कल का मौसम 4 October: रविवार को इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी! IMD ने जारी किया ये अलर्ट

Weather forecast for October 4: मौसम विभाग ने कल यानी 4 अक्टूबर के लिए वेदर का लेटेस्ट बुलेटिन जारी कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 24 घंटे के दौरान दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। केरल और माहे तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। वहीं, तमिलनाडु में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का भी अलर्ट है।

IMD बुलेटिन के मुताबिक, दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में कल बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली चमकने की संभावना बनी हुई है। बता दें कि भारत में जून से सितंबर के बीच इस साल 87.4 प्रतिशत बारिश हुई है। यह 2001 के बाद मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है।

केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की चेतावनी

  • मौसम विभाग ने चार अक्टूबर को केरल एवं माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा कराईकल में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की आशंका जताई है। बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।

तमिलनाडु में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

  • IMD के मुताबिक, रविवार को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और गरज के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
  • लोगों को मौसम खराब होने के दौरान खुले इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

आंध्र प्रदेश और केरल में भी आंधी-बारिश का अलर्ट

  • आंध्र प्रदेश तथा केरल और माहे में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
  • आंध्र प्रदेश में कुछ इलाकों में तेज सतही हवाएं चलने की भी आशंका है।

पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली गिरने का खतरा

  • मौसम विभाग ने असम और मेघालय, साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कुछ स्थानों पर गरज के साथ बिजली चमकने की चेतावनी जारी की है।
  • ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

कोंकण-गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम

  • दूसरी ओर, कोंकण और गोवा में कुछ स्थानों पर गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। दिन के समय उमस के कारण लोगों को परेशानी महसूस हो सकती है।
  • IMD की ओर से जारी बुलेटिन में मछुआरों के लिए किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है।

2001 के बाद मानसून के दौरान चौथी बार सबसे कम बारिश 

भारत में जून से सितंबर के बीच इस साल 87.4 प्रतिशत बारिश हुई, जो 2001 के बाद मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है। IMD ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि इस मानसून में बारिश की कमी का एक प्रमुख कारण प्रशांत क्षेत्र में जून में उभरी अल नीनो की स्थिति थी, जो उसके बाद से मजबूत होती गई। आईएमडी ने कहा कि फिलहाल अल नीनो की स्थिति मजबूत है। इसके मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, इस मानसून देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिलीमीटर होती है। यह सामान्य से 13 प्रतिशत कम है।

ये भी पढ़ें- ‘आपके साहस पर UAE को गर्व है’; Flydubai के ‘हीरो’ भारतीय पायलट स्मित मच्छार से मिले दुबई के क्राउन प्रिंस, कैप्टन की बहादुरी के हुए कायल

IMD के महानिदेशक मौसम विज्ञान डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने एक बयान में कहा कि यदि कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। उन्होंने कहा कि इस मौसम में 14 कम दबाव की प्रणालियां बनीं और कुल 77 दिन कम दबाव की प्रणालियां सक्रिय रहीं। जबकि सामान्य तौर पर यह अवधि 57 दिन होती है। मानसून की वापसी के बारे में महापात्र ने कहा कि अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून की वापसी हो चुकी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है।

Noida News: ‘मैं डिप्रेशन में हूं…’; नोएडा के सुपरनोवा बिल्डिंग की 43वीं मंजिल से कूदकर युवक ने दी जान, छलांग लगाने का दर्दनाक वीडियो वायरल

Noida suicide case: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थित सुपरनोवा बिल्डिंग के एक अपार्टमेंट की बालकनी से शनिवार (3 अक्टूबर) को एक युवक ने कूदकर अपनी जान दे दी। सेक्टर 94 में स्थित सुपरनोवा बिल्डिंग की 43वीं मंजिल से कूदने से ठीक पहले 28 साल के युवक ने कथित तौर पर AC रिपेयर करने वाले कर्मचारियों की एक टीम से कहा कि वह डिप्रेशन में है। मृतक की पहचान गुरुग्राम के मानेसर में IMT व्यू CGHS के टॉवर A के रहने वाले विनय कुमार जैन के बेटे संभव जैन के तौर पर हुई है। गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, जैन एक दिन के लिए सेक्टर 94 की स्पायर बिल्डिंग में अकेले आए थे।

