन्वेस्टर्स जुटाए: ₹216 करोड़
  • लिस्टिंग डेट: 4 सितंबर 2026 (BSE और NSE पर)

ESDS Software Solutions इस पब्लिक इश्यू से मिलने वाली कुल रकम में से ₹576 करोड़ का इस्तेमाल अपने डेटा सेंटर्स के लिए AI-बेस्ड क्लाउड कंप्यूटिंग इक्विपमेंट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर खरीदने और इंस्टॉल करने के लिए करेगी। बाकी बची राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

कंपनी का बिजनेस और फाइनेंशियल हेल्थ

2005 में स्थापित ESDS Software Solutions AI-इनेबल्ड क्लाउड, मैनेज्ड सर्विसेज, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस प्रदान करती है। FY26 में कंपनी ने ऑपरेशन्स से ₹472.21 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जबकि इसका शुद्ध मुनाफा ₹120.82 करोड़ रहा। कंपनी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा (BFSI), पब्लिक सेक्टर यूनिट्स और कॉरपोरेट समेत 2,500 से अधिक सक्रिय ग्राहकों को सेवाएं दे रही है।

58% तक लिस्टिंग गेन का इशारा

ग्रे मार्केट पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘इन्वेस्टरगेन’ के मुताबिक, ESDS Software का शेयर ₹250 के तगड़े ग्रे मार्केट प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी के ₹408 से ₹429 प्रति शेयर के प्राइस बैंड के आधार पर, इसके ₹429 के अपर प्राइस बैंड में ₹250 का प्रीमियम जोड़कर इसकी संभावित लिस्टिंग ₹679 प्रति शेयर पर हो सकती है। इसका सीधा मतलब है कि यह आईपीओ लिस्टिंग वाले दिन निवेशकों को करीब 58.28% का शानदार मुनाफा दे सकता है।

बोली लगाए या नहीं? जानें ब्रोकरेज की राय

आनंद राठी के अनुसार, प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन वित्तीय वर्ष 2026 के अनुमानित P/E का 41.6 गुना है, जो इश्यू के बाद ₹50,284 मिलियन का मार्केट कैपिटलाइजेशन दिखाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारत के क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट की मजबूत ग्रोथ संभावनाओं, कंपनी की इंटीग्रेटेड सेवाओं और बेहतर होती प्रोफिटबिलिटी को देखते हुए यह प्रीमियम वैल्यूएशन काफी हद तक वाजिब है। इसी के आधार पर ब्रोकरेज ने इस आईपीओ को ‘Subscribe – Long Term’ यानी लंबी अवधि के लिए सब्सक्राइब करने की सलाह दी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zomato ने ‘एनालॉग डिश’ पर कसा शिकंजा, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स होंगे डीलिस्ट

Zomato: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने सोमवार को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स के लिए एनालॉग चीज, पनीर या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।

Zomato ने साफ किया है कि अगर कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा सकती है (डीलिस्ट कर सकती है)।

‘एनालॉग’ डिश में पारंपरिक सामग्री की जगह सस्ती या वैकल्पिक चीजों (जैसे असली दूध या चीज की जगह वनस्पति तेल) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इनका रूप-रंग और स्वाद वैसा ही रहता है।

महाराष्ट्र की कार्रवाई का असर

बता दें कि यह कदम महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य-व्यापी कार्रवाई और दिल्ली के फाइव-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा पर फिर से ध्यान दिए जाने के बीच उठाया गया है।

प्लेटफॉर्म से डीलिस्ट होंगे रेस्टोरेंट पार्टनर 

Zomato ने कहा कि जिन डिश में ‘एनालॉग डेयरी’ होने की बात रेस्टोरेंट पार्टनर ने बताई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

Zomato ने आगे कहा कि जो रेस्टोरेंट पार्टनर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा।

सोमवार को प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड व्यापारियों को भेजे गए एक मैसेज में Zomato ने कहा, “हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि ग्राहकों को ऐसा खाना मिले जो सही जानकारी वाला हो, सुरक्षित हो और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता हो।”

एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर जीरो टॉलरेंस

Zomato ने कहा, “इसीलिए, हम अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर और दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाले खाने के सामान की लिस्टिंग और सप्लाई को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू कर रहे हैं।”

फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ने कहा कि यह कदम फूड सेफ्टी और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक, अपने ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

Zomato ने कहा, “जिन रेस्टोरेंट ने पहले ही अपने मेन्यू में एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर या दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनके ऐसे आइटम तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएंगे।”

इसने रेस्टोरेंट पार्टनर्स से तुरंत कुछ कदम उठाने को कहा है, जैसे: असली डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाना; जिन मामलों में तुरंत बदलाव मुमकिन न हो, वहां अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाली चीजें हटाना; और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करने और Zomato पर लिस्टेड प्रोडक्ट्स की सही जानकारी पक्का करने के लिए रेस्टोरेंट सप्लायर्स द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी का रिव्यू करना।

Zomato ने रेस्टोरेंट को दी सख्त चेतावनी

Zomato ने कहा, “अगर कोई रेस्टोरेंट नियमों का पालन नहीं करता पाया जाता है, तो Zomato के पास ऐसे रेस्टोरेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हम अपनी पॉलिसी और लागू कानूनों के तहत कोई भी दूसरी कार्रवाई भी कर सकते हैं।”

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं, तो इससे होने वाले किसी भी नुकसान, लागत, डैमेज या खर्च की भरपाई करने का अधिकार भी Zomato के पास है।

CEO ने क्या कहा?

Zomato के CEO आदित्य मंगला ने कहा: “Zomato में हमारा मुख्य मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखना और हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा लिस्ट और सर्व किए जाने वाले खाने के लिए साफ स्टैंडर्ड बनाए रखना। यह पॉलिसी उसी कमिटमेंट को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी ऐसी ही है।”

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Hy-Tech Engineers IPO GMP & Listing: प्राइमरी मार्केट में धमाल मचाने के बाद हाई-टेक इंजीनियर्स का आईपीओ कल यानी 1 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रहा है। 244 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुए इस आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त क्रेज है और इसका जीएमपी लगभग 80 फीसदी के करीब पहुंच चुका है।

जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर अलॉट हुए हैं, उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कल लिस्टिंग वाले दिन क्या करें, मुनाफा वसूल कर निकल जाएं या लॉन्ग टर्म के लिए होल्ड रखें? आइए जानते हैं लिस्टिंग से पहले GMP, सब्सक्रिप्शन डेटा, ब्रोकरेज की राय और कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ी पूरी डिटेल्स।

244 गुना से ज्यादा हुआ था सब्सक्राइब

24 अगस्त से 27 अगस्त के बीच खुले इस ₹135.73 करोड़ के आईपीओ में निवेशकों ने रिकॉर्डतोड़ बोलियां लगाई थीं। कुल 1.84 करोड़ उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 443.49 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। गैर-संस्थागत निवेशक(NII) कैटेगरी में सबसे ज्यादा 402.29 गुना आवेदन आए। QIB का हिस्सा 255.77 गुना भरा। वहीं खुदरा निवेशकों का कोटा 170.58 गुना सब्सक्राइब हुआ।

कितनी मजबूत है बैलेंस शीट?

हाइड्रॉलिक्स इंडस्ट्री में 40 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाली हाई-टेक इंजीनियर्स मुख्य रूप से कंस्ट्रक्शन मशीनरी, ऑटोमोबाइल, कृषि उपकरण और इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनों के लिए हाइड्रॉलिक फिटिंग्स बनाती है। 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹189.40 करोड़ रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹22.59 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹19.62 करोड़ था।

पब्लिक इश्यू खुलने से पहले कंपनी ने व्हाइटओक कैपिटल जैसे दिग्गजों सहित एंकर निवेशकों से ₹40.72 करोड़ जुटाए थे।

80% लिस्टिंग गेन का इशारा

ग्रे मार्केट पर नजर रखने वाली वेबसाइट InvestorGain के अनुसार, 31 अगस्त को Hy-Tech Engineers का GMP ₹42 प्रति शेयर चल रहा है। इसका इश्यू प्राइस ₹53 था। इस हिसाब से इसका संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹53 + ₹42 = ₹95 प्रति शेयर रह सकता है। निवेशकों को लिस्टिंग के दिन करीब 80% का बंपर मुनाफे की उम्मीद है।

Buy, Sell या Hold? ब्रोकरेज हाउसेज की क्या है राय?

