CJP Protest Updates: अभिजीत दीपके, रांका और दास गिरफ्तार! थोड़ी देर में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी! आज जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान, ध्रुव राठी रिहा

CJP Protest Updates: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार किए जाने के बाद आज यानी रविवार (11 अक्तूबर) को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। न्यूज एजेंसी ANI ने पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह के हवाले से यह जानकारी दी है। वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर के नेतृत्व में वकीलों की एक टीम CJP नेताओं की ओर से पैरवी कर सकती है। इस बीच, CJP ने चुनावी वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के विरोध में आज जंतर-मंतर पर एक बार फिर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

हिरासत के बाद अरेस्ट हुए CJP नेता

एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है। उन्हें आज रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस थाने में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।”

पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले राष्ट्रीय राजधानी में उनका विमान उतरने के बाद उन्हें हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने शनिवार को सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोक दिया था।

रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर बताया कि अभिजीत, आशुतोष और सौरव दास को सुबह दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने उन्हें सुबह इस बारे में जानकारी दी। CJP की लीगल हेड होने के नाते वह अन्य वकीलों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचेंगी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिए गए CJP नेता

CJP के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक विमान से हिरासत में लिया गया था। ये नेता जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में थी।

यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आयोजित किया जाना था। राजधानी में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए और प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

आज फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी CJP

CJP ने हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद अपने आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया है। पार्टी ने आज जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी की मांग है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली में CJP के आह्वान पर प्रस्तावित जुटान को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

चार पूर्व मुख्यमंत्री भी हिरासत में लिए गए

दिल्ली में हिरासत में लिए गए लोगों में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संस्थापक ममता बनर्जी, वामपंथी नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार के नाम शामिल हैं। प्रदर्शन को लेकर पुलिस और आयोजकों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। उसका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP ने वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है।

ध्रुव राठी को छोड़ा गया, जंतर-मंतर पहुंचने पर फिर कार्रवाई की चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार देर रात रिहा कर दिया था। हालांकि, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यदि वह जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करते हैं तो उनके खिलाफ दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। एक अधिकारी ने रविवार सुबह बताया, “हरियाणा के गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने के बाद यूट्यूबर ध्रुव राठी को देर रात रिहा कर दिया गया।” राठी को आज तड़के 3 बजे रिहा किया गया।

दिल्ली में लगातार हो रही हिरासत की कार्रवाइयों और CJP के नए प्रदर्शन के ऐलान के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें आज होने वाली मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिकी हैं।

सीईसी के इस्तीफा देने तक पीछे नहीं हटेंगे

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के खिलाफ तब तक प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प जताया, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। CJP ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

इस बीच, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में संभावित पाबंदियों को लेकर चेतावनी जारी की है। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉजपा के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि संगठन इस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटेगा।

CJP के प्रमुख नेताओं के हिरासत में रहने के बीच प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिंदे ने कहा, “आप चाहे जितने लोगों को हिरासत में लें। लेकिन जब तक सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम कल सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर जाएंगे।’” उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने और पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी विरोध जारी रखने की अपील की।

शिंदे ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजकों सौरव दास तथा आशुतोष रांका की हिरासत के बारे में भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए जाने के 12 घंटे बाद भी तीनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

Saudi-Houthi War: सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला! रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में 12 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल

Saudi-Houthi War: हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। ताजा हमले में 12 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन अधिकारियों ने रविवार (11 अक्टूबर) तड़के यह जानकारी दी। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई गई है। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए पड़ोसी देश यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। इस हमले के बाद सऊदी और हूती के बीच जारी जंग के खतरनाक रूप लेने के संकते है।

इस हमले को खाड़ी के अरब देशों में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद की सबसे घातक घटनाओं में से एक बताया गया है। क्षेत्र में पहले से जारी तनाव के बीच हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच लड़ाई तेज होने से संघर्ष का दायरा भी बढ़ा है। एक दशक से भी ज्यादा समय में सऊदी अरब में हुए इन सबसे घातक हमलों ने खाड़ी देश को हिलाकर रख दिया है। सीमा-पार तनाव बढ़ने के बीच देश हफ्ते से मिलिटेंट्स के हमलों को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है।

