Priyank Kharge news: कर्नाटक के गृह, आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि राज्य सरकार विजिलेंटिज्म के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और कानूनी प्रावधान हर किसी पर समान रूप से लागू होते हैं। न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट के दौरान मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता के साथ आयोजित ‘फायरसाइड चैट – हाउ कर्नाटक इज बिल्डिंग द इनोवेशन इकोनॉमी ऑफ भारत? में बोलते हुए खड़गे ने कहा कि राज्य में किसी भी तरह के विजिलेंटिज्म की इजाजत नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। कानून सबके लिए एक बराबर है।
पुलिसिंग और प्रशासन में टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
कर्नाटक में गवर्नेंस और कानून-व्यवस्था के क्रियान्वयन पर बात करते हुए खड़गे ने बताया कि राज्य ने पुलिसिंग और सार्वजनिक प्रशासन में तकनीक को तेजी से इंटिग्रेट किया है। ट्रैफिक मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और पुलिसिंग के क्षेत्रों में डिजिटल टूल्स का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रियांक खड़गे ने कहा कि हम ट्रैफिक, साइबर सुरक्षा और पुलिसिंग आदि में तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। गवर्नेंस में तकनीक के उपयोग के हमारे प्रयासों की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है।
पुलिस की उपस्थिति और निगरानी में सुधार के लिए सरकार ने एक नया एप्लिकेशन पेश किया है। खड़गे ने कहा कि अब पुलिस की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ा एक्शन: ₹2700 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना
राज्य में सड़क सुरक्षा और प्रवर्तन उपायों को उजागर करते हुए खड़गे ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ की गई बड़े पैमाने की कार्रवाई के आंकड़े साझा किए। पूरे राज्य में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 7.7 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों से राज्य भर में ₹2700 करोड़ से अधिक का जुर्माना लिया गया है।
क्विक कॉमर्स और गिग वर्कर्स पर क्या बोले मंत्री?
तेजी से बढ़ती ऐप-बेस्ड डिलीवरी सर्विस पर बात करते हुए खड़गे ने माना कि क्विक कॉमर्स के आने से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन बढ़ा है लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस कार्रवाई में सिर्फ डिलीवरी कर्मचारियों को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। खड़गे ने कहा कि 10 मिनट की डिलीवरी के इस दौर में कई तरह के उल्लंघन हो रहे हैं। हम अब उन्हें चार घंटे के लेक्चर दे रहे हैं। ट्रैफिक अपराधों को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन हम सिर्फ गिग वर्कर्स को दोष नहीं दे सकते।
बेंगलुरु के ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए ‘अर्बन मोबिलिटी मिशन’
प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम को कम करने के प्रयासों पर भी बात की। उन्होंने बेंगलुरु को भारत का इनोवेशन हब होने के साथ-साथ इसकी ट्रैफिक कैपिटल के रूप में भी परिभाषित किया। उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ की समस्या से निपटने और परिवहन योजना में सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक अर्बन मोबिलिटी मिशन की स्थापना की है।
खड़गे ने कहा कि, ‘हम अधिक से अधिक लोगों को मास ट्रांजिट सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम ई-कॉमर्स कंपनियों, फ्लीट मैनेजर्स, ट्रैफिक पुलिस, जीबीए (GBA) और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर एक मिशन मोड कमेटी बना रहे हैं।’
शहर के परिवहन परिदृश्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। गवर्नेंस, पुलिसिंग और शहरी बुनियादी ढांचे पर हुई इस व्यापक चर्चा के दौरान प्रियांक खड़गे ने जोर देकर दोहराया कि कर्नाटक की सरकार इस सिद्धांत पर चल रही है कि कानून सबके लिए समान है।
Bank of Baroda Q1 Results: बैंक ऑफ बड़ौदा ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान बैंक का प्रॉफिट 72 फीसदी गिरकर 1,278 करोड़ रुपये रहा। इसकी बड़ी वजह यूएई की एनएमसी हेल्थ के ज्वाइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ बैंक का कोर्ट के बाहर करीब 5,700 करोड़ रुपये का सेटलमेंट है।
Bank of Baorda (BoB) को एक साल पहले की जून तिमाही में 4,541 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9.5 फीसदी बढ़कर 12,524 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 11,435 करोड़ रुपये था। जून तिमाही में बैंक के नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NNPA) में हल्की कमी आई।
NNPA 10 बेसिस प्वाइंट्स घटकर 0.5 फीसदी पर आ गया। ग्रॉस एनपीए (GNPA) घटकर 1.99 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2.24 फीसदी था। बैंक ऑफ बड़ौदा का कैपिटल एडक्वेसी रेशियो (CAR) 16.31 फीसदी था। एक साल पहले की समान अवधि में यह 17.61 फीसदी था। इसका मतलब है कि बीते एक साल में में इसमें 130 बेसिस प्वाइंट्स की कमी आई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा का ग्लोबल एडवान्सेज जून तिमाही में 17.4 फीसदी बढ़कर 14.16 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.07 लाख करोड़ रुपये था। बैंक का डिपॉजिट 13.8 फीसदी बढ़कर 16.33 लाख करोड़ रुपये रहा।
BoB का शेयर 24 जुलाई को 1.27 चढ़कर 246.25 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर 18 फीसदी से ज्यादा गिरा है। बीओबी सरकारी बैंक है। इसने जून तिमाही के नतीजों के साथ डिविडेंड का ऐलान नहीं किया।
The Hyundai i20 has crossed the 15 lakh sales milestone in India, nearly 18 years after it first went on sale in December 2008. The premium hatchback reached the 1 lakh sales mark in 2010, crossed 5 lakh units in 2015, and hit the 10 lakh milestone in 2019.
