Miyazaki mango: 4 आम की कीमत 2.11 लाख रुपये! इसकी वजह आपको हैरान कर देगी, यूपी के किसान ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड

Miyazaki mango: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दुनिया की सबसे महंगी किस्मों में गिने जाने वाले मियाजाकी आमों ने किसान संदीप चौधरी को देश में एक नई पहचान दिलाई है। सूरत के एक व्यापारी प्रवीण गुप्ता ने चौधरी से कुल मिलाकर लगभग एक किलोग्राम वजन वाले चार मियाजाकी आम 2.11 लाख रुपये में खरीदे हैं। इस किस्म के लिए भारत में इस कीमत पर हुई यह पहली बिक्री बताई जा रही है। इस रिकॉर्ड बिक्री ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि गुप्ता ने ये आम अपनी मां के नाम पर खरीदे।

चौधरी ने बताया कि यह सौदा शुरू में 3.5 लाख रुपये में तय हुआ था। लेकिन जब उन्हें पता चला कि खरीदार यह खरीद अपनी मां को समर्पित करना चाहता है, तो उन्होंने कीमत घटाकर ₹2.11 लाख कर दी। कुल रकम में से ₹1.11 लाख ऑनलाइन मिल चुके हैं। बाकी 1 लाख रुपये का भुगतान 1 अगस्त को डिलीवरी के समय किया जाएगा।

पीएम मोदी से मिली प्रेरणा

थरोली गांव के रहने वाले चौधरी ने बताया कि गुप्ता पिछले साल भी ये आम खरीदना चाहते थे। लेकिन उस समय उन्होंने इन्हें मुख्यमंत्री को भेज दिया था। मौजूदा सौदे के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि चार आम सूरत के गुप्ता को ₹2.11 लाख में बेचे गए। उन्होंने कहा कि इस बिक्री की सबसे खास बात यह थी कि इन्हें खरीदार की मां के नाम पर खरीदा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गुप्ता ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी भावना के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि वे दोनों गुजरात में मिलेंगे, जहां आम सौंपे जाएंगे।

तीन साल पहले शुरू की थी आम की खेती

चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने तीन साल पहले मियाजाकी आमों की खेती नई सोच के साथ शुरू की थी। उन्होंने कहा कि हमने सोचा कि किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनी आय बढ़ाने के लिए महंगी और खास फसलें भी उगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरू में कई लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया। लोगों ने कहा कि आम लाखों में नहीं बिक सकते। लेकिन उनकी मेहनत अब रंग लाई है। उन्होंने बताया कि अभी उनके पास मियाजाकी आम के लगभग 40 पेड़ हैं। यह पहली बार है जब उनके चार आम ₹2.11 लाख में बिके हैं।

कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा गरीब लोगों को समर्पित

संदीप चौधरी ने यह भी कहा कि बिक्री से हुई कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा गरीब लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। चौधरी ने कहा कि तीन साल की मेहनत के बाद इस डील की कामयाबी से वे बहुत खुश हैं। मियाजाकी आमों को उनके खास लाल-बैंगनी रंग, स्वाद और पोषक गुणों की वजह से दुनिया का सबसे महंगा आम माना जाता है।

चौधरी ने बताया कि आम आमों की तुलना में इनमें विटामिन A, विटामिन C, बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा मात्रा में होते हैं। उन्होंने दूसरे किसानों से अपील की है कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऑर्गेनिक और ज़्यादा कीमत वाली फसलों की खेती भी करें।

मियाजाकी आम का जापान कनेक्शन

बता दें कि मियाजाकी (Miyazaki mango) आम दुनिया की सबसे महंगी आम की किस्मों में से एक मानी जाती है। इसका नाम जापान के मियाजाकी प्रांत के नाम पर रखा गया है, जहां इसकी व्यावसायिक खेती शुरू हुई। मियाजाकी आम को जापान में अक्सर ‘Egg of the Sun’ (Taiyo no Tamago) के नाम से भी बेचा जाता है।

यह नाम केवल उन प्रीमियम फलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो आकार, रंग और मिठास जैसे सख्त गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं। भारत के मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के कुछ किसानों ने प्रयोग के तौर पर मियाज़ाकी आम की खेती शुरू की है। हालांकि इसकी खेती अभी सीमित स्तर पर ही होती है।

