भारत में सच्चे संतों की कमी नहीं!

आज देश में सनातन धर्म के नाम पर शोर मचाने वाले ऐसे हज़ारों धर्मध्वजी, आत्मघोषित ‘संत’ गुरु, कथावाचक आदि सोशल मीडिया और समाज में छा गए हैं, जिनका आचरण दूर-दूर तक संतों जैसा नहीं है। रंगमंच के कलाकारों के जैसे रंगबिरंगे चमकीले-भड़कीले डिज़ाइनर वस्त्र पहन कर सरकारी सुरक्षाकर्मियों के साये में विशाल पंडालों में श्रोताओं के सम्मुख स्वयं को किसी राजाधिराज की तरह प्रस्तुत करना आम हो गया है। इसलिए कहावत है, ‘पानी पीजिए छान कर, गुरु कीजिए जान कर।’

बाबा नीब करौरी के जीवन के पूर्वार्ध पर बनी फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ ने देश-विदेश के सनातनधर्मियों के हृदय को स्पर्श किया है। पिछले हफ़्ते जब थिएटर में मैं ये फ़िल्म देख रहा था तो अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाया और आँखे कई बार छलछला गईं। कारण ये कि नीब करौरी बाबा का तो नहीं पर उन जैसे कुछ संतों का सानिध्य पिछले 28 वर्षों में मुझे निरंतर प्राप्त हुआ है। इन संतों की सहजता, दरिद्र नारायण के प्रति करुणा और अमीर-ग़रीब के बीच कोई फ़र्क़ न करने की प्रवृत्ति ने मुझे बहुत प्रभावित किया।

1998 में जब बरसाना के विरक्त संत श्री रमेश बाबा से मिला तो वे मानगढ़ की पहाड़ी पर एक खण्डहर-नुमा कमरे में रहते थे। जिसमें जून की गर्म दोपहरी में आती गर्म हवा के थपेड़ों को रोकने के लिए खिड़कियों पर फटी बोरियों को भिगो कर टांगा हुआ था। जब बाबा ने मुझे ब्रज की सांस्कृतिक धरोहरों को सजाने संवारने का आदेश दिया तो उन्होंने यह भी कहा कि, “भगवान दीनबंधु दीनानाथ हैं, धनीबंधु वीआईपीनाथ नहीं। पहले फ़क़ीर बनो, तब ब्रज की सेवा करना।”

बाबा के सानिध्य में 2002-05 के बीच मैंने भी ऐसा जीवन जीने का प्रयास किया। बोरी बिछा कर सोना, भिक्षा माँग कर रोटी खाना और बेहद साधारण कपड़े पहनना। पर इतना ही काफ़ी नहीं था। अपने स्वभाव में दीनता लाने का भी अभ्यास करना था। इस तरह बाबा ने अनेक प्रकार से ब्रज सेवा के लिए प्रशिक्षित किया। उनके प्रताप से जो कुछ ब्रज में धरोहरों के जीर्णोद्धार के कार्य हुए वो जग-जाहिर हैं।

इसी तरह बरसाना की पीली पोखर पर रहने वाले विरक्त संत विनोद बाबा भी हैं। जिनके तप, सादगी, करुणा और हृदय की विशालता को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। मेरी मित्र मीरा बोरवाँकर जो महाराष्ट्र की चर्चित पुलिस अधिकारी रही और जिसके जीवन पर बॉलीवुड की फ़िल्म ‘मर्दानी’ बनी, वो श्री विनोद बाबा के दर्शन को तैयार नहीं थी। पर मैं उसे ले गया। बाबा को देखते ही वो ऐसी स्तब्ध हुई कि वहाँ उनके सामने घंटों बैठने की इच्छा व्यक्त करने लगी। ‘हनुमान अंश’ के अनेक प्रसंग ऐसे हैं जैसे मैंने उपरोक्त दोनों संतों के जीवन में प्रत्यक्ष अनुभव किए हैं। ‘संत हृदय नवनीत समाना’। जिस तरह बादल रात में चुपचाप किसान के खेत पर बिना बताए वर्षा करके चले जाते हैं, वैसे ही संत भी हमारे जीवन में अपनी कृपा की वृष्टि अनायास ही करते रहते हैं। गोवर्धन के सियाराम बाबा, वृंदावन के कृपाविलास वाले महाराज, पिछले कुछ वर्षों में प्रेमानंद जी महाराज और केरल की संत माता अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ के सानिध्य में मुझे ऐसे ही अनेक अनुभव हुए हैं। इन सभी संतों ने मुझ पर अपना वात्सल्य खूब उड़ेला है। इसीलिए ‘हनुमान अंश’ फ़िल्म देखते समय मुझे बार-बार ऐसे प्रसंग याद आ रहे थे और आँसूँ थम नहीं रहे थे।

