नेपाल बॉर्डर तक 4 लेन हाईवे, 3591 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक क्या बदलेगा

Bihar Highway Project: बिहार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने और भारत-नेपाल सीमा तक आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानकों में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह 82.578 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एंनुटी मॉडल से बनाया जाएगा। यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से सीधे जोड़ेगा।

इस हाइवे प्रोजेक्ट से बिहार को क्या फायदा होगा?

इस फोर-लेन हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस पर गाड़ियों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस हाईवे पर बीच में कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी। इससे गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से हो सकेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने से रूट पर पड़ने वाले घनी आबादी वाले कई प्रमुख इलाकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। इनमें मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा शामिल हैं। इस अपग्रेडेड कॉरिडोर से यात्रियों और माल ढुलाई के समय में भारी बचत होगी। साथ ही ईंधन की खपत और वाहनों के रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेगा नेटवर्क, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स नोड्स को बूस्ट

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हाईवे की प्लानिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए की गई है। यह कॉरिडोर 5 पीएम गतिशक्ति इकोनॉमिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा यह चार सोशल नोड्स और मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों पर स्थित दो लॉजिस्टिक्स नोड्स से भी कनेक्ट होगा। यह नया रूट पहले से मौजूद NH-31 और NH-122 जैसे कॉरिडोर, बरौनी सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे बने रिवराइन लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगा।

क्रॉस-बॉर्डर कारोबार को भी मिलेगा पुश

सोनबरसा और पास में भिठ्ठामोड़ में स्थित लैंड पोर्ट के जरिए यह फोर-लेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रियों और कार्गो की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा। इस 82.578 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। इसपर 7 बड़े पुल होंगे, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल भी शामिल है। इसके अलावा 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर भी होंगे।

इस नए हाईवे से इलाके की कृषि सप्लाई चेन को बहुत मजबूती मिलेगी। किसान अपनी उपज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। यह रूट धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक जाने वाले लोगों के लिए भी काम का साबित होगा। इस कॉरिडोर से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में स्थित प्रसिद्ध जानकी पुनौरा धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सड़क कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।

‘फूलों का तारों का…,’ गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

'फूलों का तारों का...,' गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवरा को प्रेम के अलग ही रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने मैहर जिले में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहनों को विख्यात गाना 'फूलों का तारों का सबका कहना है..,' सुनाया और उनके खातों में 2148 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस तरह राज्य की 1.25 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1500 रुपये के साथ-साथ राखी का 250 रुपये का शगुन भी मिला। 

इसके अलावा सीएम डॉ. मोहन यादव ने 256 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने लाड़ली बहनों पर पुष्प वर्षा भी की और हितग्राहियों को हितलाभ वितरिए किया। उन्होंने यहां कई विभागों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। दूसरी ओर, जनअभियान परिषद की सखियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विशाल राखी भेंट की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई घोषणाएं भी कीं। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार हर महीने बहनों को लाड़ली बहना योजना की राशि प्रदान करती है। राखी त्योहार तो साल में एक बार आता है, लेकिन हम हर महीने इस उत्सव को मनाते हैं। आज लाड़ली बहनों के प्रेम को देखकर, उनकी संख्या देखकर आनंद आ रहा है। मैहर मां शारदा का अद्भुत स्थान है। बड़े लड़ैया महुआ वाले, जिनकी मार सही न जाए, एक को मारे दो मर जाए, तीसरा धौंस खाए मर जाए। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मां शारदा के अनन्य भक्त आला की अमरता की कहानी आज भी जीवंत है। जब तक आला दर्शन नहीं कर लेते, मां को भी आनंद नहीं आता। सनातन संस्कृति भी अपने आप में अद्भुत है।

उन्होंने कहा कि हमारे तीज-त्योहारों की वजह से हमारे कुटुम्ब जीवित हैं। हमारी संस्कृति में पूरी वसुधा को परिवार माना गया है। हम अपने पेड़-पौधे-नदी-पहाड़, सबको परिवार का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़ा है। पिछले साल आतंकवादियों ने माताओं-बहनों के सिंदूर पर हाथ डालने का प्रयास किया, उस वक्त हमारे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना ने दुश्मन के घर में घुसकर मारने का रिकॉर्ड बनाया। हमारी सेना हर तरह से दुश्मन से निपटने में सक्षम है।

बहनों को दिया अतिरिक्त उपहार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज मेरे दोनों हाथों में प्रेम का धागा है। मैं सौभाग्यशाली हूं। आज मैं मन में क्या महसूस कर रहा हूं, बताना मुश्किल है। मेरी सरकार और आपका जो संबंध है, वो अद्भुत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग दुर्भावना रखते हैं। हम जब भी लाड़ली बहनों को योजना की राशि ट्रांसफर करते हैं, तब कांग्रेसी हमें टोकते हैं। कांग्रेसी कहते हैं कि लाड़ली बहनों के खातों में पैसे मत डालो, ये शराब पी जाती हैं। कांग्रेसियों को डूब मरना चाहिए। सीएम डॉ. मोहन ने बहनों से अपील की, कि कांग्रेस की इस बात को गांठ बांधकर रखना। जिस दिन चुनाव आए, उस दिन कांग्रेस को बताना कि उसने क्या अपराध किया है। उनका हिसाब चुकता करना। लाड़ली बहनों का अपमान कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि हमने चुनाव के पहले जो वादा किया और अभी तक हम महीने आपके खातों में राशि आ रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी एक बार जो वचन देती है, उसे निभाती है। आज मुझे वो गीत याद आ रहा है, 'फूलों का तारों का कहना है, सबका कहना है, एक हजार में मेरी बहना है….'। हमारी सरकार को 1.25 करोड़ बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। आज हमारी सरकार ने नियमित राशि के अलावा 250 रुपये अतिरिक्त सावन के महीने का उपहार दिया है। 