मियाजाकी की खासियत

  • पकने पर इसका रंग गहरा लाल या रूबी लाल हो जाता है।
  • एक फल का वजन आमतौर पर 350-500 ग्राम तक होता है।
  • इसमें प्राकृतिक शर्करा (Sugar) की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इसका स्वाद बेहद मीठा होता है।
  • इसका गूदा रेशारहित (Fiberless), मुलायम और बेहद रसदार होता है।

मियाजाकी की कीमत

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता और उपलब्धता के अनुसार बहुत अधिक हो सकती है।
  • प्रीमियम ग्रेड के मियाज़ाकी आम की एक जोड़ी (2 आम) की नीलामी जापान में लाखों रुपये के बराबर कीमत तक पहुंच चुकी है।
  • भारत में भी इसकी खेती करने वाले कुछ किसान हैं और यहां भी इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है।

कैसे होती है खेती?

  • इसकी खेती नियंत्रित तापमान और विशेष देखभाल में की जाती है।
  • फलों को अक्सर जाल (नेट) में लटकाकर उगाया जाता है ताकि वे सुरक्षित रहें। साथ ही पूरी तरह पकने पर बिना नुकसान के तोड़े जा सकें।

उप्र : यूरिया के लिए 100 फुट ऊंची टंकी पर चढ़कर बायोमीट्रिक सत्यापन करा रहे किसान

बलरामपुर जिले के हरैया इलाके से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां महिलाओं, बुजर्गों और किसानों को यूरिया उर्वरक के लिए जान जोखिम में डालकर कथित तौर पर करीब 100 फुट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर बायोमेट्रिक सत्यापन करना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर कथित प्रकरण का वीडियो प्रसारित होने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं।

ये वीडियो कथित तौर पर बुधवार का है जो हरैया सतघरवा विकास खंड के कोहरोड़ा सहकारी समिति का बताया जा रहा है। वीडियो में एक कर्मी पानी टंकी पर बायोमीट्रिक मशीन लेकर बैठा है और किसानों से अंगूठा लगवा कर रुपये गिनते हुए उर्वरक देने की कार्यवाही कर रहा है।

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एक दूसरे वीडियो में उर्वरक लेने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ी एक महिला अपने कागजात दिखा रही है, जबकि अन्य किसान उर्वरक लेने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल कर पानी की टंकी पर चढ़ते और उतरते देखे जा सकते हैं।

किसान राम प्रकाश ने आरोप लगाया, ‘‘कर्मी हवा के लिए पानी की टंकी पर चढ़ जाते है। अगर कोई गिर पड़े तो उसके हाथ पैर टूट जायेंगे और जिंदगी बेकार हो जाएगी।

नवलगंज के ग्राम प्रधान राम निवास गौतम ने आरोप लगाया कि सचिव 15-20 दिन तक नहीं आते हैं जिसके कारण लापरवाही हो रही है और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जिलाधिकारी विपिन जैन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए है।

जिलाधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि यह मामला नेपाल से सटे सीमावर्ती इलाके का है। संभावना है कि नेटवर्क न आने के कारण ऐसा हुआ हो। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले को सही ठहराने के लिए प्राइमरी तर्क पर तभी अड़ती है, जब उसका फैसला उन्हीं तर्कों पर आधारित होता है। यहां उलटा है। यहां फैसला हो जाता है और उसके बाद उसको न्यायसंगत ठहराने के तर्क खोजे जाते हैं और तथ्य तैयार किए जाते हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद पूरे देश ने देखा कि कितने तरह के तर्कों से इसे जस्टिफाई किया गया। प्राइमरी तर्क काला धन रोकना था। लेकिन बाद में कहा गया कि जाली नोट बंद होगा, नक्सलियों की कमर टूटेगी, आतंकवादियों का नेटवर्क समाप्त होगा और जब यह सब नहीं चला तो कहा गया कि डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने के लिए फैसला हुआ है। इन सबमें प्राइमरी तर्क कहीं गायब हो गया और आज उस समय के मुकाबले दो गुने से ज्यादा नकदी चलन में है।