Hyundai i20 generations so far
Its first-generation replaced the Hyundai Getz and played a key role in creating the premium hatchback segment in India. Depending on the trim and model year, it came with features such as a sunroof, automatic climate control, a cooled glovebox and six airbags. Buyers could choose between 1.2-litre petrol, 1.4-litre petrol and 1.4-litre diesel engine options.
First-generation Hyundai i20.
The carmaker introduced the second-generation model, called the Elite i20, in 2014. It featured the brand’s ‘Fluidic Sculpture 2.0’ design language, added more features and offered 1.2-litre petrol and diesel engine choices. Notably, the Elite i20 proved to be the most successful generation of the hatchback, recording sales of 8 lakh units during its seven-year run in the country.
Second-generation Hyundai i20.
The third-generation of the hatchback arrived in 2020 and remains on sale today. It is the first i20 generation in India to be offered with a turbo-petrol engine, although that is now limited to the sportier N Line version. Hyundai also offered a diesel engine initially, but it was discontinued in 2023. The current generation i20 received a facelift in September 2023 and continues to be one of the most feature-rich offerings in its segment.
Third-generation Hyundai i20.
Today, the standard i20 is powered by an 83hp 1.2-litre naturally aspirated petrol engine, paired with either a 5-speed manual or a CVT automatic. Whereas, the i20 N Line uses a 120hp 1.0-litre turbo-petrol engine, available with either a 6-speed manual or a 7-speed dual-clutch automatic gearbox.
Hyundai i20 price and rivals
The Hyundai i20 is priced between Rs 6 lakh and Rs 10.63 lakh, ex-showroom, while the i20 N Line costs Rs 9.27 lakh to Rs 11.74 lakh. Its rivals include the Maruti Baleno, Toyota Glanza and Tata Altroz. Hyundai unveiled the fourth-generation i20 in June 2026, although the company has not yet announced plans to bring it to India.
Market outlook :24 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,800 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 331.62 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 पर बंद हुआ। लगभग 2050 शेयरों में बढ़त हुई,1961 शेयरों में गिरावट आई और 196 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस,एटरनल, M&M, श्रीराम फाइनेंस और भारती एयरटेल शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,विप्रो,सिप्ला,ITC और HDFC लाइफ शामिल रहे।
सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी IT (0.8% ऊपर),निफ्टी PSU बैंक (0.5% ऊपर)और निफ्टी बैंक (0.18% ऊपर)रहे।
दूसरी ओर निफ्टी ऑटो सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.10% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी मेटल (0.55% नीचे),निफ्टी एनर्जी (0.57% नीचे),निफ्टी रियल्टी (0.55% नीचे),निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.46% नीचे),निफ्टी फार्मा (0.4% नीचे) और निफ्टी इंफ्रा (0.4% नीचे) रहे।
ब्रॉडर मार्केट भी अपने इंट्राडे निचले स्तरों से सुधरे। निफ्टी मिडकैप 100 बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि आने वाले समय में मार्केट का सेंटीमेंट खराब रह सकता है। तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने से मेन मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें संकट के समय के अपने पीक से काफी नीचे होने के बावजूद US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 52-हफ्ते के हाई पर पहुंच गए हैं। यह बॉन्ड मार्केट की उन चिंताओं को दिखाता है जो एनर्जी से जुड़ी महंगाई के जोखिम,मजबूत लेबर मार्केट की स्थिति और फेड के लगातार सख़्त रुख (hawkish stance) से जुड़ी हैं।
इन वजहों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इंपोर्ट पर वॉशिंगटन के नए टैरिफ ने एक्सपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टेक्नोलॉजी इंटेसिव मार्केट पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है,क्योंकि ग्रोथ पर ऊंची दरों का दबाव है और निवेशक दूसरे उभरते हुए मार्केट की ओर रुख करके जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अच्छे वैल्यूएशन और क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों के चलते बैंक निफ्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।