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज: ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी ने पिछले 2 सालों में 17.28% की रेवेन्यू CAGR दर्ज की है और EBIDTA मार्जिन 22% के आसपास बनाए रखा है। कंपनी का डोमेस्टिक मार्केट शेयर मजबूत है। ब्रोकरेज ने कहा, ‘कंपनी लंबे समय में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकती है। कल अच्छे लिस्टिंग गेन की उम्मीद है। जिन्हें अलॉटमेंट मिला है, वे इसे मीडियम से लॉन्ग टर्म के लिए HOLD रख सकते हैं।’

आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स: आनंद राठी ने कंपनी के 11,000 से ज्यादा SKUs, 170 सीधे क्लाइंट्स और रेलवे-डिफेंस में मौजूदगी की तारीफ की। अपर प्राइस बैंड पर FY26 P/E मल्टीपल 22.25x है जो वाजिब वैल्युएशन दिखाता है। इन्होंने भी इस इश्यू को ‘Subscribe – Long Term’ की रेटिंग दी थी।

निवेशकों के लिए फाइनल स्ट्रैटेजी

जिन्हें केवल शॉर्ट-टर्म मुनाफा चाहिए, वे कल बंपर ओपनिंग के बाद अपना प्रॉफिट बुक करके निकल सकते हैं या स्टॉप-लॉस लगाकर चल सकते हैं। वहीं लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स जिन्हें शेयर अलॉट हुए हैं और वे कंपनी के फंडामेंटल्स व हाइड्रॉलिक्स सेक्टर की ग्रोथ पर भरोसा रखते हैं, वे एक्सपर्ट्स की सलाह के मुताबिक इसे अपने पोर्टफोलियो में होल्ड कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Deepa Jewellers IPO: 1 सितंबर से ₹460 करोड़ का इश्यू खुलेगा, 30% पर है GMP; जानिए प्राइस बैंड समेत पूरी डिटेल

Deepa Jewellers IPO: ज्वेलरी कंपनी Deepa Jewellers का IPO 1 सितंबर से खुलेगा। हैदराबाद की यह कंपनी 22 कैरेट हॉलमार्क गोल्ड ज्वेलरी की प्रोसेसिंग और सप्लाई करती है। इसने अपने IPO का प्राइस बैंड ₹168 से ₹177 प्रति शेयर तय किया है।

कंपनी इस IPO के जरिए कुल ₹459.7 करोड़ जुटाना चाहती है। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1,701.4 करोड़ होगा। IPO में ₹250 करोड़ के नए शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं प्रमोटर OFS के जरिए 1.18 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचेंगे। OFS का साइज करीब ₹209.7 करोड़ है।

1 सितंबर से खुलेगा IPO

Deepa Jewellers का IPO निवेशकों के लिए 1 सितंबर को खुलेगा। इसमें 3 सितंबर तक बोली लगाई जा सकेगी। एंकर निवेशकों के लिए बुक 31 अगस्त को एक दिन के लिए खुलेगी। IPO में 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB के लिए रखा गया है। रिटेल निवेशकों के लिए 35% हिस्सा रिजर्व है। बाकी 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए रखा गया है।

निवेशकों को कम से कम 84 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। इसके बाद 84 शेयरों के गुणकों में बोली लगाई जा सकेगी। ऊपरी प्राइस बैंड पर रिटेल निवेशकों को कम से कम ₹14,868 लगाने होंगे। अधिकतम निवेश ₹1,93,284 तक किया जा सकता है।

Deepa Jewellers IPO का GMP

दीपा ज्वैलर्स के आईपीओ को ग्रे मार्केट में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसका GMP फिलहाल ₹53 है। यह अपर प्राइस बैंड के हिसाब से करीब 30% प्रीमियम का संकेत है। हालांकि, GMP लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होती। यह बस आईपीओ की डिमांड का अंदाजा होती है। इसमें लगातार बदलाव भी होता रहता है।

क्या करती है कंपनी?