बहरहाल, यही हाल इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 पेट्रोल के मामले में दिख रहा है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का काम इसलिए शुरू हुआ था ताकि कच्चे तेल के आयात का बिल कम हो और लोगों को सस्ता पेट्रोल मिले। लेकिन न आयात बिल कम हुआ और न पेट्रोल सस्ता हुआ। जब मिश्रण शुरू हुआ था तब पेट्रोल की कीमत 60 रुपए लीटर के आसपास थी और अब जब सौ फीसदी पेट्रोल पंपों पर ई-20 पेट्रोल ही नॉर्मल पेट्रोल के तौर पर मिलने लगा तो कीमत दोगुनी हो गई है। आयात बिल भी बढ़ा है। इसलिए अब उसकी बात नहीं हो रही है। अब इसे किसानों के सम्मान और देश के अभिमान के नाम पर बेचा जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट लिख कर कहा है, ‘ई-20 हर बूंद में किसान का सम्मान, हर सफर में आत्मनिर्भर भारत का अभिमान’। मतलब अब किसानों की भलाई के नाम पर इथेनॉल मिश्रण को जस्टिफाई किया जाएगा। सोचें, किसानों की भलाई के नाम पर ही तंबाकू लॉबी भी प्रचार करती है।

एमपी सरकार का बड़ा निर्णय, 25 की जगह 60% किया जाएगा मूंग का उपार्जन, ई-टोकन से खाद वितरण व्यवस्था भी खत्म

भोपाल में किसानों के लगातार आंदोलन के बीच सरकार ने कई बड़े फैसले किए है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए मंत्री समूह का गठन किया था। इस समूह की किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय में बैठक हुई। बैठक में कई किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए । इसके संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य करती आई है। हमारे अन्नदाता प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार हैं और उनके परिश्रम से उत्पादित उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

 

प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं भारत सरकार द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। भारत सरकार की योजना के अंतर्गत राज्य के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार के इसी नियम के अंतर्गत निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपार्जित किया जाएगा।

 

किसानों के हित को रखा ध्यान में-मंत्री कंसाना ने बताया कि आज किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा के बाद किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर एवं हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा और हमारा प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले ।

 

स्लॉट बुकिंग 10 दिन बढ़ाई-

मंत्री कंसाना ने कहा कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है। मैं प्रदेश के किसान भाइयों-बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में खड़ी है। जहां तक खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था से संबंधित शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं का प्रश्न है, यह व्यवस्था राज्य शासन का एक महत्वपूर्ण सुधार है और आने वाले समय में इससे किसानों को काफी सुविधा एवं लाभ मिलेगा।

 

किसानों के लिए नई व्यवस्था-मंत्री कंसाना ने कहा कि चूंकि यह एक नई व्यवस्था है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त, की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे । सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।

खरीफ बुआई 95% के करीब, 107 लाख हेक्टेयर में पूरा हुआ आच्छादन : शाही

Shahi UP News

कम बारिश के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार की समयबद्ध तैयारियों और किसानों की मेहनत के कारण खरीफ फसलों का आच्छादन लक्ष्य के करीब पहुंच गया है। वर्ष 2026 में खरीफ आच्छादन का लक्ष्य 110 लाख हेक्टेयर रखा गया था, जिसके मुकाबले लगभग 107 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। यह लक्ष्य का करीब 95 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष 103 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 100 लाख हेक्टेयर में आच्छादन हो पाया था।

 

यह जानकारी बुधवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सुपर अल नीनो की आशंका के कारण सामान्य से कम वर्षा का अनुमान था। इसके बावजूद सरकार ने किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। 

 

खरीफ सीजन में 50 प्रतिशत अनुदान पर 1.73 लाख कुंतल से अधिक बीज वितरित किए गए। साथ ही दलहन, तिलहन, मूंगफली, सोयाबीन और तिल जैसी फसलों के रकबे को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। सरकार ने 6.13 लाख से अधिक किसानों को 16,449 कुंतल मुफ्त मिनी किट वितरित किए, जबकि 1.23 लाख कुंतल से अधिक बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाज के बीजों का बड़े पैमाने पर वितरण कर किसानों को कम वर्षा की परिस्थितियों में भी खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अल्प अवधि की तोरिया फसल को बढ़ावा देने का निर्णय

