अनार छोड़ शुरू की इस फसल की खेती, आज पैसे गिनते नहीं थकते किसान

भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन आज खेती पहले जैसी आसान नहीं रही। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती उत्पादन लागत, कीटों और बीमारियों का बढ़ता खतरा तथा बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव किसानों की कमाई पर सीधा असर डाल रहे हैं। ऐसे में कई किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय नई और कम लागत वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। सही योजना, आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ ये किसान खेती को घाटे का सौदा नहीं, बल्कि मुनाफे का व्यवसाय बना रहे हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान सागर येलपले इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने वर्षों से चली आ रही अनार की खेती छोड़कर सहजन (ड्रमस्टिक) की खेती अपनाई।

शुरुआत केवल एक एकड़ में प्रयोग के तौर पर हुई, लेकिन शानदार नतीजों ने उनकी सोच और किस्मत दोनों बदल दी। आज उनका 18 एकड़ का सहजन फार्म हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार करता है और लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा देता है। उनकी सफलता आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

महंगी पड़ रही थी अनार की खेती

सागर ने 2012 में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिता के साथ 10 एकड़ की खेती संभाली। परिवार कई पीढ़ियों से अनार उगा रहा था, लेकिन समय के साथ इसकी खेती महंगी होती चली गई। उनके अनुसार, अनार में बीमारियों का खतरा बढ़ गया था, कीटनाशकों और रसायनों पर भारी खर्च करना पड़ता था। एक एकड़ से करीब 3 लाख रुपये की कमाई होती थी, लेकिन लगभग आधी रकम खेती की लागत में ही चली जाती थी। ऊपर से फसल तैयार होने में छह महीने का इंतजार भी करना पड़ता था।

2017 में लिया जिंदगी बदलने वाला फैसला

इसी दौरान एक दोस्त ने उन्हें व्यावसायिक सहजन की खेती का सुझाव दिया। सागर ने बिना जोखिम लिए पहले सिर्फ एक एकड़ में इसकी खेती शुरू की। उन्होंने करीब 4,000 रुपये में 400 ग्राम बीज खरीदे, खेत में गोबर की सड़ी खाद डाली और जनवरी 2017 में बुवाई कर दी। सिर्फ पांच महीने बाद जून में पहली फसल तैयार हो गई।

पहली ही फसल ने बढ़ाया हौसला

एक एकड़ से लगभग 10 टन सहजन की पैदावार हुई। बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक्री हुई और पहली ही फसल से 3 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हुई। यहीं से सागर को भरोसा हो गया कि भविष्य सहजन की खेती में है।

धीरे-धीरे बदली पूरी खेती की तस्वीर

सागर ने एक साथ पूरी खेती बदलने की बजाय धीरे-धीरे अनार के बाग हटाकर सहजन लगाना शुरू किया। बाद में उन्होंने 8 एकड़ और जमीन जोड़ ली। आज उनके पास कुल 18 एकड़ में करीब 12,000 सहजन के पौधे हैं, जिनमें मुख्य रूप से ODC-3 और ODC-4 किस्में लगाई गई हैं।

हर साल 200 टन तक उत्पादन

शुरुआत में एक पेड़ से लगभग 25 किलो फल मिलता था, लेकिन सही देखभाल और नियमित छंटाई के कारण अब एक पेड़ से करीब 50 किलो तक उत्पादन हो रहा है। पूरे फार्म से हर साल 180 से 200 टन सहजन की पैदावार होती है।

बायोगैस प्लांट से घटाया खर्च

सागर ने खेत में बायोगैस प्लांट भी लगाया है, जिससे रोजाना 200 से 300 लीटर स्लरी निकलती है। यही स्लरी खेतों में जैविक खाद का काम करती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई, रासायनिक खाद का खर्च घटा और बायोगैस का इस्तेमाल घर में खाना बनाने के लिए भी होने लगा।

