PM मोदी के 25 साल: ‘गुजरात मॉडल’ से ‘विकसित भारत’ तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति

PM Modi 25 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। उस वक्त राज्य के सामने सूखा, पानी की कमी, बिजली संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियां थीं। 25 साल बाद पीएम मोदी की विकास राजनीति का दायरा गुजरात मॉडल से निकलकर ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘विकसित भारत @2047’ तक पहुंच चुका है। यह बदलाव सिर्फ नारों का नहीं, बल्कि विकास की पूरी सोच के विस्तार को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने आज यानी 7 अक्तूबर को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं।

गुजरात मॉडल से हुई शुरुआत

गुजरात में मोदी के शुरुआती शासन की प्राथमिकता प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और निवेश एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था। इसी दौर की चर्चित पहल SWAGAT (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) थी। इसके जरिए आम लोग अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकते थे। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला।

इसी तरह ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। केंद्र सरकार की ओर से पीएम मोदी के 25 साल के शासन को लेकर जारी प्रस्ताव में SWAGAT और ज्योतिग्राम को गुजरात से निकली ऐसी पहलों के तौर पर बताया गया है, जिनका प्रभाव बाद में राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

SWAGAT से क्या बदला?

SWAGAT में तकनीक के जरिए शिकायतों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी का जो मॉडल अपनाया गया, उसी सोच का विस्तार आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दिया। PRAGATI के जरिए केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उनके सामने आ रही अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

‘गुजरात मॉडल’ बना राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा

धीरे-धीरे गुजरात मॉडल की पहचान औद्योगीकरण, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ गई। 2013 में जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने, तब गुजरात मॉडल उनके राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद विकास की यह कहानी और व्यापक हो गई।

विकास के साथ कल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने विकास को सिर्फ उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रखा। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर दिया।

सरकार के 25 साल के प्रस्ताव के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। 4 करोड़ से ज्यादा घर उपलब्ध कराए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं पीएम-किसान के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। इस तरह विकास का पैमाना भी बदल गया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रहा कि कितने निवेश आए या कितने उद्योग लगे। बल्कि यह भी देखा जाने लगा कि कितने परिवारों को बैंक खाता, घर, शौचालय, गैस, नल का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं।

टेक्नोलॉजी बनी सरकार और जनता के बीच कड़ी

पीएम मोदी की विकास सोच में गुजरात से लेकर केंद्र तक एक चीज लगातार दिखाई देती है और वह है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल…। SWAGAT की सोच आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दी। इसके बाद आधार आधारित सेवाओं, डिजिटल भुगतान और UPI ने तकनीक को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, 2014 से अब तक PRAGATI के जरिए 377 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा चुकी है। पहचाने गए करीब 94 फीसदी मुद्दों का समाधान किया गया है। सरकार का कहना है कि PRAGATI सिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है।

‘मेक इन इंडिया’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक

2020 में कोरोना महामारी के बाद विकास की भाषा में एक और बड़ा बदलाव आया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में आई मुश्किलों ने घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और प्रमुख बना दिया। सरकार अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश करती है।

‘विकसित भारत @2047’

पीएम मोदी की विकास यात्रा का मौजूदा सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ है। इसका उद्देश्य 2047 तक यानी आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश, आत्मनिर्भरता और नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक बड़े विजन के साथ जोड़ा जा रहा है।

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आयोग और भाजपा पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान संसद मार्ग पर रोके जाने के बाद चुनाव आयोग के साथ साथ केंद्र सरकार और भाजपा पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करने में भाजपा की मदद की है। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग और आरएसएस ने देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। राहुल कई घंटे तक धरने पर भी बैठे रहे।

राहुल ने कहा, ‘तीन सौ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आए थे। हम चाहते थे ज्ञानेश कुमार और उनके दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। पुलिस ने हमें रोका। चुनाव आयोग से 50 गज दूर बैठाकर रखा है हमें जाने नहीं दे रहे हैं। तीन सौ सांसद ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। अगर जनप्रतिनिधियों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र का क्या मतलब है’।

एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘मैं लोकतंत्र बचाने यहां खड़ा हूं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। देश के युवा ये बात जानते हैं’। उन्होंने आगे कहा, ‘चुनाव को मोदी, शाह ने हाइजैक किया है और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है। यहां पुलिस वाले भी यही कर रहे हैं। इनमें से कोई भी बचकर नहीं जाएगा। जो इन्होंने देश के साथ किया है, वह देशद्रोह है’।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीन रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। खड़गे ने कहा कि जिस तरह से सत्ता हासिल की गई, वह उचित नहीं था और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश में नौ राज्यों की विधानसभाएं भंग की जा सकती हैं, तो यहां की अवैध व्यवस्था भी खत्म होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।

विपक्ष के इस प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए। यह लोकतंत्र बचाने की बात है। पुलिस को बच्चों के साथ और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए’।

चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री मान के कैंप कार्यालय पर सीबीआई ने मारा छापा

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी के परिसरों सहित कई स्थानों पर तलाशी ली।

यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के एक दिन बाद हुई। सूत्रों के अनुसार सीबीआई की कार्रवाई सेक्टर-दो स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय, मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन के संगरूर जिले के घराघों गांव स्थित आवास तथा मोहाली के फेज-11 में उनके एक करीबी रिश्तेदार के परिसर में की गयी। तलाशी के दौरान सीआरपीएफ के जवान भी तैनात रहे।

मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्रों में लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। इनमें सरकारी तबादलों और नियुक्तियों में कथित लेन-देन, अनुकूल नीतिगत फैसलों और निविदाओं से जुड़े कथित मामलों तथा सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच और हथियार लाइसेंस से संबंधित आरोप शामिल हैं। उच्च न्यायालय ने पांच अक्टूबर को सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने तथा दो महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। इस बीच पंजाब सरकार ने उच्च न्यायलय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीबीआई कार्रवाई को राजनीतिक बताया और आरोप लगाया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर उनकी तथा पंजाब सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रही है।

आप नेताओं सर्वश्री अरविंद केजरीवाल, हरभजन सिंह ईटीओ और हरदीप सिंह मुंडियां ने भी कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया। आम आदमी पार्टी के संयोजक श्री केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि चुनाव से दो महीने पहले पंजाब के मुख्यमंत्री के कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी भाजपा की हताशा का नतीजा है। 

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केंद्र में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से उसने हमेशा पंजाबियों पर दबाव बनाने की कोशिश की है, चाहे वह किसान आंदोलन का मुद्दा हो, पंजाब के पानी का मामला हो या पंजाब विश्वविद्यालय का मुद्दा। अब वह पंजाब के निर्वाचित मुख्यमंत्री पर भी दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में चुनाव लड़कर जीत नहीं सकती, इसलिए वह ईडी-सीबीआई के जरिए चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन पंजाबियों ने अपना मन बना लिया है और आगामी चुनाव में वे सीबीआई की इस छापेमारी का जवाब श्री मान को 100 से अधिक सीटों पर जिताकर और उन्हें फिर मुख्यमंत्री बनाकर देंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भाजपा ने पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “मेरे कैंप कार्यालय में सीबीआई की छापेमारी की गई है। अब पंजाब में ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग किया जाएगा, ताकि पंजाब सरकार और मुझे बदनाम किया जा सके। लोगों से मिल रहे प्यार को देखकर भाजपा घबराई हुई है।” कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने सोशल मीडिया एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “भाजपा ने पंजाब में लोगों के बीच जाने के बजाय केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के साथ चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। श्री मान के कैंप कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी इसका प्रमाण है।

मान सरकार को बदनाम करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पंजाब के लोग सच्चाई से वाकिफ हैं। चाहे कितना भी दबाव बनाया जाए, लोगों का भरोसा नहीं तोड़ा जा सकता।” कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा, “पंजाब में चुनाव से पहले ही भाजपा की घबराहट साफ दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी कथित राजनीतिक बदले की ओर इशारा करती है। अब ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का कथित दुरुपयोग करके मान सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन पंजाब के लोग सच्चाई और राजनीतिक चालों में अंतर करना जानते हैं। लोगों का समर्थन देखकर भाजपा घबराई हुई है।

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Navratri 2026: ‘भगवान ने बनाया, हम उनका रूप गढ़ते हैं…’; नवरात्रि से पहले मूर्तिकारों की दुनिया, 1500 रुपये रोज कमाई और बढ़ती लागत की पूरी कहानी

Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि शुरू होने से पहले नोएडा के सेक्टर-21 मुख्य मार्ग पर मां दुर्गा और शेरावाली माता की मूर्तियां तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। सड़क के किनारे कई जगह झुग्गी झोपड़ी में कारीगर दिन-रात मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यहां धान की फसल से निकलने वाले अपशिष्ट यानी पराली, मिट्टी और बांस की मदद से मूर्तियों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद मिट्टी लगाकर शरीर और चेहरे का आकार दिया जाता है। फिर रंग, कपड़े और श्रृंगार से मूर्ति को अंतिम रूप दिया जाता है। मूर्तिकार विश्वजीत पिछले 12 साल से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह हुनर अपने क्षेत्र से सीखने के बाद कोलकाता जाकर भी सीखा और अब खुद मूर्तियां तैयार करते हैं।

किसी मूर्ति के चेहरा का रूप देने में है सबसे बड़ी कला

एक मूर्ति को तैयार करने में करीब एक सप्ताह का समय लग जाता है। इसमें सबसे पहले ढांचा और फ्रेम तैयार किया जाता है। फिर घास बांधकर उसके ऊपर मिट्टी लगाई जाती है। इसके बाद चेहरे का काम, रंग-रोगन और अंतिम सजावट की जाती है। विश्वजीत ने MoneyControl हिंदी टीम को बताते हुए कहा कि मूर्ति का चेहरा तैयार करने के लिए सांचे का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अगर चेहरा उम्मीद के मुताबिक नहीं बनता तो उसे दोबारा तोड़कर तैयार करना पड़ता है। उनका कहना है कि मूर्ति को बेहतर रूप देने के लिए काफी सोच-समझकर काम करना पड़ता है। अलग-अलग कारखानों में मूर्तियों को अलग शैली और बेहतर फिनिश देने की कोशिश की जाती है।

1500 रूपये तक हर कमा लेते हैं मूर्तिकार

मूर्तिकारों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ी है। विश्वजीत ने बताया कि जिस घास की कीमत पहले करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह अब करीब 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। मिट्टी की कीमत भी बढ़ी है। पहले करीब 1000 रुपये में 15 बोरी मिट्टी मिल जाती थी। जबकि अब इसके लिए 2000 से 2500 रुपये देने पड़ते है। मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाला रंग, कपड़ा और श्रृंगार का सामान पश्चिम बंगाल से मंगाया जाता है। महंगे कच्चे माल के बीच कारीगरों की कमाई भी मौसम पर निर्भर है। विश्वजीत ने बताया कि उन्हें कारीगर के तौर पर करीब 1000 से 1500 रुपये प्रतिदिन मिल जाते हैं। लेकिन मूर्ति बनाने का काम मुख्य रूप से सीजन पर निर्भर रहता है।

शंकर अपने परिवार के साथ 20 साल से बना रहे हैं मूर्तियां

वहीं, शंकर पिछले करीब 20 साल से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। वह मूल रूप से राजस्थान जोधपुर जिले के रहने वाले हैं। वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद मूर्तियां तैयार करते हैं। उनके मुताबिक 5 फीट की एक मूर्ति को बनाने में करीब 10 से 15 दिन तक लग सकते हैं, अगर पूरा ध्यान एक ही मूर्ति पर दिया जाए।

शंकर ने बताया कि नवरात्रि के लिए मूर्तियों की मांग काफी बढ़ गई है। ग्राहक नोएडा के अलग-अलग इलाकों के साथ दूर-दराज से भी यहां पहुंचते हैं। उनके मुताबिक इस सीजन में तैयार की गई ज्यादातर मूर्तियां बिक जाती हैं। हालांकि, बढ़ती लागत के बावजूद आमदनी इतनी नहीं है कि बड़ी बचत हो सके। उनका कहना है कि मूर्ति बनाने से बस बच्चों का पालन-पोषण और परिवार का गुजारा चल जाता है। कच्चे माल और मेहनत की लागत काफी बढ़ गई है। लेकिन उसके हिसाब से भुगतान नहीं बढ़ा है।

