सुभाष चंद्रा के खिलाफ ₹22006 करोड़ के लोन पर 99.97% हेयरकट? सरकारी सूत्रों ने कहा- ये सही तस्वीर नहीं

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा से जुड़े एक मामले में खबर चल रही कि बैंकों ने ₹22,000 करोड़ से ज्यादा के कर्ज पर 99.97% का हेयरकट ले लिया। यानी लगभग पूरा पैसा डूब गया। लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह तस्वीर पूरी तरह सही नहीं है।

असल में ₹22,006 करोड़ की रकम उन दावों की है, जो सुभाष चंद्रा के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के रूप में स्वीकार किए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने खुद ₹22,006 करोड़ का कर्ज लिया था।

₹22,006 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ₹22,006 करोड़ की रकम अलग-अलग Essel और Zee समूह से जुड़ी कंपनियों के कर्ज से संबंधित दावों की है। इन मामलों में सुभाष चंद्रा पर्सनल गारंटर थे।

यानी कर्ज कंपनियों ने लिया था। सुभाष चंद्रा मुख्य उधारकर्ता नहीं थे। इसलिए यह कहना कि बैंकों ने सुभाष चंद्रा को सीधे ₹22,006 करोड़ उधार दिए थे, सही नहीं होगा।

हर कर्ज पर शुरुआत से गारंटी नहीं थी

सूत्रों का कहना है कि करीब ₹2,574 करोड़ के कर्ज ऐसे थे, जिनमें शुरुआत से ही सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी दी गई थी।

बाकी मामलों में उनकी गारंटी बाद में अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर जोड़ी गई थी। इसलिए ₹22,006 करोड़ की पूरी रकम को ऐसा कर्ज मान लेना, जो सिर्फ उनकी गारंटी के भरोसे दिया गया था, सही तस्वीर पेश नहीं करता।

मामला शुरू कैसे हुआ?

यह इंसॉल्वेंसी मामला कंपनियों के खिलाफ नहीं, बल्कि सुभाष चंद्रा के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के रूप में शुरू हुआ।

मामला तब सामने आया जब Vivek Infracon ने Indiabulls से कर्ज लिया। उस कर्ज के लिए सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। बाद में कर्ज डिफॉल्ट हो गया और मामला इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया तक पहुंच गया।

NCLT ने क्या मंजूर किया?

NCLT ने जिस रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी है, उसके तहत सुभाष चंद्रा की तरफ से करीब ₹6.25 करोड़ का भुगतान होगा।

यह रकम उनकी वर्तमान और वसूली योग्य व्यक्तिगत संपत्तियों के आधार पर तय की गई है। यानी अदालत ने उनकी मौजूदा उपलब्ध संपत्ति को देखते हुए यह योजना मंजूर की है।

क्या सिर्फ ₹6.25 करोड़ ही मिलेंगे?

नहीं। यही सबसे बड़ा भ्रम है। रिपेमेंट प्लान में मुख्य उधारकर्ता कंपनियों से भी करीब ₹1,494 करोड़ की रिकवरी का प्रावधान है।

इसके अलावा बैंकों और दूसरे कर्जदाताओं के पास उन कंपनियों, गिरवी रखी गई संपत्तियों और दूसरी सिक्योरिटीज से वसूली के रास्ते खुले रहेंगे। यानी यह मामला सिर्फ सुभाष चंद्रा की निजी संपत्ति से होने वाली रिकवरी तक सीमित नहीं है।

99.97% हेयरकट का मतलब क्या है?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 99.97% का आंकड़ा सिर्फ उस रकम से जुड़ा है जो सुभाष चंद्रा से एक पर्सनल गारंटर के तौर पर वसूल की जा सकती थी। इसे ₹22,000 करोड़ के पूरे बैंक कर्ज पर अंतिम नुकसान बताना सही नहीं है।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह पर्सनल गारंटर की क्षमता से जुड़ी रिकवरी का आंकड़ा है, न कि पूरे कर्ज के डूबने का।

कर्जदाताओं ने क्यों किया विरोध?

कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस प्लान का विरोध किया था। इनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank जैसे नाम शामिल हैं।

कर्जदाताओं का कहना था कि सुभाष चंद्रा की पुरानी घोषित नेटवर्थ और मौजूदा नेटवर्थ में बड़ा अंतर दिखाई देता है। इसलिए उनकी संपत्तियों की और गहराई से जांच होनी चाहिए।

नेटवर्थ को लेकर क्या सवाल उठे?

क्रेडिटर्स ने पुराने नेटवर्थ सर्टिफिकेट का हवाला दिया। इन दस्तावेजों के मुताबिक, सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 2017 में करीब ₹45,888 करोड़ थी। 2018 में यह करीब ₹40,562 करोड़ बताई गई थी।

वहीं मौजूदा इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में उनकी घोषित नेटवर्थ करीब ₹31.79 करोड़ बताई गई। इसी अंतर को लेकर कई सवाल उठे।

फिर भी प्लान कैसे पास हुआ?

विरोध के बावजूद इस रिपेमेंट प्लान को कर्जदाताओं के 80.81% वोट मिले। इसके बाद NCLT ने कहा कि उठाई गई आपत्तियां इतनी मजबूत नहीं हैं कि क्रेडिटर्स द्वारा मंजूर किए गए प्लान को पलटा जा सके।

इसलिए ट्रिब्यूनल ने योजना को मंजूरी दे दी।

सुभाष चंद्रा का क्या कहना है?

सुभाष चंद्रा का कहना है कि Essel समूह से जुड़ी कंपनियां अब तक कर्जदाताओं को करीब ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं। हालांकि, यह आंकड़ा अलग-अलग कंपनियों द्वारा समय-समय पर किए गए भुगतानों को शामिल करता है।

पूरे मामले का सार यह है कि 99.97% का आंकड़ा सुनने में जितना बड़ा लगता है, मामला उतना सीधा नहीं है। यह ₹22,006 करोड़ के पूरे बैंक कर्ज के डूबने की कहानी नहीं है। यह एक पर्सनल गारंटर से होने वाली सीमित रिकवरी का मामला है। वहीं मुख्य कर्जदार कंपनियों, सिक्योरिटीज और दूसरी संपत्तियों से वसूली के रास्ते अभी भी मौजूद हैं।

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।

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सुभाष चंद्रा के मामले में NCLT का बड़ा फैसला

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राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।

 

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।

 

80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान

NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।

 

मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।

22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।

 

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।

 

राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में लगातार दूसरे दिन गिरा सोना, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लगातार दूसरे गिरावट आई। इसकी कीमत 800 रुपये गिरकर 1,65,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। इसकी कीमत 2,50,500 रुपये प्रति किलग्राम पर बनी रही। हालांकि, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। इस मौके पर गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का पड़ा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। बीते दो दिनों में सोने की कीमतें 1,400 रुपये गिर चुकी है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

बुलियन मार्केट की नजरें फेड चेयरमैन की स्पीच पर

बुलियन मार्केट की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह जैक्सन होल में 28 अगस्त को यह स्पीच देने वाले हैं। इससे फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर फेड की पॉलिसी का असर पहले डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। फिर सोने कीमतों पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

27 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.12 फीसदी गिरकर 4,588 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 0.11 फीसदी की कमजोरी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतें अब भी 87 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद ब्रेंट क्रूड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

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इस हफ्ते की शुरुआत में तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा था सोना

इस हफ्ते की शुरुआत में सोने की कीमतें तीन महीने के सबसे लेवल पर पहुंच गई थीं। इस तेजी में डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड का हाथ था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम का ऐलान किया था। लेकिन, इससे बॉन्ड यील्ड में तेजी पर थोड़े समय के लिए लगाम लगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड चेयरमैन वॉर्श शुक्रवार को अपने भाषण में फिर से इनफ्लेशन कंट्रोल पर फोकस बढ़ा सकते हैं।

अगले हफ्ते शेयर बाजार में एंट्री के साथ ही रॉकेट बन सकते हैं ये शेयर, क्या आपने आईपीओ में बोली लगाई है?