हैदराबाद बना सबसे बड़ा बाजार

अच्छी फसल के साथ सागर ने मजबूत बाजार भी तैयार किया। आज उनकी अधिकांश उपज लगभग 400 किलोमीटर दूर हैदराबाद भेजी जाती है, जहां व्यापारी पूरी फसल खरीद लेते हैं। पहले वे दुबई भी निर्यात करते थे, लेकिन अब हैदराबाद से ही इतनी मांग है कि पूरी उपज वहीं बिक जाती है।

मौसम बदलता है, मुनाफा नहीं

सर्दियों में सहजन की कीमत 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि गर्मियों में यह 25 रुपये प्रति किलो तक आ जाती है। इसके बावजूद पूरे साल का औसत भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे खेती लगातार फायदे का सौदा बनी हुई है।

बीज बेचकर भी लाखों की कमाई

सिर्फ सहजन बेचकर ही नहीं, बल्कि सागर अब इसकी गुणवत्तापूर्ण बीज भी किसानों को बेचते हैं। वे करीब 10,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज बेचते हैं, जिससे सालाना लगभग 15 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है।

1.15 करोड़ का कारोबार, 80 लाख तक मुनाफा

सहजन और बीज की बिक्री मिलाकर सागर का सालाना कारोबार करीब 1.15 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 80 लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है।

दूसरे किसानों को क्या सलाह देते हैं सागर?

सागर का मानना है कि किसी भी नई फसल में सीधे पूरी खेती बदलने की बजाय पहले छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए। फसल की देखभाल, बाजार की मांग और खरीदारों की उपलब्धता को समझने के बाद ही बड़े स्तर पर निवेश करना बेहतर होता है। यही सोच उनके लिए सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हुई।

जिनकी जेब से राममंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वे लोग कर रहे चंदा चोरी की बात : CM योगी

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।

एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय 

सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है। 

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।

खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश 

सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है। 

संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम

सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।

विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है। 

सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।

आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।

 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन 

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।  

विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग 

मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि  देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे। 

सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि 

सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है। 

 

पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

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जिस सत्तू को लोग कभी गरीबों का खाना समझते थे… आज वही Amazon, Blinkit और चीन की यूनिवर्सिटी कैफे तक पहुँच चुका है।
IAS ओजस्वी राज की सोच ने सिर्फ एक उत्पाद नहीं बदला, बल्कि किसानों, महिलाओं और पूरे बलिया की पहचान को नई उड़ान दी।
कभी-कभी बदलाव नई चीज़ बनाने से नहीं… अपनी विरासत पर भरोसा करने से आता है।
आपके राज्य का कौन-सा पारंपरिक उत्पाद दुनिया तक पहुँचना चाहिए?
कमेंट में ज़रूर बताइए।

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सिर्फ 100 रुपये का पौधा और 20 साल बाद बड़ा फायदा? लाल चंदन की खेती से कमाई का तरीका जानिए

आज के समय में गार्डनिंग और पौधों की खेती को लोग सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रख रहे हैं, बल्कि इसे भविष्य की कमाई से जोड़कर भी देख रहे हैं। इसी वजह से लाल चंदन (रेड सैंडर्स) जैसे कीमती पेड़ों की ओर किसानों और बागवानी प्रेमियों का आकर्षण बढ़ रहा है। अपनी खास लाल रंग की लकड़ी और बाजार में मांग के कारण यह पेड़ लंबे समय के निवेश के तौर पर चर्चा में है। हालांकि, लाल चंदन लगाना आसान कमाई का रास्ता नहीं है, क्योंकि इसके लिए कई वर्षों तक धैर्य, देखभाल और सुरक्षा की जरूरत होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सही परिस्थितियों में विकसित होने वाला यह पेड़ भविष्य में अच्छी आर्थिक संभावनाएं दे सकता है। यही कारण है कि अब कई लोग खाली जमीन या बगीचे में लाल चंदन लगाने की योजना बना रहे हैं।

