Silver Rate Today: फिर चढ़ी चांदी, जानें 18 सितंबर को मुंबई से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

Silver Rate Today: शुक्रवार 18 सितंबर को चांदी के दाम चढ़ गए। एमसीएक्स पर एक किलो चांदी का दाम 2,39,579 रुपये है। गुड रिटर्न के अनुसार, आज चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में 1 किलो चांदी की कीमत 2,49,900 रुपये है जबकि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर, पुणे में 2,50,000 रुपये है। Bullions.co.in पर चांदी की कीमत 2,38,070 रुपये प्रति किलोग्राम पर है

बता दें कि चांदी का दाम सोने के दाम को फॉलो कर रहा है। जब भी सोने का बढ़ता है, चांदी का दाम भी बढ़ता है। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि चांदी भी इन्वेस्टर्स के लिए एक सेफ इन्वेस्टमेंट टूल बन गया है।

इंटरनेशनल मार्केट में क्या है दाम?

इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर सोने और चांदी दोनों के दाम गिरे है। Comex पर चांदी के दाम 0.30% तक गिर गए और ऐसे में कीमत 66.295 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2,50,000 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,50,000
मुंबई₹2,50,000
कोलकाता₹2,50,000
चेन्नई₹2,49,900
लखनऊ₹2,50,000
पटना₹2,50,000
जयपुर₹2,50,000
अहमदाबाद₹2,50,000
पुणे₹2,50,000
बेंगलुरु₹2,50,000
हैदराबाद₹2,50,000
भोपाल₹2,50,000
चंडीगढ़₹2,50,000
नोएडा₹2,50,000
गुरुग्राम₹2,50,000

पिछले कारोबारी दिन क्या रहा चांदी का वायदा भाव

कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों द्वारा अपने सौदों का आकार घटाने से गुरुवार को वायदा कारोबार में चांदी की कीमत 476 रुपये की गिरावट के साथ 2,34,310 रुपये प्रति किग्रा रह गया। मल्टी कमोडिटी एक्स्चेंज में चांदी के दिसंबर महीने में डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 476 रुपये यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,34,310 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 0.08 प्रतिशत की हानि के साथ 64.87 डॉलर प्रति औंस रह गयी। बाजार एक्सपर्ट्स ने कहा कि कारोबारियों द्वारा की गई बिकवाली से मुख्यत: चांदी वायदा कीमतों में गिरावट आई।

Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: सस्ती हुई चांदी, जानें 17 सितंबर को मुंबई से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत चांदी ने अब तक कितना रिटर्न दिया

Silver Price Today:  यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर आज चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। भारत में चांदी के भाव में गिरावट आई हैं और यह ₹2.32 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई है। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,34,786 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियन्स के मुताबिक चांदी की कीमत 235,140 रुपये किलो हो गई। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमत लुढ़कर 2,45,000 रुपये प्रति किलो हो गई। आगे जानिए देश के अलग-अलग शहरों में चांदी के ताजा रेट क्या हैं।

इंटरनेशनल मार्केट कितने गिरे दाम

इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर सोने और चांदी दोनों के दाम में भारी गिरावट आई है। Comex पर आंकड़ों की मानें तो खबर लिखे जाने तक सोना 1.47% तक गिरा और कीमत 4322.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी के दाम 1.69% तक गिर गए और ऐसे में कीमत 63.820 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2.45- 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,45,000
मुंबई₹2,45,000
कोलकाता₹2,45,000
चेन्नई₹2,50,000
लखनऊ₹2,45,000
पटना₹2,45,000
जयपुर₹2,45,000
अहमदाबाद₹2,45,000
पुणे₹2,45,000
बेंगलुरु₹2,45,000
हैदराबाद₹2,45,000
भोपाल₹2,45,000
चंडीगढ़₹2,45,000
नोएडा₹2,45,000
गुरुग्राम₹2,45,000

पिछले दिन क्या रहा चांदी का भाव

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद कारोबारी धारणा में सुधार होने से कारोबारियों की सटोरिया लिवाली से राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी के दाम में दो लगातार सत्र तक स्थिर रहने के बाद उछाल आया। यह पिछले बंद स्तर 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 7,000 रुपये बढ़कर 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर पहुंच गई। वैश्विक बाजार में, हाजिर चांदी 1.5 प्रतिशत बढ़कर 64.61 डॉलर प्रति औंस हो गई।