निफ्टी का आउटलुक
SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23650-23600 के जोन में दिख रहा है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है,तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23450 और फिर 23300 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,निफ्टी के लिए तकाल रेजिस्टेंस 23950-24000 के जोन में है,जो 50-दिन के EMA के साथ मेल खाता है।
सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी में भी निफ्टी जैसी ही शुरुआती कमजोरी दिखी। यह निचले स्तर पर खुला और नीचे की ओर गया,लेकिन फिर इंट्राडे के निचले स्तरों से तेज रिकवरी हुई जिससे नुकसान की भरपाई हो गई। इस रिकवरी की वजह से डेली चार्ट पर एक बड़ी बुलिश कैंडल बनी और इंडेक्स ने अपना 200-डे का EMA फिर से हासिल कर लिया,जो ट्रेडर्स के लिए एक अहम लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है।
आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57100-57200 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57600 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56300-56200 जोन में है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Laurus Labs Q1 Results:फार्मास्यूटिकल कंपनी लॉरस लैब्स ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है , कंपनी के तिमाही नतीजे सभी पैरामीटर्स पर साल-दर-साल के आधार पर अच्छे रहे है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए ₹2,026 करोड़ का रेवेन्यू बताया, जो पिछले साल के ₹1,570 करोड़ के आंकड़े से 29% ज़्यादा है।
तिमाही के लिए इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई (EBITDA) साल-दर-साल आधार पर 67% बढ़कर ₹382.1 करोड़ से ₹638.3 करोड़ पर हो गया।
तिमाही के लिए EBITDA मार्जिन साल-दर-साल के आधार पर 24.3% से सात परसेंटेज पॉइंट्स से ज़्यादा बढ़कर 31.5% हो गया। कंपनी के लिए यह मार्जिन कई सालों में सबसे ज़्यादा है, जिसमें अच्छे प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज की मदद मिली है।
जून तिमाही के आखिर में तिमाही के लिए ग्रॉस मार्जिन पिछले साल के 59.4% और मार्च तिमाही के 61.4% से बढ़कर 62.7% हो गया है।
अलग- अलग सेगमेंट का कैसा रहा प्रदर्शन
लॉरस लैब्स का CDMO बिज़नेस रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 67% और लगातार 48% बढ़कर ₹870 करोड़ हो गया। कंपनी ने इस ग्रोथ का क्रेडिट लेट-स्टेज क्लिनिकल प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल API सप्लाई की लगातार प्रोग्रेस को दिया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके पास 125 से ज़्यादा एक्टिव प्रोजेक्ट्स के साथ एक बढ़ती हुई पाइपलाइन है।
लॉरस ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में कहा कि वह कस्टमर डिमांड के आधार पर कमर्शियल स्केल पेप्टाइड्स ब्लॉक को भी आगे बढ़ा रही है।
अफोर्डेबल मेडिसिन्स बिज़नेस का रेवेन्यू तिमाही के दौरान 10% बढ़कर ₹1,156 करोड़ हो गया। हालांकि, यह आंकड़ा सीक्वेंशियल बेसिस पर 5% कम था क्योंकि इसने मार्च क्वार्टर में ₹1,223 करोड़ का आंकड़ा बताया था।
लॉरस ने कहा कि डिवीजन के पास एक हेल्दी ऑर्डर बुक, स्टेबल ARV और स्थापित वॉल्यूम ग्रोथ है, जिससे 10% ग्रोथ हुई। इसने कहा कि इस बिज़नेस के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियां बनी हुई हैं।
कंपनी इमर्जिंग मार्केट्स में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन बढ़ा रही है। अपने बिज़नेस के मौके को मजबूत करने के लिए, इसने साउथ अफ्रीका में एक ऑफिस भी खोला है।
रिज़ल्ट अनाउंसमेंट के बाद लॉरस लैब्स के शेयर आज 2% से ज्यादा बढ़कर ₹1,601.20 पर बंद हुआ। 2026 में अब तक स्टॉक 44% ऊपर है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
8th Pay Commission updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के अगले पे रिवीजन के लिए जारी हलचल के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने दिल्ली स्थित केंद्रीय कर्मचारियों के संघों, फेडरेशनों और यूनियनों के साथ वार्ता करने के लिए तारीख का ऐलान कर दिया है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक 8वें वेतन आयोग ने दिल्ली में स्थित या पंजीकृत कर्मचारी यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त को आयोग के साथ बातचीत करने का निमंत्रण दिया है। यह बैठकें अगली सैलरी रिवीजन पर चल रहे विचार-विमर्श की प्रक्रिया के तहत आयोजित की जा रही हैं।
23 जुलाई के नोटिस में आयोग ने क्या कहा?