कम खर्च में शुरुआत, लेकिन मुनाफे के लिए लंबा इंतजार

लाल चंदन का एक पौधा करीब 50 से 100 रुपये की लागत में लगाया जा सकता है। हालांकि, इसे लगाकर तुरंत कमाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक लंबी अवधि की खेती है, जिसमें धैर्य और लगातार देखभाल सबसे जरूरी होती है।

15-20 साल की मेहनत के बाद मिल सकता है बड़ा फायदा

जानकारों के मुताबिक, लाल चंदन के पेड़ को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 15 से 20 साल लग सकते हैं। इस दौरान सही मौसम, मिट्टी, सुरक्षा और नियमित देखभाल पेड़ के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। एक स्वस्थ पेड़ से अच्छी मात्रा में कीमती हार्टवुड मिलने की संभावना रहती है।

लाखों तक पहुंच सकती है लकड़ी की कीमत

लाल चंदन की लकड़ी की कीमत उसकी गुणवत्ता, वजन, बाजार मांग और सरकारी नियमों पर निर्भर करती है। अच्छी गुणवत्ता वाली लकड़ी कई बार काफी महंगी बिक सकती है। हालांकि, इसकी कमाई का अंदाजा पेड़ की स्थिति और उस समय के बाजार भाव के आधार पर ही लगाया जा सकता है।

समस्तीपुर में भी मिल रहे हैं पौधे

बिहार के समस्तीपुर जिले में लाल चंदन के पौधों को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर किसान और बागवानी प्रेमी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बिरौली और रोसड़ा क्षेत्र की कुछ नर्सरियों से पौधे प्राप्त कर सकते हैं। यहां पौधों की कीमत लगभग 50 से 100 रुपये बताई जा रही है।

खेती से पहले नियमों की जानकारी जरूरी

लाल चंदन की खेती शुरू करने से पहले इसकी प्रजाति, पौधे की गुणवत्ता और कानूनी नियमों की जानकारी लेना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ की कटाई, परिवहन और बिक्री से जुड़े वन कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। सही जानकारी और नियमों के साथ ही इसकी खेती भविष्य में लाभकारी साबित हो सकती है।

40 लाख के कर्ज ने छुड़वाई B.Tech की पढ़ाई, आज 80 लाख सालाना कमा रहे हैं अविनाश…ऐसे किया कमाल

आंध्र प्रदेश के रहने वाले अविनाश माडा की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। परिवार पर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज होने की वजह से उन्हें बीटेक की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए अपना काम शुरू किया। मुश्किल हालात का सामना करते हुए उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया और आज वह एंटरप्रेन्योरशिप के रूप में हर साल 80 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष की यह कहानी लोगों को काफी प्रेरित कर रही है।

40 लाख का हो गया था कर्ज

अविनाश माडा ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि, जब वह 18 साल के थे, तभी उनके परिवार पर बड़ा संकट आ गया। उनके पिता, जो किसान हैं, उन्हें अपने कारोबार में भारी नुकसान हुआ और परिवार पर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज हो गया। इस कठिन समय में उनकी मां ने पूरे परिवार का हौसला बनाए रखा और सभी ने मिलकर मुश्किल हालात का सामना किया। बीटेक की पढ़ाई के पहले साल के दौरान ही अविनाश ने अपने भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया।

नौकरी से नहीं होगा सुधार

माडा ने कहा, केवल डिग्री पूरी करके नॉर्मल नौकरी करने से परिवार की आर्थिक परेशानियां जल्दी खत्म नहीं होंगी। इसी सोच ने उन्हें कुछ अलग करने और नया रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उस समय को याद करते हुए कहा, “मुझे लगा कि अगर मैं बी.टेक पूरा करके 30 से 40 हजार रुपये महीने की नौकरी भी कर लूं, तब भी परिवार का कर्ज चुकाने में कई साल लग जाएंगे।” माडा ने बताया कि उन्हें जल्द ही समझ आ गया था कि सिर्फ पढ़ाई पूरी करके नौकरी करने से परिवार की आर्थिक स्थिति में जल्दी सुधार नहीं आएगा। इसी वजह से उन्होंने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया।

 

