‘मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए…’; NEET पेपर लीक को लेकर CJP के प्रोटेस्ट पर बोले सलमान खान

Salman Khan Neet News: नीट पेपर लीक को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने बुधवार (22 जुलाई) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को नुकसान पहुंचा, उनके प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। सलमान खान ने छात्रों के रुख की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने भविष्य और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के लिए मेहनत, ईमानदारी और पढ़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें खुशी है कि देश के छात्र बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन इसके हिंसक रूप लेने की खबरें बेहद दुखद हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सोच-समझकर लिखी गई पोस्ट में कहा, “यह आंदोलन इतना शांतिपूर्ण था, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह जानकर और देखकर खुशी होती है कि देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है।”

युवाओं को दी सलाह

हालांकि, सलमान खान ने यह भी कहा कि इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से अपने कब्जे में नहीं लिया जाना चाहिए। सलमान ने छात्रों के साहस और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पीढ़ी शिक्षा के प्रति गंभीर है। भविष्य में देश का नाम रोशन करेगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से किया गया यह आंदोलन सही दिशा में उठाया गया कदम है।

अभिनेता ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की अपील करते हुए कहा, “यह मामला छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। इस आंदोलन का श्रेय सिर्फ देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे भरोसा है कि सरकार भी छात्रों का पूरा सहयोग करेगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए जीत की स्थिति होगी।” सलमान खान ने यह भी कहा कि भारत को भविष्य में दुनिया का प्रमुख शिक्षा केंद्र बनना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस बीच, 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के आरोपों को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध लगातार जारी है। वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार उन्हें यह भरोसा दिलाए कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। न ही उनके खिलाफ कोई FIR या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे। वांगचुक ने कहा कि भले ही अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है, फिर भी वह अपने काम पर लौटना चाहते हैं।

गर्व है… CJP प्रदर्शन के बीच ब्लू टोकई ने जीता दिल, को-फाउंडर का बयान इंटरनेट पर छा गया

CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP के चलो संसद मार्च के बीच गर्मी और प्रदर्शन के बीच एक कॉफी ब्रांड ने इंसानियत की मिसाल पेश कर पूरे इंटरनेट का दिल जीत लिया।

CJP Protest: पेपर कैंसिल हुआ तो खूब रोया पर… NEET में ऑल इंडिया रैंक 1 लाने वाले आर्यन गुप्ता ने विवाद के बीच क्या कहा?

NEET UG 2026 का पेपर रद्द होने के बाद देशभर में विरोध-प्रदर्शन और बहस का दौर शुरू हो गया था। इसी बीच दोबारा हुई परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल करने वाले पंजाब के छात्र आर्यन गुप्ता का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने परीक्षा रद्द होने के बाद अपनी मानसिक स्थिति, दोबारा तैयारी और सफलता तक के सफर को लेकर खुलकर बात की। आर्यन ने बताया कि शुरुआत में यह फैसला उनके लिए बेहद मुश्किल था और वह इससे काफी भावुक हो गए थे। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने हालात को स्वीकार करते हुए खुद को संभाला और पूरी ताकत के साथ दोबारा तैयारी में जुट गए।

उनका कहना है कि कठिन परिस्थितियों में नकारात्मक सोच के बजाय लक्ष्य पर फोकस करना ही सबसे सही रास्ता होता है। साथ ही उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को देते हुए भविष्य के अभ्यर्थियों के लिए भी एक अहम संदेश साझा किया।

22 लाख छात्रों के साथ भी यही हुआ

परिणाम घोषित होने के बाद आर्यन ने कहा कि शुरुआत में उन्हें यह फैसला काफी गलत और अन्यायपूर्ण लगा था। उन्होंने कहा, “शुरुआत में मैं बहुत निराश था। पेपर रद्द होने पर मैं खूब रोया। लेकिन बाद में मुझे लगा कि यह सिर्फ मेरे साथ नहीं हुआ है। सभी छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी है, इसलिए मेरे पास भी खुद को बेहतर साबित करने का एक और मौका है।”

अगले ही दिन से फिर शुरू कर दी तैयारी

आर्यन ने बताया कि उन्होंने ज्यादा समय निराशा में नहीं बिताया। अगले ही दिन से दोबारा पढ़ाई शुरू कर दी और हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। उनका कहना है कि लगातार मेहनत और सकारात्मक सोच ने ही उन्हें देश में पहला स्थान दिलाया।

माता-पिता, बड़े भाई और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय

आर्यन ने कहा कि उनकी इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता, बड़े भाई और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता डॉक्टर हैं और उन्होंने बचपन से ही उन्हें मजबूत आधार दिया। वहीं, कठिन समय में परिवार ने भावनात्मक रूप से उनका पूरा साथ दिया, जिससे वह दोबारा तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके।

NEET अभ्यर्थियों को दी खास सलाह

आर्यन ने भविष्य में NEET देने वाले छात्रों को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने शिक्षकों पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि उनके पास वर्षों का अनुभव और सही मार्गदर्शन होता है।

