भोपाल में बुजुर्ग दंपती को 97 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 22 लाख की ठगी, फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से डराया

भोपाल में बुजुर्ग दंपती को 97 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 22 लाख की ठगी, फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से डराया

digital arrest

भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी के कोलार इलाके में रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने दिल्ली पुलिस, सीआईडी और सुप्रीम कोर्ट के नाम का डर दिखाकर करीब 97 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। बताया जा रहा है कि देश में डिजिटल अरेस्ट का यह सबसे लंबा मामला है। साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति को इस कदर डराया कि उन्होंने आंध्र प्रदेश से भोपाल तक की यात्रा भी कर ली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। साइबर ठगों  ने दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। डर के चलते दंपती ने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का लोन लिया और पूरी रकम ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।

 

पीड़ित दंपती की पहचान 65 वर्षीय सुवर्णा लक्ष्मी और उनके पति नरसिम्हा राव के रूप में हुई है। दोनों भोपाल के कोलार स्थित गणपति एन्क्लेव में रहते हैं और मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। इस साल फरवरी में वे अपने पैतृक गांव गए थे। बुजुर्ग दंपत्ति जब अपने गांव में थे तभी पीड़ित महिला के सुवर्णा के मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया।

 

फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से दिल्ली केनरा बैंक में एक खाता है। इस खाते से जेट एयरवेज के पूर्व प्रमुख नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपये का लेनदेन होने का आरोप लगाया गया। इसके बाद गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट में पेशी का डर दिखाकर दंपती को वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया।

 

ठगों ने दंपती पर भरोसा कायम करने के लिए पूरा फर्जी तंत्र खड़ा कर दिया। दो दिन बाद एक महिला ने खुद को सीआईडी की मुख्य जांच अधिकारी निशा पटेल बताया। उसने दंपती से बैंक खातों और वित्तीय जानकारी हासिल की। इसके बाद उनकी बात एक कथित सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई गई। 9 जून को ठगों ने संपत्ति जब्ती का कथित आदेश भेजा। इसमें एफडी और सोना-चांदी बेचने या गिरवी रखने के निर्देश दिए गए। दंपती को विश्वास दिलाया गया कि अगर उन्होंने रकम जमा नहीं की तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।

 

ठगों के लगातार दबाव के चलते दंपती आंध्र प्रदेश से भोपाल लौट आए। यहां स्कूल से हुई आमदनी से  खरीदे गए जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का लोन लिया। इसके बाद ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। लेकिन 22 लाख रुपये मिलने के बाद भी ठगों ने डिजिटल अरेस्ट खत्म नहीं किया। दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाता रहा। ठग जमानत और मामले से जुड़े दस्तावेज भेजने का झांसा देकर उन्हें लगातार भ्रमित करते रहे।

 

कई सप्ताह तक ठगों के दबाव में रहने के बाद दंपती ने मामले की जानकारी अपनी बेटी को दी। ठगों की ओर से भेजे गए कथित सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बेटी ने अपनी वकील सहेली को दिखाया। दस्तावेज की जांच के बाद उसे पता चला कि आदेश फर्जी है और दंपती साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद बुजुर्ग दंपती ने कोलार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब ठगों के मोबाइल नंबर, वीडियो कॉल, बैंक खातों और लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।