 

बहनें परिवार को बांधे रखती हैं-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से निवेदन किया कि ये राशि जब आपको मिले, तो अपने भाइयों को मिठाई खिलाना और टीका करना। मैं समझूंगा कि टीका मुझे लगा। मुझे आपका आशीर्वाद मिल गया। हमारी माताओं-बहनों में जो हिम्मत है, वो पुरुष में नहीं है। वे अपना परिवार छोड़कर अंजान परिवार को अपना भविष्य समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि एक बार विश्व हिंदू परिषद का सम्मेलन विदेश में हुआ। उस समय मार्गरेट थ्रेचर वहां की प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि भारत और लंदन में सबसे बड़ा अंतर कुटुम्ब परंपरा का है। आपके ऋषि-मुनियों ने परिवार की जो परंपरा खड़ी की है, इसकी धुरी माता है। माता अपने सारे बच्चों से जिस प्रकार प्रेम करती है, वह अद्भुत है। मां अपना पेट काटकर बच्चों की सारी मांग पूरी करती है। घर में भले कमाने वाला एक हो, लेकिन मां सबकी पूर्ति करती है। हमको खिलाते-खिलाते मां का पेट भर जाता है। यह संस्कृति केवल भारत में ही है। हमारी संस्कृति त्याग-परिवार की परंपरा को लेकर चलती है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार विकास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 के बाद महाकाल लोक का लोकार्पण किया। उससे हमारा पूरा जिला बदल गया। हमने देव स्थान को धार्मिक स्थल बनाने का फैसला किया है। हमारी सरकार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने का काम कर रही है। हमने फैसला किया है कि जो भी उद्योग बहनों को मौका देगा, वहां सरकार उसे प्रति बहन 5 हजार रुपये देगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के लिए स्लोगन है, सच्चा वादा पक्का काम-प्रेम से बोलो सीताराम। चित्रकूट में हमने 3 हजार करोड़ से ज्यादा के काम मंजूर किए हैं। अब मां मैहर के लोक के पहले फेज का भूमि-पूजन आज यहां हुआ है। कल कैबिनेट में हमने फैसला किया कि लाड़ली बहनों को आने वाले 5 साल तक राशि देंगे। बहनें इस राशि से सिलाई मशीन खरीदती हैं, ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। बहने इस राशि से परिवार की पूर्ति करती हैं। 

 

कांग्रेस को लिया आड़े हाथ-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहले नक्सलियों को खत्म किया, और अब नशा विरोधी अभियान चला रहे हैं। हमारी सरकार ने 19 धार्मिक शहरों में शराब की दुकानें बंद की हैं। भविष्य की पीढ़ियों को बचाने के लिए, हर तरह के नशे के खिलाफ लड़ने के लिए हमारी सरकार संकल्पबद्ध है। परिवार के परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आप बच्चों को पढ़ाओ-लिखाओ, बड़ा अधिकारी बनाओ, लेकिन नशे के मामले में उसे सावधान करो। उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि मां नर्मदा विंध्याचल पर्वत की तरह आ नहीं सकती है, उसे लाने के लिए नहर बनाई जा रही थी। जिस मशीन से नहर बन रही थी, वह कंपनी ही बंद हो गई। मशीनें खराब हो गईं। यह योजना बंद होने के कगार पर थी। लेकिन, हमने कहा कि खुशहाली के लिए इस इलाके में पानी आना जरूरी है। 2 हजार करोड़ की योजना 800 करोड़ से शुरू हुई। हमने कहा कि इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब वो नहर पूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र के हर गांव में नर्मदा का पानी पहुंचेगा। हमने फैसला किया कि किसानों को खाते पलटाने नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा आने वाली फसल के समय सरकार दिन में बिजली देगी। जिन-जिन गरीबों के मकान रह गए हैं, उनका मकान बनेगा। मैहर में कलेक्टर सहित 16 बड़े पदों पर बहने हैं। 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगर कांग्रेसी अनुचित आचरण नहीं करते, तो विधानसभा में भी बहनों के लिए 33 फीसदी का आरक्षण हो जाता। कांग्रेस को पता नहीं किस बात का डर है। अगर माताएं-बहनें लोकसभा-विधानसभा में आएंगी तो क्या गलत हो जाएगा।    

 

