यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत:बाब अल-मंदब पर कब्जे की कोशिश, निपटने को सरकार ने फोर्स भेजी

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी फोर्स के बीच भीषण लड़ाई में 129 लोगों की मौत हुई है। यह हाल के वर्षों में यमन में हुई सबसे घातक झड़पों में से एक है। हूती विद्रोही लाल सागर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। लड़ाई गुरुवार को शुरू हुई। हूतियों ने तटीय इलाकों के पास जमीनी हमला करने के साथ रॉकेट और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने लाल सागर के किनारे कई रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों से मोखा बंदरगाह और समुद्री रास्ते पर नजर रखना आसान है। एएफपी के मुताबिक यमनी सेना के एक अधिकारी ने बताया कि उसके 66 जवान मारे गए हैं। वहीं हूती विद्रोहियों से जुड़े सूत्रों ने कम से कम 62 विद्रोहियों के मारे जाने का दावा किया है। एक नागरिक की भी मौत हुई है। इस तरह अलग-अलग पक्षों से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, लड़ाई में मरने वालों की संख्या 120 से ज्यादा हो गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बाब अल-मंदेब इतना अहम क्यों? बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री रास्ता है। इसके उत्तर में लाल सागर स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर से जुड़ता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा की आवाजाही होती है। इसलिए यहां लंबे समय तक संघर्ष या समुद्री रास्ते में किसी तरह की रुकावट का असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी पड़ सकता है। मौजूदा हमले में हूतियों का फोकस मोखा बंदरगाह और उसके आसपास के इलाकों पर भी है। रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जे से उन्हें तटीय इलाके में सरकारी बलों पर दबाव बनाने और मोखा तथा बाब अल-मंदेब की तरफ जाने वाले रास्तों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, हूतियों ने लाल सागर के पास और ताइज शहर के आसपास कई ऊंचाई वाले ठिकानों पर कब्जा किया है। सरकार ने हूती विद्रोहियों से लड़ने सेना भेजी हूती विद्रोहियों की बढ़त को देखते हुए यमनी सरकार ने भी ताइज में अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। एक यमनी अधिकारी के मुताबिक, सरकार ने सऊदी अरब के कहने पर अदन से ताइज के लिए सैनिक भेजे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर हूती मोखा बंदरगाह या बाब अल-मंदेब के आसपास के रणनीतिक इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेते हैं, तो इससे यमनी सरकार और सऊदी अरब के साथ किसी भी बातचीत में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। हूती विद्रोही कौन हैं? हूती विद्रोही यमन के उत्तरी हिस्से में रहने वाले जायदी शिया समुदाय का एक सशस्त्र संगठन है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन के रूप में हुई थी। हूती सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाते थे। 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं है। अभी यमन कई हिस्सों में बंटा हुआ है। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन मिलता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का समर्थन मिलता है।
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28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

21 भारतीयों वाले जहाज पर ईरानी हमले का VIDEO:होर्मुज में IRGC बोट्स ने फायरिंग की; शीशे टूटे, सामान बिखरा, क्रू ने छिपकर जान बचाई

