यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई तेज हो गई है। इस बीच ब्रिटेन ने सऊदी को मदद देने का फैसला किया है। सोमवार को न्यूयॉर्क जाते समय पत्रकारों से बात करते हुए ब्रिटिश पीएम ने कहा ब्रिटेन एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए टैंकर देगा। यानी हवा में उड़ते सऊदी लड़ाकू विमानों में ईंधन भरा जा सकेगा। इधर लड़ाई का असर आम लोगों पर पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में 3,000 से ज्यादा यमनी शरणार्थी जिबूती पहुंचे हैं। UN के मुताबिक, लाल सागर के तट पर लड़ाई बढ़ने से अब तक 1.2 लाख से ज्यादा यमनी लोग बेघर हो चुके हैं। एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग क्या है? इसमें एक टैंकर विमान हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमान में ही ईंधन भरता है। लड़ाकू विमान को ईंधन भरने के लिए एयरबेस पर वापस नहीं उतरना पड़ता। इससे लड़ाकू विमान ज्यादा देर तक हवा में रह सकते हैं और लंबे समय तक निगरानी या रक्षा अभियान चला सकते हैं। ब्रिटेन RAF वॉयजर टैंकर विमान भेज सकता है ब्रिटेन की ओर से एक RAF वॉयजर टैंकर विमान तैनात किए जाने की उम्मीद है। यह विमान साइप्रस स्थित RAF अक्रोटिरी से ऑपरेट कर सकता है। ब्रिटेन की RAF के पास कुल 9 वॉयजर विमान हैं। इनमें 8 सैन्य रजिस्ट्रेशन वाले और एक सिविलियन रजिस्ट्रेशन वाला विमान है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त विमानों को भी सैन्य इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। यह समझौता समय-सीमित है। मदद महीनों के बजाय कुछ हफ्तों तक रहने की उम्मीद है। हालांकि, बर्नहम ने कहा है कि इसकी समीक्षा जारी रहेगी। ब्रिटेन इस साल पहले ही सऊदी अरब की रक्षा के लिए अपना स्काई सेबर एयर डिफेंस सिस्टम वहां तैनात कर चुका है। हूती तेजी ने लाल सागर के तट के पास अहम द्वीपों पर कब्जा किया यमन के हूतियों ने इस महीने लाल सागर के तट की ओर तेजी से बढ़ते हुए बाब-अल-मंदब स्ट्रेट के पास के इलाकों पर कब्जा किया है। यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। इसलिए इस इलाके में लड़ाई का असर समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है। हूतियों की इस बढ़त के बाद सऊदी अरब ने तटीय इलाकों में सैकड़ों हवाई हमले किए हैं। दूसरी तरफ हूतियों ने सऊदी अरब के शहरों और बुनियादी ढांचे पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है। जिबूती युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता यमन के ठीक सामने स्थित जिबूती ने साफ किया है कि वह हूतियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। हालांकि, जिबूती अफ्रीका के सबसे ज्यादा सैन्य मौजूदगी वाले देशों में से एक है। 2003 से अमेरिका यहां कैंप लेमोनियर नाम का बड़ा सैन्य बेस चला रहा है। यहां चीन का भी बड़ा सैन्य बेस है। सऊदी पर हूतियों के हमले क्यों बढ़े? यह लड़ाई यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच है। हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले करने का दावा किया है। इसके जवाब में सऊदी अरब ने यमन के अंदर हूती ठिकानों पर हमले किए हैं। ब्रिटिश सरकार के मुताबिक, जुलाई से हूतियों ने सऊदी अरब के कई शहरों, एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इनमें अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू शामिल हैं। लाल सागर में सऊदी जहाजों को भी निशाना बनाया गया है। इन हमलों में कुछ आम लोगों के घायल होने की बात कही गई है। ब्रिटेन ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उसका कहना है कि इससे क्षेत्र की स्थिरता और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर खतरा पैदा होता है। 2014 से चल रही है यमन में जंग यमन में 2014 से गृहयुद्ध चल रहा है। सऊदी अरब और हूतियों के बीच 2022 में UN की मध्यस्थता में एक संघर्षविराम हुआ था। लेकिन हाल के महीनों में यह समझौता बुरी तरह टूट गया है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमले फिर बढ़ गए हैं। इस लड़ाई का असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। बाब-अल-मंदब से होकर गुजरने वाले समुद्री रास्ते के कारण यहां की सुरक्षा का असर लाल सागर के रास्ते होने वाले अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। लेकिन इस लड़ाई की सबसे बड़ी कीमत उन लोगों को चुकानी पड़ रही है, जिन्हें अपना घर छोड़कर दूसरे देश में शरण लेनी पड़ रही है। ब्रिटेन पहले भी हूतियों पर हमला कर चुका है ब्रिटेन पहले भी हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है। जनवरी 2024 में ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ मिलकर यमन में हूतियों के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हूतियों के लगातार हमलों के बाद की गई थी।