सीएम ने की ये प्रमुख घोषणाएं

– मैहर में 25 करोड़ की लागत से आधुनिक स्टेडियम बनेगा।

– लिलजी जलाशय का 50 करोड़ की लागत से नवीकरण किया जाएगा। 

– मैहर में बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा।

– मैहर में 5000 गौवंश क्षमता की बड़ी गौशाला बनेगी।

– मैहर में आईटीआई संस्थान बनेगा, स्कूलों का उन्नय किया जाएगा।

– आल्हा गायकों की समितियों को 25-25 हजार रुपए देने की घोषणा।

मानसून का इस बार खेती पर कैसा असर! खरीफ फसलों की बुआई का गैप घटकर 2% पहुंचा पर धान दे रहा टेंशन, समझिए इसके मायने

देश में इस साल मानसूनी बारिश की शुरुआती सुस्ती के बाद अब खेती-किसानी के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आ रही है। जून के महीने में बीते 12 सालों की सबसे कम बारिश (40 फीसदी घाटा) दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में हुई सामान्य बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार को दोबारा पटरी पर ला दिया है। Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसूनी फसलों के रकबे में जून के मुकाबले बड़ा सुधार देखने को मिला है। अगर आने वाले दिनों में बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है तो इससे देश में खाद्यान्न की महंगाई को कंट्रोल करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

बुआई का अंतर घटकर 2% पर आया, 101.7 मिलियन हेक्टेयर में हुई बुआई

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक देशभर के किसानों ने 101.7 मिलियन हेक्टेयर (लगभग 251 मिलियन एकड़) में मानसूनी फसलों की बुआई पूरी कर ली है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में हुई बुआई के मुकाबले महज 2 फीसदी कम है। जून के महीने में अल नीनो के असर की वजह से यह अंतर काफी ज्यादा था।

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने बताया कि जून के बाद से बुआई की गति में काफी सुधार देखने को मिला है। दलहन, तिलहन और कपास जैसी प्रमुख फसलों की बुआई संतोषजनक दिख रही है। हालांकि कुछ फसलों का रकबा पिछले साल से थोड़ा कम है तो कुछ दूसरी फसलों के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी भी देखी गई है।

अगस्त और सितंबर की बारिश होगी बेहद अहम

भारत की कुल वार्षिक बारिश का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही मिलता है। यह मानसून न सिर्फ फसलों की सिंचाई के लिए बल्कि भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए भी बहुत जरूरी है। जून से सितंबर तक चलने वाले इस सीजन में उगाई जाने वाली फसलें देश के कुल वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा होती हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 17 अगस्त तक देश में क्यूमेलेटिव बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। कृषि सचिव ने स्पष्ट किया कि फसलों की पैदावार और अंतिम उत्पादन के लिए अगस्त और सितंबर महीनों की बारिश बेहद निर्णायक साबित होगी। इसके लिए कृषि मंत्रालय लगातार राज्य सरकारों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहा है। आतिश चंद्रा ने कहा कि हम राज्यों से आग्रह कर रहे हैं कि वे किसानों को इस सीजन में उपलब्ध सभी भूमि पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें, भले ही बुआई में थोड़ी देरी ही क्यों न हो रही हो।

धान की बुआई पिछड़ी, लेकिन अभी भी उम्मीद बरकरार

खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल यानी धान का रकबा अभी भी पिछले आंकड़ों से पीछे चल रहा है। ये चिंता का विषय बना हुआ है। वैसे कृषि सचिव का कहना है कि किसानों के पास अगस्त के अंत तक और कुछ राज्यों/क्षेत्रों में सितंबर के महीने तक भी धान की रोपाई करने का समय उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी फसलों के अंतिम उत्पादन का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी क्योंकि राज्यों के साथ समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

इसका सप्लाई और महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?

अगर मानसूनी बारिश और फसलों की बुआई में यह रिकवरी नहीं होती तो देश में खाद्यान्न की सप्लाई प्रभावित हो सकती थी। सप्लाई घटने से खाने के सामान की कीमतें बढ़तीं और महंगाई पर काबू पाने की सरकारी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था। कृषि और खाद्य बाजार पर दबाव के संकेत पहले से ही दिखने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो भारत लगभग एक दशक में पहली बार चीनी के आयात शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रहा है ताकि घरेलू स्तर पर कीमतों और आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके।

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Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

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वैश्विक वित्तीय संस्था JP Morgan से जुड़ी एक चेतावनी के मुताबिक, वर्ष 2027 में दुनिया को बड़े खाद्य आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया उन देशों में शामिल हो सकते हैं, जहां इसका असर सबसे गंभीर रहने की आशंका है। इस संभावित संकट के पीछे भूराजनीतिक तनाव, उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी और अल नीनो से जुड़े बदलते मौसम के पैटर्न को प्रमुख कारण माना गया है।

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2027 की पहली छमाही में महंगाई 5% तक पहुंचने का अनुमान

 

रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के पहले छह महीनों में वैश्विक महंगाई करीब 5% तक पहुंच सकती है। इसकी तुलना में 2026 की इसी अवधि में यह करीब 2.8% रही थी।

 

