PM-KISAN 24th Installment: कब आएगी पीएम किसान की अगली किस्त? इन 3 जरूरी कामों के बिना अटक सकते हैं ₹2000

PM Kisan Next Installment Update: केंद्र सरकार की सबसे लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को लेकर किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके खातों में अगली यानी 24वीं किस्त के ₹2,000 कब ट्रांसफर किए जाएंगे।

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को वर्ष 2030-31 तक विस्तार दिए जाने के बाद अब अगली किस्तों को लेकर स्थिति और भी लगभग स्पष्ट हो गई है। आइए जानते हैं कि अगली किस्त का पैसा आपके बैंक खाते में किस महीने आ सकता है और किन किसानों का पैसा अटक सकता है।

कब आ सकती है PM-KISAN की 24वीं किस्त?

पीएम किसान योजना के नियमानुसार, किसानों को हर साल ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों (₹2,000-₹2,000) में दी जाती है। यह पैसा हर 4 महीने के अंतराल पर सीधे DBT के जरिए खातों में भेजा जाता है। सालाना किस्तों का चक्र:

  • पहली किस्त: अप्रैल से जुलाई के बीच
  • दूसरी किस्त: अगस्त से नवंबर के बीच
  • तीसरी किस्त: दिसंबर से मार्च के बीच

23वीं किस्त का पैसा जारी किए जाने के बाद, अब योजना के नियमित चक्र के अनुसार पीएम किसान योजना की अगली यानी 24वीं किस्त नवंबर-दिसंबर 2026 के बीच देश के करोड़ों पात्र किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है।

इन 3 जरूरी कामों के बिना अटक सकती है अगली किस्त

अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त का पैसा बिना किसी रुकावट के सीधे आपके बैंक खाते में पहुंचे, तो पोर्टल पर जाकर ये 3 काम तुरंत पूरे कर लें:

ई-केवाईसी प्रक्रिया: जिन किसानों की e-KYC पूरी नहीं हुई है, उन्हें अगली किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। इसे आप पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर आधार OTP या नजदीकी CSC सेंटर से बायोमेट्रिक के जरिए पूरा कर सकते हैं।

लैंड सीडिंग: आपकी खेती की जमीन का सरकारी पोर्टल पर डिजिटल सत्यापन होना अनिवार्य है। यदि स्टेटस में ‘Land Seeding – No’ दिख रहा है, तो अपने तहसील या कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

डीबीटी और आधार-बैंक लिंक: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और उसमें DBT का ऑप्शन एक्टिव होना अनिवार्य है।

पोर्टल पर ऐसे चेक करें अपना बेनेफिशियरी स्टेटस

  • अगर आप चेक करना चाहते हैं कि आपको अगली किस्त मिलेगी या नहीं:
  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर ‘Farmers Corner’ सेक्शन में जाएं और ‘Know Your Status’ पर क्लिक करें।
  • अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा दर्ज करके ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
  • स्क्रीन पर आपकी ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और बैंक आधार लिंकिंग का स्टेटस दिख जाएगा। यदि सभी के आगे ‘YES’ लिखा है, तो आपकी अगली किस्त सुरक्षित है।

PM Kisan 24th Installment : 24वीं किस्त से पहले किसानों के लिए आई बड़ी खुशखबरी, मोदी सरकार का बड़ा तोहफा

PM Kisan Nidhi Yojana 24th Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त मिलने के बाद अब किसानों को 24वीं किस्त का इंतजार है। सरकार की ओर से 24वीं किस्त जारी करने की तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। इस बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। 

 

2031 तक जारी रहेगी पीएम किसान योजना, कैबिनेट ने लगाई मुहर

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देश के करोड़ों किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को अगले 5 वर्षों के लिए जारी रखने को मंजूरी दे दी है। अब यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक लागू रहेगी। सरकार ने इस योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बजट प्रस्तावित किया है। इससे पात्र किसानों को पहले की तरह आर्थिक सहायता मिलती रहेगी। 

 

पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि 2000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाती है। किस्तों का समय फसल चक्र के अनुसार तय किया गया है, ताकि किसानों को बुवाई और खेती की तैयारी के दौरान समय पर आर्थिक मदद मिल सके।

 

 

हालांकि, योजना की किस्तें आमतौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी होती हैं। ऐसे में 24वीं किस्त अक्टूबर में आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

 

पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों में 2,000- 2,000 रुपए करके सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। अगली किस्त का लाभ बिना किसी परेशानी के पाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी जानकारियां और दस्तावेज पहले से अपडेट रखने चाहिए।

 

24वीं किस्त के लिए पूरे कर लें ये 5 जरूरी काम

1. e-KYC जरूर पूरी करें

 

पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए e-KYC पूरा होना जरूरी है। अगर आपने अभी तक e-KYC नहीं कराई है तो इसे जल्द पूरा कर लें। PM Kisan पोर्टल पर OTP के जरिए e-KYC की जा सकती है। इसके अलावा नजदीकी CSC सेंटर पर बायोमेट्रिक e-KYC और PM Kisan मोबाइल ऐप पर Face Authentication की सुविधा भी उपलब्ध है।

 

2. Aadhaar और बैंक खाते की लिंकिंग जांचें

 

पीएम किसान की रकम Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए बैंक खाते में भेजी जाती है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता Aadhaar और NPCI से जुड़ा हुआ है तथा DBT सक्रिय है। किसी तरह की समस्या होने पर बैंक से संपर्क करके इसे ठीक करा लें।

 

3. जमीन का रिकॉर्ड अपडेट रखें

 

किसानों को अपनी खेती की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच लेने चाहिए। जमीन का रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने, पोर्टल पर मैपिंग की समस्या, म्यूटेशन लंबित होने या जमीन से संबंधित विवाद जैसी स्थिति में पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए जमीन के रिकॉर्ड में किसी गलती को समय रहते ठीक कराना जरूरी है।

 

4. बैंक खाते की जानकारी चेक करें

 

बैंक खाते में दर्ज नाम, खाता संख्या, IFSC Code और KYC की जानकारी सही है या नहीं, यह जरूर जांच लें। बैंक डिटेल में गलती होने पर किस्त का भुगतान अटक सकता है। अगर कोई जानकारी गलत है तो बैंक से संपर्क करके उसे अपडेट कराएं।

 

5. PM Kisan Beneficiary Status चेक करें

 

किसान यह भी जांच सकते हैं कि उनका नाम पीएम किसान की लाभार्थी सूची में है या नहीं। इसके लिए PM Kisan पोर्टल पर जाकर Beneficiary List विकल्प चुनें। इसके बाद राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव की जानकारी दर्ज करके Get Report पर क्लिक करें। यहां लाभार्थियों की सूची में अपना नाम चेक किया जा सकता है।

 

किन वजहों से अटक सकती है PM Kisan की किस्त?

 

पीएम किसान की किस्त रुकने की प्रमुख वजहों में e-KYC अधूरी होना, बैंक खाते की गलत जानकारी, Aadhaar-बैंक लिंकिंग की समस्या, DBT सक्रिय नहीं होना और जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी शामिल हो सकती हैं।

 

इसलिए 24वीं किस्त की आधिकारिक तारीख घोषित होने से पहले इन सभी जानकारियों को जांच लेना किसानों के लिए उपयोगी रहेगा। ध्यान दें कि 24वीं किस्त की तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, इसलिए अक्टूबर में किस्त आने की बात फिलहाल अनुमान पर आधारित है।

PM-KISAN: पीएम किसान योजना पर मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, ₹3.15 लाख करोड़ के भारी-भरकम बजट को भी मिली मंजूरी

PM KISAN Extension News: देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। सरकार ने अगले 5 सालों के लिए योजना के तहत ₹3.15 लाख करोड़ का कुल वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया है।

