BCCI का बड़ा एक्शन: जानबूझकर नो-बॉल या खतरनाक बीमर फेंकी तो पूरे मैच से सस्पेंड होंगे गेंदबाज

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2026-27 घरेलू क्रिकेट सीजन शुरू होने से पहले खेल के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। सबसे अहम फैसला उन गेंदबाजों के लिए है जो जानबूझकर फ्रंट-फुट नो-बॉल फेंकते हैं। अब ऐसी गलती सिर्फ एक पारी तक सीमित सजा नहीं लाएगी, बल्कि दोषी गेंदबाज पूरे मैच में गेंदबाजी नहीं कर सकेगा।

 

बीसीसीआई ने ये संशोधित नियम सभी राज्य क्रिकेट संघों को भेज दिए हैं। इन बदलावों को अगले महीने शुरू होने वाली दलीप ट्रॉफी से लागू किया जाएगा। साथ ही अंपायरों और मैच रेफरी के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि नए नियमों को सही तरीके से लागू किया जा सके।

 

 

जानबूझकर नो-बॉल पर अब मैच भर की सजा

 

नए नियम के तहत यदि कोई गेंदबाज जानबूझकर फ्रंट-फुट नो-बॉल फेंकता है या ऐसी गेंद डालता है जो पिच पर ही नहीं गिरती, तो उसे पूरे मैच के बाकी हिस्से में गेंदबाजी करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

 

पहले ऐसे मामलों में गेंदबाज को केवल उसी पारी में गेंदबाजी से रोका जाता था। अब फैसला मैदान पर मौजूद दोनों अंपायर करेंगे कि नो-बॉल जानबूझकर डाली गई थी या नहीं। इसी तरह यदि कोई गेंदबाज जानबूझकर खतरनाक बीमर फेंकता है, तो उस पर भी यही सख्त कार्रवाई लागू होगी।

 

 

अब आखिरी ओवर बीच में नहीं रुकेगा

 

बीसीसीआई ने दिन के खेल की समाप्ति से जुड़े नियम में भी बदलाव किया है।

 

पहले यदि दिन के अंतिम निर्धारित ओवर में विकेट गिर जाता था, तो अंपायर उसी समय स्टंप्स घोषित कर सकते थे। नए नियम के अनुसार अब ऐसा नहीं होगा। अंतिम ओवर की सभी छह वैध गेंदें पूरी होने के बाद ही दिन का खेल समाप्त माना जाएगा।

 

इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई टीम नए बल्लेबाज को क्रीज पर आने से बचाने के लिए नियम का फायदा न उठा सके।

 

 

अब आखिरी पारी घोषित या फॉरफिट नहीं कर सकेंगी टीमें

 

बीसीसीआई ने अंतिम पारी से जुड़ा एक और अहम नियम बदला है।

 

अब किसी भी टीम को मैच की अंतिम पारी में डिक्लेयर करने या फॉरफिट करने की अनुमति नहीं होगी। बोर्ड का मानना है कि पहले इस प्रावधान का कुछ मामलों में कृत्रिम परिणाम हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जिससे खेल की निष्पक्षता प्रभावित होती थी।

 

विकेटकीपर और कोच के लिए भी बदले नियम

 

घरेलू वनडे क्रिकेट में अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान टीम के हेड कोच मैदान पर जाकर खिलाड़ियों से बातचीत कर सकेंगे। माना जा रहा है कि भविष्य में इसी तरह का नियम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी लागू हो सकता है।

 

वहीं विकेटकीपर्स को भी थोड़ी राहत मिली है। अब उन्हें सिर्फ गेंद छोड़े जाने के क्षण पर ही अपने दस्ताने पूरी तरह स्टंप्स के पीछे रखने होंगे। पहले गेंदबाज के रन-अप शुरू होते ही यह नियम लागू हो जाता था, जिससे कई बार तकनीकी कारणों से नो-बॉल या अन्य विवाद पैदा हो जाते थे।