वेतन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले स्टेकहोल्डर्स की सिफारिशें और विचार जानने के लिए यह परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। 23 जुलाई को जारी अपने नोटिस में आयोग ने कहा कि वह सिर्फ दिल्ली में स्थित या पंजीकृत केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के कर्मचारियों के संघों, परिसंघों और यूनियनों से 7 अगस्त और 10 अगस्त को बातचीत करेगा। हालांकि, इस बैठक में भाग लेने के लिए एक शर्त रखी गई है। सिर्फ वही संगठन इस बैठक के लिए अपॉइंटमेंट मांग सकते हैं जिन्होंने पहले ही अपना ज्ञापन जमा कर दिया है और आयोग के साथ दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में अब तक कोई वार्ता नहीं की है।
31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य
बैठक में शामिल होने के पात्र संगठनों के लिए आयोग ने समय-सीमा तय कर दी है। इच्छुक पात्र संगठनों को 31 जुलाई तक ऑनलाइन माध्यम से अपना अनुरोध जमा करना होगा। अनुरोध भेजते समय संगठनों को अपनी यूनिक मेमो आईडी साथ में दर्ज करनी होगी। बैठकों का स्थान और समय अलग से बताया जाएगा।
अन्य राज्यों के यूनियनों के लिए भी तय होगी तारीखें
आने वाले महीनों में देश भर के अन्य राज्यों के यूनियनों के साथ भी बातचीत की जाएगी। दिल्ली-एनसीआर के बाहर के कर्मचारी संघ और यूनियनें अपने स्वयं के राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में आयोग के साथ बातचीत के लिए समय मांग सकते हैं। आयोग ने बताया है कि आने वाली बैठकों और परामर्श का पूरा शेड्यूल उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया जाता रहेगा।
क्यों अहम हैं ये बैठकें?
कर्मचारी यूनियनों और संघों के साथ बातचीत हर वेतन आयोग के कामकाज का एक मानक हिस्सा होती है। इस बातचीत के दौरान स्टेकहोल्डर्स आयोग के सामने अपने मेमोरेंडम देके हैं। इनमें पे-स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन लाभ, करियर में प्रगति और सेवा शर्तें जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होते हैं। आयोग इन सभी मेमोरेंडम के साथ-साथ अलग अलग मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के इनपुट की समीक्षा करने के बाद ही केंद्र सरकार के लिए अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करता है।
क्या है 8वां वेतन आयोग?
केंद्र सरकार ने लाखों वर्किंग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन लाभों में संशोधन की सिफारिश करने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। आयोग की सिफारिशें एक बार अंतिम रूप ले लेने और सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद देश के लाखों सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए अगले दौर के वेतन संशोधन को निर्धारित करेंगी। फिलहाल आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले अलग अलग स्टेकहोल्डर्स से मिलने और राय बनाने के दौर में है।
अगर आप कम कीमत में एक स्मार्टफोन लेना चाहते हैं तो, iQOO ने भारत में आधिकारिक तौर पर iQOO Z11 Lite 5G लॉन्च कर दिया है। Vivo के इस सब-ब्रांड ने अपने इस नए फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर, 6500mAh की बैटरी और 120Hz डिस्प्ले दिया है। साथ ही इंट्रोडक्टरी ऑफर्स के साथ इसकी शुरुआती कीमत 18,000 रुपये से कम रखी है। अब आइए iQOO Z11 Lite 5G के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में डिटेल में जानते हैं।
iQOO Z11 Lite के स्पेसिफिकेशन्स
चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी iQOO ने Z11 Lite में 6.74-इंच का HD+ IPS LCD डिस्प्ले दिया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,200 निट्स तक की हाई ब्राइटनेस के साथ आएगा। स्क्रीन में सेल्फी कैमरे के लिए वॉटरड्रॉप नॉच है, और फोन की मोटाई 8.4mm है और वजन 209 ग्राम है।
यह हैंडसेट MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट पर चलता है, जिसमें LPDDR4X RAM और UFS 2.2 स्टोरेज दिया गया है। iQOO के अनुसार, AnTuTu बेंचमार्क पर इस फोन का स्कोर 5,79,000 से ज्यादा है।
सॉफ्टवेयर की बात करें तो, यह डिवाइस Android 16 पर आधारित OriginOS 6 के साथ आता है। चीनी टेक कंपनी ने इस फोन में दो साल के Android OS अपग्रेड और चार साल के सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। इसके अलावा, इसमें AI फीचर्स भी शामिल हैं, जैसे AI क्रिएशन, AI कैप्शन्स और Google Gemini इंटीग्रेशन।
पावर देखें तो, Z11 Lite में 44W फासस्ट चार्जिंग के साथ 6500mAh की बैटरी दी गई है। iQOO का कहना है कि सिर्फ 10 मिनट की चार्जिंग से 8 घंटे तक कॉलिंग या 7 घंटे से ज्यादा समय तक ऑनलाइन वीडियो देखा जा सकता है। यह फोन वायर्ड रिवर्स चार्जिंग और बायपास चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है।
कैमरे की बात करें तो, इस फोन के रियर में 50MP का Sony मेन कैमरा और एक सेकेंडरी सेंसर है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।