होर्मुज स्ट्रेट में 21 भारतीय नाविकों वाले एक कंटेनर जहाज पर ईरानी नौकाओं ने फायरिंग की थी। यह घटना 22 अप्रैल को हुई थी। भारतीय नाविकों के संगठन ने अब इस घटना का वीडियो जारी किया है। वीडियो में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़ी नौकाओं को जहाज के आसपास देखा जा सकता है। जहाज पर फायरिंग के बाद शीशे टूटे और सामान बिखरा दिखाई देता है। एक जगह रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड दागे जाने का सीन भी दिखता है। हमले के दौरान जहाज का क्रू अपनी जान बचाने के लिए अंदर छिप गया। जहाज पर 21 भारतीय नाविक सवार थे और सभी सुरक्षित रहे। होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक लगा चुकी सरकार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच भारत ने 16 जुलाई को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक लगा दी थी। यह रोक अगले आदेश तक लागू है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया था, जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के इलाकों में हुए हमलों में भारतीय नाविकों की मौत हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में हुए हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। भारत ने जहाज मालिकों, जहाज मैनेजमेंट कंपनियों और नाविकों की भर्ती करने वाली RPSL कंपनियों को अरब की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए थे। यह रोक भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर है। भारत के बाहर से विदेशी शिपिंग कंपनियों द्वारा भर्ती किए गए नाविकों पर यह आदेश सीधे लागू नहीं होगा। सोमालिया के पास 6 भारतीयों वाला जहाज हाईजैक सोमालिया के पंटलैंड तट के पास एक कार्गो जहाज को समुद्री लुटेरों ने हाईजैक कर लिया। कैमरून के झंडे वाले M/V LUTUF में 10 लोग सवार थे, जिनमें 6 भारतीय, 1 तुर्की नागरिक, 1 जॉर्जियाई और 2 सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल थे। जहाज को 17 अगस्त को ईयल जिले में मैराया से करीब 3.5 नॉटिकल मील दूर कब्जे में लिया गया। लुटेरे इसे नूगाल तट की ओर ले गए। जहाज पर मोगादिशु के तुर्की सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार, संचार और सैटेलाइट उपकरण थे। सोमाली अधिकारी के मुताबिक, 8 समुद्री लुटेरों ने जहाज पर कब्जा किया। बाद में दो तुर्की जहाज पहुंचे और हेलिकॉप्टर-ड्रोन से निगरानी शुरू हुई। मंगलवार को जहाज के पास एक छोटी नाव पहुंची। इसके लौटने के बाद हुए हवाई हमले में 4 लोग मारे गए और 2 घायल हुए। हालांकि, यह साफ नहीं है कि हमला किसने किया और मारे गए लोग हाईजैक में शामिल थे या नहीं। जहाज और क्रू की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी साफ नहीं है। हूती हमले में मारे गए 2 पाकिस्तानी नाविकों के शव कराची पहुंचे हूती हमले में मारे गए 2 पाकिस्तानी नाविकों के शव गुरुवार को कराची पहुंच गए। हमले में घायल हुए 6 पाकिस्तानी नाविक भी सुरक्षित पाकिस्तान लौट आए हैं। 11 अगस्त को तंजानिया के झंडे वाले ‘तिहामा’ जहाज पर बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में हूतियों ने हमला किया था। इसमें 3 पाकिस्तानी और 1 इंडोनेशियाई नाविक की मौत हुई थी। दो घायल नाविक और दोनों मृत नाविकों के शव सऊदी एयरलाइंस की फ्लाइट से कराची पहुंचे, जबकि बाकी 4 घायल PIA की फ्लाइट से लौटे।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हमले की निंदा की और कहा कि समुद्री नाविकों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए। खबर अपडेट हो रही है…

हूती विद्रोहियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला:2 पाकिस्तानी समेत 3 की मौत; रेड सी में अब तक 8 जहाजों को निशाना बनाया

यमन के ईरान से जुड़े हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में एक सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला किया। यमन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले में जहाज के तीन क्रू मेंबर मारे गए। इनमें दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, हमले की चपेट में आया तंजानिया के झंडे वाले तिहामा नाम का यह कार्गो जहाज ओमान के सलालाह बंदरगाह से जिबूती होते हुए आगे जा रहा था। हूतियों ने अब तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुतियों की सऊदी जहाज पर नाकेबंदी शुरू होने के बदा से रेड सी में अब तक 8 जहाजों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों का केंद्र बाब अल-मंदेब स्ट्रेट रहा है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब में भी बढ़ा खतरा यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पहले ही समुद्री कारोबार पर दबाव है। बाब अल-मंदेब में जहाजों पर बढ़ते हमलों से शिपिंग कंपनियों के लिए अनिश्चितता और बढ़ गई है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। रॉयटर्स के मुताबिक, अगर तीन लोगों की मौत की पुष्टि होती है तो फरवरी के अंत में अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद किसी जहाज पर हूतियों के हमले में यह पहली मौत होगी। इसके बाद मध्य-पूर्व का संघर्ष और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर असर हूतियों के हमलों से सऊदी अरब का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। समुद्री यातायात पर भी असर पड़ा है, जिसके चलते जहाज सुरक्षा कारणों से लाल सागर और स्वेज नहर से बच रहे हैं। अब जहाज पश्चिमी देशों तक पहुंचने के लिए अफ्रीका के चारों ओर से जा रहे हैं। इससे सामान की डिलीवरी धीमी हो रही है, सामान की कमी बढ़ रही है, सप्लाई लाइन का संकट बन रहा है और रोजमर्रा का खर्च बढ़ रहा है। यमन में ईरान और सऊदी अरब आमने-सामने ईरान और सऊदी अरब यमन में छद्म युद्ध लड़ रहे हैं। दोनों देश वहां विरोधी पक्षों का समर्थन करते हैं। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि ईरान हूतियों के साथ है। हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है। हूतियों ने 2023 और 2024 में भी लाल सागर में नियमित रूप से जहाजों पर हमले किए थे। इससे समुद्री यातायात पर असर पड़ा था। इस समय हूतियों के हमलों का असर इसलिए ज्यादा महसूस हो रहा है, क्योंकि दुनिया पहले से ही होर्मुज स्ट्रेटके बंद होने से जूझ रही है। होर्मुज और स्वेज नहर में यातायात धीमा ईरान जहाजों को होर्मुज स्ट्रेटसे गुजरने की अनुमति नहीं दे रहा है। वहीं, हूती संगठन अब लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमला कर रहा है। दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की आवाजाही होर्मुज स्ट्रेटसे होती है। लाल सागर में मौजूद स्वेज नहर पूर्वी गोलार्ध को पश्चिमी गोलार्ध से जोड़ती है। अब दोनों जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही बहुत धीमी हो गई है।