चांदी ने अब तक कितना रिटर्न दिया

सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी आई है। बुलियन डेटा के अनुसार, पिछले एक साल में चांदी की कीमत में 85.49% की बढ़त हुई है। 1 साल पहले चांदी की कीमत लगभग ₹1,26,850 प्रति किलोग्राम थी, जो अभी ₹2,35,140 है।

इस बढ़त का मतलब है कि अगर एक साल पहले सोने में ₹1 लाख का निवेश किया गया होता, तो बुलियन रेट के हिसाब से उसकी कीमत लगभग ₹1.39 लाख होती, जबकि चांदी में निवेश की गई उतनी ही रकम की कीमत लगभग ₹1.85 लाख होती (इसमें ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट और टैक्स शामिल नहीं हैं)।

ग्राहकों को बुलियन रेट को ही गहनों की आखिरी कीमत नहीं मानना ​​चाहिए। मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागू खर्चों को जोड़ने के बाद ज्वेलर को दी जाने वाली रकम ज़्यादा हो सकती है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF Pension: ₹12500 महीना तक हो सकती है पेंशन, समझिए सरकार के नए फैसले का पूरा असर

EPF Pension: केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।

अभी तक ₹15,000 तक के वेतन पर EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज लागू होती थी। यह सीमा 1 सितंबर 2014 से नहीं बदली थी। नई सीमा लागू होने पर ज्यादा कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।

पेंशन में 66.7% तक बढ़ोतरी

इस फैसले का सीधा असर EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना पर भी पड़ने की उम्मीद है। वजह है कि पेंशन की कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली वेतन सीमा भी ₹25,000 हो सकती है।

EPS में पेंशन का फॉर्मूला इस तरह है:

पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70

अभी अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 माना जाता है। ऐसे में 35 साल की पेंशन योग्य सेवा वाले कर्मचारी की फॉर्मूला आधारित पेंशन करीब ₹7,500 बनती है।

अगर यही सीमा ₹25,000 हो जाती है, तो 35 साल की सेवा पर पेंशन ₹12,500 हो सकती है। यानी फॉर्मूला के हिसाब से पेंशन में 66.7% की बढ़ोतरी हो सकती है।

पेंशन योग्य सेवा₹15,000 वेतन सीमा पर पेंशन₹25,000 वेतन सीमा पर पेंशनसंभावित बढ़ोतरी
10 साल₹2,143₹3,57166.70%
20 साल₹4,286₹7,14366.70%
25 साल₹5,357₹8,92966.70%
30 साल₹6,429₹10,71466.70%
35 साल₹7,500₹12,50066.70%

Zaggle की CHRO लता अय्यर ने कहा, ‘अगर बढ़ी लिमिट को EPS की कैलकुलेशन में लागू किया जाता है, तो पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी पेंशन योग्य सेवा और सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों पर निर्भर करेगी।’

EPF में ज्यादा पैसा कट सकता है

अब बात EPF की। यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। वेतन सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की सैलरी से EPF की कटौती तुरंत बढ़ जाएगी। फिलहाल कुछ कंपनियां ₹15,000 की सीमा पर EPF योगदान तय करती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कर्मचारी के वास्तविक बेसिक पे पर योगदान करती हैं। इसलिए नई व्यवस्था का असर कर्मचारी की मौजूदा पॉलिसी पर भी निर्भर करेगा।

मान लीजिए अभी किसी कर्मचारी का EPF योगदान ₹15,000 की सीमा पर हो रहा है। 12% के हिसाब से हर महीने कर्मचारी के हिस्से से ₹1,800 कटते हैं। अगर नई ₹25,000 की सीमा पर 12% योगदान लागू होता है, तो यह रकम बढ़कर ₹3,000 हो जाएगी। यानी हर महीने ₹1,200 ज्यादा EPF में जाएगा।

इसका सीधा असर टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा। हाथ में आने वाली सैलरी ₹1,200 तक कम हो सकती है। हालांकि, यह पैसा कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में ही जाएगा।

हर कर्मचारी की सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा

जिन कर्मचारियों का EPF योगदान पहले से ही उनके वास्तविक बेसिक पे पर होता है, उन पर नई सीमा का तुरंत कोई खास असर नहीं पड़ सकता।

