UPSC CAPF AC result 2026: सफल उम्मीदवार पीएसटी और पीईटी के लिए करेंगे तैयारी, 15 दिनों में यूपीएससी पोर्टल पर दर्ज करें अपनी डीटेल

UPSC CAPF AC result 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (असिस्टेंट कमांडेंट्स) परीक्षा, 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 19 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी पीडीएफ फाइल में अपना रोल नंबर चेक कर सकते हें। जो कैंडिडेट्स लिखित परीक्षा में सफल हुए हैं, उन्हें अब फिजिकल स्टैंडर्ड्स टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) देना होगा। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के रोल नंबर यूपीएससी द्वारा जारी ऑफिशियल रिजल्ट डॉक्यूमेंट में दिए गए हैं।

शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को क्या करना होगा

शॉर्टलिस्ट कैंडिडेट्स की उम्मीदवार अस्थायी है। आगे के चरणों के लिए विचार किए जाने से पहले उन्हें सभी पात्रता जरूरतें पूरी करनी होंगी। जो उम्मीदवार पीएसटी या पीईटी के लिए चयनित हुए हैं, उन्हें लिखित परीक्षा के 15 दिनों के अंदर आयोग के पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। उन्हें अपनी डीटेल्स और शैक्षिक योग्यता स्टेटस अपडेट करना होगा और प्रमाण के तौर पर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। जो उम्मीदवार यह प्रक्रिया पूरा नहीं करेंगे, उन्हें परीक्षा के आगे के चरण में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

कैंडिडेट्स को अपना पता, उच्च शिक्षा प्रमाण, एम्प्लॉयमेंट या सर्विस एक्सपीरियंस, फोर्स की प्रेफरेंस, मैरिटल स्टेटस, पेरेंटल डिटेल्स और दूसरी जानकारी, जहां भी लागू हो, अपडेट करनी पड़ सकती है। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म जमा करना होगा। पहले ही सभी जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर चुके उम्मीदवारों को भी लॉग इन करना होगा, अपनी डिटेल्स चेक करनी होंगी और आखिर में ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा करना होगा। उन्हें जमा किए गए फॉर्म का प्रिंटआउट भी ले लेना चाहिए, क्योंकि PST/PET स्टेज पर और पर्सनैलिटी टेस्ट या इंटरव्यू के लिए ई-समन लेटर या ई-एडमिट कार्ड बनाने के लिए इसकी जरूरत होगी।

पीएसटी और पीईटी कार्यक्रम

गृह मंत्रालय के अधीन सशस्त्र सीमा बल (SSB) को नोडल अथॉरिटी के तौर पर नामित किया गया है, शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को PST/PET की तारीख, समय और जगह के बारे में बताएगा।

जरूरी जानकारी एसएसबी भर्ती वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी। ई-एडमिट कार्ड भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे, जबकि कैंडिडेट्स को उनकी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी के जरिए जानकारी मिलेगी। कैंडिडेट्स को सलाह दी गई है कि वे नियमित एसएसबी वेबसाइट और अपने ईमेल के स्पैम फोल्डर के साथ इनबॉक्स को चेक करते रहें।

पीएसटी के लिए आने वाले उम्मीदवारों को अपना ई-एडमिट कार्ड, आखिर में जमा किए गए डीएएफ की हार्ड कॉपी और एक वैलिड फोटो आइडेंटिटी प्रूफ जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या वोटर आइडेंटिटी कार्ड साथ लाना होगा।

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।

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सुभाष चंद्रा के मामले में NCLT का बड़ा फैसला

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राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।

 

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।

 

80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान

NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।

 

मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।

22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।

 

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।

 

राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

FIFA World Cup खेलने वाली इन 2 टीमों के खिलाफ खेलेगी भारतीय टीम मैच

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने गुरुवार को बताया कि भारतीय सीनियर पुरुष टीम आगामी फीफा विंडो में 26 सितंबर को पनामा से और छह अक्टूबर को दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे से अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगी।इस तरह फीफा विंडो में भारत घरेलू मैदान पर किसी मजबूत टीम के खिलाफ तीसरा अंतरराष्ट्रीय मैत्री मुकाबला खेलेगा।

उरुग्वे के खिलाफ यह मुकाबला कोलकाता में पांच बार की विश्व कप चैंपियन ब्राजील के खिलाफ भारत के अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच के तीन दिन बाद खेला जाएगा।

ब्राजील के खिलाफ मैच भी कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) में होगा। उरुग्वे के खिलाफ मुकाबला भी इसी प्रतिष्ठित स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।भारतीय टीम 26 सितंबर को बेंगलुरु के कांतीरवा स्टेडियम में पनामा के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगी। फीफा की अंतरराष्ट्रीय विंडो 21 सितंबर से छह अक्टूबर तक होगी और इस अवधि में कोई देश अधिकतम चार मैच खेल सकता है।