Dubai Blast: जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में 20 मिनट में 7 धमाके, आसमान में उठा धुएं का गुबार, देखें वीडियो

Dubai Blast: दुबई के जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में बुधवार सुबह धमाकों की खबर से हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में आसमान में घना धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमीराती अधिकारियों ने बताया कि 20 मिनट के अंदर कम से कम सात धमाके हुए। हालांकि, इस घटना की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

बता दें कि ये धमाके दक्षिणी दुबई में जेबेल अली पोर्ट और इंडस्ट्रियल एरिया के पास हुए, जो संयुक्त अरब अमीरात में लॉजिस्टिक्स और ईंधन का एक अहम केंद्र है। हालांकि, अधिकारियों ने हताहतों या नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाकों और उसके बाद लगी आग के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे थे। इसके बाद अमीराती अधिकारियों ने घटना की रिकॉर्डिंग करने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया।

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि ये धमाके यमन से दागी गई मिसाइल के हमले के कारण हुए, जबकि अमीराती मीडिया ने पुष्टि की कि कई धमाकों की आवाज सुनी गई थी, लेकिन कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया।

इस बीच, स्थानीय मीडिया के अनुसार, NASA की थर्मल इमेजिंग में जेबेल अली पोर्ट के पास एक गोदाम में आग लगने का पता चला है। यह इलाका ईंधन जमा करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने के काम आता है। इससे धमाकों के बाद लगी बड़ी आग की खबरों को और बल मिला है।

लगभग उसी समय, यमन की राजधानी सना में भी धमाकों की खबरें आईं। कुछ खबरों में इन आवाजों को हवाई हमलों का नतीजा बताया गया, जबकि अन्य में कहा गया कि यमन के इलाके से मिसाइलें दागी गई थीं, जिससे घटनाओं के क्रम को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि यमन के हूथी विद्रोहियों ने जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया को निशाना बनाया हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने इलाके में कई जगह आग, आसमान तक उठते धुएं के गुबार और लगातार हो रहे धमाकों की जानकारी दी है।

हालांकि, इस घटना की जिम्मेदारी को लेकर अमीराती अधिकारियों या हूतियों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि यह घटनाक्रम ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच सामने आया है, जिससे रणनीतिक रूप से अहम खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट बना हुआ है और टकराव जारी है।

वहीं, UAE के अधिकारियों ने अभी तक धमाकों की वजह के बारे में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है और न ही इस बात की पुष्टि की है कि यह घटना किसी हमले का नतीजा थी।

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अमेरिका-सऊदी ने इराक में हवाई हमले किए:ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर निशाना; जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं

अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन ठिकानों से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। हमलों के कुछ घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ये मिसाइलें जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर दागी गई थीं, लेकिन सभी को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर दिया गया। सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल ठिकानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराए। वहीं, यमन के हुती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की बात कही। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने भी एक टैंकर के पास विस्फोट की सूचना दी है। इराक में US-सऊदी के हमलों से जुड़े फुटेज… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प-नेतन्याहू की मुलाकात, ईरान पर बनी सहमति: व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद नेतन्याहू ने इसे अपनी सबसे अच्छी बैठकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। 2. जेलेंस्की ने ट्रम्प से एयर डिफेंस और युद्ध पर की चर्चा: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रम्प से मुलाकात में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, रक्षा सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज करने पर चर्चा की। 3. होर्मुज स्ट्रेट पर ओमान का नया फॉर्मूला: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान ने प्रस्ताव दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण सिर्फ ईरान के पास न होकर क्षेत्र के सभी देशों की साझेदारी में हो। इस प्रस्ताव को खाड़ी के कई देशों का समर्थन भी मिला है। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत की खबरों से कच्चा तेल सस्ता: दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों पिछले कई दिनों के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे। 5. मिडिल ईस्ट में बढ़े ड्रोन हमले, कई देशों में अलर्ट: पिछले दो दिनों में इराक, जॉर्डन और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ हमलों की जिम्मेदारी हूतियों ने ली है, जबकि कई मामलों में हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती विद्रोही सीधे इस लड़ाई में उतरने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक पकड़ और ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी 2022 में हुए युद्धविराम के बाद यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में स्थायी शांति समझौते पर बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। तनाव बना रहा, मगर दोनों पक्ष बड़े युद्ध से बचने की कोशिश करते रहे। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हालात तेजी से बदल गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ा है और चार साल पुराना युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ फिर युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला संघर्ष है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन उसे कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। उल्टा उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाकर वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश की राजनीति में बड़ी भूमिका चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं। ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। सऊदी ने 2015 में हूती के खिलाफ जंग शुरू की हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया। इससे पड़ोस के सऊदी अरब को खतरा महसूस हुआ क्योंकि हूती का समर्थन ईरान कर रहा था। ऐसे में सऊदी ने 2015 में आठ अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस गठबंधन का मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर सत्ता में लाना था। करीब आठ साल तक लड़ाई के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूतियों को हराना संभव नहीं है। इसके बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से संपर्क शुरू किया। आज उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूतियों का नियंत्रण है। वहीं दक्षिणी यमन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। गाजा युद्ध ने बिगाड़ दिया शांति समझौता 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में स्थायी शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही थी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों पुराना युद्ध खत्म हो सके। सबसे बड़ा विवाद यमन के तेल से होने वाली कमाई और सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर था। इसके बावजूद दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुंच चुके थे। लेकिन अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होते ही पूरी तस्वीर बदल गई। हूतियों ने खुद को हमास के समर्थन में उतार दिया और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। इसके जवाब में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद शांति वार्ता धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चली गई। हूती ने सऊदी पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया गाजा युद्ध के दौरान हूतियों ने सऊदी अरब पर सीधे हमले नहीं किए। लेकिन उन्होंने रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इससे दुनिया के कई देशों का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ। इसके बाद 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी का कहना है कि इस फैसले से हूतियों के कब्जे वाले इलाकों की पहले से खराब अर्थव्यवस्था और बिगड़ गई। इससे वहां रहने वाले लोगों में नाराजगी भी बढ़ने लगी। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने मौजूदा तनाव के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि सऊदी अरब ने शांति वार्ता के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं किए। खासकर हूती नियंत्रित इलाकों के सरकारी कर्मचारियों की रुकी हुई तनख्वाह बहाल नहीं की गई। हालांकि सऊदी अरब ने इन आरोपों से इनकार किया है। यमन में सऊदी राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने कहा कि उनका देश तनाव कम करना चाहता है और यमन में स्थायी शांति का समर्थन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हूती लगातार हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं और बाहरी ताकतों के हितों के लिए काम कर रहे हैं, जिसका नुकसान यमन की जनता को उठाना पड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती सीधे इस लड़ाई में शामिल होने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में शामिल होने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान को ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक ताकत और पकड़ और मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी यमन में 2022 हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हुए युद्धविराम के बाद लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच स्थायी शांति समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इससे तनाव बना रहा, लेकिन दोनों पक्ष दोबारा बड़े युद्ध से बचना चाहते थे। खासकर सऊदी अरब, क्योंकि कई साल के युद्ध में उसे भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ा था। हालात तब बदले, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया। ईरान हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। इस वजह से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया और इसका असर यमन पर भी पड़ा। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ने लगा है और एक बार फिर से जंग का खतरा बढ़ गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ दोबारा युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला युद्ध है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने भारी पैसा खर्च किया, लेकिन उसे कोई बड़ा फायदा नहीं मिला। उल्टा उसकी छवि खराब हुई और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि अगर वे सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाते हैं तो उन्हें फायदा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश में ज्यादा राजनीतिक ताकत चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, “हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं।” ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” ईरान के समर्थन से उन्होंने 2014 में गृहयुद्ध शुरू किया और राजधानी सना पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। यमन की उत्तरी सीमा से लगे सऊदी अरब को अपने पड़ोस में ईरान समर्थित हूती संगठन का मजबूत होना बड़ा खतरा लगा। साल 2015 में सऊदी अरब ने 8 और अरब देशों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग छेड़ दी। इसका मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर से सत्ता में लाना था, जिसे हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से हटा दिया था। करीब 8 साल तक जंग लड़ने के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूती को हराना संभव नहीं है। इसलिए 2022 के बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से भी संपर्क शुरू किया। फिलहाल हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर अपना प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था। वहीं दक्षिणी यमन पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का कंट्रोल है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। आज भी यमन के कई अहम मामलों में सऊदी अरब का प्रभाव बना हुआ है। गाजा जंग की वजह से शांति प्रक्रिया पटरी से उतरी 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते की बातचीत आगे बढ़ी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों से चला आ रहा युद्ध खत्म हो सके। इस बातचीत में सबसे बड़ा विवाद यमन के तेल के पैसों को लेकर था। हूती चाहते थे कि तेल से होने वाली कमाई का हिस्सा उनके नियंत्रण वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर भी खर्च किया जाए। सऊदी अरब भी इस पर बातचीत कर रहा था और समझौता लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन अक्टूबर 2023 में हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया। इसके बाद गाजा युद्ध शुरू हुआ और हूतियों ने फिलिस्तीन के समर्थन में इजराइल और रेड सी से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल व ड्रोन हमले शुरू कर दिए। यहीं से यमन की शांति प्रक्रिया फिर पटरी से उतर गई। सऊदी अरब और उसके सहयोगियों का कहना था कि हूतियों की इन कार्रवाइयों ने युद्धविराम की भावना को खत्म कर दिया। वहीं हूतियों का तर्क था कि उनका समझौता सिर्फ सऊदी अरब के साथ था, इसलिए शांति वार्ता जारी रहनी चाहिए। हूती ने सऊदी पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया गाजा युद्ध के दौरान हूतियों ने सऊदी अरब पर सीधे हमले नहीं किए। लेकिन उन्होंने रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इससे दुनिया के कई देशों का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ। इसके बाद 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी का कहना है कि इस फैसले से हूतियों के कब्जे वाले इलाकों की पहले से खराब अर्थव्यवस्था और बिगड़ गई। इससे वहां रहने वाले लोगों में नाराजगी भी बढ़ने लगी। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने मौजूदा तनाव के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि सऊदी अरब ने शांति वार्ता के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं किए। खासकर हूती नियंत्रित इलाकों के सरकारी कर्मचारियों की रुकी हुई तनख्वाह बहाल नहीं की गई। हालांकि सऊदी अरब ने इन आरोपों से इनकार किया है। यमन में सऊदी राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने कहा कि उनका देश तनाव कम करना चाहता है और यमन में स्थायी शांति का समर्थन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हूती लगातार हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं और बाहरी ताकतों के हितों के लिए काम कर रहे हैं, जिसका नुकसान यमन की जनता को उठाना पड़ रहा है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : कच्चे तेल में उछाल ने ग्लोबल बाजारों का मूड खराब कर दिया है। गिफ्ट निफ्टी करीब 175 अंक फिसला है। FIIs की कैश में करीब 3000 करोड़ रुपये की बिकवाली देखने को मिली है। लॉन्ग शॉर्ट रेश्यो भी 8% के नीचे फिसल गया है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