यह घटना शनिवार सुबह सेक्टर 126 पुलिस स्टेशन के इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, जैन बालकनी की रेलिंग से लटके हुए थे। तभी पास के फ्लैट में काम कर रहे AC रिपेयर करने वाले कर्मचारियों की टीम ने उन्हें देखा। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने उनसे बात करने और उन्हें रेलिंग से पीछे हटने के लिए मनाने की कोशिश की। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान जैन ने उनसे कहा, “मैं डिप्रेशन में हूं।” इसके बाद वह बालकनी से कूद गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

घटना का एक वीडियो भी ऑनलाइन सामने आया है। फुटेज में जैन को बालकनी की रेलिंग से लटके हुए देखा जा सकता है। कुछ ही पल बाद वह बिल्डिंग से नीचे गिर जाते हैं। इस दौरान मौके पर कुछ लोग मौजूद थे। आत्महत्या से पहले युवक ने उनसे कहा, “नहीं गिर रहा सर…” और फिर अचानक उसने छलांग लगा दी। AC मैकेनिकों ने बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन वह सफल नहीं हो सके। घटना केयरटेकर के कैमरे में कैद हो गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद, सेक्टर 126 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जानकारी जुटाई। पुलिस ने बताया कि कानूनी कार्रवाई पूरी हो चुकी है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस अधिकारियों और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सबूत इकट्ठा किए। जांच के हिस्से के तौर पर बिल्डिंग और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है।

वीडियो वायरल हुआ

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है। फुटेज में जैन बालकनी की रेलिंग से लटके हुए दिख रहे हैं और नीचे से लोगों की प्रतिक्रियाएं सुनी जा सकती हैं। कुछ ही पल बाद वह बिल्डिंग से नीचे गिर जाते हैं। तब से यह वीडियो ऑनलाइन काफी शेयर किया जा रहा है।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने घटना के समय बिल्डिंग के पास मौजूद लोगों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को पता चला कि जैन मानसिक तनाव में थे। उनके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

6 दिन के मेगा हेल्थ कैंप से गाजीपुर पहुंचीं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं, डॉक्टरों की 35000 मरीजों की जांच और 346 सर्जरियां की गईं

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के ग्रामीणों को हाल ही में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का अनुभव प्राप्त हुआ। इससे पहले इन्हें अव्वल दर्जे की स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर सेवाएं पाने के लिए वाराणसी या लखनऊ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन छह दिनों तक ऐसी कई सेवाओं का लाभ उन्हें अपने ही जिले में पाने का मौका मिला। यह अवसर उन्हें जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एक मेगा हेल्थ कैंप के जरिए मिला।

यह 6 दिनों का था, जिसका उद्घाटन 26 सितंबर को राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस कैंप में 35,200 मरीजों ने चेकअप कराया और 346 सर्जरी की गईं। इसमें ऐसे मुश्किल प्रोसीजर भी शामिल थे जिनके लिए आम तौर पर मरीजों को जिले से बाहर जाना पड़ता है। युवा बीजेपी नेता अभिनव सिन्हा के नेतृत्व में इस कैंप का आयोजन किया गया था। इसमें ओपीडी सेवा 28 सितंबर तक चलीं, जिसके बाद 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक सर्जरी हुईं।

इस पहल की खास बात यह थी कि एक ही जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में स्पेशलिस्ट केयर उपलब्ध थी। इसमें 498 डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स की टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें AIIMS दिल्ली, जसलोक हॉस्पिटल मुंबई, अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली और हेरिटेज हॉस्पिटल वाराणसी से जुड़े स्पेशलिस्ट शामिल थे। मरीजों को कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से लेकर ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी तक 15 विशेषज्ञ सेवाएं मिलीं। तीन दिन के ओपीडी फेज के दौरान, 35,828 लैब टेस्ट भी किए गए। कैंप में 346 सर्जरी हुईं, जिसमें 140 आंखों की सर्जरी और 206 दूसरे प्रोसीजर शामिल थे। इनमें ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े 22 बड़े मुश्किल केस थे।

जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी और न्यूरोलॉजी में कुल मिलाकर 21,120 मरीज आए – जो OPD में आने वालों का 60% है। बाकी 11 स्पेशलिटी OPD में और 14,080 मरीजों का इलाज किया गया। इस बड़े मेडिकल ऑपरेशन में 350 से ज्यादा वॉलंटियर्स ने मदद की, जिन्हें “गाजीपुर के स्वस्थ योद्धा” कहा गया, जिन्होंने मरीजों को रजिस्ट्रेशन, नेविगेशन और जगह पर देखभाल में मदद की। मेडिकल टीम में फैकल्टी और कंसल्टेंट, रेजिडेंट, इंटर्न, नर्स, पैरामेडिक्स और फार्मासिस्ट शामिल थे।

