अगले 5 साल में क्रिटिकल मिनरल्स बिजनेस 5 गुना बढ़ाएगा वर्ल्ड बैंक ग्रुप, जानिए क्या है भारत और दुनिया के लिए प्लान

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि वह अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के कारोबार को पांच गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने शुक्रवार को बताया कि स्थानीय उद्योगों को विकसित करने के लिए संभावित साझेदारियों के वास्ते 20 देशों की पहचान की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के भीतर ही अधिक नौकरियां और इकोनॉमिक वैल्यू बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बैंकॉक में वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के एक सेशन को संबोधित करते हुए, अजय बंगा ने कहा, “हम अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपने कारोबार को पांच गुना करने की योजना पर काम कर हैं। इस सप्ताह, हमने अन्य MDB (मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक) साझेदारों के साथ मिलकर अपने पहले ‘कंट्री कॉम्पैक्ट्स'(देश-स्तरीय समझौते) शुरू किए हैं। इसका मकसद लोकल स्तर पर उद्योगों की स्थापना करना और खनिज कारोबार से मिलने वाले मूल्य और नौकरियों को संबंधित देश के भीतर ही बनाए रखना है।” उन्होंने आगे बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 20 देशों की पहचान की है, जिनके साथ वे साझेदारी करेंगे।

आर्थिक गलियारों के विकास पर दिया जा रहा जोर

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप आर्थिक गलियारों (economic corridors)पर अपना फोकस और बढ़ा रहा है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को निवेश के अवसरों के साथ जोड़ते हैं। इस संस्था ने पिछले साल 52 नई आर्थिक गलियारा परियोजनाएं शुरू कीं, जबकि इससे एक साल पहले इनकी संख्या सिर्फ 23 थी।

अजय बंगा ने एक ऐसे कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जिसे शुरू में मुख्य रूप से खनिजों के परिवहन के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में किसान अपनी फसलों को बाजारों तक पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे, जिससे इस रास्ते के किनारे बसे कस्बों और शहरों के विकास में मदद मिली।

विकास के लिए निजी पूंजी जुटाने पर फोकस बढ़ा

इन प्रयासों के साथ-साथ, वर्ल्ड बैंक ग्रुप विकास कार्यों के लिए निजी पूंजी जुटाने के अपने प्रयासों का विस्तार कर रहा है। बंगा ने बताया कि पिछले साल इस संस्था ने 112 अरब अमेरिकी डॉलर की निजी पूंजी जुटाई, जो वित्त वर्ष 2022 के लगभग 35 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।

उन्होंने कहा,”पिछले साल 112 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए गए,जो कि तीन गुना बढ़त है।” उन्होंने आगे बताया कि संस्था की अपनी फंडिंग को मिलाकर कुल फंडिंग 230 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में निजी पूंजी जुटाने की मात्रा लगभग तीन गुना हो गई, जबकि उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह चार गुना हो गई। वहीं, पूरे अफ्रीका में इसमें दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि,कम आय वाली,कमजोर और संघर्ष-ग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी जुटाने की स्थिति स्थिर रही है,जहां व्यावसायिक निवेश आकर्षित करना अब भी मुश्किल बना हुआ है।

विकास के लिए साझा सिस्टम विकसित करने पर जोर

अजय बंगा ने कहा कि यह संस्था गारंटी, इक्विटी और स्थानीय मुद्रा में फाइनेंसिंग के ज़रिए करेंसी रिस्क और फाइनेंस तक सीमित पहुंच जैसी बाधाओं को दूर कर रही है। यह अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ मिलकर ऐसे साझा सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है, जिससे निवेश को दूसरे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके और नई विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सके। इसका मेन मकसद उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है जो उत्पादकता में सुधार करते हैं और रोजगार पैदा करते हैं। इनमें बुनियादी ढांचा और ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्यूफैक्चरिंग (value-added manufacturing) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

नौकरी कोई आंकड़ा नहीं, नौकरी सम्मान है

अजय बंगा ने ग्लोबल लेवल पर लगभग 80 करोड़ नौकरियों की अनुमानित कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं के लिए अवसर पैदा नहीं किए गए,तो पूरी दुनिया में इसके खराब परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपना भविष्य बनाने में सक्षम बनाने के लिए रोज़गार के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा “नौकरी कोई आंकड़ा नहीं है। नौकरी सम्मान है।”

वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल है। पब्लिक फाइनेंलिंग (वहां,जहां बाजार नहीं पहुंच पाते), निजी पूंजी (वहां, जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की जा सकती हैं), शुरुआती जोखिमों में मदद के लिए परोपकारी निवेश और फाइनेंशिग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक शामिल हैं। अजय बंगा ने कहा,”नौकरियों की कमी केवल एक अनुमान है। जरूरी नहीं कि हमारा भविष्य भी ऐसा ही हो।” उन्होंने विकास से जुड़ी पहलों को और बड़े पैमाने पर तथा तेजी से लागू करने का आह्वान किया।

 

 

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चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

char dham yatra sansmaran in hindi

यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

आईडीबीआईः नायाब नमूना

आईडीबीआई की कहानी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। अब ऐसा कोई बैंक मौजूद नहीं है।

भारत में औद्योगिक विकास के सामने मौजूद पूंजी की समस्या को समझना हो, तो आईडीबीआई बैंक खास उदाहरण बन सकता है। अब इसे कनाडा की फैयरफैक्स कंपनी को बेचा जा रहा है। भारत सरकार ने इसकी 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी को देने का फैसला किया है। बेशक इस बिक्री से सरकार को बड़ी रकम हासिल होगी, जिससे वर्तमान वित्तीय संकट का सामना करने में मदद मिलेगी। मगर गौरतलब है कि एक अन्य भारतीय बैंक- सीबीएस में फेयरफैक्स की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक एक ही समूह दो बैंकों में इतना बड़ा हिस्सा नहीं रख सकता। लेकिन इसका रास्ता शायद निकाल लिया जाएगा।

खबरों के मुताबिक रिजर्व बैंक फेयरफैक्स को सीबीएस का विलय करने या उसमें अपना हिस्सा बेचने के लिए दो साल का समय दे सकता है। कुछ हलकों से बैंकों के विदेशी स्वामित्व पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसे देश के रणनीतिक हितों के खिलाफ बताया गया है। बिक्री की इजाजत में कुछ प्रक्रियागत खामियों की तरफ भी इशारा किया गया है। ये सभी वाजिब एतराज हैं, लेकिन आईडीबीआई की कहानी उससे भी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई बैंकों को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। ऐसी फाइनेंशिंग में जोखिम भी ज्यादा रहता है। इसलिए आम बैंक इससे बचते हैं। इसीलिए “डेवलपमेंट बैंकिंग” सिस्टम का होना जरूरी समझा जाता है। लेकिन उदारीकरण के दौर में आत्म-निर्भर विकास को पिछड़ी धारणा माना जाने लगा।

नतीजतन, 2002 और 2004 में इन दोनों को कॉमर्शियल बैंक बना दिया गया। उसके बाद भारत में कोई डेवलपमेंट बैंक नहीं है। नतीजतन लघु एवं मझौले कारोबारियों के लिए वित्त का टोटा है। ये वो कारोबार हैं, जो शेयर बाजार से पूंजी नहीं उठा सकते। नतीजतन, नए निजी निगमों के उदय का रास्ता बंद है। अब आईडीबीआई का स्वामित्व विदेशी हाथ में दिया जा रहा है। यानी उसे पुराने रूप लाना असंभव हो जाएगा। जिस समय दुनिया में रुझान भूमंडलीकरण से निकल कर आत्म-निर्भरता की ओर लौटने का है, ये फैसला भारत की उलटी दिशा का नायाब नमूना है।

रात में सूरज की रोशनी बेचने की तैयारी:भारत की स्काईरूट एयरोस्पेस और अमेरिकी स्टार्टअप का प्रोजेक्ट, विक्रम रॉकेट से भेजे जाएंगे सैटेलाइट