मसलन, अगर किसी कर्मचारी की कंपनी पहले से ही ₹25,000 या उससे ज्यादा के बेसिक पे पर 12% EPF काट रही है, तो केवल वेतन सीमा बढ़ने से उसकी कटौती में जरूरी नहीं कि कोई बदलाव हो।

Choice International की CHRO नेहा जैन ने कहा, ‘अगर बढ़ी हुई सीमा पर EPF योगदान अनिवार्य होता है, तो फिलहाल ₹15,000 की सीमा पर 12% योगदान करने वाला कर्मचारी हर महीने ₹1,800 की जगह ₹3,000 योगदान करेगा। इससे टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹1,200 तक की कमी हो सकती है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर योगदान अभी की तरह मौजूदा सीमा पर ही कैप रहता है, तो टेक-होम सैलरी पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए अंतिम नोटिफिकेशन और योगदान का नया ढांचा काफी अहम होगा।’

EPF Wage Ceiling Hike: केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला! ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई सैलरी लिमिट, 51 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

Silver Price Today: ₹3000 महंगी हुई चांदी, जानें 16 सितंबर को दिल्ली से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

Silver Price Today: 16 सितंबर 2026 को भारत में चांदी की कीमत ₹2.45 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास बनी रही। यह स्थिति तब रही जब कच्चे तेल की कीमतों, US ट्रेजरी यील्ड, US डॉलर और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर से जुड़े फैसलों के कारण ग्लोबल बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी था।

हालांकि आज बाजार ओपन होने के बाद कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में 1.3% बढ़कर यानी 3006 रुपये बढ़त के साथ 2,35,124 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,32,118 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

घरेलू बाजार में चांदी की कीमत ₹244.90 प्रति ग्राम, ₹2,449 प्रति 10 ग्राम और ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम थी। यह पिछली कीमत से ₹0.10 प्रति ग्राम कम थी और कुल मिलाकर इसमें काफी उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

अगस्त की शुरुआत में चांदी की कीमत ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम थी और महीने के आखिर में यह ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम हो गई, यानी एक महीने में इसमें 8.51% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, सितंबर में कीमतों में कुछ गिरावट (करेक्शन) देखी गई और 16 सितंबर को यह ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम पर थी।

इंटरनेशनल मार्केट में चांदी का भाव

16 सितंबर की बैठक से पहले अमेरिकी बाज़ार का ताज़ा बेंचमार्क यह है कि 15 सितंबर को स्पॉट सिल्वर $63.41 प्रति ट्रॉय औंस पर ट्रेड कर रही थी। स्पॉट गोल्ड $4,293.29 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स $4,332.80 पर ट्रेड कर रहे थे। रॉयटर्स ने बताया है कि FED की बैठक से पहले मज़बूत अमेरिकी डॉलर और ज़्यादा अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड की वजह से कीमती धातुओं पर दबाव बन रहा था।

आज दिल्ली में चांदी की कीमतों का ट्रेंड

दिल्ली में चांदी का रिटेल भाव राष्ट्रीय दर के हिसाब से ₹2,449 प्रति 10 ग्राम और ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम है। सितंबर की शुरुआत में कीमतों में जो तेज़ी से उतार-चढ़ाव देखे गए थे, उनकी तुलना में अब रोज़ाना के बदलाव कम हैं।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,45,000
मुंबई₹2,45,000
कोलकाता₹2,45,000
चेन्नई₹2,50,000
लखनऊ₹2,45,000
पटना₹2,45,000
जयपुर₹2,45,000
अहमदाबाद₹2,45,000
पुणे₹2,45,000
बेंगलुरु₹2,45,000
हैदराबाद₹2,45,000
भोपाल₹2,45,000
चंडीगढ़₹2,45,000
नोएडा₹2,45,000
गुरुग्राम₹2,45,000

क्या आपको आज भारत में चांदी खरीदनी चाहिए या इंतज़ार करना चाहिए?

