Samsung ने अपने Galaxy Unpacked 2026 इवेंट में सिर्फ फोल्डेबल फोन (Galaxy Z Fold 8, Galaxy Z Fold 8 Ultra और Galaxy Z Flip 8) ही लॉन्च नहीं किए, बल्कि इस दक्षिण कोरियाई कंपनी ने दो नई स्मार्टवॉच – Galaxy Watch Ultra 2 और Galaxy Watch 9 को भी पेश किया है। जहां एक तरफ Galaxy Watch Ultra 2 को उन यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो ज्यादा ब्राइट डिस्प्ले, बड़ी बैटरी और मजबूत बनावट वाली स्मार्टवॉच चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ Galaxy Watch 9 नए AI-पावर्ड वेलनेस टूल्स के साथ रोजाना की हेल्थ ट्रैकिंग पर फोकस करती है।
Samsung Galaxy Watch 9 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स
Galaxy Watch 9 को 40mm और 44mm साइज में पेश किया गया है। दोनों ही मॉडल्स में AMOLED ‘ऑलवेज-ऑन’ डिस्प्ले है, जिसकी ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक जाती है और यह सफायर क्रिस्टल ग्लास से सुरक्षित है। Samsung ने इस स्मार्टवॉच में Qualcomm का नया Snapdragon Wear Elite प्रोसेसर दिया है, साथ ही इसमें 2GB RAM और 32GB स्टोरेज भी है। यह वॉच Wear OS 7 पर चलता है, जिसमें ऊपर One UI 9 Watch का इंटरफेस दिया गया है।
इस स्मार्टवॉच में Samsung का लेटेस्ट बायोएक्टिव सेंसर है, जो हार्ट रेट मॉनिटरिंग, ECG और बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस को एक ही सिस्टम में मिलाता है। इसमें हार्ट हेल्थ स्कोर, फिटनेस इंडेक्स, डेली कार्डियो लोड, वाइटल्स, हियरिंग और अपडेटेड स्लीप एपनिया जैसे नए AI-पावर्ड फीचर्स भी शामिल हैं।
बैटरी कैपेसिटी मॉडल के हिसाब से अलग-अलग है; 44mm वाले वर्जन में 445mAh की बैटरी है, जबकि 40mm वाले वेरिएंट में 390mAh की बैटरी है। इसके अलावा, इसमें वायरलेस चार्जिंग, LTE, ब्लूटूथ 6.0, वाई-फाई, NFC और डुअल-फ़्रीक्वेंसी GPS जैसे सभी फीचर्स का सपोर्ट मिलता है।
Samsung Galaxy Watch Ultra 2 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स
Samsung Galaxy Watch Ultra 2 में 1.52-इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जिसकी पीक ब्राइटनेस 5,000 निट्स है। इसमें Qualcomm का पेंटा-कोर Snapdragon Wear Elite चिपसेट लगा है, साथ ही 2GB RAM और 64GB की ऑनबोर्ड स्टोरेज भी दी गई है। यह वियरेबल Wear OS 7 पर आधारित One UI 9 Watch के साथ आता है और Android 13 या उससे नए वर्जन वाले स्मार्टफोन के साथ काम करता है।
Samsung ने इस Watch की मजबूती को भी बेहतर बनाया है और इसके लिए IP69K, 10ATM, EN13319 और MIL-STD-810H सर्टिफिकेशन होने का दावा किया है। इसमें हेल्थ ट्रैकिंग के लिए अपग्रेडेड Bio Active सेंसर दिया गया है, जो ECG, ब्लड ऑक्सीजन मॉनिटरिंग, स्किन टेम्परेचर ट्रैकिंग, स्लीप एनालिसिस और नए स्लीप एपनिया फीचर को सपोर्ट करता है। यह वॉच यूजर्स को आस-पास के तेज शोर-शराबे के लेवल के बारे में भी नोटिफाई कर सकती है।
पावर के लिए इस वॉच में 800mAh की बैटरी दी गई है, जो WPC वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें LTE, Bluetooth 6.0, डुअल-बैंड Wi-Fi, NFC और डुअल-फ्रीक्वेंसी GPS जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
Samsung Galaxy Watch Ultra 2 और Samsung Galaxy Watch 9 की उपलब्धता और कीमत
Samsung ने कन्फर्म किया है कि चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में आज से प्री-ऑर्डर शुरू हो रहे हैं, जबकि बिक्री इस महीने के आखिर में कंपनी के ऑनलाइन स्टोर के जरिए शुरू होगी। Galaxy Watch 9 को चुने गए साइज के आधार पर ग्रेफाइट, क्रीम और सिल्वर कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा।
हालांकि, Samsung ने अभी तक दोनों स्मार्टवॉच की भारत में कीमत का ऐलान नहीं किया है। जैसे ही Samsung भारतीय बाजार के लिए आधिकारिक कीमत और उपलब्धता की जानकारी देगा, हम इस स्टोरी को अपडेट कर देंगे।
Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 25 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं और योगनिद्रा में चले जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से चतुर्मास लग जाते हैं और इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। शास्त्रों और पद्मपुराण के अनुसार, इस दिन व्रत में कुछ नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए अन्यथा व्रत का फल अधूरा रह सकता है।
देवशयनी एकादशी व्रत के नियम
देवशयनी एकादशी व्रत में क्या करना चाहिए?