कृषि मंत्री ने बताया कि 28 जुलाई तक प्रदेश में औसत से लगभग 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। 11 जिलों में 40 से 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई, जबकि 13 जिलों में स्थिति और अधिक चिंताजनक रही। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने सितंबर में अल्प अवधि की तोरिया फसल को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए 1,000 कुंतल तोरिया बीज वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें 600 कुंतल मुफ्त मिनी किट और 400 कुंतल अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल खोल दिया गया है तथा 17 अगस्त के बाद ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन किया जाएगा।

7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट वितरण का लक्ष्य

श्री शाही ने किसानों को आश्वस्त किया कि योगी सरकार रबी सीजन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देगी। इसके लिए प्रमाणित बीजों की उपलब्धता और वितरण की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बीज वितरण के लिए 10 जुलाई को पोर्टल खोला जा चुका है और सितंबर के पहले सप्ताह में ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन कर समय से बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इस वर्ष 7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 36,475 कुंतल बीज निशुल्क वितरित किए जाएंगे। उन्होंने किसानों से पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील करते हुए बताया कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी ई-लॉटरी प्रणाली से होगी।

अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे 25,900 कृषि यंत्र

उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों पर अनुदान योजना के तहत भी पोर्टल 20 जुलाई से खोल दिया गया है। इसकी लॉटरी 10 अगस्त को निकाली जाएगी। फार्म मशीनरी बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर और एकल कृषि यंत्रों सहित कुल 25,900 कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। अब तक 41,762 किसानों ने आवेदन किया है। फार्म मशीनरी बैंक पर 80 प्रतिशत तक तथा कस्टम हायरिंग सेंटर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। कृषि यंत्रों के चयन की प्रक्रिया भी ई-लॉटरी के माध्यम से पूरी की जाएगी।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध

कृषि मंत्री शाही ने पत्रकारों को बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। एक अप्रैल से 28 जुलाई तक 57.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया, जिसमें से 28.88 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। लगभग इतनी ही मात्रा में अभी भी उर्वरक उपलब्ध है। यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी का पर्याप्त भंडार है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले जहां करीब 1,500 सहकारी समितियां उर्वरक वितरण करती थीं, वहीं अब 7000 समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाई जा रही है। जुलाई में ही सहकारी समितियों ने 3.22 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और 1.07 लाख मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के किसी भी ब्लॉक में उर्वरकों की कमी नहीं है।

सपा सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का अधिक वितरण 

कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2015-16 में प्रदेश में 84.98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण हुआ था, जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में यह बढ़कर 2025-26 में 118 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार किसानों को पूर्ववर्ती सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का निपटारा करने के साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया है। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे धैर्य रखें, समय पर पंजीकरण कराएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

अब प्रतियोगिता से निखरेंगी गोशालाएं, उत्कृष्ट मॉडल को मिलेगा पुरस्कार

Yogi Janata darshan

Gaushala Evaluation Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गोशालाओं को संरक्षण केंद्र से आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर एवं उत्पादक इकाइयों के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने नई पहल शुरू की है। आयोग ने प्रत्येक जिले की गोशालाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के आधार पर मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि उनके सफल मॉडल को प्रदेशभर में अपनाने की दिशा में काम होगा। 

 

मूल्यांकन में वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश के स्वास्थ्य एवं पोषण, नस्ल संवर्धन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता के प्रयास प्रमुख आधार होंगे। गोशालाओं में वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता, भूसा-चोकर का उचित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पशु आहार, नर-मादा एवं बछड़े-बछियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण, नंदीशाला की व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही सिक वार्ड, नियमित पशु चिकित्सा, कमजोर गोवंश की पृथक देखभाल, पर्याप्त शेड, स्वच्छता, सीसीटीवी, बाउंड्री वॉल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा होगी।

 

आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह एवं महेश शुक्ल तथा सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल ने गोशालाओं के समग्र विकास की कार्ययोजना पर मंथन के बाद पूरी योजना तैयार की।

अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि आयोग का उद्देश्य गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए बायोगैस संयंत्र, गोबर एवं गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग, जैविक खाद और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही आसपास के किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। आयोग का मानना है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से प्रदेश की गोशालाओं में बेहतर प्रबंधन, गोवंश संरक्षण, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित होंगे।

भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन, मूंग खरीदी और खाद वितरण को लेकर हल्लाबोल, सीएम हाउस का घेराव पर अड़े