 

दलीप ट्रॉफी से पहले होगी अधिकारियों की ट्रेनिंग

 

घरेलू सीजन की शुरुआत अगस्त में दलीप ट्रॉफी से होगी। उससे पहले सभी राज्य क्रिकेट संघ अंपायरों और मैच रेफरी को नए नियमों की जानकारी दे रहे हैं।

 

बीसीसीआई अधिकारियों का मानना है कि सीजन शुरू होने से पहले पर्याप्त समय है, इसलिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए सभी मैच अधिकारियों को नए नियमों से पूरी तरह परिचित कराया जाएगा।

 

क्या बदलेंगे ये नियम?

 

इन संशोधनों का मकसद सिर्फ सख्ती बढ़ाना नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट को अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाना है। जानबूझकर की जाने वाली गलतियों पर कड़ी सजा, अंतिम ओवर और अंतिम पारी से जुड़े बदलाव, साथ ही तकनीकी नियमों में सुधार भविष्य में भारतीय घरेलू क्रिकेट को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

 

CJP Protest: पेपर कैंसिल हुआ तो खूब रोया पर… NEET में ऑल इंडिया रैंक 1 लाने वाले आर्यन गुप्ता ने विवाद के बीच क्या कहा?

NEET UG 2026 का पेपर रद्द होने के बाद देशभर में विरोध-प्रदर्शन और बहस का दौर शुरू हो गया था। इसी बीच दोबारा हुई परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल करने वाले पंजाब के छात्र आर्यन गुप्ता का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने परीक्षा रद्द होने के बाद अपनी मानसिक स्थिति, दोबारा तैयारी और सफलता तक के सफर को लेकर खुलकर बात की। आर्यन ने बताया कि शुरुआत में यह फैसला उनके लिए बेहद मुश्किल था और वह इससे काफी भावुक हो गए थे। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने हालात को स्वीकार करते हुए खुद को संभाला और पूरी ताकत के साथ दोबारा तैयारी में जुट गए।

उनका कहना है कि कठिन परिस्थितियों में नकारात्मक सोच के बजाय लक्ष्य पर फोकस करना ही सबसे सही रास्ता होता है। साथ ही उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को देते हुए भविष्य के अभ्यर्थियों के लिए भी एक अहम संदेश साझा किया।

22 लाख छात्रों के साथ भी यही हुआ

परिणाम घोषित होने के बाद आर्यन ने कहा कि शुरुआत में उन्हें यह फैसला काफी गलत और अन्यायपूर्ण लगा था। उन्होंने कहा, “शुरुआत में मैं बहुत निराश था। पेपर रद्द होने पर मैं खूब रोया। लेकिन बाद में मुझे लगा कि यह सिर्फ मेरे साथ नहीं हुआ है। सभी छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी है, इसलिए मेरे पास भी खुद को बेहतर साबित करने का एक और मौका है।”

अगले ही दिन से फिर शुरू कर दी तैयारी

आर्यन ने बताया कि उन्होंने ज्यादा समय निराशा में नहीं बिताया। अगले ही दिन से दोबारा पढ़ाई शुरू कर दी और हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। उनका कहना है कि लगातार मेहनत और सकारात्मक सोच ने ही उन्हें देश में पहला स्थान दिलाया।

माता-पिता, बड़े भाई और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय

आर्यन ने कहा कि उनकी इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता, बड़े भाई और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता डॉक्टर हैं और उन्होंने बचपन से ही उन्हें मजबूत आधार दिया। वहीं, कठिन समय में परिवार ने भावनात्मक रूप से उनका पूरा साथ दिया, जिससे वह दोबारा तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके।

NEET अभ्यर्थियों को दी खास सलाह

आर्यन ने भविष्य में NEET देने वाले छात्रों को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने शिक्षकों पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि उनके पास वर्षों का अनुभव और सही मार्गदर्शन होता है।