सौभाग्य के साथ जुड़ी है परिवारों की रोजी रोटी

नवरात्रि से पहले अब इन मूर्तिकारों के पास लगातार काम का दबाव है। कुछ कारीगरों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है, क्योंकि पहले से मिले ऑर्डर को समय पर पूरा करना जरूरी है। सेक्टर-21 मुख्य मार्ग पर एक तरफ बांस और पराली से मूर्तियों के शुरुआती ढांचे तैयार हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई मूर्तियां पूरी तरह बनकर बिक्री के लिए तैयार खड़ी हैं। माता शेरावाली की इन मूर्तियों को नवरात्रि शुरू होने के साथ लोग अपने घरों और पूजा स्थलों के लिए खरीदकर ले जाएंगे।

इन मूर्तियों के पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि कारीगरों की कई दिनों की मेहनत और पूरे परिवार की रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है। विश्वजीत के लिए भगवान की मूर्ति बनाना सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सौभाग्य की बात है। उनका कहना है कि जिस भगवान ने इंसान को बनाया, उनका रूप बनाने का अवसर मिलना अपने आप में बहुत अच्छी और सौभाग्य वाली बात है।

(नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

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पानी की भारी किल्लत, पिछले साल के मुकाबले आधे रह गए जलाशय, क्या प्यासा रहेगा देश?

देश के कई राज्यों में कम बारिश का असर अब जलाशयों पर दिख रहा है। 1 अक्टूबर तक देश के प्रमुख जलाशयों में 71.84% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 90.31% था, जबकि सामान्य स्तर 81.79% है। यानी इस बार जलाशयों में पानी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है।

पानी की कमी का असर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और तमिलनाडु में ज्यादा दिख रहा है। कई इलाकों में खेती के लिए पानी कम पड़ रहा है और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।

आंध्र प्रदेश में तेजी से घटा पानी का लेवल

आंध्र प्रदेश में जलाशयों का पानी काफी कम हो गया है। 1 अक्टूबर तक यहां सिर्फ 35.14% पानी बचा था। पिछले साल इसी समय यह 88.60% था, जबकि सामान्य स्तर 71.85% है। कम बारिश और फसल खराब होने से राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से में सूखा घोषित किया गया है।

कर्नाटक में सूखे जैसे हालात

1 अक्टूबर तक कर्नाटक के जलाशयों में 59.98% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 89.16% और सामान्य स्तर 80.42% था।

पानी का स्तर कम होने से राज्य में सिंचाई और खेती को लेकर चिंता बढ़ रही है। सूखे जैसे हालात का असर किसानों पर भी दिखाई दे रहा है।

महाराष्ट्र में मराठवाड़ा और विदर्भ की हालत खराब

5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र के जलाशयों में 74.29% पानी था। पिछले साल इसी तारीख को यह 89.22% था। मराठवाड़ा और विदर्भ में कई जलाशयों की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है।

• छत्रपति संभाजीनगर में पानी का भंडार 43.55% था, जबकि पिछले साल 82.96% था।

• अमरावती में इस बार 62.92% पानी रहा, जो पिछले साल 85.87% था।

• नागपुर में पानी का स्तर 72.02% रहा, जबकि पिछले साल यह 89.08% था।

कई इलाकों में फसलें खराब हुई हैं। अगर अगले फसल सीजन तक पानी की स्थिति नहीं सुधरी, तो किसानों और गांवों में रहने वाले परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

राजस्थान में कई इलाकों में सूखे का असर

5 अक्टूबर तक राजस्थान के जलाशयों में 61.93% पानी था। जोधपुर में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां सिर्फ 15.72% पानी बचा है, जबकि पिछले साल इसी समय 80.25% पानी था।

पाली, जालौर और जैसलमेर में सूखे की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। जोधपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बालोतरा, राजसमंद, उदयपुर और सिरोही भी प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।

कम बारिश का असर बाजरा, मोठ, सोयाबीन, मूंग और दूसरी खरीफ फसलों पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने कुछ इलाकों में सूखे से राहत के लिए कदम उठाए हैं।

तेलंगाना में सूखा घोषित करने की मांग

तेलंगाना के जलाशयों में भी पानी काफी कम है। 1 अक्टूबर तक यहां 40.75% पानी था, जबकि पिछले साल इसी समय 86.10% था। सामान्य स्तर 78.95% है।