एयरपोर्ट के घरेलू टर्मिनल परिसर को बनाया निशाना

क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक, एक मिसाइल किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उस परिसर से टकराई, जहां घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले टर्मिनल 3 और 4 स्थित हैं। अधिकारी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर जानकारी दी, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की आधिकारिक अनुमति नहीं थी। हमले के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो फुटेज में एयरपोर्ट के बाहर आपातकालीन गाडि़यां दिखाई दिए। इन वीडियो का न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने विश्लेषण किया है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, घायलों को इलाज के लिए कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

मृतकों में कई देशों के नागरिक शामिल

सऊदी अधिकारियों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मृतकों में चार सऊदी नागरिकों के अलावा बांग्लादेश के दो नागरिक और अमेरिका, फिलिस्तीन, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया तथा सूडान का एक-एक नागरिक शामिल है। इस तरह अलग-अलग देशों के नागरिक इस हमले की चपेट में आए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हमले में एक अमेरिकी नागरिक की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह के हमले निर्दोष नागरिकों की जिंदगी के प्रति घोर उपेक्षा दर्शाते हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए।

सऊदी गठबंधन ने हूतियों को ठहराया जिम्मेदार

हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हमले की कड़ी निंदा की है। गठबंधन ने इसे ‘पूरी तरह युद्ध अपराध’ करार देते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। उसका कहना है कि एयरपो्ट पर कोई अमेरिकी सैन्य ठिकाने नहीं है। पिछले एक सप्ताह के दौरान एयरपोर्ट पर हुए कई हमलों में यह ताजा घटना है। इससे सऊदी अरब पर अपने सहयोगी देशों, खासकर अमेरिका से सैन्य सहायता मांगने का दबाव बढ़ने की आशंका है। सऊदी अरब अब तक हूती विद्रोहियों के साथ व्यापक युद्ध से बचने की कोशिश करता रहा है।

ट्रंप ने सऊदी अरब के समर्थन में हमले करने के दिए संकेत

रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के हमलों में शामिल होने पर विचार कर सकता है। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रशासन इस पर विचार कर रहा है और फैसला तेजी से लिया जाएगा।

ट्रंप ने बाद में कहा कि वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से बात करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने सऊदी अरब में हुई घटना को अस्वीकार्य बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि इस पर आगे फैसला किया जाएगा।

मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव

रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने के बाद क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका की संभावित सैन्य भागीदारी, सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई और यमन में तेज होती लड़ाई आने वाले दिनों में हालात को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक हूतियों के खिलाफ सऊदी हमलों में शामिल होने का आखिरी फैसला घोषित नहीं किया है। ट्रंप के बयान के मुताबिक, इस संबंध में आगे विचार-विमर्श और निर्णय होना बाकी है।

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Russia-Ukraine War Update: ‘यूक्रेन को अब नए राष्ट्रपति की जरूरत’: पुतिन को लेकर नरम पड़े ट्रंप के तेवर, जेलेंस्की पर भड़के

Russia-Ukraine War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर निशाना साधते हुए कहा है कि युद्धग्रस्त देश को ऐसे नए नेतृत्व की जरूरत है, जो समझौता करने में सक्षम हो। ट्रंप ने यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों को रोकने की अपील भी की है। उनके इस बयान से वॉशिंगटन और कीव के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन को एक नया राष्ट्रपति चुनने का समय आ गया है क्योंकि वर्तमान राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के साथ अपने देश के युद्ध को समाप्त करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं।

ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस में कहा, “मेरा सुझाव है कि वे (यूक्रेन के लोग) एक ऐसा नया नेता चुनें जो कोई समझौता कर सके। कुछ कारणों से वह (जेलेंस्की) ऐसा कभी नहीं करते।” ट्रंप ने यह दावा भी किया कि यदि वह 2022 में अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। उन्होंने कहा, “यूक्रेन और रूस के बीच यह युद्ध शुरू होने का कोई कारण नहीं था। यह अक्षमता के कारण शुरू हुआ।”

जेलेंस्की पर निशाना साधते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने (जेलेंस्की ने) अपने देश का 30 प्रतिशत हिस्सा गंवा दिया है और दोनों पक्षों को मिलाकर 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं तथा लाखों लोग मारे गए हैं। ट्रंप ने कहा, “यह एक ऐसा युद्ध है जो कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था। और मुझे लगता है कि अब समय आ गया है जब यूक्रेन को एक नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए।”

रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रंप

रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेन के हमले ट्रंप और जेलेंसी के संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर रहे हैं। ट्रंप ने इन हमलों को रोकने की जरूरत पर जोर देते हुए यूक्रेनी नेतृत्व को समझौते की राह अपनाने का संदेश दिया है। ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब रूस से डीजल की वैश्विक बाजारों में आपूर्ति की अनुमति देने वाली एक व्यवस्था पर अमेरिका आगे बढ़ रहा है। ऐसे में रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े फैसले और यूक्रेन की सैन्य रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं।

जेलेंस्की के नेतृत्व पर उठाए सवाल

ट्रंप ने अपने बयान में केवल रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का विरोध नहीं किया। बल्कि जेलेंस्की के नेतृत्व को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने सुझाव दिया कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चाहिए, जो किसी समझौते तक पहुंच सके। इस बयान को अमेरिका और यूक्रेन के बीच युद्ध को लेकर रणनीतिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ट्रंप की टिप्पणी के बाद यूक्रेन सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का डिटेल्स नहीं दिया गया है।

अमेरिका-यूक्रेन संबंधों पर क्या होगा असर?

ट्रंप का यह बयान रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन के रुख और यूक्रेन की सैन्य कार्रवाई के बीच तनाव को उजागर करता है। एक ओर ट्रंप यूक्रेन से हमले रोककर समझौते की दिशा में बढ़ने की अपील कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर रूस से डीजल की वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था भी चर्चा में है। फिलहाल, इस बयान के बाद अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में आगे क्या बदलाव आएगा, यह दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और आने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।

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CJP Protest: ‘आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं’; दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों पर UN की टिप्पणियों पर भारत का पलटवार

CJP Protest: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने शनिवार (10 अक्तूबर) को राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने का आग्रह किया। इसके बाद जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए उन्हें गलतफहमी पर आधारित और देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया।

भारत ने स्पष्ट किया कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान के तहत प्राप्त है। लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े एक्स (X) अकाउंट पर जारी पोस्ट में भारत ने अपना पक्ष रखा।

भारत के स्थायी मिशन ने कहा, “शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार हमारे संविधान में निहित है और मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा स्वतंत्र मीडिया द्वारा इसकी रक्षा की जाती है।” उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “हर लोकतंत्र की तरह, भारत के नागरिक भी सार्वजनिक व्यवस्था के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।”

सुरक्षा बलों ने ‘जेन-जी’ के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों को मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोक दिया, जिसके बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनावी सुधारों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए आयोजित किया गया था। निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों से इनकार किया है।

UN ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थमीम अल-खीथान ने शनिवार को एक बयान में कहा कि कार्यालय दिल्ली में आज बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों को लेकर चिंतित है। बयान में कहा गया, “हम अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान करने और उसे सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।”

अल-खीथान ने भारतीय अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि कानून लागू करने वाले कर्मी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से निपटते समय अत्यंत संयम बरतें। उन्होंने कहा कि ऐसा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए।” संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से व्यापक स्तर पर व्यक्त की गई चिंताओं का समाधान करने के लिए अर्थपूर्ण संवाद करने का भी आग्रह किया।

क्या है पूरा मामला?

CJP ने मध्य दिल्ली के प्रमुख स्थल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। भारी सुरक्षा व्यवस्था और सड़क मार्गों पर लगाए गए अवरोधकों के कारण अधिकतर प्रदर्शनकारी इलाके में नहीं पहुंच सके। CJP ने बताया कि उसके संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथी सौरव दास तथा आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचे उनके विमान के उतरने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि संगठन इस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटेगा।

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CJP के प्रमुख नेताओं के हिरासत में रहने के बीच प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिंदे ने कहा, “आप चाहे जितने लोगों को हिरासत में लें। लेकिन जब तक सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम कल सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर जाएंगे।” उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने और पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी विरोध जारी रखने की अपील की। शिंदे ने कहा, “बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और दिल्ली पुलिस जहां भी आपको रोके, वहीं प्रदर्शन करें।”

Delhi Protest: रात के अंधेरे में भी रिकॉर्डिंग करने वाले बॉडी कैमरों से लैस हुए दिल्ली पुलिस के जवान, समझिए क्या है तैयारी

जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए शनिवार 10 अक्टूबर को पूरी राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े और हाई-टेक इंतजाम किए गए हैं। इस बार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के जवान आधुनिक नाइट-विजन बॉडी-वॉर्न कैमरों (BWCs) से लैस नजर आ रहे हैं। यह विशेष बॉडी कैमरे जवानों की यूनिफॉर्म पर लगाए गए हैं, जो दिन के उजाले के साथ-साथ रात के घने अंधेरे में भी हाई क्वॉलिटी की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करने में सक्षम हैं।