Deepa Jewellers एक संगठित B2B कंपनी है। यह गोल्ड ज्वेलरी को डिजाइन करती है और आउटसोर्स्ड मॉडल के जरिए उसकी प्रोसेसिंग कराती है। कंपनी के पास 41 कारीगरों का नेटवर्क है।

कंपनी तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में रिटेल चेन और अलग-अलग ज्वेलरी स्टोर्स को अपने प्रोडक्ट सप्लाई करती है। इसके अलावा कंपनी जॉब वर्क भी करती है। यह सिल्वर ज्वेलरी, 18 और 20 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी, कीमती पत्थर और गोल्ड बुलियन का कारोबार भी करती है।

वर्किंग कैपिटल पर खर्च होंगे ₹215 करोड़

IPO से जुटाई जाने वाली नई पूंजी में से ₹215 करोड़ कंपनी अपनी लंबी अवधि की वर्किंग कैपिटल जरूरतों पर खर्च करेगी।

इसमें ज्वेलरी का स्टॉक खरीदना, उसे बनाए रखना और कारोबार बढ़ने के साथ इन्वेंट्री का विस्तार शामिल है। बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

Deepa Jewellers की कारोबारी सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में Deepa Jewellers का नेट प्रॉफिट 158.2% बढ़कर ₹104.8 करोड़ हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा ₹40.6 करोड़ था। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 37.9% बढ़कर ₹1,926.7 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹1,397 करोड़ था।

Emkay Global Financial Services और Valmiki Leela Capital इस IPO के मर्चेंट बैंकर हैं।

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में 7 नए IPO खुलेंगे, 15 कंपनियों की लिस्टिंग होगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty Outlook: 31 अगस्त को निफ्टी किस तरफ जाएगा? HDFC Bank समेत इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

Nifty Outlook: निफ्टी में अगस्त की शुरुआत से ही खास हलचल नहीं दिखी है। पूरे महीने इंडेक्स सीमित दायरे में फंसा रहा। न नीचे की तरफ कोई बड़ा ब्रेकडाउन हुआ और न ऊपर की तरफ ब्रेकआउट मिला। महीने के आखिरी कारोबारी दिन से पहले Nifty, 31 जुलाई के मुकाबले करीब 200 अंक नीचे था।

लेकिन महीने का आखिरी कारोबारी दिन काफी अहम रहने वाला है। बाजार के सामने कई बड़े ट्रिगर हैं। इनमें सबसे ज्यादा नजर HDFC Bank पर रहेगी। बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन ने अक्टूबर में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है।

HDFC Bank बाजार की दिशा तय कर सकता है?

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि निवेशक इस खबर को कैसे लेते हैं। इसे नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होने के तौर पर देखा जाएगा या फिर नया CEO चुने जाने तक एक और अनिश्चितता बनी रहेगी।

इसका असर सिर्फ HDFC Bank पर नहीं, बल्कि Nifty की चाल पर भी पड़ सकता है। भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक का शेयर इस साल दबाव में रहा है। ऐसे में सोमवार को यह शेयर एक बार फिर फोकस में रहेगा।

Nifty सुस्त, लेकिन स्मॉलकैप में तगड़ी तेजी

Nifty भले ही पूरे महीने सीमित दायरे में रहा, लेकिन छोटे शेयरों में जोरदार हलचल दिखी। पिछले हफ्ते BSE Smallcap Index के 13 शेयर 20% या उससे ज्यादा चढ़े। वहीं 58 शेयरों में 10% से 20% तक की तेजी रही।

Nifty 500 के भी 10 शेयरों ने पिछले हफ्ते 10% से 25% तक का रिटर्न दिया। शुक्रवार को BSE Smallcap Index के 29 शेयरों ने नया ऑल टाइम हाई बनाया।

IPO में भी जमकर दिखा जोश

प्राइमरी मार्केट में भी जबरदस्त हलचल रही। अगस्त में 14 कंपनियों ने शेयर बाजार में डेब्यू किया। इन कंपनियों को औसतन 30% से ज्यादा का लिस्टिंग प्रीमियम मिला।

शुक्रवार को लिस्ट हुई Tempsens Instruments ने निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी का शेयर अपने इश्यू प्राइस से 111% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ। यह 2026 का पहला IPO बन गया, जिसने लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस से 100% से ज्यादा की छलांग लगाई। इससे पहले साल की शुरुआत में Bharat Coking Coal ने 96% प्रीमियम पर लिस्टिंग की थी।