अभियान में ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों को वॉयजर टैंकर विमानों से हवा में ईंधन दिया गया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में भी ब्रिटेन और अमेरिका ने यमन में हूतियों के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। इसमें ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों ने हूतियों के ड्रोन बनाने वाली एक जगह को निशाना बनाया था। इस अभियान में भी टाइफून विमानों को वॉयजर टैंकर से हवा में ईंधन दिया गया था। अब ब्रिटेन ने सऊदी अरब की मांग पर फिर वॉयजर टैंकर उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यह मदद फिलहाल कुछ हफ्तों के लिए होगी। ——————— ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की: अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पडील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में अपने दूतावासों और नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच लोगों से ज्यादा सतर्क रहने को कहा है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपना कैंप डेविड दौरा एक दिन पहले खत्म कर शनिवार शाम व्हाइट हाउस लौट आए। ट्रम्प की जल्दी वापसी की वजह व्हाइट हाउस ने नहीं बताई है। वहीं, रशिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी B-1B लांसर बॉम्बर ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से फुल आफ्टरबर्नर के साथ उड़ान भरते हुए मिडिल-ईस्ट की तरफ रवाना हुआ है। ईरान के प्रेस TV ने भी उत्तर-पूर्वी सीरिया के अल-हसकाह में खाराब अल-जिर एयरबेस के पास एयर डिफेंस एक्टिविटी की जानकारी दी है। ब्रिटिश एयरबेस से अमेरिकी विमान के रवाना होने का वीडियो… 9 देशों में अमेरिकी नागरिकों को सावधानी की सलाह अमेरिका ने इराक, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, ईरान, कतर, लेबनान, कुवैत और जॉर्डन में रह रहे अपने नागरिकों को सावधान रहने को कहा है। अमेरिका ने कहा कि मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए इन देशों की यात्रा करने वाले अमेरिकियों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वे फ्लाइट और एयरपोर्ट से जुड़ी ताजा जानकारी देखते रहें। ईरान ने जंग खत्म करने के लिए 7 शर्तें रखीं ईरान ने चल रही जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखी हैं। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका ने उसकी मांगें नहीं मानीं तो वह जंग जारी रखने के लिए तैयार है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने अल जजीरा से कहा कि कतर ने मध्यस्थ के तौर पर ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। अब ईरान ट्रम्प के जवाब का इंतजार कर रहा है। रेजाई के मुताबिक, ईरान की मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी करना और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। सऊदी बोला- हूतियों ने रियाद पर मिसाइल हमले की कोशिश की सऊदी अरब ने कहा कि हूतियों ने उसकी राजधानी रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की कोशिश की। सऊदी सेना के मुताबिक, उसने मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि संगठन ने सऊदी अरब पर कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन भी भेजे। उनके मुताबिक, रियाद और सऊदी तेल कंपनी अरामको की यानबू स्थित सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान की नोबेल विजेता बोलीं- जंग और दमन की कीमत लोग चुका रहे ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गिस मोहम्मदी ने कहा है कि देश में चल रही जंग, आर्थिक संकट और सरकारी दमन का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने AP से बातचीत में कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। मोहम्मदी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में समाज में सरकारी दमन और बढ़ा है। आर्थिक दबाव के साथ लोगों पर बढ़ती पाबंदियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मोहम्मदी ने कहा कि इसके बावजूद कई ईरानी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर युवा पीढ़ी का जिक्र किया, जो अपने अधिकारों को समझती है और विरोध करने से पीछे नहीं हट रही। नर्गिस मोहम्मदी खुद भी लंबे समय तक जेल में रहीं नर्गिस मोहम्मदी कई सालों से मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं। उन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। दिसंबर में हिरासत के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों पर मारपीट का आरोप लगाया था। बाद में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जमानत पर रिहा कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि अब उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- इजराइली सेना में हथियार-सैनिक कम पड़े:3 साल की जंग में टैंक भी घिसे, बोइंग से 12 अपाचे हेलिकॉप्टर की डील भी अटकी इजराइल में सेना के पास कुछ हथियारों और सैनिकों की कमी हो गई है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है। अखबार मारिव के मुताबिक 3 साल की जंग में इजराइली सेना ने जितना गोला-बारूद इस्तेमाल किया, वह पिछले 30 साल में इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद के बराबर था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में शनिवार को किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास आग और काले धुएं का बड़ा गुबार दिखा। सऊदी ने पुष्टि की है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार सुबह राजधानी रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने मिसाइल को रास्ते में ही रोक दिया गया। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, कई उड़ानों में काफी देरी हुई और कुछ उड़ानें रद्द की गईं। आग और धमाकों की वजह अभी साफ नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल टैंक में आग लग गई थी। हालांकि, आग लगने और धमाकों की वजह स्पष्ट नहीं है। सोशल मीडिया पर रियाद एयरपोर्ट के कई वीडियो वायरल सऊदी और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी हूतियों ने कहा था वो कि लाल सागर में सऊदी के जहाजों और सऊदी का तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अब भी टारगेट करेंगे। हूतियों की दलील है कि यमन पर सऊदी अरब की नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई के चलते उसके जहाजों को निशाना बनाना उनका अधिकार है। सऊदी अरब और हूती लड़ाकों के बीच यह जंग असल में ताकत, सुरक्षा और इलाके में अपने दबदबे की लड़ाई है। हूती यमन की सत्ता पर पूरा कब्जा चाहते हैं, जबकि सऊदी अरब अपने पड़ोस में किसी भी ऐसे हथियारबंद गुट को बर्दाश्त नहीं करना चाहता। सऊदी अरब और यमन की सीमा आपस में सटी हुई है। सऊदी हमेशा से चाहता रहा है कि उसके बॉर्डर पर शांति रहे। लेकिन हूतियों के पास भारी हथियार, मिसाइलें और लड़ाकू ड्रोन आ गए हैं। सऊदी सरकार को लगता है कि अगर उसके ठीक बगल में इतना आक्रामक गुट रहेगा, तो उसकी अपनी सुरक्षा कभी पक्की नहीं हो सकती। हूतियों से सऊदी को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के किनारे का बड़ा इलाका अपने कब्जे में ले लिया। सऊदी अरब को उम्मीद थी कि अमेरिका उसके साथ खड़ा होगा। लेकिन अमेरिका ने अब तक हूतियों के खिलाफ सऊदी के समर्थन में कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की है। अमेरिका ने जरूर कहा है कि हूतियों की गतिविधियां बाब अल-मंदब स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा हैं। अमेरिका पहले से ईरान के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। ऐसे में अगर अमेरिका यमन में सीधे उतरता है तो उस पर एक और सैन्य मोर्चे का दबाव बढ़ सकता है। यमन में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाके मारे गए यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ाई में पिछले चार हफ्तों में सरकार समर्थित 500 से ज्यादा लड़ाके मारे गए हैं। सरकार के समर्थन में लड़ने वाली नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स ने यह दावा किया है। संगठन के मुताबिक, इसी दौरान होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके भी मारे गए। हूतियों ने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस बीच यमन सरकार ने लाल सागर के तट पर और सैनिक भेजने का फैसला किया है। सरकार के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते की हार को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकारी बल फिर से इलाके में लौटेंगे। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पडील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
अब तक सऊदी अरब के महंगे और हाईटेक हथियार हूती लड़ाकों के गोरिल्ला अटैक के आगे बौने साबित हो रहे थे। लेकिन जब से सऊदी अरब ने जंग की पुरानी रणनीति को छोड़ कर नई रणनीति अपनाई है, तब से खाड़ी देशों के बीच जारी जंग की सूरत बदलती नजर आ रही है। हाल ही में यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब ने जो हमला किया, उससे हूती विद्रोहियों के पांव उखड़ गए और भागने के लिए उनके पास जमीन कम पड़ गई।
इस हमले में सऊदी अरब की मिसाइलें नहीं गरजीं, बल्कि ‘स्काईवास्प’ अटैक किया गया। इस हमले ने अटैक ने रातों-रात मध्य पूर्व के युद्ध के समीकरण को बदल कर रख दिया है। हूती विद्रोहियों के हथियार अब काम नहीं आ रहे हैं। सऊदी अरब का यह हथियार त्रिकोणीय आकार के खौफनाक ड्रोन्स हैं, जो हूतियों के ठिकानों पर तबाही मचा रहे हैं। हूती लड़ाकों की एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ड्रोन को मार गिराने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। इस हमले के बाद पूरे साना शहर में हड़कंप मच गया और हूती विद्रोहियों के कई अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
सऊदी अरब ने जंग में उतारे कामिकेज ड्रोन स्काईवास्प
खाड़ी देशों के बीच जारी जंग में सऊदी अरब ने बेहद विनाशकारी कामिकेज यानी ‘सुसाइड’ ड्रोन उतार दिए हैं। इनका नाम ‘स्काईवास्प’ है, जो एक तरह के कीड़े के लिए अंग्रेज में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द वॉस्प से लिया गया है। हिंदी में इसे ततैया कहते हैं। ये सऊदी अरब का पहला स्वदेशी लंबी दूरी का सुसाइड ड्रोन है। सुसाइड ड्रोन उन हथियारों को कहा जाता है, जो मिसाइल की तरह सीधे अपने टारगेट से टकराकर खुद को भी खत्म कर लेते हैं।
NEW: Houthi-controlled Yemeni capital Sanaa was hit by Saudi SKYWASP kamikaze drones yesterday, modeled after Iran’s Shahed-136.