आयोजनकर्ता अभिनव सिन्हा ने कहा कि इस कैंप का मकसद अच्छी हेल्थकेयर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लोगों तक, बिना उन्हें लंबी दूरी तय किए पहुंचाना था। इस पहल को 2026 में उत्तर प्रदेश में आयोजित सबसे बड़ा हेल्थ कैंप बताया, और कहा कि इस मॉडल को राज्य में कहीं और भी दोहराया जा सकता है। गाजीपुर से बड़ी बात यह है कि सिर्फ छह दिनों में, एक अस्थायी हेल्थकेयर इकोसिस्टम ने कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक्स, स्पेशलिस्ट ट्रीटमेंट और सर्जरी को एक ही जगह पर ला दिया — जिससे हेल्थकेयर को मरीजों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया, न कि मरीज़ों को हेल्थकेयर सेंटर जाने पर।

Business Idea: बिना दुकान खोले घर से शुरू करें कैटरिंग का बिजनेस! एक्सपर्ट से समझिए सिर्फ 50000 के बजट से कैसे होगी कमाई

Monsoon Withdraws: उत्तर भारत से मानसून विदा, लेकिन इन राज्यों में 4 से 6 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट!

Monsoon Withdraws: देश भर में मानसून की वापसी की प्रक्रिया अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा शनिवार 3 अक्टूबर की दोपहर जारी बुलेटिन के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर भारत के शेष बचे सभी इलाकों से पूरी तरह विदा हो चुका है। इसके साथ ही गुजरात और मध्य प्रदेश के संपूर्ण क्षेत्रों, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों से भी मानसून विदा हो चुका है। हालांकि मानसून की वापसी के बीच दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 4 से 6 अक्टूबर के दौरान केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में फिर से भारी मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है।

कहां तक पहुंची मानसून की विदाई रेखा? जानें अगले 2-3 दिनों का अपडेट

मौसम विज्ञानियों के अनुसार मानसून की विदाई रेखा वर्तमान में सुपौल, रांची, रायपुर, ब्रह्मपुरी, परभणी, बारामती और हरनाई से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर परिस्थितियां मराठवाड़ा और विदर्भ के अधिकांश भागों, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों, तेलंगाना और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के कुछ इलाकों से मानसून की विदाई के लिए पूरी तरह अनुकूल हो जाएंगी। बीते 24 घंटों में त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश (7 से 11 सेमी) दर्ज की गई है।

केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 4 से 6 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश का अलर्ट

इस बीच दक्षिण भारत के राज्यों में मौसमी प्रणालियों का असर आने वाले दिनों में और बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। इस वजह से केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 से 6 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इस दौरान तमिलनाडु में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की गति से तेज तूफानी हवाएं चलेंग।

मौसम विभाग के मुताबिक, केरल और लक्षद्वीप में 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 और 6 अक्टूबर को भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 3 से 7 अक्टूबर के दौरान दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

पूर्वोत्तर भारत में 3 अक्टूबर को बारिश और आंधी की स्थिति

पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय में 3 अक्टूबर को भारी बारिश होने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश में 3 अक्टूबर को, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 3 व 4 अक्टूबर को बादलों की तेज गर्जना और बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है।

उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत का मौसम हाल

उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की विदाई के बाद 5 से 9 अक्टूबर के दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश और 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान है। 6 से 9 अक्टूबर के बीच पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 9 अक्टूबर को व्यापक रूप से वर्षा होने की संभावना है। मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में 6 और 7 अक्टूबर को आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। पश्चिम भारत के कोंकण और गोवा क्षेत्र में 3 से 5 अक्टूबर के दौरान मौसम काफी गर्म और उमस भरा बना रहेगा।

अरब सागर में तूफानी मौसम, मछुआरों के लिए रेड अलर्ट जारी

समुद्री इलाकों की बात करें तो मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए विशेष सलाह जारी की है। 3 अक्टूबर को केरल तट के साथ और उससे सटे इलाकों, लक्षद्वीप क्षेत्र, मालदीव, कोमोरिन क्षेत्र तथा पूर्व-मध्य एवं दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ हिस्सों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तूफानी मौसम रहने की संभावना है। सोमालिया तट से सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में भी स्थिति खराब रहेगी। इस स्थिति को देखते हुए IMD ने मछुआरों को 3 अक्टूबर को इन सभी समुद्री क्षेत्रों में न उतरने की सख्त हिदायत दी है।