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ‘‘भारतीय पुरुष राष्ट्रीय टीम कोलकाता में विश्व फुटबॉल की एक और दिग्गज टीम का स्वागत करेगी। दो बार की फीफा विश्व कप चैंपियन उरुग्वे छह अक्टूबर 2026 को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगा। यह इस विंडो में भारत का तीसरा हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच होगा। ’’

महासंघ ने कहा, ‘‘एक ही फीफा विंडो के दौरान विश्व कप में खेल चुके तीन देश पनामा, ब्राजील और उरुग्वे भारत का दौरा करेंगे। ’’

उरुग्वे फिलहाल फीफा रैंकिंग में 20वें स्थान पर है। उसने 1930 और 1950 में विश्व कप जीता था। टीम 1954, 1970 और 2010 में तीन बार विश्व कप के सेमीफाइनल तक भी पहुंची है।उरुग्वे 2026 विश्व कप में ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया। उसने सऊदी अरब के खिलाफ 1-1 और केप वर्डे के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला जबकि बाद में चैंपियन बनी स्पेन से 0-1 से हार गया।

उरुग्वे को 2022 विश्व कप में भी ग्रुप चरण से बाहर होना पड़ा था। उरुग्वे के मौजूदा मुख्य कोच डिएगो फोर्लान 2016 में मुंबई सिटी एफसी के लिए खेल चुके हैं।इससे पहले एआईएफएफ ने घोषणा की कि बेंगलुरु का श्री कांतीरवा स्टेडियम 26 सितंबर को भारत-पनामा मैत्री मैच की मेजबानी करेगा।

भारतीय टीम सैफ चैंपियनशिप 2023 के बाद बेंगलुरु में खेलेगी। उस टूर्नामेंट में भारत ने इसी मैदान पर फाइनल में कुवैत को हराकर खिताब जीता था।फिलहाल विश्व रैंकिंग में 44वें स्थान पर मौजूद पनामा की टीम भारत को मजबूत चुनौती पेश करेगी। इस मध्य अमेरिकी देश ने फीफा विश्व कप 2026 में भी हिस्सा लिया था जिससे इस मुकाबले का महत्व और बढ़ जाता है।

यह भारत का किसी विश्व कप में खेलने वाले देश के खिलाफ पहला मैत्री मैच होगा। यह व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान खेला जाएगा और इसके ठीक एक सप्ताह बाद भारत तीन अक्टूबर को कोलकाता में पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के खिलाफ खेलेगा।इसके अलावा भारतीय टीम को 12 और 15 नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घरेलू मैदान पर दो मैच खेलने हैं।

हथियार बनाने में भारत की लंबी छलांग! प्रोडक्शन ₹1.80 लाख करोड़ और एक्सपोर्ट ₹39,000 करोड़ के पार

India Defence Sector Growth: भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जानकारी दी कि पिछले एक दशक में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़कर लगभग ₹1.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, भारत से रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़कर ₹39,000 करोड़ के करीब हो गया है।

रक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित 57 साल पुरानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-सीरीज के मेन बैटल टैंक्स के ओवरहॉलिंग के लिए बनने वाले ₹472 करोड़ के नए प्लांट का शिलान्यास करने पहुंचे थे।

2014 से 2026: रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

राजनाथ सिंह ने 2014 के मुकाबले रक्षा क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति का ब्योरा पेश किया। साल 2014 में देश का हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1.80 लाख करोड़ हो गया है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ ₹1,000 करोड़ का था, जो अब ₹39,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है।

जबलपुर VFJ में ₹472 करोड़ का प्रोजेक्ट

जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में बनने वाला नया प्रोजेक्ट भारत के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। यह नया प्लांट सालाना 80 T-72 और T-90 टैंकों का ओवरहॉल यानी मरम्मत व अपग्रेडेशन करने में सक्षम होगा। भारतीय सेना को हर साल करीब 230 T-सीरीज टैंकों के ओवरहॉल की जरूरत होती है।

अब तक चेन्नई के आवडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में सालाना लगभग 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग होती थी। जबलपुर का नया प्लांट शुरू होने के बाद सेना की यह कमी पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

‘अब केवल हथियार बना ही नहीं रहे, मेंटेन भी कर रहे हैं’

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल चुका है और इसके पीछे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन है। भारत अब न सिर्फ अपनी धरती पर आधुनिक हथियार बना रहा है, बल्कि उनका रखरखाव, ओवरहॉलिंग और अपग्रेडेशन करने की पूरी क्षमता हासिल कर चुका है।

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह भारतीय सेना के टैंकों को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखने में ‘वरदान’ साबित होगा।

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का ऐतिहासिक सफर

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर(VFJ) की स्थापना 1969 में हुई थी, जो वर्तमान में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के तहत काम करती है। शुरुआत में इस फैक्ट्री में जर्मनी की MAN कंपनी के सहयोग से ‘शक्तिमान 3-टन’ ट्रक और जापान की निसान के सहयोग से ‘निसान 1T’ व ‘जोन्गा’ गाड़ियां बनाई जाती थीं। यह फैक्ट्री 330 एकड़ में फैली है और इसका संलग्न एस्टेट 600 एकड़ का है।