CJP Protest: NEET में ऑल इंडिया रैंक 2 लाने वाले पांशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर

Anthem Biosciences Share Price : कमजोर नतीजों के बाद 2% से ज्यादा टूटा यह फार्मा शेयर, फिर भी ब्रोकरेज बुलिश, जानिए वजह

Anthem Biosciences Share Price : आज बुधवार के कारोबारी सत्र में एंथम बायोसाइंसेज के शेयरों में 2% से ज़्यादा की गिरावट आई है। कंपनी ने जून तिमाही के कमज़ोर नतीजे घोषित किए है। इसका असर इस शेयर पर देखने को मिला है। पहली तिमाही में कंपनी के CRDMO और स्पेशलिटी इंग्रीडिएंट्स बिज़नेस के सुस्त प्रदर्शन के कारण रेवेन्यू और मुनाफ़े में सालाना आधार पर गिरावट देखने को मिली है। कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद, ब्रोकरेज ने कंपनी के बारे में बुलिश नज़रिया बनाए रखा है। उनका कहना है कि यह सुस्ती मुख्य रूप से ग्राहकों को डिलीवरी के समय की वजह से थी और वित्त वर्ष 2027 के बाकी समय में रिकवरी की संभावना है।

दोपहर करीब 2.10 बजे के आसपास NSE पर यह स्टॉक 18.55 रुपए यानी 2.34% फीसदी की गिरावट के साथ 772 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का लो 732 रुपए और दिन का हाई 779.50 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 873.50 रुपए और 52 वीक लो 579.15 रुपए है। स्टॉक 1 हफ्ते में करीब 3 फीसदी और 1 महीने में 0.87 फीसदी चढ़ा है। 1 साल में इसने 5.52 फीसदी रिटर्न दिया है।

ब्रोकरेज ने मैनेजमेंट के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर कहा है कि एंथम बायोसाइंसेज की मांग मजबूत बनी हुई है और साल के दूसरे हिस्से में तय डिलीवरी की संख्या अधिक है। साथ ही, उन्हें उम्मीद है कि FY27 के बाकी समय में रेवेन्यू में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे FY27F में रेवेन्यू ग्रोथ 17% से ज़्यादा हो सकती है। उन्होंने FY27 के लिए 19.2% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया है।

ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि कंपनी के सेल्स/EBITDA अनुमान से 3%/2% कम रहे। अर्निंग अनुमान से 11% कम रही। इसके साथ ही CRDMO और स्पेशलिटी इंग्रीडिएंट्स दोनों ही सेगमेंट में सालाना और तिमाही दोनों आधार पर गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, ग्रॉस मार्जिन में सालाना आधार पर 778 बेसिस प्वाइंट और तिमाही आधार पर 30 बेसिस प्वाइंट की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह कच्चे माल की कम लागत, करेंसी से मिलने वाले फायदे और कंपनी का वह फैसला था जिसके तहत उसने चीन से एक इंटरमीडिएट का इंपोर्ट बंद कर दिया और उसका इन-हाउस (अपनी ही फैक्ट्री में) प्रोडक्शन शुरू कर दिया।

मुनाफे को लेकर ब्रोकरेज का कहना है कि EBITDA में सालाना आधार पर 19% और तिमाही आधार पर 41% की गिरावट आई है। यह अनुमान से 2% कम है। जबकि नेट प्रॉफ़िट में सालाना आधार पर 12% और तिमाही आधार पर 36% की गिरावट आई है। यह अनुमान से 11% कम है।

ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि कंपनी का डेवलपमेंट पाइपलाइन स्टेबल है, जिसमें 14 कमर्शियल मॉलिक्यूल और 10 लेट-स्टेज (फेज़ III) मॉलिक्यूल शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि जून 2026 तक एंथम की नेट कैश पोज़िशन 17.2 अरब रुपये थी, जबकि एक साल पहले यह 7.8 अरब रुपये थी।

 

 

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Simple Arrive family e-scooter to debut on September 2

Camaflouged Simple Arrive being tested

Simple Energy has announced that it will unveil its first family-oriented electric scooter on September 2, 2026. We first spotted the scooter, expected to be called the Arrive, undergoing testing in March, and the announced unveil date now confirms that its launch is imminent.