संभावित संकट केवल खाद्यान्न की कमी तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन लागत बढ़ने और मौसम में अनिश्चितता के कारण किसानों के लिए फसल उत्पादन बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। अगर खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो विकासशील देशों में परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खाद्य वस्तुओं पर खर्च करना पड़ सकता है।

 

उर्वरक की कमी बढ़ा सकती है चिंता

 

संभावित खाद्य संकट में उर्वरक आपूर्ति एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कुल यूरिया निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 42%, जबकि अमोनिया निर्यात में हिस्सेदारी करीब 27% है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

 

रिपोर्ट में एक संभावित घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया गया है। इसके अनुसार, संघर्ष से ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिसके बाद उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी, उत्पादन में गिरावट और अंततः खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, बाधित आपूर्ति व्यवस्था और उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने में एक से चार साल तक का समय लग सकता है।

 

अल नीनो से फसल उत्पादन पर बढ़ सकता है दबाव

 

अल नीनो से जुड़े मौसम में बदलाव वैश्विक कृषि पर दबाव और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के दौरान सूखा, बाढ़ और अन्य प्रतिकूल मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अल नीनो के कारण फसल उत्पादन में औसतन 3.5% की गिरावट देखी गई है। वहीं, एक 'सुपर अल नीनो' वैश्विक खाद्य महंगाई को करीब 0.7% तक बढ़ा सकता है। यदि इसके साथ ऊर्जा की कीमतों में भी वृद्धि होती है तो इसका प्रभाव 1.3% से 1.5% तक पहुंच सकता है।

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भारत पर भी पड़ सकता है सीधा असर

 

भारत में अगर मानसून कमजोर या अनियमित रहता है तो कृषि क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर धान, दाल, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर बारिश के बदलते पैटर्न का प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारत के सामने चुनौती केवल पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराने की नहीं होगी, बल्कि उर्वरक और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसानों के लिए कृषि उत्पादन की लागत को वहनीय बनाए रखना भी होगी।

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ब्राजील और इंडोनेशिया भी जोखिम वाले देशों में

 

रिपोर्ट में ब्राजील और इंडोनेशिया को भी संभावित खाद्य संकट से गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल किया गया है। कृषि लागत में वृद्धि, फसल उत्पादन में कमी, उर्वरक की संभावित कमी और प्रतिकूल मौसम इन देशों में खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। हालांकि, संभावित संकट का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में भूराजनीतिक तनाव, उर्वरक की उपलब्धता, ऊर्जा कीमतों और मौसम की स्थिति किस तरह बदलती है।

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

CM Yogi Adityanath

UP Free Ration Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी राशन वितरण के उचित दर विक्रेताओं से अपील की कि वह कार्य करिए, जिसमें सम्मान हो। जिसमें सम्मान न हो, वह कार्य कभी नहीं करना चाहिए। इससे पीढ़ियां खराब होती हैं, उन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने 2017 के बाद आए बदलाव का जिक्र किया और कहा कि अब कोई आप पर अंगुली नहीं उठा सकता। 2017 के पहले सपाई गरीब का राशन कार्ड अपने घर में रख लेता था, जिससे वह भूख से मरता था परंतु अब ऐसी स्थिति नहीं है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को लगातार निःशुल्क राशन मिल रहा है। निराश्रितों/दिव्यांगों का राशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। 2 करोड़ परिवारों को फ्री में रसोई गैस के कनेक्शन, 1.53 करोड़ परिवारों को फ्री में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। राशन की 10 हजार दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में स्थापित किया गया है। यह परिणाम राज्य की उन्नति को बताते हैं। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार की शुभकामना दी और राशन कोटेदारों की आस पूरी करते हुए सोमवार को लोकभवन में सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के अंतर्गत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली का शुभारंभ किया। सीएम ने बटन दबाकर उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में हुई वृद्धि (90 रुपए से बढ़ाकर 125 रुपए प्रति क्विंटल) का उपहार दिया। सीएम ने कहा कि मार्जिन मनी में 35 रुपए की वृद्धि (10 रुपए केंद्र सरकार व 25 रुपए राज्य सरकार) से आपने लंबी छलांग लगाई है। हमने 25 रुपए और बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। समय लगेगा, लेकिन यह कार्य हो गया तो आपके लिए और भी अच्छी व्यवस्था होगी।

शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं फेयरप्राइस शॉप के संचालक

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति काम करके आजीविका चलाता है, लेकिन उचित मूल्य विक्रेता निराश्रित, गरीब, दिव्यांगजन समेत समाज के अन्य जरूरतमंदों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें शासन की योजना से जोड़ रहे हैं। उचित मूल्य विक्रेता से जुड़े फेयरप्राइस शॉप के संचालक दुनिया की सबसे बड़ी योजना (राशन वितरण) के जरिए शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। 

वर्ष 2017 के पहले कोटेदार नाम से लोगों को होती थी चिढ़ 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले उचित दर मूल्य के विक्रेताओं का दर्द बयां किया। कहा कि आप तब भी मेहनत करते थे लेकिन शासन राशन नहीं भेजता था तो गाली आपको खानी पड़ती थी। उनकी लूट का खामियाजा आपको भुगतना पड़ता था। लोग शक की निगाहों से देखते थे। कोटेदार शब्द से ही लोगों को चिढ़ सी होने लग गई थी। गलती आपकी नहीं थी। पाप कोई करता था, भुक्तभोगी कोई और होता था। 