देवशयनी एकादशी के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का खास महत्व बताया गया है। इसके पश्चात मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु को एकादशी के दिन पीले, पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत और नैवेद्य अवश्य अर्पित करना चाहिए। साथ ही, भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। ज्योतिष एक्सपर्ट पिनाकी मिश्रा बताते हैं कि तुलसी दल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
व्रती को श्रीहरि की पूजा के दौरान ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ द्वादशाक्षरी मंत्र का जप भी अवश्य करना चाहिए। वैष्णव परंपरा में इसे भगवान विष्णु के प्रमुख उपासना मंत्रों में से एक माना गया है।
ज्योतिष एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि निर्जला या निराहार व्रत करना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में क्षमता और स्वास्थ्य अनुसार फलाहार करना चाहिए। क्योंकि, व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों का संयम भी है।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता अनुसार अनुसार दान करें। साथ ही, इस व्रत में सेवा और दया का भी विशेष महत्व बताया गया है।
देवशयनी एकादशी व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?
भूलकर भी देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में एकादशी तिथि पर मांस, मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखें।
एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि को करने का विधान होता है। इस दिन नियमानुसार पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
एकादशी व्रत में चावल सहित धान्य का सेवन करना वर्जित माना गया है। इस नियम का परिवार के सदस्यों को भी ख्याल रखना चाहिए।
भूलकर भी किसी असहाय या अन्य व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। साथ ही, एकादशी के दिन अहिंसा जैसे कार्यों से भी बचना चाहिए।
कभी भी एकादशी के दिन कटु वचन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्रोध और असत्य से भी बचना चाहिए क्योंकि, यह व्रत केवल आहार का नहीं, बल्कि विचार और व्यवहार की शुद्धि का भी पर्व है।
Sawan 2026 Grahan: हिंदू धर्म में सावन का महीना विशेष स्थान रखता है। इस महीने की दो विशेषताएं हैं, एक चारों ओर हरियाली का मंजर रहता है और हर तरफ भगवान शिव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। माना जाता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस माह में भगवान शिव की विभिन्न रूपों में पूजा और उपवास किया जाता है। देश ही नहीं दुनिया में भी शिवभक्त सावन के महीने का इंतजार करते हैं। इसी महीने में अमरनाथ यात्रा होती है और कांवड़िये कांवड़ भरकर महादेव का अभिषेक करते हैं।
साल 2026 में भोलेनाथ का प्रिय महीना बहुत खास माना जा रहा है। इस माह में कई ग्रहों का गोचर होगा, कई शुभ योग बनेंगे और 15 दिनों के अंतराल पर दो-दो ग्रहण भी लगेंगे। जी हां, इस साल का अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण सावन के महीने में ही लगेगा। सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, जबकि चंद्र ग्रहण श्रावणी पूर्णिमा को रक्षा बंधन के दिन होगा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या दो ग्रहण की वजह से महा देव की पूजा पर असर होगा, या व्रत और त्योहारों पर इसका क्या प्रभाव होगा?
पंडित जी से जानें इस दुविधा का समाधान
हिंदू पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण लगेगा, जबकि दूसरा 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण होगा। अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम ने न्यूज 18 को बताया कि इस वर्ष लगने वाले दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। शास्त्रों के अनुसार, जिस ग्रहण का दृश्य भारत में नहीं होता, उसका सूतक काल मान्य नहीं होता। लेकिन ग्रहण के दौरान सावधानी रखनी चाहिए। दूसरी तरफ इन ग्रहणों का भारत में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, मंदिरों की पूजा व्यवस्था, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक या सावन सोमवार के व्रत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
नहीं रुकेंगे पूजा-पाठ और खुले रहेंगे मंदिर
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी संशय के भगवान शिव की नियमित पूजा, अभिषेक और व्रत कर सकते हैं। मंदिरों के कपाट भी सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और पूजा-पाठ की सभी धार्मिक गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेंगी।
धार्मिक ग्रंथों में ग्रहण काल के दौरान विशेष नियमों का पालन करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन यह नियम मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर लागू होते हैं, जहां ग्रहण दिखाई देता है। भारत में ग्रहण अदृश्य रहने के कारण सूतक नहीं लगेगा और किसी भी प्रकार का धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
शिव आराधना अत्यंत शुभ
पंडित कल्कि राम का कहना है कि सावन का पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ सोमवार का व्रत रखें, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
Redmi Note 17 को चीन में लॉन्च हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन अब इसकी भारत में लॉन्चिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ दिनों में सामने आए कई लीक्स में इसकी संभावित लॉन्च डेट से लेकर सॉफ्टवेयर सपोर्ट तक की जानकारी सामने आई है। अब, एक और जानकारी से इसकी कीमत का भी पता चला है, जिससे यह अंदाजा लगाना आसान हो गया है कि Xiaomi का अगला Redmi फ़ोन भारतीय मार्केट में किस रेंज में आ सकता है।