अमेरिकी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल रात में धरती के चुनिंदा स्थानों पर सूरज की रोशनी बेचने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पृथ्वी की कक्षा में बड़े शीशे लगाए जाएंगे। कैलिफोर्निया की यह स्टार्ट-अप भारत की स्काईरूट एयरोस्पेस की मदद से सैटेलाइट लॉन्च करेगी। दोनों कंपनियों के बीच दो लॉन्च का कॉन्ट्रैक्ट हुआ है। इन सैटेलाइट से आपदा प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान के लिए रोशनी दी जा सकेगी। सोलर फार्म में बिजली बनाने का समय भी बढ़ाया जा सकेगा। दो लॉन्च के लिए हुआ कॉन्ट्रैक्ट रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ने हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ दो लॉन्च का समझौता किया है। दोनों लॉन्च विक्रम रॉकेट से किए जाएंगे। कंपनी ने बयान में कहा, “इन लॉन्च से हमें अमेरिका की अन्य तय लॉन्च सेवाओं के साथ पक्का शेड्यूल और क्षमता मिलेगी।” स्काईरूट एयरोस्पेस के CEO पवन चंदाना ने कहा, “रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के साथ साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं। यह कंपनी अंतरिक्ष तकनीक के सबसे नए इस्तेमालों में से एक पर काम कर रही है।” उन्होंने कहा, “हम स्काईरूट ए के साथ उनकी धरती पर मांग के मुताबिक सूरज की रोशनी देने की योजना को लॉन्च करने का इंतजार कर रहे हैं।” पांच किलोमीटर के दायरे में दी जा सकेगी रोशनी जुलाई में रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन FCC से एक प्रदर्शन सैटेलाइट बनाने, लॉन्च करने और चलाने की मंजूरी मिली थी। स्टार्ट-अप का लक्ष्य ऐसी रोशनी देना है, जिसे कभी भी बंद किया जा सके। इसकी चमक को बदला जा सकेगा और यह पांच किलोमीटर के क्षेत्र में फैलेगी। कंपनी के मुताबिक, मांग पर मिलने वाली यह रोशनी दूरदराज के औद्योगिक इलाकों में काम के घंटे बढ़ा सकती है। इससे रक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण ढांचे को रोशन करने में मदद मिल सकती है। कंपनी ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए भी इससे यादगार अनुभव बनाए जा सकते हैं। पहला लॉन्च विक्रम-1 रॉकेट से होगा रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के को-फाउंडर और CEO बेन नोवैक ने कहा, “हम नए लॉन्च प्रोवाइडर स्काईरूट के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं। इससे अंतरिक्ष तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।” इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत पहला लॉन्च विक्रम-1 रॉकेट से होगा। दूसरा लॉन्च स्काईरूट के विकासाधीन विक्रम-1U लॉन्च व्हीकल से किया जाएगा। बयान के मुताबिक, विक्रम-1U में पहले चरण के अतिरिक्त बूस्टर लगाए गए हैं। इसमें बेहतर प्रदर्शन की क्षमता भी है। नोवैक ने कहा, “हमें हाल ही में अपने पहले अंतरिक्ष यान को चलाने के लिए फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन से लाइसेंस मिला है।” उन्होंने कहा, “हम खगोलविदों, स्थानीय समुदायों और नियामकों के साथ काम जारी रखेंगे। इससे बड़े स्तर पर विस्तार की अनुमति हासिल करने में मदद मिलेगी।” 1993 में भी कक्षा से भेजी गई थी सूरज की रोशनी 1993 में रूसी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने 65 फीट लंबा शीशा कक्षा में तैनात किया था। इससे धरती पर सूरज की रोशनी की एक घूमती हुई किरण भेजी गई थी। यह प्रयोग सफल रहा था। हालांकि, पैसों की कमी के कारण इसे बंद कर दिया गया। इस प्रयोग का नाम ज़नाम्या था। रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना को लेकर विवाद भी हुआ है। कई पर्यावरण संगठनों ने FCC से प्रदर्शन सैटेलाइट के लिए दी गई मंजूरी रद्द करने की मांग की है। इन संगठनों का कहना है कि रात में तेज रोशनी वन्यजीवों को परेशान कर सकती है। इससे खगोल विज्ञान से जुड़े अध्ययन प्रभावित हो सकते हैं और इंसानों की जैविक दिनचर्या पर असर पड़ सकता है।

कुमाऊं से दिल्ली-एनसीआर पहुंचना हुआ आसान! पंतनगर से नोएडा एयरपोर्ट के बीच मिली सीधी फ्लाइट से ये सारे फायदे