अगले हफ्ते तीन कंपनियों के शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट हो सकते हैं। इनमें सिंबायोटिक फार्मालैब, स्काईवेज एयर सर्विसेज और हाई-टेक इंजीनियर्स शामिल हैं। इन कंपनियों के आईपीओ में बोली लगाने की अंतिम तारीख 27 अगस्त है। तीनों आईपीओ को निवेशकों का स्ट्रॉन्ग रिस्पॉन्स मिला है।

Symbiotic Pharmalab का आईपीओ 20 गुना सब्सक्राइब्ड

Symbiotic Pharmalab का आईपीओ आईपीओ खुलने के तीसरे दिन 20 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। इस इश्यू में सबसे ज्यादा दिलचस्पी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) ने दिखाई। 1,757 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में कंपनी इनवेस्टर्स को 1.31 करोड़ शेयर एलॉट करेगी। ग्रे मार्केट में इस शेयर पर 29.05 फीसदी प्रीमियम चल रहा।

Skyways Air Services के शेयर पर 33 फीसदी से ज्यादा जीएमपी

Skyways Air Services के आईपीओ को भी निवेशकों का स्ट्रॉन्ग रिस्पॉन्स मिला है। अब तक यह इश्यू करीब 23 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। इस इश्यू में NII के अलावा रिटेल इनवेस्टर्स ने भी जबर्दस्त दिलचस्पी दिखाई है। ग्रे मार्केट में इस शेयर पर 33.33 फीसदी का प्रीमियम चल रहा है। इससे इस शेयर की दमदार लिस्टिंग की उम्मीद है।

हाई-टेक इंजीनियर्स का आईपीओ सबसे ज्यादा 144 गुना सब्सक्राइब हुआ

हाई-टेक इंजीनियर्स के आईपीओ में निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। एनएसई के डेटा के मुताबिक, यह इश्यू 144 गुना सब्सक्राइब हुआ है। NII कैटेगरी में यह इश्यू 301 गुना सब्सक्राइब हुआ है। रिटेल इनवेस्टर्स कैटेगरी में यह इश्यू 134 गुना सब्सक्राइब हुआ है। ग्रे मार्केट में इस शेयर पर 27 अगस्त को 84.91 फीसदी प्रीमियम चल रहा था।

शेयरों के ग्रे मार्केट प्रीमियम से सिर्फ लिस्टिंग के बारे मिलता है संकेत 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी शेयर के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) से सिर्फ स्टॉक मार्केट्स में स्टॉक की लिस्टिंग का संकेत मिलता है। यह शेयर के प्रीमियम के साथ लिस्ट होने की गारंटी नहीं है। अगर लिस्टिंग से पहले बाजार की स्थितियां बदल जाती हैं तो उसका असर शेयरों की लिस्टिंग पर पड़ सकता है। इसीलिए एक्सपर्ट्स किसी आईपीओ में शेयर के जीएमपी के आधार पर बोली लगाने की सलाह नहीं देते हैं।

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शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों पर 27 अगस्त को दिखा दबाव 

तीनों कंपनियों की लिस्टिंग ऐसे वक्त हो रही है, जब बाजार पर दबाव दिख रहा है। 27 अगस्त को भी बाजार में गिरावट दिखी। बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी 0.48 फीसदी यानी 116.90 अंक गिरकर 24,090 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.70 फीसदी यानी 539 अंक गिरकर 76,933 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी में भी 0.47 फीसदी की गिरावट आई।

Nepal Stock Market: तबाही से नेपाल का शेयर बाजार धड़ाम! हाइड्रोपावर और इंश्योरेंस सेक्टर के शेयरों में मची भगदड़