SKYWASP is Saudi Arabia’s first domestically produced long-range kamikaze drone, a Shahed-136-style delta-wing UAV built by SR2Vector (Saudi-US joint… pic.twitter.com/etIZd7drMY
— Clash Report (@clashreport) September 19, 2026
ईरान के ‘शाहिद-136’ ड्रोन पर आधारित स्काईवास्प
स्काईवास्प का डिजाइन काफी हद तक ईरान के मशहूर ‘शाहिद-136’ ड्रोन से मिलता-जुलता है। शाहिद-136 का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। इसे हूती विद्रोही भी अक्सर सऊदी अरब और लाल सागर में जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। अब सऊदी अरब ने इसी से प्रेरित खुद का कामिकेज ड्रोन तैयार कर लिया है, जो दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करने में माहिर है।
सस्ता और टिकाऊ हथियार बना स्काईवास्प
एक ‘स्काईवास्प’ ड्रोन की कीमत महज करीब 35,000 डॉलर यानी लगभग 29 से 30 लाख रुपए आती है। जहां एक मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है। इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है। यानी सऊदी अरब अपनी सीमा से यमन के हूतियों के ठिकानों पर सटीक निशाना लगा सकता है। ये ड्रोन जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम से पूरी तरह लैस होता है, जिससे ये दुश्मन की लोकेशन पर सटीक वार करता है और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा दे सकता है।
सऊदी और अमेरिका मिलकर बनाया
स्काईवास्प सऊदी अरब का पहला स्वदेशी प्रोजेक्ट है। इसे ‘SR2Vector’ नाम की कंपनी ने बनाया है, जो सऊदी अरब और अमेरिका का एक ज्वाइंट वेंचर है।
ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली मुलाकात से पहले ताइवान में डर बढ़ गया है। ताइवान को आशंका है कि चीन के साथ कोई बड़ा आर्थिक समझौता करने के लिए ट्रम्प उसके मुद्दे पर नरम रुख अपना सकते हैं। जापान और साउथ कोरिया समेत अमेरिका के सहयोगी देशों को भी यही चिंता सता रही है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प ने मई में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को चीन से डील के लिए ‘सौदेबाजी का जरिया’ बताया था। अब जिनपिंग फिर ताइवान का मुद्दा ट्रम्प के सामने उठा सकते हैं। ऐसे में ताइवान को डर है कि ट्रम्प चीन से कोई बड़ी डील निकालने के चक्कर में कहीं उसके मुद्दे पर पीछे न हट जाएं। अमेरिका के किसी नरम बयान से भी बीजिंग को ताइवान पर दबाव बढ़ाने का हौसला मिल सकता है। पहले ताइवान का मामला समझिए ताइवान चीन के करीब स्थित एक द्वीप है। वहां अपनी सरकार है और लोग अपने नेताओं को चुनाव के जरिए चुनते हैं। ताइवान खुद को अलग तरीके से चलाता है, लेकिन चीन उसे अपना हिस्सा मानता है। चीन चाहता है कि ताइवान एक दिन उसके साथ मिल जाए। बीजिंग ने यह भी साफ कर रखा है कि जरूरत पड़ी तो वह इसके लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकता है। दूसरी तरफ, अमेरिका ताइवान को हथियार देता है ताकि वह अपनी सुरक्षा कर सके। लेकिन अमेरिका ने यह साफ नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो अमेरिकी सेना सीधे उसकी मदद के लिए युद्ध में उतरेगी या नहीं। यही वजह है कि ताइवान को लेकर अमेरिका का रुख हमेशा से थोड़ा अस्पष्ट रहा है। वॉशिंगटन चीन को खुलकर चुनौती भी नहीं देता और ताइवान को अकेला भी नहीं छोड़ता। जापान को किस बात की चिंता है? ताइवान को लेकर सिर्फ वहां की सरकार ही चिंतित नहीं है। जापान भी ट्रम्प-शी की बैठक को करीब से देख रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, जापान चाहता है कि अमेरिका ताइवान को लेकर अब तक इस्तेमाल की जाने वाली कूटनीतिक भाषा पर कायम रहे। टोक्यो यह भी चाहता है कि बैठक में ताइवान का मुद्दा इतना न छाए कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ जाए। जापान के दो सीनियर नेताओं ने रॉयटर्स को बताया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि ट्रम्प चीन से अमेरिकी सामान खरीदने का बड़ा समझौता हासिल करने के बदले ताइवान के मामले में कोई रियायत न दे दें। अमेरिका में अगले साल मिडटर्म चुनाव होने हैं। ऐसे में चीन के साथ बड़ा कारोबारी समझौता ट्रम्प के लिए घरेलू राजनीति में भी अहम हो सकता है। बैठक से पहले ताइवान ने अपनी चिंता बताई बैठक से पहले ताइवान सरकार लगातार अमेरिका के सामने अपना पक्ष रख रही है। ताइवान के सीनियर अधिकारी शेन यू-चुंग ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि ऐसा कोई फैसला नहीं होगा जिससे ताइवान को नुकसान पहुंचे। ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी बैठक में ताइवान का मुद्दा उठाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कई बार साफ कर चुका है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका की ‘वन चाइना पॉलिसी’ क्या है? ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति को समझने के लिए ‘वन चाइना पॉलिसी’ को समझना जरूरी है। अमेरिका ताइवान को एक अलग देश के तौर पर आधिकारिक मान्यता नहीं देता। लेकिन वह चीन के इस दावे को भी अपनी तरफ से मंजूर नहीं करता कि ताइवान पर उसका पूरा अधिकार है। इसी नीति के तहत अमेरिका चीन के साथ अपने राजनयिक रिश्ते भी बनाए रखता है और ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार भी देता है। यानी अमेरिका दोनों पक्षों के बीच एक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। ट्रम्प के बयान पर इतनी नजर क्यों? अमेरिका ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो क्या अमेरिकी सेना ताइवान की मदद करने जाएगी। इसलिए ट्रम्प ताइवान को लेकर क्या कहते हैं, इस पर सबकी नजर रहती है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल में कई बार कहा था कि चीन ने हमला किया तो अमेरिका ताइवान की मदद करेगा। लेकिन ट्रम्प ने इस बारे में अब तक ऐसी साफ बात नहीं कही है। जापान के दो सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रम्प का अचानक दिया गया कोई बयान भी ताइवान को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। चीन लगातार अमेरिका से कहता रहा है कि वह ताइवान को अलग देश बनाने की बात का समर्थन न करे। ताइवान का मुद्दा दुनिया की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा ताइवान का मामला सिर्फ चीन और अमेरिका के बीच सत्ता की खींचतान तक सीमित नहीं है। इसका असर दुनिया के कारोबार पर भी पड़ सकता है। ताइवान दुनिया की सबसे आधुनिक कंप्यूटर चिप्स का 90% से ज्यादा बनाता है। इन चिप्स का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर से लेकर मिसाइल और दूसरे आधुनिक उपकरणों में होता है। अगर यहां बड़ा सैन्य संघर्ष होता है तो चिप्स की सप्लाई रुक सकती है। इससे दुनिया के कई देशों में कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे सामानों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। मलेशिया के राष्ट्रीय सुरक्षा महानिदेशक राजा नुशिरवान जैनल आबिदीन ने रॉयटर्स से कहा कि ताइवान में संघर्ष हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ——————– यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। आखिर कौन हैं ये हूती लड़ाके और चाहते क्या हैं, सऊदी जैसा अमीर और ताकतवर देश इन विद्रोहियों के आगे बेबस क्यों नजर आ रहा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: चप्पल और लुंगी पहने ये हूती लड़ाके आखिर हैं कौन?
जवाबः यमन की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती… सवाल-2: सऊदी पर हमला क्यों कर रहे हूती, कितना नुकसान किया?
जवाबः हालिया लड़ाई की शुरुआत बीती 5 अगस्त से हुई… सऊदी अरब ने कहा कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने पवित्र शहर मक्का को टारगेट करके ड्रोन अटैक किया था। इसे मक्का में घुसने से पहले ही मार गिराया गया। हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया। 16 सितंबर को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने कहा, ‘अल्लाह की मदद से यमन की सशस्त्र सेना ने मारिब प्रांत में सऊदी अरब को अमेरिका से मिले F-15 फाइटर जेट को स्वदेशी तौर पर बनाई मिसाइल से मार गिराया है।’ हूतियों ने इसका एक वीडियो भी जारी किया है… सऊदी अरब या अमेरिका ने जेट गिराने के दावे पर अब तक कोई बयान नहीं दिया है। सवाल-3: अमीर और ताकतवर सऊदी अरब बेबस क्यों नजर आ रहा है?
जवाबः इसकी 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सऊदी समर्थित फौजों में तालमेल नहीं, हूतियों की मजबूत तैयारी 2. सऊदी में इंटरसेप्टर मिसाइल और एयर डिफेंस की कमी 3. ईरान जंग में फंसा अमेरिका एक और जंग नहीं चाहता ट्रम्प के इनकार करने के बाद सऊदी ने इजराइल से खुफिया जानकारी और दूसरी सैन्य मदद मांगी, ताकि बाब अल-मंदेब पर हूतियों का कब्जा रोका जा सके, जबकि सऊदी और इजराइल के बीच सीधे राजनयिक संबंध नहीं हैं। वहीं, पाकिस्तान और तुर्किये, सऊदी के साथ मक्का पैक्ट होने के बावजूद उसे सीधी सैन्य मदद के बजाय हूतियों से बातचीत करवाने में मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। सवाल-4: पाकिस्तान, सऊदी अरब की सैन्य मदद क्यों नहीं कर रहा?
जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने को लेकर अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें हैं…
1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमैट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट तब तक सिर्फ प्रतीकात्मक है, जब तक इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं बनता। तुर्किये और पाकिस्तान, ईरान या भारत से सीधे टकराव में शामिल नहीं होंगे। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ा, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती है। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान भले सुन्नी बहुल मुल्क हो, लेकिन शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने यमन में हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी, तो पाकिस्तान ने सैन्य दखल से इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’
—– ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज के बाद अब दूसरे तेल रूट पर संकट:अल मंदेब पर हूती विद्रोहियों का कब्जा; कहा- सऊदी अरब के अलावा किसी का जहाज नहीं रोकेंगे होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब एक और समुद्री ऑयल रूट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट संकट में है। यमन के हूती विद्रोहियों ने यहां कब्जे का एलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और चाहता है कि क्षेत्र में जल्द कोई समझौता हो।
पवित्र शहर मक्का पर 15 सितंबर 2026 की शाम ड्रोन हमले की घटना हुई थी। हालांकि साउदी एयर डिफेंस ने वक्त रहते इस ड्रोन को मार गिराया। लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर ये ड्रोन अटैक किसने किया। क्योंकि सऊदी अरब के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी का कहना है कि यह ड्रोन हूती विद्रोहियों ने भेजा था और यह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। तो वहीं अब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के इस आरोप को खारिज कर दिया है। हूतियों ने कहा है कि उन्होंने मक्का या किसी भी दूसरे पवित्र स्थल को निशाना नहीं बनाया।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है अगर हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के लिए यह ड्रोन नहीं भेजा, तो फिर यह ड्रोन किसका था? फिलहाल इस सवाल का कोई पुख्ता जवाब तो सामने नहीं आया है लेकिन सऊदी अरब की तरफ से जो दावे किये जा रहो हैं वो चौंकाने वाले हैं
सऊदी के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने 15 सितंबर को शाम करीब 6:50 मिनट पर मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। ड्रोन का मलबा शहर के दक्षिण में आकर गिरा।
मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश
सऊदी अरब ने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया है। गठबंधन के प्रवक्ता ने जुलाई 2017 में मक्का की दिशा में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल का भी हवाला दिया लेकिन इस बार मामले थोड़ा अलग है, मौजूदा घटना में हथियार के तौर पर ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है। सऊदी पक्ष ने कहा है कि दो पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा उसके लिए रेड लाइन है। सऊदी की तरफ से आगो कहा गया कि आगे किसी ऐसे हमले को रोकने के लिए जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएंगे
हूती विद्रोहियों ने आरोपों को बताया झूठ
सऊदी पक्ष के इस दावे के तुरंत बाद हूती विद्रोहियों की ओर से इसका खंडन किया गया। हूती सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य हेजाम अल-असद ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को निशाना बनाने की बात गलत है। यही वजह है कि घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे बिल्कुल अलग हैं। सऊदी अरब कह रहा है कि ड्रोन हूतियों की ओर से ही लॉन्च किया गया था, जबकि हूती इस बात से इनकार कर रहे हैं।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का और वहां मौजूद जायरीनों (तीर्थयात्री) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। इस घटना की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है क्योंकि मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां दुनिया भर से मुसलमान उमराह और हज के लिए पहुंचते हैं।
दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर
15 सितंबर 2026 को मक्का के पास ड्रोन हमले की कोशिश ने 1979 की उस घटना की यादें ताजा कर दीं, जब करीब 200 हथियारबंद लोगों ने ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा कर हजारों लोगों को बंधक बना लिया था। इस कब्जे की अगुवाई धार्मिक उपदेशक जुहैमान अल-उतैबी ने की थी और सुरक्षा बलों को इसे खत्म करने में करीब दो हफ्ते लग गए थे।
मौजूदा घटना में सऊदी अरब के मुताबिक एयर डिफेंस ने शाम करीब 6:50 बजे ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने दावा किया कि ड्रोन हूतियों ने लॉन्च किया था। इसके बाद मक्का में सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ, जिसे कुछ मिनट बाद हटा लिया गया। सऊदी के मुताबिक 2017 के बाद यह पहली ऐसी चेतावनी थी। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यमन की ओर से मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं है।
1979 में क्या हुआ था?
20 नवंबर 1979 को करीब 50 हजार लोग ग्रैंड मस्जिद में नमाज के लिए जुटे थे। इसी दौरान जुहैमान अल-उतैबी और उसके समर्थकों ने मस्जिद पर कब्जा कर लिया। उसने अपने बहनोई मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-कहतानी को महदी बताया और सऊदी शाही परिवार के खिलाफ विद्रोह का ऐलान किया।
सुरक्षा बलों और हथियारबंद विद्रोहियों के बीच करीब दो हफ्ते तक लड़ाई चलती रही। विद्रोही मस्जिद के भूमिगत हिस्सों में छिप गए थे। फ्रांस के जानकारों की मदद से अभियान चलाया गया और 5 दिसंबर को जुहैमान समेत करीब 100 विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण किया। 9 जनवरी 1980 को जुहैमान और 62 अन्य लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।