कुमाऊ क्षेत्र को दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हवाई यातायात से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। पंतनगर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच इंडिगो की सीधी उड़ान सेवा से यात्रियों को आवागमन का एक सुविधाजनक विकल्प मिल रहा है। इससे हल्द्वानी, नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख आर्थिक, व्यावसायिक और शैक्षणिक केंद्रों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।

अब तक लंबी दूरी की यात्रा के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को हवाई सफर का एक अतिरिक्त विकल्प मिल रहा है। इससे कारोबारियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और परिवारों को समय के बेहतर प्रबंधन के साथ यात्रा की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों से संपर्क बेहतर होने से कुमाऊं और एनसीआर के बीच आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को मिलेगा बढ़ावा

कुमाऊं अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों, पहाड़ों और धार्मिक स्थलों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। नैनीताल, भीमताल और मुक्तेश्वर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए बेहतर हवाई संपर्क क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकता है। वहीं, कुमाऊं से दिल्ली और आसपास के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों, जैसे मथुरा, वृंदावन और आगरा, की यात्रा करने वालों को भी आगे की यात्रा की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है।

बेहतर कनेक्टिविटी से होटल, टैक्सी, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां और पर्यटन से जुड़े दूसरे व्यवसायों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय रोजगार और छोटे कारोबार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

देश के बड़े शहरों तक पहुंच का नया विकल्प

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से इंडिगो के व्यापक नेटवर्क से जुड़कर यात्री मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख महानगरों के लिए आगे की यात्रा के विकल्प तलाश सकते हैं। इससे कुमाऊं के व्यापारियों और उद्यमियों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आगे की यात्रा की उपलब्धता संबंधित उड़ानों के कार्यक्रम और कनेक्शन पर निर्भर करेगी।

कार्गो सुविधाओं से कारोबार को नई उम्मीद

यात्री सुविधाओं के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर भी क्षेत्रीय कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय व्यवसायों की जरूरतों के अनुरूप कार्गो सेवाओं का बेहतर उपयोग होने पर माल की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। इससे क्षेत्र के उद्योगों, व्यापारियों और अन्य कारोबारी इकाइयों को व्यापक बाजारों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

इसी दिशा में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंडिगो और एयर इंडिया सैट्स ने पंतनगर में ट्रैवल एवं ट्रेड समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ रोडशो आयोजित किया। इसमें कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई), ट्रैवल एजेंटों, फ्रेट फॉरवर्डर्स और कॉरपोरेट प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यात्री कनेक्टिविटी, आगे की यात्रा के विकल्पों, एयरपोर्ट सुविधाओं और कार्गो संबंधी संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने किफायती किराए, अधिक यात्रा विकल्पों और बेहतर कार्गो मूवमेंट की जरूरत पर जोर दिया।

यात्रियों को मिलेंगे विशेष ऑफर

पंतनगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की उड़ानों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ विशेष प्रमोशनल ऑफर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंतनगर का बोर्डिंग पास दिखाने पर एयरपोर्ट के चुनिंदा डाइनिंग आउटलेट्स, जिनमें कोस्टा कॉफी, केएफसी, सबवे, चाय पॉइंट और स्मूर शामिल हैं, पर 10% तक की छूट मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 200 रुपये है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टैक्सी और कार रेंटल सेवाओं पर 40% तक की छूट का भी प्रावधान है। इन ऑफर्स की लागू शर्तें संबंधित सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेंगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वाइस प्रेसिडेंट क्रिस्टोफ श्नेलमैन के अनुसार, पंतनगर-नोएडा एयरपोर्ट मार्ग कुमाऊँ के यात्रियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ाने के साथ दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, पंतनगर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच हवाई संपर्क कुमाऊं के लिए केवल यात्रा का नया विकल्प नहीं, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करने वाला कदम भी साबित हो सकता है।

ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट

Southwest monsoon: 12% कम बारिश के साथ पूरी तरह वापस लौटा दक्षिण पश्चिम मॉनसून, 21 अक्टूबर तक उत्तर पूर्व मॉनसून फिर लाएगा बारिश

Saif Ali Khan: सैफ अली खान ने मुंबई के अंधेरी में लीज पर दिए दो ऑफिस, किराया 22.76 लाख रुपये महीना