कम बारिश और फसल के नुकसान को देखते हुए विपक्षी दल सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पानी का स्तर कम होने से आने वाले समय में खेती और पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

तमिलनाडु में भी बड़ा अंतर

तमिलनाडु में 1 अक्टूबर तक जलाशयों में 37.27% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 91.96% था। राज्य का सामान्य स्तर 66% है।

यानी इस बार पानी का भंडार पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे है। इससे सिंचाई और आने वाले फसल सीजन को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

केरल की स्थिति सामान्य से नीचे

केरल में जलाशयों का स्टोरेज 59.88% था। पिछले साल यह 76.06% और सामान्य स्तर 69.75% था। यहां भी पानी का भंडार पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से कम है।

कम पानी से बढ़ सकती है ये परेशानियां

• जलाशयों में पानी कम होने का सीधा असर सिंचाई और पीने के पानी पर पड़ सकता है। इसके साथ ही पनबिजली उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है।

• सूखे की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों की फसल और कमाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में काम के मौके घटने से लोगों के दूसरे जगहों पर जाने का खतरा भी बढ़ सकता है।

• महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने यह भी चेतावनी दी है कि सूखे के दौरान बाल विवाह के मामले बढ़ सकते हैं।

आने वाले कुछ हफ्ते काफी अहम हैं। अच्छी बारिश हुई तो जलाशयों में पानी बढ़ सकता है और खेती की परेशानी कुछ कम हो सकती है। लेकिन बारिश कम हुई तो पानी की कमी और फसल के नुकसान से किसानों और ग्रामीण परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

बड़ी खबर, आंध्र प्रदेश के 21 जिलों में सूखा घोषित! जानिए कितने मंडलों पर पड़ा असर

आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी और फसल खराब होने के बाद सरकार ने राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार के मुताबिक, 21 जिलों के 388 मंडलों में सूखे की स्थिति है। इससे किसानों के सामने फसल और पानी दोनों का संकट खड़ा हो गया है।

राज्य में कुल 688 मंडल हैं। इनमें से 388 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। यानी करीब 56 फीसदी मंडल अब सूखे से प्रभावित माने जा रहे हैं।

सरकार ने सूखे की स्थिति को दो श्रेणियों में बांटा है:

1. 283 मंडलों को गंभीर सूखे की श्रेणी में रखा गया है।

2. 105 मंडलों में मध्यम सूखे की स्थिति बताई गई है।

रायलसीमा और दक्षिण आंध्र में ज्यादा असर

रायलसीमा और दक्षिण आंध्र के इलाके सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। बारिश कम होने से कई इलाकों में खेती पर सीधा असर पड़ा है।

इन फसलों का हुआ नुकसान

• धान

• मक्का

• नारियल

• मूंगफली

• अरहर

• कपास

इन फसलों के नुकसान के साथ किसानों को पानी की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।

विपक्ष ने मांगा इन सवालों का जवाब

सरकार की ओर से सूखे की घोषणा के बाद विपक्ष ने इसके आकलन पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि कुछ ऐसे मंडलों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जाना चाहिए, जहां हालात गंभीर हैं।

विपक्ष ने खास तौर पर नेल्लोर के कुछ इलाकों का जिक्र करते हुए कहा है कि वहां सूखे का असर होने के बावजूद कई मंडलों को सूची में शामिल नहीं किया गया।

कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाद आंध्र में भी सूखा

आंध्र प्रदेश में यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक और महाराष्ट्र भी बारिश की कमी और फसल के नुकसान के चलते सूखे की घोषणा कर चुके हैं। इससे कई राज्यों में किसानों और खेती पर कम बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है।

अमेरिका ने ब्रिटिश एयरबेस से B-1 बॉम्बर हटाए:आतंकी साजिश के शक के बाद सुरक्षा बढ़ाई थी, आरोपियों की जमानत पर ट्रम्प नाराज थे

