Gold Silver Weekly Report: सोने और चांदी में हफ्ते के आखिर में तेज गिरावट, सोना 3% फिसला

Gold Silver Weekly Report: सोने के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। चांदी में भी इस हफ्ते गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच है। 28 अगस्त को फेड चेयरमैन ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर होगा। इसका असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

24 अगस्त को सोना 4700 डॉलर के करीब पहुंच गया था

सोना इस हफ्ते मंगलवार यानी 24 अगस्त को तीन महीने के सबसे ऊंचे लेवल 4,696 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 28 अगस्त को स्पॉट गोल्ड 3.18 फीसदी गिरकर 4,454 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी 27 अगस्त को करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। 28 अगस्त को यह 4.48 फीसदी गिरकर 66 डॉलर पर आ गई।

फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी में तेज गिरावट 

शुक्रवार की गिरावट से पहले इस हफ्ते सोने और चांदी में अच्छी तेजी आई थी। इसकी वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से उपाय का ऐलान डिबेसमेंट ट्रेड था। लेकिन, फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी पर ब्रेक लग गया। अमेरिका में जुलाई में पर्सनल कंजमप्शन एक्सपेंडिचर इनफ्लेशन 3.7 फीसदी पर रहा।

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी फिसला सोना 

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में 28 अगस्त को गिरावट आई। सोना 3,300 रुपये गिरकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह दिल्ली में सोने की कीमतों में गिरावट का लगातार तीसरा दिन था। इस हफ्ते दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतेंत 4,700 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरी हैं। 25 अगस्त को दिल्ली में सोना 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

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सोने की कीमतों पर मुनाफा वसूली का भी असर 

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते कीमतों में तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने पर पड़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की चर्चा का भी असर पड़ा।

Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते गिरे, क्या बाजार के अच्छे दिन अभी दूर हैं?

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट आई। बाजार में काफी उतार-चढ़ाव भी दिखा। यह बीते पांच महीनों में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला रहा। हालांकि, 28 अगस्त को यानी हफ्ते के अंतिम दिन सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए।

इस हफ्ते प्रमुख सूचकांकों में 0.47 फीसदी तक गिरावट आई

28 अगस्त को निफ्टी 0.35 फीसदी यानी 84 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। Sensex 0.43 फीसदी यानी 330 अंक चढ़कर 77,264 पर क्लोज हुआ। बीते एक हफ्ते में सेंसेक्स 0.44 फीसदी गिरा है। निफ्टी इस दौरान 0.47 फीसदी यानी 114 प्वाइंट्स गिरा है। शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट ने इनवेस्टर्स को चिंतित कर दिया है।

BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1 लाख करोड़ घटा

बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन इस हफ्ते करीब 1 लाख करोड़ रुपये घटा है। इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा का बड़ा हाथ रहा। उधर, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार दूसरे हफ्ते बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

जियोपॉलिटिकल स्थितियां अब भी चिंताजनक

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्थितियां अभी भी चिंताजनक बनी हुई हैं। खासकर मिडिलईस्ट में हालात में बदलाव नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। उधर, ईरान और ओमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बातचीत हुई है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। लेकिन, अब भी ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। यह चिंता की बात है।

अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का आसार

उधर, अमेरिका में फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद 28 अगस्त को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। वॉर्श ने यह साफ कर दिया है कि फेड का फोकस फिलहाल महंगाई को बढ़ने से रोकने पर होगा। इसका मतलब है कि अगले महीने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का एलान कर सकता है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो उसका असर भारत में भी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा। भारत में भी इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल चुका है।

क्रूड में तेजी जारी रही तो बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की कीमतें अगर नीचे नहीं आती हैं तो इनफ्लेशन बढ़ना जारी रहेगा। इस बीच इनवेस्टर्स की नजरें अगस्त के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ता है तो अक्तूबर में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका असर कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान पर पड़ेगा।

निफ्टी-सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजे अच्छे आए हैं। इससे इकोनॉमी में डिमांड स्ट्रॉन्ग रहने का संकेत मिलता है। लेकिन, शेयरों की कीमतों में बड़ी तेजी तभी दिखेगी, जब क्रूड की कीमतें नीचे आएंगी। इस बीच निफ्टी और सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड बता रहा है कि सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है। हालांकि, इंडिया वीआईएक्स में नरमिी है। यह 3.5 फीसदी गिरकर 10.68 पर आ गया है। यह अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेजज से नीचे है। इसका मतलब है कि बाजार में आगे बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। फिलहाल बाजार सीमित दायरे में रह सकता है।