CJP Protest: NEET में ऑल इंडिया रैंक 2 लाने वाले पांशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर

‘आप हमारा समय बर्बाद न करें…’; CJP प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

CJP Protest in Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बुधवार (22 जुलाई) को इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता वकील ने CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, “पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी मेरे पास हैं… यदि इस मामले को कल (गुरुवार 23 जुलाई) सूचीबद्ध किया जा सके…।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरता की और याचिका में तीन अनुरोध किए गए हैं। चीफ जस्टिस ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि पीठ इस स्तर पर वीडियो देखने की इच्छुक नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है… हम वीडियो नहीं देखना चाहते।” वकील के दोबारा छात्रों की पिटाई की बात कहने और वीडियो का हवाला देने पर CJP ने कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।”

यह याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित है। उस दिन हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए मध्य दिल्ली में एकत्र हुए थे।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

सरकार नीट पर चर्चा के लिए तैयार

मानसून सत्र शुरू होने के बाद नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में गतिरोध जारी है। सरकार ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि वह नीट पेपर लीक मामले में सदन में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा की कार्यवाही सुबह स्थगित होने के बाद दोबारा 12 बजे शुरू हुई तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सरकार की ओर से बयान देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का नाम पुकारा।

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इसी बीच कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और इस मुद्दे पर विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग भी की। रीजीजू ने कहा, “सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमने पहले दिन से यह बात कही है। लेकिन चर्चा नियम के तहत होती है। चर्चा कब होनी है, कितनी लंबी होनी है और किस नियम के तहत होनी है, इसका निर्णय स्पीकर (बिरला) सभी दलों के नेताओं से बात कर लेंगे।”

CJP Protest: NEET में ऑल इंडिया रैंक 2 लाने वाले पांशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर

NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा में 99.9999 पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के छात्र पंशुल बंसल इन दिनों अपनी शानदार सफलता के साथ-साथ अपनी सोच को लेकर भी चर्चा में हैं। पेपर रद्द होने के बाद जहां देशभर में कई छात्र विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हुए, वहीं पंशुल ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा और अतिरिक्त मिले समय को खुद को बेहतर बनाने का अवसर माना। शुरुआत में परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने जल्द ही नकारात्मक सोच छोड़कर दोबारा तैयारी शुरू कर दी।

पंशुल का मानना है कि जिन परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, उन पर समय और ऊर्जा खर्च करने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है। उनकी यही सकारात्मक सोच और अनुशासित तैयारी उन्हें देश के शीर्ष रैंक हासिल करने वाले छात्रों में शामिल करने में सफल रही।

‘प्रदर्शन करने से बेहतर लगा घर पर पढ़ना‘

परिणाम घोषित होने के बाद पंशुल ने कहा कि उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर प्रदर्शन में जाने से उन्हें क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि, “मैंने सोचा कि विरोध-प्रदर्शन में जाने के बजाय घर पर पढ़ाई करूं, अपनी क्षमता बढ़ाऊं और बेहतर स्कोर हासिल करने की कोशिश करूं।”

पहले 706 अंक, दोबारा परीक्षा में पहुंचे 715 तक

नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल के छात्र पंशुल ने दोबारा हुई परीक्षा में 715 अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने की संभावना थी, लेकिन अतिरिक्त तैयारी के समय का सही उपयोग कर उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार किया।

क्या था पूरा मामला?

NEET UG 2026 की पहली परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन 12 मई को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इस मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित हुई और 16 जुलाई को संशोधित परिणाम घोषित किए गए।

नहीं बदली पढ़ाई की दिनचर्या

कई छात्रों ने दोबारा परीक्षा के लिए अपनी रणनीति बदली, लेकिन पंशुल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी रोज की पढ़ाई का शेड्यूल बिल्कुल नहीं बदला। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं किया। पिछले डेढ़ महीने में सिर्फ अपना बेहतर देने की कोशिश की और बाकी भगवान पर छोड़ दिया।”

नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर रखा फोकस

पंशुल ने स्वीकार किया कि पहली परीक्षा अच्छी होने के बाद उनके मन में यह सवाल जरूर आया कि आखिर परीक्षा रद्द क्यों की गई। लेकिन उन्होंने इस सोच में उलझने के बजाय अपने मुख्य लक्ष्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि अगर वह नकारात्मकता में फंस जाते, तो उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती थी। इसलिए उन्होंने हर तरह की चिंता छोड़कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया।

प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने से किया इनकार

देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। हालांकि, जब पंशुल से इन प्रदर्शनों पर राय मांगी गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, “मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”

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पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”

पथराव और तोड़फोड़…CJP प्रोटेस्ट में पांच IPS अधिकारी समेत 50 जवान घायल, पुलिस दर्ज करेगी FIR

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खूब गहमा-गहमी देखने को मिली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को संसद चलो मार्च का आयोजन किया। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। वहीं प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। वहीं, अब तक 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने दर्ज किया FIR