23 जुलाई को भारतीय बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट जारी रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार पर दबाव डाला। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर और निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ।

GIFT निफ्टी

GIFT निफ्टी शुरुआती कारोबार में लगभग 23,695 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार में कमजो शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार और अमेरिकी बाजार

एशियाई बाजारों में भी आज दबाव दिख रहा है। निक्केई और कॉस्पी में तीन फीसदी की गिरावट है। महंगे क्रूड और बॉन्ड यील्ड के इस साल की ऊंचाई पर पहुंचने से US मार्केट में भी तेज बिकवाली दिखी है। डाओ जोंस 500 अंक से ज्यादा गिरा है। नैस्डैक भी दो परसेंट फिसला है।

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12.5% की जगह भारत पर अब 10% टैरिफ

ट्रंप टैरिफ से भारत को मामूली राहत संभव है। प्रस्तावित 12.5% की जगह भारत पर अब 10% टैरिफ लग सकता है। फोर्स्ड लेबर इनवेस्टिगेशन के तहत 10% टैरिफ का प्रस्ताव है। यह टैरिफ भारत समेत 60 देशों पर लागू होगा।

ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका, क्रूड ऊपरी स्तरों से थोड़ा हुआ नरम

अमेरिका, ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में है। ईरान में UK की एंबेसी बंद कर दी गई है। फ्रांस ने भी तेहरान में अपना दूतावास खाली करा लिया है। ट्रंप ने कहा है कि हूती के हमलों के लिए ईरान जिम्मेदार होगा। हालांकि, क्रूड ऊपरी स्तरों से थोड़ा नरम पड़ा है। यह 102 डॉलर तक जाकर फिलहाल 99 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।

ट्रंप ने कहा है कि पहले हूती जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे थे। पिछले साल अमेरिका ने हमला किया था। हमले के बाद हूती का व्यवहार जिम्मेदारी भरा था। हूतियों ने बीती रात फिर हमला किया है। इन्होंने सऊदी के 2 जहाजों पर हमला किया है। दोबारा ऐसा करना उनके हित में नहीं होगा। इसके लिए हूती और ईरान दोनों को जिम्मेदार ठहराएंगे। ईरान और हूतियों को कड़ी सैन्य सजा मिलेगी। जहाजों और माल को नुसकान की भरपाई होगी। ईरान के पैसों से नुसकान की भरपाई होगी। नुकसान की राशि बड़ी हो सकती है।

कच्चे तले में लगी आग

कच्चे तेल के भाव 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। कल ब्रेंट $101 के ऊपर बंद हुआ था। आज भी ब्रेंट $100 के ऊपर कायम है। WTI में भी $91 के ऊपर कारोबार हो रहा है। जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से इसमें तेजी आई है। रेड और ब्लैक सी दोनों जगह तनाव बढ़ा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर असमंजस कायम है। फिजिकल में भाव $105/बैरल के पार निकलते दिखे हैं। डीजल वायदा 7 अप्रैल के बाद सबसे ऊंचाई पर दिख रहा है।

इंफोसिस के निराशाजनक Q1 नतीजे

पहली तिमाही में इंफोसिस के नतीजों ने निराश किया है। constant currency Revenue Growth महज 1 परसेंट रही है। यह अनुमान से कम रही है। हालांकि मार्जिन अनुमान के मुताबिक रहे हैं। लेकिन गाइंडेंस में कटौती की गई है। आशीष कुमार दास अगले साल एक अप्रैल से सलिल पारेख की जगह इंफोसिस के नए MD & CEO होंगे। अमेरिका में इंफोसिस का ADR दो परसेंट नीचे बंद हुआ है।

इंडिगो पर पड़ी महंगे कच्चे तेल की मार

इंडिगो के नतीजों पर महंगे कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी का असर साफ दिखा है। पहली तिमाही में 20% आय बढ़ने के बावजूद कंपनी को 382 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। जेट फ्यूल खर्च 86% बढ़ा है। मार्जिन भी घटकर आधे हो गए हैं। मैनेजमेंट ने कहा है कि दूसरी तिमाही में हालात सामान्य से कमजोर रहने की उम्मीद है।

Q1 में उम्मीद से बेहतर सोना BLW के नतीजे,14% बढ़ा मोतीलाल ओसवाल का मुनाफा

पहली तिमाही में सोना BLW के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे हैं। कंपनी का मुनाफा 47% तो रेवेन्यू 52% बढ़ा है। हालांकि मार्जिन भी उम्मीद से बेहतर रही है। वहीं मोतीलाल ओसवाल का ऑपरेटिंग मुनाफा 14% बढ़ा है। साथ ही असेट एंड प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का प्रॉफिट 46% बढ़ा है।