इस फैसले से साफ है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि निवेश में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। आइए आपको बताते हैं कि पीएम किसान योजना के इस विस्तार से देश के किसानों को क्या बड़े फायदे मिलेंगे और अब तक के आंकड़े क्या कहते हैं।

₹3.15 लाख करोड़ से किसानों को क्या मिलेगा?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल ₹6,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो ₹2,000 की तीन समान किश्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों (DBT) में ट्रांसफर होती है। 2030-31 तक योजना के विस्तार से देश के करोड़ों किसानों को समय पर खाद, बीज, सिंचाई और कृषि उपकरणों की खरीदारी के लिए सीधी वित्तीय मदद मिलती रहेगी।

योजना के तहत आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचता है।

PM-KISAN की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियां

फरवरी 2019 में शुरू हुई यह योजना देश की सबसे सफल टेक्नोलॉजी-ड्रिवन जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक बन चुकी है:

₹4.47 लाख करोड़ से अधिक ट्रांसफर: योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 23 किश्तों के जरिए देश के किसानों के बैंक खातों में ₹4.47 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि भेजी जा चुकी है।

23वीं किश्त का फायदा: योजना की 23वीं किश्त के तहत 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को ₹18,984 करोड़ से ज्यादा का फंड जारी किया गया।

महिला किसानों को संबल: योजना के तहत महिला किसानों को ₹1.06 लाख करोड़ से ज्यादा दिए गए हैं। योजना का हर चौथा लाभार्थी एक महिला किसान है।

महामारी में सहारा: कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को राहत देने के लिए योजना के तहत ₹1.71 लाख करोड़ से ज्यादा की मदद पहुंचाई गई थी।

NITI Aayog की रिपोर्ट: पीएम किसान से बदला कृषि का स्वरूप

नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (DMEO) द्वारा किए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में पीएम किसान योजना के कई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 92% से अधिक लाभार्थियों ने माना कि उन्होंने इस पैसे का उपयोग खाद, बीज और खेती से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया। लगभग 85% किसानों ने पुष्टि की कि इस योजना से उनकी कृषि आय में सुधार हुआ है और साहूकारों के कर्ज पर उनकी निर्भरता कम हुई है। साथ ही खाद्यान्न उत्पादन में साल 2020-21 से 2025-26 के बीच बंपर बढ़त दर्ज की गई है।

  • खेती का दायरा लगभग 9.65% बढ़ा।
  • उत्पादकता में 10.53% का इजाफा हुआ।
  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 21.18% बढ़ा।

‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मजबूत स्तंभ

पीएम किसान योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों में स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की भावना जगा रही है। आधार आधारित सत्यापन और बिना किसी बिचौलिए के सीधे पैसे ट्रांसफर होने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और सरकार तथा किसानों के बीच भरोसा मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाया जाए, आधुनिक सुविधाओं से लैस हों मंडियां

CM Krishak Chhatravriti Yojana

CM Krishak Chhatravriti Yojana: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों के मेधावी पाल्यों के लिए संचालित मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

 

शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 172वीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वर्ष 2026-27 के ₹3025.49 करोड़ के बजट सहित किसान कल्याण, कृषि विपणन एवं मंडी व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की मंडियों का आधुनिकीकरण एवं पुनरोद्धार करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए, ताकि किसानों को बेहतर, पारदर्शी एवं सुविधाजनक विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो सके। उन्होंने मंडियों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था सहित सभी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने मंडी स्थलों में पीपीपी मॉडल पर कृषि उपज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने तथा इसके लिए नियमों को अधिक व्यवहारिक एवं निवेश अनुकूल बनाने के निर्देश दिए, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य, मूल्य संवर्धन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने अधिकाधिक मंडियों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) प्लेटफॉर्म से जोड़ने, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से अधिकाधिक किसानों को जोड़ने तथा प्रत्येक जनपद में ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

वर्ष 2026-27 के बजट को अनुमोदित किया गया

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित आय-व्यय अनुमान तथा वर्ष 2026-27 के बजट को अनुमोदित किया गया। वर्ष 2026-27 के लिए ₹2228.59 करोड़ की अनुमानित प्राप्तियों तथा ₹3025.49 करोड़ के व्यय प्रावधान को स्वीकृति प्रदान की गई।