Saif Ali Khan: CRE Matrix द्वारा हासिल किए गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार सैफ अली खान ने मुंबई के अंधेरी कुर्ला रोड पर 5,692 वर्ग फुट (RERA कारपेट एरिया) की दो कमर्शियल यूनिट्स को ₹22.76 लाख के मासिक किराए पर दिया है।

दस्तावेजो के मुताबिक ‘लीव एंड लाइसेंस’ समझौता 29 सितंबर 2026 को रजिस्टर किया गया था। यह समझौता 10 मई 2026 से 9 मई 2031 तक, यानी पांच साल की अवधि के लिए है। यह जगह ‘दुर्वा फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड’ को लीज पर दी गई है, जिसका प्रतिनिधित्व कंपनी के डायरेक्टर विकास मोहन सचदेवा कर रहे हैं। वे ही ‘लाइसेंसी’ (लाइसेंस लेने वाले) हैं। वहीं खान ‘लाइसेंसर’ (लाइसेंस देने वाले) हैं, जो अपने अधिकृत प्रतिनिधि (अटॉर्नी) के जरिए यह समझौता कर रहे हैं।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार लीज पर ली गई जगह अंधेरी ईस्ट के चकाला में स्थित ‘कनाकिया वॉल स्ट्रीट’ नामक इमारत की ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कमर्शियल यूनिट्स हैं। समझौते के तहत कुल 5,692 वर्ग फुट जगह के लिए ₹22,76,800 का मासिक किराया तय किया गया है, जो RERA कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹400 प्रति वर्ग फुट प्रति माह बैठता है।

इस समझौते में ₹2.36 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल है, जो शुरुआती मासिक किराए के 10 महीने से भी अधिक के बराबर है। किराएदार को 10 मई 2026 से 9 जुलाई 2026 तक, यानी दो महीने के लिए बिना किराए की अवधि दी गई है। ताकि वे 10 जुलाई 2026 (किराया शुरू होने की तारीख) से पहले अपनी जरूरत के हिसाब से जगह तैयार (फिट-आउट) कर सकें। पांच साल की लीज अवधि के दौरान, मासिक किराए में हर साल 5% की बढ़ोतरी होगी।

समझौते के अनुसार 60 महीने की अवधि में कुल किराया लगभग ₹14 करोड़ से अधिक होगा, जिसमें लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) शामिल नहीं है। पंजीकरण दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि खान ने नवंबर 2025 में ये दो कमर्शियल यूनिट्स खरीदीं। इंडेक्स-II के रिकॉर्ड बताते हैं कि एक यूनिट ₹30 करोड़ से अधिक में खरीदी गई थी, जिससे कुल खरीद मूल्य ₹30.75 करोड़ हो गया। CRE मैट्रिक्स के अनुसार, ये दोनों खरीद 18 नवंबर 2025 को ‘एपिकोर फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड’ से पंजीकृत कराई गई थीं।

जिस इलाके में सैफ अली खान के ये ऑफिस यूनिट्स हैं, वहीं हाल ही में एलन मस्क के सैटेलाइट इंटरनेट वेंचर ‘स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ ने मुंबई के चांदीवली इलाके में 1,294 वर्ग फुट की ऑफिस जगह पांच साल के लिए लीज पर ली है, जिसका कुल किराया ₹2.33 करोड़ है।

सैफ अली खान का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो

सैफ अली खान मुंबई के पॉश इलाके बांद्रा वेस्ट में एक आलीशान अपार्टमेंट में रहते हैं। लगभग एक दशक पहले ‘सतगुरु शरण’ बिल्डिंग में खरीदे गए 24 करोड़ रुपये के फ्लैट के अलावा उनके पास मुंबई में कुछ और प्रॉपर्टी भी हैं। इंडेक्सटैप.कॉम (IndexTap.com) द्वारा हासिल किए गए ‘प्रॉपर्टी इंडेक्स-2’ दस्तावेजों के अनुसार, खान का 6,500 वर्ग फुट से बड़ा यह अपार्टमेंट अप्रैल 2012 में रियल एस्टेट डेवलपर ‘सतगुरु बिल्डर्स’ से 23.50 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।