जिन खरीदारों की निवेश रणनीति लंबे समय की है, उनके लिए एक ही बार में सारा पैसा लगाने के बजाय टुकड़ों में खरीदारी करना बेहतर हो सकता है।शॉर्ट-टर्म के लिए खरीदारी करने वालों को मार्केट द्वारा बताए गए MCX रेफरेंस लेवल – ₹2.30 लाख और ₹2.48 लाख – पर ध्यान देना चाहिए। जो लोग गहने और बर्तन खरीद रहे हैं, उन्हें सिर्फ़ बुलियन (कच्ची चांदी) की कीमत के बजाय खरीदारी की कुल लागत पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।खरीदारी का फैसला लेते समय खरीदारों को यह याद रखना चाहिए कि सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

Gold Silver Price:फेड के फैसले से पहले सोना-चांदी स्थिर, कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

2000, 3000, 50000 से लेकर 75000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर कितना लगेगा MDR, यहां जानिए पूरा कैलकुलेशन

UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर अब तस्वीर साफ है, जो 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है। इसका हिसाब पेमेंट की रकम के आधार पर होगा। ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा। इसके ऊपर 0.40% की दर से MDR की गणना होगी। हालांकि, बड़े पेमेंट पर इसकी अधिकतम सीमा भी तय है।

सरकार ने साफ किया है कि MDR ग्राहक को नहीं देना होगा। इसका भुगतान मर्चेंट यानी दुकानदार करेगा। यह रकम मर्चेंट के बैंक को मिलेगी। इसलिए ग्राहक के खाते से पेमेंट की रकम के अलावा MDR की रकम अलग से नहीं कटेगी।

किस पेमेंट पर कितना लगेगा MDR

मर्चेंट को दी गई रकमMDR प्रतिशतMDR की रकम
₹2,000कोई MDR नहीं₹0
₹3,0000.40%₹12
₹50,0000.40%₹200
₹75,000 से ज्यादाअधिकतम ₹300₹300

₹3,000 के पेमेंट पर कितना MDR?

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹3,000 का UPI पेमेंट किया। इस रकम पर 0.40% MDR लगेगा। ₹3,000 का 0.40% ₹12 होता है। यानी मर्चेंट को इस ट्रांजैक्शन पर ₹12 MDR देना होगा।

अब ₹50,000 का पेमेंट लेते हैं। इसका 0.40% ₹200 होता है। यानी ₹50,000 के UPI पेमेंट पर मर्चेंट का MDR ₹200 होगा।

₹75,000 के बाद क्या होगा?

यहां एक जरूरी बात है। बड़े पेमेंट पर MDR की एक अधिकतम सीमा रखी गई है। ₹75,000 और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR ₹300 फिक्स रहेगा। इसके बाद पेमेंट की रकम बढ़ने पर भी MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा।

इसे ₹1 लाख के पेमेंट से समझिए। ₹1 लाख का 0.40% ₹400 होता है। लेकिन यहां ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी। इसलिए मर्चेंट को ₹400 नहीं, बल्कि ₹300 MDR देना होगा।

₹2,000 के पेमेंट पर कोई MDR नहीं

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। यानी ₹2,000 के पेमेंट पर मर्चेंट को कोई MDR नहीं देना होगा।

इसके बाद ₹3,000 पर ₹12 और ₹50,000 पर ₹200 MDR होगा। वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर MDR ₹300 पर रुक जाएगा।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी

iPhone 18 Pro की कीमत ₹1.64 लाख, FD या लंपसम में लगाएं तो कितना बनेगा पैसा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

अमेरिकी टेक कंपनी Apple के नए iPhone 18 Pro की भारत में शुरुआती कीमत ₹1,64,900 है। सोशल मीडिया पर मीम चल रहा है कि अगर आप ₹1.64 लाख से आईफोन की जगह एक भैंस खरीदते हैं, तो ज्यादा फायदे में रहेंगे। 5 साल बाद आईफोन खराब होने लगेगा। वहीं भैंस तब तक कई बच्चे और दूध देकर आपका मुनाफा कई गुना बढ़ा चुकी होगी।

खैर, अगर मीम से हटकर बात करें तो इतना पैसा किसी प्रीमियम फोन पर खर्च करने के बजाय निवेश किया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह रकम कितनी हो सकती है? इसे FD और एकमुश्त इक्विटी निवेश के जरिए समझते हैं।

इसके लिए ₹1,64,900 की शुरुआती रकम को 5, 10 और 15 साल के लिए निवेश करने का कैलकुलेशन किया गया है। FD के लिए 6.5% सालाना ब्याज और लंपसम निवेश के लिए औसतन 12% सालाना रिटर्न माना गया है।

अवधि6.5% पर FD का रिटर्न12% पर  लंपसम का रिटर्न
5 साल₹2.26 लाख₹2.91 लाख
10 साल₹3.10 लाख₹5.12 लाख
15 साल₹4.24 लाख₹9.03 लाख

नोट : FD का ब्याज बैंक की पॉलिसी और लंपसम का रिटर्न मार्केट की हालत के हिसाब से बदल सकता है।

5 साल बाद कितना पैसा बनेगा?