Nifty के लिए 24,400 बड़ा स्तर

पिछले हफ्ते Nifty ने 24,400 के स्तर को पार करने की कोशिश की थी। हालांकि, यह सफल नहीं हो सका। पिछले हफ्ते Nifty का हाई 24,378 रहा। इसलिए 24,400 का स्तर अब काफी अहम हो गया है।

नीचे की तरफ 24,100 से नीचे का दायरा बाजार के लिए अहम सपोर्ट रहेगा। शुक्रवार का इंट्राडे लो 24,077 था। गुरुवार को Nifty 24,090 तक गिरा था।

24,200 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है

LKP Securities के रुपक डे के मुताबिक हाल की चाल को देखते हुए Nifty का ट्रेंड फिलहाल बहुत बुलिश नहीं है। 24,200 के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस दिख रहा है।

उनका मानना है कि 24,200 के नीचे रहने पर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रह सकता है। इससे Nifty में 23,900 तक गिरावट की गुंजाइश बन सकती है। अगर 23,900 का सपोर्ट भी टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। हालांकि, Nifty अगर 24,200 के ऊपर टिकता है तो शॉर्ट टर्म ट्रेंड मजबूत हो सकता है।

24,000-24,400 के बीच फंसा Nifty

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का कहना है कि Nifty फिलहाल 24,000 से 24,400 के दायरे में बना हुआ है। हालांकि, इस रेंज में तेजी का हल्का रुझान है।

अगर निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी आती है तो Nifty जल्द ही 24,300 से 24,400 के स्तर की तरफ जा सकता है। ट्रेंड में बदलाव के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम है।

Bank Nifty में भी ब्रेकआउट का इंतजार

Nifty के मुकाबले Bank Nifty ने अगस्त में कुछ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह 31 जुलाई के मुकाबले 200 अंक से ज्यादा चढ़ा है। हालांकि, बैंकिंग इंडेक्स भी अपने रेंज से बाहर नहीं निकल पाया।

Bank Nifty फिलहाल 57,000 से 58,000 के दायरे में फंसा हुआ है। SAMCO Securities के ओम मेहरा के मुताबिक 57,200 इसका पहला अहम सपोर्ट है। इसके बाद 57,100 का स्तर महत्वपूर्ण होगा ऊपर की तरफ 57,800 पहला बड़ा रेजिस्टेंस है। इसके बाद 57,900 का स्तर अहम होगा। अगर Bank Nifty इस जोन के ऊपर मजबूती से बंद होता है, तो तेजी का रुझान फिर मजबूत हो सकता है।

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में 7 नए IPO खुलेंगे, 15 कंपनियों की लिस्टिंग होगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में 7 नए IPO खुलेंगे, 15 कंपनियों की लिस्टिंग होगी

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू होने वाला नया हफ्ता IPO बाजार के लिए काफी व्यस्त रहेगा। शेयर बाजार में पिछले करीब एक महीने से सुस्ती है। इसके बावजूद IPO मार्केट में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। अगले हफ्ते 7 कंपनियों के IPO खुलेंगे। इनके जरिए ₹1,415 करोड़ जुटाने की योजना है। साथ ही 15 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी।

₹1,265 करोड़ के 3 मेनबोर्ड IPO

अगले हफ्ते 3 मेनबोर्ड IPO खुलेंगे। इनका कुल साइज ₹1,265 करोड़ है। सबसे पहले Purple Style Labs का IPO आएगा। कंपनी Pernia’s Pop-Up Shop ब्रांड चलाती है।

कंपनी का ₹680 करोड़ का IPO 31 अगस्त को खुलेगा। इसमें 2 सितंबर तक पैसा लगाया जा सकेगा। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। प्राइस बैंड ₹546 से ₹575 प्रति शेयर है।

1 सितंबर को खुलेंगे दो IPO

Rays of Belief और Deepa Jewellers के IPO 1 सितंबर को खुलेंगे। दोनों में 3 सितंबर तक निवेश किया जा सकेगा। MOM’s Belief की पैरेंट कंपनी Rays of Belief ₹125 करोड़ जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड ₹227 से ₹239 प्रति शेयर है। यह भी पूरी तरह फ्रेश इश्यू है।