सच्चे संत हमारी पात्रता को नहीं देखते, वे तो अहैतुकि कृपा करते हैं। नीब करौरी बाबा का जीवन भी ऐसा ही था।  उन्होंने आडंबर और वैभव रहित सादगी भरा जीवन आम जनमानस के लिए समर्पित किया था। उनके क्रियाकलाप ये सिद्ध करने के लिए काफ़ी हैं कि संत को आपके पद, धन, रुतबे और हैसियत से कुछ लेना-देना नहीं होता। दुर्भाग्य की बात यह है कि आज देश में सनातन धर्म के नाम पर शोर मचाने वाले ऐसे हज़ारों धर्मध्वजी, आत्मघोषित ‘संत’ गुरु, कथावाचक आदि सोशल मीडिया और समाज में छा गए हैं, जिनका आचरण दूर-दूर तक संतों जैसा नहीं है।

रंगमंच के कलाकारों के जैसे रंगबिरंगे चमकीले-भड़कीले डिज़ाइनर वस्त्र पहन कर सरकारी सुरक्षाकर्मियों के साये में विशाल पंडालों में श्रोताओं के सम्मुख स्वयं को किसी राजाधिराज की तरह प्रस्तुत करना आम हो गया है। मोह-माया त्यागने का उपदेश देना और स्वयं वैभव युक्त जीवन जीना, सत्ताधीशों के आगे-पीछे मंडराना या उनके सानिध्य में गर्वित होना, अपने ही संसाधनों से मीडिया में स्वयं को ‘परम श्रद्धेय गुरुदेव’ जैसे अलंकारों से प्रचारित करवाना और खुलेआम धर्म का व्यापार करना इनके लिए आम बात है। आम जनता अपने जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए धर्म की शरण लेती है। पर उन्हें मिलता है ‘ऊँची दुकान और फीका पकवान’।

पिछले तीस वर्षों में मैंने इस कॉलम में कई बार लिखा है कि जिसके सम्मुख बैठ कर आपकी भौतिक कामनाएँ समाप्त हो जाएँ और आध्यात्मिक जिज्ञासा का वेग प्रबल हो जाए, वही सच्चा संत है। बाक़ी तो सब धार्मिक मनोरंजन हैं। हमें भगवान या सच्चे संत से कुछ कह कर माँगना नहीं होता। नीब करौरी बाबा की तरह वे स्वयं ही जान लेते हैं कि हमें क्या चाहिए या हमारा भला किसमें है। भगवान श्री कृष्ण भगवद्गीता के 18वें अध्याय के 61वें श्लोक में कहते हैं कि, ‘ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥’ अर्थात् हे अर्जुन! ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं। तो उनसे कुछ बोल कर मांगने की क्या ज़रूरत है?

देश के कोने-कोने में ऐसे सच्चे संतों की कमी नहीं है जो हमें तत्वज्ञान भी करा सकते हैं और हमारी व्यग्रता को भी शांत कर सकते हैं। ऐसे संतों को हमसे धन या संसाधन पाने की अपेक्षा नहीं होती। उन्हें जबरन शिष्य बनाने की इच्छा भी नहीं होती। ऐसे संत तो हमारे लाख बार नाक रगड़ने के बाद भी हमारी पात्रता को देख कर अपना शिष्य स्वीकार करते हैं। आजकल तो देश में थोक में शिष्य बनाने का व्यापार चल रहा है। ‘जैसा गुरु वैसा चेला, दोनों मिलकर ठेलमठेला’। लगभग 500 वर्ष पूर्व महाप्रभु वल्लभाचार्य जी ब्रज चौरासी कोस यात्रा के दौरान एक जंगल में पड़े विशालकाय अजगर को देख कर ठिठक गए। उस अजगर को हज़ारों चींटियां खा रही थीं। वो दर्द से छटपटा रहा था। महाप्रभु ने वहीं ठहर कर श्रीमद् भगवद् के 108 पाठ करने के निर्णय किया। उनके अचंभित शिष्यों ने इसका कारण पूछा। महाप्रभु ने कहा कि ये अजगर पिछले जन्म में आत्मघोषित गुरु था। इसने हज़ारों लोगों को दीक्षा देकर अपना शिष्य बनाया। पर न तो वो अपना उद्धार कर सका और न ही अपने हज़ारों शिष्यों का। वही शिष्य इस जन्म में ये हज़ारों चींटियाँ बन कर उसका शरीर खा रही हैं। इसलिए कहावत है, ‘पानी पीजिए छान कर, गुरु कीजिए जान कर।’

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: 5 एकड़ के पॉलीहाउस से ₹29 लाख की कमाई! जानिए मेरठ के किसान रवींद्र की कामयाबी की कहानी