राजधानी भोपाल में आज दूसरे दिन भी किसानों का  प्रदर्शन लगाार जा रही है। राजधानी नर्मदापुरम रोड पर वीर सावरकर सेतु के ठीक सामने सैकड़ों की संख्या में किसान जो मंगलवार शाम से डटे  है वह अब भी तरह वहीं डटे है। किसान क्रांति पैदल यात्रा के तहत नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल और रीवा सहित अलग-अगल जिले से पहुंचे किसान अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह डटे है और सीएम हाउस जाने की मांग पर अड़े है। किसानों मुख्य मांग मूंग की सरकारी खरीदी और खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल रद्द करना है। वहीं किसानों ने सकार से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।

 

“वेबदुनिया' ने किसान आंदोलन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया तो पाया कि पुलिस ने आंदोलन स्थल को पूरी तरह सील  कर दिया है। बागसेवनिया थाने से एमपी नगर आने वाली रोड को पूरी तरह लॉक कर दिया है। वहीं वीर सावरकर सेतु पर बेरिकेट्स के साथ बसों और वज्र के जरिए किसानों को रोका गया है। वहीं  आज दूसरे दिन सुबह से किसान अलग-अलग जत्थों  में भोपाल पहुंचे और रैली के रूप में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे है। इस दौरान किसानों की पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई।  किसानों के हाथों में झंडे और बैनर थे तथा वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

 

प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि मूंग की सरकारी खरीदी समय पर और पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तकनीकी दिक्कतों और सीमित स्लॉट के कारण समय पर खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है।किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 

 

आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में युवा भी किसानों के समर्थन में नजर आए। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने किसानों के साथ नारेबाजी की और उनकी मांगों का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खेती और किसानों से जुड़े मुद्दे केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

 

किसानों की पैदल यात्रा और प्रदर्शन के दौरान राजधानी की कई प्रमुख सड़कों पर लंबा जाम देखने को मिला। आंदोलन के चलते आम लोगों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। आंदोलन के कारण शहर के कई हिस्सों में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। किसान आंदोलन के कारण आज कई स्कूलों के साथ बरकताउल्ला यूनिवर्सिटी में छुटी घोषित रही। 

 

आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा और यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई। प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत के प्रयास में जुटा रहा।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले सख्ती, DJ, हथियार और नॉन-वेज पर रोक, जानें नए नियम और ट्रैफिक एडवाइजरी

Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के बॉर्डर वाले जिलों की पुलिस ने तीर्थ मार्गों पर बहुत बड़े DJ सेटअप, हथियारों और मांसाहारी दुकानों पर रोक लगा दी है। इसी बीच, मेरठ के NH-58 पर नए डायवर्जन के कारण संकरे हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर घंटों लंबे जाम की स्थिति बन गई है।

बता दें कि यह धार्मिक यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि तक चलती है। इसमें लाखों कांवड़िये पैदल या गाड़ियों से हरिद्वार और गंगोत्री जैसी जगहों पर गंगाजल लेने जाते हैं और फिर वापस आकर उसे स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं।

वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बागपत, आगरा और दिल्ली से सटे जिलों की पुलिस ने कई इंतजाम किए हैं। इनमें रूट डायवर्जन, अलग पार्किंग जोन और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक शामिल है। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा मार्गों पर मौजूद खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा जांच भी की जा रही है।

इस साल क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (Do’s)क्या न करें (Don’ts)
यात्रा के दौरान हमेशा अपना पहचान पत्र (ID Proof) साथ रखें।हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडा, तलवार या किसी भी तरह का हथियार साथ न रखें।
केवल प्रशासन द्वारा तय कांवड़ मार्ग का ही इस्तेमाल करें।दोपहिया वाहन पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल न करें।
बागपत: कांवड़/DJ की ऊंचाई 10 फीट, चौड़ाई 12 फीट से कम रखें और आवाज 75 डेसिबल से ज्यादा न हो।कांवड़ मार्ग के भोजनालयों में नॉन-वेज, प्याज और लहसुन का सेवन या परोसना प्रतिबंधित है।
आगरा: कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट से कम रखें और DJ तय मानकों के अनुसार ही बजाएं।कांवड़ मार्ग और मंदिरों के आसपास मांस की दुकानें बंद रहेंगी।
शिविर (कैंप) आयोजक CCTV, अग्नि सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें।ढाबों और होटल में खाना या पानी खरीदने से पहले रेट लिस्ट जरूर देखें, तय कीमत से ज्यादा भुगतान न करें।

अलग-अलग शहरों में DJ और कांवड़ की ऊंचाई को लेकर क्या नियम हैं?