  1. New model likely to be called the Simple Arrive
  2. Will rival the Ather Rizta, TVS iQube and Bajaj Chetak
  3. Features a more family-oriented design than the existing Simple One and Simple OneS

Simple Energy family scooter: What we know

Upcoming model gets a more conventional design than the Simple One

From images of the scooter testing earlier this year, the Arrive adopts a notably different design approach from Simple’s existing range. While the One and OneS feature sharp, angular styling, the Arrive opts for a more rounded, conventional silhouette aimed at family scooter buyers.

Key details visible on the test mule included a flat single-piece seat, twin rear shock absorbers, a centre stand, and a front disc brake paired with a rear drum brake – a more cost-effective and practical setup than the disc-at-both-ends configuration on the One range. A front storage cubby and a TFT display also appear to be part of the package, while the headlight is mounted on the apron with a short wind deflector above it.

Simple Energy has also announced that it has become the first Indian OEM to commercially manufacture heavy rare-earth-free electric motors, a technology that is expected to make its way to the new scooter. Apart from confirming the September 2 unveil date, the company has not revealed any additional details. We will update this story as more information becomes available.

CJP Protest: NEET में ऑल इंडिया रैंक 2 लाने वाले पांशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर

NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा में 99.9999 पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के छात्र पंशुल बंसल इन दिनों अपनी शानदार सफलता के साथ-साथ अपनी सोच को लेकर भी चर्चा में हैं। पेपर रद्द होने के बाद जहां देशभर में कई छात्र विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हुए, वहीं पंशुल ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा और अतिरिक्त मिले समय को खुद को बेहतर बनाने का अवसर माना। शुरुआत में परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने जल्द ही नकारात्मक सोच छोड़कर दोबारा तैयारी शुरू कर दी।

पंशुल का मानना है कि जिन परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, उन पर समय और ऊर्जा खर्च करने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है। उनकी यही सकारात्मक सोच और अनुशासित तैयारी उन्हें देश के शीर्ष रैंक हासिल करने वाले छात्रों में शामिल करने में सफल रही।

प्रदर्शन करने से बेहतर लगा घर पर पढ़ना

परिणाम घोषित होने के बाद पंशुल ने कहा कि उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर प्रदर्शन में जाने से उन्हें क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि, “मैंने सोचा कि विरोध-प्रदर्शन में जाने के बजाय घर पर पढ़ाई करूं, अपनी क्षमता बढ़ाऊं और बेहतर स्कोर हासिल करने की कोशिश करूं।”

पहले 706 अंक, दोबारा परीक्षा में पहुंचे 715 तक

नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल के छात्र पंशुल ने दोबारा हुई परीक्षा में 715 अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने की संभावना थी, लेकिन अतिरिक्त तैयारी के समय का सही उपयोग कर उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार किया।

क्या था पूरा मामला?

NEET UG 2026 की पहली परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन 12 मई को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इस मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित हुई और 16 जुलाई को संशोधित परिणाम घोषित किए गए।

नहीं बदली पढ़ाई की दिनचर्या

कई छात्रों ने दोबारा परीक्षा के लिए अपनी रणनीति बदली, लेकिन पंशुल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी रोज की पढ़ाई का शेड्यूल बिल्कुल नहीं बदला। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं किया। पिछले डेढ़ महीने में सिर्फ अपना बेहतर देने की कोशिश की और बाकी भगवान पर छोड़ दिया।”

नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर रखा फोकस

पंशुल ने स्वीकार किया कि पहली परीक्षा अच्छी होने के बाद उनके मन में यह सवाल जरूर आया कि आखिर परीक्षा रद्द क्यों की गई। लेकिन उन्होंने इस सोच में उलझने के बजाय अपने मुख्य लक्ष्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि अगर वह नकारात्मकता में फंस जाते, तो उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती थी। इसलिए उन्होंने हर तरह की चिंता छोड़कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया।

प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने से किया इनकार

देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। हालांकि, जब पंशुल से इन प्रदर्शनों पर राय मांगी गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, “मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”

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IndiaMART Shares: 7% टूटकर शेयर एक साल के निचले स्तर पर, इन दो वजहों से धड़ाम, अब आगे ये है रुझान

IndiaMART Share Price: कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में आज इंडियामार्ट इंटरमेश के शेयर धड़ाम हो गए। जून तिमाही के कारोबारी नतीजे उम्मीद के मुताबिक रही लेकिन लगातार तीसरी तिमाही में पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट और कलेक्शन ग्रोथ में सुस्ती से सेंटिमेंट प्रभावित हुआ और शेयर फिसल गए। शेयर 7% से अधिक टूटकर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए और अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 4.63% की गिरावट के साथ ₹1830.35 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.51% फिसलकर एक साल के निचले स्तर ₹1,775.00 पर आ गया था। पिछले साल 25 अगस्त 2025 को यह एक साल के हाई ₹2686.55 पर था।

IndiaMART के शेयरों को क्यों लगा झटका

जून 2026 तिमाही में ऑनलाइन बी2बी मार्केटप्लेस इंडियामार्ट का कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12.2% बढ़कर ₹172.2 करोड़ और ऑपरेशनल रेवेन्यू 11.4% बढ़कर ₹414.4 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए 9.4% बढ़कर ₹145.9 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 35.8% से 35.4% पर आ गया। सालाना आधार पर कंपनी का कस्टमर कलेक्शंस 8% बढ़ गया जोकि पांच तिमाहियों में सबसे सुस्त ग्रोथ। इससे पहले चार तिमाहियों में यह हर तिमाही 10%-17.5% की रफ्तार से बढ़ा था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी ने ₹163 करोड़ का कैश जेनेरेट किया।

निवेशकों के लिए एक मुख्य चिंता पेइंग सब्सक्राइबर्स की संख्या में लगातार गिरावट है। मार्च तिमाही में इसके 2.20 लाख सब्सक्राइबर्स थे, जो घटकर जून तिमाही के आखिरी तक 2.18 लाख रह गए। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब इसमें गिरावट आई। हालांकि पेइंग सप्लायर्स में बेहतर कमाई के चलते ARPU (औसतन रेवेन्यू प्रति यूजर) सालाना आधार पर 7.8% बढ़कर ₹69,000 पर पहुंच गया। इसके अलावा बोर्ड ने रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर एक पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी इंडियामार्ट फाइनेंस बनाने को मंजूरी दी है जो बिजनेस यूजर्स को शॉर्ट-टर्म वर्किंग कैपिटल को लेकर मदद करेगी।

इंडियामार्ट पर ब्रोकरेजेज क्यों है बेयरेश?

नए पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट के चलते नोमुरा ने इंडियामार्ट को रिड्यूस रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹1,810 फिक्स किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि मीडियम से लॉन्ग टर्म में इन्हें आकर्षित करने के लिए प्रोडक्ट इवॉल्यूशन बहुत ज़रूरी है। नोमुरा का कहना है कि शेयरों में जोरदार तेजी के जरूरी है कि नए सब्सक्राइबर्स की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए।

एक और ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इंडियामार्ट पर बेयरेश रुझान अपनाया है और इसे ₹1650 के टारगेट प्राइस के साथ अंडरपरफॉर्म रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पेड सप्लायर बेस में गिरावट कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका है। जेफरीज का कहना है कि सब्सक्राइबर जोड़ने में लगातार कमजोरी से इसके नेटवर्क इफेक्ट पर असर पड़ सकता है जिसका फ़ायदा इस प्लेटफॉर्म को पहले मिलता रहा है।