इंडिया एक्सपो मार्ट में इस समय उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो चल रहा है। इस ट्रेड शो में मेरठ के किसान किसान रवींद्र कुमार चर्चा में हैं। रवींद्र का खेती और उससे जुड़े नए कारोबारी प्रयोग लोगों को काफी पसंद आ रहा हैं। ट्रेड शो में पॉलीहाउस तकनीक से तैयार की गई ताजी सब्जियां, रंग-बिरंगे फूल और शहद खास तौर पर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इन उत्पादों को देखने और खरीदने में देश-विदेश से आए कारोबारी और दर्शक भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ट्रेड शो में किसानों की आधुनिक खेती और उससे होने वाले कारोबार को भी दिखाया गया है। आइए जानते हैं क्या है रवींद्र की कहानी

बयान के मुताबिक, इंडिया एक्सपो मार्ट में हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के आउटलेट पर मेरठ के किसान और एग्री-एंटरप्रेन्योर अपने अलग-अलग कृषि उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इनमें जरबेरा और गुलाब के फूल, कमल का तना, शिमला मिर्च, बैंगन और शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं।

शिमला मिर्च की करते हैं खेती

मेरठ के सरधना क्षेत्र के खेड़ा गांव के किसान रवींद्र कुमार ने बागवानी विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने करीब पांच एकड़ जमीन में पॉलीहाउस लगाकर खेती शुरू की। रवींद्र कुमार अपने पॉलीहाउस में अलग-अलग रंगों की शिमला मिर्च उगा रहे हैं, जिनका वजन करीब 300 से 400 ग्राम तक होता है। उनकी पीली, हरी और लाल शिमला मिर्च की दिल्ली की आजादपुर मंडी में अच्छी मांग है। रवींद्र कुमार के मुताबिक, इस खेती से उनका सालाना कारोबार 29 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच गया है।

बढ़ गई फूलों की मांग

कुमार इससे पहले भी ट्रेड शो में हिस्सा ले चुके हैं और उनका मुताबिक कि ऐसे आयोजनों से उनके उत्पादों को नए खरीदार मिले और बाजार में उनकी पहचान बढ़ी। इस साल रवींद्र कुमार के जरबेरा और गुलाब के फूलों की मांग बढ़ी है। कई इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां फूल खरीदने के लिए उनसे संपर्क कर रही हैं, वहीं कुछ कंपनियों के साथ कारोबार को लेकर समझौता करने की बातचीत भी चल रही है। कुमार के मुताबिक, सरकारी योजनाओं की मदद से किसानों को खेती के नए तरीके अपनाने और बाजार की जरूरत के हिसाब से फसल तैयार करने का मौका मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल रही है।

शहद भी बना आकर्षण का केंद्र

उत्तर प्रदेश के बागवानी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह ने ट्रेड शो में विभाग के स्टॉल का दौरा कर किसानों के उत्पादों की जानकारी ली और उनका उत्साह बढ़ाया। वहीं, मेरठ की रैंट्रोव नेचुरल कंपनी का शहद भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कंपनी चलाने वाले युवा भाई-बहन राखी अघेरा और भरत अघेरा ने बताया कि पिछले साल उनकी कंपनी को इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम से कुल 46 टन शहद का ऑर्डर मिला था।

महाराष्ट्र सरकार ने 358 तालुकों में 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया

महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को फसल के नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है और भरोसा दिलाया है कि सूखे की स्थिति में सरकार की राहत कोशिशों के केंद्र में किसान ही रहेंगे।

शुक्रवार देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, 32 जिलों में फैले 265 तालुका मे राज्य का 74 प्रतिशत हिस्सा आ गया है।

उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा।

राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016’ (2020 में अद्यतन) और ‘सूखा प्रबंधन संहिता’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ कदम लागू किया है।

‘ट्रिगर-1’ राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी हो और 21 दिन तक लगातार सूखे (बिना बारिश वाला समय) का दौर रहे।

कृषि आयुक्त की एक रिपोर्ट में पाया गया कि जून से बारिश कम होने और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकाओं की संख्या सबसे ज्यादा (74) है; इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है।

छत्रपति संभाजीनगर मंडल में जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड़, परभणी और हिंगोली जिले शामिल हैं, जबकि बुलढाणा, अमरावती, अकोला, वाशिम और यवतमाल जिले अमरावती मंडल के अंतर्गत आते हैं।

नागपुर मंडल में वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली शामिल हैं।

नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिलों में 49 तालुका और पुणे, सोलापुर, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जिलों में 35 तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने फडणवीस के हवाले से कहा, “सूखे की स्थिति में हमारे राहत कार्यों के केंद्र में किसान, खेतिहर मजदूर और अन्य कामगार हैं। उन्हें राहत पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।

सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन शुरू करें और फसल की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए सर्वेक्षण वाले इलाकों की तस्वीरें तथा जीपीएस अवस्थिति के आंकड़े एकत्र करें। ये रिपोर्ट कृषि आयुक्त के जरिए सरकार को सौंपी जानी हैं।

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सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण नियमों को सुगम करना, खेती से जुड़े ऋण की वसूली को टालना और खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में छूट आदि शामिल है।