अगर ₹1,64,900 को 6.5% सालाना ब्याज वाली FD में रखा जाता है, तो 5 साल बाद यह रकम करीब ₹2.26 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹61,000 की बढ़ोतरी होगी।

वहीं, इसी रकम को 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर एकमुश्त इक्विटी निवेश में लगाया जाए, तो 5 साल बाद करीब ₹2.91 लाख हो सकते हैं। इसमें शुरुआती रकम करीब ₹1.26 लाख बढ़ जाती है।

10 साल बाद कैसा हाल रहेगा?

समय बढ़ने के साथ कंपाउंडिंग का असर भी बढ़ता है। 6.5% सालाना ब्याज की दर से ₹1,64,900 की FD करीब ₹3.10 लाख हो सकती है।

अगर यही रकम 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर एकमुश्त निवेश की जाए, तो 10 साल बाद करीब ₹5.12 लाख हो सकती है। यानी FD के मुकाबले करीब ₹2 लाख ज्यादा रकम बन सकती है।

15 साल बाद की तस्वीर क्या है?

15 साल की अवधि में दोनों विकल्पों के बीच अंतर और बड़ा हो जाता है। 6.5% सालाना ब्याज के हिसाब से FD की रकम करीब ₹4.24 लाख हो सकती है।

दूसरी तरफ, 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर एकमुश्त निवेश करीब ₹9.03 लाख तक पहुंच सकता है। यानी ₹1.64 लाख की शुरुआती रकम करीब साढ़े पांच गुना हो सकती है।

iPhone खरीदने और निवेश के बीच फर्क

यह कैलकुलेशन दिखाता है कि ₹1.64 लाख की रकम को लंबे समय तक निवेश करने पर कंपाउंडिंग का फायदा कितना बड़ा हो सकता है। फोन खरीदने पर यह रकम एक प्रोडक्ट पर खर्च हो जाती है। वहीं निवेश में पैसा आगे भी कमाई कर सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फोन खरीदना हमेशा गलत फैसला है। अगर आपकी बचत, इमरजेंसी फंड और दूसरे वित्तीय लक्ष्य पहले से रास्ते पर हैं, तो आप को बेशक अपनी पसंद का फोन खरीद सकता है। लेकिन अगर ₹1.64 लाख उसकी कुल बचत का बड़ा हिस्सा है, तो इस रकम को खर्च करने से पहले निवेश का विकल्प देखना ज्यादा समझदारी भरा हो सकता है।

Smartphone GST Cut: क्या सस्ते होने वाले हैं स्मार्टफोन? इंडस्ट्री की GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का पर्सनल लोन लेने पर कितना ब्याज देना होगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन आसान विकल्प लगता है। फिर चाहे शादी का खर्च हो, मेडिकल इमरजेंसी हो या घर से जुड़ा कोई जरूरी काम। पर्सनल लोन काफी कम जल्दी और काफी आसानी से मिल भी जाता है। और इसके लिए कुछ गिरवी रखने की भी जरूरत नहीं होती। इसलिए ज्यादातर लोग इसे लेना पसंद करते हैं।

लेकिन असली सवाल है कि ₹5 लाख का लोन लेने के बाद कुल कितना पैसा वापस करना पड़ेगा? इसका जवाब ब्याज दर और लोन की अवधि पर निर्भर करता है। ब्याज दर बढ़ने के साथ EMI भी बढ़ती है। साथ ही बैंक को लौटाई जाने वाली कुल रकम भी काफी बढ़ जाती है।

₹5 लाख के लोन पर ब्याज-EMI का हिसाब

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल यानी 60 महीने के लिए लिया है। इसकी ब्याज दर अमूमन 10% से शुरू होकर 25% तक भी जा सकती हैं। ये आपके क्रेडिट स्कोर और कमाई जैसी बातों पर निर्भर करता है। अलग-अलग ब्याज दर पर आपकी EMI और कुल ब्याज कुछ इस तरह होगा।