हालांकि, Xiaomi के सब-ब्रांड ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन ताजा लीक से संकेत मिलता है कि इसके लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब चलिए जानते हैं अपकमिंग Redmi Note 17 से जुड़ी अब तक सामने आई सभी अहम जानकारियां।
Redmi Note 17 की कीमत और स्पेसिफिकेशन्स (लीक जानकारी)
टिपस्टर योगेश बरार के अनुसार, Redmi Note 17 में Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट और Android 16 पर आधारित HyperOS 3 होने की संभावना है। इसके अलावा, कहा जा रहा है कि चीनी स्मार्टफोन कंपनी लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट देने की योजना बना रही है, जिसमें चार बड़े Android अपडेट और पांच साल तक सिक्योरिटी पैच शामिल होंगे। कैमरे की बात करें तो, इस डिवाइस में 50MP का रियर कैमरा और सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा होने की पूरी उम्मीद है।
लीक हुई दूसरी जानकारियों में LPDDR4X मेमोरी और UFS 2.2 स्टोरेज का जिक्र है। हालांकि, Xiaomi ने अभी तक इनमें से किसी भी स्पेसिफिकेशन की पुष्टि नहीं की है, इसलिए इन्हें हार्डवेयर की पक्की जानकारी के बजाय शुरुआती लीक के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
Redmi Note 17 की कीमत और लॉन्च डेट (लीक)
टिपस्टर योगेश बरार ने X पर नई जानकारी शेयर की है, जिससे पता चलता है कि भारत में Redmi Note 17 की शुरुआती कीमत 30,000 रुपये से ज्यादा हो सकती है। अगर यह जानकारी सही है, तो उम्मीद है कि इसके एंट्री-लेवल मॉडल में 6GB RAM और 128GB स्टोरेज मिलेगी। एक और लीक, जो टिपस्टर अभिषेक यादव की तरफ से आया है, बताता है कि इसे भारत में 6 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। टिपस्टर अभिषेक के मुताबिक, यह स्मार्टफोन 11 अगस्त से बिक्री के लिए उपलब्ध हो सकता है।
बता दें कि पहले आई रिपोर्ट्स से पता चला था कि भारतीय खरीदारों को इस फोन का कोई अलग वर्जन नहीं मिलेगा। इसके बजाय, उम्मीद है कि Redmi Note 17 में वही हार्डवेयर और फीचर्स होंगे जो हाल ही में चीन में लॉन्च किए गए थे।
Trump Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय दवा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगर यह योजना लागू होती है तो 2029 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लग सकता है। हालांकि, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अभी सरकार का आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
ट्रंप का पूरा प्लान क्या है?
21 जुलाई को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
इसके बाद अगस्त 2028 से 100% टैरिफ लागू होगा। फिर अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। ट्रंप चाहते हैं कि दवा कंपनियां अपनी फैक्टरी अमेरिका में लगाएं। इसी मकसद से यह कदम उठाया जा रहा है।
ट्रंप ऐसा क्यों करना चाहते हैं?
यह फैसला अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत दवा उत्पादन को दोबारा अपने देश में लाया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
इसी वजह से अमेरिका अब दवा कंपनियों को स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।
भारत की कंपनियों पर कितना असर पड़ेगा?
भारत हर साल अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं भेजता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का होता है। अमेरिका में बिकने वाली करीब 40% से 50% जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियां सप्लाई करती हैं।
फिलहाल भारतीय कंपनियों की कमाई पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। उनके पास करीब दो साल का समय है। इस दौरान वे अमेरिका में निवेश बढ़ा सकती हैं, सप्लाई चेन बदल सकती हैं या किसी राहत के लिए बातचीत कर सकती हैं। वैसे भी भारत की कई बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से प्लांट हैं।
सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अभी यह साफ नहीं है कि टैरिफ सिर्फ तैयार दवाओं पर लगेगा या फिर API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) पर भी लागू होगा। अगर API भी दायरे में आया तो कंपनियों की लागत और मुनाफे पर ज्यादा असर पड़ सकता है। इसलिए इंडस्ट्री अंतिम नियमों का इंतजार कर रही है।
एक्सपर्ट क्या मानते हैं?
Mirae Asset Sharekhan के रिसर्च एनालिस्ट थॉमस वी. अब्राहम का कहना है कि बाजार अभी अंतिम नियमों का इंतजार कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत की ज्यादातर बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। ऐसे में दो साल का समय नई शर्तों के हिसाब से खुद को तैयार करने के लिए काफी हो सकता है।
वहीं, Indian Pharmaceutical Alliance के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में 40 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी चला रही हैं। इससे वहां रोजगार भी मिलता है और दवाओं की सप्लाई चेन मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री दोनों देशों की सरकारों के साथ बातचीत जारी रखेगी।
दूसरी ओर, Entod Pharmaceuticals के CEO निखिल मसूरकर का मानना है कि भारतीय दवा कंपनियों को अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें मध्य पूर्व, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों में भी तेजी से विस्तार करना चाहिए।
दबाव बनाने की रणनीति?