18% टूटे Medplus के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद यह बात पड़ी भारी

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

18% टूटे Medplus Health के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद कमजोर रिजल्ट पड़ा भारी

Medplus Health Share Price: देश की सबसे बड़ी रिटेल फार्मेसी ओमनी चैनल मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों को जून तिमाही के रिजल्ट से तगड़ा शॉक लगा है। इसके झटके से मेडप्लस के शेयर करीब 18% टूट गए और फिसलकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। शेयरों को निवेश के दो बड़े ऐलान से भी सपोर्ट नहीं मिल पाया। अभी की बात करें तो फिलहाल 14.95% की गिरावट के साथ मेडप्लस का शेयर ₹676.45 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 17.80% टूटकर ₹653.80 तक आ गया था।

Medplus Health Services Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.7% गिरकर ₹33.17 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू इस दौरान 21.84% बढ़कर ₹1879.60 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 1.9% बढ़कर ₹130.7 करोड़ पर पहुंचा लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.5% से फिसलकर 7.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी ने 146 नए स्टोर खोले जिसमें 131 फ्रेंचाइजी स्टोर्स थीं।

कहां निवेश कर रही मेडप्लस?

एक्सचेंज फाइलिंनग में नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने बताया कि इसकी मुख्य सब्सिडियरी ऑप्टिवल हेल्थ सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तेलंगाना के हैदराबाद में एक फूड पार्क बनाने की योजना बना रही है। इसमें कोल्ड प्रेस ऑयल निकालने वाली यूनिट भी शामिल होगी। इसमें करीब ₹40 करोड़ की पूंजी लगेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना हैदराबाद में एक कॉन्सिअर्ज हेल्थ एंड वेलनेस सर्विसेज फैसिलिटी शुरू करने की भी है। इसमें करीब ₹115 करोड़ का निवेश होगा जिसमें ₹90 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

मे़डप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को कुछ ही महीने में बीमार कर दिया। 21 मई 2026 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 35.92% फिसलकर आज 22 जुलाई 2026 को ₹653.80 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

Indo MIM IPO Details & GMP: अगर आप आईपीओ मार्केट में दांव लगाने की योजना बना रहे हैं, तो बेंगलुरु बेस्ड प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर इंडो-एमआईएम का बड़ा आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से खुल रहा है। ₹3,811.21 करोड़ का यह मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में दस्तक देने से पहले ही ग्रे मार्केट में धमाल मचा रहा है।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में करीब 40% के तगड़े प्रीमियम (GMP) पर ट्रेड कर रहे हैं, जो लिस्टिंग के दिन शानदार रिटर्न का संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, जरूरी तारीखें, वित्तीय सेहत और अन्य प्रमुख बातें।

Indo-MIM IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

  • एंकर इनवेस्टर्स के लिए बिडिंग: 22 जुलाई
  • इश्यू ओपनिंग और क्लोजिंग डेट: 23 से 27 जुलाई
  • प्राइस बैंड: ₹461 से ₹485 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,550
  • शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

इश्यू साइज और फंड का इस्तेमाल

यह आईपीओ कुल ₹3,811.21 करोड़ का है जिसमें ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹3,312 करोड़ ऑफर फॉर सेल (OFS) है। ओएफएस के तहत ग्रीन मीडोज इन्वेस्टमेंट्स 6.05 करोड़ शेयर, अनुराधा कोडुरी 54.59 लाख शेयर और आईआईटी मद्रास 23.07 लाख शेयर बेच रहे हैं।

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹500 करोड़ में से ₹400 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। कंपनी का मई 2026 तक कंपनी पर कुल ₹1,212.3 करोड़ का बकाया कर्ज था। बाकी फंड का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए होगा।

कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बिजनेस

1996 में स्थापित इंडो-एमआईएम (Indo-MIM) मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (MIM) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी ऑटोमोटिव, डिफेंस, मेडिकल, कंज्यूमर और एयरोस्पेस सेक्टर्स के लिए काम करती है। फाइनेंशियल ग्रोथ की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल (YoY) 26% बढ़कर ₹533.5 करोड़ हो गया। इसी अवधि में परिचालन राजस्व भी 26% बढ़कर ₹4,193 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

आईपीओ मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म्स Investorgain और IPO Watch के मुताबिक, 22 जुलाई की सुबह इंडो-एमआईएम के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹194 से ₹195 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसकी संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹485 (अपर प्राइस बैंड) + ₹195 (GMP) = ₹680 प्रति शेयर हो सकती है। निवेशकों को इस आईपीओ की लिस्टिंग पर ही करीब 40.21% का मुनाफा हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ICSE 10th Improvement Result 2026: 10वीं के इंप्रूवमेंट नतीजे जारी, 24 जुलाई से डिजिलॉकर पर मिलेगी डिजिटल मार्कशीट

ICSE 10th Improvement Result 2026: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) से 10वीं कक्षा की परीक्षा दे चुके छात्र अपनी इंप्रूवमेंट परीक्षा के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। इन छात्रों के लिए आज अच्छा दिन है। बोर्ड ने इंडियन काउंसिल फॉर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (ICSE) 10वीं इम्प्रूवमेंट एग्जामिनेशन रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है। 15 जून से 30 जून, 2026 तक हुई इम्प्रूवमेंट परीक्षा में शामिल छात्र अब सीआईएससीई रिजल्ट्स पोर्टल के जरिए अपना रिजल्ट देख सकते हैं। डिजिटल मार्कशीट भी 24 जुलाई, 2026 से डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगी।

इस साल, 37 विषयों/पेपर्स में 13,032 पेपर-वाइज एंट्रीज के साथ 5,321 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। यह परीक्षा 341 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जबकि 43 केंद्रों पर 185 परीक्षकों ने छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया था। सीआईएससीई ने स्पष्ट किया है कि मुख्य और इम्प्रूवमेंट परीक्षा में मिले अधिक अंकों को अंतिम अंक माना जाएगा।

आईसीएसई 10वीं कक्षा इम्प्रूवमेंट रिजल्ट 2026 कैसे चेक करें?

छात्र आईसीएसई 10वीं इम्प्रूवमेंट रिजल्ट 2026 डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं :

  • सीआईएससीई रिजल्ट्स पोर्टल cisce.org पर जाएं।
  • आईसीएसई इम्प्रूवमेंट एग्जामिनेशन रिजल्ट 2026 लिंक चुनें।
  • ज़रूरी लॉगिन क्रेडेंशियल डालें।
  • रिजल्ट देखने के लिए डिटेल्स सबमिट करें।
  • आगे के रेफरेंस के लिए प्रोविजनल स्कोरकार्ड डाउनलोड करके सेव कर लें।
  • स्कूल CAREERS पोर्टल के जरिए टेबुलेशन रजिस्टर और कैंडिडेट-वाइज रिपोर्ट देख सकते हैं।

आईसीएसई 10वीं कक्षा इम्प्रूवमेंट रिजल्ट 2026: एक नजर

परीक्षा तारीख : 15 जून से 30 जून, 2026

कुल कैंडिडेट शामिल हुए : 5,321

पेपर-वाइज एंट्री : 13,032

कवर किए गए सब्जेक्ट/पेपर : 37

एग्जाम सेंटर : 341

इवैल्यूएशन सेंटर : 43

इवैल्यूएशन करने वाले एग्जामिनर : 185

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आईसीएसई 10वीं कक्षा इम्प्रूवमेंट स्कोरकार्ड 2026 डाउनलोड करके सुरक्षित रखें, क्योंकि मेन और इम्प्रूवमेंट एग्जाम में मिले मार्क्स में से जो ज्यादा होगा, उसे फाइनल स्कोर माना जाएगा। रिजल्ट से जुड़े किसी भी सवाल के लिए, स्कूल सीआईएससीई हेल्पडेस्क से helpdesk@cisce.org पर संपर्क कर सकते हैं या 1800-203-2414 पर कॉल कर सकते हैं।