ब्याज दरमासिक EMI5 साल में कुल भुगतानकुल ब्याज
10%₹10,624₹6.37 लाख₹1.37 लाख
12%₹11,122₹6.67 लाख₹1.67 लाख
15%₹11,895₹7.14 लाख₹2.14 लाख
20%₹13,247₹7.95 लाख₹2.95 लाख

10% ब्याज पर ₹5 लाख का लोन

अगर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 10% है, तो ₹5 लाख के लोन की मासिक EMI करीब ₹10,624 होगी। 60 महीने तक EMI चुकाने पर बैंक को कुल करीब ₹6.37 लाख देने होंगे। यानी ₹5 लाख के लोन पर करीब ₹1.37 लाख ब्याज जाएगा।

12% ब्याज पर कितना भुगतान होगा?

ब्याज दर 12% होने पर EMI बढ़कर करीब ₹11,122 हो जाएगी। पांच साल में कुल भुगतान करीब ₹6.67 लाख रहेगा। इसमें करीब ₹1.67 लाख ब्याज होगा। यानी सिर्फ ब्याज दर में 2 प्रतिशत का अंतर होने से कुल ब्याज में भी फर्क आ जाता है। इसलिए लोन लेते समय मिलने वाली ब्याज दर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

15% ब्याज पर EMI कितनी होगी?

अगर ब्याज दर 15% है, तो ₹5 लाख के लोन पर हर महीने करीब ₹11,895 की EMI बनेगी। पांच साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा। इसमें लगभग ₹2.14 लाख ब्याज शामिल होगा। यहां गौर करने वाली बात है कि लोन की रकम वही ₹5 लाख है। लेकिन ब्याज दर बढ़ने से बैंक को लौटाई जाने वाली रकम काफी बढ़ गई।

20% ब्याज पर लोन सबसे महंगा

अब अगर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 20% है, तो EMI करीब ₹13,247 होगी। पांच साल में कुल भुगतान करीब ₹7.95 लाख पहुंच जाएगा। यानी ₹5 लाख उधार लेने के लिए करीब ₹2.95 लाख ब्याज देना पड़ेगा।

10% और 20% की ब्याज दर के बीच अंतर सिर्फ 10 प्रतिशत अंक का है। लेकिन पांच साल में कुल ब्याज में करीब ₹1.58 लाख का फर्क आ जाता है। इसलिए पर्सनल लोन लेते समय ब्याज दर पर अच्छी तरह बातचीत करना फायदेमंद हो सकता है।

सिर्फ EMI देखकर फैसला न करें

पर्सनल लोन लेते समय लोग अक्सर सिर्फ EMI देखते हैं। यह तरीका सही नहीं है। कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता। अगर लोन की अवधि ज्यादा है, तो हर महीने कम रकम जाने के बावजूद कुल ब्याज ज्यादा हो सकता है।

इसलिए लोन लेने से पहले इंटरेस्ट रेट, लोन टेन्योर और टोटल रीपेमेंट तीनों को देखना चाहिए। बैंक कितना लोन देने को तैयार है, यह भी अंतिम फैसला नहीं होना चाहिए। आपकी आय के हिसाब से कितनी EMI आराम से चुकाई जा सकती है, यह ज्यादा जरूरी है।

दूसरे चार्ज भी बढ़ा सकते हैं लागत

ऊपर के कैलकुलेशन सिर्फ लोन की रकम और ब्याज पर हैं। इसमें प्रोसेसिंग फी, GST, इंश्योरेंस और दूसरे संभावित चार्ज शामिल नहीं हैं। अलग-अलग बैंक और लोन के हिसाब से ये शुल्क अलग हो सकते हैं।

इसलिए पर्सनल लोन लेते समय बैंक से सिर्फ ब्याज दर और EMI न पूछें। यह भी पता करें कि लोन पूरा होने तक आपकी जेब से कुल कितनी रकम जाएगी। यही लोन की असली लागत बताएगी।

SIP vs SSY: हर महीने 3000 के निवेश से कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP vs SSY: हर महीने 3000 के निवेश से कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs SSY: अगर आप हर महीने ₹3,000 बचा सकते हैं तो आपके सामने निवेश के कई विकल्प हैं। इनमें SIP और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) भी शामिल हैं। लेकिन दोनों की पैसे बढ़ाने का तरीका काफी अलग है।

SIP बाजार से जुड़ा निवेश है। इसमें रिटर्न तय नहीं होता। वहीं SSY सरकार की छोटी बचत योजना है। फिलहाल इसमें 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। ब्याज सालाना कंपाउंड होता है। अब सवाल है कि हर महीने ₹3,000 लगाने पर दोनों में कितना पैसा बन सकता है?