पुलिस ने बताया कि अलग-अलग जगहों से मिली शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से बने वीडियो की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर से किसी भी प्रदर्शनकारी को नहीं हटाया गया। कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की गई, जिन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाजी की, संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और पुलिस पर हमला किया।

पुलिस के अनुसार, कई तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है। अधिकारियों का दावा है कि पुलिस ने लंबे समय तक संयम बनाए रखा। पुलिस ने यह भी कहा कि नई दिल्ली में जब हिंसक भीड़ ने दुकानों को निशाना बनाने और लगातार पत्थरबाजी करने की कोशिश की, तब स्थिति को काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया।

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया गया

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि जेपी नड्‌डा से मिले। इनका दावा है कि नड्डा ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि जंतर-मंतर और उसके आस-पास अब कोई कार्रवाई नहीं होगी।

CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को CJP के प्रदर्शन के दौरान दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सुबह शुरू हुआ आंदोलन दोपहर तक टकराव में बदल गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद झड़प, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की स्थिति बनी। CJP की ओर से अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया था, जिसे बाद में पुलिस और संगठन दोनों ने खारिज कर दिया। सुबह से देर शाम तक चले घटनाक्रम की पूरी झलक इन 10 तस्वीरों में देखें।

cjp protest

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया गया, मंच खाली कराया गया और टेंट भी हटाए गए। इसके बाद कनॉट प्लेस इलाके से भी प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प, सुरक्षा इंतजाम और हंगामे की तस्वीरें सामने आईं।

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जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में जुटे आंदोलनकारी, सुबह से जारी रहा विरोध प्रदर्शन।

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प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई, सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी रहा आंदोलन।

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बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी, पुलिस ने रोका रास्ता।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प,  कई प्रदर्शनकारी बैरिकैट्‍स पर भी गिर पड़े।

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CJP प्रदर्शन  से दिनभर तनाव का माहौल रहा।

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संसद की सुरक्षा बढ़ाई गई, प्रदर्शन के बाद इलाके में तैनात किए गए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी

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बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी

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सुबह से संसद की अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाई गई थी 

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प्रदर्शनकारियों ने नारे भी लगाए

‘नीला मेरा रंग है…’ जंतर-मंतर पर स्याही फेंके जाने के बाद अभिजीत दिपके का रिएक्शन वायरल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, एक महिला ने कथित तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके पर नीली स्याही फेंक दी, जिससे वहां अफरातफरी मच गई। इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि स्याही फेंके जाने के बाद लोग अभिजीत दीपके के आसपास जमा हो गए और वहां काफी हंगामा हुआ।

हालांकि, इस घटना के पीछे की वजह की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थिति को काबू में लाने से पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति बन गई थी। अधिकारियों ने अभी तक कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है और इस बारे में और जानकारी का इंतजार है।

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ यूजर्स ने स्याही फेंकने की घटना पर सवाल उठाए और कहा कि किसी भी विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से जताना चाहिए। वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने अभिजीत दीपके की आलोचना की और आरोप लगाया कि उन्होंने प्रदर्शन को राजनीतिक दिखावा बना दिया है।

एक यूजर ने व्यंग्यपूर्वक लिखा, “क्या ये एक ही दिन मेरे सारे काम करेगा?”

एक अन्य यूजर ने महिला के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा, “स्याही फेंकने का क्या मतलब है? क्या इस महिला को लगता है कि शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सही है और इसमें कोई कमी, असमानता या कठोरता नहीं है?” एक अन्य ने आगे कहा, “अगर वह इस आंदोलन से सहमत नहीं है तो वह विरोध स्थल पर क्यों थी? वैसे वह है कौन?

बाद में दिपके ने X पर एक छोटी सी पोस्ट में इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “नीला मेरा रंग है… जय भीम!”—इस टिप्पणी पर ऑनलाइन मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं।

सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, दिपके ने भूख हड़ताल की घोषणा की

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर 20 दिन की भूख हड़ताल पूरी करने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन में भूख हड़ताल कर रहे थे, जो कथित NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

बता दें कि स्याही फेंकने की घटना से कुछ समय पहले ही अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।

दीपके ने X पर पोस्ट कर लिखा था, “मैं अभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहा हूं।”

इस पर भी इंटरनेट पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने उनसे पूछा, “पक्का? ब्रेड पकौड़े की कसम?”

कई यूजर्स ने उनकी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि दिपके सोनम वांगचुक के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “अभिजीत दिपके, आप पर शर्म आती है कि आप सोनम वांगचुक सर के नाम, उनके दर्द और संघर्ष का बेशर्मी से इस्तेमाल सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने और इस भूख हड़ताल के नाटक के जरिए ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहे हैं। सोनम सर वास्तविक चिकित्सा देखभाल और सम्मान के हकदार हैं, न कि उन्हें राजनीतिक हथियार बनाया जाना चाहिए। हम NEET, CBSE और छात्र आत्महत्याओं के मामले में वास्तविक न्याय के लिए सोनम वांगचुक के साथ मजबूती से खड़े हैं – आपके निजी लाभ के लिए नहीं।”

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