इस अपार्टमेंट में जाने से पहले सैफ अली खान और करीना बांद्रा के ‘फॉर्च्यून हाइट्स’ अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार 2013 में इस चार मंजिला प्रॉपर्टी की कीमत ₹48 करोड़ थी, जिसमें 3BHK यूनिट्स थीं। जैपकी.कॉम (Zapkey.com) द्वारा हासिल किए गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के मुताबिक अप्रैल 2016 में सैफ अली खान ने मुंबई के बांद्रा स्थित ‘फॉर्च्यून हाइट्स’ में 950 वर्ग फुट से बड़ा एक अपार्टमेंट ₹7 करोड़ में खरीदा था।

Reliance Jio Origin Story: ईशा अंबानी ने सुनाया जियो की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा, वो घटना जिसने भारत में ला दी डिजिटल क्रांति

Reliance Jio Origin Story: रिलायंस जियो के मेगा IPO के ऐतिहासिक ऐलान के बीच, ईशा अंबानी ने वह दिलचस्प किस्सा शेयर किया है कि कैसे एक छोटी सी इंटरनेट समस्या ने भारत के सबसे बड़े डिजिटल नेटवर्क ‘रिलायंस जियो’ को जन्म दिया। इसके साथ ही उन्होंने रिलायंस ग्रुप के बिजनेस फिलॉसफी, नेट-डेट फ्री बनने के सफर और अपने दादा धीरूभाई अंबानी के 50 साल पुराने सपने को याद किया।

2009 की वो एक घटना… और हुआ Reliance Jio का जन्म

ईशा अंबानी ने जियो की शुरुआत के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे एक असाइनमेंट सबमिट न हो पाने की वजह से देश में डिजिटल क्रांति का विचार उपजा। उन्होंने बताया, ‘बात 2009-2010 की है। आकाश और मैं अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे और छुट्टियों में बॉम्बे वाले घर आए हुए थे। मुझे अपना एक कॉलेज असाइनमेंट ऑनलाइन सबमिट करना था, लेकिन इंटरनेट न चलने की वजह से मैं उसे जमा नहीं कर सकी।’

उन्होंने बताया कि, इसके बाद घर में इस बात पर लंबी चर्चा हुई कि आखिर भारत कनेक्टिविटी के मामले में पश्चिम के देशों से भारत क्यों पीछे है?

आकाश अंबानी का मानना था कि इसका एकमात्र समाधान भारत में एक मजबूत ‘डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी’ तैयार करना है। इसी सोच के साथ 2016 में जियो की नींव रखी गई, जो आज 2026 में देश का सबसे बड़ा डिजिटल नेटवर्क बन चुका है।

रिलायंस की सफलता के 3 मूल मंत्र: लॉन्ग-टर्म विजन, स्केल और एग्जीक्यूशन

ईशा अंबानी ने बताया कि रिलायंस में बिजनेस बनाने की फिलॉसफी तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:

लॉन्ग-टर्म पर्सपेक्टिव: रिलायंस केवल आज या कल के लिए नहीं सोचता, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दांव लगाता है।

स्केल: कंपनी हमेशा उस स्तर का स्केल हासिल करने का लक्ष्य रखती है जो उस पूरे उद्योग की इकोनॉमिक्स को बुनियादी तौर पर बदल दे।

एग्जीक्यूशन: रिलायंस एक गहराई से तकनीकी कंपनी है। किसी भी प्रोजेक्ट को तय समय और सटीकता से पूरा करना कंपनी की आदत में शामिल है।

‘फाइनेंशियल प्रूडेंस’ और वादे पर खरे उतरने की मिसाल

अपने बयान में ईशा अंबानी ने रिलायंस की वित्तीय अनुशासन और शेयरधारकों के प्रति प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया, साल 2019 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2021 तक ‘नेट-डेट फ्री’ बनाने का वादा किया था। 2020 में कोरोना महामारी और वैश्विक मंदी आने के बावजूद, कंपनी ने समय सीमा से 9 महीने पहले ही रिलायंस को कर्जमुक्त बना दिया’।

धीरूभाई अंबानी का 50 साल पुराना सपना और 29% एनुअलाइज्ड रिटर्न

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए ईशा अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी को नमन किया। 1977 में धीरूभाई अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज का आईपीओ (IPO) लेकर आए थे, जिसे लगभग 50 साल पूरे हो चुके हैं। इन 50 वर्षों में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने शेयरधारकों को 29% का सालाना रिटर्न दिया है।