इस डिवाइस में धूल और पानी की छींटों से बचाव के लिए IP65 रेटिंग के साथ-साथ मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और SGS 5-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिलता है।
भारत में iQOO Z11 Lite की कीमत, रंग और उपलब्धता
iQOO Z11 Lite 5G के 4GB + 128GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹19,499 है, जबकि 6GB + 128GB मॉडल की कीमत ₹21,499 और 6GB + 256GB वर्शन की कीमत ₹24,499 है। वहीं, 1,500 रुपये के एलिजिबल बैंक ऑफर के साथ, इस फोन की शुरुआती कीमत घटकर ₹17,999 हो जाती है।
यह स्मार्टफोन 30 जुलाई से Amazon, iQOO इंडिया की वेबसाइट और अधिकृत रिटेल स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इच्छुक ग्राहक Solar Flame और Midnight Blue के कलर ऑप्शन में इसे चुन सकते हैं।
Kia India has officially launched its second mass-market electric car, the Syros EV. While the sub-4m Syros EV directly rivals the Tata Nexon EV and Mahindra XUV 3XO, the Kia’s pricing sees quite a bit of overlap with that of the Maruti Suzuki e Vitara, which is of a segment above. In fact, the top-spec trims of both electric SUVs are identically priced. Therefore, we compared the top-spec versions of the Syros EV and e Vitara on paper to determine which electric SUV offers more bang for your buck.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim dimensions
e Vitara is longer, but Syros EV is wider and taller
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha dimensions
Syros EV
e Vitara
Length (mm)
3,995
4,275
Width (mm)
1,805
1,800
Height (mm)
1,670
1,640
Wheelbase (mm)
2,550
2,700
Frunk (litres)
16
–
Wheel size (inches)
17
18
Expectedly, the Syros EV is 280mm shorter overall (150mm shorter wheelbase) than the e Vitara, but interestingly, the Kia compact SUV is 5mm wider and 30mm taller. Neither Kia nor Maruti Suzuki quote precise boot space figures for their respective electric SUVs, but it’s worth noting that the Syros EV comes with a 16-litre frunk, while the e Vitara completely lacks storage space up front. However, the top-spec e Vitara does get larger alloy wheels than the equivalent Syros EV.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim powertrains
Syros EV is quicker, e Vitara claims higher range and has a bigger battery
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha battery and range
Syros EV
e Vitara
Battery size (kWh)
51.4
61
Electric motor setup
Single motor, front
Single motor, front
Drive layout
FWD
FWD
Power (hp)
171
174
Torque (Nm)
255
193
Claimed 0-100kph time (seconds)
8.1
8.7
ARAI range (km)
526
543
The Syros EV’s battery pack is almost 10kWh smaller than that of the e Vitara, but the Kia is only 17km behind in terms of ARAI-claimed range. Both electric SUVs are front-wheel drive and make similar amounts of power, but the Syros EV edges ahead by a significant 62Nm in terms of torque output. This is partly why the Syros EV claims a 0.6sec quicker 0-100kph time than that of the e Vitara.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim charging speeds
Syros EV supports higher DC wattages
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha charging times
Syros EV
e Vitara
Battery size (kWh)
51.4
61
7.4kW AC charging (10-100 percent)
–
9 hrs
11kW AC charging (10-100 percent)
8.9 hrs
–
DC fast charging (10-80 percent)
39 mins at 100kW
45 mins at 70kW
Kia and Maruti Suzuki quote AC charging speeds at different wattages, so the Syros EV and e Vitara can’t be directly compared on this front. However, it’s noteworthy that though the e Vitara has a larger battery than the Syros EV, the former takes roughly the same amount of time for a 10-100 percent charge at 7.4kW as the latter does at 11kW. Coming to DC charging, the Syros EV supports up to 100kW, while the e Vitara tops out at 70kW.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim exterior features
Syros EV gets puddle lamps, but e Vitara offers much greater choice in colours
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha exterior features
Syros EV
e Vitara
LED projector headlamps
Yes (auto)
Yes (auto)
Front fog lamps
Yes
Yes
LED tail-lamps
Yes
Yes
Puddle lamps w/ logo projection
Yes
No
Roof rails
Yes
No
Powered ORVMs
Yes
Yes
Auto-folding ORVMs
Yes
