कल का मौसम: 22 अगस्त को मूसलाधार बारिश की चेतावनी! IMD ने बताया दिल्ली-यूपी से लेकर MP-बिहार के मौसम का हाल

India Weather Update: देश भर में मानसून की हलचल ने अलग अलग इलाकों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का मौसम बना रखा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार 22 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक देश के अधिकांश राज्यों में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत देश के 15 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को मध्य प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मौसम का कड़ा मिजाज देखने को मिलेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पश्चिमी मध्य प्रदेश के इलाकों में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पूरे मध्य प्रदेश में बारिश के साथ-साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा। मौसम के रौद्र रूप को देखते हुए लोगों को सावधान रहने की हिदायत दी गई है।

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दिल्ली, यूपी, बिहार और पंजाब-हरियाणा में झमाझम बारिश

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में 22 अगस्त को झमाझम बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बादलों का जमावड़ा रहेगा और कई जगहों पर भारी बारिश देखने को मिल सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भी तेज बारिश की संभावना है।

पूर्वोत्तर भारत और तटीय राज्यों का हाल

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का खतरा

बारिश के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बवंडर जैसी हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बिजली कड़कने की आशंका है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तटीय कर्नाटक, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई जगहों पर बहुत तेज हवाएं सतही चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, तूफानी हवाओं की चेतावनी

समुद्री क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। अरब सागर के अधिकांश पश्चिमी-मध्य हिस्से, सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के पास 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी और श्रीलंका के दक्षिणी तट से सटे इलाकों में भी 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन तटीय और समुद्री क्षेत्रों में न जाने की कड़ी चेतावनी दी है।

iPhone 18 Pro की लॉन्च डेट से कीमत तक लीक हुए बड़े डिटेल, जानें क्या-क्या मिलेगा नया

Apple अगले महीने iPhone 18 Pro से पर्दा उठा सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी के हर साल होने वाले सितंबर इवेंट में नई प्रीमियम iPhone सीरीज पेश की जाएगी। हालांकि, Apple ने अभी तक इस इवेंट या नए iPhone को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

कई रिपोर्ट्स और लीक्स की मानें तो इस बार नई सीरीज में iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और एक नया iPhone Ultra देखने को मिल सकता है। वहीं, सामान्य iPhone 18 को बाद में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

ऐसे में अगर आप भी सोच रहे हैं कि iPhone 18 Pro में क्या खास मिल सकता है, तो मौजूदा लीक्स और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के आधार पर फोन से जुड़ी अब तक सामने आई सभी संभावित जानकारियां यहां दी गई हैं।

संभावित लॉन्च डेट

Apple आम तौर पर सितंबर में नए iPhone लॉन्च करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल का इवेंट 9 सितंबर को कैलिफ़ोर्निया के क्यूपर्टिनो में स्टीव जॉब्स थिएटर में हो सकता है। अब अगर Apple अपने तय शेड्यूल के हिसाब से चलता है, तो घोषणा के कुछ दिन बाद ही प्री-ऑर्डर शुरू हो सकते हैं और महीने के आखिर में ये फोन रिटेल में उपलब्ध हो सकते हैं।

यह इवेंट इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि Tim Cook के कार्यकाल के बाद Apple के नए CEO John Ternus के नेतृत्व में यह कंपनी का पहला बड़ा iPhone लॉन्च हो सकता है।

डिजाइन और डिस्प्ले

iPhone 18 Pro के डिजाइन में इस बार कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलने की उम्मीद नहीं है। लीक्स के मुताबिक, Apple iPhone 17 Pro के डिजाइन को ही आगे बढ़ा सकती है, हालांकि फोन के लुक में कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर किए जा सकते हैं।

अटकलें हैं कि इस स्मार्टफोन में ProMotion टेक्नोलॉजी वाला 6.3-इंच का LTPO OLED डिस्प्ले होगा, जो 120Hz तक का अडैप्टिव रिफ्रेश रेट देगा। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि Apple आउटडोर में बेहतर विजिबिलिटी के लिए पीक ब्राइटनेस लेवल को बेहतर बना सकता है।

कुछ अफवाहों का दावा है कि Dynamic Island छोटा हो सकता है, हालांकि इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना ​​है कि ऐसा बदलाव शायद iPhone की किसी आने वाली जेनरेशन में ही देखने को मिले।

परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro में Apple का अगली पीढ़ी का A20 Pro प्रोसेसर होगा, जिसे खबरों के अनुसार 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से बनाया जाएगा।

इस चिपसेट के साथ 12GB RAM होने की उम्मीद है, जिससे ऑन-डिवाइस AI फीचर्स और मल्टीटास्किंग के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। नए प्रोसेसर से पिछली पीढ़ी की तुलना में पावर एफिशिएंसी, ग्राफिक्स परफॉर्मेंस और कनेक्टिविटी में भी सुधार होने की उम्मीद है।

Apple iOS में AI क्षमताओं का विस्तार जारी रख सकता है। इसके अलावा, अपग्रेडेड हार्डवेयर से ज्यादा एडवांस्ड ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