शुरू किया नया बिजनेस

परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अविनाश ने पारंपरिक रास्ते की बजाय नया ऑप्शन चुना। उन्होंने कॉलेज छोड़कर डिजिटल मार्केटिंग और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) सीखना शुरू किया। कारोबार का पहले कोई अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी खुद की डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी शुरू की। शुरुआत में उन्होंने अपनी स्किल्स को मजबूत करने और नए क्लाइंट्स जोड़ने पर मेहनत की। उनका यह फैसला चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन कुछ ही समय में उन्हें इसका अच्छा परिणाम मिलने लगा।

मां ने बढ़ाया हौसला

अविनाश माडा का दावा किया कि, 19 साल की उम्र तक उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन के कई क्लाइंट्स के साथ काम करना शुरू कर दिया था। उनकी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी को विदेशों से लगातार प्रोजेक्ट मिलने लगे। अविनाश के अनुसार, एजेंसी शुरू करने के पहले ही साल में उन्होंने करीब 30 लाख रुपये की कमाई की। अविनाश ने बताया कि, जब उन्होंने कॉलेज छोड़कर अपना रास्ता चुनने का फैसला किया, तब उन्हें भविष्य को लेकर काफी असमंजस था। वहीं इस मुश्किल समय में उनकी मां ने उनका पूरा साथ दिया।

अविनाश माडा के अनुसार, उनकी मां ने उन्हें कहा था कि पहले कारोबार में अपनी किस्मत आजमाओ। अगर इसमें सफलता नहीं मिली, तो पढ़ाई दोबारा शुरू करने का मौका हमेशा रहेगा। अविनाश ने बताया कि, उनकी मां की यही बात उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

अविनाश ने की इतने की कमाई

आज अविनाश माडा IG Accelerators और Freedom with AI के संस्थापक हैं। उनके मुताबिक, उनके दोनों कारोबार बिना किसी बड़े शुरुआती निवेश के हर साल 80 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। अविनाश के मुताबिक, नई और व्यावहारिक स्किल्स सीखने के साथ सही समय पर सोच-समझकर जोखिम उठाने के फैसले ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी और उन्हें सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा, “कई बार जिदगी के सबसे बड़े मौके तब मिलते हैं, जब आप तयशुदा रास्ते से हटकर कुछ नया करने का साहस दिखाते हैं।”

यूजर ने किया कमेंट

उनकी कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। कई लोगों ने उनके साहस, मेहनत और परिवार की मदद के लिए बड़ा जोखिम उठाने के फैसले की सराहना की है। एक यूजर ने लिखा, “यह बेहद प्रेरणादायक सफर है। जोखिम लेना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम लगातार नई और उपयोगी स्किल्स सीखते रहना है।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “सम्मान। उन्होंने सिर्फ कॉलेज नहीं छोड़ा, बल्कि एक वास्तविक समस्या का समाधान खोजने का संकल्प लिया।” वहीं तीसरे यूजर ने लिखा, “एक दिन ऐसा भी आएगा, जब आप मेरी कहानी भी इसी तरह लोगों को बताएंगे।”

योगी सरकार में एमएसपी पर रिकॉर्ड गेहूं खरीद से किसानों को मिली आर्थिक मजबूती

  • 9 वर्षों में 51.70 लाख किसानों से 244.26 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद
  • खरीद केंद्रों के विस्तार से आसान हुई प्रक्रिया, निर्धारित लक्ष्य से अधिक भी खरीदा गया गेहूं

 

लखनऊ, 31 जुलाई। उत्तर प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद की व्यवस्था ने बीते नौ वर्षों में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान हितैषी बनाते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर उपलब्ध कराया। रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश में करीब 51,70,117 किसानों से 244.26 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जिसके बदले 45,935.46 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए।

 

निर्धारित लक्ष्य से अधिक खरीदा गया गेहूं

 