Yes
Flush door handles
Yes
No
Body cladding
Yes
Yes
Rear spoiler
Yes
Yes
Colour options
2, monotone
10, monotone + dual-tone
Both electric SUVs are quite evenly matched in terms of exterior features, but the Syros EV takes the lead by way of roof rails and door-mounted puddle lamps that project the Kia logo. The Syros EV has flush door handles too, but some may appreciate the e Vitara’s conventional door handles more. Colours are a square win for the e Vitara, as it offers six monotone options and four dual-tone finishes. The Syros X-Line ER can be had in either Aurora Black Pearl or Matte Graphite, both of which are difficult to maintain. Buyers who want other colours have no option but to consider lower-spec Syros EV variants.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim interior features
Syros EV beats e Vitara with panoramic sunroof, cooled rear seat bases, and more
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha interior features
Syros EV
e Vitara
Infotainment screen
12.3-inch
10.1-inch
Digital driver’s display
12.3-inch
10.25-inch
Climate control display
5-inch
–
Sunroof
Panoramic
Fixed single-pane
Wireless charger
Yes
Yes
Driver’s seat adjustment
4-way powered
10-way powered
Ventilated front seats
Yes
Yes
Rear seat base ventilation
Yes
No
Automatic climate control
Yes
Yes
Ambient lighting
Yes
Yes
Sound system
8-speaker Harmon Kardon
8-speaker Infinity
Apple CarPlay & Android Auto
Wireless
Wireless
Connected car tech
Yes
Yes
OTA updates
Yes
Yes
Rear sunshades
Yes
No
Rear centre armrest
Yes
Yes
Sliding, reclining rear seats
Yes
Yes
Even on the inside, the Syros EV’s feature set comes out on top. Over the e Vitara, the Syros EV packs larger infotainment and instrument displays, an additional screen for climate control settings, a panoramic sunroof, rear sunshades, and ventilation for the rear seat bases – this feature is not available even in electric SUVs a segment above the Syros EV. The e Vitara’s only advantage over the Syros EV is a greater gamut of electrical adjustment for the driver’s seat.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim driving features
Syros EV scores big on convenience by way of paddle shifters for regen modes
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha driving features
Syros EV
e Vitara
Drive modes
Eco, Normal, Sport
Eco, Normal, Sport
Terrain modes
No
Snow
V2L function
Yes
No
Multi-level regen braking
Yes
Yes
Paddle shifters for regen
Yes
No
Cruise control
Adaptive
Adaptive
Both the Syros EV and e Vitara come with three drive modes and adaptive cruise control, but the Kia SUV inches forward thanks to vehicle-to-load (V2L) functionality, which lets you power external devices from the battery pack. The Syros EV also offers paddle shifters to cycle through the regenerative braking levels, while the e Vitara makes do with just a knob on the centre console. However, the e Vitara does offer a Snow terrain mode over the Syros EV.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim safety features
e Vitara wins thanks to an extra airbag, rain-sensing wipers, and 5-star BNCAP score
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha safety features
Syros EV
e Vitara
Bharat NCAP rating
Yet to be tested
5 stars
Airbags
6
7
ABS with EBD
Yes
Yes
Electronic stability program
Yes
Yes
Follow-me-home headlamps
Yes
Yes
Hill hold control
Yes
Yes
TPMS
Yes
Yes
360-degree camera
Yes
Yes
Parking sensors
Front, rear, side
Front, rear
Electronic parking brake
Yes (w/ auto-hold)
Yes (w/ auto-hold)
Rain-sensing wipers
No
Yes
Auto-dimming IRVM
Yes
Yes
ISOFIX child seat anchors
Yes
Yes
Rear wiper, defogger
Yes
Yes
Disc brakes
Front, rear
Front, rear
Level 2 ADAS
Yes
Yes
Acoustic vehicle alert system
Yes
Yes
Coming to safety, the e Vitara finally scores a win. It’s the only one here to come with seven airbags and rain-sensing wipers, whereas the Syros EV sets itself apart with side parking sensors. The e Vitara also holds a 5-star crash safety rating from Bharat NCAP, while the Syros EV has not been tested yet. It’s worth noting, though, that the ICE-powered Syros was awarded 5 stars by Bharat NCAP, so a similar rating for the compact SUV’s electric derivative is very possible.