कैमरा अपग्रेड

उम्मीद है कि कैमरे में होने वाले सुधार पूरी तरह से हार्डवेयर को फिर से डिजाइन करने के बजाय इमेज क्वालिटी पर फोकस्ड होंगे।

iPhone 18 Pro में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप बरकरार रहने की संभावना है, और रिपोर्ट्स में बेहतर सेंसर, खासकर टेलीफोटो कैमरे के लिए, होने का संकेत दिया गया है। कुछ लीक से पता चलता है कि Apple बड़े Pro Max मॉडल के लिए वेरिएबल अपर्चर कैमरा सिस्टम रख सकता है, जबकि स्टैंडर्ड Pro मॉडल में यह फीचर नहीं होगा।

Apple से ऐसे सॉफ्टवेयर सुधार लाने की भी उम्मीद है जो फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग को बेहतर बनाएंगे। इसमें A20 Pro चिप की नई इमेज प्रोसेसिंग क्षमताएं मदद करेंगी।

बैटरी और चार्जिंग

हालांकि, बैटरी की क्षमता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone 18 Pro में 5,000mAh की बैटरी होने की संभावना कम है। इसके बजाय, उम्मीद है कि Apple A20 Pro प्रोसेसर और iOS ऑप्टिमाइजेशन के कॉम्बिनेशन से परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर ध्यान देगा।

इन बदलावों से बैटरी का साइज ज्यादा बढ़ाए बिना ही बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

अनुमानित कीमत

इस साल कीमतें बढ़ने की उम्मीद है। कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि Apple, iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत को पिछले मॉडल के मुकाबले लगभग $100 तक बढ़ा सकता है।

अगर ऐसा होता है, तो भारत में भी इसकी कीमत बढ़ सकती है और शुरुआती कीमत 1.5 लाख रुपये के करीब पहुंच सकती है। हालांकि, Apple ने कीमत के बारे में अभी कोई जानकारी कन्फर्म नहीं की है।

ध्यान रखें कि लॉन्च से पहले सामने आई ये सभी जानकारियां लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इसलिए फोन के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत को लेकर अंतिम जानकारी Apple की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।

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Govinda: जब गोविंदा ने शाहरुख खान से लेकर आमिर तक के स्टारडम पर किया था कमेंट, यूजर्स बोले- सब टिके रहे…वे ही खो गए

Govinda: 1990 के दशक के मशहूर स्टार गोविंदा, जिन्होंने कभी शाहरुख खान और आमिर खान के स्टारडम पर तंज कसा था, पिछले एक साल से अपनी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ चल रहे सार्वजनिक झगड़े की वजह से सुर्खियों में हैं। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले सुपरस्टार गोविंदा के बारे में अब उनकी फिल्मों से ज़्यादा उनकी उथल-पुथल भरी शादीशुदा जिंदगी की चर्चा हो रही है। उनकी आखिरी फिल्म ‘रंगीला राजा’ 2019 में रिलीज हुई थी।

19 अगस्त को मामला तब बदला जब 59 वर्षीय सुनीता आहूजा ने पिछले साल दायर किया गया तलाक का केस वापस ले लिया है। खबर है कि 61 वर्षीय गोविंदा एक नई फिल्म पर काम कर रहे हैं, जिसमें उनके साथ काफी कम उम्र की एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार हैं। लेकिन फिल्म से ज्यादा गोविंदा और कोमल के कथित अफेयर ने लोगों का ध्यान खींचा।

एक X यूजर ने 1990 के दशक में अपने करियर के पीक पर दिए गए गोविंदा के एक मैगज़ीन इंटरव्यू के दौरान किए गए बड़े-बड़े दावों को शेयर किया। इसमें गोविंदा ने कहा, “देखते हैं आमिर, सलमान, शाहरुख और अजय कब तक टिक पाते हैं!” इंटरव्यू के दौरान एक्टर ने यह भी कहा, “हिट देने के लिए मुझे श्रीदेवी या माधुरी की जरूरत नहीं है।”

गोविंदा ने अमिताभ बच्चन को भी नहीं बख्शा, जिनके साथ उन्होंने 1998 में ‘बड़े मियां छोटे मियां’ में काम किया था। एक और तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “अमिताभ ने भी पिछले दस सालों में कहां कोई हिट दी है?” जैसे ही X पोस्ट शेयर हुई, उस पर ढेरों कमेंट आने लगे।

एक यूजर ने लिखा, “सब टिके रहे, बस वो नहीं।” दूसरे यूजर ने लिखा, “घमंड अंधा कर देता है।”एक और कमेंट में लिखा था, “अति आत्मविश्वास से कुछ हासिल नहीं होता, भाई। देखो, अगर वो सुनीता के प्रति वफादार होता, तो कर्म का फल मिल जाता। ये सारे चिंदी खान उसके चमचे बनकर खड़े होते – अफसोस, बहुत जल्दी जाना पड़ा।”

एक और कमेंट में लिखा था, “वो एक बेहतरीन ऑल-राउंड एंटरटेनर थे। लेकिन उनका अहंकार और घमंड ही उनके पतन का कारण बना। वरना, उनके साथ काम करने वाले सभी अभिनेता उनके सामने फीके लगते थे। साथ ही, जब भी मुझे अवतार फिल्म के बारे में उनकी कही बात याद आती है, तो लगता है कि वो मानसिक रूप से बीमार हैं।”