उन्होंने कहा, ‘मेरे दादाजी के लिए रिलायंस सिर्फ एक कंपनी नहीं थी। रिलायंस एक वादा है कि हर भारतीय को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने, इसकी समृद्धि को साझा करने और एक बेहतर भविष्य पर विश्वास करने का अवसर मिलना चाहिए।’

दशहरा से पहले KDA का तोहफा, कानपुर में 844 प्लॉट की बिक्री शुरू; जानिए रेट और ऑनलाइन आवेदन का प्रोसेस

KDA Scheme 2026: अपना घर बनाने या कारोबार शुरू करने के लिए जमीन खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने नई पहल की है। प्राधिकरण ने शहर की अलग-अलग योजनाओं में खाली पड़े 844 प्लॉट की बिक्री के लिए ऑनलाइन आवेदन और ई-ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू की है।

इनमें आवासीय भूखंडों के साथ दुकान, व्यावसायिक परिसर, स्कूल-कॉलेज और दूसरी जरूरतों के लिए जमीन भी शामिल है। खास बात यह है कि एक प्लॉट का क्षेत्रफल 30 वर्गमीटर से शुरू हो रहा है। ऐसे में छोटे बजट में जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोग भी अपने लिए विकल्प तलाश सकते हैं।

कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक ने बताया कि जवाहरपुरम, शताब्दी नगर, महावीर नगर विस्तार, हाईवे सिटी विस्तार, अर्रा-बिनगवां और अन्य स्थानों पर भूखंड उपलब्ध हैं। इनकी जानकारी प्राधिकरण के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की गई है। इच्छुक आवेदक वेबसाइट पर जाकर भूखंड का क्षेत्रफल, स्थान और निर्धारित कीमत देख सकते हैं। केडीए सचिव अभय पांडेय ने बताया कि अलग-अलग श्रेणियों के भूखंडों को ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचने की व्यवस्था की गई है।

कीमत 15 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर से शुरू 

केडीए की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 844 भूखंडों में सबसे छोटा प्लॉट 30 वर्गमीटर का है। इसकी कीमत 15 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर से शुरू होती है। वहीं, सबसे बड़े भूखंड का क्षेत्रफल 8,999.61 वर्गमीटर है। इसकी शुरुआती दर 1,39,300 रुपये प्रति वर्गमीटर बताई गई है। भूखंड की जगह, क्षेत्रफल और श्रेणी के अनुसार कीमत अलग-अलग होगी। इसलिए आवेदन करने से पहले लोगों को संबंधित भूखंड की पूरी जानकारी और नियम जरूर देख लेने चाहिए।

महावीर नगर में 125 व्यावसायिक भूखंड

प्राधिकरण की योजनाओं में आवासीय और व्यावसायिक, दोनों तरह के विकल्प रखे गए हैं। न्यू ट्रांसपोर्ट नगर में 220 व्यावसायिक भूखंड, भागीरथी और जान्हवी योजना में 97 व्यावसायिक भूखंड और तात्या टोपे नगर में 21 व्यावसायिक भूखंड शामिल हैं। रामगंगा इंक्लेव में 20 आवासीय भूखंड, शताब्दी नगर सेक्टर तीन और चार में 42 आवासीय भूखंड तथा महावीर नगर विस्तार पार्ट-दो में 88 आवासीय भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। महावीर नगर विस्तार में 125 व्यावसायिक भूखंड भी शामिल हैं।

हाईवे सिटी विस्तार और न्यू कानपुर सिटी पर नजर

केडीए सचिव अभय पांडेय के मुताबिक, हाईवे सिटी विस्तार योजना में 96 आवासीय भूखंड खरीदने का अवसर भी दिया जाएगा। इसके लिए इच्छुक लोगों को प्राधिकरण की वेबसाइट पर आने वाली जानकारी देखते रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा दीपावली पर न्यू कानपुर सिटी योजना लॉन्च करने की तैयारी है।

केडीए की इस पहल से उन लोगों को विकल्प मिलने की उम्मीद है, जो शहर में घर बनाने या अपना कारोबार शुरू करने के लिए जमीन तलाश रहे हैं। हालांकि, आवेदन की अंतिम तारीख, ई-ऑक्शन की समय-सारिणी और भुगतान की शर्तें संबंधित योजना के आधिकारिक नोटिस से जरूर जांच लें।