कुछ एनालिस्टों का यह भी मानना है कि ट्रंप का यह ऐलान भारत के साथ बेहतर ट्रेड डील कराने के लिए दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका में 90% से ज्यादा प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं। अगर इन पर 200% टैरिफ लगा तो दवाएं महंगी हो जाएंगी। इसका बोझ अमेरिकी मरीजों पर पड़ेगा। चुनावी माहौल में यह फैसला ट्रंप के लिए भी आसान नहीं होगा।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
DDA New Housing Scheme: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने घर खरीदने की चाहत रखने वालों को एक बड़ा तोहफा दिया है। प्राधिकरण ने एक विशेष हाउसिंग स्कीम कर्मजीवी आवास योजना 2026 की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कामकाजी पेशेवरों के लिए दिल्ली में घर खरीदना आसान और किफायती बनाना है।
कर्मजीवी आवास योजना 2026 को खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो देश के निर्माण और आर्थिक विकास में लगातार अपना योगदान दे रहे हैं। सरकारी सेवाओं में कार्यरत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ-साथ कॉर्पोरेट, बिजनेस, उद्यमी और प्रोफेशनल सेक्टर से जुड़े कामकाजी पेशेवर इस योजना का फायदा उठा सकते हैं।
क्या है DDA की नई हाउसिंग स्कीम? ये रहे सारे डिटेल्स
इस योजना के तहत नरेला के पॉकेट-11, सेक्टर A1-A4 में स्थित 1200 से अधिक रेडी-टू-मूव फ्लैटों पर फ्लैट 25 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रही है। 25% डिस्काउंट के बाद 1 BHK फ्लैट की शुरुआती कीमत ₹33.40 लाख, 2 BHK फ्लैट की शुरुआती कीमत ₹75.55 लाख और 3 BHK फ्लैट की शुरुआती कीमत ₹1.065 करोड़ तय की गई है।
योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 24 जुलाई से हो रही है। वहीं, फ्लैटों की बुकिंग 15 अगस्तसे डीडीए आवास पोर्टल पर पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर खोली जाएगी। यह आवासीय परियोजना नरेला सब-सिटी के पॉकेट-11 (सेक्टर A1-A4) में स्थित है। ये इलाका दिल्ली के तेजी से उभरते ग्रोथ कॉरिडोर में शामिल है। यह पूरा परिसर मामूरपुर जंगल के सामने और हरे-भरे माहौल के बीच बना हुआ है।
कनेक्टिविटी के लिहाज से कैसा है ये इलाका?
डीडीए के मुताबिक कनेक्टिविटी के लिहाज से यह जगह काफी बेहतर है। यह प्रोजेक्ट अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER)-I से सिर्फ 500 मीटर और जीटी करनाल रोड से 1.1 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा आने वाले मेट्रो स्टेशन से यह करीब 1.2 किमी, प्रस्तावित RRTS स्टेशन से 1.9 किमी, नरेला स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से 2 किमी, आगामी एजुकेशन हब से 5 किमी, UER-II से 6.15 किमी और आगामी इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स स्टेडियम से 9.2 किमी की दूरी पर स्थित है।
नरेला सब-सिटी की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा डीडीए के हालिया बिक्री आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। डीडीए की प्रेस रिलीज के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में डीडीए ने कुल 1284 फ्लैट बेचे। इससे ₹1020 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इनमें से अकेले नरेला सब-सिटी से ही 1153 फ्लैटों की बिक्री हुई। ये कुल बिक्री का करीब 90 प्रतिशत है।
टैक्स छूट की भी व्यवस्था?
खरीदारों की सहूलियत के लिए इस योजना में कई छूट और विशेष नियम दिए गए हैं। योजना के तहत दिए जा रहे सभी फ्लैट फ्रीहोल्ड आधार पर हैं। अगर किसी आवेदक के पास पहले से कोई आवासीय संपत्ति है तब भी वह इस योजना में आवेदन कर सकता है। इसके अलावा डीडीए के तय मानकों के अनुसार पास-पास मौजूद दो फ्लैटों को आपस में जोड़ने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी बुकिंग प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और खरीदार खरीदारी से पहले सैंपल फ्लैट्स का निरीक्षण भी कर सकते हैं।
इच्छुक आवेदक इस योजना, पात्रता मानदंड, मूल्य, बुकिंग प्रक्रिया और अन्य नियम-शर्तों की विस्तृत जानकारी के लिए डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट www।dda।gov।in या डीडीए आवास पोर्टल (https://eservices।dda।org।in) पर जा सकते हैं। किसी भी तरह की सहायता के लिए डीडीए के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-110-332 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
India completed the nationwide rollout of E20 petrol in April last year, making it the standard grade of petrol sold at fuel stations across the country. E20 contains 20 percent ethanol and 80 percent petrol, replacing the lower ethanol blends that were sold previously.
The transition has raised several questions among vehicle owners about compatibility, fuel efficiency, maintenance, warranties and long-term reliability. We separate the facts from the misconceptions and answer the key questions around E20.
1. What is E20 petrol and why has India switched to it?
E20 is fuel blended with 20 percent ethanol and 80 percent petrol. Ethanol is a biofuel produced from agricultural feedstocks such as sugarcane, maize and surplus food grains. India introduced the Ethanol Blended Petrol (EBP) Programme in 2003 with E5 petrol, and while the blended percentage kept varying for a while, it was eventually increased to E10 before completing the nationwide rollout of E20 in 2025, five years ahead of the planned implementation. According to the government, the programme aims to reduce dependence on imported crude oil, improve energy security, lower emissions and create an additional market for agricultural produce.
2. Can I use E20 fuel in my car or bike?
New petrol cars and two-wheelers sold in India today are compatible with E20 petrol. Under the government’s roadmap, vehicle manufacturers were required to make new petrol models manufactured from April 2023 compatible with E20.
Vehicles manufactured before April 2023 were designed for lower ethanol blends, so compatibility may vary depending on the model and year of manufacturing. However, some brands state that they had E20 material compliance before 2023, for a list click here.