एक और कमेंट में लिखा था, “उनका घमंड ही उनके पतन का कारण बना।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “एसआरके के 10वें मैनेजर के पास गोविंदा से भी ज्यादा पैसा है। अंत में केवल बुद्धिमान और विनम्र ही टिक पाते हैं।”

सलमान खान और गोविंदा के बीच अनबन की अफवाहें

इस पोस्ट में गोविंदा ने सलमान खान पर तंज भी कसा है। अगर आप फिल्म प्रेमी हैं, तो आप जानते ही होंगे कि दोनों के बीच ‘पुराना इतिहास’ रहा है। गोविंदा ने एक बार 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जुड़वा’ की कास्टिंग को लेकर चल रही चर्चाओं को हवा दी थी। एक पुराने इंटरव्यू में गोविंदा ने बताया था कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद भी सलमान खान ने उन्हें सीधे तौर पर प्रोजेक्ट छोड़ने के लिए कहा था।

2019 में बॉलीवुड हंगामा को दिए एक इंटरव्यू में गोविंदा ने कहा था, “उस समय मैं ‘जुड़वा’ कर रहा था और किसी दिन सलमान ने मुझे 2-3 बार फोन किया और कहा कि ‘छीची भैया, आप कितनी हिट दोगे यार?'” मैंने बोला, क्या हुआ? वो बोला, ‘वो जो पिक्चर आप कर रहे हो, जुड़वा, वो आप बंद कर दीजिए और वो मुझे दे दीजिए।’

उन्होंने आगे कहा, “सलमान ने कहा ‘निर्देशक डेविड धवन भी आपको मुझे देना पड़ेगा। निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी मैंने आपके साथ काम किया।’ निर्देशक और निर्माता। इसलिए फिल्म, जो पहले से ही निर्माणाधीन थी, रोक दी गई, बंद कर दी गई और अंतत सलमान को सौंप दी गई।”

गोविंदा और सुनीता आहूजा का उतार-चढ़ाव भरा रिश्ता

पिछले साल से ही गोविंदा और सुनीता के तलाक की खबरें ऑनलाइन चल रही हैं। कुछ महीने पहले सुनीता आहूजा के कुछ इंटरव्यू में अपनी निजी बातें बताने के बाद, गोविंदा और सुनीता के रिश्ते में खटास की अटकलें और तेज़ हो गईं। इन अफ़वाहों के बीच, ETimes की एक रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “सुनीता ने कुछ महीने पहले अलग होने का नोटिस भेजा था, लेकिन तब से इस मामले में कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई है।”

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पिछले साल दोनों के बीच सुलह हो गई थी। हाल ही में, जब गोविंदा को एयरपोर्ट पर कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया, तो सुनीता आहूजा ने उन पर तंज कसते हुए उन्हें ‘शुगर डैडी’ कहा। गोविंदा ने एक वीडियो मैसेज में सबके सामने सुनीता की ‘अपमानजनक’ भाषा के इस्तेमाल का जवाब दिया। गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी मार्च 1987 में हुई थी। दोनों ने 1988 में अपनी बेटी टीना के जन्म के बाद तक अपनी शादी की बात छिपाकर रखी थी। कई साल बाद, 1997 में उनके बेटे यशवर्धन का जन्म हुआ।

LIC का जीवन उमंग प्लान, सिर्फ कुछ साल चुकाएं प्रीमियम और जीवनभर का बीमा कवर पाएं

अगर आप लंबी अवधि तक इंश्योरेंस प्रोटेक्शन वाली पॉलिसी चाहते हैं तो आप एलआईसी की एक खास पॉलिसी के बारे में सोच सकते हैं। इस पॉलिसी का नाम एलआईसी जीवन उमंग है। इस पॉलिसी में निवेश से 100 साल की उम्र तक बीमा कवर पक्का हो जात है। खास बात यह है कि एलआईसी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम सरकार की इंश्योरेंस कंपनी है, जिससे इसकी पॉलिसी में निवेश करने में किसी तरह का रिस्क नहीं है।

100 साल के होने तक मिलता है बीमा कवर

जो लोग रिटायरमेंट के बाद गारंटीड सालाना इनकम चाहते हैं, वे LIC Jeevan Umang Plan में निवेश शुरू कर सकते है। यह दरअसल एक होल- लाइफ इंश्योरेंस प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर को तब तक बीमा कवर मिलता है, जब तक वह 100 साल का नहीं हो जाता। इस प्लान में आपको प्रोटेक्शन के साथ इनकम का भी विकल्प मिलता है।

प्रीमियम पेमेंट पीरियड के विकल्प

इस पॉलिसी में प्रीमियम चुकाने की अवधि ग्राहक अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकता है। ग्राहक को 15 साल, 20 साल, 25 साल और 30 साल तक प्रीमियम चुकाने का विकल्प मिलता है। इनमें से वह किसी एक चुनाव कर सकता है। यह एक पार्टिसिपेटरी प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर को पॉलिसी के परफॉर्मेंस के हिसाब से बोनस मिलता है।

टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद

पॉलिसी की अवधि में हर साल चुकाए जाने वाले प्रीमियम पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का बेनेफिट मिलता है। साथ ही पॉलिसीहोल्डर की मौत या पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा टैक्स-फ्री होता है। टैक्स से यह छूट इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 10डी(डी) के तहत मिलती है।

डेथ बेनेफिट का फ्लेक्सिबल पेमेंट

इस पालिसी की एक खास बात यह है कि पॉलिसीहोल्डर किस्तों में डेथ बेनेफिट के विकल्प का भी चुनाव कर सकता है। इसमें पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में बीमा के पैसे का पेमेंट एकमुश्त की जगह 5 साल, 10 साल या 15 साल के दौरान नॉमिनी को मिलेगा। इससे पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में कुछ सालों तक परिवार को रेगुलर इनकम होती रहती है।

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प्रीमियम हर महीने भी चुका सकते हैं

इस पॉलिसी के प्रीमियम का पेमेंट हर महीने, हर तिमाही, हर छमाही या सालाना किया जा सकता है। अगर आप हर महीने प्रीमियम का पेंमेंट करना चाहते हैं तो आपको कम से कम 5000 रुपये का पेमेंट करना होगा। आप हर तिमाही पेमेंट करना चाहते हैं तो मिनिमम 15,000 रुपये का पेमेंट करना होगा। अगर हर छमाही पेमेंट करना चाहते हैं तो 25,000 का पेमेंट करना होगा। सालाना पेमेंट के लिए कम से कम 50,000 रुपये चुकाने होंगे।

Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Mobile Manufacturing Scheme : आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। 62 हजार 500 करोड़ रुपए की इस स्कीम का लक्ष्य भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार कंपनियों को उत्पादन के लिए 5% तक इंसेंटिव देगी। इस स्कीम के जरिए 40 लाख करोड़ के मोबाइल का उत्पादन हो सकेगा। ये स्कीम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के तहत कंपनियों से आवेदन मांगने की शुरुआत कर दी गई है। 15 जुलाई को कैबिनेट ने स्कीम को मंजूरी दी थी। स्कीम का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपए और अवधि 5 साल यानी वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 तक है। इसमें मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग को कवर किया गया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि यह योजना मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी। इस स्कीम के तहत,भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर मैन्युफ़ैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंज़ूर इस फ़्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

बड़ी मात्रा में मिलेगा रोजगार

एस कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड पर 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं। सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम के जरिए 5 साल में कुल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हो सकता है और करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां मिल सकती हैं।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को भी किया पार

यह स्कीम इसके पहले आई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI-LSEM) के बाद आई है,जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करना और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया,जबकि इसका लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। PLI 1.0 का निवेश लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था लेकिन इसके तहत हुआ निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

पहले की PLI स्कीम ने ग्लोबल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित किया,जिनमें सैमसंग और भारत में Apple डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

लोकलाइजेंशन पर फोकस

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एस कृष्णन कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

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दिल्ली विश्वविद्यालय में 1 साल के PG कोर्स के लिए 5857 सीटें जुड़ीं, जानें 4-साल की डिग्री के बाद सीधे PhD का नियम

यह खबर उन छात्रों के लिए बेहद अहम है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक यानी पोसट ग्रेजुएशन करना चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के शैक्षिक सत्र के लिए एक साल की अवधि वाले 46 पीजी प्रोग्राम में सीटें बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत यूनिवर्सिटी हर प्रोग्राम में 120 बढ़ाएगा, जिससे कुल 5857 सीटें एक साल के पीजी पाठ्यक्रम में बढ़ेंगीं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब यूनिवर्सिटी से चार साल के अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम से पहला बैच स्नातक पूरा कर निकलने वाला है। यूनिवर्सिटी ने अपने दो साल के पीजी प्रोग्राम में सीटों की मौजूदा संख्या बनाए रखी है, जिससे चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के तहत स्नातक होने वाले छात्रों को शामिल करने के लिए कुल पीजी इनटेक को असरदार तरीके से बढ़ाया गया है। न्यूज एजेंसी एएनाई की खबर के मुताबिक, डीयू 46 विषयों में एक साल का पीजी प्रोग्राम ऑफर कर रहा है, जिसमें कुल 5,857 सीटें हैं। इसमें रेगुलर मोड में 2,807 सीटें शामिल हैं। 46 प्रोग्राम में 5,857 सीटें हर प्रोग्राम में औसतन लगभग 127 सीटें बनती हैं।

डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने क्लासरूम और टीचिंग स्टाफ की बढ़ी हुई जरूरत को पूरा करने का इंतजाम किया है। गुप्ता ने कहा, “हम अतिरिक्त टीचर हायर करेंगे। हमने कॉलेजों में पढ़ाने वाले टीचरों के लिए भी इंतजाम किया है कि वे यूनिवर्सिटी में आकर पढ़ाएं। हम उन्हें मानदेय देंगे।” बता दें, एफवाईयूपी को छात्रों को उनकी स्नातक पढ़ाई के दौरान रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप का ज्यादा अनुभव देने और भारतीय डिग्री को वैश्विक मानक के साथ जोड़ने के मकसद से शुरू किया गया था।