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेश की मंडी समितियों की आय वर्ष 2024-25 के ₹1991.33 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹2305.80 करोड़ पहुंच गई है, जिससे 15.79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

 

बजट में मंडी स्थलों के निर्माण एवं विस्तार, संपर्क मार्गों के निर्माण एवं मरम्मत, ग्रामीण हाट, किसान बाजार, गोवंश आश्रय स्थलों, छात्रावास निर्माण, मंडी समितियों के लिए भूमि क्रय तथा अन्य विकास कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। पूर्व से स्वीकृत निर्माण कार्यों को गति देने के लिए ₹1212.02 करोड़ का प्रावधान भी किया गया है।

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना

संचालक मंडल ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना तथा मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना की अवधि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2030 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। इन दोनों योजनाओं के संचालन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे दुर्घटना अथवा खेत-खलिहान में अग्निकांड जैसी परिस्थितियों में किसानों एवं उनके परिवारों को समयबद्ध आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।

 

बैठक में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत दलहन एवं तिलहन की खरीद व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं को ब्याजमुक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

 

बैठक में परिषद के वित्तीय एवं प्रशासनिक विषयों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने पिछली बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए सभी किसान हितैषी एवं विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।

कागज से नहीं, भ्रांतियों से बचने की आवश्यकता है

National Paper Day

-गगन गुप्ता
National Paper Day: प्रतिवर्ष 1 अगस्त को राष्ट्रीय कागज़ दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल कागज़ उद्योग या व्यापार से जुड़े लोगों का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का है, क्योंकि कागज़ हमारे ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और सभ्यता का आधार है।

 

आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है, तब कागज़ को लेकर अनेक भ्रांतियां भी तेजी से फैल रही हैं। सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि कागज़ का अधिक उपयोग करने से जंगल समाप्त हो रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

 

भारत में बनने वाले कागज़ का लगभग 75 प्रतिशत पुनर्चक्रित (रद्दी) कागज़, 10 प्रतिशत कृषि अवशेषों (जैसे गन्ने की खोई, गेहूं एवं धान की भूसी) तथा केवल 15 प्रतिशत विशेष रूप से लगाए गए पेड़ों (Plantation Wood) की लकड़ी से तैयार किया जाता है। यह लकड़ी प्राकृतिक या सरकारी वनों से नहीं, बल्कि किसानों द्वारा उगाए गए वृक्षों और सामाजिक वानिकी (Social & Farm Forestry) के माध्यम से प्राप्त होती है। यही कारण है कि कागज़ उद्योग देश में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने तथा हरित आवरण के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

दूसरी ओर, सार्वजनिक वनों से काटे जाने वाले अधिकांश पेड़ों का उपयोग इमारती लकड़ी, फर्नीचर और निर्माण कार्यों में होता है। इसलिए यदि पर्यावरण संरक्षण की बात की जाए, तो हमारा ध्यान उन क्षेत्रों पर अधिक होना चाहिए जहां प्राकृतिक वनों पर वास्तविक दबाव पड़ता है।

 

कागज़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 100 प्रतिशत पुनर्चक्रण योग्य (Recyclable) और जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) है। उपयोग के बाद इसे बार-बार पुनः कागज़ में बदला जा सकता है। यही कारण है कि विकसित देशों में भी कागज़ के पुनर्चक्रण और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

 

शिक्षा, न्याय व्यवस्था, बैंकिंग, चिकित्सा, प्रशासन, शोध, साहित्य, धार्मिक ग्रंथ, संविधान, अभिलेख, मानचित्र और करोड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई इन सभी का आधार आज भी कागज़ है। डिजिटल तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन ज्ञान के स्थायी संरक्षण और विश्वसनीय दस्तावेज़ीकरण में कागज़ की भूमिका आज भी अपरिवर्तनीय है।

 