यमन में हूतियों और सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना और देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
इसके अलावा इस मामले पर एक और अहम खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि कि सऊदी ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ इजरायल से मदद मांगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के मक्का पैक्ट के तहत अपने हाथ पीछे खींच लिए जिसके बाद अब सऊदी इजरायल का रुख कर लिया है। इस मामले पर अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों के बीच माहौल काफी शांत था, लेकिन जुलाई 2026 की शुरुआत के बाद संघर्ष फिर तेज हो गया। मक्का के पास ड्रोन की घटना से एक दिन पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूती हमलों में खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ में 13 नागरिक घायल हुए इसके अलावा सात घरों और दो वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।
Market Insight : बाजार की आगे की दशा और दिशा पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में आज फैसले का दिन है। ग्लोबल बाजारों के लिए आज की रात फैसले की घड़ी है। आज रात को US फेड का फैसला आएगा। US में दरों में बढ़ोतरी की संभावना अब 94% पर है। इसका मतलब बाजार में दरों में बढ़ोतरी 94% भाव में शामिल है। अगर दरों में बढ़ोतरी हुई तो शायद कल एक बॉटम भी बने। लेकिन अगर दरों में बढ़ोतरी नहीं आई तो काफी दिलचस्प होगा। निफ्टी हमारे सारे टार्गेट हासिल कर चुका है। जैक्सन होल के बाद हमने CNBC-आवाज़ पर एक शॉर्ट का नजरिया लिया था। 23,100-23,300 के हमारे सारे टार्गेट स्क्रीन पर हासिल हुए। कल सुबह भी खुलते ही 23,650 के SL के साथ शॉर्ट का नजरिया था। कल क्लोजिंग में फिर शॉर्ट में मुनाफावसूली का नजरिया रहा। आज भी वही नजरिया है, इंट्राडे भले शॉर्ट करें, लेकिन निपटा कर जाएं। आज कुछ हिम्मत दिखाने वाले लोग शायद लॉन्ग भी लेकर जाएंगे।
फेड के फैसले से पहले ग्लोबल बाजार में घबराहट
अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 5.041% के इंट्राडे हाई पर है। 2007 के बाद 10-साल की यील्ड सबसे ऊंचे स्तर पर है। ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के ऊपर है। आज रात फेड के दरों में बढ़ोतरी की 94% संभावना है।
क्यों उबल रहा है कच्चा तेल?
रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब ने सितंबर की कुछ डिलीवरी रद्द की है। यूरोपीय ग्राहकों की सितंबर की डिलीवरी रद्द की गई है। सऊदी ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद की है। सऊदी ने एहतियातन पाइपलाइन बंद की है। हूतियों के हमले में पाइपलाइन को नुकसान हुआ है। पाइपलाइन की मरम्मत कबतक होगी ये साफ नहीं है।
ईरान युद्ध की कीमत
अमेरिकी कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में कहा गया है कि ईरान युद्ध से अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर बोझ बढ़ा है। पहले 5 महीनों में टैक्सपेयर्स पर 38 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। अगले साल की शुरुआत तक महंगाई 0.5% बढ़ सकती है। युद्ध का हर अतिरिक्त महीना 2-3 अरब डॉलर महंगा पड़ रहा है। तनाव बढ़ने पर युद्ध की लागत और बढ़ सकती है। कोर महंगाई पुराने अनुमान से 0.3% ज्यादा रह सकती है।
US डिफेंस सिस्टम पर असर
कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में आगे कहा गया है कि इस युद्ध में US बेस पर सैकड़ों इमारतें और स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं।कुवैत, बहरीन, कतर में US बेस स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं। UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान, जॉर्डन में भी स्ट्रक्चर तबाह हुए हैं।’Operation Epic Fury’ में विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा बयान आया है। इसमें कहा गया है कि ये तो सिर्फ शुरुआत है।
फेड का फैसला: हमारे लिए क्यों अहम?
पुरी दुनिया की नजर इस समय यूएस फेड पर है। बाजार के मुताबिक 25 Bps दरें बढ़ेंगी। एनालिस्ट का कहना है कि होल्ड या dovish hike के लिए बाजार तैयार नहीं है। BoA का कहना है कि इस स्तर पर रेट होल्ड करना “अभूतपूर्व” होगा। केविन वॉर्श की कोई भी टिप्पणी अहम होगी।
फेड की दर बढ़ोतरी का असर?
इससे इमर्जिंग मार्केट्स में आने वाले निवेश फ्लो पर सीधा असर पड़ता है। सोने और चांदी में रेट हाइक से गिरावट आती है। डॉलर की मांग बढ़ने से डॉलर मजबूत होता है। बेस मेटल्स पर भी दबाव आ सकता है। लोग खर्च कम करते हैं, जिससे मंदी का खतरा बढ़ता है। FCNR डिपॉजिट्स जो हमने जुटाए हैं,उनकी देनदारी भी बढ़ेगी। दर बढ़ोतरी किस मैक्रो हालात में होती है,ये सबसे अहम होता है। अगर इकोनॉमी मजबूत हो तो दर बढ़ोतरी हमेशा निगेटिव नहीं होती। पिछले 2-3 साल में भारत में ETF निवेश नहीं हुआ बल्कि पैसा बाहर ही गया है। ऐसे में काफी लोग कहेंगे कि हमें क्या फर्क पड़ता है? लेकिन अगर ग्लोबल बाजार में मंदी का खतरा बढ़े तो फर्क पड़ता है।
बाजार: आज का दांव
ब्रेंट $108/बैरल के ऊपर है। इसमें 4 महीने के शिखर के करीब कारोबार हो रहा है। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में एक्शन जारी रह सकता है। ONGC, OIL इंडिया के लिए पॉजिटिव है। वहीं, OMCs, एशियन पेंट्स और इंडिगो के लिए निगेटिव है। फेड के फैसले से पहले सोने-चांदी की कीमती में कमजोरी है। सोना 6 हफ्तों के और चांदी 5 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह टाइटन और कल्याण के लिए पॉजिटिव है। वहीं, मणप्पुरम, मुथूट फाइनेंस और हिंद जिंक के लिए निगेटिव है। डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। यह फार्मा और IT के लिए पॉजिटिव है लेकिन बैंकों के लिए निगेटिव है।
मेटल्स पर रखें नजर
डॉलर की मजबूती से मेटल्स में गिरावट आ सकती है। Nickel 10 हफ्तों के निचले स्तर पर है। कॉपर फ्यूचर्स 7 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह मेटल शेयरों के लिए निगेटिव है। खास तौर पर हिंद कॉपर,नाल्को और हिंडाल्को पर खराब असर पड़ सकता है।
रबर पर रखें नजर
रबर की कीमतें 1 हफ्ते के निचले स्तर पर हैं। यह अपोलो टायर्स,सिएट और MRF जैसे टायर शेयरों के लिए पॉजिटिव है।
AI और IT: अब आगे क्या?