डीयू ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के आधार पर अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के तहत 2022-23 शैक्षिक सत्र से एफवाईयूपी शुरू किया था। 2022-23 शैक्षिक सत्र में डीयू में कुल 75,948 छात्रों को प्रवेश मिला। इनमें से, 40,005 स्टूडेंट्स 2025 में तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने के बाद बाहर हो गए, जबकि लगभग 35,943 चौथे साल में आगे बढ़े।

यूनिवर्सिटी के डेटा के मुताबिक, चौथे साल में आगे बढ़ने वाले 35,943 स्टूडेंट्स में से 12,111 ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए एक साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में एडमिशन के लिए अप्लाई किया। इसका मतलब है कि चौथे साल में आगे बढ़ने वाले लगभग 33.7% छात्रों ने एक साल के पीजी प्रोग्राम के लिए आवेदन किया। एक साल के पीजी प्रोग्राम में उपलब्ध 5,857 सीटों में से, आवेदकों की संख्या 12,111 थी। इसलिए उपलब्ध सीटें एप्लिकेंट्स की संख्या का लगभग 48.36% हैं।

डीयू का एक साल का पीजी कार्यक्रम भी दूसरे विश्वविद्यालयों की तुलना में काफी बड़ा है। यूनिवर्सिटी ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए अपने दो साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में भी उतनी ही सीटें ऑफर करना जारी रखा है, खासकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने तीन साल पूरे करने के बाद एफवाईयूपी छोड़ दिया था।

यूनिवर्सिटी ने चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम से पीएचडी प्रवेश के लिए एक सीधा शैक्षिक रास्ता भी बनाया है। यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस VI में एक बदलाव के तहत, एफवाईयूपी को 7.5 या उससे ज्यादा सीजीपीए और एससी/एसटी छात्रों के लिए 7.0 या उससे ज्यादा सीजीपीए के साथ पूरा करने वाले छात्र सीधे पीएचडी प्रोग्राम के लिए अप्लाई करने के लायक होंगे।

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Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: ‘वंदे मातरम’ पर शर्मिला टैगोर की बात सुन भड़की कंगना रनौत, बोलीं- आपको एक बार पढ़ना चाहिए

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: अभी ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाने के मौजूदा चलन के बजाय इसके छह पद गाने को लेकर राजनीतिक हंगामा चल रहा है। इसी मुद्दे पर दो अभिनेत्रियों के बीच बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर—जिनका रिश्ता राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है—ने सुझाव दिया कि ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं, क्योंकि बाद के पदों में दुर्गा और काली जैसे हिंदू देवी-देवताओं का ज़िक्र है, जिन्हें एक ईश्वर को मानने वाले लोग शायद स्वीकार न कर पाएं।

कंगना रनौत ने इस विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया और उनसे “हिंदू-मुस्लिम सोच” से आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने समझाया कि देवी-देवताओं का जिक्र रचनात्मक रूपक (metaphors) के तौर पर किया गया है, जिसका मकसद राष्ट्रीय शक्ति को जगाना है, न कि ये कोई धार्मिक आदेश हैं।

छह पदों में क्या कहा गया है? विवाद क्या था?

IANS के साथ एक इंटरव्यू में, अनुभवी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लिखी कविता के सिर्फ दो छंदों (stanzas) को गाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में कई धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं और उन्हें कई देवी-देवताओं का नाम लेने में असहजता महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि जो लोग कड़ाई से एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर में विश्वास) को मानते हैं, उनके लिए “वंदे काली, वंदे दुर्गा” जैसे वाक्यांशों का उच्चारण करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी धार्मिक समुदायों को एकजुट करने के लिए, कविता के शुरुआती दो छंदों तक ही सीमित रहना सबसे समावेशी तरीका है।

कंगना रनौत ने क्या कहा

एक्टर और BJP की लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर तीखी आलोचना की, साथ ही यह भी कहा कि वह अब भी उन दिग्गज स्टार को व्यक्तिगत रूप से पसंद करती हैं और उनका सम्मान करती हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि कोई कलाकार कविता को इतने शाब्दिक अर्थ में कैसे ले सकता है।

उन्होंने कहा कि गानों में शब्दों, कल्पनाओं और उपमाओं का मकसद भावनात्मक असर पैदा करना होता है, न कि धार्मिक क्रियाओं को ठीक-ठीक परिभाषित करना। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान बंकिम चंद्र का दुर्गा या शक्ति का ज़िक्र करना नागरिकों के भीतर आंतरिक उग्रता और शक्ति को जगाने के लिए एक काव्यात्मक आह्वान था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उदाहरण दिय, जिसमें उन्होंने ऐसे युवाओं की ज़रूरत बताई थी जिनकी “नसों में बिजली दौड़ती हो”; उन्होंने कहा कि विवेकानंद मौसम का पूर्वानुमान नहीं दे रहे थे, बल्कि शक्ति की मांग कर रहे थे।