जैक्सन होल की बैठक के बाद शेयर मार्केट में कोहराम, S&P500 आया नीचे, टेक शेयरों पर तेज दबाव

अमेरिका के फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श की स्पीच के बाद अमेरिकी शेयर मार्केट में कोहराम मच गया। उनके बयान से निवेशकों को यह संकेत मिला कि फेड की कोशिश महंगाई से निपटने की है। इसी बीच ट्रेडर्स ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार पर दांव लगाना शुरू कर दिया। केविन वार्श के स्पीच के चलते अमेरिका के अहम इंडेक्स लगातार बढ़त और गिरावट के बीच झूलते रहे। हालांकि इक्विटी मार्केट में कुछ हद तक स्थिरता दिखाई दी। ऐतिहासिक रूप से फेड चेयर का जैक्सन होल भाषण शेयर बाजार के लिए बहुत बड़ा ट्रिगर नहीं रहा है। वर्ष 2000 से अब तक इस स्पीच के बाद अगले हफ्ते इंडेक्स में औसतन सिर्फ 0.4% का बदलाव हुआ है। हालांकि अगर यह स्पीच मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव से पहले आता है, तो इसका असर अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

क्या है अमेरिकी मार्केट में स्थिति

अमेरिका का अहम इंडेक्स एसएंडपी 500 (S&P500) 0.2% टूट गया। इंडस्ट्रियल और आईटी शेयरों में गिरावट ने इस पर दबाव डाला। सेमीकंडक्टर इंडेक्स में शामिल लगभग सभी कंपनियों के शेयर गिरे, और सबसे अधिक गिरावट एनविडिया (Nvidia) में रही। अमेरिका का टेक-हैवी नास्डाक 100 (Nasdaq 100) भी 0.7% टूट गया और शुरुआती बढ़त गंवाते हुए डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) भी थोड़ा नीचे आया। Cboe Volatility Index में गिरावट जारी रही और 14 से थोड़ा ही ऊपर है। साथ ही तेल निकालने वाले देशों के संगठन ओपेक (OPEC) से वेनेजुएला बाहर निकलने पर विचार कर रहा है, जिससे तेल की कीमतें गिर गई।

क्या कहना है केविन वार्श का

अमेरिकी फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वार्श ने आने वाले समय के लिए गाइडेंस यानी अनुमान को लेकर अपनी अनिच्छा दोहराई। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जिसमें मार्केट अपने अगले ट्रेड के लिए मुख्य रूप से फेड की तरफ देख रहे हों। उन्होंने कहा कि शांत फेड अपने उद्देश्यों को हासिल करने में अधिक सक्षम होगा और महंगाई को कंट्रोल करने के लिए अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने कहा कि महंगाई लंबे समय से जरूरत से ज्यादा ऊंची बनी हुई है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

सिटी वेल्थ की चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर केट मूर ने ब्लूमबर्ग टीवी के एक इंटरव्यू में कहा कि निवेशकों को अर्थव्यवस्था, मुनाफे और 2% महंगाई के लक्ष्य को लेकर अमेरिकी फेड की प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी चाहिए थे और उन्हें यह मिल गई, जिसके चलते इक्विटी मार्केट में कुछ स्थिरता दिख रही है।

खत्म हुआ इंतजार, जैक्सन होल की बैठक में फेड ने महंगाई को लेकर जताई यह चिंता

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खत्म हुआ इंतजार, जैक्सन होल की बैठक में फेड ने महंगाई को लेकर जताई यह चिंता

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श का कहना है कि अमेरिका का लेबर मार्केट अब भी मजबूत बना हुआ है और बेरोजगारी की मौजूदा रफ्तार लगभग फुल एंप्लॉयमेंट की स्थिति के हिसाब से है। उनका कहना है कि रोजगार के मोर्चे पर दोनों तरफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था अच्छा परफॉर्म कर रही है। अमेरिका में बेरोजगारी दर अभी 4.1% है जोकि फुल एंप्लॉयमेंट से जुड़ी परिस्थितियों के मुताबिक ही है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि महंगाई अभी भी पॉलिसीमेकर्स के लिए चिंता की बात बनी हुई है। उन्होंने ये बातें शुक्रवार को फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ कैनसस सिटी के एनुअल जैक्सन होल सिम्पोजियम में कही।