3. How do I know if my car is E20 compatible?
The easiest way is to check your vehicle’s fuel flap or the owner’s manual or contact the manufacturer’s authorised dealership. As part of the government’s E20 roadmap, manufacturers progressively introduced E20-compatible petrol vehicles from 2023 onwards. However, compatibility can vary depending on the model and year of manufacture, so owners should not assume that every petrol vehicle is fully E20-compatible.
4. Can E20 damage older engines or fuel-system components?
Concerns about E20 mainly relate to older vehicles that were not originally designed for higher ethanol blends. While ethanol has not been found to significantly directly affect metal fuel-system components, prolonged exposure to E20 can accelerate wear in some older rubber and plastic parts such as fuel hoses, seals, O-rings, gaskets and certain fuel pipes if they are made from materials that are not ethanol compatible.
Before approving E20, ARAI tested metals, elastomers and plastics commonly used in fuel systems. The study found no significant corrosion of metal components, but certain rubber compounds and plastics used in older vehicles showed greater deterioration than with E10 fuel. These findings prompted manufacturers to use ethanol-compatible materials in newer vehicles. Thus, owners of older vehicles should keep up with regular servicing and follow the manufacturer’s recommended maintenance schedule, increasing the inspection frequency if damage is suspected.
5. Does E20 reduce fuel efficiency?
Yes. E20 fuel generally returns lower fuel efficiency than petrol with a lower ethanol content because ethanol contains less energy than petrol. The exact reduction varies depending on the vehicle, engine and calibration.
E20 vs E10 mileage test results
Creta N Line
Dzire (BS 6)
Polo GT TSI
Dzire (BS 4)
Registration year
2024
2024
2017
2016
Average speed
17.8kph
20.25kph
18.0
19.3
Kpl on E20
10.59
14.24
9.13
9.8
Kpl on E10
12.12
14.81
9.63
11.19
Kpl variance
1.53
0.57
0.50
1.39
% variance
-12.62
-3.84
-5.19
-12.42
ARAI estimates a fuel efficiency drop of 1-6 percent with E20, while some manufacturers put it closer to 7-8 percent. In Autocar India’s real-world testing, both newer E20-compatible cars and older pre-E20 vehicles recorded a measurable drop in mileage when compared with an equivalent E10 blend. Among the newer cars, the Maruti Suzuki Dzire recorded a 3.8 percent drop, while the Hyundai Creta N Line saw a 12.6 percent decline.
Among older BS4-era cars, the Volkswagen Polo GT TSI posted a 5.2 percent drop, while the older Maruti Suzuki Dzire recorded a mileage drop of 12.4 percent.
The results also showed that there is no single figure applicable to every vehicle. Factors such as engine calibration and compression ratio all influence fuel efficiency, meaning some vehicles adapt better to E20 than others.
6. Does E20 improve performance or reduce emissions?
Octane rating test results
Fuel type
RON result
Regular E20 petrol
98.2 RON
XP95
98.8 RON
Yes, but not in a way that most motorists are likely to notice. E20 has a higher-octane rating than regular petrol, which improves resistance to engine knocking and can benefit engines designed to take advantage of higher-octane fuel.
The government says E20 aims to lower emissions by replacing a portion of petrol with domestically produced ethanol which is a renewable fuel. For most motorists, however, the most noticeable effect of switching to E20 is likely to be a small drop in mileage rather than a change in vehicle performance.
7. Is E20’s water contamination issue a real problem?
Image credit – Rushlane
Ethanol is hygroscopic, meaning it has the capability to absorb moisture. As a result, E20 is more susceptible to water contamination if excess moisture enters the fuel during storage or handling. In severe cases, this can lead to phase separation, where the ethanol and water separate from the petrol, affecting fuel quality.
Some petrol pump operators have raised concerns that existing underground storage tanks, particularly during the monsoon or in coastal areas, could be more prone to moisture ingress, increasing the risk of phase separation. However, the government and the Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) says that there is no evidence linking E20 itself to widespread fuel contamination or vehicle failures.
8. Will using E20 affect my vehicle’s warranty?
For most owners, no. Vehicle manufacturers have said that using E20 petrol will not affect the warranty of their vehicles, and valid warranties will continue to be honoured. The government, SIAM and several manufacturers have stated that vehicles continue to be covered under their standard warranty terms when fuelled with E20, for a full list click here. SIAM has also said that OEMs will honour the warranty committed to customers for E20 usage, and that insurance claims will remain unaffected.
9. Why isn’t E20 petrol cheaper than regular petrol?
Although E20 contains 20 percent ethanol, it is not cheaper than regular petrol because ethanol currently costs more to procure and blend than petrol under prevailing market conditions. The cost of ethanol procurement, tax, transportation, blending and distribution offsets any potential saving from replacing a portion of petrol with domestically produced ethanol.
Any savings from lower crude oil imports are realised at the national level rather than by consumers through lower pump prices.
10. Why can’t I still buy E10 or pure petrol?
Because by policy E20 is now India’s standard petrol. Following the nationwide rollout of the Ethanol Blending Programme, oil companies have standardised regular petrol and premium 95-octane petrol to an E20 blend. Maintaining parallel supplies of E10 and E20 would require separate storage, transportation and dispensing infrastructure, making nationwide distribution significantly more complex.