ये भी पढ़ें- Priyanka Kakkar: पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस में शामिल

Priyanka Kakkar: पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस में शामिल

Priyanka Kakkar joins Congress: पंजाब चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (आप) को बहुत ही बड़ा झटका लगा है। AAP की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ शनिवार (3 अक्तूबर) को कांग्रेस में शामिल हो गईं। इस दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य श्याम सुंदर शर्मा और पत्रकार रजत टंडन ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला, पार्टी महासचिव सैयद नासिर हुसैन, कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव की मौजूदगी में तीनों नेता पार्टी में शामिल हुए।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजीव शुक्ला ने कहा, “आज बहुत ख़ुशी का दिन है। हमारे साथ श्याम सुंदर शर्मा जी हैं, जो यूपी में काफी प्रभावशाली नेता हैं। शर्मा जी 8 बार के विधायक रहे हैं और पूर्व में मंत्री रह चुके हैं। प्रियंका कक्कड़ जी और रजत राकेश पांडेय जी भी कांग्रेस पार्टी से जुड़ रहे हैं। मेरा मानना है कि इन सभी के साथ आने से यूपी और देश की राजनीति पर बहुत प्रभाव पड़ेगा।”

कांग्रेस में क्यों शामिल हुईं?

कांग्रेस में शामिल होने के बाद कक्कड़ ने कहा कि वह बहुत गर्व के साथ कांग्रेस में शामिल हो रही हैं क्योंकि वह उस दिल्ली को वापस पाना चाहती हैं, जिसमें वह बड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “मैं ऐसी हरी-भरी, स्वच्छ, प्रगतिशील और सुरक्षित दिल्ली चाहती हूं, जो मेरे बचपन और मेरे बड़े होने के वर्षों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।” कक्कड़ ने कहा कि भारतीय राजनीति में एक दशक से अधिक समय के अनुभव के बाद उनका मानना है कि कांग्रेस ही ऐसा कर सकती है।

प्रियंका ने की राहुल गांधी की तारीफ

उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा, “अगर कोई एक नेता प्रामाणिक है, तो वह राहुल गांधी हैं। वह दृढ़ विश्वास वाले नेता हैं।” आम आदमी पार्टी छोड़ने के कारणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि AAP ने जनता से कहा था कि वह बंगला और गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करेगी। लेकिन बाद में निजी यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल होने लगे।

केजरीवाल पर भड़कीं

प्रियंका ने आगे कहा, “मैं आम आदमी पार्टी छोड़ी, क्योंकि ये वही पार्टी है, जिसने जनता से कहा था- हम बंगला, गाड़ी नहीं लेंगे। लेकिन बाद में प्राइवेट ट्रैवल के लिए चॉपर इस्तेमाल होने लगे। राहुल गांधी जी आज ‘वोट चोरी’ के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने हम सभी को बताया कि जनता का वोट चुराया जा रहा है। उन्होंने जनता को दिखाया कि ज्ञानेश कुमार ‘वोट चोरी’ कर नरेंद्र मोदी की झोली में डाल रहे हैं। आज इस मौके पर मैं सभी नेताओं का धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने मुझे अपने परिवार का हिस्सा बनाया।”

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने कभी कैमरे के लिए आंसू नहीं बहाए।” प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस में शामिल होते ही केजरीवाल की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा बंगला गाड़ी नहीं लेने की बात कही। लेकिन प्राइवेट हेलीकॉप्टर में घूमने लगे। ऐसी पार्टियों में देश हित पीछे रह जाता है और खुद आगे रहते हैं।

ये भी पढ़ें- बिहार MLC चुनाव से पहले अनंत सिंह ने दिए बगावत के संकेत, जन सुराज प्रत्याशी के नामांकन जुलूस में पहुंचे JDU विधायक

पंजाब चुनाव से पहले प्रियंका कक्कड़ का कांग्रेस में शामिल होना आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। जिस तरह से पार्टी के एक-एक नेता छोड़ रहे हैं और सीधे केजरीवाल की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं वह साफ दिख रहा है कि आम आदमी पार्टी के भीतर कितना असंतोष है।