Nepal Stock Exchange Impact: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड का असर अब वहां के शेयर बाजार (NEPSE) पर साफ देखने को मिला है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के उफान से कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, बैंक शाखाओं, सीमा शुल्क प्वाइंट और व्यावसायिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।

इस नेचुरल डिजास्टर से कंपनियों को होने वाले वित्तीय नुकसान और भारी इंश्योरेंस क्लेम की आशंका से निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके चलते नेपाल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स NEPSE ट्रेडिंग सेशन के दौरान 35.92 अंक गिरकर 2,550 के करीब आ गया।

हाइड्रोपावर शेयरों पर सबसे बड़ी मार: 748 MW क्षमता प्रभावित

बाढ़ के केंद्र रसुवा में स्थित बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की खबरों से सबसे ज्यादा बिकवाली हाइड्रोपावर शेयरों में देखने को मिली। हाइड्रोपावर सब-इंडेक्स ट्रेडिंग के दौरान 104 अंक या 2.84% टूट गया।

13 प्रोजेक्ट्स की बिजली उत्पादन ठप: नेपाल इंश्योरेंस अथॉरिटी के मुताबिक, करीब 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।

748 MW का झटका: इसमें 354 मेगावाट क्षमता वाले चालू प्रोजेक्ट्स और 394 मेगावाट क्षमता वाले निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। यानी कुल 748 MW बिजली क्षमता प्रभावित हुई है।

लिस्टेड कंपनियां भी चपेट में: अपर त्रिशूली-1, रसुवागढ़ी, रसुवा भोटेकोशी, अपर मैलुंग ‘ए’, संजेन खोला, लंगटांग खोला और चिलिमे हाइड्रोपावर प्रमुख रूप से प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं।

बीमा कंपनियों में भी भारी गिरावट

बाढ़ से तबाह हुई परियोजनाओं के कारण बीमा कंपनियों पर दावों का बड़ा बोझ आने की संभावना है। इसी आशंका में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सब-इंडेक्स 404 अंक यानी 3.90% तक गिर गया।

गौरतलब है कि नेपाल की नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां पहले से ही मुनाफे के दबाव से जूझ रही थीं। वित्त वर्ष 2082-83 में प्रभु को छोड़कर लगभग सभी कंपनियों के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई थी। अब इस आपदा के बाद इंश्योरेंस क्लेम बढ़ने से इनका मार्जिन और प्रभावित हो सकता है। यहां आपको बता दें कि नेपाल में वित्त वर्ष पारंपरिक विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार चलता है।

री-इंश्योरेंस से मिल सकती है राहत

हालांकि, बीमा कंपनियों को री-इंश्योरेंस व्यवस्था से कुछ राहत मिल सकती है। इंश्योरेंस अथॉरिटी के अनुसार, निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का आमतौर पर ‘इंजीनियरिंग इंश्योरेंस’ होता है, जिसमें लगभग 80% रिस्क री-इंश्योरर्स को ट्रांसफर कर दिया जाता है।

साथ ही चालू प्रोजेक्ट्स पर ‘प्रॉपर्टी इंश्योरेंस’ होता है, जहां मूल बीमा कंपनियां 50% तक रिस्क अपने पास रखकर बाकी री-इंश्योरेंस कंपनियों को ट्रांसफर करती हैं। घरेलू प्रॉपर्टी री-इंश्योरेंस के तहत ट्रांसफर रकम का 30% हिस्सा नेपाल की घरेलू री-इंश्योरेंस कंपनियों के पास रखना अनिवार्य होता है।

निवेशकों के लिए आगे का नजरिया

बाजार में यह गिरावट फिलहाल नुकसान के वास्तविक आंकड़ों के बजाय अनिश्चितता और डर के कारण है। जब तक क्षतिग्रस्त परियोजनाओं के वास्तविक नुकसान और इंश्योरेंस क्लेम की सटीक रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। आने वाले ट्रेडिंग सेशन में कंपनियों की रीस्टोरेशन टाइमलाइन और क्लेम सेटलमेंट से जुड़ी खबरें बाजार के लिए अहम ट्रिगर साबित होंगी।