15 साल में कितना पैसा बनेगा?

मान लेते हैं कि SIP से औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है। लॉन्ग टर्म में अच्छे म्यूचुअल फंड से इतने ही रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, मार्केट से जुड़ा होने के नाते रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। दूसरी तरफ SSY में मौजूदा 8.2% ब्याज दर है। इसमें सरकार बदलाव कर सकती है। दोनों में हर महीने ₹3,000 निवेश करने पर तस्वीर कुछ ऐसी बनती है।

अवधिकुल निवेशSIP का फंडSSY का फंड
5 साल₹1.80 लाख₹2.47 लाख₹2.16 लाख
10 साल₹3.60 लाख₹6.97 लाख₹5.42 लाख
15 साल₹5.40 लाख₹15.14 लाख₹10.64 लाख

यानी 15 साल में आप दोनों जगह कुल ₹5.40 लाख जमा करेंगे। लेकिन अनुमानित रिटर्न के हिसाब से SIP में करीब ₹15.14 लाख और SSY में करीब ₹10.64 लाख हो सकते हैं।

SSY में एक बड़ा फर्क समझिए

यहां एक जरूरी बात है। SSY में बेटी के नाम खाते में 15 साल तक पैसा जमा किया जाता है। खाता खुलने की तारीख से 21 साल बाद यह मैच्योर होता है। यानी 15 साल तक ₹3,000 जमा करने के बाद भी पैसा तुरंत हाथ में नहीं आता। अगर 15 साल बाद SSY में जमा करीब ₹10.64 लाख को अगले 6 साल तक 8.2% की दर से बढ़ने दें, तो यह रकम लगभग ₹17 लाख हो सकती है।

इसके मुकाबले अगर SIP में ₹3,000 की मासिक SIP पूरे 21 साल तक चलती रहे और औसतन 12% रिटर्न मिले, तो रकम करीब ₹34.16 लाख हो सकती है।

फिर कौन बेहतर है?

इसका सीधा जवाब नहीं है। दोनों का मकसद अलग है। अगर आप बेटी की पढ़ाई या भविष्य के लिए सुरक्षित और तय नियमों वाली बचत चाहते हैं तो SSY एक विकल्प हो सकती है। इसमें सरकार की ब्याज दर लागू होती है और खाता 21 साल में मैच्योर होता है।

वहीं अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में ज्यादा कॉर्पस बनाना है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम ले सकते हैं तो SIP पर विचार किया जा सकता है।

इसलिए निवेश चुनते समय सिर्फ यह न देखें कि पैसा कहां ज्यादा बन रहा है। यह भी देखें कि आपका लक्ष्य क्या है, कितने समय के लिए निवेश करना है और आप कितना जोखिम उठा सकते हैं।

क्या आपकी SIP उम्मीद से कम रिटर्न दे रही? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

LPG Price 13 September 2026: 13 सितंबर के नए गैस सिलेंडर रेट जारी, दिल्ली से पटना तक देखें आज की पूरी कीमत

LPG Price 13 September 2026: देश के करोड़ों घरों में खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। ऐसे में गैस सिलेंडर की कीमतों में होने वाला छोटा सा बदलाव भी आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि हर महीने की शुरुआत में लोगों की नजर LPG के नए रेट पर रहती है। खासकर सिलेंडर बुक कराने से पहले ग्राहक अपने शहर में लागू कीमत जरूर चेक करते हैं।

आज यानी 13 सितंबर 2026 को भी घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों को लेकर ग्राहकों के बीच काफी दिलचस्पी है। अगर आप भी इस महीने गैस सिलेंडर लेने या बुक करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए काम की है। अलग-अलग शहरों में LPG की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में जानिए आज आपके शहर में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर किस कीमत पर मिल रहा है।

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं

13 सितंबर को 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। यानी ग्राहकों को फिलहाल अपने-अपने शहर के मौजूदा रेट पर ही सिलेंडर मिल रहा है। वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें अलग हैं और इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है।