बागपत पुलिस ने कांवड़ और DJ सेटअप की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तक सीमित कर दी है, साथ ही DJ और दूसरे सिस्टम के लिए आवाज का लेवल 75 डेसिबल तक ही रखने का नियम बनाया है। हथियार – जैसे हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडे या तलवार लेकर कांवड़ ले जाने की इजाजत नहीं होगी, और दो-पहिया वाहनों पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।

आगरा में, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई एक अलग कोऑर्डिनेशन मीटिंग में कांवड़ की ऊंचाई की सीमा 12 फीट तय की गई और DJ की आवाज तय नियमों के दायरे में रखने का निर्देश दिया गया। बैठक में कांवड़ रूट और मंदिरों के आस-पास मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, खाद्य विभाग की टीमें ढाबों और होटलों की जांच करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वहां रेट लिस्ट लगी हो।

कहां लग रहा है सबसे ज्यादा जाम?

फिलहाल, सबसे ज्यादा बुरा हाल मेरठ के पास हस्तिनापुर-चांदपुर रास्ते का है। 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच NH-58 पर भारी गाड़ियों के चलने पर रोक होने के कारण, ट्रकों को हस्तिनापुर के खादर (नदी के किनारे वाले इलाके) से होकर इस संकरी सड़क पर भेजा जा रहा है। इससे गाड़ियों की लंबी लाइनें लग रही हैं और दिन भर लगभग लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता पहले से ही खराब हालत में था। अब कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़े ट्रैफिक ने परेशानी और बढ़ा दी है।

लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात करने की मांग की है, क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान और व्यापारी घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं।

किन शहरों में लागू किए गए हैं रूट डायवर्जन?

शहर/मार्गक्या बदलाव किए गए हैं?
मेरठ (NH-58)28 जुलाई से 10 अगस्त तक भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। ट्रकों को हस्तिनापुर खादर-चांदपुर मार्ग से भेजा जाएगा, जिससे इस रूट पर जाम की स्थिति बन सकती है।
मुजफ्फरनगर (NH-58)29 जुलाई की मध्यरात्रि से 12 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। 4 अगस्त तक हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि उसके बाद दोनों लेन कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।
हरिद्वारसहारनपुर, दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर से आने वाले वाहनों को मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
देहरादून-ऋषिकेश मार्गवाहनों को नेपाली तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर के रास्ते चमगादड़ टापू और लालजीवाला पार्किंग भेजा जाएगा। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
दिल्ली से सटे जिलेमेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस के साथ संयुक्त समन्वय किया गया है। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इमरजेंसी पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है।

रास्ते में खाने-पीने की जगहों के लिए क्या नियम हैं?

अधिकारियों के मुताबिक, फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने यात्रा के रास्तों पर पड़ने वाले होटलों और ढाबों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अकेले हापुड़ में ही ऐसे लगभग 130 होटल और ढाबे हैं।

मुजफ्फरनगर में, असिस्टेंट कमिश्नर (फूड) अर्चना धीरन ने PTI को बताया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों में नॉन-वेज खाना, प्याज और लहसुन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि यह नियम हर साल लागू किया जाता है और छह टीमें बासी खाने की जांच करती हैं।

इसके अलावा, यात्रियों से अधिक कीमत न वसूला जाए इसके लिए 21 जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम भी तय कर दिए हैं। साथ ही, खाने-पीने की जगहों पर मालिक की जानकारी, लाइसेंस और फूड-सेफ्टी QR कोड दिखाना जरूरी होगा। वहीं, खाना बनाने वाले कर्मचारियों के लिए दस्ताने (ग्लव्स) पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

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किसानों की मांगों पर कृषि मंत्री कंषाना का बड़ा आश्वासन, केंद्र से मूंग खरीद लक्ष्य बढ़ाने की मांग

मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी सहित किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी जायज़ मांगों के प्रति संवेदनशील है और सभी मुद्दों का शीघ्र एवं सकारात्मक समाधान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए तथा मूंग खरीदी सहित अन्य विषयों पर आवश्यक कदम उठाए जाएँ।

 