Sensex और Nifty, लगातार दूसरे दिन इंट्रा-डे के निचले स्तर पर बंद, ₹3.69 लाख करोड़ स्वाहा

Sensex-Nifty closes red: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर संकेतों के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में शुरुआती कारोबार की अधिकतर रौनक गायब हो गई। लगातार दूसरे कारोबारी दिन आज सेंसेक्स और निफ्टी इंट्रा-डे के निचले स्तर पर बंद हुए हैं। सेंसेक्स डे-हाई से आज 761 प्वाइंट्स नीचे आ गया तो निफ्टी भी फिसलकर 20100 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिखा और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 लाल बंद हुए।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज सरकारी बैंकों और मेटल कंपनियों ने तोड़ दिया, जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब 1-1% टूट गए। निफ्टी ऑटो और निफ्टी आईटी में भी आधे फीसदी से थोड़ी कम गिरावट रही। निफ्टी फार्मा ने मार्केट को संभालने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स आधे फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ है। बिकवाली के इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 27 अगस्त को सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 539.35 प्वाइंट्स यानी 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.59 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 116.90 प्वाइंट्स यानी 0.48% की फिसलन के साथ 24,090.85 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 330.75 प्वाइंट्स चढ़कर 77,986.84 तक पहुंचा था जिससे यह फिर 761.38 प्वाइंट्स गिरकर 76,933.59 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी भी 44.05 प्वाइंट्स उछलकर 24,378.60 तक पहुंचा था जिससे यह 106.60 प्वाइंट्स टूटकर 24,090.85 तक आ गया और इन्हीं पर बंद हुआ।

निवेशकों के ₹3.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 26 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,95,23,276.02 करोड़ था। आज यानी 27 अगस्त 2026 को यह घटकर ₹4,91,54,107.21 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,69,168.81 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के सिर्फ 6 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 6 ही आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और टेक महिंद्रा सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ इंफोसिस, एयरटेल और एलएंडटी में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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157 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4526 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 1824 शेयर आज मजबूत हुए तो 2491 में गिरावट रही जबकि 211 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 157 शेयर एक साल के हाई और 80 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 8 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 44 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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इन चार वजहों से आज मार्केट में कोहराम

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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भोपाल में बुजुर्ग दंपती को 97 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 22 लाख की ठगी, फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से डराया

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भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी के कोलार इलाके में रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने दिल्ली पुलिस, सीआईडी और सुप्रीम कोर्ट के नाम का डर दिखाकर करीब 97 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। बताया जा रहा है कि देश में डिजिटल अरेस्ट का यह सबसे लंबा मामला है। साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति को इस कदर डराया कि उन्होंने आंध्र प्रदेश से भोपाल तक की यात्रा भी कर ली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। साइबर ठगों  ने दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। डर के चलते दंपती ने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का लोन लिया और पूरी रकम ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।

 

पीड़ित दंपती की पहचान 65 वर्षीय सुवर्णा लक्ष्मी और उनके पति नरसिम्हा राव के रूप में हुई है। दोनों भोपाल के कोलार स्थित गणपति एन्क्लेव में रहते हैं और मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। इस साल फरवरी में वे अपने पैतृक गांव गए थे। बुजुर्ग दंपत्ति जब अपने गांव में थे तभी पीड़ित महिला के सुवर्णा के मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया।

 

फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से दिल्ली केनरा बैंक में एक खाता है। इस खाते से जेट एयरवेज के पूर्व प्रमुख नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपये का लेनदेन होने का आरोप लगाया गया। इसके बाद गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट में पेशी का डर दिखाकर दंपती को वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया।

 