कागज़ का विवेकपूर्ण उपयोग पर्यावरण के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके पक्ष में है। जितनी अधिक मांग होगी, उतना ही अधिक नियोजित वृक्षारोपण होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और हरित क्षेत्र का विस्तार होगा। इसलिए आवश्यकता कागज का बहिष्कार करने की नहीं, बल्कि “कम करें, पुनः उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें” की भावना को अपनाने की है।

 

इन्हीं तथ्यों को समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से इंदौर पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन पिछले कई वर्षों से विद्यालयों में जागरूकता सेमिनार, चित्रकला प्रतियोगिताएं, वृक्षारोपण अभियान, सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का आयोजन करता आ रहा है।

 

राष्ट्रीय कागज दिवस पर आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि कागज़ का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे, अधिक से अधिक पुनर्चक्रण को अपनाएंगे और वृक्षारोपण को बढ़ावा देंगे। पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक मार्ग कागज़ का बहिष्कार नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, जिम्मेदार उपयोग और अधिक से अधिक हरित आवरण के निर्माण से होकर गुजरता है।

 

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम भ्रांतियों के स्थान पर तथ्यों को स्वीकार करें। कागज़ पेड़ों को समाप्त नहीं करता, बल्कि नियोजित वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करता है। जितना अधिक कागज़ पुनर्चक्रित होगा और जितनी अधिक उसकी जिम्मेदारीपूर्ण खपत होगी, उतना ही अधिक वृक्षारोपण, किसानों की आय, हरित आवरण और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।

 

आइए, इस राष्ट्रीय कागज़ दिवस पर यह संदेश जन-जन तक पहुंचाएं- “पेड़ काटकर नहीं, पेड़ लगाकर कागज़ बनता है।” “कागज़ का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग ही हरित, समृद्ध और सतत भविष्य की मजबूत नींव है।”

IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?

weather update 31 july

देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण के कई राज्यों तक बादलों की आवाजाही और बारिश का दौर लगातार जारी है। जुलाई महीने के आखिरी दिन यानी आज 31 जुलाई 2026 को मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और एक पश्चिमी विक्षोभ आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश करा सकते हैं। देश के 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

 

मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हुआ है, जो पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों और उत्तरी ओडिशा की ओर फैला हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सिस्टम अगले दो दिनों में और मजबूत हो सकता है। इसके अलावा मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है।

 

असम और गुजरात बाढ़ से बेहाल

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मौसम विभाग ने गुजरात के कुछ हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, असम में बाढ़ से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। राज्य के 12 जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य में वर्षा जन्य हादसों में अब तक 78 लोगों की जान जा चुकी है।

 

पहाड़ी राज्यों में बरस आफत या राहत?

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है। उत्तराखंड सरकार ने आज बारिश की वजह से भूस्खलन की आशंका को देखते हुए चारधाम यात्रा स्थगित कर दी है। उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इन इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में भी अगले दो दिनों तक कई इलाकों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

 

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, रामबन, जम्मू, पुंछ, कुलगाम, उधमपुर, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, गांदरबल और कुपवाड़ा समेत कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है।

 

दिल्ली NCR में कैसा रहेगा मौसम

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। IMD के ताज़ा अपडेट के मुताबिक, आज दिनभर आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। बारिश के बाद तापमान में तो कुछ गिरावट दर्ज की जाएगी, लेकिन नमी बढ़ने के कारण उमस से पूरी तरह राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।
 

उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून सक्रिय

 

उत्तर प्रदेश के पूर्वी और तटीय जिलों में मानसून एक बार फिर मेहरबान हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज समेत कई जिलों में आज भारी बारिश का अनुमान है। वहीं, बिहार के भी कई जिलों में बादलों का डेरा है और कुछ स्थानों पर वज्रपात (आसानी बिजली गिरने) की चेतावनी भी जारी की गई है। किसानों के लिए यह बारिश धान की फसल के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।

 