खाद्य एवं रसद विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि, प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूं भी खरीदा गया। वर्ष 2018-19 में 50 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 52.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, जो लक्ष्य का 105.84 प्रतिशत रही। इस दौरान 11.27 लाख से अधिक किसानों को 9,231.99 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसी प्रकार वर्ष 2021-22 में 56.41 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर 13.01 लाख से अधिक किसानों को 11,141.19 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। समयबद्ध भुगतान व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज का मूल्य किसी देरी के बिना सीधे बैंक खातों में प्राप्त हुआ जिससे उनकी आर्थिक जरूरतें समय पर पूरी हो सकीं और खेती में दोबारा निवेश करना भी आसान हुआ।

 

प्रदेशभर में 5,847 क्रय केंद्र स्थापित 

 

उत्तर में 5,847 क्रय केंद्र स्थापित कर खरीद व्यवस्था को गांव और कस्बों के करीब पहुंचाया। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम हुई। ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल सत्यापन और समयबद्ध भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और भरोसेमंद बनाया है।

 

पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

 

एमएसपी खरीद व्यवस्था केवल फसल खरीद तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन गई है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान सीधे बैंक खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हुई है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक पात्र किसान एमएसपी का लाभ प्राप्त करे। इसके लिए अधिकारियों को खरीद केंद्रों पर निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने, शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने और खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्व-सहायता समूहों को 300 करोड़ रुपए की सौगात, झाबुआ में 283 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शुभारंभ

mohan yadav

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 जुलाई को झाबुआ जिले के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया। वे जिले के थांदला में आयोजित 'स्व-सहायता समूहों का क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम' में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के दौरान सीएम डॉ. यादव ने राज्य के स्व-सहायता समूहों को सिंगल क्लिक से 300 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया।

इसके अलावा उन्होंने झाबुआ में 174.64 करोड़ रुपये की लागत के 29 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ रुपये की लागत के 28 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किया और मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया। सीएम डॉ. यादव ने प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने रणजी टीम में चयनित थांदला के क्रिकेटर अर्पित भटेवरा को ट्रॉफी भेंटकर शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने किसानों और युवाओं को हेलमेट भी दिए। 

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृ्त्व में मध्यप्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जब वे लगातार तीन बार पड़ोसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास जनजातीय अंचल में विकास के अद्भुत कार्य हुए। पूरी दुनिया गुजरात की शक्ति से परिचित हुई। प्रधानमंत्री मोदी गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य करते हैं। उनके मन में बहनों के लिए विशेष सम्मान है। उनके माध्यम से आज स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं। स्व-सहायता समूहों से बहनों की समृद्धि का मार्ग खुल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और समाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन रहा है।

 

हर काम में दक्ष हैं बहनें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने कहा कि  सहयोग, सहभागिता और संपन्नता के बलबूते बहनें नए रिकॉर्ड बना रही हैं। अब हमारी बहनें 10 हजार रुपए प्रति महीना तक आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश की लाड़ली बहनें, उद्यमिता बहनें, कृषि सखी सभी आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के द्वारा 196 कैफे संचालित किए जा रहे हैं। झाबुआ में भी बहनें 4 कैफे चला रही हैं। प्रदेश में 85 आजीविका पुस्तकालयों का संचालन स्व-सहायता समूहों की बहनों के हाथों में है। प्रदेश में गैर कृषि आधारित 150 से अधिक कार्य हमारी बहनें कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का गौरवशाली क्षण है। होलकर साम्राज्य की रानी लोकमाता अहिल्याबाई ने भील पलटन बनाकर जनजातीय समुदाय पर विश्वास जताया था। रानी दुर्गावती, वीरांगना अवंतीबाई, रानी पद्मावती, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जैसी बहनों ने सुशासन और त्याग के बल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया। 

 