उन्होंने लिखा, “कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ऊर्जा को ‘शक्ति’ कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपना समझकर अपनाएं।”

बचपन से ही स्मार्ट बनेंगे बच्चे! पेरेंट्स आज ही शुरू कराएं ये 5 आसान काम, कभी नहीं होगी पैसों की तंगी

बच्चों में बचपन से ही पैसों की सही समझ और अच्छी आदतें डालना उन्हें भविष्य में वित्तीय रूप से समझदार और स्वतंत्र बनाता है। शुरुआती फाइनेंशियल लिटरेसी बच्चों को पैसे के स्मार्ट फैसले लेने में मदद करती है। पैसों का सही इस्तेमाल समझना कितना जरूरी है, ये उन्हें तभी समझ जाएगा, जब वे खुद पैसा संभलेंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी हम बड़ों की है। पैसा सिर्फ जरूरतें पूरी करने के लिए ही नहीं, बल्कि बचाने और अपने सपने पूरे करने के लिए भी बेहद जरूरी है। पेरेंट्स आज से ही इन 5 आसान तरीकों को अपनाकर अपने बच्चों को पैसों के मामले में स्मार्ट बना सकते हैं:

थ्री-जार सिस्टम : बच्चों को कुछ पैसे दें, जिसे वे तीन हिस्सों में बांटें। इनमें एक बचत का, एक खर्च का और तीसरा दान का होना चाहिए। यह तरीका बच्चों को सिखाता है कि सब कुछ तुरंत खर्च करने के बजाय सोच-समझकर पैसे का इस्तेमाल करने से एक मजबूत नींव बनती है।

ग्रोसरी लिस्ट चैलेंज : अपने बच्चे को एक छोटा बजट और एक खास ग्रोसरी लिस्ट दें। उन्हें सुपर मार्केट में अपनी लिस्ट और बजट के हिसाब से चीजों का चुनाव करने दें। इससे उन्हें स्टोर ब्रांड की तुलना नामी ब्रांड से करनी आएगी, कीमतों में अंतर समझ आएगा और कुल बिल को बजट में रखने के लिए फैसले लेने की समझ बढ़ेगी।

सेविंग्स गोल मैच करना : अपने बच्चे को लंबे समय के किसी लक्ष्य के लिए पैसे बचाने और उसमें अपनी तरफ से कुछ जोड़ने का ऑफर दें। जैसे उसकी हर 10 रुपये की बचत पर आप उसे एक रुपया देंगे। यह कंपाउंड इंटरेस्ट और इंसेंटिव स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी देता है। साथ ही सोच-समझकर बचत की आदत को बढ़ावा देता है।

जरूरतों और चाहतों में अंतर समझाएं : बच्चों को सिखाएं कि ‘जरूरत’ (जैसे पढ़ाई, खाना, कपड़े) और ‘चाहत’ (जैसे महंगे खिलौने, वीडियो गेम) में क्या फर्क होता है। जब भी वे किसी नई चीज की जिद्द करें, तो उनसे पूछें कि क्या यह उनकी जरूरत है या सिर्फ एक चाहत।

डिजिटल और बेसिक बैंक अकाउंट से जोड़ें : थोड़े बड़े बच्चों के लिए ‘माइनर सेविंग्स अकाउंट’ खुलवाएं। उन्हें बैंक की कार्यप्रणाली, पासबुक अपडेट करना और डिजिटल लेन-देन के सुरक्षित तरीकों के बारे में बुनियादी जानकारी दें।

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24×7 पार्टी और नाइटलाइफ सिटी बनेगी दिल्ली, मास्टर प्लान 2047 में 24-घंटे इकोनॉमी का पूरा ब्लूप्रिंट

देश में भी नाइटलाइफ मुंबई जैसी हो जाए तो क्या आपको पसंद आएगी? असल में दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के लॉन्च होने के बाद दिल्ली को 24 घंटे की इकोनॉमी में बदलने का प्लान सामने आया है। इस नए प्लान के लागू होने के बाद दिल्ली के रेस्टोरेंट्स, बाजार, सांस्कृतिक केंद्र और वर्किंग प्लेस जैसी जगहों ट्रेडिशनल वर्किंग आवर के काफी बाद तक गुलजार और रोशन रह सकेंगे।

मास्टर प्लान 2047 के तहत 24-घंटे वाले शहर के कॉन्सेप्ट पर आगे बढ़ने की तैयारी है। इसके लिए दिल्ली भर में ऐसे प्रमुख नोड्स, परिसर और सर्किटों की पहचान की गई है। इन जगहों को ऐसे डेवलप किया जाएगा ताकि अंधेरा होने के बाद भी यहां तमाम एक्टिविटी सेफ तरीके से चलती रहें। नाइट लाइफ को बढ़ावा देने का ये पूरा प्रोसेस अंततः दिल्ली की अर्थव्यवस्था को ही मजबूत करने का काम करेगा।