मौसम विभाग ने इन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

गुजरात और हिमालयी क्षेत्र के अलावा कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेेश और राजस्थान में भारी की संभावना है। इन क्षेत्रों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा असम, मेघालय, गंगीय पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश का अनुमान है। इनमें से कई क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे सामान्य जनजीवन और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

बस के आगे चट्टान की तरह हो खड़ी हो गईं ACP मोनिका शुक्ला और टल गया हादसा, किसान आंदोलन में दिखा अलग अंदाज

भोपाल में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के पास किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (एसीपी) मोनिका शुक्ला ने चलती बस के सामने खड़े होकर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। यह घटना उस समय हुई, जब प्रदर्शन कर रहे कुछ किसान पुलिस द्वारा रोकी गई बस को आगे ले जाने की कोशिश कर रहे थे। घटना के वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी बस की छत पर चढ़कर नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ लोग पीछे से बस को धक्का दे रहे हैं। जैसे ही बस आगे बढ़ने लगी, एसीपी मोनिका शुक्ला बिना पीछे हटे उसके सामने खड़ी हो गईं। उनके इस कदम से बस रुक गई और बड़ा हादसा टल गया।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एसीपी मोनिका शुक्ला की बहादुरी की खूब चर्चा हो रही है। कई लोगों ने मुश्किल और जोखिम भरी स्थिति में उनके साहस और तुरंत लिए गए फैसले की सराहना की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित दुर्घटना टल गई और मौके पर स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

एसीपी मोनिका शुक्ला कौन हैं?

मोनिका शुक्ला एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें कानून-व्यवस्था संभालने का कई वर्षों का अनुभव है। उन्होंने वर्ष 1994 में पुलिस सेवा में अपने करियर की शुरुआत की थी और 2009 में आईपीएस अधिकारी बनीं। मोनिका शुक्ला अपनी सख्त कार्यशैली और प्रशासनिक अनुभव के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा से जुड़ी अधिकारी रही हैं। उनके पति शशिकांत शुक्ला भी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। अपने लंबे करियर में मोनिका शुक्ला ने एक ऐसी अधिकारी के रूप में पहचान बनाई है, जो कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से फैसला लेने और हालात को संभालने के लिए जानी जाती हैं।

पहले भी दिखा चुकी हैं बहादुरी

यह पहली बार नहीं है, जब एसीपी मोनिका शुक्ला अपने साहस और कर्तव्य निभाने के तरीके को लेकर चर्चा में आई हों। करीब एक दशक पहले भोपाल के काजी कैंप इलाके में एक सड़क हादसे के बाद हालात बिगड़ गए थे। उस दौरान गुस्साई भीड़ ने कथित तौर पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस समय मोनिका शुक्ला खुद मौके पर पहुंचीं और हालात को शांत करने की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने पुलिस टीम के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित किया और इलाके में कानून-व्यवस्था बहाल कराई।

विरोध प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किसान संगठन बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय परिसर के पास एकत्र हुए थे। वहां पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक रखा था, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे जाने की कोशिश कर रहे थे। जैसे-जैसे माहौल तनावपूर्ण होता गया, कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को पार करते हुए बस को आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसी दौरान एसीपी मोनिका शुक्ला बस के सामने आकर खड़ी हो गईं। उनके इस कदम से बस रुक गई और स्थिति को संभाल लिया गया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोग मोनिका शुक्ला की हिम्मत, सूझबूझ और नेतृत्व की जमकर सराहना कर रहे हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर मोनिका शुक्ला की पहचान ऐसी पुलिस अधिकारी के रूप में मजबूत हुई है, जो मुश्किल हालात में भी तुरंत फैसला लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

योगी सरकार में रेशम क्षेत्र बना रहा आत्मनिर्भरता और रोजगार का मजबूत आधार

CM Yogi Adityanath

Yogi Government Silk Industry UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार रेशम क्षेत्र के समग्र विकास, किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। गुरुवार को रेशम निदेशालय लखनऊ में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने यह बात कही। उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं, बजट व्यय, प्रशिक्षण कार्यक्रमों व प्रशासनिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