करोड़ों का व्यापार महिलाओं के जिम्मे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झाबुआ क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए वरदान है। आज यहां पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से संवाद किया और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा भी की। महिला कृषक बहनों ने बताया कि प्राकृतिक खेती के माध्यम स पिछले दो-तीन साल में जीवन में बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें बहनों की बड़ी भूमिका है। हमारी बहनें ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चला रही हैं। ड्रोन दीदियां खेतों में कीट नाशकों का छिड़काव कर रही हैं। इस वर्ष गेहूं उपार्जन में भी दीदियों ने कमाल कर दिया। मध्यप्रदेश ने पूरे देश में सबसे अधिक गेहूं खरीदा है। प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री के सहयोग से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया। इसमें भी बहनों ने अपने समूहों को लाभान्वित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 89 ड्रोन दीदियां, पशुपालन दीदियां, बैंक सखी जैसी बहनें काम कर रही हैं। व्यावयासिक सब्जी उत्पादन, पशुपालन और जैविक खेती में बहनों ने उत्कृष्ट कार्य किया है। महिला किसान उत्पादक संगठनों ने 958 करोड़ रुपए का व्यापार किया है। झाबुआ जिले में 11 हजार 900 से अधिक स्व-सहायता समूह एक लाख 56 हजार से अधिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और आजीविका का अधिकार दे रहे हैं। प्रदेश में 64 हजार लखपति दीदीयां जनजातीय क्षेत्र में आर्थिक पुनरोत्थन का कार्य कर रही हैं। समूहों के सशक्तिकरण के लिए 285 करोड़ की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि झाबुआ में अब कड़कनाथ से माध्यम से घर-घर में नगदनाथ हो रहा है। बहनें मुर्गी पालन, पशुपालन, मछली पालन के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं। लाड़ली बहनों के खाते में हर माह 1500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जो कहती है, करके दिखाती है।

 

सभी के लिए होगा एक समान कानून

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के सम्मान के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें जनजातीय समुदाय को मुक्त रखा गया है। यूसीसी बिल विधानसभा से पास हो चुका है। सरकारी नौकरियों में बहनों को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। माताओं-बहनों को नगरीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योग और एमएसएमई के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। कल ही ग्वालियर अंचल को टेलीकॉम सेक्टर की बहुत बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने धार जिले में पीएम मित्र पार्क की सौगात दी है। उन्होंने कहा कि इससे अंचल के कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। अब खेत से कारखाना, कारखाने से कपड़ा, कपड़े से गारमेंट और यह गारमेंट्स दुनियाभर में निर्यात किए जाएंगे। इससे निमांड़ अंचल के साथ ही झाबुआ में भी समृद्धि आएगी। पीएम मित्र पार्क से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि अब झाबुआ, धार, आलीराजपुर के लोगों को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। अपने घर में ही काम मिलेगा। बड़े-बड़े कारखाने यहां आएंगे। बाहरी लोगों को भी रोजगार मिलेगा। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ को दी सौगातें 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज 70 करोड़ की लागत से झाबुआ में आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय का भूमि-पूजन किया गया है। प्रदेश को अब तक 9 आयुर्वेदिक कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। यहां 35 करोड़ 29 लाख की लागत से सांदीपनि विद्यालय। झाबुआ के थांदला से अब रेलगाड़ी भी गुजरेगी। थांदला में पक्का हेलीपैड बनेगा। प्रत्येक विधानसभा में खेल स्टे़डियम बनाएंगे। पद्मावती नदी पर घाट निर्माण किया जाएगा। छोटी काशी में भी घाट बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झाबुआ और धार में धर्मांतरण करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलवाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिला सुरक्षा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाने बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा दिलवाएंगे। प्रदेश सरकार ने बालाघाट, मंडला, डिंडौरी से नक्सलवाद से को समाप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों की बहनों के माध्यम से अगले साल से स्कूली बच्चों को सिली हुई ड्रेस उपलब्ध करवाई जाएगी।

Weather Update : क्या कहता है कल का मौसम, किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, कहां आंधी-ओलों से बढ़ेगी परेशानी

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Weather Forecast Tomorrow : देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 1 अगस्त को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

 

मध्यप्रदेश में 1 अगस्त 2026 के लिए मानसूनी गतिविधियों के चलते भारी बारिश, तेज हवाओं के चलने और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के 14 जिलों में अचानक बाढ़ आने का खतरा भी जताया गया है और पूरे सूबे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों, मछुआरों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