श्रीलंका ने किला लड़ाकर किया कोलंबो टेस्ट ड्रॉ लेकिन भारत ने सीरीज 1-0 से जीती

Sonal Dinusha

INDvsSL कोलंबो टेस्ट में श्रीलंका के बल्लेबाज सोनल दिनूशा और पुछल्ले बल्लेबाजों ने पांचवे दिन कमाल का संघर्ष दिखाते हुए मैच ड्रॉ करा लिया। 229 पर 6 विकेट खोकर अंतिम दिन  श्रीलंका की टीम ने बारिश का इंतजार नहीं किया और पूरे दिन बल्लेबाजी की। श्रीलंका की टीम ने 429 रन 9 विकेट गंवाए।

इसके बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने शतकवीर सोनल दिनूशा से हाथ मिला लिया। श्रीलंका के सोनल दिनुशा शुरु से अंत तक आउट नहीं हुए और उन्होंने 251 गेंदों में नाबाद 131 रन बनाए।

हालंकि यह सीरीज भारत के नाम रही क्योंकि गॉल टेस्ट भारत ने 300 रनों के अंतर से जीता था। लेकिन यह टेस्ट ना जीत पाने के कारण भारत को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंकतालिका में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस चक्र में यह भारत का दूसरा ड्रॉ मैच है।

श्रीलंका ने ड्रॉ की नीव पहले सत्र में ही डाल दी थी जब टीम ने 29 ओवर में बिना विकेट खोए 100 रन बना लिए थे। दूसरे सत्र में टीम ने 2 विकेट गंवाए जिसके कारण टीम बहुत धीमे खेली और 31.2 ओवर में सिर्फ 54 रन बनाए। अंतिम सत्र में टीम ने 46 रन बनाए और सिर्फ एक विकेट गंवाया।

पैर में जकड़न से जूझने के बावजूद दिनुशा ने जबरदस्त जुझारूपन दिखाते हुए नाबाद 133 रन की पारी के दौरान 264 गेंद का सामना किया और भारत को जीत से वंचित कर दिया। उन्होंने अपनी पारी में और आठ चौके और दो छक्के जड़े। कल के नाबाद सात रन से आगे खेलते हुए दिनुशा ने स्वीप शॉट का शानदार तरीके से इस्तेमाल किया और भारतीय गेंदबाजों को अंतिम दिन पूरी तरह से बेअसर साबित किया।

दिनुशा की अगुआई में श्रीलंका ने दूसरी पारी में जब 154 ओवर में 9 विकेट पर 429 रन बनाए थे तब दोनों टीम मैच ड्रॉ कराने पर सहमत हो गईं। इस समय श्रीलंका को 216 रन की बढ़त हासिल थी।श्रीलंका ने छठा विकेट निरोशन डिकवेला के रूप में 65वें ओवर में गंवा दिया था जिसके बाद दिनुशा ने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ 89 ओवर से अधिक बल्लेबाजी करके भारत की जीत हासिल करने की उम्मीदों को ध्वस्त किया।

दिनुशा और केशारा नुवांता (46 रन, 150 गेंद) ने सातवें विकेट के लिए 112 रन की साझेदारी की दौरान 246 गेंद का सामना किया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने इसके बाद लाहिरू कुमारा (12 रन, 90 गेंद) के साथ नौवें विकेट के लिए 47 रन की साझेदारी के दौरान भी मिलकर 170 गेंद खेली जिससे भारत की जीत हासिल करने की रही सही उम्मीद भी टूट गई।

भारत की ओर से रविंद्र जडेजा, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और सारांश जैन ने एक-एक विकेट चटकाया।भारत ने इससे पूर्व अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 503 रन बनाकर घोषित की थी जिसके जवाब में श्रीलंका की टीम दिनुशा के 103 रन के बावजूद 290 रन पर सिमट गई थी और उसे फॉलोआन के लिए मजबूर होना पड़ा था।

भारतीय टीम को उम्मीद थी कि वे श्रीलंका के बाकी बल्लेबाजों को जल्द समेट देंगे लेकिन दिनुशा और नुवांता मेहमान टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दोनों ने सुबह के सत्र में 100 रन जोड़े और भारतीय गेंदबाजों को सफलता से महरूम रखा।

भारतीय गेंदबाजों को एक बार फिर निचले क्रम के बल्लेबाजों के खिलाफ विकेट चटकाने के लिए जूझना पड़ा। तेज गेंदबाजों ने शॉर्ट गेंद और लेग साइड पर गेंदबाजी की रणनीति अपनाने की कोशिश की लेकिन वे पूरे सत्र में बेअसर ही नजर आए।