अमेरिका ने ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने सभी B-1 बॉम्बर विमान वापस बुला लिए हैं। यहां करीब 12 B-1 बॉम्बर तैनात थे। पेंटागन ने रविवार को इसकी पुष्टि की। हाल ही में इस एयरबेस की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। आतंकी साजिश के शक में यहां से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाराजगी जताई थी। एयरबेस के पास 3 वैन मिली थीं पिछले रविवार को इंग्लैंड में एयरबेस के पास व्हेलफोर्ड गांव में रहने वाले एक किसान ने सड़क पर तीन वैन खड़ी देखीं थी। उसके मुताबिक, कई नकाबपोश लोग वहां मौजूद थे और बाद में मौके से फरार हो गए। एक महिला ने पुलिस को 3 संदिग्ध वैन के बारे में में जानकारी दी थी। पुलिस को सूचना मिलने के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई और एयरबेस के आसपास 85 घरों को खाली कराया गया। तस्वीरों में इन वैन के अंदर बैरल जैसी चीजें दिखाई दीं थीं। इनमें से एक वैन पर एक फर्जी लोगो और फोन नंबर लगा था, जिससे वह किसी असली डीजल सप्लाई कंपनी की गाड़ी जैसी लग रही थी। जांच में वैन से कोई विस्फोटक नहीं मिला। नेशनल काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग के प्रमुख लॉरेंस टेलर ने बताया था कि वहां से कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद हुआ था। पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया था इस घटना के बाद लंदन के रहने वाले 23 से 25 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया। जांच के दौरान 1 अक्टूबर को लंदन से एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई संदिग्ध घटना की जांच के सिलसिले में की गई थी। बाद में उसे भी जमानत पर रिहा कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोपियों को जमानत मिलने पर कहा था कि वह ऐसा नहीं करते। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मामले में किसी विदेशी ताकत (ईरान) के शामिल होने की आशंका जताई थी। ईरान ने बाद में इन आरोपों को खारिज कर दिया था। ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल हो रहा था फेयरफोर्ड ब्रिटेन ने मार्च में अमेरिका को RAF फेयरफोर्ड का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ खास रक्षात्मक अभियानों के लिए करने की अनुमति दी थी। इसके बाद से अमेरिकी बॉम्बर और दूसरे सैन्य विमान यहां से उड़ान भरते और लौटते देखे गए हैं। यह एयरबेस 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खोला गया था। इस एयरबेस का रनवे करीब 9,990 फीट यानी 3 किलोमीटर लंबा है। यूरोप के उन चुनिंदा एयरफील्ड में इसकी गिनती होती है, जहां भारी बॉम्बर विमानों को उतारा और उड़ाया जा सकता है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को निकाला: आदेश मिलने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके रहे अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर भेज दिया है। दोनों संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे, लेकिन महासभा खत्म होने के बाद भी वहीं रुके रहे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

लौकी बेच महीने का 15 लाख कमा रहा ये किसान, देश से लेकर विदेशों में भी मांग, जानें कैसे करता है इसकी खेती

भारत में खेती करोड़ों लोगों की आजीविका का अहम साधन माना जाता है। वहीं बेंगलुरु के एक किसान ने अपनी खेती से एक अलग पहचान बनाई है। बेंगलुरु के किसान करिगौड़ा अपने खेत में लौकी की खेती करते हैं। वहीं उनके लौकी की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है। उसकी उगाई हुई लौकी अब कतर भेजी जा रही है। इस छोटी लौकी की खेती से लाखों रुपये कमाते हैं। लौकी का बीज बोने के लगभग 70 दिन बाद फसल तैयार होती है। जानें कैसे करते हैं वो इसकी खेती और इससे उन्हें कितनी कमाई होती है

कतर भेजी जाती है लौकी

30स्टेड्स से बातचीत में किसान करिगौड़ा ने बताया कि, वह करीब 500 ग्राम वजन की छोटी लौकी की खेती करते हैं। आमतौर पर लौकी को खेत में ज्यादा समय तक बढ़ने दिया जाता है, लेकिन करिगौड़ा अपनी फसल को जल्दी तोड़ लेते हैं। किसान करिगौड़ा का ये तरीका उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। उनकी ये छोटी लौकियां खास तौर पर विदेशी बाजार में पसंद की जाती हैं और ब्रोकर के जरिए इन्हें कतर भेजा जाता है। करिगौड़ा ने बताया कि ब्रोकर खेत से लौकी लेकर उसे कतर भेजते हैं।