ठगों ने दंपती पर भरोसा कायम करने के लिए पूरा फर्जी तंत्र खड़ा कर दिया। दो दिन बाद एक महिला ने खुद को सीआईडी की मुख्य जांच अधिकारी निशा पटेल बताया। उसने दंपती से बैंक खातों और वित्तीय जानकारी हासिल की। इसके बाद उनकी बात एक कथित सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई गई। 9 जून को ठगों ने संपत्ति जब्ती का कथित आदेश भेजा। इसमें एफडी और सोना-चांदी बेचने या गिरवी रखने के निर्देश दिए गए। दंपती को विश्वास दिलाया गया कि अगर उन्होंने रकम जमा नहीं की तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।

 

ठगों के लगातार दबाव के चलते दंपती आंध्र प्रदेश से भोपाल लौट आए। यहां स्कूल से हुई आमदनी से  खरीदे गए जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का लोन लिया। इसके बाद ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। लेकिन 22 लाख रुपये मिलने के बाद भी ठगों ने डिजिटल अरेस्ट खत्म नहीं किया। दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाता रहा। ठग जमानत और मामले से जुड़े दस्तावेज भेजने का झांसा देकर उन्हें लगातार भ्रमित करते रहे।

 

कई सप्ताह तक ठगों के दबाव में रहने के बाद दंपती ने मामले की जानकारी अपनी बेटी को दी। ठगों की ओर से भेजे गए कथित सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बेटी ने अपनी वकील सहेली को दिखाया। दस्तावेज की जांच के बाद उसे पता चला कि आदेश फर्जी है और दंपती साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद बुजुर्ग दंपती ने कोलार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब ठगों के मोबाइल नंबर, वीडियो कॉल, बैंक खातों और लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

 

Stocks to Watch: Sensex की मंथली एक्सपायरी; Groww, IRB Infra और Vedanta समेत ये 18 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 34.00 प्वाइंट्स यानी 0.14% की गिरावट के साथ 24,362.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स और बैंकेक्स समेत बीएसई के सभी इंडेक्सेज के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 26 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 183.15 प्वाइंट्स यानी 0.24% की गिरावट के साथ 77,472.94 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 126.80 प्वाइंट्स यानी 0.52% की फिसलन के साथ 24,207.75 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Juniper Green Energy Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जुनिपर ग्रीन एनर्जी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट सालाना आधार पर 54.2% बढ़कर ₹33.5 करोड़ और रेवेन्यू 81.2% उछलकर ₹291.2 करोड़ पर पहुंच गया।

ICICI Prudential AMC

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक प्रूडेंशियल कॉरपोरेशन होल्डिंग्स की योजना ICICI प्रूडेंशियल एएमसी में 2% हिस्सेदारी ₹3,121 करोड़ में बेचने की है। हालांकि यह मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की शर्तों को पूरा करने के लिए है। जून 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से अभी कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 87.6% है जिसमें प्रूडेंशियल कॉरपोरेशन की हिस्सेदारी 34.59% है।

Foseco India

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मॉर्गनाइट क्रूसिबल और मॉर्गन टेरासेन बीवी ब्लॉक डील्स के जरिए फोसेको इंडिया में अपनी पूरी 15.27% हिस्सेदारी बेच सकती है। ₹664.4 करोड़ के इस डील के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹5,773.63 तय किया गया है।

Aye Finance

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक अल्फा वेव इंडिया I एलपी ब्लॉक डील के जरिए आय फाइनेंस में अपनी पूरी 7.8% हिस्सेदारी बेच सकती है। ₹320.4 करोड़ के इस डील के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹167 तय किया गया है।

Fino Payments Bank

आरबीआई ने फिनो पेमेंट्स बैंक के अंतरिम सीईओ के तौर पर केतन मर्चेंट का कार्यकाल तीन महीने और बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। वह 27 अगस्त 2026 से तीन महीने या रेगुलर एमडी-सीईओ की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, तक जिम्मेदारी संभालेंगे।