नतीजों के लिहाज से आज अहम दिन

नतीजों के लिहाज से आज अहम दिन है। आज निफ्टी की चार कंपनियों,श्रीराम फाइनेंस,टाटा कंज्यूमर,NTPC और SBI LIFE के रिजल्ट आएंगे। श्रीराम फाइनेंस का मुनाफा 52% बढ़ सकता है। इसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन में भी सुधार संभव है। साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा,CG पावर,लॉरस लैब समेत वायदा की 13 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

आज कैबिनेट बैठक में होगा बड़ा फैसला

नीट पेपर लीक के खिलाफ पीएम मोदी का कल रात बड़ा संदेश आया। आज कैबिनेट में सरकार पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कदम उठाएगी। इससे जुड़े बिल को जल्द सदन में पास कराने की कोशिश होगी। उधर सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद अनशन तोड़ा है। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद उन्होंनें अनशन तोड़ने का फैसला लिया

विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली

23 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और लगभग 3,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार दो सेशन तक बिकवाली करने के बाद खरीदारी की और 2,947 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

Oil Price: $100 के पार पहुंचा कच्चा तेल, हूती हमले और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से चिंता बढ़ी

Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को जोरदार उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 7% चढ़कर 100.71 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। यह करीब दो महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 6% बढ़कर 92.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

तेल की कीमतों में यह तेजी यमन के हूती विद्रोहियों के दावे के बाद आई। हूतियों ने कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इससे दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

मिडिल ईस्ट पहले से ही तनाव में है। ऊपर से होर्मुज स्ट्रेट में तेल की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। अब लाल सागर में भी हमले शुरू हो गए हैं। ऐसे में बाजार को डर है कि दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई और कम हो सकती है।

मैटाडोर इकोनॉमिक्स के चीफ इकोनॉमिस्ट टिम स्नाइडर का कहना है कि सऊदी टैंकरों पर हमला तेल बाजार के लिए बड़ा झटका है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कीमतें ऊपर रह सकती हैं।

हूतियों ने क्या दावा किया?

हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी तेल ले जा रहे दो टैंकरों को निशाना बनाया। उनका कहना है कि वे सऊदी अरब के तेल निर्यात पर समुद्री नाकेबंदी लागू करेंगे।

बाद में सऊदी समाचार एजेंसी ने भी पुष्टि की कि दो टैंकरों में से एक पर हमला हुआ और उसमें आग लग गई।

गोल्डमैन सैक्स की बड़ी चेतावनी

गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा संकट 2027 तक जारी रहता है, तो इस साल की चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। अगले साल इसका औसत भी करीब 100 डॉलर रह सकता है।

अगर बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट और स्वेज नहर में भी लंबे समय तक रुकावट बनी रही, तो तेल और महंगा हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट में क्या हो रहा है?

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि ओमान के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई। दो दूसरे टैंकर वापस लौट गए।

ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है। जब तक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक उसकी मंजूरी के बिना कोई टैंकर वहां से नहीं गुजर सकेगा।

सप्लाई पर कितना असर?

यूबीएस के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले गैर-ईरानी टैंकरों की संख्या तेजी से घटी है। वहीं, अमेरिकी नाकेबंदी के चलते ईरान का तेल निर्यात भी लगभग शून्य पर पहुंच गया है।

पिछले सात दिनों में खाड़ी क्षेत्र से तेल लोडिंग घटकर 25 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। इससे पहले 30 दिनों का औसत 60 लाख बैरल प्रतिदिन था।

अमेरिका भी लगातार कर रहा हमला

अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने लगातार 12वीं रात ईरान के ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज को निशाना बनाया, तो अमेरिका उसके अहम ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘ईरान और हूतियों को भयानक मिलिट्री सजा दी जाएगी, अब फिर हमला हुआ तो…’, सऊदी के जहाजों पर अटैक के बाद ट्रंप का फूटा गुस्सा; दे डाली धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान समर्थित हूतियों के किसी भी भविष्य के हमले के लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समूह फिर से जहाजों को निशाना बनाता है, तो उन्हें बड़ी सैन्य सजा दी जाए

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