स्पिनरों मानव सुथार, सारांश जैन और रविंद्र जडेजा को कुछ मौकों पर टर्न और उछाल मिला लेकिन वे श्रीलंका की पारी को समेटने में नाकाम रहे।श्रीलंका की पहली पारी में 290 रन के दौरान भी उसके अंतिम तीन विकेटों ने मिलकर 45 ओवर बल्लेबाजी की थी और 117 रन जोड़े थे।

पहली पारी में 103 रन बनाने वाले दिनुशा मौजूदा श्रृंखला में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुए। उन्होंने चार पारियों में तीन शतक और एक अर्धशतक जड़कर भारतीय गेंदबाजों को काफी परेशान किया। उन्होंने पहले टेस्ट में भी 100 और 84 रन बनाए थे।

पच्चीस वर्षीय दिनुशा ने जडेजा की गेंद पर एक रन के साथ 99 गेंद में अर्धशतक पूरा किया।हालांकि लंच के बाद सत्र की शुरुआत में सुथार ने नुवांता का विकेट निकालकर यह साझेदारी तोड़ी। सुथार की गेंद ने नुवांता के बल्ले का किनारा लिया और स्लिप में ध्रुव जुरेल ने कैच लपक लिया।

जडेजा ने इसके बाद प्रभात जयसूर्या (02) को भी स्लिप में जुरेल के हाथों कैच कराया।लेकिन इसके बाद भारतीय टीम को लाहिरू कुमारा के रूप में एक और जुझारू श्रीलंकाई बल्लेबाज का सामना करना पड़ा।

दिनुशा और कुमारा ने 28 से अधिक ओवरों तक भारतीय गेंदबाजों को सफलता हासिल नहीं करने दी।जडेजा ने अंतत: कुमारा को शॉर्ट लेग पर यशस्वी जायसवाल के हाथों कैच कराके इस साझेदारी को तोड़ा।

दिनुशा ने इससे पहले अंतिम सत्र की मोहम्मद सिराज की पहली ही गेंद को मिडविकेट पर दो रन के लिए खेलकर 196 गेंद में मौजूदा श्रृंखला का अपना तीसरा शतक पूरा किया।कप्तान गिल ने अंतिम विकेट की तलाश में स्वयं गेंदबाजी करने के अलावा जायसवाल और जुरेल को भी गेंद सौंपी लेकिन सफलता नहीं मिली।

कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने से मुश्किल हुआ WTC Final का सपना अब हर सीरीज नॉकआउट

INDvsSL श्रीलंका ने कोलंबो टेस्ट ड्रॉ  करावाकर भारत की स्थित विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र 2025-27 में मुश्किल कर दी है। भारत ने भले ही यह सीरीज 1-0 से जीत ली है लेकिन अब उसको आने वाले दोनों सीरीज के लगभग सारे मैच जीतने होंगे। ज्यादा से ज्यादा टीम एक ड्रॉ और खेल सकती है लेकिन हार उसे अंक तालिका में और भी नीचे गिरा देगी। फिलहाल टीम 51.51 की जीत प्रतिशत से पांचवे पायदान पर खड़ी है।

यह इस चक्र में भारत का दूसरा ड्रॉ है। पहला ड्रॉ इंग्लैंड के खिलाफ हुआ था। कुल मिलाकर भारत की 5 जीत 4 हार और 2 ड्रॉ हैं। तालिका में 2 ड्रॉ का असर एक हार जैसा होता है। इस कारण भारत की यह पांचवी हार भी कही जा सकती है।

भारत की स्थिति पर एक नजर:

टेस्ट 11
जीत 5
हार 4
ड्रॉ 2
अंक प्रतिशत 51.51

आगामी सीरीज़:

न्यूज़ीलैंड (विदेशी धरती पर) 2 टेस्ट
ऑस्ट्रेलिया (घरेलू धरती पर) 5 टेस्ट

त्रिकोणीय मुकाबले ने भारत को डाला मुश्किल में

न्यूजीलैंड अगर इंग्लैंड से 2-1 या 3-0 से टेस्ट सीरीज हार जाती तो भारत के फायदे की बात होती लेकिन न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 2-1 से सीरीज हराकर भारत की स्थिति थोड़ी और मुश्किल कर दी है। फिलहाल मुकाबला 3 टीमों ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच लग रहा है। भारत के लिए 7 में से जो 2 सबसे ज्यादा मुश्किल मुकाबले हैं वह न्यूजीलैंड के खिलाफ ही देखने को मिलेंगे।  ऑस्ट्रेलिया भारतीय धरती पर बोर्डर गावस्कर ट्रॉफी खेलेगी।

इसका मतलब है 5 जीत और दो ड्रॉ (80 अंक) या 7 जीत (84 अंक)। इनमें से पांच टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होंगे, जिसके विरुद्ध भारत ने 2008 से अब तक घरेलू मैदान पर पिछली पांच सीरीज़ में 12-2 का रिकॉर्ड बनाया है।पिछले WTC चक्र में फ़ाइनलिस्ट टीमों का अंक प्रतिशत 69.44 (दक्षिण अफ़्रीका) और 67.54 (ऑस्ट्रेलिया) था।