राज्यसभा चुनाव से पहले एनडीए को झटका

लखनऊ। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में एनडीए को बड़ा झटका लगा है। भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के दो विधायकों के बारे में खुद पार्टी के सुप्रीमो ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि वे समाजवादी पार्टी को वोट करेंगे। गौरतलब है कि भाजपा राज्यसभा की आठ सीटें जीतने का प्रयास कर रही है, जिसके लिए उसे 296 वोट की जरुरत है, जबकि एनडीए के पास अभी 294 विधायक हैं। उनमें से भी दो विधायक कम हो गए हैं।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने शुक्रवार को एक टेलीविजन चैनल से कहा, ‘मेरी पार्टी के दो विधायक सपा को वोट करेंगे। एक अब्बास अंसारी तो दूसरे जगदीश नारायण राय हैं’। अब्बास की हाल ही में लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात भी हुई है।

राजभर ने बताया कि 2022 के चुनाव में उनका सपा से गठबंधन था। तब अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के 12 नेता उनको दिए थे। उन नेताओं ने राजभर की पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा था। उनमें से अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय जीते थे। राजभर ने कहा, ‘ये दोनों शुरू से उन्हीं के नेता हैं। टोपी-टापा लगाकर घूमते हैं। झंडा उनका लगाकर घूमते हैं। रसीद उनकी पार्टी की काटते हैं। तो वो हमको चिंता नहीं रहती है’।

यूपी रेरा ने 5 जिलों की 11 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी हरी झंडी, नोएडा-गाजियाबाद से लखनऊ तक इतने प्रोजेक्ट

उत्तर प्रदेश में अपना खुद का घर खरीदने और दुकान का सपना देखने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के मकसद से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने प्रदेश के 5 प्रमुख जिलों की 11 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन सभी प्रोजेक्ट्स के जरिए कुल ₹2086.06 करोड़ का भारी-भरकम निवेश होगा। इसके तहत 1873 नए मकान और व्यावसायिक दुकानें बनाई जाएंगी। इन नई परियोजनाओं को हरी झंडी मिलने से न केवल घर खरीदारों का इंतजार खत्म होगा बल्कि निर्माण क्षेत्र से जुड़ी तमाम आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

यूपी रेरा की 215वीं बैठक में हुआ बड़ा फैसला

यह बड़ा फैसला लखनऊ स्थित यूपी रेरा मुख्यालय में आयोजित प्राधिकरण की 215वीं अथॉरिटी बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान बिल्डरों द्वारा सौंपे गए तमाम प्रोजेक्ट प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा और जांच-पड़ताल की गई। सभी कायदे-कानून और मानकों पर खरे उतरने के बाद ही इन 11 परियोजनाओं के पंजीकरण और निर्माण को अंतिम स्वीकृति दी गई। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि इन प्रोजेक्ट्स के निर्माण में रेरा कानून के हर एक नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा ताकि काम तय समय पर पूरा हो सके।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सबसे बड़ा दांव: लगेगा ₹1800 करोड़ से अधिक का फंड

निवेश के आंकड़े के मामले में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) जिला सबसे आगे रहा। इस जिले में कुल 2 बड़ी आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। अकेले गौतमबुद्ध नगर जिले में ही करीब ₹1800.36 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के तहत 1398 नए और आधुनिक आवासीय फ्लैट्स बनाए जाएंगे। इससे एनसीआर में घर की तलाश कर रहे लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा।

सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स लखनऊ को मिले, जानें गाजियाबाद और बाकी जिलों का हाल

अगर बात मंजूर की गई परियोजनाओं की कुल संख्या की करें, तो इस सूची में राजधानी लखनऊ सबसे ऊपर है। राजधानी में कुल 5 नई परियोजनाओं पर मुहर लगी है। इनमें 2 आवासीय और 3 कॉमर्शियल प्रोजेक्ट शामिल हैं। लखनऊ के इन प्रोजेक्ट्स में लगभग ₹169.53 करोड़ का खर्च आएगा और 198 नई इकाइयां (घर और दुकानें) बनकर तैयार होंगी। दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले में 2 आवासीय प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनमें करीब ₹106.84 करोड़ का निवेश किया जाएगा और 211 नए मकान तैयार किए जाएंगे। लखनऊ के नजदीकी जिले बाराबंकी में 1 आवासीय परियोजना को हरी झंडी दी गई है। ₹5.78 करोड़ के बजट वाली इस परियोजना के तहत 53 नए घर बनाए जाएंगे। पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद में 1 व्यावसायिक परियोजना पास की गई है। ₹3.55 करोड़ के अनुमानित निवेश से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में 13 दुकानें और व्यावसायिक दुकानें तैयार होंगी।