सरकारी प्रस्ताव में कहा गया कि 7.5 हॉर्सपॉवर तक के खेती पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ़ कर दिए गए थे और नयी घोषित छूट प्रभावित इलाकों में इससे ज़्यादा क्षमता वाले पंपों पर लागू होगी।

इन उपायों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क को माफ करना, ज़्यादा से ज़्यादा काम उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देना, ज़रूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजना और पानी की कमी वाले गांवों में खेती के पंपों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति करना शामिल है।

प्रस्ताव के अनुसार, खेती पर निर्भर किसानों और मज़दूरों के लिए अनाज और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का इंतजाम भी किया जाएगा।

सरकार ने कहा कि जल संरक्षण के काम और लोगों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।

शनिवार को जारी सरकारी आदेश में कहा गया कि सूखा प्रभावित 265 तालुकों में किसानों को फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मदद देने के संबंध में, तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक अलग सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा।

इस बीच, विपक्षी दलों ने सूखा घोषित करने में देरी के लिए राज्य सरकार की आलोचना की और दावा किया कि जमीनी हालात कहीं ज्यादा खराब हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि फडणवीस ने पहले विपक्ष पर सूखे के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उन्होंने इसे आधिकारिक तौर पर ‘ट्रिगर-1’ के तहत घोषित कर दिया है, जबकि जमीनी हालात पहले से ही ‘ट्रिगर-3’ के तहत तय मानकों से भी ज्यादा खराब हैं।

शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को अब राहत उपायों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर प्रभावित किसान को मदद मिले।

सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र का दौरा कर रहे ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, “चाहे इसमें (सूखा घोषित करने में) देरी हुई हो या इसे कब घोषित किया जाना चाहिए था… हम लगातार मांग कर रहे थे कि सूखा पहले घोषित किया जाए। महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक ने इसे घोषित कर दिया।”

उन्होंने कहा, “अब जब इसकी घोषणा हो चुकी है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सूखे से राहत के पूरे पैकेज के तहत दी जाने वाली हर मदद हर किसान को मिले।”

किसान सभा ने मांग की कि लगातार दो खरीफ सीजन में फसल खराब होने से प्रभावित किसानों को ठोस आर्थिक मदद दी जाए, जिसमें कर्ज माफी और फसल बीमा कवरेज के आधार पर मुआवजा शामिल हो।

अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर तक वास्तविक वर्षा 755.9 मिमी हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है।

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Balapur Ganesh Laddu Auction Record: बालापुर का गणेश लड्डू के लिए लुटाए 39 लाख, हैदराबाद में बप्पा का प्रसाद पाने के लिए गजब की दीवानगी

Balapur Ganesh Laddu Auction Record: हैदराबाद में गणपति बप्पा के भक्तों की अलग ही दीवानगी देखने को मिली है। यहां बालापुर गणेश उत्सव समिति में हर साल बप्पा को अर्पित किए जाने वाले लड्डू की नीलामी की जाती है। इस साल हुई नीलामी में अर्बन रियल्टी ग्रुप के समा रेड्डी ने 21 किलो लड्डू का प्रसाद 39 लाख रुपये में खरीदा। बालापुर गणेश प्रसाद का आइकॉनिक लड्डू की नीलामी 1994 में मात्र 450 रुपये से शुरू हुई थी। समय बीतने के साथ अब यह परंपरा देश भर में आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुकी है।

बालापुर के इस आइकॉनिक गणेश लड्डू ने इस साल ऐसा तहलका मचाया कि हर कोई बस इसी की बात कर रहा है। इस लड्डू को अपने घर ले जाने के लिए बड़े-बड़े सूरमाओं और एनआरआई ने अपनी तिजारी खोल दी। लोग सांस खींचकर इंतजार करते रहे कि इस बार यह सुपर-एक्सक्लूसिव लड्डू किसके हाथ लगेगा और कौन नया इतिहास रचेगा।

रीयल एस्टेट बॉस ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

इस हाई-वोल्टेज नीलामी में वनाथलीपुरम के साहेब नगर के रहने वाले रियल एस्टेट कंपनी के हेड समा प्रणीत रेड्डी ने सारे रिकॉर्ड्स धवस्त कर दिए। पिछले साल यह लड्डू 35 लाख में बिका था, लेकिन इस बार प्रणीत रेड्डी ने 4 लाख रुपये ऊपर यानी सीधे 39 लाख रुपये की भारी-भरकम बोली लगाकर इसे अपने नाम कर लिया। विजेता के तौर पर उनके नाम की घोषणा होते ही सोशल मीडिया से लेकर मैदान तक बस उन्हीं की चर्चा होने लगी।