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इन 19 राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट

 

1 अगस्त को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में अगले कुछ दिनों के दौरान छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश जारी रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है।

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पहाड़ी राज्यों में बढ़ सकती है मुश्किल

 

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रह सकता है।

 

ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और वहां जाने वाले पर्यटकों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

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पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा

 

असम और अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। निचले क्षोभमंडल स्तर पर मध्य असम के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है, जो मौसम की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।

गुजरात से केरल तक भी मौसम सक्रिय

मौसम विभाग के अनुसार तट से दूर बना एक निम्न दबाव क्षेत्र दक्षिणी गुजरात से उत्तरी केरल तक फैले मौसम तंत्र को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते पश्चिमी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

August 1 Rule Changes : 1 अगस्त से बदल सकते हैं LPG Cylinder, Tatkal Booking और Credit Card के नियम, जानें किन बातों का पड़ेगा असर

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1 August Rules Changes: हर महीने की शुरुआत के साथ कई ऐसे नियम और शुल्क बदलते हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के कामों पर पड़ सकता है। 1 अगस्त से भी LPG Cylinder Prices, Railway Tatkal Booking, Credit Card Rewards, Banking Charges और Digital KYC से जुड़े कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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हालांकि, इनमें से हर बदलाव का असर सभी लोगों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन पहले से जानकारी होने पर आप अनावश्यक खर्च और किसी तरह की परेशानी से बच सकते हैं। आइए जानते हैं 1 अगस्त से किन चीजों पर नजर रखना जरूरी है।

 

1 अगस्त को बदल सकते हैं LPG Cylinder के दाम

 

हर महीने की शुरुआत में तेल विपणन कंपनियां (OMCs) घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में 1 अगस्त को Indane, Bharat Gas और HP Gas Cylinder की नई कीमतें जारी हो सकती हैं।

 

LPG की कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, LPG के बेंचमार्क रेट और रुपये-डॉलर की विनिमय दर जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

 

अगर घरेलू LPG सिलेंडर महंगा होता है तो इसका सीधा असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ सकता है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस की लागत प्रभावित हो सकती है।

 

ध्यान रखें कि LPG की कीमतें शहर के हिसाब से अलग हो सकती हैं। इसका कारण परिवहन लागत और स्थानीय टैक्स हैं। इसलिए सिलेंडर बुक करने से पहले अपने शहर की लागू कीमत जरूर जांच लें।

 

LPG Subsidy लेने वाले भी करें ये काम

 

अगर आपको LPG सब्सिडी मिलती है तो सिलेंडर खरीदने के बाद अपने बैंक खाते में सब्सिडी की रकम क्रेडिट हुई है या नहीं, यह भी जरूर जांच लें। इसके लिए अपने बैंक खाते की एंट्री या संबंधित डिजिटल बैंकिंग सुविधा के जरिए भुगतान की जानकारी देखी जा सकती है।

 

2. Tatkal Ticket Booking के नियमों में बदलाव

 

रेल यात्रियों के लिए भी 1 अगस्त से Tatkal Ticket Booking से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रेलवे रिजर्वेशन काउंटर से Tatkal टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के लिए टोकन वितरण और Tatkal बुकिंग विंडो के खुलने के समय को सिंक्रोनाइज करने की नई प्रक्रिया लागू कर रहा है। इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को लंबी कतारों से राहत देना है। नई व्यवस्था में यात्रियों को पहले टोकन लेने और फिर टिकट बुक कराने के लिए दो बार इंतजार करने की जरूरत कम हो सकती है।

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इसका फायदा खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों, कभी-कभार ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों और ऑफलाइन टिकट बुक कराने वालों को मिल सकता है। वहीं, ऑनलाइन Tatkal टिकट बुकिंग मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जारी रहेगी।

 

3. Credit Card Rewards और Banking Charges में बदलाव संभव

 