नोएडा से पटना तक देखें सिलेंडर की कीमत

आज की पूरी LPG Price List

शहरघरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा)कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा)
दिल्ली₹942₹2,747.50
मुंबई₹941.50₹2,701
कोलकाता₹968₹2,884
चेन्नई₹957.50₹2,916.50
बेंगलुरु₹955.50₹2,831
तिरुवनंतपुरम₹951₹2,784
पटना₹1,031.50₹3,029
नोएडा₹939.50₹2,747.50
गुरुग्राम₹950.50₹2,764.50

घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर में अंतर समझें

घरेलू LPG सिलेंडर आमतौर पर घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर व्यावसायिक उपयोग के लिए होता है। दोनों की कीमतें अलग-अलग होती हैं और कमर्शियल LPG के रेट में होने वाला बदलाव घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

फिलहाल 13 सितंबर को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई नई कटौती या बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसलिए सिलेंडर बुक कराने वाले ग्राहकों को अपने शहर के अनुसार ऊपर दिए गए मौजूदा रेट पर ही भुगतान करना होगा।

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LPG Price 12 September 2026: आज LPG सिलेंडर कितने का है? दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत प्रमुख शहरों के रेट जानें

LPG Price 12 September 2026: अगर आप आज यानी 12 सितंबर 2026 को अपने घर के लिए LPG गैस सिलेंडर बुक करने जा रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। घरेलू रसोई गैस के दाम में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू LPG सिलेंडर ग्राहकों को पहले से तय कीमत पर ही मिलेगा। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच गैस सिलेंडर की कीमत स्थिर रहना आम परिवारों के मासिक बजट के लिए राहत की बात है। खासतौर पर उन लोगों को इससे फायदा होगा, जिनके घर में सिलेंडर की खपत ज्यादा होती है और हर महीने LPG पर खर्च करना पड़ता है।

हालांकि, घरेलू गैस के दाम भले ही स्थिर हैं, लेकिन कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया गया है। ऐसे में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य व्यावसायिक  प्रतिष्ठानों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं आज आपके शहर में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर कितने रुपये में मिल रहा है।

कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े

घरेलू गैस के दाम स्थिर रहने के बावजूद 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में सितंबर की शुरुआत में बढ़ोतरी की गई थी। इसका सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्तरां, ढाबे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ता है।

आज के शहरवार गैस सिलेंडर के दाम

शहरघरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा)कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा)
दिल्ली₹942₹2,747.50
मुंबई₹941.50₹2,701
कोलकाता₹968₹2,884
चेन्नई₹957.50₹2,916.50
बेंगलुरु₹955.50₹2,831
तिरुवनंतपुरम₹951₹2,784
पटना₹1,031.50₹3,029
नोएडा₹939.50₹2,747.50
गुरुग्राम₹950.50₹2,764.50

दिल्ली में कितने रुपये का है गैस सिलेंडर?

राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। वहीं 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल सिलेंडर 2,747.50 रुपये में मिल रहा है। सितंबर की शुरुआत में व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।

मुंबई में क्या है गैस का भाव?

मुंबई में घरेलू गैस सिलेंडर 941.50 रुपये का है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के लिए 2,701 रुपये चुकाने होंगे। घरेलू सिलेंडर की कीमत दिल्ली की तुलना में थोड़ी कम है।

कोलकाता और चेन्नई में कितनी है कीमत?

कोलकाता में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर 968 रुपये का है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,884 रुपये है। चेन्नई में घरेलू सिलेंडर 957.50 रुपये और कमर्शियल  सिलेंडर 2,916.50 रुपये का है।

कमर्शियल गैस सिलेंडर क्यों हुआ महंगा?

सितंबर की शुरुआत में तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल  गैस सिलेंडर के दाम में करीब 9.50 से 11.50 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी। बड़े सिलेंडर का इस्तेमाल कारोबारों में अधिक होता है, इसलिए इसके महंगा होने से होटल, रेस्तरां और ढाबों के खर्च पर असर पड़ सकता है।

घरेलू गैस के दाम आखिरी बार कब बदले?

14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में आखिरी बदलाव 7 जून 2026 को हुआ था। इसके बाद से घरेलू गैस के दाम लगातार स्थिर बने हुए हैं। ऐसे में फिलहाल घर के बजट पर गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का कोई नया असर नहीं पड़ा है।

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