महंगाई को लेकर क्या है आशंका

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख ने रोजगार के मोर्चे पर इकॉनमी की सेहत को बेहतर तो बताया है लेकिन महंगाई को लेकर सतर्क भी किया है। उन्होंने कहा कि कीमतों का दबाव अभी भी ऊंचे लेवल पर बना हुआ है। उन्होंने महंगाई के आंकड़ों को और अधिक चिंताजनक बताया और कहा कि मौजूदा वित्तीय परिस्थितियां काफी हद तक सख्त है या नहीं, इस पर कु कहना उनके लिए मुश्किल होगा। ऐसे में इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि लेबर मार्केट में स्थिरता के संकेतों के बावजूद फेडरल रिजर्व की महंगाई की रफ्तार पर कड़ी नजर बनी रहेगी।

अर्थव्यवस्था पर AI को बढ़ते असर पर भी जोर

केविन वार्श ने अर्थव्यवस्था पर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते असर पर भी जोर दिया। उन्होंने अभी के समय को इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। केविन के मुताबिक एआई आने वाले वर्षों में प्रोडक्टिविटी, आर्थिक विकास और काम की प्रकृति को बड़े स्तर पर बदल सकती है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में केविन वार्श के प्रमुख बनने के बाद से फेड ने अर्थव्यवस्था पर एआई के आर्थिक असर की स्टडी तेज कर दी है। इसके लिए एक खास टास्क फोर्स बनाई गई है, जो यह जांच रही है कि यह प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी, रोजगार के रुझानों और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर किस तरह असर डाल सकता है।

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फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई पर चेताया, बोले- 2% इंफ्लेशन का लक्ष्य हासिल करना जरूरी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी इतनी नहीं घटी है कि फेड निश्चिंत हो सके। जब तक महंगाई के 2% लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने का भरोसा नहीं होता, तब तक फेड को काम करना होगा।

यह मई में फेड चेयर बनने के बाद वार्श का पहला बड़ा भाषण था। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिका के व्योमिंग में जैक्सन होल में फेड के सालाना सम्मेलन में यह बात कही। वार्श ने कहा कि 2% का महंगाई लक्ष्य तय है। फेड इसी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करेगा। उनके मुताबिक, कीमतों में स्थिरता लाना फेड की जिम्मेदारी है।

महंगाई में अभी बड़ा सुधार नहीं

वार्श ने कहा कि गर्मियों में PCE और CPI के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि महंगाई की मूल स्थिति में बड़ा सुधार आ गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी भी 2% से ऊपर है। इसलिए फिलहाल फेड का मुख्य फोकस कीमतों पर होना चाहिए।

ब्याज दर है फेड का बड़ा हथियार

वार्श के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय स्थितियां अभी बहुत सख्त नहीं हैं। ऐसे में ब्याज दर फेड का सबसे अहम हथियार है। उन्होंने कहा कि महंगाई अपने आप 2% तक नहीं आएगी। इसे स्थिर करना फेड की जिम्मेदारी है।

ब्याज दर बढ़ाने पर बंटी राय

अब बड़ा सवाल ब्याज दरों को लेकर है। अर्थशास्त्रियों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि महंगाई को काबू करने के लिए आने वाले महीनों में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

जुलाई की बैठक में फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। हालांकि, कई अधिकारियों ने दर बढ़ाने का समर्थन किया था। बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेड को नीति और सख्त करनी पड़ सकती है।

पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हुई थी आलोचना

जुलाई की बैठक के बाद वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना भी हुई थी। आलोचकों का कहना था कि वह दरें स्थिर रखने की वजह साफ तरीके से नहीं बता पाए।

उसके बाद निवेशकों ने लंबी अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड बेचने शुरू किए। इससे उनकी यील्ड करीब दो दशक के उच्च स्तर तक पहुंच गई। इसे फेड के 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे में कमी के संकेत के तौर पर देखा गया।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत

हालांकि, जुलाई की बैठक के बाद कुछ आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिले हैं। जुलाई में रिटेल बिक्री एक साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा गिरी। कोर महंगाई भी सीमित रही। कंपनियों ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियां घटाईं। इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी कटौती की गई।

इन आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम हुई है। शुक्रवार सुबह फेडरल फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 36% थी। जुलाई के अंत में यह 70% से ज्यादा थी।

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Gold Price Today: रक्षाबंधन पर सोना ₹3300 सस्ता हुआ, चांदी का ₹5000 गिरा भाव

Gold Price Today: सोने की कीमत में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। दिल्ली के बाजार में 24 कैरेट 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹3,300 टूटकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसमें सभी टैक्स शामिल हैं। गुरुवार को इसका भाव ₹1,65,700 था।

तीन दिन में सोना ₹4,700 यानी करीब 3% सस्ता हो चुका है। 25 अगस्त को इसका भाव ₹1,67,100 प्रति 10 ग्राम था। हाल की तेजी के बाद अब कारोबारी मुनाफावसूली कर रहे हैं।

चांदी भी ₹5,000 सस्ती

चांदी में भी शुक्रवार को गिरावट रही। घरेलू बाजार में इसका भाव ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ₹2,50,500 प्रति किलो थी।

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जितिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर 99.15 के स्तर से ऊपर चला गया। इसका असर सोने पर पड़ा। हाल की तेजी के बाद कारोबारी लगातार तीसरे दिन मुनाफावसूली कर रहे हैं।

कस्टम ड्यूटी घटने की खबर का भी असर

घरेलू बाजार में कस्टम ड्यूटी घटाने की खबरों से भी सोने पर दबाव आया। बढ़ती तस्करी के बीच सरकार कस्टम ड्यूटी घटा सकती है। ऐसी खबरें बाजार में चल रही हैं।

Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, इन खबरों से घरेलू सोने की कीमत पर दबाव बढ़ा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों में अंतर भी बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना कमजोर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड मामूली गिरावट के साथ $4,599.70 प्रति औंस पर था। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वार्श के जैक्सन होल सिम्पोजियम में होने वाले भाषण पर है।

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, बाजार वार्श के बयान पर नजर रख रहा है। महंगाई को लेकर उनका रुख अहम होगा। ऊंची यील्ड के बीच बाजार को उनके भाषण से संकेत मिलने की उम्मीद है।

बाजार में फिलहाल सख्त रुख वाले बयान की उम्मीद है। अगर वार्श निवेशकों को भरोसा नहीं दिला पाते हैं, तो डॉलर कमजोर हो सकता है। ऐसे में सोने को फिर तेजी मिल सकती है।

Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

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Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

Gold-silver Price : 360 ONE के प्रेसिडेंट और हेड-ब्रोकरेज,विरल शाह का कहना है कि अगर US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है तो अगले 6 से 8 महीनों में सोना और चांदी में मौजूदा स्तरों से 10% तक की तेजी आ सकती है। उनका मानना ​​है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं और हाई बॉन्ड यील्ड को लेकर US का रुख कीमती धातुओं को सपोर्ट करता रहेगा।

कमजोर डॉलर,US में कमजोर जॉब आंकड़ों और US ट्रेजरी विभाग की बॉन्ड-खरीद की घोषणा की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही जबरदस्त तेजी आ चुकी है। हालांकि,विरल शाह को लगता है कि सोने में 4,700–4,800 डॉलर और चांदी में 70–72 डॉलर के आस-पास कुछ टेक्निकल सेलिंग देखने को मिल सकती है। उन्हें उम्मीद है कि जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व का बयान निकट भविष्य में के लिए एक अहम ट्रिगर साबित होगा।

डॉलर में कमजोरी से कमोडिटी को मिलेगा सपोर्ट

उन्होंने आगे कहा कि अगर डॉलर और कमजोर होता है तो कमोडिटीज को और फायदा मिल सकता है। डॉलर इंडेक्स के लिए 100-101 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। उनका मानना ​​है कि डॉलर इंडेक्स के 97 की तरफ जाने से सोने,चांदी और बेस मेटल्स को सपोर्ट मिल सकता है।

कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत

प्रेशियस मेटल के अलावा,विरल शाह कॉपर और जिंक को लेकर भी पॉज़िटिव हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर्स और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन की वजह से कॉपर में लगभग एक साल से स्ट्रक्चरल बुल ट्रेंड बना हुआ है। उन्हें कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं। हालांकि उनका मानना ​​है कि कॉपर में अब तक की जोरदार बढ़त के बाद आगे और बढ़त का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

जिंक और कॉपर को सप्लाई में तंगी से मिल रहा फायदा

जिंक पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि सप्लाई से जुड़ी चिंताओं,खासकर चीन में बाढ़ के कारण कम उत्पादन होने से जिंक को सपोर्ट मिल रहा है। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज पर इन्वेंट्री कम हो रही है और सप्लाई तंग है,जबकि इसकी मांग मज़बूत बनी हुई है। शाह को उम्मीद है कि जब तक सप्लाई मांग के बराबर नहीं हो जाती,तब तक कॉपर और जिंक दोनों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट मुमकिन

कच्चे तेल पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई बेहतर होती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है,तो क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट आ सकती है। हालांकि,उन्हें नहीं लगता कि यह लंबे समय तक बनी रहने वाली गिरावट होगी,क्योंकि तमाम देशों को आखिरकार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को फिर से भरना ही होगा।

 

 

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Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 31 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और अच्छे ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। सेंसेक्स आज 331 अंक या 0.43 फीसदी बढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 85 अंक या 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ। चौतरफा खरीदारी के दम पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी तेजी आई। BSE 150 मिडकैप 0.16% चढ़ा,जबकि 250 स्मॉलकैप में 0.33% की बढ़त हुई।

बाजार की इस तेजी की मुख्य वजह चुनिंदा IT और बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों में आई जोरदार खरीदारी रही। सेंसेक्स की बढ़त में इन्फोसिस और HDFC बैंक का सबसे बड़ा योगदान रहा। हालांकि,ICICI बैंक ने इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव डाला।

TCS,इन्फोसिस,टेक महिंद्रा,HCL टेक और टाइटन सेंसेक्स की सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं। दूसरी ओर ICICI बैंक,अल्ट्राटेक सीमेंट,एशियन पेंट्स और ITC इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि IT शेयरों में जबरदस्त तेजी की वजह से आज भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। इस सेक्टर को Nvidia की शानदार कमाई और बेहतर आउटलुक से सहारा मिला। इससे AI से जुड़े निवेश के जारी रहने को लेकर भरोसा बढ़ा और एंटरप्राइज़ AI डिप्लॉयमेंट और वर्कफ़्लो इंटीग्रेशन से जुड़ी कंपनियों को फायदा हुआ। हालांकि,निवेशकों की भागीदारी चुनिंदा शेयरों में रही क्योंकि बाजार जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयर की टिप्पणियों पर नजरें बनाए हुए हैं। इससे US में ब्याज दरों के आउटलुक और ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति के बारे में ज्यादा साफ जानकारी मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर, Q1FY27 के नतीजों का दौर काफी हद तक अच्छे नतीजों के साथ खत्म हो रहा है,इसलिए अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे बदलती ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों के बीच अर्निंग ग्रोथ पर रहेगा।

हालांकि घरेलू लिक्विडिटी की अच्छी स्थिति बाजार को स्थिरता दे रही है,लेकिन वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता के विषय हैं,जिससे निवेशक ग्रोथ और कॉर्पोरेट मुनाफे से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर,अश्विनी शमी ने कहा कि अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड के 4.6%–4.7% के 1-साल के हाई के करीब रहने के बावजूद,हाल के हफ्तों में FII का निवेश थोड़ा पॉजिटिव रहा है। हालांकि US में रिस्क-फ्री रेट्स बढ़ने से आमतौर पर उभरते बाजारों में निवेश पर असर पड़ता है। लेकिन निवेश में यह बढ़ोतरी 2 साल से ज्यादा समय तक बाजार के कंसोलिडेशन के बाद भारतीय इक्विटी की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रुझान को दिखाती है। घरेलू रिटेल और DII का मजबूत निवेश बाजार में गिरावट को संभालने में मदद कर रहा है।