 

योगी ने कहा कि उस समय सत्तासीन लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से चाहकर भी आप स्वयं को बचा नहीं सकते थे, जिससे उस समय यूपी की 20-22 करोड़ की आबादी शक की निगाहों से देखी जाती थी। नौजवान, व्यापारी, बेटियां समेत आमजन अन्य प्रदेश में जाते थे तो कोई सम्मान नहीं करता था। 2017 के पहले जो लोग यूपी से दूरी बनाते थे, पिछले साढ़े 9 वर्ष के भीतर वही लोग अब यूपीवालों को गले लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के बारे में ओवरऑल धारणा बदली है। यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की ताकत है, जिसे पीएम मोदी जी के नेतृत्व/मार्गदर्शन में प्रदेश ने सामूहिक रूप से अर्जित किया है। 

CM yogi

वीडियो बनाने की धमकी देने वाले स्कूलों में जाकर देखें सकारात्मक बदलाव 

सीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद का जिक्र किया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि स्कूल का वीडियो बनाएंगे, अरे! जरूर बनाओ। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से हर स्कूल की अच्छी फ्लोरिंग कराई। सरकार बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर, 1.60 करोड़ बच्चों को बैग, किताबें, दो यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। साल 2017 के पहले स्कूल का भवन नहीं होता था। यदि भवन था तो शिक्षक नहीं, शिक्षक थे तो छात्र नहीं। पेयजल, टॉयलेट न होने से सत्र पूरा होने से पहले ही आधे बच्चे पहले ही स्कूल छोड़कर चले जाते थे। अब निपुण भारत अभियान के तहत यूपी के स्कूली बच्चे अक्षर ज्ञान के साथ ही वाक्य विन्यास में भी पारंगत हुए हैं। विज्ञान, अंग्रेजी, गणित की शिक्षा भी स्कूल में लेते हैं। बच्चे अब अच्छा कर रहे हैं। 

जो कुछ नहीं कर पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं 

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना निशाना साधा। कहा कि जो लोग कुछ कर नहीं पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। ऐसे लोग परिवर्तन को नकारात्मकता में बदलना चाहते हैं। यही स्थिति आप सभी के साथ भी हुई। उचित दर विक्रेताओं के बारे में लोगों की धारणा ठीक हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीन लगाना शुरू किया। हमने कहा कि सिंगल डोर स्टेप होगा यानी एफसीआई के गोदाम से सीधे फेयरप्राइस शॉप तक राशन पहुंचाया जाएगा। सरकार व उचित मूल्य विक्रेता के बीच में कोई बैरियर नहीं रहेगा। हम सीधे संवाद बनाएंगे, इससे परिणाम भी सकारात्मक आए। 

39 प्रकार के आइटम की कर सकते हैं बिक्री

सीएम ने कहा कि पारदर्शिता आई तो अब गांव में लोग आपका सम्मान भी करते हैं और आपके सुख-दुख में खड़े होते हैं। आपके प्रति विश्वास में वृद्धि हुई। पीएम के आदेश पर उचित दर विक्रेता से जुड़ी दुकान को अन्नपूर्णा भवन के रूप में निर्मित किया जा रहा है। इस वर्ष इस मद में 500 करोड़ रुपए दिए गए हैं। वहां दुकान व गोदाम की भी व्यवस्था होगी। पहले आप केवल राशन की ही बिक्री कर पाते थे, लेकिन अब 39 ऐसे आइटम हैं, जिन्हें आप अपनी दुकानों से बेच सकते हैं बशर्ते वह नशीले/ज्वलनशील पदार्थ या देश/समाज के प्रतिकूल आचरण से जुड़े सामान न हों। 

2017 में जनता दर्शन में 1000 में से 300 शिकायतें राशन से जुड़ी आती थीं, अब एक भी नहीं आतीं 

सीएम ने कहा कि पहले सरकार ही लूट मचाती थी तो परिवर्तन कैसे हो पाता। फेयर प्राइस शॉप संचालकों को कोसने भर से परिवर्तन नहीं होता। प्रदेश में अब खाद्य व रसद विभाग में भी व्यापक रिफॉर्म हुआ है। 2017 में जनता दर्शन में यदि हजार प्रार्थना पत्र आते थे तो इसमें से लगभग 300 अप्लीकेशन राशन से जुड़ी विसंगतियों को लेकर होती थी लेकिन अब राशन वितरण की एक भी शिकायत नहीं आती है। यही आपका सम्मान है। अब आपको कोई कटघरे में नहीं खड़ा कर सकता और न ही कोई ऊल-जुलूल बातें करता है। 