As a result, motorists can no longer choose between E10 and E20 at regular fuel stations. The only exception is 100-octane petrol, such as IndianOil XP100 and HP Power100, which remains effectively ethanol-free because it is a niche fuel sold in limited volumes. For most vehicle owners, however, E20 is now the only petrol available.
11. Is the government planning to increase ethanol blending beyond E20?
Not yet, but the groundwork has begun. While the government has said no decision has been taken to mandate petrol with more than 20 percent ethanol, it has begun preparing the regulatory framework for higher blends.
In May 2026, the Bureau of Indian Standards (BIS) notified fuel quality standards for E22, E25, E27 and E30 petrol, indicating that the government is laying the groundwork for future adoption. It has also proposed recognising E85 and E100 fuels under the Central Motor Vehicles Rules.
Separately, the government has tasked the Automotive Research Association of India (ARAI) with studying the impact of E25 petrol on existing E10- and E20-compatible vehicles, including its effect on fuel efficiency, durability, emissions and engine performance under long-term use.
However, any move beyond E20 will require extensive testing and consultation with vehicle manufacturers, fuel companies and research agencies to assess engine durability, emissions and fuel-system compatibility before it is introduced.
12. What should owners of older cars do now?
If your vehicle is not certified as E20-compatible, it does not necessarily mean it will experience immediate problems. However, owners should follow the manufacturer’s guidance, keep up with regular servicing and replace worn fuel-system components as required. It would also be prudent to increase the frequency of inspection of your vehicles fuel system to ensure there is no corrosive damage and catch it before it gets acute.
If you own a classic car, an older imported vehicle or a high-performance model designed for lower ethanol blends, using ethanol-free 100-octane petrol may be worth considering.
13. Can I convert my vehicle to run on E20 fuel?
Yes, but official upgrade programmes are currently limited and while a few manufacturers, like Royal Enfield and Maruti Suzuki, had mentioned a plan for these earlier, they don’t have much to say for now. In a recent government press conference that aimed to quell the E20 backlash, Maruti stated that the kits are for R&D purpose only.
Theoretically, it’s possible to replace critical components susceptible to E20 damage with those designed to handle the fuel – especially if your vehicle is still in production – and if you feel the need to, you can go ahead and have parts like fuel lines, fuel pump and gaskets replaced but by your authorised workshops only.
So, should you be worried about E20 petrol?
Not worried, but alert. Modern petrol cars and bikes designed or updated for E20 are engineered to run on the fuel without major issues, and extensive testing by the government, research agencies and manufacturers found no evidence of widespread reliability concerns.That said, E20 is not without trade-offs. Most motorists should expect a small reduction in fuel efficiency.
For owners of older vehicles, it would be wise to pay closer attention to fuel-system maintenance.
PM Awas Yojana: केंद्र सरकार ने संसद में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की ताजा प्रगति रिपोर्ट दी है। इसमें गांव और शहर, दोनों योजनाओं की स्थिति बताई गई है। सरकार के मुताबिक, जुलाई 2026 तक PMAY-Gramin (PMAY-G) के तहत 3.10 करोड़ से ज्यादा और PMAY-Urban (PMAY-U) के तहत 99.07 लाख से ज्यादा घर बनकर लाभार्थियों को दिए जा चुके हैं।
गांवों में कितने घर बने?
21 जुलाई को लोकसभा में सरकार ने बताया कि 4.18 करोड़ घरों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 3.92 करोड़ घरों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 3.10 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए लक्ष्य के मुकाबले करीब 1.08 करोड़ घर अभी बनने बाकी हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, FY22 से FY26 के बीच केंद्र सरकार ने PMAY-G के लिए ₹1,34,242.45 करोड़ जारी किए। वहीं, FY27 के लिए शुरुआती तौर पर ₹41,924.60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राज्यों को दिए जाने वाले लक्ष्य के हिसाब से इस रकम में बदलाव भी हो सकता है।
घर के साथ और क्या मिलता है?
PMAY-G में सिर्फ पक्का घर नहीं दिया जाता। दूसरी सरकारी योजनाओं का फायदा भी साथ में जोड़ा जाता है।
16 जुलाई तक 3.08 करोड़ घरों में शौचालय बनाए जा चुके हैं। 2.43 करोड़ घरों को पानी का कनेक्शन मिला है। 3.07 करोड़ घरों में बिजली पहुंच चुकी है। वहीं, 2.90 करोड़ परिवारों को LPG कनेक्शन भी दिया गया है। इसके अलावा 1.35 करोड़ परिवारों को स्वयं सहायता समूह (SHG) से जोड़ा गया है।
शहरों में भी सिर्फ घर बनाकर नहीं दिया जाता। घर के साथ पानी, बिजली, सड़क और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाता है।
लाभार्थियों का चयन कैसे होता है?
दोनों योजनाओं में पहले इच्छुक को घर के लिए आवेदन करना पड़ता है। फिर सरकार यह जांचती है कि आवेदक योजना की सभी शर्तें पूरी करता है या नहीं।
PMAY-G में गांव के जरूरतमंद परिवारों की पहचान सरकारी सर्वे के आधार पर की जाती है। देखा जाता है कि परिवार के पास पक्का घर है या नहीं और वह योजना की पात्रता में आता है या नहीं। पात्र पाए जाने पर उसका नाम लाभार्थी सूची में शामिल किया जाता है।
वहीं, PMAY-U में राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश पहले अपने इलाके में घरों की जरूरत का आकलन करते हैं। इसके बाद परियोजनाएं बनाकर केंद्र सरकार को भेजी जाती हैं। आवेदन करने वाले लोगों के दस्तावेज और पात्रता की जांच होती है। जो लोग सभी शर्तें पूरी करते हैं, उन्हें योजना का लाभ दिया जाता है।
PM Awas Yojana के लिए आवेदन कैसे करें?