महीने में होती हैं 14-15 लाख की कमाई

बेंगलुरु शहरी जिले के करलापुरा पाल्या में करीब 3.5 एकड़ जमीन पर खेती करते हुए वह सितंबर से दिसंबर के दौरान रोजाना लगभग एक टन छोटी लौकी खेत से निकाल लेते हैं। खास आकार की लौकी की मांग होने की वजह से उनकी फसल को अच्छी बिक्री मिल रही है। किसान के मुताबिक, रोजाना करीब एक टन छोटी लौकी की फसल तैयार होती है। इसे लगभग 50 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाता है। इस हिसाब से एक दिन की फसल की कीमत करीब 50 हजार रुपये बैठती है, जबकि महीने में कमाई लगभग 14 से 15 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

हो सकती है 45 लाख की कमाई

करीब 90 दिनों तक चलने वाले फसल के सीजन में किसान को छोटी लौकी बेचकर लगभग 45 लाख रुपये की कुल बिक्री हो सकती है। लेकिन, ये रकम सीधे तौर पर मुनाफा नहीं है। इसमें खेती पर होने वाला खर्च, मजदूरों की लागत, बीज और अन्य सामान, पानी, पैकिंग और दूसरे जरूरी खर्च शामिल हैं, जिन्हें घटाने के बाद ही वास्तविक मुनाफे का पता चलेगा। करिगौड़ा का परिवार कई पीढ़ियों से खेती करता आ रहा है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भी खेती को अपना काम चुना। पहले परिवार मक्का, टमाटर और बैंगन उगाता था, लेकिन इन फसलों का सही दाम मिलना अक्सर मुश्किल होता था।

कौन से बीज का करते हैं इस्तेमाल

करिगौड़ा ने बताया कि ‘ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और खेती में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों जैसी तकनीकों ने खेती के तरीके को काफी बदल दिया है। उन्हें लगा कि अगर अलग-अलग तरह की सब्जियों की खेती करके नए प्रयोग किए जाएं, तो कमाई के बेहतर रास्ते खोजे जा सकते हैं।’ नई फसलें उगाने के बारे में सोचते हुए करिगौड़ा ने अपने परिवार की पारंपरिक खेती से हटकर लौकी की खेती करने का फैसला किया। उन्हें पता चला कि विदेशों में छोटी लौकी की अच्छी मांग है, इसलिए उन्होंने इसी फसल को चुन लिया। करिगौड़ा ने बताया कि वह खेती के लिए स्वीकार 045 एफ1 किस्म के बीज का इस्तेमाल करते हैं।

कितने दिन बाद तैयार होती है फसल

करिगौड़ा के खेत में लौकी की खेती का काम जून-जुलाई के आसपास शुरू हो जाता है। बीज बोने के करीब 70 दिन बाद पहली फसल तैयार हो जाती है और सितंबर के आसपास इसकी तुड़ाई शुरू होती है। इसके बाद सितंबर से दिसंबर तक लगातार लौकी की कटाई का काम चलता रहता है। छोटी लौकी की खेती से करिगौड़ा को अच्छी कमाई हो रही है, लेकिन वह सिर्फ इसी फसल पर निर्भर नहीं हैं। वह अपने खेत में बैंगन और टमाटर भी उगाते हैं। उनका बैंगन तमिलनाडु के होसुर बाजार में करीब 45 रुपये प्रति किलो बिकता है। अलग-अलग फसलें उगाने से उन्हें पूरे साल कमाई का जरिया मिलता रहता है और किसी एक फसल या बाजार पर निर्भरता भी कम होती है।

राहुल ने शुरू किया सत्याग्रह अभियान

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की तर्ज पर सत्याग्रह अभियान शुरू किया है। इस अभियान के जरिए राहुल देश भर में अन्याय और अपने हक के लिए लड़ रहे लोगों की आवाज को एक साथ जोड़ेंगे। गौरतलब है कि इस समय पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से लेकर एसआईआर और महंगाई के खिलाफ लोगों में गुस्सा है, जो बार बार प्रकट हो रहा है। राहुल ऐसे हर मुद्दे से जुड़े लोगों को एक पहल से जोड़ेंगे।