रिपोर्ट: अखंड प्रताप सिंह

दीपावली से पहले GIDA का बड़ा तोहफा! 144 प्लॉट्स और 61 आवास के लिए 16 अक्टूबर से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

Gorakhpur Housing Project: गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) ने नवरात्रि, दशहरा, दीपावली एवं छठ पूजा के अवसर पर रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल प्लॉट्स के आवंटन की योजना लॉन्च की है। इस योजना के तहत गीडा क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को आवासीय भूखंड और भवन खरीदने करने का अवसर मिलेगा। योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 6 नवंबर 2026 तक चलेगी। गीडा की ओर से जारी योजना के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों, कारोबारियों और आवास की तलाश कर रहे लोगों के लिए विभिन्न कैटेगरी में भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना में औद्योगिक भूखंडों के साथ आवासीय भवनों और व्यावसायिक भूखंडों को भी शामिल किया गया है।

औद्योगिक भूखंडों की विभिन्न कैटेगरी

योजना के तहत औद्योगिक भूखंडों का आकार और कीमत अलग-अलग कैटेगरी में निर्धारित की गई है। जारी डिटेल्स के मुताबिक, 300 वर्ग मीटर के भूखंड की दर 33,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर और कुल कीमत 1.005 करोड़ रुपये निर्धारित है। वहीं, 250 वर्ग मीटर के भूखंड की कीमत 83.75 लाख रुपये, 200 वर्ग मीटर के भूखंड की कीमत 67 लाख रुपये तथा 180 वर्ग मीटर के भूखंड की कीमत 58.50 लाख रुपये रखी गई है।

इसके अलावा, औद्योगिक भूखंडों की अन्य श्रेणियों में 1,000 वर्ग मीटर तक, 1,001 से 4,000 वर्ग मीटर और 4,000 से 20,000 वर्ग मीटर तक के भूखंडों का भी प्रावधान किया गया है। इससे अलग-अलग स्तर पर उद्योग स्थापित करने की योजना बना रहे निवेशकों को अपनी जरूरत के अनुरूप भूखंड चुनने का अवसर मिलेगा।

आवासीय योजना में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवन

आवासीय योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। जारी विवरण के अनुसार, EWS कैटेगरी में 39.89 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के 21 भवन प्रस्तावित हैं। इनकी कीमत 5.13 लाख रुपये निर्धारित की गई है। जबकि रजिस्ट्रेशन फीस 51,300 रुपये रखी गई है। इसी तरह, एलआईजी कैटेगरी में 47.96 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के 40 भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। इनकी कीमत 10.53 लाख रुपये और रजिस्ट्रेशन राशि 1,05,300 रुपये निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था से पात्र आवेदकों को गीडा क्षेत्र में अपना आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

व्यावसायिक भूखंडों का भी मिलेगा विकल्प

गीडा की योजना में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी भूखंड शामिल किए गए हैं। अलग-अलग आकार और क्षेत्रफल के भूखंडों के माध्यम से व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित करने के इच्छुक लोगों को अवसर देने का प्रयास किया गया है। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार से क्षेत्र में निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

16 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन

योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। आवेदन की आखिरी तारीख 6 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक आवेदक गीडा की आधिकारिक वेबसाइट www.gidagkp.in पर योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले संबंधित कैटेगरी की पात्रता, भूखंड का क्षेत्रफल, कीमत, रजिस्ट्रेशन राशि और आवंटन की शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ना जरूरी होगा। प्राधिकरण की ओर से जारी सूचना में आवेदन प्रक्रिया और योजना से संबंधित विवरण के लिए ऑनलाइन माध्यमों का उल्लेख किया गया है।

औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

गीडा की यह योजना त्योहारों के अवसर पर आवासीय जरूरतों के साथ औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। विभिन्न श्रेणियों में भूखंड और भवन उपलब्ध कराने से उद्यमियों, निवेशकों तथा पात्र आवासीय आवेदकों को लाभ मिलने की संभावना है। इससे गोरखपुर के औद्योगिक विकास, नए निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

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