अगर गांव में रहते हैं (PMAY-G)
सबसे पहले ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में संपर्क करें।
अगर आपके इलाके में Awaas+ सर्वे चल रहा है, तो उसमें अपना नाम दर्ज कराएं।
आधार कार्ड, बैंक खाते और दूसरे जरूरी दस्तावेज जमा करें।
पात्रता की जांच के बाद आपका नाम लाभार्थी सूची में जोड़ा जाएगा।
मंजूरी मिलने पर घर बनाने के लिए किस्तों में पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा।
अगर शहर में रहते हैं (PMAY-U 2.0)
PMAY-U 2.0 की वेबसाइट या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर आवेदन करें।
पहले अपनी पात्रता जांचें।
इसके बाद आवेदन फॉर्म भरें।
आधार, आय प्रमाण पत्र, बैंक खाते और दूसरे जरूरी दस्तावेज जमा करें।
आवेदन जमा होने के बाद उसकी जांच होगी।
पात्र पाए जाने पर योजना का लाभ मिलेगा और आवेदन की स्थिति ऑनलाइन भी देख सकेंगे।
घर बनने में कितना समय लगता है?
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के मुताबिक, शहरों में एक आवास परियोजना पूरी होने में आमतौर पर 12 से 36 महीने लगते हैं। यह जमीन की उपलब्धता, जरूरी मंजूरियों, फंडिंग और परियोजना के आकार पर निर्भर करता है।
सरकार का कहना है कि मंजूर घर तय समय पर पूरे हों, इसके लिए लगातार निगरानी की जाती है। नियमित समीक्षा बैठकें होती हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रगति देखी जाती है। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की फील्ड विजिट भी कराई जाती है।
असम से पिछले 10 वर्षों में कितने अवैध विदेशी नागरिकों को उनके देशों में वापस भेजा गया है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अब सामने आ गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक असम विधानसभा में सरकार ने जानकारी दी है कि पिछले 10 सालों में राज्य से करीब 2100 अवैध विदेशी नागरिकों को निर्वासित, निष्कासित या वापस भेजा गया है। बाहर निकाले गए इन अवैध विदेशियों में सबसे बड़ी संख्या बांग्लादेशी नागरिकों की है। ये संख्या 2023 है।
असम समझौता क्रियान्वयन मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी साझा की। कांग्रेस विधायक अब्दुल रहीम अहमद के प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि 2016 से लेकर 30 जून 2026 तक कुल 2089 अवैध विदेशी नागरिकों को राज्य से बाहर निकाला गया है। इनमें बांग्लादेश के 2023 नागरिकों के अलावा म्यांमार के 39 और नाइजीरिया के 18 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान, यूक्रेन और रूस से 2-2 नागरिकों को जबकि पाकिस्तान, केन्या और युगांडा से 1-1 नागरिक को उनके देश वापस भेजा गया है।
सबसे ज्यादा कार्रवाई साल 2025 में हुई
अगर साल-दर-साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस 10 साल के समय में सबसे ज्यादा कार्रवाई वर्ष 2025 में हुई। पिछले साल 1811 लोगों को वापस भेजा गया। इनमें नाइजीरिया के एक नागरिक को छोड़कर सभी अवैध विदेशी बांग्लादेश से थे। वहीं चालू वर्ष में 30 जून 2026 तक 263 घुसपैठियों को वापस भेजा जा चुका है। ये पिछले एक दशक में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। इनमें से 261 बांग्लादेश के और 2 रूस के नागरिक हैं।
इसी दौरान राइजर दल के विधायक अखिल गोगोई के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने धार्मिक आंकड़ों का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 31 मई 2026 तक राज्य में कुल 172673 अवैध विदेशी चिह्नित किए गए हैं। इन चिह्नित विदेशियों में 111414 मुस्लिम, 61189 हिंदू और बाकी ईसाई या दूसरे धर्मों के अनुयायी शामिल हैं।
कार्रवाई के कानूनी आधार पर बात करते हुए अतुल बोरा ने स्पष्ट किया कि अवैध बांग्लादेशियों को वापस भेजने का काम गृह मंत्रालय के 2 मई 2025 के पत्र में तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। वहीं सीमावर्ती देश में घुसपैठियों का निष्कासन ‘इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) एक्ट, 1950’ के प्रावधानों के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निष्कासन और वापस भेजने की यह पूरी प्रक्रिया देश के मौजूदा कानूनों के तहत ही पूरी की जा रही है।
असमिया व्यक्ति की परिभाषा क्या है?