राहुल गांधी ने कहा है, ‘जो भी लोग अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, वे अपनी कहानी भेजें। मैं नेता विपक्ष के रूप में संसद से लेकर सड़क तक आपके साथ खड़ा हूं’। गौरतलब है कि आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी ने भी यही तरीका अपनाया था। उन्होंने लोगों से अपनी मुश्किलें लिख कर भेजने को कहा था। तब उनकी अपील पर हजारों लोगों ने अपनी शिकायतें उनको लिख कर भेजी थीं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘देश भर में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं। जेन जी, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएं। हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है। सत्याग्रह इन्हीं आवाजों को एक साथ लाने की पहल है’। उन्होंने लिखा, ‘बापू ने यही सिखाया था, सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना। अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं, अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे’।

गौरतलब है कि खुद कांग्रेस पार्टी भी इस समय मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। विपक्षी पार्टियों की साझा बैठक में आंदोलन की योजना बनी है। दूसरी पार्टियों ने भी देश के अलग अलग हिस्सों में आंदोलन किया है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों के सांसद और नेता छह अक्टूबर को चुनाव आयोग का घेराव करेंगे। विपक्ष की बैठक में दो से आठ अक्टूबर तक लगातार प्रदर्शन करने की योजना बनी है।

कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

Learn about inspiring episodes and invaluable teachings of Guru Nanak Dev

Guru Nanak Dev Ji Punyatithi 2026: प्रति वर्ष अनुसार सिख धर्म के संस्थापक तथा सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की पुण्यतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 सितंबर को थी, लेकिन साल 2026 में तिथिनुसार उनकी पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण दशमी तिथि के दिन भी मनाई जा रही है, जो कि 5 अक्‍टूबर, सोमवार को आ रही है। गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। आइए, जानते हैं गुरु नानक देव जी के प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार के बारे में विस्‍तार से… 

 

गुरु नानक देव के प्रमुख उपदेश और सिद्धांत

गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। जब समाज में पाखंड, अंधविश्वास व कई असामाजिक कुरीतियां सिर उठाए खड़ी थीं, हर तरफ असमानता, छुआछूत व अराजकता का वातावरण जोरों पर था, ऐसे नाजुक समय में गुरु नानक देव ने आध्यात्मिक चेतना जाग्रत कर समाज को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। 

 

गुरु नानक देव ने की सिख धर्म की स्थापना

गुरु नानक देव ने जहां सिख धर्म की स्थापना की, वही उदारवादी दृष्टिकोण से सभी धर्मों की अच्छाइयों को भी समाहित किया। उन्होंने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, पुरानी रुढ़ियों और पाखंडों को दूर करते हुए प्रेम, सेवा, परिश्रम, परोपकार और भाईचारे की दृढ़ नींव पर सिख धर्म की स्थापना की। उनका मुख्य उपदेश था, ईश्वर एक है, हिन्दू-मुसलमान सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं, ईश्वर के लिए सभी समान हैं और उसी ने सबको बनाया है।

 

गुरु नानक देव के अनमोल विचार

गुरु नानक देव जी कहते थे कि हमें हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत से अपना धन कमाकर जीवन जीना चाहिए। हमेशा तनाव मुक्त रहकर हमें अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए। धन को कभी भी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए, उसका स्थान हमेशा जेब में ही होना चाहिए। तभी आप लालच और अहंकार से दूर रह पाएंगे। 

 

गुरु नानक देव कहते हैं हर मनुष्य को सबसे पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए। हर इंसान को हमेशा अच्छे और विनम्र सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए, क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है, अत: मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए।

 

गुरु नानक देव ने की 4 लंबी यात्राएं

गुरु नानक देव जी ने सत्य और मानवता के प्रचार के लिए लगभग 24 वर्षों तक चार दिशाओं में हजारों किलोमीटर की पैदल यात्राएं कीं, जिन्हें उदासी कहा जाता है। इन यात्राओं में उनके साथ उनके मुस्लिम साथी और संगीतकार भाई मरदाना (जो रबाब बजाते थे) भी रहते थे।

 

अंतिम समय और करतारपुर साहिब

अपनी यात्राओं के बाद गुरु नानक देव जी ने रावी नदी के तट पर करतारपुर (वर्तमान पाकिस्तान) नगर बसाया और एक किसान के रूप में जीवन व्यतीत किया।