कोरोना के दौरान भी कोटेदारों की नहीं आई एक भी शिकायत

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की स्कीम को आपने धऱातल पर उतारने का कार्य किया। हमें प्रसन्नता होती है कि हमने गरीब के लिए जो चीज उपलब्ध कराई थी, वह उस तक पहुंच गई है। सीएम ने कोटेदारों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी आप राशन वितरित कर रहे थे। जब सारा काम-धंधा बंद हुआ तो हमने दाल, नमक और तेल का वितरण शुरू किया। सभी जगह सुचारु वितरण हुआ, कहीं से एक भी शिकायत नहीं आई और हर गरीब तक सामान पहुंचा। इसका मतलब पूर्ववर्ती सरकार की नीयत खराब थी। वे आपका इंसेंटिव भी नहीं बढ़ाते थे।  

मुख्यमंत्री ने फेयर प्राइस शॉप संचालकों की हौसलाअफजाई की

सीएम ने कहा कि औसतन हर विक्रेता को 100 कुंतल अनाज का आवंटन होता है। अब तक 90 रुपए के हिसाब से फेयरप्राइस शॉप के संचालक की प्रतिमाह आय लगभग 12,750 होती थी। अब 125 रुपए की दर से 100 कुंतल वितरण पर 16,250 रुपए प्राप्त होंगे। इसके अलावा दुकान का मुनाफा अलग से है। जो जितना अधिक बिक्री करेगा, उतना अधिक लाभांश कमाएगा। उचित मूल्य के विक्रेताओं के लिए पहली बार 30 प्रतिशत की मार्जिन मनी की बढ़ोतरी हो रही है। 

2017 के पहले किसानों से खरीदे जाने वाले खाद्यान्न में भी होती थी व्यापक हेराफेरी

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसानों से लिए जाने वाले खाद्यान्न में व्यापक हेराफेरी होती थी। सीधे किसान से खरीदारी नहीं होती थी, बिचौलिए के कारण किसान को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाता था। 2017 से हम किसानों से सीधे धान, गेहूं, दलहन-तिलहन, मिलेट्स आदि की खरीद कर रहे हैं। डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में पैसा जा रहा है। किसान, नौजवान, महिला समेत हर तबके का व्यक्ति सीधे शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है। सीएम ने कहा कि यदि बीच की दीवार हट गईं तो बहुत सी चीजें पारदर्शी हो जाएंगी, जो विश्वास का कारक भी बनती हैं और लोकतंत्र विश्वास के कारण मजबूत होता है। 

विदेश जाने वाले पैसे का एक हिस्सा भारत के अस्थिर करने में होता है खर्च 

सीएम ने अपील की कि उचित मूल्य विक्रेता भी विश्वास के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाएं। आप सभी अन्नपूर्णा भवन के निर्माण की कार्रवाई तेजी से बढ़वाइए। सरकार धनराशि आवंटित करेगी। अच्छे भवन, वेयरहाउस अच्छे बनेंगे। राशन वितरण 7-10 दिन करेंगे, शेष 20 दिन वेयरहाउस का उपयोग अन्य कार्यों के लिए करके अतिरिक्त आय भी कर सकते हैं। ओडीओपी के सामान रखकर होली-दीवाली समेत अन्य त्योहारों पर भी स्थानीय उत्पाद को प्राथमिकता देंगे तो स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्पी भी प्रोत्साहित होगा। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

 

उन्होंने कहा कि जब हमारा धन विदेशों में जाता है तो उसका एक हिस्सा हमारे खिलाफ ही आतंकवाद को भड़काने और भारत को अस्थिर करने में खर्च होता है। सीएम ने अपील की कि स्वदेशी को प्राथमिकता दें, लोकल को ग्लोबल बनाने की दिशा में प्रयास करें। यह अभियान गांव में भी प्रारंभ हो सकता है। सीएम ने कहा ग्राम पंचायत का जो अन्नपूर्णा भवन बनेगा, वहां उचित मूल्य संचालकों (अन्नपूर्णा भवन संचालक) को मिला सम्मान आपके कार्यों, परिश्रम व प्रयासों का परिणाम है। 

 

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, खाद्य व रसद विभाग के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री को सौंपा धन्यवाद पत्र 

इस उपहार के लिए कोटेदारों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार मेहरोत्रा, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के राजेश तिवारी, आदर्श कोटेदार कमलेश कुमार मिश्र, उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद पत्र प्रदान किया तो सीएम ने भी मंच से आभार जताया।

El Nino Impact On Monsoon: अल-नीनो के साये में मानसून, समझिए कम बारिश से इकॉनमी पर पड़ सकता है कैसा असर

भारत में मानसून पर मंडराते अल-नीनो के खतरे ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से मानसूनी बारिश कमजोर पड़ सकती है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और हाइड्रोपावर उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। वसे एजेंसी का यह भी मानना है कि अगर मौसम का यह झटका बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होता है तो भारत की समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।

एसएंडपी के मुताबिक भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन इकॉनमी (जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस) में शामिल है, जहां के लोग कीमतों में होने वाले उछाल के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन देशों में घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है और कृषि काफी हद तक मौसम की स्थितियों पर निर्भर करती है।

12% कम हुई बारिश, अगस्त में भी सुस्त रह सकता है मानसून

भारत के मानसूनी बारिश की स्थिति फिलहाल अच्छी नजर नहीं आ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अगस्त तक 2026 के मानसून सीजन के दौरान बारिश औसत से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसके अलावा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में मानसून और कमजोर हो सकता है।