1994 में 450 रुपये से शुरू हुई थी नीलामी की विचित्र प्रथा

बालापुर गणेश उत्सव में बप्पा को चढ़ने वाले लड्डू की नीलामी कील शुरुआत एक दम साधारण तरीके से साल 1994 में हुई थी। बालापुर गणेश उत्सव समिति ने 450 रुपये से इस ऑक्शन की शुरुआत की थी। इस नीलामी के पहले विजेता स्थानीय किसान कोलानू मोहन रेड्डी थे जो प्रसाद का कुछ हिस्सा अपनी खेती में बरकत के लिए छिड़कने ले गए थे। शुरुआत के 15 साल तो सिर्फ लोकल लोग ही इसमें हिस्सा ले सकते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि साल 2009 में सरिता नाम की महिला ने पहली बार विदेश से आकर इसे 5.10 लाख में जीता।

नीलामी से मिली रकम शहर में कल्याणकारी कामों में होती है खर्च

बालापुर गणेश उत्सव समिति इस महा-नीलामी से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल शहर के सामुदायिक विकास और तमाम कल्याणकारी कामों के लिए करती है। यानी इससे मिलने वाला पैसा समाज की भलाई में काम आता है। कोरोना काल के दौरान साल 2020 में जब ऑक्शन नहीं हुआ था, तब इसे तत्कालीन सीएम को दिया गया था।

UP Weather Update: यूपी में अगले कुछ घंटे आसमान से होगी आफत की बारिश! IMD का इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। मानसून की विदाई से पहले बादल एक बार फिर जमकर बरसने वाले हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने 25 सितंबर 2026 को जारी पूर्वानुमान में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। आईएमडी के मुताबिक, 25 और 27 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। इसके साथ ही आंधी जैसी तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। बारिश से लोगों को उमसभरी गर्मी से राहत मिलेगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, 28 और 29 सितंबर को प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं इन दोनों दिनों के लिए मौसम विभाग ने कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

इन शहरों में होगी ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 25 सितंबर को सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं बांदा, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर, बस्ती, सुल्तानपुर समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। वहीं 26 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं लखनऊ, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान है।

कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा

यूपी के कई जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के चलते कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा है। आजमगढ़, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, बहराइच, सीतापुर, बांदा, चित्रकूट समेत कई जिलों में मध्यम जोखिम बताया गया है। ऐसे में निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर जलभराव और कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

27 सितंबर को भी बारिश और तेज हवा

27 सितंबर को बारिश का असर कुछ कम हो सकता है, लेकिन कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश की संभावना है। इन इलाकों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। मौसम विभाग ने लोगों को बारिश और गरज-चमक के दौरान घर में रहने, पेड़ों के नीचे न जाने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। जलभराव वाली सड़कों और नालों से भी दूर रहने को कहा गया है।

लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को भी बारिश के दौरान खेतों में जलभराव से बचाने के लिए पानी की निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी है। फसल के हिसाब से अलग-अलग सावधानियां बताई गई हैं। खासकर गन्ना, अरहर, मक्का, धान, मूंगफली, तिल और सब्जियों की फसलों पर ज्यादा बारिश का असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने वाला है। 26 सितंबर को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इन दिनों कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाओं, बिजली गिरने और कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया गया है।

₹2 लाख/वर्ग मीटर जमीन, 12-20 हजार/वर्ग फीट बिक रहे फ्लैट? समझिए ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी के पास प्रॉपर्टी को क्यों लग रहे पंख

ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी और उसके आसपास का क्षेत्र आने वाले समय में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में आकार लेता दिख रहा है। रेलवे स्टेशन, इंटरनेशनल बस अड्डा और लगभग 600 एकड़ में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की वजह से इस इलाके के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। बुनियादी ढांचे के इस बड़े विस्तार से आसपास के सेक्टरों में जमीन, आवासीय फ्लैट और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है।

बोड़ाकी बनेगा NCR का प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब

दादरी के पास बोड़ाकी में स्थित मौजूदा रेलवे हॉल्ट को एक आधुनिक मल्टी-मॉडल रेलवे टर्मिनल (ग्रेटर नोएडा टर्मिनल) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तैयार होने से गौतमबुद्ध नगर के लाखों यात्रियों की ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या गाजियाबाद जाने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी। प्रस्तावित स्टेशन में 12 प्लेटफॉर्म होंगे, साथ ही बड़ी संख्या में यार्ड और लूप लाइनें तैयार की जाएंगी। दावों के मुताबिक यहां वंदे भारत और राजधानी जैसी लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन और रखरखाव की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। भविष्य में पूर्वांचल की दिशा में जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन यहां से जोड़े जाने की संभावना है।

कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए इस टर्मिनल को ‘नमो भारत’ रैपिड रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, बोड़ाकी में लगभग 14 एकड़ क्षेत्र में एक आधुनिक बस अड्डा, वर्कशॉप और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की योजना है। स्टेशन परिसर में होटल, प्रमुख फूड चेन और कमर्शियल स्पेस भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र सिर्फ एक स्टेशन न रहकर बड़ा ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब बनेगा।