बेंचमार्क इंडेक्स एक दायरे में बने हुए हैं। लार्ज-कैप निफ्टी 100 (~20x P/E) की तुलना में स्मॉल और मिड-कैप इंडेक्स (~34x और 30x P/E) का वैल्यूएशन प्रीमियम काफी ज्यादा है,जो अच्छे बॉटम-अप मौके देता है। निकट भविष्य में बाजार का फोकस दूसरी छमाही (H2) की अर्निंग, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI के लिक्विडिटी रुख पर रहने की उम्मीद है। अच्छे वैल्यूएशन के कारण BFSI और फाइनेंशियल सर्विसेज के चुनिंदा शेयरों निवेश के मौके हैं। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर,पावर और बिजनेस सर्विसेज में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं, जिन्हें कैपेक्स (capex) में सुधार और ऑपरेटिंग लेवरेज से फायदा मिल रहा है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि लगातार दो सेशन में गिरावट के बाद आज भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी दिखी। IT शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले लेकिन पॉजिटिव संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ ट्रेड कर करते दिखे। हालांकि,कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,US बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के पॉलिसी आउटलुक को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है।

कल मंथली एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान दिखी भारी उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को दिन के आखिर में होने वाली हलचल को लेकर और सतर्क कर दिया।

आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें और इंस्टीट्यूशनल फ्लो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP,रिसर्च,अजीत मिश्रा ने कहा कि आज शुक्रवार को बाजार में सुस्ती रही और मिले-जुले संकेतों के बीच मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। सपाट शुरुआत के बाद,निफ्टी पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में घूमता रहा और आखिर में 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 0.43% ऊपर 77,264.51 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nvidia के शानदार तिमाही नतीजों और रेवेन्यू के अच्छे आउटलुक के बाद ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी के दम पर IT सेक्टर सबसे आगे रहा। फार्मा और मेटल सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए,जबकि FMCG और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी सुस्ती रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है।

ग्लोबल बाजार से मिले-जुले संकेतों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच निवेशकों का मूड सतर्क बना रहा। अब सबकी नजरें जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर टिकी हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी के लिए 24,100-24,000 के जोन के आसपास की खींचतान बनी हुई है। अगर यह लेवल टूटता है और गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स 23,800–23,650 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 24,200 का लेवल तत्काल रुकावट का काम कर सकता है और उसके बाद 24,300–24,400 का जोन अहम रेजिस्टेंस लेवल होगा।

मौजूदा अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ट्रेडरों को सलाह है कि इंडेक्स को लेकर सतर्क रुख अपनाएं और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करें। निवेशकों को मज़बूत शेयरों और सेक्टर को प्राथमिकता देनी चाहिए और साथ ही रिस्क और पोजीशन मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

Gold Price : शुक्रवार,28 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक US फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल में होने वाले भाषण से पहले मुनाफावसूली कर रहे है। फिलहाल 12 बजे के आसपास MCX पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 716 रुपए यानी 0.45 फीसदी की गिरावट के साथ 158,282 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी का सितंबर फ्यूचर्स 101 रुपए यानी 0.04 फीसदी गिरकर 240,550 रुपए प्रति किलोग्राम पर दिख रहा था।

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक वॉर्श के भाषण पर नजरें बनाए हुए है। US गोल्ड फ्यूचर्स के दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40% गिरकर 4,627.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए हैं।

गोल्ड पर जेफरीज की राय

इस बीच गोल्ड पर जारी अपनी रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज में कहा है कि भारत में आज भी सबसे बड़ा भरोसा सोने पर ही है। भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी है। उसके मुताबिक देश में करीब 4 लाख करोड़ डॉलर का सोना है,जो आगे चलकर इकोनॉमी और मार्केट दोनों को चमका सकता है। गोल्ड ही भारत का सुपर पावर है। भारत के गोल्ड की वैल्यू 4 लाख करोड़ डॉलर है जो कुल इक्विटी निवेश का 4 गुना है। देश में गोल्ड का भाव 10 फीसदी बढ़ने पर जीडीपी में 0.80 फीसदी का उछाल देखने को मिलता है।

जेफरीज का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से इकोनॉमी और मार्केट दोनों को फायदा होता है। देश में सोना बढ़ेगा तो खर्च बढ़ेगा। गोल्ड लोन के बढ़ते क्रेज से भी फायदा होगा। लोग घर में सोना रखने के बजाय गोल्ड लोन लेकर पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। गोल्ड लोन के पैसे से इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।