 कृषि मंत्री  श्री कंषाना ने किसानों से शांति बनाए रखने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार और किसान एक-दूसरे के सहयोगी हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना तथा उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाना है। मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों और समस्याओं को विस्तार से रखा, जिस पर कृषि मंत्री श्री कंषाना ने सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर शीघ्र निर्णय लेने का भरोसा दिलाया।

 

कृषि मंत्री श्री कंषाना ने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी संवाद और सकारात्मक प्रयासों से किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान होगा तथा प्रदेश में खरीदी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुचारु बनाया जाएगा। इस दौरान सचिव कृषि श्री निशांत बरबड़े एवं कृषि विभाग के अधिकारी, किसान संगठन के प्रतिनिधि मण्डल उपस्थित रहे।

 

केंद्र से मूंग उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने के लिये किया अनुरोध

किसानों से चर्चा के बाद कृषि मंत्री श्री कंषाना ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का क्षेत्रफल लगभग 14.30 लाख हेक्टेयर है। गत वर्ष के अंतिम अनुमान/ इस वर्ष के तृतीय अग्रिम अनुमान अनुसार प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की उत्पादकता 1410 कि. ग्राम प्रति हेक्टेयर है। इस प्रकार प्रदेश का कुल उत्पादन 20.16 लाख मेट्रिक टन संभावित है। केन्द्र सरकार द्वारा गत वर्ष 4.19 लाख मे. टन का लक्ष्य प्रदान किया गया था, जिसके विरूद्ध प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का कुल 7.72 लाख मे. टन का उपार्जन किया गया।
 

किसानों को बेहतर मूल्य मिले और किसान भविष्य में भी दलहन उत्पादन के प्रति इच्छुक रहे इसे सुनिश्चित करने के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य का अधिकाधिक लाभ उन्हें दिया जाना आवश्यक है, जो केन्द्र सरकार द्वारा प्रदत्त लक्ष्य सीमा से संभव नहीं हो सकेगा। अत: विपणन वर्ष 2026-27 में भारत सरकार की प्राईस सर्पोट स्कीम अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर तय किये हुए लक्ष्य में से अन्य ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादन करने वाले राज्यों के बचत के प्रतिशत को प्रदेश को प्रदाय करते हुए प्रेषित संशोधित प्रस्ताव अनुसार लक्ष्य सीमा को बढ़ाकर प्रदेश के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत मात्रा, 8.06 लाख मेट्रिक टन का लक्ष्य प्रदाय किया जाये।

सरकार ने किसानों को दिलाया भरोसा, यूपी में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध

UP fertilizer availability: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार वर्तमान खरीफ सीजन में मुख्य फसल धान की रोपाई और अन्य फसलों की बुवाई के उपरांत किसानों को फसल संस्तुति के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि परेशान न हों, प्रदेश में उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि व संबंधित विभाग के अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग करें। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भ्रामक सूचनाओं व अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से उर्वरक भंडारण न करें। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। 

प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खरीफ सीजन- 2026 के तहत सोमवार (27 जुलाई) तक कुल 28.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री की जा चुकी है, जबकि 29.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अब भी उपलब्ध है। सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

 

किसी भी समस्या पर जनपद व मंडल के अधिकारियों से संपर्क करें किसान

कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सभी 18 मंडलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। जनपदों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वे जनपद, मंडल के कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। मंडलवार यूरिया उपलब्धता के आंकड़े इस प्रकार हैं-

  • सहारनपुर : 43,275 मी. टन
  • मेरठ : 67551 मी. टन
  • आगरा : 95852 मी. टन 
  • अलीगढ़ : 86474 मी. टन 
  • बरेली : 116987 मी. टन
  • मुरादाबाद : 83972 मी. टन
  • कानपुर : 143076 मी. टन
  • प्रयागराज : 111070 मी. टन
  • झांसी : 47722 मी. टन
  • चित्रकूट : 50189 मी. टन
  • वाराणसी : 109312 मी. टन
  • मीरजापुर : 36014 मी. टन
  • आजमगढ़ : 73086 मी. टन
  • गोरखपुर : 91659 मी. टन
  • बस्ती : 51638 मी. टन
  • गोंडा : 59199 मी. टन
  • लखनऊ : 138186 मी. टन
  • अयोध्या : 71695 मी. टन