1 अगस्त से कुछ बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने Credit Card Reward Programs और Fee Structure में बदलाव कर सकती हैं। इन बदलावों में रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक, ट्रांजैक्शन चार्ज, सर्विस फीस या कुछ खास कैटेगरी में मिलने वाले लाभ शामिल हो सकते हैं। अगर आप नियमित रूप से Credit Card का इस्तेमाल करते हैं तो अपने कार्ड जारी करने वाले बैंक की नई शर्तें और शुल्क जरूर जांच लें। खासकर उन ग्राहकों को सावधान रहना चाहिए जो रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैशबैक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

Bajaj Pulsar का नया मॉडल जल्द होगा लॉन्च, 12 अगस्त को होगा बड़ा खुलासा, जानें क्या होगा खास

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Bajaj Pulsar New Model: बजाज ऑटो अपनी पॉपुलर Pulsar बाइक रेंज में बड़ा अपडेट करने की तैयारी में है। कंपनी ने पुष्टि की है कि 12 अगस्त को पुणे में एक बड़ा प्रोडक्ट अनाउंसमेंट किया जाएगा। कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि कौन-सी बाइक पेश की जाएगी, लेकिन हाल ही में जारी किए गए टीजर और सामने आई रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि नई जनरेशन की Pulsar से पर्दा उठ सकता है।

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टीजर में दिखी नई Pulsar की झलक

 

बजाज ऑटो ने सोशल मीडिया पर एक नया टीजर जारी किया है। इसमें एक ढकी हुई मोटरसाइकिल दिखाई गई है, जिसका डिजाइन काफी मस्कुलर नजर आ रहा है। टीजर में “Twist Into An All-New Rush” टैगलाइन का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, टीजर में बाइक के डिजाइन की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन बाइक की बॉडी, प्रोपोर्शन और स्टांस को देखकर यह नई जनरेशन Pulsar जैसी लगती है। बजाज ने इससे पहले भी फेस्टिव सीजन से पहले कई नए मॉडल लॉन्च करने की अपनी योजना के संकेत दिए थे। ऐसे में 12 अगस्त का यह इवेंट कंपनी की Pulsar रेंज के लिए खास हो सकता है।

 

Pulsar 125 या Pulsar 150 हो सकती है नई बाइक?

 

टीजर में दिखाई गई बाइक का डिजाइन हाल ही में टेस्टिंग के दौरान देखी गई एक टेस्ट म्यूल से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है। इस बाइक को भारी कैमोफ्लाज के साथ सड़कों पर टेस्टिंग करते हुए देखा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बाइक नई जनरेशन Pulsar 125 या अपडेटेड Pulsar 150 हो सकती है। दोनों ही मॉडल Bajaj Pulsar पोर्टफोलियो के अहम मॉडल हैं और कंपनी के लिए इनकी बिक्री काफी महत्वपूर्ण है।

 

डिजाइन और फीचर्स में मिल सकते हैं बड़े बदलाव

 

नई Pulsar में कंपनी डिजाइन के साथ-साथ फीचर्स और टेक्नोलॉजी में भी बदलाव कर सकती है। हालांकि, बजाज ने अभी तक इसके इंजन, फीचर्स, कीमत या स्पेसिफिकेशन की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। उम्मीद है कि नई बाइक में मौजूदा मॉडल की तुलना में ज्यादा मॉडर्न डिजाइन, बेहतर फीचर्स और अपडेटेड टेक्नोलॉजी देखने को मिल सकती है।

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12 अगस्त को साफ होगी पूरी तस्वीर

बजाज ऑटो ने फिलहाल बाइक का नाम और स्पेसिफिकेशन आधिकारिक तौर पर नहीं बताए हैं। इसलिए Pulsar 125 या Pulsar 150 में से कौन-सा मॉडल पेश किया जाएगा, इसकी पुष्टि 12 अगस्त को ही होगी। Pulsar Bajaj Auto की सबसे लोकप्रिय बाइक सीरीज में से एक है। ऐसे में नई जनरेशन मॉडल की एंट्री से 125cc और 150cc सेगमेंट में मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।