ये इलाके बनेंगे दिल्ली के नए नाइटलाइफ जोन

दिल्ली के कुछ सबसे बड़े और लोकप्रिय इलाके इस नई नाइट-टाइम इकोनॉमी को रफ्तार देने का काम करेंगे। मास्टर प्लान के मुताबिक इन प्रमुख क्षेत्रों में कनॉट प्लेस शामिल है। सीपी पहले से ही नाइटलाइफ का एक बड़ा केंद्र है और अब यहां प्लानिंग की मदद से और बेहतर नाइट लाइफ की सुविधाएं डेवलप की जाएंगी। इसके अलावा हौज खास के अर्बन विलेज और उसके बाजार में कैफे, बार और सांस्कृतिक स्थलों के खुलने का समय बढ़ाया जा सकता है।

ऐतिहासिक क्षेत्र चांदनी चौक यानी पुरानी दिल्ली को एक हेरिटेज और कल्चरल नाइट सर्किट के रूप में डेवलप किया जाएगा। वहीं इंडिया गेट के लॉन को शाम और रात के समय इस्तेमाल के लिए एक पब्लिक हब बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही निजामुद्दीन और चिराग दिल्ली को सांस्कृतिक सर्किट नोड्स के रूप में चिह्नित किया गया है जबकि महरौली को देर रात के सार्वजनिक जीवन के लिए एक और अर्बन विलेज हब के रूप में चुना गया है। प्लान में यह भी प्रस्ताव है कि पुरानी खदानों, लैंडफिल, ऐश डैक्स और बेकार पड़े थर्मल प्लांटों जैसी खाली पड़ी जमीनों का जीर्णोद्धार करके समय के साथ उन्हें सार्वजनिक या इवेंट स्पेस में बदला जाए।

जमीन पर क्या-क्या बदलेगा और क्या सुविधाएं मिलेंगी?

मास्टर प्लान 2047 सिर्फ दुकानों के देर रात तक खुले रहने तक सीमित नहीं है बल्कि यह शहर के पूरे एक्सपीरियंस को बदलने वाला साबित हो सकता है। योजना के तहत संबंधित सरकारी एजेंसियों की इजाजत से रेस्टोरेंट्स, रिटेल स्टोर्स, खेल और सांस्कृतिक सुविधाओं के संचालन के समय को बढ़ाया जाएगा। दिल्ली के बाजारों में पैदल चलने योग्य एक्टिव ट्रैवल एरिया डेवलप किए जाएंगे। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि लोग लंबे समय तक घूम सकें, खरीदारी कर सकें और समय बिता सकें।

कलाकारों, विक्रेता संघों और कम्युनिटी के साथ मिलकर थीम आधारित नाइट वॉक, सीजनल फेस्टिवल और डेडिकेटेट नाइक मार्केट डेवलप किए जाएंगे। इसके अलावा अंधेरा होने के बाद लोगों की आवाजाही बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रीन-ब्लू कॉरिडोर और हेरिटेज सर्किट तैयार किए जाएंगे।

रात के समय आवाजाही और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था

देर रात तक चलने वाले शहर के लिए यह सबसे जरूरी है कि लोग सुरक्षित तरीके से अपने घरों तक पहुंच सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी काफी फोकस है। अंतिम ट्रेन छूटने के बाद लोगों को फंसे रहने से बचाने और नाइट-टाइम इकोनॉमी को रियलिस्टिक बनाने के लिए एक्सटेंडेड मेट्रो सर्विस के अलावा ऐसी व्यवस्थाएं देने की तैयारी है जो 24 घंटे चलें।

क्या दिल्ली वाकई नाइट लाइफ के सपने को साकार कर पाएगी?

इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना की सफलता पूरी तरह से इस बात पर डिपेंड करती है कि इसे लागू कैसे कराया जाता है। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था, पुलिसिंग, स्ट्रीट लाइटिंग और विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की सबसे पहले जरूरत होगी। अगर रात 2 बजे तक कोई बाजार खुला रहता है लेकिन लोग वहां तक पहुंचने या घर लौटने में सुरक्षित महसूस नहीं करते तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा। वैसे अगर यह योजना सही तरीके से जमीन पर उतरती है तो इसके बेहद पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं। इससे हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, एंटरटेनमेंट और क्रिएटिव इकोनॉमी में नए जॉब और बिजनेस के अवसर पैदा होंगे। इनकी मदद से दिल्ली दुनिया के उन वैश्विक शहरों से मुकाबला कर सकेगी जो कभी रात में बंद नहीं होते।

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MCX पर सोना ₹1.61 लाख के पार, चांदी ₹2.50 लाख के करीब ,जानें आगे तेजी रहेगी जारी या फिर होगा प्रॉफिट-बुकिंग का दौर शुरू

Gold Silver Price: शुक्रवार को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों में तेज़ उछाल थी, जो कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर इनकी लगातार मांग के कारण हुआ।

एक्सचेंज की वेबसाइट पर मौजूद ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोपहर 4:55 बजे सोना फ्यूचर्स ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। ये कीमतें क्रमशः 5 अक्टूबर के सोने और 4 सितंबर के चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

यह तेज़ी तब आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे यह धातु लगातार तीसरे हफ़्ते बढ़त की ओर अग्रसर है। इस साल जनवरी में, भारत में सोने की कीमत ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि चांदी की कीमत ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम तक उछल गई थी।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों ने बुलियन की कीमतों को सहारा दिया है। चॉइस ब्रोकिंग की पिंकी यादव के अनुसार, COMEX पर बढ़त के अनुरूप MCX पर कीमतें ऊंचे स्तर पर खुलीं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज ने अस्थिरता को बढ़ावा दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों (जो ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी हैं) ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जबकि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया है।