Kia Syros EV vs Maruti Suzuki e Vitara: Top trim prices
Syros EV for buyers seeking features, e Vitara for those who want a bigger car
Kia Syros EV X-Line ER vs Maruti e Vitara Alpha price comparison
Syros EV
e Vitara
Price (Rs, lakh)
20.00
19.99
As noted previously, there is next to no difference in the pricing of the Syros EV X-Line ER and e Vitara Alpha, which means the final decision comes down to your needs and preferences. If you want as many features as possible, are fine with a dark colour, and don’t mind smaller dimensions and funkier styling, the Syros EV X-Line ER is the one to go for. On the other hand, if you want the price you pay to be reflected in the size of the car, more choice in colours, more conventional looks, and are happy to forgo some features, you can consider the e Vitara.
It’s also worth noting that both the Syros EV and e Vitara can be purchased with battery-as-a-service (BaaS), which converts the cost of the battery into separate usage-based EMIs, thereby lowering the upfront cost. Kia has yet to reveal the BaaS price of the Syros EV X-Line ER, but the e Vitara Alpha costs Rs 14.49 lakh – Rs 5.5 lakh off the sticker price – with a Rs 4.39/km battery usage fee.
Invest in FD : अगर आप भी उन इन्वेस्टर्स में से एक जो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी (FD)में निवेश करना चाहते है तो आप आसानी से इन बैंकों से 8.1 फीसदी तक का इंटरेस्ट कमा सकते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे ज़्यादा FD रेट के साथ सबसे आगे हैं, वहीं प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के लेंडर भी अलग-अलग समय में अच्छा रिटर्न दे रहे हैं।
FD इंटरेस्ट रेट में थोड़ा सा भी अंतर लंबे समय में रिटर्न को काफी बढ़ा सकता है, खासकर बड़ी रकम इन्वेस्ट करने वाले सीनियर सिटिजन के लिए। FD बुक करने से पहले अलग-अलग बैंकों के रेट की तुलना करने से बिना ज़्यादा रिस्क लिए इंटरेस्ट इनकम को ज़्यादा से ज़्यादा करने में मदद मिल सकती है। निवेश से पहले यहां देखें उन बैंकों के लिस्ट जो दे रहे है सबसे ज्यादा रिटर्न।
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
जन स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.80 प्रतिशत तक की फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरें दे रहा है।
DCB बैंक 7.50 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
बंधन बैंक 7.45 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
CSB बैंक 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
IDFC FIRST बैंक 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
SBM बैंक इंडिया 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
सिटी यूनियन बैंक 7.25 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
बैंक ऑफ़ इंडिया 6.85 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
पंजाब एंड सिंध बैंक 6.85 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
इंडियन बैंक 6.80 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
बैक ऑफ़ बड़ौदा 6.75 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया 6.70 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र 6.65 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
ड्यूश बैंक 7.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक 6.60 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
HSBC बैंक 5.50 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि 5 लाख रुपये के इंश्योरेंस कवर में रहने के लिए कई बैंकों में डिपॉजिट बांट लें, ज़्यादा रिटर्न के लिए छोटे फाइनेंस बैंकों का चुनिंदा इस्तेमाल करें, और लिक्विडिटी की जरूरतों के हिसाब से डिपॉजिट की अवधि तय करें। डिपॉजिट इंश्योरेंस प्रोटेक्शन और स्थिर रिटर्न के साथ, FD रिटायर लोगों के लिए एक भरोसेमंद इन्वेस्टमेंट का तरीका बना हुआ है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
यूनाइटेड किंगडम में हुई एक अदालती जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय सऊदी प्रिंस अब्दुल्लाह बिन फहद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत लंदन के एक लग्जरी होटल में शराब, पार्टी ड्रग और एंटी-एंजाइटी दवाइयों के एक जानलेवा और घातक कॉकटेल के सेवन से हुई थी। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस अब्दुल्लाह का शव पिछले साल 25 नवंबर को केंसिंग्टन स्थित पांच सितारा मैरियट होटल में उनके कमरे के बाथरूम के फर्श पर पड़ा मिला था। एक क्लीनर जब उनके बंद कमरे में आया तो प्रिंस की संदिग्ध मौत की जानकारी सामने आई। पैरामेडिक्स द्वारा उन्हें बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।