5 जीत और दो हार भारत को 62.96 प्रतिशत तक ले जाएंगी, जबकि 7 जीत और 1 हार के साथ वह 68.52 प्रतिशत पर पहुंचेगा।यानी भारत के पास अब भी ग़लती की बहुत कम गुंजाइश बची है।

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Sanskrit Language

संस्कृत को विश्व की पहली भाषा और वह भी पहली व्याकरणबद्ध भाषा माना जाता है। कहते हैं कि इसी भाषा के कारण देश और दुनिया की अन्य भाषाओं का जन्म हुआ। विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर जानिए दुनिया की सबसे प्राचीन, वैज्ञानिक और समृद्ध भाषाओं में से एक 'संस्कृत' से जुड़े 5 अद्भुत रहस्य:- 

 

कंप्यूटर और AI के लिए सबसे उपयुक्त भाषा: नासा (NASA) के शोध के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) के लिए संस्कृत दुनिया की सबसे स्पष्ट और सटीक भाषा है, क्योंकि इसमें व्याकरण के नियम पूरी तरह से स्पष्ट और गणितीय हैं।

 

अद्भुत शब्द भंडार और एक शब्द के अनेक पर्यायवाची: संस्कृत में केवल एक ही वस्तु या भाव के लिए सैकड़ों शब्द उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, संस्कृत में 'पानी' (जल) के लिए 70 से अधिक और 'हाथी' के लिए 100 से भी अधिक पर्यायवाची शब्द हैं।

 

स्मरण शक्ति और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव: अनुसंधान से पता चला है कि संस्कृत के मंत्रों और अक्षरों का उच्चारण करने से गले और मस्तिष्क में विशेष कंपन (vibrations) उत्पन्न होते हैं। यह तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर ध्यान केंद्रित करने और स्मरण शक्ति (Memory Power) बढ़ाने में मदद करता है।

 

अद्वितीय व्याकरणिक संरचना (अव्यय शब्द क्रम): संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वाक्यों में शब्दों का क्रम (word order) बदलने से वाक्य का अर्थ नहीं बदलता। जैसे- “रामः गृहं गच्छति” और “गच्छति गृहं रामः” दोनों का अर्थ एक ही रहता है, जो किसी अन्य भाषा में संभव नहीं है।

 

संसार की अधिकांश भाषाओं की जननी: संस्कृत को इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार की मूल भाषाओं में से एक माना जाता है। अंग्रेजी, जर्मन, लैटिन, रूसी और सभी भारतीय भाषाओं के अनगिनत शब्द (जैसे- Mother/मातृ, Brother/भ्रातृ, Geometry/ज्यामिति) सीधे संस्कृत से विकसित हुए हैं।

Kawasaki W230 gets a new colour for 2027

Kawasaki W230 gets a new colour for 2027
2027 Kawasaki W230

Kawasaki has revealed the 2027 W230 with a new Ebony colour option, replacing the Metallic Matte Dark Green that the bike was available with in 2026. The update is purely cosmetic, with no mechanical, feature or price changes accompanying the new colour in global markets. A single colour option is offered, as was the case with the outgoing scheme.

  1. New Ebony colour replaces Metallic Matte Dark Green
  2. No mechanical changes; 233cc air-cooled single continues unchanged

2027 Kawasaki W230 details

The W230 is powered by the same engine as the KLX230

The W230 is powered by a 233cc air-cooled single-cylinder engine producing 18hp at 7,000rpm and 18.6Nm at 5,800rpm, paired with a 6-speed gearbox. Suspension is handled by a conventional telescopic fork at the front and twin shock absorbers at the rear, sticking with the retro theme of the bike. Braking hardware includes disc brakes at both ends – a 265mm front and 220mm rear.

With a kerb weight of 143kg, the W230 is a relatively lightweight motorcycle and perhaps one of the lightest in its class. That, along with a low 745mm seat height, makes the W230 an incredibly accessible motorcycle for most riders, even those just getting started out.

Unfortunately, the Kawasaki W series in India hasn’t had much of an impact in terms of sales. The W800 was previously available in our market, as was the India-made Kawasaki W175. While the MY24 W175 is still listed on the Kawasaki India site, it’s highly unlikely there’s any stock of that bike left, given that several other models in Kawasaki India’s lineup are now MY27 units.

Kawasaki has long considered India a key manufacturing hub for its smaller-displacement retro models, and while plans for the W230 in India have not been confirmed by Kawasaki, the modern classic segment it targets has seen significant growth here, including the ever-growing popularity of models like the Classic 350 and the more recently revealed Honda CB500.