भारत में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मानसून से ही मिलता है। ये खेती-किसानी के लिए बेहद जरूरी है। देश की लगभग आधी कृषि भूमि में सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे अधिकांश फसलें नियमित बारिश पर ही निर्भर रहती हैं।

दालों, सोयाबीन और मक्के की पैदावार पर पड़ सकता है असर

अगर बारिश में कमी का यह दौर लंबा खींचता है तो इससे दालों, सोयाबीन, कपास और मक्के जैसी फसलों की पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस सीजन में किसानों को पहले से ही असमान बारिश का सामना करना पड़ा है। हालांकि जुलाई में हुई बेहतर बारिश ने शुरुआती सुस्त मानसून से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की थी, लेकिन अब फिर से जोखिम बढ़ गया है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। विभाग ने अगस्त महीने में औसत से कम बारिश होने का अंदेशा जताया है जबकि इसी दौरान अल-नीनो की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो भारत में अल-नीनो का संबंध कमजोर या अनिश्चित मानसूनी बारिश से रहा है।

बिजली आपूर्ति और जलाशयों पर भी पड़ेगा प्रभाव

कम बारिश का असर सिर्फ भोजन और फसलों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बारिश कम होने से देश के प्रमुख जलाशय खाली रह सकते हैं, जिससे हाइड्रो पावर प्रोडक्शन में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति पर पड़ेगा और ऊर्जा संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है।

सबसे बड़ा जोखिम आम परिवारों के बजट पर है। कृषि उत्पादन में कमी आने से बाजार में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति घट जाएगी और कीमतें ऊपर चढ़ जाएंगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर तब जब रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो जाएंगी।

भारत के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक, लेकिन चुनौतियां बरकरार

तमाम जोखिमों के बावजूद भारत के पास खाद्य आपूर्ति के बड़े झटके से निपटने के लिए कुछ मजबूत सुरक्षा चक्र मौजूद हैं। देश के पास वर्तमान में चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा पिछले अल-नीनो दौर की तुलना में भारत की खेती के तरीकों, सिंचाई सुविधाओं और फसल तकनीकों में काफी सुधार हुआ है। इससे भी देश की खाद्य उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।

एसएंडपी का कहना है कि मौसम से जुड़ी अस्थायी रुकावट का मतलब यह नहीं है कि इकॉनमी को तुरंत कोई बड़ा नुकसान पहुंचेगा। नुकसान का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि मौसम कितना प्रतिकूल होता है और सरकार इससे निपटने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए तत्काल चिंता यही है कि अगर बारिश और कमजोर होती है तो रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। यह दबाव कितने समय तक रहेगा, यह काफी हद तक मानसून, फसल उत्पादन और आने वाले महीनों में अल-नीनो की ताकत पर निर्भर करेगा।

खरीफ में खाद की पर्याप्त उपलब्धता पर योगी सरकार का जोर

खरीफ में खाद की पर्याप्त उपलब्धता पर योगी सरकार का जोर

Kharif 2026 Fertilizer: योगी सरकार ने खरीफ-2026 अभियान के दौरान किसानों को उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और वितरण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सहकारिता विभाग में खरीफ-2026 में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा बैठक में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कम अथवा शून्य स्टॉक वाली समितियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए।

 

समीक्षा के अनुसार 12 अगस्त तक प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.02 लाख मीट्रिक टन और फास्फेटिक उर्वरक की उपलब्धता 4.04 लाख एलएमटी दर्ज की गई। खरीफ 2026 में अब तक 10.83 लाख एलएमटी उर्वरक का क्रमिक वितरण किया जा चुका है। पिछले खरीफ सत्र की तुलना में यूरिया के क्रमिक वितरण में 2.73 लाख एलएमटी तथा फास्फेटिक उर्वरक में 1.70 लाख एलएमटी स्टाक में उपलब्ध है।

 

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी समितियों एवं वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए। शून्य एवं अल्प स्टॉक वाली समितियों की विशेष समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार तत्काल आपूर्ति किया जाए। प्रत्येक जनपद में एडीएम अथवा सीडीओ स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर उन्हें नजदीकी समिति से संबद्ध करने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

 

मुख्य सचिव ने सीडीओ को प्रतिदिन तथा जिलाधिकारी को साप्ताहिक स्तर पर उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उर्वरक की ओवररेटिंग अथवा अनधिकृत टैगिंग से संबंधित शिकायत किसी भी स्थिति में प्राप्त नहीं होनी चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को खाद के लिए परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें नजदीकी वैकल्पिक समितियों से जोड़ने की व्यवस्था भी करने को कहा गया है। जनपदों में उर्वरक के परिवहन के लिए पर्याप्त ट्रकों की उपलब्धता भी कराई गई है।  

किसानों की सुविधा के लिए नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय 

 योगी सरकार की किसान-केंद्रित व्यवस्था के तहत खाद की उपलब्धता पर जिला स्तर तक निगरानी बनाए रखने के साथ ही किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए सहकारिता विभाग ने नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय रखा है। दस्तावेज में दिए गए नंबरों के अनुसार 0522-2289887 पर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक तथा 1800-180-5551 पर संपर्क किया जा सकता है।