इसके अलावा विधानसभा में जब मंत्री से यह पूछा गया कि असमिया व्यक्ति की परिभाषा क्या है, तो उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विभिन्न राष्ट्रवादी संगठनों और हितधारकों के साथ चर्चा जारी है। सरकार सभी वर्गों की राय, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिप्लब कुमार शर्मा समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सही समय पर निर्णय लेगी।
आपको बता दें कि यह समिति 1985 के असम समझौते की धारा 6 को लागू करने की सिफारिशों के लिए 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा गठित की गई थी। इसका उद्देश्य मूल असमिया आबादी की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान को सुरक्षा देना है। मंत्री ने बताया कि सेवानिवृत्त जज की इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार ने आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
France Social Media Ban: फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है, जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। यह नियम इस साल सितंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की उम्र सीमा क्या है? News18 की पूरी जानकारी
फ्रांस में सोशल मीडिया बैन
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के समर्थन से लागू किए जा रहे इस नियम के तहत, फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की तैयारी की है। इसे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए डिजिटल दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस बैन की खास संरचनात्मक, कानूनी और ऑपरेशनल डिटेल्स इस प्रकार हैं:
सितंबर 2026 (पहला चरण): सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के नए अकाउंट बनाने पर रोक लगानी होगी। सभी नए रजिस्ट्रेशन पर अनिवार्य रूप से उम्र की पुष्टि (age-verification) करने वाले कंट्रोल लागू होंगे।
जनवरी 2027 (दूसरा चरण): यह पाबंदी पहले से मौजूद सभी अकाउंट्स पर भी लागू होगी। सोशल मीडिया कंपनियों को 15 साल से कम उम्र के यूजर्स के सभी एक्टिव अकाउंट्स को हटाना या पूरी तरह से सस्पेंड करना होगा।
TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube पर सख्ती
TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म को उम्र की पुष्टि करने के लिए सख्त नियम लागू करने होंगे। इन टूल्स की जांच और मंजूरी फ्रांस के प्राइवेसी और डेटा रेगुलेटर द्वारा की जाएगी।
बता दें कि फ्रांस के डिजिटल मामलों का मंत्रालय उन कमर्शियल सोशल नेटवर्किंग सेवाओं की एक खास सूची बना रहा है जिन पर प्रतिबंध लागू होगा। इसमें ऐसे प्लेटफॉर्म पर ध्यान दिया जा रहा है जिनके एल्गोरिदम बहुत ज्यादा लत लगाने वाले हैं।
हालांकि, इस प्रतिबंध में साफ तौर पर नॉन-कमर्शियल डिजिटल रिसोर्स को शामिल नहीं किया गया है। 15 साल से कम उम्र के बच्चे अभी भी ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया (जैसे Wikipedia), एजुकेशनल टूल्स और साइंटिफिक डायरेक्टरी का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी और जांच की जिम्मेदारी फ्रांस के ऑडियोविजुअल और डिजिटल कम्युनिकेशन रेगुलेटर Arcom को दी जाएगी।
इस डिजिटल बैन के साथ-साथ, नए कानून में एक और बड़ा फैसला शामिल किया गया है। इसके तहत फ्रांस के सभी हाई स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की नीति तुरंत लागू की जाएगी।
क्यों लाया गया सोशल मीडिया बैन कानून?
यह कानूनी कदम फ्रांस की हेल्थ वॉचडॉग की एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। इस रिपोर्ट में पता चला है कि 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 90% बच्चे रोजाना स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, और इनमें से आधे से ज्यादा बच्चे दिन में पांच घंटे तक ऑनलाइन बिताते हैं।
ऐसे में कई फ्रांसीसी परिवारों ने बड़ी टेक कंपनियों पर एल्गोरिदम के जरिए बच्चों को ज्यादा समय तक ऑनलाइन रखने, गंभीर मानसिक तनाव, डिप्रेशन और युवाओं में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए मुकदम किए थे। साथ ही प्रोडक्ट की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं भी जताई थीं। जिसके बाद संसद में इस कानून को तेजी से आगे बढ़ाया गया।
दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा
ऑस्ट्रेलिया
न्यूनतम उम्र: 16 साल
दिसंबर 2024 में सख्त कानून पास किया गया। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को हटाना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यूनाइटेड किंगडम
न्यूनतम उम्र: 16 साल
देशभर में लागू होने वाला प्रतिबंध जनवरी 2027 से लागू किए जाने की योजना है।
फ्रांस
न्यूनतम उम्र: 15 साल
फ्रांस ने कानून पास कर दिया है। इसके तहत सितंबर 2026 से नए अकाउंट और जनवरी 2027 से पुराने अकाउंट भी इस नियम के दायरे में आएंगे।
स्पेन
न्यूनतम उम्र: 16 साल
16 साल से कम उम्र के लोगों की पहुंच सीमित करने के लिए सरकार ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की घोषणा की है।
ग्रीस और डेनमार्क
न्यूनतम उम्र: 15 साल / स्थानीय नियमों के अनुसार अलग-अलग
इन देशों की सरकारों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे नियम लागू करने की योजनाएं पेश की हैं।
यूरोपीय संघ (EU)
न्यूनतम उम्र: 13 से 16 साल
EU में सोशल मीडिया उम्र सीमा डिजिटल सर्विसेज एक्ट और GDPR जैसे नियमों के तहत तय होती है। हर देश डिजिटल उम्र की अपनी सीमा खुद तय करता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
न्यूनतम उम्र: 13 साल
यग COPPA (चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट) कानून के तहत नियंत्रित। इसके अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इकट्ठा करने के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है।