रोजगार के बढ़ेंगे अवसर, ईंट-सीमेंट से लेकर ट्रांसपोर्ट तक को मिलेगी रफ्तार

इन 11 प्रोजेक्ट्स के शुरू होने का असर सिर्फ रियल एस्टेट और मकानों के निर्माण तक ही सीमित नहीं रहेगा। जब ₹2000 करोड़ से अधिक की राशि बाजार में लगेगी, तो ईंट, सीमेंट, सरिया, ट्रांसपोर्ट, इंजीनियरिंग और मजदूरी से जुड़े तमाम सेक्टरों में काम की रफ्तार अचानक बढ़ जाएगी। इससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि राजमिस्त्री, मजदूर, इंजीनियर और टेक एक्सपर्ट्स के लिए रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर बनेंगे।

तय समय पर मिलेगा घर, खरीदारों के हितों की होगी पूरी सुरक्षा

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्रदेश में रियल एस्टेट बाजार को पारदर्शी, भरोसेमंद और जिम्मेदार बनाना प्राधिकरण की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के साथ-साथ अब उन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि बिल्डर समय पर काम पूरा करके दें। उन्होंने घर खरीदारों को भरोसा दिलाया कि रेरा कानून के तहत प्रमोटरों और ग्राहकों दोनों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। किसी भी खरीदार के साथ धोखाधड़ी नहीं होने दी जाएगी और ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हुए समय सीमा के भीतर प्रोजेक्ट्स का कब्जा दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।

(नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

अखिलेश, तेजस्वी या हेमंत—2029 का चंद्रबाबू नायडू कौन?

कई कथित जानकार इस ख्याल में हैं कि राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यदि ऐसा है तो हेमंत सोरेन, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव भला नाथवानी-अडानी की घास क्यों न खाएँ? सो इनके बूते उत्तर प्रदेश में योगी की जगह अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने का करिश्मा भी संभव है? चुनाव में भारी चंदा मिल सकता है? कर्नाटक में अडानी मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को इतनी कारोबारी ताकत और राजनीतिक हैसियत दिला सकते हैं कि कांग्रेस हाईकमान कभी उन्हें हटाना भी चाहे तो हटा न पाए? या परिमल नाथवानी ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को भरोसा दिया होगा कि झारखंड में उन्हे सांसद बनाने के लिए वोट देंगे तो तो मौका आने पर वे बदले में बिहार में लालू परिवार की सत्ता लौटाने में मदद करेंगे!

जान ले गुजराती कारोबारी की कोई चाल धंधे के बिना नहीं होती। वह राजनीति से पहले धंधे, सौदे और खरीद-फरोख्त की रूपरेखा बनाता है। उसकी बिसात बड़ी होती है। प्यादों को भी छोटी-मोटी थैलियों से नहीं साधा जाता। इसलिए बात केवल राज्यसभा की एक सीट की नहीं है। इंदिरा गांधी की आकस्मिक मृत्यु के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। तब वे अंबानी और क्रोनी पूँजीपतियों को पसन्द नहीं करते थे। “दलाल हटाओ, देश बचाओ” जैसे जुमलों में थे। पर धीरूभाई ने ऐसे ही एंपायर नहीं बनाया। वे राजीव गांधी से मिले तो उनकी एप्रोच केवल चाँदी की जूती पहनाने वाली नहीं थी बल्कि अंदाज सीधा था—यह सब इंदिराजी की कृपा है। बताइए, मैं क्या करूँ? सब तो आपका है!