कमज़ोर डॉलर से बुलियन को सहारा

अमेरिकी डॉलर यहां एक अहम कारक रहा है। डॉलर इंडेक्स 98.8 के आसपास बना हुआ था और साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा था।चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के कमज़ोर होने से अन्य करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए ये सस्ती हो जाती हैं, जिससे मांग बढ़ सकती है और कीमतें ऊपर जा सकती हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, गोल्डसिल्वर सेंट्रल के ब्रायन लैन ने कहा कि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को व्यापक रूप से सहारा दिया है, साथ ही यील्ड में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है।

ट्रेजरी बायबैक से अनिश्चितता

अमेरिकी ट्रेजरी डेट मैनेजमेंट (कर्ज प्रबंधन) एक और कारक है जिस पर बाज़ार की पैनी नज़र है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि सरकार ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज (वापसी खरीद) को और बढ़ा सकती है। उन्होंने पहले ही अगले तिमाही में लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 बिलियन तक दोगुना करने की योजना का संकेत दिया था।

इस कदम से बाजार में उतार-चढ़ाव आया है और यील्ड, दरों और कर्ज की व्यापक स्थिति पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।

OCBC के क्रिस्टोफर वोंग ने रॉयटर्स को बताया कि अब ध्यान इस बात पर होगा कि क्या यह कदम टिकाऊ है या नहीं। अमेरिकी डेटा और 27-29 अगस्त को होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम डॉलर और यील्ड की दिशा तय कर सकते हैं।

फेड की दरे अहम

सोने के आउटलुक के लिए फेड की दरों की उम्मीदें अहम बनी हुई हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में इस बात की 67% संभावना है कि फेड अगले महीने दरों को स्थिर रखेगा, जबकि दरों में बढ़ोतरी की संभावना 33% है।

चूंकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ऊंची दरों के कारण ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में इसकी अपील आमतौर पर कम हो जाती है। लेकिन पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, साथ ही यील्ड और डॉलर में बदलाव, सोने की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) अपील को बढ़ा सकते हैं।

जियोपॉलिटिकल टेंशन से ‘सेफ-हेवन’ की मांग में बढ़त

भू-राजनीतिक जोखिम भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाएगा। तेल की आपूर्ति पर इसके असर की चिंता ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे महंगाई की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

ऐसी अनिश्चितता निवेशकों को सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर ले जाती है। यादव ने कहा कि मजबूत निवेश मांग और चीनी केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी के कारण पूंजी सुरक्षित धातुओं की ओर बढ़ी है।

केंद्रीय बैंक की खरीदारी अभी भी एक अहम आधार

केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग सोने के लिए एक बड़ा संरचनात्मक आधार बनी हुई है, क्योंकि देश अपने रिजर्व में विविधता ला रहे हैं। यादव ने जुलाई में ग्लोबल गोल्ड ETF में आए निवेश और केंद्रीय बैंकों की जारी खरीदारी की ओर भी इशारा किया, जो ज्वैलरी और रिटेल निवेश के अलावा मांग बढ़ाने वाले अन्य कारक हैं।

चांदी की कीमतों में भी तेजी

चांदी भी इस तेजी में शामिल हो गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतें 1.8% बढ़कर लगभग $69.31 प्रति औंस हो गई हैं। प्लैटिनम 2.6% बढ़कर $1,875.75 और पैलेडियम 1.7% बढ़कर $1,356.59 हो गया।

चांदी पर भी सोने की तरह ही कई मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों का असर पड़ता है – जिसमें डॉलर की कमजोरी और दरों को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं – लेकिन इसकी औद्योगिक मांग के कारण इसकी कीमतों में स्वतंत्र रूप से भी बदलाव हो सकता है। हाल की तेज़ी से MCX पर चांदी की कीमत ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है, जिससे यह ₹2.50 लाख के स्तर के बहुत करीब आ गई है।

सोने और चांदी के लिए आगे क्या होगा?

निकट भविष्य में इनकी चाल डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिका से आने वाले डेटा और फेड के संकेतों पर निर्भर करेगी, जिसमें जैक्सन होल पर खास नज़र रहेगी।

भारतीय निवेशकों के लिए रुपया-डॉलर का रेट भी मायने रखता है। अगर रुपया कमज़ोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाली चीज़ें देश में महंगी हो जाती हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें स्थिर रहें। इस तेज़ी की वजह से भारत में फिजिकल डिमांड पर कुछ असर पड़ा है, क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण रिटेल खरीदार पीछे हट रहे हैं, जबकि चीन में डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई है।

MCX पर सोना ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर है। अब सवाल यह है कि क्या ये ग्लोबल हालात तेज़ी को बनाए रख पाएंगे या फिर इससे मुनाफावसूली (प्रॉफिट-बुकिंग) का नया दौर शुरू हो जाएगा।

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