IRB Infrastructure Developers

आईआरबी इंफ्रा के बोर्ड ने प्रस्तावित प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए IRB InvIT Fund की यूनिट्स में ₹351 करोड़ तक के निवेश को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 5.4 करोड़ अतिरिक्त यूनिट्स को ₹65 के भाव पर खरीदने का प्रस्ताव रखा है। IRB InvIT Fund मार्केट में लिस्टेड इंफ्रा इंवेस्टमेंट ट्रस्ट आईआरबी इंफ्रा ट्रस्ट से दो प्रोजेक्ट SPV खरीदने के लिए फंड जुटा रहा है।

Bharat Electronics Ltd (BEL)

भारत इलेट्रॉनिक्स को 10 अगस्त से ₹730 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं।

Max Healthcare Institute

मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट की सब्सिडियरी आल्प्स हॉस्पिटल को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इंटेलिजेंस (DGGI), मुंबई से एक शो-कॉज-कम-डिमांड नोटिस मिला है। इसमें ₹165.7 करोड़ के जीएसटी की मांग की गई है, जिसमें ₹110.47 करोड़ का जुर्माना भी शामिल है।

Vedanta

वेदांता की पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज ने वह वेदांता, वेदांता एल्युमीनियम या वेदांता ग्रुप की किसी अन्य कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की चर्चाओं को खारिज कर दिया और कहा कि फिलहाल कोई भी हिस्सेदारी बेचने की ऐसी कोई योजना नहीं है।

Physicswallah

लाइटस्पीड अपॉर्चुनिटी फंड II LP ने फिजिक्सवाला के अपने पूरे 4.67 करोड़ शेयर (1.61% हिस्सेदारी) ₹549.73 करोड़ में प्रति शेयर ₹117.72 के भाव पर बेच दिए। इस ब्लॉक डील के तहत ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर, सोसिएट जेनरल, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरीशस, विरिडियन एशिया अपॉर्चुनिटीज मास्टर फंड, सफ्रा सारासिन फंड मैनेजमेंट SA, घिसालो मास्टर फंड, मेडिओलानम इंटरनेशनल फंड्स, न्यूयॉर्क स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट सिस्टम, OP-इंडिया फंड और टाटा AIA लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने शेयर बेचे हैं।

Rubicon Research

जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने रुबिकॉन रिसर्च के 1.38 करोड़ शेयर (8.37% हिस्सेदारी) ₹2,291.61 करोड़ में प्रति शेयर ₹1660 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक कंपनी में 35.83% हिस्सेदारी वाले विदेशी प्रमोटर जनरल अटलांटिक ने ब्लॉक डील के जरिए 10 घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स- कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, नोमुरा इंडिया इन्वेस्टमेंट फंड मदर फंड, एचडीएफसी एएमसी, ICICI प्रूडेंशियल AMC, SBI म्यूचुअल फंड, VEMF-A LP, एक्सिस MF, TIMF होल्डिंग्स, एरंडा इन्वेस्टमेंट्स और PI अपॉर्चुनिटीज AIF V LLP को बेचे हैं।

Billionbrains Garage Ventures (Groww)

रिबिट कैपिटल V ने ग्रो के 6.31 करोड़ इक्विटी शेयर ₹196 के भाव पर ₹1,238.1 करोड़ में तो रिबिट केमैन GW होल्डिंग्स V ने 4.99 करोड़ शेयर ₹196.06 के भाव पर ₹979.16 करोड़ में बेच दिए। इन दोनों कंपनियों ने मिलकर कुल 11.31 करोड़ शेयर (1.8% हिस्सेदारी) 2,217.3 करोड़ रुपये में बेचे। जून 2026 तक रिबिट केमैन GW होल्डिंग्स V के पास ग्रो में 4.46% और रिबिट कैपिटल V LP की 5.64% हिस्सेदारी थी।