Deepa Jewellers ₹459.71 करोड़ जुटाएगी। इसमें ₹250 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। बाकी ₹209.71 करोड़ OFS के जरिए जुटाए जाएंगे। प्रमोटर अपने शेयर बेचेंगे। प्राइस बैंड ₹168 से ₹177 प्रति शेयर है।

4 SME IPO भी आएंगे

अगले हफ्ते 4 SME IPO भी खुलेंगे। इनका कुल साइज ₹150.17 करोड़ है। Ashutosh Fibre, Shanti Inorganics और Phychem Technologies के IPO 31 अगस्त को खुलेंगे। Farm Peace का IPO 1 सितंबर को आएगा।

विजय केडिया के निवेश वाली Ashutosh Fibre ₹56.34 करोड़ जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड ₹87 से ₹92 प्रति शेयर है। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। कंपनी ने IPO खुलने से पहले एंकर निवेशकों से ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं। इसमें 5 निवेशकों ने हिस्सा लिया है।

Shanti Inorganics ₹47.23 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी सल्फर बेस्ड इनऑर्गेनिक केमिकल बनाती है। इसका प्राइस बैंड ₹79 से ₹83 प्रति शेयर है।

Phychem Technologies ₹14.58 करोड़ जुटाएगी। कंपनी रोटेशनल मोल्डिंग कंपाउंड बनाती है। इसका इस्तेमाल खोखले प्लास्टिक प्रोडक्ट बनाने में होता है। प्राइस बैंड ₹51 से ₹54 प्रति शेयर है।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कंपनी Farm Peace ₹32 करोड़ जुटाएगी। इसका IPO 1 सितंबर को खुलेगा। प्रति शेयर कीमत ₹59 तय की गई है।

अगस्त में ₹23,679 करोड़ के IPO

अगस्त में IPO बाजार में काफी हलचल रही। मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में कुल 46 IPO आए। इनके जरिए ₹23,679 करोड़ जुटाए गए। इस साल अगस्त तक IPO के जरिए ₹79,829 करोड़ की फंडिंग हो चुकी है।

इन IPO में निवेश का आखिरी मौका

Lumino Industries का ₹700 करोड़ का IPO 31 अगस्त को बंद होगा। कंपनी पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर समेत कई प्रोडक्ट बनाती है। अब तक इस IPO को 4.87 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका है।

ESDS Software Solution का ₹720 करोड़ का IPO 1 सितंबर तक खुला रहेगा। कंपनी AI, क्लाउड और डेटा सेंटर सर्विसेज देती है। Priority Jewels का ₹91.5 करोड़ का IPO भी 1 सितंबर को बंद होगा। ESDS के IPO को अब तक 2.1 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। Priority Jewels का IPO 1.93 गुना भर चुका है।

SME सेगमेंट में Kwick Forensic Solutions का IPO 31 अगस्त को बंद होगा। Complete Sports & Management India और Paluck Technologies के IPO 1 सितंबर तक खुले रहेंगे।

अगले हफ्ते 15 कंपनियों की लिस्टिंग

अगले हफ्ते 15 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी। इनमें 8 मेनबोर्ड और 7 SME कंपनियां शामिल हैं।

Augmont Enterprises 31 अगस्त को डेब्यू करेगी। इसके बाद Hy-Tech Engineers, Skyways Air Services और Symbiotec Pharmalab 1 सितंबर को लिस्ट होंगी।

Annu Projects 2 सितंबर को लिस्ट होगी। Lumino Industries की लिस्टिंग 3 सितंबर को होगी। ESDS Software Solution और Priority Jewels के शेयरों में 4 सितंबर से ट्रेडिंग शुरू होगी।

SME सेगमेंट में Madhur Knit Crafts और ABH Healthcare 1 सितंबर को NSE Emerge पर लिस्ट होंगी। Sumax Engineering की लिस्टिंग 2 सितंबर को होगी।

Kwick Forensic Solutions 3 सितंबर को BSE SME पर डेब्यू करेगी। Complete Sports & Management India और Paluck Technologies की लिस्टिंग 4 सितंबर को होगी।

Augmont Enterprises की तगड़ी होगी लिस्टिंग या फुस्स, ग्रे मार्केट से मिल रहे ये संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।