यह कैमरे हमारी और जनता दोनों की सुरक्षा के लिए हैं: जवान ने समझाई उपयोगिता

ANI की एक एक्स पोस्ट में दिल्ली में तैनात पुलिस जवान अपनी यूनिफॉर्म पर यह कैमरे पहने हुए दिखाई दिए। सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के जवान दीपक चौधरी ने इन कैमरों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि यह बॉडी कैमरे जवानों के साथ-साथ आम जनता और प्रदर्शनकारियों दोनों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन या हाथापाई की स्थितियों में अक्सर दिल्ली पुलिस के ऊपर एकतरफा आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसे में यह बॉडी कैमरे निष्पक्ष सबूत के तौर पर काम करेंगे और यह साबित करेंगे कि पुलिस ने किसी के साथ कुछ गलत किया है या नहीं। यह कैमरे मौके पर होने वाली हर एक गतिविधि को लगातार रिकॉर्ड करेंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की थी अनिवार्य बॉडी कैमरे लगाने वाली याचिका

बॉडी कैमरों की यह तैनाती ऐसे समय में देखने को मिली है, जब कुछ ही दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का अनिवार्य और लगातार इस्तेमाल करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। 7 अक्टूबर को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांबरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को केंद्र सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन के रूप में विचार करने को कहा था। अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी कि इस मामले में ऐसा कोई कानूनी पेंच नहीं है जहां कोर्ट को निर्देश जारी करने की जरूरत पड़े। अदालत ने कहा था कि जब भी विधायिका की कोई मंशा होती है, वे वैधानिक प्रावधानों में नियम तय कर देते हैं।

जुलाई में हुए प्रदर्शन का हवाला देकर दायर की गई थी याचिका

यह याचिका एडवोकेट चाहत राघव द्वारा भारत सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त, सीआरपीएफ के महानिदेशक और बीपीआरएंडडी के खिलाफ दायर की गई थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण में तैनात अधिकारियों के लिए कैमरे पहनना और उन्हें चालू रखना अनिवार्य किया जाए। साथ ही रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने, डेटा सुरक्षा और सबूत के तौर पर उसके इस्तेमाल के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए।

याचिका में जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर CJP और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के प्रदर्शनों का जिक्र किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के अधिकांश वीडियो आम जनता या राहगीरों के मोबाइल फोन से सामने आए थे, न कि किसी आधिकारिक पुलिस रिकॉर्डिंग सिस्टम से। याचिका में कहा गया था कि 21 जुलाई की घटनाओं में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों दोनों को चोटें आई थीं, जबकि 23 जुलाई की समीक्षा बैठक में आरएएफ के महानिरीक्षक (IG) ने कथित तौर पर माना था कि इस्तेमाल किए गए बल के कुछ तरीके तय मानकों के अनुरूप नहीं थे।

1,500 कैमरों के लिए टेंडर और कानूनी प्रावधानों की मांग

याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2020 की बॉडी-वॉर्न कैमरों से जुड़ी एडवाइजरी सिर्फ एक सिफारिश थी, जो अधिकारियों के लिए कैमरे चालू रखना अनिवार्य नहीं बनाती। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस द्वारा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए लगभग ₹7.4 करोड़ की अनुमानित लागत से 1500 बॉडी कैमरों की खरीद के लिए निकाले गए टेंडर का भी जिक्र किया था, जिसमें प्रति कैमरा लागत करीब ₹49333 बैठती है।

याचिका में मांग की गई थी कि कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाए जिसे कोई जवान बदल न सके, साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत प्रमाणीकरण और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों का पालन हो। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह कैमरे किसी भीड़ पर चेहरा पहचानने वाला जाल नहीं, बल्कि पुलिस और नागरिकों के बीच संवाद का एक पारदर्शी रिकॉर्ड हैं जो बैरिकेड के दोनों तरफ मौजूद लोगों की सुरक्षा करते हैं।

छावनी में तब्दील हुई दिल्ली: 25,000 जवान, मेट्रो पाबंदी और इंटरनेट बंद

शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और पैरामिलिट्री के लगभग 25,000 जवानों को तैनात किया गया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 120 से अधिक कंपनियां सुरक्षा में लगाई गई हैं। शनिवार सुबह 6:00 बजे से ही कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक समेत 30 से ज्यादा पॉइंट्स पर सख्त ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। दिल्ली की सभी सीमाओं पर गाड़ियों की सघन चेकिंग की जा रही है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर असर

सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बैन लागू है, नमो भारत के दो स्टेशन बंद हैं और ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में एहतियात के तौर पर 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। आपको बता दें कि यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है, जिसके विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन बुलाया गया है।

Delhi Internet Shutdown: दिल्ली में आज रात 10 बजे से कल रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद, 4 किमी के दायरे में रहेगी पाबंदी

Delhi Internet Shutdown: चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच Cockroach Janata Party (CJP) दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन की तैयारी में है। इसी को देखते हुए मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में आज रात 10 बजे से सभी इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

बता दें कि, दिल्ली पुलिस ने CJP और कुछ छात्र संगठनों को 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। नई दिल्ली रेंज की जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, आवेदन देर से दिया गया था और दूसरा, CJP के पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ था।

नूपुर प्रसाद ने कहा, “हमें Cockroach Janata Party के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से आवेदन मिला है। इसमें 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की सूचना दी गई थी।”

4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट नहीं

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद, नई दिल्ली में जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी।

इस रोक में सभी तरह की मोबाइल इंटरनेट टेक्नोलॉजी शामिल होगी। दिल्ली पुलिस ने टेलीकॉम कंपनियों एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, जियो और MTNL को इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है। बता दें कि यह आदेश टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 और टेलीकॉम सेवाओं के अस्थायी निलंबन नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है।

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दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद रहेंगे

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजधानी में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इन स्टेशनों पर ट्रेनों की फ़्रीक्वेंसी कम करने का ऐलान किया है। पुलिस की जानकारी के मुताबिक, ये उपाय शुक्रवार रात 9 बजे से शुरू होंगे और 10 अक्टूबर को हालात सामान्य होने तक लागू रहेंगे। इस अनुरोध में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के 57 स्टेशन शामिल हैं।

यह कदम तब उठाया गया है जब ट्रांसपोर्ट रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस ने DMRC से चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर ज़रूरी उपाय करने का अनुरोध किया। उन्होंने नई दिल्ली जिले में जंतर-मंतर और दूसरी जगहों पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों और संवेदनशील इलाकों की ओर बेकाबू भीड़ के बढ़ने की आशंका का हवाला दिया।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कथित “वोट चोरी” को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

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CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Supreme Court Jantar Mantar Protest

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Cockroach Janata Party (CJP) की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और कानून के मुताबिक व्यवहार करेंगे तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा NEET प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित High Powered Enquiry Committee के समक्ष भी अपनी याचिका प्रस्तुत करें। पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि इसे लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए और 10 सितंबर को सुनवाई की जाए।

 

कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी एजेंसियों की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद है। वहीं, कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या कानूनी है और क्या प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों से अपेक्षा है कि वे कानून का सम्मान करें, अपने आचरण में संयम रखें और देश के कानून का पालन करें।

 

5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की तैयारी

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए 36 दिन के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया। CJP के मुताबिक प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसे इस तरह के किसी जुलूस के आयोजन के लिए अभी तक कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

 

याचिका में सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों में मार्च पर रोक की मांग

सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के इलाकों जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुटान, मार्च या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने आवश्यक अनुमति हासिल कर ली हो। याचिका में लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े प्रदर्शन को नियंत्रित करने, टालने या उसके स्वरूप में बदलाव करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने यह व्यवस्था 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS Summit के समाप्त होने तक लागू रखने की मांग की है।

 

इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि कोई भी मार्च या जुलूस निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे न बढ़े तथा संबंधित क्षेत्र में लागू कानूनी अनुमति और नियामक व्यवस्था का पालन किया जाए।

 

Teachers' Day पर होगा प्रस्तावित मार्च

CJP का प्रस्तावित मार्च Teachers' Day यानी 5 सितंबर को आयोजित किया जाना है। खबर के मुताबिक इसमें उन छात्रों के परिवारों के शामिल होने की बात कही गई है, जिन्होंने इस साल NEET परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के घटनाक्रम के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। इसके अलावा जुलाई के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवारों के भी मार्च में शामिल होने की बात कही गई है।

Shashi Tharoor: ‘जाति-वर्ग से ऊपर उठे कांग्रेस’, शशि थरूर ने CJP के आंदोलन से पार्टी को सीख लेने को कहा