Welspun Corp

प्रति शेयर ₹2,275.30 के भाव पर प्रमोटर वेल्सपन इन्वेस्टमेंट्स एंड कमर्शियल्स ने वेल्सपन कॉर्प के 60 लाख शेयर (2.27% हिस्सेदारी) ₹1,365.2 करोड़ तो वेल्सपन कॉर्प के एमडी और सीईओ विपुल माथुर ने 3 लाख शेयर (0.11% हिस्सेदारी) ₹68.3 करोड़ में बेच दिए। दोनो ने कुल मिलाकर 2.38% हिस्सेदारी बेची। वहीं कैपिटल ग्रुप ने 14 स्कीमों के जरिए ₹1,088.6 करोड़ में 1.81% हिस्सेदारी के बराबर वेल्सपन कॉर्प के 47.84 लाख शेयर और खरीदे तो एबरडीन ग्रुप ने छह स्कीमों के जरिए ₹150.76 करोड़ में 6.62 लाख शेयर (0.25% हिस्सेदारी) खरीदे। इसके अलावा क्वांट म्यूचुअल फंड, क्वांट स्मॉल कैप फंड, एडलवाइस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने भी शेयर खरीदे हैं।

Viyash Scientific

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म द कार्लाइल ग्रुप की कंपनियों- सीए हुल इन्वेस्टमेंट्स और सीए हार्बर इन्वेस्टमेंट्स ने वियश साइंटिफिक के 4.75 करोड़ शेयर (10.88% हिस्सेदारी) अलग-अलग भाव पर ₹1,259.4 करोड़ में बेच दिए। जून 2026 तक कार्लाइल ग्रुप की कंपनी में 61.31% हिस्सेदारी थी। कार्लाइल ने जो शेयर बेचे हैं, उसमें 1.08 करोड़ शेयर छह निवेशकों- कोटक महिंद्रा AMC, बंधन MF, एडलवाइस MF, पनवीरा इंडिया इनोवेशन फंड, एस गुप्ता होम्स और आगम इन्वेस्टमेंट्स ने खरीदे हैं।

Gaja Alternative Asset Management

इनवेस्को म्यूचुअल फंड ने लिस्टिंग के दिन गजा कैपिटल के अतिरिक्त 85.95 लाख शेयर (6.09% हिस्सेदारी) ₹157.8 करोड़ में खरीद लिए। IPO बंद होने के बाद लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार इनवेस्को इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज फंड की कंपनी में 1.71% हिस्सेदारी थी, और अब लिस्टिंग के दिन खरीदारी के बाद उसकी कुल हिस्सेदारी 7.8% हो गई।

Avenue Supermarts (DMart)

कैपिटल ग्रुप की अमेरिकन फंड्स इंश्योरेंस सीरीज ग्लोबल ग्रोथ एंड इनकम फंड ने डीमार्ट के एवेन्यू सुपरमार्ट्स के 67.64 लाख शेयर (1.03% हिस्सेदारी) ₹2,537.12 करोड़ में प्रति शेयर ₹3,750.58 के भाव पर बेच दिए।

Standard Engineering Technology

अमांसा होल्डिंग ने स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के अतिरिक्त 11.58 लाख शेयर ₹37.59 करोड़ में प्रति शेयर ₹324.60 के भाव पर बेच दिए।

TCC Concept

गोल्डमैन सैक्स एशिया स्ट्रैटेजिक ने टीसीसी कॉन्सेप्ट के 4.04 लाख शेयर ₹10.46 करोड़ में प्रति शेयर ₹258.48 के भाव पर बेच दिए।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

एक्स-डिविडेंड: PFC (पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन), पीएंडजी (प्रॉक्टर एंड गैंबल) हेल्थ, थॉमस कुक (इंडिया), DOMS इंडस्ट्रीज, यश हाईवोल्टेज, मानक्सिया कोटेड मेटल्स एंड इंडस्ट्रीज

एक्स-राइट्स: एनसीएल रिसर्च एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

F&O बैन: आज SAIL में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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