जेफरीज का गोल्डन पोर्टफोलियो

जेफरीज के गोल्ड थीम में मणप्पुरम और सिल्वर थीम में हिंदुस्तान जिंक शामिल है। इसके अलावा उसके मॉडल पोर्टफोलियो में कंजम्पशन थीम से मीशो और केमिकल थीम से नवीन फ्लोरीन शामिल है। वहीं, इसने अपने मॉडल पोर्टफोलियो से जिंदल स्टेनलेस और अंबुजा सीमेंट को बाहर कर दिया है। जेफरीज की राय है कि सोना चढ़ा तो टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स, MCX, IIFL फाइनेंस और मुथूट फाइनेंस की बल्ले-बल्ले होगी।

 

IT Stocks : Nvidia में आई रैली ने IT शेयरों में भरा जोश, निफ्टी के टॉप गेनरों में आईटी शेयरों का दबदबा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: चांदी हुई सस्ती, खरीदारी से पहले चेक करें 10 शहरों के ताजा भाव

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में आज सुस्ती देखने को मिल रही है। दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,59,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,64,900 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

वहीं आज बाजार ओपन होने से पहले तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव सुबह तक 0.03% घटकर यानी 78 रुपये गिरावट के साथ 240573 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,40,651 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

खरीदारी से पहले जानें क्या है आपके अपने शहर में ताजा भाव

शहर10 ग्राम चांदी100 ग्राम चांदी1 किलो चांदी
दिल्ली₹2,599₹25,990₹2,59,900
मुंबई₹2,599₹25,990₹2,59,900
कोलकाता₹2,599₹25,990₹2,59,900
चेन्नई₹2,649₹26,490₹2,64,900
पटना₹2,599₹25,990₹2,59,900
लखनऊ₹2,599₹25,990₹2,59,900
मेरठ₹2,599₹25,990₹2,59,900
अयोध्या₹2,599₹25,990₹2,59,900
कानपुर₹2,599₹25,990₹2,59,900
गाजियाबाद₹2,599₹25,990₹2,59,900
नोएडा₹2,599₹25,990₹2,59,900
गुरुग्राम₹2,599₹25,990₹2,59,900
चंडीगढ़₹2,599₹25,990₹2,59,900
जयपुर₹2,599₹25,990₹2,41,000
लुधियाना₹2,599₹25,990₹2,59,900
गुवाहाटी₹2,599₹25,990₹2,59,900
इंदौर₹2,599₹25,990₹2,59,900
अहमदाबाद₹2,599₹25,9902,59,900
वडोदरा₹2,599₹25,990₹2,59,900
सूरत₹2,599₹25,990₹2,59,900
पुणे₹2,599₹25,990₹2,59,900
नागपुर₹2,599₹25,990₹2,59,900
नासिक₹2,599₹25,990₹2,59,900
बैंगलोर₹2,599₹25,990₹2,59,900
भुवनेश्वर₹2,599₹25,990₹2,59,900
रायपुर₹2,599₹25,990₹2,59,900
हैदराबाद₹2,599₹25,990₹2,59,900

गुरुवार को क्या रहा चांदी का वायदा भाव

कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों द्वारा अपने सौदों का आकार घटाने से गुरुवार को वायदा कारोबार में चांदी की कीमत मामूली गिरावट के साथ 2,39,607 रुपये प्रति किग्रा पर लगभग स्थिर रही। मल्टी कमोडिटी एक्स्चेंज में चांदी के सितंबर वायदा की कीमत 31 रुपये यानी 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,39,607 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया।

वहीं वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 68.35 डॉलर प्रति औंस रह गयी। बाजार एक्सपर्ट्स ने कहा कि कारोबारियों की बिकवाली से चांदी वायदा कीमतों में मामूली गिरावट रही।

फेड चेयरमैन की स्पीच पर बाजार की नजर

बुलियन मार्केट की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह जैक्सन होल में 28 अगस्त को यह स्पीच देने वाले हैं। इससे फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर फेड की पॉलिसी का असर पहले डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। फिर इसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ेगा।

Gold Silver Price: विदेश में $4,600 पर स्थिर सोना, आज होने वाले इस अहम इवेंट्स पर टिकी है बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।