समय पर योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश 

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेशम विभाग की सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध, पारदर्शी व प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही योजनाओं के भौतिक सत्यापन, नियमित मॉनिटरिंग और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूरा करने पर विशेष जोर दिया।

प्रशिक्षण व स्वरोजगार से जुड़ी कार्य योजना बनाने के निर्देश

राकेश सचान ने प्रशिक्षण केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने व प्रशिक्षित लाभार्थियों को स्वरोजगार और रेशम उत्पादन से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बजट व्यय की समीक्षा करते हुए स्वीकृत धनराशि का नियमानुसार और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कहा। साथ ही प्रत्येक मद के व्यय का सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

 

इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ प्रदेश को दिलाने के लिए समयबद्ध प्रस्ताव भेजने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आधार अपडेट कराने बैंक गया किसान, तभी गार्ड की बंदूक से चली गोली…हुआ दर्दनाक हादसा

राजधानी दिल्ली से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। हरियाणा के झज्जर जिले के एक गांव में रहने वाले 27 वर्षीय किसान मनीष कुमार की जिंदगी एक दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई। मनीष अपना आधार कार्ड अपडेट कराने दिल्ली के एक बैंक पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में वहां ऐसा हादसा हुआ जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। बैंक में गलती से चली गोली लगने से उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में सिक्योरिटी गार्ड को गिरफ्तार कर लिया है।

 सिक्योरिटी गार्ड के बंदूक से चली गोली

यह घटना सुबह करीब 10:30 बजे की है। पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार अपनी 12 बोर की डबल बैरल बंदूक में कारतूस भर रहे थे। इसी दौरान गलती से बंदूक से गोली चल गई। गोली मनीष कुमार की पीठ में लगी और वह मौके पर ही जमीन पर गिर पड़े। घटना के बाद बैंक में अफरा-तफरी मच गई। गोली चलने की आवाज सुनते ही बैंक में मौजूद कर्मचारी और ग्राहक बाहर की ओर भागे। बाद में उन्होंने मनीष कुमार को खून से लथपथ हालत में पड़ा देखा। उन्हें तुरंत इलाज के लिए राव तुला राम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बंदूक में खराबी के कारण हुआ हादसा!

पुलिस ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि बैंक के सिक्योरिटी गार्ड की बंदूक से गलती से गोली चल गई है, जिससे एक व्यक्ति घायल हो गया। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक घायल को अस्पताल भेजा जा चुका था। पूछताछ में सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार ने बताया कि वह उस दिन ड्यूटी पर देर से पहुंचे थे। बैंक खुल चुका था और कर्मचारी व ग्राहक अंदर मौजूद थे। इसी दौरान वह अपनी बंदूक में कारतूस भर रहे थे, तभी अचानक गोली चल गई। पुलिस का कहना है कि यह हादसा लापरवाही या बंदूक में किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ हो सकता है। पुलिस के अनुसार, विनोद कुमार हरियाणा के झज्जर जिले के एक गांव के रहने वाले हैं। वह भारतीय सेना में नौकरी कर चुके हैं और वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुए थे। पिछले दो साल से वह एक निजी सुरक्षा एजेंसी के जरिए बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। उनके परिवार में दो बेटे हैं, जो कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।

गिरफ्तार हुआ गार्ड

पुलिस ने जांच के दौरान घटना में इस्तेमाल की गई बंदूक को अपने कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। वहीं, मृतक मनीष कुमार के शव का पोस्टमार्टम भी कराया गया है। अब पुलिस पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गोली किन परिस्थितियों में चली। जांच के तहत पुलिस ने बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में ले ली है। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि बैंक खुलने के बाद बंदूक में कारतूस भरना लापरवाही थी या नहीं। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी सिक्योरिटी गार्ड के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। अब आगे की कार्रवाई जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी।