600 एकड़ में फैलेगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब

SVG Realty के चेयरमैन व डायरेक्टर और रियल एस्टेट एक्सपर्ट अंकुर मित्तल बताते हैं कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के समीप लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लोकल ट्रेन और लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी जैसी इंटिग्रेटेड सुविधाएं शामिल होंगी।

इन सुविधाओं के विकसित होने से केवल आम यात्रियों को ही सहूलियत नहीं मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार, बड़े कारोबार और कमर्शियल गतिविधियों के मौके पैदा होंगे। इसी वजह से बोड़ाकी और इसके आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है।

जमीन के रेट: डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रेटर नोएडा में जमीन की उपलब्धता और सेक्टरों के विकास की स्थिति के हिसाब से रेट्स में अंतर देखा जा रहा है। विकसित सेक्टर की बात करें तो अथॉरिटी के प्लॉटों की कीमतें लगभग 2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई हैं। सेमी-डेवलप सेक्टर में भी जमीन के दाम लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास देखे जा रहे हैं। किसानों के सेमी-कमर्शियल प्लॉट की कीमत 1 लाख रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास बताई जा रही है।

बालाजी होम्स के रियल एस्टेट एक्सपर्ट संजय कुमार के मुताबिक, बोड़ाकी जंक्शन के पास स्थित इटा, ओमिक्रॉन और म्यू प्रमुख सेक्टरों में शामिल हैं, जहां विकास के काम तेजी से चल रहे हैं। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे और रेलवे जंक्शन के कारण इन सेक्टरों में प्रॉपर्टी की कीमतें करीब 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक बताई जा रही हैं।

12 हजार से 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट पहुंचे फ्लैट्स के दाम

टाटा, गोदरेज और हीरो रियल्टी जैसे देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स इस क्षेत्र में अपने प्रोजेक्ट्स ला चुके हैं। नए लॉन्च हो रहे आवासीय प्रोजेक्ट्स में फ्लैटों के रेट 12 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट से शुरू होकर लग्जरी सेगमेंट में 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच रहे हैं। कामकाजी वर्ग और निवेशकों के बीच स्टूडियो अपार्टमेंट्स की मांग में भी इजाफा हुआ है। कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में 500 से 600 वर्ग फीट के स्टूडियो अपार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी दरें 10 हजार रुपये से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के बीच हैं।

अल्फा से बोड़ाकी तक कमर्शियल कॉरिडोर में तेजी

अल्फा से बोड़ाकी के बीच करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कमर्शियल गतिविधियों की मांग काफी बढ़ी है। ग्राउंड फ्लोर रिटेल स्पेस 30,000 रुपये से 35,000 रुपये प्रति वर्ग फीट, अपर फ्लोर कमर्शियल स्पेस करीब 20,000 रुपये प्रति वर्ग फीट और ऑफिस स्पेस 12,000 रुपये से 13,000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक जा रहे हैं।

रेलवे कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, लॉजिस्टिक्स हब और बस अड्डे जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं के चलते बोड़ाकी और आसपास के सेक्टरों का रियल एस्टेट मार्केट इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि किसी भी प्रॉपर्टी का अंतिम मूल्य उसकी सटीक लोकेशन, प्रोजेक्ट की स्थिति और मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करता है।

(ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

UP IMD Rain Alert: यूपी में 4 दिन तक होगी आफत वाली मूसलाधार बारिश! इन जिलों में 60 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

UP IMD Rain Alert: उत्तर प्रदेश में अगले चार दिनों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लखनऊ के पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 से 27 सितंबर के बीच UP के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होगी। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। इनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है।

आज से बदलेगा मौसम, इन जिलों में भारी बारिश की आशंका

मौसम विभाग के मुताबिक, 24 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। तेज सतही हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। इस दौरान झोंकों में इनकी गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

24 सितंबर को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और अंबेडकर नगर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

25 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर

25 सितंबर को मौसम और एक्टिव हो सकता है। बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या समेत आसपास के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

वहीं, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, अंबेडकर नगर समेत कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग ने बताया कि हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। जबकि झोंकों में गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

26 सितंबर को भी नहीं मिलेगी राहत

  • 26 सितंबर को बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बाराबंकी में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
  • इसके अलावा आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, महराजगंज, हरदोई, लखनऊ, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं समेत कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
  • इस दिन भी गरज-चमक और बिजली के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है। झोंकों में हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

27 सितंबर को पश्चिमी यूपी की ओर बढ़ेगा असर

  • 27 सितंबर को बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश की संभावना है।
  • इस दौरान देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा और मुरादाबाद समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

28 सितंबर से राहत के संकेत

  • मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 28 सितंबर को किसी विशेष चेतावनी का उल्लेख नहीं है। हालांकि कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी रह सकती है। यानी लगातार कई दिनों की बारिश के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।