तमिलनाडु में किसानों का 75000 रुपये तक का कर्ज माफ, CM विजय ने किया बड़ा एलान…जानें किन्हें मिलेगा लाभ

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को किसानों के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने 75,000 रुपये तक के सहकारी कृषि ऋण को पूरी तरह माफ करने का ऐलान किया। वहीं, 75,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के ऋण पर भी 75,000 रुपये तक की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश की तरक्की किसानों के समर्थन पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि राज्य इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, इसके बावजूद सरकार ने किसानों को अतिरिक्त मदद देने का फैसला किया है। इसके तहत किसानों को कुल 953.06 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।

किसानों के लिए बड़ा ऐलान

विधानसभा में नियम 110 के तहत घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि सरकार ने मई में सत्ता संभालने के 15 दिनों के अंदर 50,000 रुपये तक के कृषि ऋण माफ कर दिए थे। इसके बाद सरकार ने राहत बढ़ाते हुए 75,000 रुपये तक के कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने का फैसला किया। वहीं, 75,000 रुपये से ज्यादा के ऋण पर 35,000 रुपये तक की छूट दी गई। इस फैसले से 14.44 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त 2026 को कृषि संगठनों के साथ हुई बातचीत के बाद सरकार ने किसानों को और राहत देने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि यह फैसला राज्य की मौजूदा आर्थिक मुश्किलों और भारतीय रिजर्व बैंक के उन दिशा-निर्देशों के बावजूद लिया गया है, जिनमें सहकारी बैंकों के ऋण का जल्द निपटारा करने की जरूरत बताई गई है।

माफ किया जाएगा कर्ज

मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक, 75,000 रुपये तक के सहकारी कृषि ऋण को अब पूरी तरह माफ किया जाएगा। वहीं, 75,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के ऋण पर 75,000 रुपये तक की छूट मिलेगी। 1 लाख रुपये से ज्यादा के ऋण पर अधिकतम 35,000 रुपये की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से 1.38 लाख से ज्यादा किसानों को अतिरिक्त मदद मिलेगी। इससे सरकार पर करीब 953.06 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके बाद 13.34 लाख किसानों को मिलने वाली कुल ऋण राहत की राशि बढ़कर 6,220 करोड़ रुपये हो जाएगी।

Top News 17 August: नाग पंचमी पर मंदिरों में उमड़ी भीड़, दिल्ली कूच की तैयारी में किसान; UGC-NET री-एग्जाम की तारीख घोषित

Top News 17 August: नाग पंचमी पर मंदिरों में उमड़ी भीड़, दिल्ली कूच की तैयारी में किसान; UGC-NET री-एग्जाम की तारीख घोषित

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Top News 17 August : नाग पंचमी और श्रावण के तीसरे सोमवार को मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दिल्ली मार्च के तैयारी में जुटे किसान। NTA ने यूजीसी नेट की रिएक्जाम का कार्यक्रम जारी किया। AI बॉस ने मांगा लेट आने वाले कर्मचारी का इस्तीफा। CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत हो गई। 17 अगस्त की बड़ी खबरें: 

 

नाग पंचमी और श्रावण का तीसरा सोमवार

श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर देश भर के शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं का तांता। नाग पंचमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर भी रात 12 बजे से श्रद्धालुओं के लिए खुला। साल भर में केवल एक दिन ही यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। ALSO READ: नाग पंचमी पर असली नाग नहीं बल्कि इस तरह नाग बनाकर करते हैं पूजा, जानिए संपूर्ण विधि

 

दिल्ली मार्च की तैयारी में किसान

किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर बिताई रात। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रमुख जगजीत सिंह डल्लेवाल ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की कि वे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने दें।

 

UGC-NET: NTA फिर लेगा 3 विषयों की परीक्षा

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यूजीसी नेट जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। अंग्रेजी और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर और समाजशास्त्र की 10 सितंबर को होगी। इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तरह की गंभीर खामियां सामने आई थीं। ALSO READ: NTA का बड़ा फैसला, UGC-NET परीक्षा हुई रद्द, इन 3 विषयों की दोबारा होगी Exam, जानिए क्या है कारण?

 

AI बॉस ने मांगा इस्तीफा

सैन फ्रांसिस्को में एआई से चलने वाली प्रयोगात्मक दुकान एंडॉन मार्केट में AI प्रबंधक ‘लूना’ ने एक मानव कर्मचारी को नौकरी से निकालने की सिफारिश की। कर्मचारी 23 शिफ्ट में 17 बार देर से काम पर पहुंचा था। हालांकि अंतिम फैसला AI ने अकेले नहीं लिया।

 

CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में कॉकरोच जनता पार्टी के अभियान से जुड़े एक कार्यकर्ता के पिता की मौत हो गई। सीजेपी ने स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट का आरोप लगाया है। सीएम शुभेंदु अधिकरी ने कहा है कि तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस दो अन्य की तलाश कर रही है। उन्होंने मामले में पूरा इंसाफ होने का भरोसा भी दिलाया।