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

TVS Motor Company ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए TVS iQube MillionR Edition लॉन्च किया है। यह खास एडिशन iQube के 10 लाख यूनिट प्रोडक्शन का आंकड़ा पार करने की उपलब्धि के मौके पर पेश किया गया है। इस स्पेशल एडिशन की प्रभावी एक्स-शोरूम कीमत कर्नाटक में ₹1,40,138 बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में सब्सिडी, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण कीमत में बदलाव हो सकता है।

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145 किमी की रेंज और 82 किमी/घंटा टॉप स्पीड

TVS iQube MillionR Edition मौजूदा 3.5 kWh iQube वेरिएंट पर आधारित है। इसका मतलब है कि इसके मैकेनिकल सेटअप और परफॉर्मेंस में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसमें मुख्य रूप से नया डिजाइन, अतिरिक्त स्टोरेज और कुछ उपयोगी फीचर्स जोड़े हैं। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी दी गई है, जो 145 किमी IDC रेंज देने का दावा करती है। इसकी टॉप स्पीड 82 किमी/घंटा है।

 

Aurora Green कलर में आया स्पेशल एडिशन

 

MillionR Edition को खास Aurora Green Dual-Tone कलर में पेश किया गया है। इसमें स्पेशल ग्राफिक्स और MillionR ब्रांडिंग दी गई है, जिससे इसे रेगुलर iQube से अलग पहचान मिलती है। इसके अलावा सीट अपहोल्स्ट्री को भी ज्यादा प्रीमियम लुक दिया गया है।

 

बढ़ा स्टोरेज, मिला Type-C चार्जिंग पोर्ट

 

TVS ने इस स्पेशल एडिशन में रोजमर्रा के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए कई उपयोगी बदलाव किए हैं। इसमें नया फ्रंट यूटिलिटी कंपार्टमेंट दिया गया है। साथ ही स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस चार्ज करने के लिए USB Type-C चार्जिंग पोर्ट भी मिलता है।

 

इन बदलावों के बाद स्कूटर का कुल स्टोरेज 32 लीटर से बढ़कर 35.5 लीटर हो गया है।

 

  • TVS iQube MillionR Edition के प्रमुख स्पेसिफिकेशन
  • फीचर TVS iQube MillionR Edition
  • बैटरी क्षमता 3.5 kWh
  • IDC रेंज 145 किमी
  • टॉप स्पीड 82 किमी/घंटा
  • डिस्प्ले 12.7 सेमी TFT
  • 0-80% चार्जिंग करीब 4.5 घंटे
  • कुल स्टोरेज 35.5 लीटर
  • कलर Aurora Green Dual Tone

 

कंपनी के अनुसार, iQube MillionR Edition में 12.7 सेमी TFT इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले दिया गया है। इसकी 145 किमी IDC रेंज और 82 किमी/घंटा की टॉप स्पीड रेगुलर 3.5 kWh iQube के समान है। यानी यह मॉडल परफॉर्मेंस अपग्रेड के बजाय डिजाइन और सुविधा से जुड़े बदलावों पर ज्यादा केंद्रित है।

 

118 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स

 

3.5 kWh iQube प्लेटफॉर्म में 118 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स मिलते हैं। इनमें टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, Distance-to-Empty जानकारी और रिमोट चार्ज स्टेटस मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा Q-Park Assist भी मिलता है, जो कम स्पीड पर स्कूटर को पार्क करने या रिवर्स करने में मदद करता है।

 

TVS iQube ने हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा

 

MillionR Edition TVS की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के मौके पर लॉन्च किया गया है। 25 जून 2026 को TVS Motor ने घोषणा की थी कि कंपनी के होसुर प्लांट से 10 लाखवां iQube रोलआउट हुआ। यह उपलब्धि भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती लोकप्रियता और TVS के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कारोबार के विस्तार को दर्शाती है।

 

जुलाई में iQube की बिक्री में 158% की बढ़ोतरी

 

TVS iQube की बिक्री में भी हाल के महीनों में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। जुलाई 2026 में iQube की 59,386 यूनिट्स बिकीं, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 23,029 यूनिट था। इस तरह सालाना आधार पर बिक्री में करीब 158 फीसदी की वृद्धि हुई। जून 2026 में iQube की 47,331 यूनिट्स बिकी थीं। ऐसे में जुलाई की बिक्री में महीने-दर-महीने भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

कई बैटरी विकल्पों में उपलब्ध है iQube

 

TVS अब iQube को अलग-अलग बैटरी क्षमता और रेंज के साथ पेश कर रही है। पोर्टफोलियो में एंट्री-लेवल 2.3 kWh iQube शामिल है, जिसकी IDC रेंज 114 किमी तक है। वहीं, बड़े 5.3 kWh iQube ST की IDC रेंज 212 किमी तक बताई गई है। इन दोनों के बीच 3.5 kWh iQube MillionR Edition आता है, जो 145 किमी की दावा की गई रेंज और 82 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ पेश किया गया है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर क्या आप भी कनफ्यूज्ड हैं? यहां आसान शब्दों में समझें इसका पूरा मतलब

किसी कंपनी का शेयर बाज़ार बंद होने के समय किस भाव पर था, इससे आमतौर पर लोगों का ज़्यादा सरोकार नहीं होता। आम लोग तो अपने शेयर को खरीदने और बेचने के भाव पर ध्यान देते हैं। मगर बाज़ार बंद होने के समय का भाव (क्लोज़िंग प्राइस) कुछ तबकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जैसे म्यूचुअल फ़ंड, बड़े संस्थागत निवेशक और वायदा एवं विकल्प बाज़ार के प्रतिभागी।

कैस से पहले कैसे निर्धारित होती थी क्लोज़िंग प्राइस?