बिजली और तेज हवाओं को लेकर भी अलर्ट

  • बारिश के साथ सबसे बड़ी चिंता आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर है। 24 से 27 सितंबर के बीच कई जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की झोंकेदार हवाओं की संभावना जताई गई है।
  • तेज हवाओं से पेड़, कमजोर ढांचे, कच्चे मकान और झोपड़ियां प्रभावित हो सकती हैं। बिजली व्यवस्था और सड़क यातायात पर भी असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है।

बारिश से इन इलाकों में बढ़ सकता है जलभराव

  • भारी बारिश के कारण निचले इलाकों और अंडरपास में पानी भरने, स्थानीय नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश की स्थिति में कमजोर और पुरानी इमारतों को भी नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। सड़क और रेल यातायात पर भी स्थानीय स्तर पर असर पड़ने की संभावना है।
  • मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले इलाकों, उफनते नालों और नदियों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। भारी बारिश के दौरान वाहन चलाते समय दृश्यता कम होने और सड़क पर फिसलन को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

किसानों के लिए भी खास सलाह

  • लगातार बारिश और तेज हवाओं का असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। गन्ना, धान, मक्का, अरहर, मूंगफली, तिल, उड़द-मूंग और सब्जियों समेत कई फसलों में जलभराव और तेज हवा से नुकसान की आशंका है।
  • किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने और तेज हवाओं के दौरान सिंचाई रोकने की सलाह दी गई है। केले, पपीते और आम के नए पौधों को सहारा देने तथा लंबी फसलों को गिरने से बचाने के उपाय करने को कहा गया है।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

  • मौसम विभाग के अनुसार, आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़, जलस्रोत और बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है। तेज बारिश या गरज-चमक के दौरान सुरक्षित पक्के भवन के अंदर रहना बेहतर है।
  • बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव वाली सड़कों या पुलों को पार करते समय विशेष सावधानी बरतें।

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लखनऊ में अब कट्टा-बम नहीं ब्रह्मोस बन रही है: योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों में लखनऊ में कट्टा और बम बनते थे, अब लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है।

योगी ने गुरुवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण की 12 हजार करोड़ रुपये की दो महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं वरुण विहार और नैमिष नगर का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि दोनों योजनाएं 10,680 एकड़ में विकसित होंगी। वरुण विहार 6,500 एकड़ में छह लाख लोगों के लिए और नैमिष नगर 4,100 एकड़ में चार लाख लोगों के लिए बसाया जाएगा।

इस दौरान 2,166 करोड़ के पांच बहुमंजिला अपार्टमेंट का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियोजित विकास में जमीन दबंगों-गुंडों को बिक जाती थी, जिससे समस्या खड़ी होती थी।

अब नियोजित विकास पर जोर है। किसानों को अच्छा मुआवजा मिलेगा, एलडीए और किसान के बीच कोई मध्यस्थ नहीं होगा, दलाली नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वरुण विहार को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा और लखनऊ से नैमिषारण्य तक फोरलेन सड़क बनेगी। 

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लखनऊ को स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी और रायबरेली शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परियोजनाओं में जिन किसानों की जमीन आ रही है, उन्हें अच्छा मुआवजा मिलेगा।

कोई दलाली नहीं होने दी जाएगी। एलडीए और किसान के बीच कोई मध्यस्थ नहीं होगा। सीधे बातचीत होगी और मुआवजा जमीन मालिक के खाते में जाएगा। योगी ने बताया कि दोना गांव के मुनेश्वर सिंह को 3.13 करोड़, रेवरी की रमदेई को 2.05 करोड़, कमलेश कुमार को 2.80 करोड़ और अब्बास नगर की सुषमा सिंह को 2.90 करोड़ मुआवजा मिला। नमरा फातिमा ने मुआवजे से दूसरी जगह जमीन खरीदी और शेष धन से मेडिकल की पढ़ाई की तैयारी करने की बात कही। ओम प्रकाश अवस्थी ने 1.96 करोड़ के मुआवजे से डेढ़ बीघा के बदले 16 बीघा जमीन खरीदी और शेष राशि एफडी कर दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ से नैमिषारण्य तक फोरलेन कनेक्टिविटी होने जा रही है। आने वाले समय में लखनऊ और नैमिषारण्य के बीच दूरी नहीं रह जाएगी। वरुण विहार के बीच से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी दी जाएगी।

Pic Credit : UNI

इस्लामाबाद में इमरान समर्थकों का मार्च रोकने की कोशिश:रैलियां बैन, हाईवे बंद; सड़कों पर 2,000 कंटेनर लगाए, 20 हजार पुलिसकर्मी तैनात