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Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार 22 जुलाई को 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की नई टाइमलाइन का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद अब सन फार्मा (Sun Pharma), ल्यूपिन (Lupin), सिप्ला (Cipla) समेत देश की कई दवा कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका में आयात होने वाली दवाईयों पर सभी जेनेरेकि दवाओं पर अब दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक इसके बाद 1 अगस्त 2028 से इन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा।

Trump Tariffs: अमेरिका के लिए कितना अहम है जेनेरिक्स?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुकाबिक जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका में करने के लिए टैरिफ पॉलिसी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन्हें टैरिफ झेलना पड़ेगा। इससे पहले ट्रंप ने जो टैरिफ लगाए थे, उसके दायरे में ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाईयां थीं, जिसमें अभी भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले वाली पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयां शामिल नहीं थीं क्योंकि अमेरिका में डॉक्टर्स करीब 90% जेनेरिक्स दवाईयां ही लिखते हैं। ट्रंप सरकार ने ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर फार्मा इंडस्ट्री की जांच भी शुरू की थी। इसके अलावा आम लोगों सीधे सस्ती दवाओं की बिक्री के लिए Trump RX नाम से एक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर?

जेनेरिक्स पर अमेरिकी टैरिफ का भारतीय कंपनियों पर बहुत असर पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि भारतीय दवा कंपनियों का अमेरिका में जितना सेल्स वॉल्यूम है, उसका करीब 90% तो जेनेरिक्स दवाईयों का है तो अमेरिका जितना जेनेरिक्स आयात करता है, उसमें 40% भारत से है। भारत से अमेरिका को करीब $1 हजार करोड़ का फार्मा एक्सपोर्ट है। इसके अलावा भारत के बाहर अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से मंजूरी मिली हुई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में सबसे अधिक भारतीय कंपनियों की ही हैं, जिनकी संख्या लगभग 670 है।

अमेरिका की तुलना में भारत में क्यों बनती हैं अधिक दवाईयां

भारत में दवा बनाने की लागत अमेरिका की तुलना में 30-50% तक सस्ती पड़ती है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना है कि अभी यह देखना बाकी है कि इस नीति को वास्तव में कैसे लागू किया जाएगा और ट्रंप के कार्यकाल के बाद इस पर क्या होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लगातार कीमतों में गिरावट, तगड़े कॉम्पटीशन , अलग-अलग प्रकार की डोजेज और सख्त मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी के चलते अमेरिका में बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अमेरिका में बड़े वॉल्यूम में प्रोडक्शन कैपेसिटी डेवलप करने में कई दशक लग सकते हैं, क्योंकि कम लागत वाली जेनेरिक दवाइयां बनाने को लेकर अमेरिका की क्षमता काफी हद तक कम हो चुकी है।

अमेरिका में किन भारतीय कंपनियों की है मौजूदगी

कई भारतीय कंपनियों की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। अरबिंदो फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी मौजूदगी है तो डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, सिप्ला और जाइडस लाइफ जैसी कंपनियों का भी अमेरिका में कारोबार फैला हुआ है। वहीं एल्केम लैब्स और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियां पूरी तरह से भारत में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर निर्भर हैं और अमेरिका से उनकी कमाई बहुत अधिक नहीं होती है। बायोकॉन जैसी कंपनियां बायोसिमिलर और जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन के लिए भारत और मलेशिया की यूनिट्स पर निर्भर हैं, जबकि सेनोरेस फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।