3 अगस्त 2026 से पहले क्लोज़िंग प्राइस एक फ़ॉर्मूले के तहत निर्धारित होती थी। इस फ़ॉर्मूले का सिद्धांत यह है कि अगर 10 लोगों ने किसी कंपनी का एक शेयर 100 रुपये में खरीदा और 1,000 लोगों ने उसी कंपनी का एक शेयर 110 रुपये में खरीदा, तो साधारण औसत भाव 105 रुपये होगा। मगर 105 रुपये का साधारण औसत बाज़ार का सही चित्रण नहीं करता, क्योंकि अधिकांश लोगों ने 110 रुपये का भाव चुकाया।

इस फ़ॉर्मूले, जिसका नाम है वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (जिसे लोग बोलचाल में विवैप कहते हैं), के तहत साधारण औसत निकालने के बजाय, बाज़ार बंद होने से पहले के अंतिम 30 मिनट में किसी कंपनी के कितने शेयर किस भाव पर बिके, दोनों को ध्यान में रखते हुए एक भारित औसत निकाला जाता है। उपरोक्त उदाहरण में विवैप लगभग 110 रुपये होगा।

विवैप का उद्देश्य अधिक यथार्थवादी क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करना है, फिर भी ज़ाहिर है, यदि इन 30 मिनटों के दौरान बहुत बड़ी मात्रा में प्रचलित बाज़ार भाव से अलग भाव पर शेयर ख़रीदे और बेचे जाएँ, तो क्लोज़िंग प्राइस प्रभावित हो सकती है। सेबी ने हाल ही में एक विदेशी ट्रेडिग समूह पर जो आरोप लगाए थे, उनमें क्लोज़िंग प्राइस को प्रभावित करने से जुड़े आरोप भी थे। हालाँकि, संबंधित समूह सेबी के आरोपों और चित्रण से सहमत नहीं है और इस मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

कैस से क्या बदला है?

इन्हीं चिंताओं के बीच सेबी ने क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने के लिए एक नया तरीका लागू किया है, जिसका नाम है कैस, यानी क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन। कैस एक नया विचार नहीं है और सेबी 2024 से कैस के बारे में विचार कर रहा था। कैस के अंतर्गत आने वाले शेयरों में नियमित ट्रेडिंग अब 3:15 बजे बंद हो जाती है। पहले इन शेयरों में नियमित ट्रेडिंग 3:30 बजे तक होती थी। जो शेयर फिलहाल कैस के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनकी ट्रेडिंग अभी भी 3:30 बजे तक चलती है और उनकी क्लोज़िंग प्राइस का निर्धारण विवैप के द्वारा होता है।

कैस के तहत नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद के 20 मिनट में चार चरणों में प्रक्रिया चलती है। इन चार चरणों को समझने का आसान तरीका यह है कि भाव निकालने के लिए दो चीज़ों की ज़रूरत है। एक शुरुआती भाव और दूसरा यह कि इस शुरुआती भाव से लोग कितने ऊपर या नीचे बोली लगाएंगे।

• शुरुआती भाव, जिसे रेफ़रेंस प्राइस कहते हैं, 3:00 और 3:15 बजे के बीच के विवैप से निर्धारित होता है। अगर इस दौरान कोई शेयर नहीं बिका, तो पूरे दिन में जो भी उस शेयर की अंतिम खरीद का भाव होगा, उसी को शुरुआती भाव मान लिया जाता है। अगर पूरे दिन कोई शेयर नहीं बिका, तो यह पिछले दिन का क्लोज़िंग प्राइस होता है।

• एक बार रेफ़रेंस प्राइस तय हो जाने के बाद, लोग खरीदने और बेचने के लिए ऑर्डर डाल सकते हैं। कैस में रेफ़रेंस प्राइस के 3 प्रतिशत ऊपर-नीचे का दायरा लागू होता है।

• चरणबद्ध तरीके से स्टॉक एक्सचेंज खरीदने और बेचने के ऑर्डर एकत्रित करता है। इसके बाद इन ऑर्डरों का विश्लेषण करके यह निर्धारित किया जाता है कि किस भाव पर सबसे अधिक शेयरों का लेन-देन संभव है। अंतिम चरण में ऑर्डरों का मिलान किया जाता है। यही भाव क्लोज़िंग प्राइस कहलाता है।