किसान कल्याण के लिए संकल्पित सरकार, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले, खेती से घर चलने के साथ रोजगार भी मिलता है

cm mohan yadav

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार किसानों की समृद्धि, सम्मान और कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को रफ्तार दे रही है। बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को सेवा के साथ सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसान नई तकनीक को आत्मसात करें। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और उद्यानिकी फसलों से अपनी आय बढ़ाएं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खेती से केवल एक किसान का घर नहीं चलता है, बल्कि इससे सभी प्रकार के उद्योगों के लिए कच्चा माल और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं। राज्य सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने के लिए 16 विभागों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार की है। किसानों की समृद्धि, उनकी आय दोगुनी करने के लिए जिलास्तर पर बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत मां अहिल्याबाई होल्कर की धरती इंदौर से की थी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केला की पैदावर में हुए नुकसान के लिए किसान भाईयों के खातों में सिंगल क्लिक से मुआवजा राशि वितरित की। 

 

कांवड़ियों के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेशवासियों को आज से शुरु हुए पवित्र श्रावण मास की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में प्रदेश में जहां से कांवड़ यात्रा निकलने वाली है। सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि कांवड़ियों के लिए सभी जरूरी इंतजाम पहले से कर लिए जाएं। प्रशासन सभी भक्तों के साथ है।

 

केले से बने उत्पादों ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर देश-दुनिया में बनाई पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ताप्ती मैया के आशीर्वाद से बुरहानपुर क्षेत्र अपनी उद्यानिकी फसलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के स्वादिष्ट केला, हल्दी और कपास अपने आप में बेहद खास है। यहां सभी धर्मों के बीच मिलकर रहने की संस्कृति खेती में दिखाई देती है। यहां कृषि से लेकर कपड़ा, दवा से लेकर फर्नीचर और पाइप उपकरण से लेकर सब कुछ निर्माण होता है। कपास और कपड़ा उत्पादन के लिए सहूलियत देने के लिए राज्य सरकार ने कपास पर लगने वाले मंडी टैक्स को आधा कर दिया है। इससे प्रदेशभर के कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिला, लेकिन इसके लिए मांग सबसे पहले बुरहानपुर जिसे से उठी। राज्य सरकार ऐसे सभी कल्याणकारी फैसलों के लिए किसानों के साथ खड़ी है। बुरहानपुर को केला फसल के प्रसंस्करण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। अब केला से न केवल फल, बल्कि रेशे से कपड़ा निर्माण और सजावटी समान तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से बिक्री के जरिए देश-दुनिया में बुरहानपुर को नई पहचान मिल रही है।

 

बुरहानपुर के किसानों को भी मिलेगा धार के पीएम मित्र पार्क का लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुरहानपुर के किसान भाइयों ने खेती में फसलों के विविधिकरण पर विशेष ध्यान दिया है। कपास की फसल हैंडलूम के साथ ही पॉवरलूम से जुड़े कामगारों को सशक्त बनाती है। खंडवा और बुरहानपुर की कपास मंडी में टैक्स 1 रुपए से घटाकर आधा करने के निर्देश दिए थे। बुरहानपुर के किसानों को धार के पीएम मित्र पार्क का भी लाभ मिलेगा। बुरहानपुर अब केवल कच्चे माल ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, एक्सपोर्ट का भी बड़ा हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। जिले में सिंचाई के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है। बुरहानपुर में सिंचाई का रकबा बढ़ा है। हर खेत तक पानी पहुंचाना हमारा संकल्प है।

 

ग्वालियर में टेलीकॉम सेक्टर के मैन्यूफेक्चरिंग जोन के लिए एमओयू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार महाराष्ट्र के साथ मिलकर ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना पर काम कर रही है। राज्य सरकार निवेश संवर्धन के लिए भी कार्य कर रही है। ग्वालियर को टेलीकॉम सेक्टर के मैन्यूफेक्चरिंग जोन के रूप में स्थापित करने के लिए आज नई दिल्ली में भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के बीच एक एमओयू साइन किया जाएगा। राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दिलवाने के लिए, किसानों को उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए संकल्पित है।