Shashi Tharoor: कांग्रेस लीडरशिप जब OBC तक पहुंचने और जाति-आधारित प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान बढ़ा रही है, तब तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि पार्टी को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से सीख लेनी चाहिए और जाति-वर्ग से ऊपर उठना चाहिए।

News 18 के साथ एक इंटरव्यू में थरूर ने कहा, “मैं कुछ समय से यह बात कह रहा हूं कि हमें जाति, धर्म, पंथ, आदिवासी या किसी खास ग्रुप जैसे सीमित हितों से ऊपर उठने की जरूरत है। और इसके साथ ही, हमें उस क्षेत्र पर भी बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है जिसे हम नजरअंदाज करते रहे हैं – यानी आम भारतीयों, मिडिल क्लास भारतीयों, शहरी भारतीयों और प्रोफेशनल्स से उन मुद्दों पर बात करना जो जाति और धर्म से परे सभी भारतीयों को प्रभावित करते हैं।”

उन्होंने कहा, “चाहे परीक्षाओं का मुद्दा हो, जो हर किसी को प्रभावित करता है, महंगाई और बढ़ती कीमतें हों या शहरों की खराब होती नागरिक सुविधाएं, इन समस्याओं का सामना हर कोई रोज करता है। राहुल गांधी ने सही कहा है कि मिडिल क्लास के लिए शिक्षा अब महंगी होती जा रही है। हमें ऐसे मुद्दों को भी उठाना होगा, जो हर व्यक्ति को प्रभावित करते हैं, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो।”

CJP के विरोध प्रदर्शनों पर थरूर ने News 18 से कहा, “CJP ने जंतर-मंतर पर क्या किया? उन्होंने एक ऐसा मुद्दा उठाया जिसका जाति, धर्म, भाषा, राज्य या पंथ से कोई लेना-देना नहीं था। और यही वजह है कि उन्हें हर तरफ से समर्थन मिला। सभी राजनीतिक पार्टियों को यही सीखने की जरूरत है। मेरा मानना ​​है – और यह मेरी निजी राय है, मैं किसी पार्टी की तरफ से या किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बोल रहा – कि यह एक ऐसा सबक है जिसे हम सीख सकते हैं।”

CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक व्यंग्यात्मक आंदोलन शुरू किया था। इस पार्टी ने NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की, जिससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

जब थरूर से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि कांग्रेस को आधिकारिक तौर पर CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए था, तो उन्होंने कहा, “मैंने वकालत की थी कि हमें इसमें शामिल होना चाहिए। CJP के विरोध प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।”

थरूर ने News18 से कहा, “मुझे बताया गया था कि कांग्रेस के इसमें शामिल नहीं होने की वजह एक बेहद आपत्तिजनक पत्र था, जिसे CJP के नेतृत्व ने कांग्रेस पार्टी को लिखा था। उस पत्र में कुछ ऐसी बातें कही गई थीं, जिन्हें कांग्रेस ने अपमानजनक माना। इसलिए पार्टी ने खुद को इस प्रदर्शन से अलग रखना बेहतर समझा।”

उन्होंने आगे कहा, “आप इसे समझ सकते हैं, क्योंकि हर संस्था अपने हितों को ध्यान में रखती है। अगर कांग्रेस को लगा कि CJP एक संस्था के तौर पर उसके खिलाफ है या उसके प्रति उसका रवैया विरोधी है, तो कांग्रेस अपना नाम उनके आंदोलन के साथ क्यों जोड़ेगी? शायद यही इसकी वजह थी।”

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रांची JPSC-JSSC धांधली, वांगचुक की अपील पर देवेन्द्र ने तोड़ा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता महतो

Devendra Nath Mahato Protest

Devendra Nath Mahato Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और उनकी अपील के बाद देवेंद्र ने अन्न-जल ग्रहण किया। हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है। इस बीच, खबर है कि सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी रांची पहुंचने वाले हैं। 

 

झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा प्रणालियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। बुधवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से बात की। वार्ता के दौरान वांगचुक ने आंदोलन के मुद्दों पर चर्चा की और देवेंद्र की लगातार गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया। 

 