• उदाहरणतः अगर किसी शेयर के लिए लोगों ने निम्नलिखित ऑर्डर डाले हैं: (1) ख़रीदने के ऑर्डर: 103 रुपये के 15 शेयर; 102 रुपये के 25 शेयर; 100 रुपये के 40 शेयर और 98 रुपये के 30 शेयर; और (2) बेचने के ऑर्डर: 97 रुपये के 10 शेयर; 100 रुपये के 50 शेयर; 101 रुपये के 30 शेयर और 104 रुपये के 20 शेयर, तो आमतौर पर कैस के अनुसार 100 रुपये के भाव पर सबसे ज़्यादा शेयरों का लेन-देन संभव है। 100 रुपये क्लोज़िंग प्राइस होगा।

सेबी का विचार ऐसा प्रतीत होता है कि विवैप के विपरीत, कैस में क्लोज़िंग प्राइस से छेड़छाड़ करने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।

कैस के पहले भी वीवैप से क्लोज़िंग प्राइस तो निकलता था, लेकिन वीवैप एक औसत भाव होने की वजह से साधारणतः उस भाव पर कोई सौदा नहीं होता था। मतलब, क्लोज़िंग प्राइस एक कागज़ी संख्या थी। कैस में जो भाव निकलता है, सौदा उसी भाव पर होता है। इसलिए कैस का भाव कागज़ी भाव नहीं है, बल्कि सही मायने में उस समय का क्लोज़िंग प्राइस है। इसके काफ़ी फायदे हैं, जैसे कि, अमुमन एक पैसिव इंडेक्स फण्ड के लिए वीवैप वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग से कैस वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग ज़्यादा सटीक होगी।

नया नहीं है कैस

कैस जैसी व्यवस्था विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में काफ़ी प्रचलित है। इसके लागू होने पर कुछ लोगों ने कहा कि भारत भी अब विदेशी एक्सचेंजों की प्रणाली अपना रहा है। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। भारत वर्षों से कैस जैसी प्रणाली का उपयोग बाज़ार खुलने के समय का भाव (ओपनिंग प्राइस) निर्धारित करने के लिए करता आया है। वैसे भी भारतीय बाज़ार नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा आगे रहा है।

सेबी ने फिलहाल कैस को उन शेयरों पर लागू किया है, जिन पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। आगे चलकर इसे अन्य शेयरों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।

कैसा रहा कैस का क्रियान्वयन?

शुरुआती दिनों में कैस का क्रियान्वयन पूरी तरह निर्बाध नहीं रहा। उदाहरणतः, निफ़्टी इंडेक्स के साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट साधारणतः मंगलवार को एक्सपायर होते हैं। अगर मंगलवार को निफ़्टी में शामिल शेयरों में 3:15 तक के बाज़ार भाव और कैस के दौरान बनने वाले क्लोज़िंग प्राइस में महत्वपूर्ण अंतर हो, तो निफ़्टी के क्लोज़िंग स्तर में तेज़ बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स के भावों में अस्थायी असंगति पैदा होने पर आर्बिट्रेज की गुंजाइश भी बन सकती है।

सेबी बाज़ार पर कड़ी नज़र रखती है और सेबी ने 19 अगस्त को एक ऑर्डर निकाला है, जिसमें दो संस्थाओं के ऊपर सेबी ने यह आरोप लगाया है कि उन्होंने कैस के भाव को प्रभावित किया है। यह एक अंतरिम आदेश है, जो इन संस्थाओं का पक्ष सुने बिना जारी किया गया है; इसलिए इसे अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। लेकिन इससे दो निष्कर्ष निकलते हैं: एक, कि कैस में लिक्विडिटी बहुत महत्वपूर्ण है; और दूसरा, कि कैस पर सेबी की पैनी नज़र है।

इन ऑर्डरों में आरोप यह है कि कैस में बड़े खरीद और बिक्री के ऑर्डर ऑर्डर रेफ़रेंस प्राइस से लगभग 3% ऊपर और नीचे डाले गए, जो कि बाज़ार के रुख़ के विपरीत था, और बाद में ये ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। सेबी का आरोप है कि इससे इंडेक्स प्रभावित हुआ और संबंधित संस्थाओं को वायदा एवं विकल्प बाज़ार में फायदा हुआ।

किसी भी नई व्यवस्था से परिचित होने और उसमें पारंगत होने में समय लगता है। आशा है कि आने वाले दिनों में कैस में अधिक से अधिक ऑर्डर्स डाले जाएँगे और खरीदने-बेचने वालों की संख्या बढ़ेगी, जिससे खरीदने और बेचने के लिए पर्याप्त ऑर्डर उपलब्ध होंगे और क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने की प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से चल सकेगी। क्या इससे क्लोज़िंग प्राइस वास्तव में अधिक यथार्थवादी होगी और उसे प्रभावित करने की संभावना कम होगी, यह तो समय ही बताएगा।

(यह लेख अम्बरीष ने लिखा है, जो शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी में पार्टनर हैं)

डिसक्लेमर-यहां व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं। इसे इस पब्लिकेशन का विचार नहीं माना जाना चाहिए।