एंथ्रोपिक के सीईओ अमोदेई (Amodei) ने कहा है कि AI डेवलपमेंट की रफ्तार धीमा करना जरूरी है। यही इंडस्ट्री को आगे लेकर जाने का सबसे अच्छा तरीका है। वहीं, एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने कहा है कि बाजार की ताकतें पहले से मौजूद हैं, नए रेगुलेशन की जरूरत नहीं है। जब तक वो ऐसी चीज जारी ना करें जो बाजार पसंद करेगा,कंपनियों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।
इस बीच खबर आई है कि OpenAI नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। कंपनी $1.2 ट्रिलियन वैल्यूएशन पर फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। अनुज सिंघल ने कहा कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगा कि AI ट्रेड खत्म हो गई है। किसी भी बड़ी बुल मार्केट में बड़े करेक्शन सामान्य होते हैं। पहले भी हमने AI के टॉप की बात की है और हर बार AI शेयरों ने नया हाई लगाया। AI अब यहां रहने और आगे बढ़ने के लिए आया है। हर गिरावट में पावर और डाटा सेंटर शेयर खरीदें। IT में अब आपको सावधान और स्टॉक स्पेसिफिक रहना होगा।
निफ्टी पर रणनीति
निफ्टी के लिए आखिरी सपोर्ट 23,000-23,100 पर है। इसके नीचे बंद हुए तो 200 WMA यानी 22,500 का रास्ता खुलेगा। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,300-23,350 पर है और बड़ा रजिस्टेंस 23,400-23,500 पर है। आज हम निफ्टी पर न्यूट्रल रहेंगे और कल नया नजरिया लेंगे। कल सारे शॉर्ट्स क्लोजिंग में निपटाने का नजरिया था। आज शायद आपको 1 शॉर्ट और 1 लॉन्ग ट्रेड दोनों मिलेंगे।
बैंक निफ्टी पर रणनीति
बैंक निफ्टी का मेक ऑर ब्रेक जोन 55,100-55,500 है। अगर 55,100 के नीचे बंद हुए तो 53,500-54,000 का रिस्क है। लेकिन अगर 55,100-55,500 बचा रहा तो शॉर्ट कवरिंग संभव है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 56,000-56,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 56,500-56,700 पर है। आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे।
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सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बुधवार को बताया कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया। सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हूतियों के खिलाफ जरूरी निवारक कदम उठाएगा। वहीं हूति विद्रोहियों ने मक्का या दूसरे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। हूतियों की समाचार एजेंसी SABA के मुताबिक, संगठन से मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यहां मुस्लिमों के प्रमुख पवित्र स्थल हैं और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। हज इस्लाम के पांच प्रमुख धार्मिक कर्तव्यों में शामिल है। अल-मलिकी ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया। उनके मुताबिक, इससे पहले जुलाई 2017 में गठबंधन ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था। सऊदी अरब के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट मंगलवार को सऊदी अरब के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए। इनमें मक्का और अन्य शहर शामिल थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब पिछले एक सप्ताह में ईरान समर्थित लड़ाकों के हमलों के बाद सऊदी अरब क्षेत्रीय संघर्ष से और ज्यादा प्रभावित हुआ है। हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के उन तेल निर्यात मार्गों पर भी जोखिम बढ़ा है, जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हटाकर वैकल्पिक रास्तों से इस्तेमाल किया जा रहा है। हूतियों ने सऊदी एयरबेस पर हमले का दावा किया हूतियों ने पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। सोमवार को संगठन ने एक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही थी। हूतियों के मुताबिक, यह कार्रवाई यमन पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। सऊदी पक्ष ने मक्का के पास ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले नष्ट करने की बात कही है। वहीं, हूती पक्ष ने पवित्र शहर को किसी खतरे से इनकार किया है।