होटल में अकेले लौटे थे प्रिंस
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस 19 नवंबर को एक हफ्ते के लिए इस 5-स्टार होटल में चेक-इन हुए थे। मौत से ठीक एक रात पहले सीसीटीवी फुटेज में उन्हें आखिरी बार देखा गया था, जब वे सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले थे और फिर अकेले ही होटल वापस लौट आए थे। जांचकर्ताओं के लिए यह सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम सबूत साबित हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि घटना के वक्त उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और मामले में किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता नहीं थी।
जांच में क्या निकला? शराब, GHB और जैनैक्स का ‘जानलेवा कॉकटेल’
इनर वेस्ट लंदन कॉरोनर्स कोर्ट में हुई जांच के बाद असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन इस नतीजे पर पहुंचे कि प्रिंस की मौत मल्टी-ड्रग इंजेशन यानी एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों और दवाओं के सेवन से हुई है। उन्होंने इसे दुर्घटनाजन्य मौत का मामला करार दिया। इसका मतलब है कि यह मौत अनजाने में हुई एक दुर्घटना थी। टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में प्रिंस के खून में अल्कोहल का कंसंट्रेशन 222 mg प्रति 100 ml पाया गया, जो इंग्लैंड में ड्रिंक-एंड-ड्राइव की कानूनी सीमा से करीब तीन गुना अधिक था। विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि सिर्फ शराब का इतना स्तर ही किसी इंसान को कोमा में भेजने के लिए काफी था।
जांचकर्ताओं को उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटाइरेट (GHB – जिसे आमतौर पर पार्टी ड्रग कहा जाता है) का संभावित रूप से जानलेवा स्तर मिला। इसके अलावा गांजा, जैनैक्स और दूसरे एंटी-एंजाइटी दवाओं के अंश भी मिले। पोस्ट-मॉर्टम जांच में पाया गया कि प्रिंस को कोई पुरानी या गंभीर बीमारी नहीं थी। मेडिकल साक्ष्यों ने निष्कर्ष निकाला कि शराब और कई दवाओं के इस घातक कॉकटेल ने कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर किया, जिससे उनकी मौत हो गई।
नशे की लत से जूझ रहे थे सऊदी प्रिंस
सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों से पता चला कि मौत से पहले प्रिंस अब्दुल्लाह शराब के अत्यधिक सेवन और जैनैक्स दवा पर निर्भरता की समस्या से जूझ रहे थे। द टेलीग्राफ के मुताबिक उन्हें पिछले साल अगस्त में रोहैम्पटन के प्रायरी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शराब, बेंजोडायजेपाइन और प्रेगाबालिन से डिटॉक्सिफिकेशन का इलाज कराया था। प्रायरी क्लीनिक छोड़ने के बाद, उन्होंने मर्सियासाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लीनिक में रेसेपरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कराया और अक्टूबर में वहां से डिस्चार्ज हुए थे।
कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. विक्टोरिया चमोरो ने अदालत को बताया कि प्रिंस को एंजाइटी के लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दी थी। डिस्चार्ज के समय उन्हें आत्महत्या के जोखिम वाला नहीं माना गया था, हालांकि बाद में वे निर्धारित ऑनलाइन फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल नहीं हुए थे।
न आत्महत्या का सबूत, न ही किसी साजिश का अंदेशा
असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन ने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि प्रिंस अब्दुल्लाह अपनी जान खुद लेना चाहते थे। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरोनर ने नोट किया कि प्रिंस ने कभी खुदकुशी के विचार व्यक्त नहीं किए थे, होटल के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला जो यह दर्शाता हो कि उनकी मौत से पहले वहां कोई और व्यक्ति मौजूद था। अकेले होटल लौटने की सीसीटीवी फुटेज ने भी किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।
सऊदी शाही दरबार ने कुछ दिनों बाद की थी मौत की घोषणा
सऊदी रॉयल कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 2 दिसंबर को प्रिंस अब्दुल्लाह के निधन की सार्वजनिक घोषणा की थी। सऊदी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रिंस के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजकुमारों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।