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इमरान खान की पार्टी PTI के मार्च से पहले प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। राजधानी में रैलियों, जुलूस और सार्वजनिक सभाओं पर 2 महीने के लिए रोक लगा दी गई है। हाईवे बंद किए जा रहे हैं, करीब 2,000 कंटेनर सड़कों पर लगाए गए हैं और पंजाब-सिंध से 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी बुलाए गए हैं। PTI ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के लिए 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया है। मार्च कराची और लाहौर से शुरू होने की उम्मीद है। इस्लामाबाद में धारा 144 लागू, 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक इस्लामाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके तहत 5 या उससे ज्यादा लोगों के एक जगह जुटने के साथ रैली, जुलूस और प्रदर्शन पर रोक है। आदेश 2 महीने तक प्रभावी रहेगा। शहर के कई हिस्सों में कंटेनरों को आपस में वेल्ड किया गया है, जबकि कुछ पर बाहर की तरफ लोहे के नुकीले स्पाइक्स लगाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक इस्लामाबाद-पेशावर मोटरवे, इस्लामाबाद-डेरा इस्माइल खान मोटरवे और ग्रैंड ट्रंक रोड को कई जगहों पर बंद किया जाएगा। रावलपिंडी और अटक के कुछ इलाकों में 27 सितंबर को मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं रोकने की मांग भी की गई है। शहबाज सरकार ने PTI से मार्च टालने को कहा गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने PTI नेताओं से मार्च पर दोबारा विचार करने को कहा है। दूसरी तरफ PTI ने अपनी तैयारी जारी रखी है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को कहा था कि कोई राजनीतिक पार्टी, नेता, प्रांतीय सरकार या सरकारी पदाधिकारी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सड़कों, हाईवे, इंटरचेंज, टोल प्लाजा या सरकारी इमारतों पर कब्जा नहीं कर सकता। PTI के अलावा किसान संगठन किसान इत्तेहाद ने भी कृषि लागत बढ़ने के विरोध में राजधानी तक मार्च का ऐलान किया है। कंटेनरों से रास्ते रोकना पुराना तरीका पाकिस्तान में राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान कंटेनर लगाने का इतिहास करीब 30 साल पुराना है। 1996 में बेनजीर भुट्टो सरकार ने जमात-ए-इस्लामी नेता काजी हुसैन अहमद को इस्लामाबाद पहुंचने से रोकने के लिए कंटेनर लगाए थे। 2014 में इमरान खान के धरने के दौरान यही कंटेनर प्रदर्शन का मंच भी बन गए। इमरान और उनके समर्थक कई हफ्तों तक एक कंटेनर से भाषण देते रहे। इसके बाद पाकिस्तान की राजनीति में ‘कंटेनर पॉलिटिक्स’ शब्द प्रचलित हुआ। 2016, 2019 और 2022 के बड़े प्रदर्शनों में भी राजधानी के रास्ते कंटेनरों से बंद किए गए थे। खबर अपडेट हो रही है…

महाराष्ट्र में 1972 से भी ज्यादा गंभीर सूखे की आशंका, सोलापुर में सिर्फ 48.65% बारिश, किसानों पर कितना बड़ा संकट?

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले पर सूखे का बड़ा संकट मंडरा रहा है। जिले में इस बार औसत बारिश का सिर्फ 50% ही बरसा है, जिससे खेतों में दरारें पड़ गई हैं। हालात का जायजा लेने खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 23 सितंबर को सोलापुर पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने दौरा करने के बाद कहा कि मौजूदा हालात 1972 के ऐतिहासिक सूखे से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। सोलापुर इस समय राज्य का सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बन गया है।

जिले में औसत बारिश का सिर्फ करीब 50 फीसदी पानी ही बरसा है। इसकी वजह से खरीफ की सभी फसलों को नुकसान हुआ है। बार्शी और धनोर इलाके में करीब 90 हजार हेक्टेयर में लगी सोयाबीन की फसल पूरी तरह खराब हो गई है, जबकि कई चीनी उत्पादक इलाकों में गन्ने की फसल रुक गई है।

किसानों के लिए सरकार ने की ये तैयारी

फडणवीस ने किसानों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है। सरकार की पहली प्राथमिकता पीने के पानी को बचाना है। इसके अलावा फसल नुकसान, पशुओं के चारे, फसल बीमा, आर्थिक मदद और अनाज की व्यवस्था को लेकर भी योजना बनाई जा रही है। सूखे को लेकर सरकार की ओर से जल्द नोटिफिकेशन या प्रस्ताव जारी करने की बात भी कही गई है।

सूखे से मछली पालन भी प्रभावित

बारिश की कमी का असर अब खेती के साथ मछली पालन पर भी दिखाई दे रहा है। कम पानी की वजह से तालाबों और जलाशयों में मछली पालन मुश्किल हो रहा है। इससे मछली उत्पादन के साथ मछुआरों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

सूखे की स्थिति को लेकर कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक भी हुई। इसमें अधिकारियों से फसल नुकसान का सर्वे जल्द पूरा करने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों की स्थिति का सही पता चल सके। इसके अलावा जल संरक्षण के कामों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।