सोनम वांगचुक की अपील और छात्रों के भारी दबाव के बाद देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। लगातार चार दिनों के उपवास के कारण उनकी स्थिति बिगड़ रही थी। रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी घट गया था, साथ ही वे गंभीर डिहाइड्रेशन और थकान से जूझ रहे थे। ALSO READ: CJP Protest : हिंसा करने वालों पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट, CCTV से हो रही पहचान, सीजेपी का कल देशभर में आंदोलन का ऐलान

विवाद का पूरा घटनाक्रम

इस पूरे आंदोलन की शुरुआत बीती 2 जुलाई को जेपीएससी 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम आने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 2204 अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया गया था और परीक्षा की तिथि 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। लेकिन परिणाम जारी होते ही धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए। रिजल्ट में कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी नहीं किया गया। इसके अलावा जारी परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे।

क्या है छात्रों की मांग? 

सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। व्यापक विरोध के बाद मुख्य परीक्षा को तो रद्द कर दिया गया, लेकिन छात्र इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक किए गए और सीटें बेची गईं। छात्रों ने सीआईडी (CID) जांच को नकारते हुए पूरे मामले की जांच ईडी (ED) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

आंदोलन का बढ़ता दायरा, दीपके भी जाएंगे रांची

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई को मोराबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में कम संख्या के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का भारी समर्थन मिला। खबर है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके भी आंदोलनकारियों को समर्थन देने के लिए रांची जाएंगे। 

कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो?

झारखंड के छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और सार्वजनिक मुद्दों से भरा रहा है। देवेंद्र रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता विशंभर महतो एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने साल 2006 में मैट्रिक, 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक और बाद में कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (PG) व B.Ed की डिग्री हासिल की। 

 

कॉलेज के दिनों से ही छात्र हित के मुद्दों पर मुखर रहे महतो ने 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति का विरोध किया। 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे।

 

छात्र आंदोलनों के कारण जेल में रहने के बावजूद उन्होंने रांची सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और 1.48 लाख वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। सिल्ली विधानसभा सीट से JLKM प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर 44 हजार वोट प्राप्त किए और पुनः तीसरे स्थान पर रहे। छात्रों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहने के कारण देवेंद्र महतो पर वर्तमान में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

Bhumi Pednekar: पीएम मोदी के लिए अश्लील शब्दों के इस्तेमाल को भूमि पेडनेकर बताया गलत, बोलीं- ये हमारा कल्चर नहीं

Bhumi Pednekar: भूमि पेडनेकर ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह युवाओं को खास मैसेज देती दिख रही हैं। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भी चिंता जाहिर करती दिख रही हैं। जानिए एक्ट्रेस ने क्या कहा है…

भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पेज पर वीडियो शेयर किया है। वह कार में बैठी हैं और कहती हैं- ‘अभी जो हमारी फीड में वीडियो सामने आ रहे हैं, उनमें बहुत खराब भाषा बोली जा रही है। हमारे देश के युवा या हम ऐसे बात नहीं करते हैं, ये हमारा कल्चर नहीं है। हम उस इंसान के बारे में बोल रहे हैं, जो आज देश के सबसे ऊंचे पद पर है। इतना ही नहीं यहां बात सिर्फ पद की नहीं है, क्या हम अपने घर के बड़ों से ऐसे बात करते हैं? क्या हम सच में गाली-गलौज वाली भाषा बोल सकते हैं?’

भूमि ने आगे कहा कि ‘दोस्तों यह हमारा कल्चर नहीं है। यह पूरी तरह से गलत है और इस बात ने मुझे सच में काफी परेशान किया है। इसीलिए मैं सामने आकर इस बारे में सबके सामने बात कर रही हूं। कोई देश तभी आगे बढ़ता है और तरक्की करता है जब हम सब मिलकर अपनी कमियों और अच्छाइयों, दोनों पर बात करते हैं। हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार ही हमारी बैकबोन हैं। हमें उनसे भटकना नहीं है, वरना हम सही बातें सही तरीके से नहीं कर पाएंगे और न ही उन पर कभी अमल होगा।’

भूमि ने वीडियो में कई बदलावों के बारे में भी बात की है, जो देश और शिक्षा क्षेत्र में करने की जरूरत है। भूमि पेडनेकर के करियर की बात करें तो वह फिल्म ‘द प्राइड ऑफ भारत छत्रपति शिवाजी महाराज’ में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में ऋषभ, शिवाजी महाराज के किरदार में दिखेंगे। फिल्म में भूमि पेडनेकर वॉरियर क्वीन बेलवाडी मल्लम्मा का रोल कर रही हैं।