दिल्ली में तब धीरूभाई के कर्ताधर्ता बालू थे। मेरा मित्र टोनी यूएसआईएस की नौकरी छोड़कर उनका शागिर्द हुआ ही था। उस समय दिल्ली में न राजीव शुक्ला का मतलब था, न नाथवानी का। धीरूभाई के ही धंधे का एक और शातिर प्यादा था—देसाई। संसद भवन और सांसदों पर उसकी पकड़ देखकर मैं हैरान होता था। मजाल कि रिलायंस को लेकर संसद में सवाल उठे और उसके लोगों को पहले खबर न हो! बहस होने से पहले ही हर तरह का हिसाब तैयार रहता था।

फिलहाल इतना जान लें कि मुकेश अंबानी और गौतम अडानी दोनों अपनी-अपनी नई शतरंज सजा रहे हैं। उस बिसात पर मोदी-शाह हमेशा किंग और वजीर नहीं रहेंगे। विपक्ष की सम्भावनाएँ हैं। सो बतौर पूँजी ढाई घर चलने वाली चाल के लिए अखिलेश, तेजस्वी, हेमंत और डी. के. शिवकुमार जैसे घोड़े भी हैं।

मामूली बात नहीं है कि मुकेश अंबानी अब ट्रंप के दरबार तक पहुँच रखते हैं। रिलायंस का संस्थागत आधार मोदी युग से बहुत पुराना और कहीं अधिक विविध है। स्वयं अडानी एंटरप्राइजेज अपने कारोबारी मॉडल को देश के लिए “अत्यावश्यक विशाल आधारभूत ढाँचा” और “भारत के विकास के अगले चरण को शक्ति देने वाला” बताती है।

मतलब दोनों घराने यह निश्चित माने हुए होंगे कि मोदी जैसे कई आएँगे-जाएँगे, लेकिन उनके कारोबारी साम्राज्य को पीढ़ियों तक रहना है। उनके पास एक चुनाव का नहीं, पीढ़ियों का रोडमैप होगा। सो जब तक मौजूदा सत्ता है, उसे दुहो। अंधेरा बनने लगे, नए घोड़ों की लगाम पकड़ो। कसौटी है कि जो भी आए लगाम पकड घुडसवारी शुरू हो जाए!

नाथवानी की झारखंड वापसी का मतलब

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट परिमल नाथवानी के बेटे धनराज परिमल नाथवानी को जब अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी का राज्यसभा उम्मीदवार बनाया तब नए सिरे से परिमल नाथवानी के नाम की भी चर्चा शुरू हुई। पिछले छह साल तक वे आंध्र प्रदेश से जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस समर्थित राज्यसभा सांसद थे। इसलिए दिल्ली या उत्तर भारत में उनकी चर्चा थोड़ी कम थी। परिमल नाथवानी छह साल के बाद अब फिर से वापस लौटे हैं। पहले वे खुद झारखंड से राज्यसभा सांसद बने और उसके बाद बेटे को उत्तर प्रदेश से उच्च सदन में भेजने का इंतजाम किया है।

दोनों के उच्च सदन जाने का जो रास्ता चुना गया उसमें दिन रात का फर्क है। परिमल नाथवानी खुद निर्दलीय सांसद हैं।

तकनीकी रूप से उनको भारतीय जनता पार्टी समर्थित कहा जाता है लेकिन असल में वे भाजपा के ही सांसद हैं। झारखंड से भाजपा समर्थित सांसद होने का मतलब होता कि उनके पास चुनाव जीतने के लिए आवश्यक 28 मतों में से 20 या उससे ज्यादा मत थे और भाजपा ने बाहर से उनको समर्थन देकर चुनाव जिताया। लेकिन ऐसा नहीं है। उनके पास अपने इंतजाम से सिर्फ पांच विधायक थे, जिनके दम पर वे नामांकन भी नहीं कर सकते थे। भाजपा उनकी प्रस्तावक बनी और भाजपा ने अपने 21 व एनडीए के तीन सहयोगी विधायकों के वोट दिला करके उनको उच्च सदन में पहुंचाया। इसलिए वे भाजपा के सांसद ही कहे जाएंगे, तकनीकी स्थिति चाहे जो हो, जबकि वे अपने बेटे को भाजपा की धुर विरोधी और उत्तर प्रदेश में भाजपा से सत्ता छीनने के लिए लड़ रही समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद बनाने का फैसला किया है। ऐसा नहीं है कि पिता, पुत्र में मतभेद हैं और दोनों ने अलग अलग रास्ता चुना है। यह विशुद्ध रूप से कॉरपोरेट और राजनीति के नेक्सस की एक बेशर्म तस्वीर है।

बहरहाल, परिमल नाथवानी पहले 12 साल तक झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे थे। वे गुजरात के रहने वाले हैं लेकिन 2008 से 2020 तक झारखंड से सांसद रहे। उसके बाद आंध्र प्रदेश चले गए, जहां से 2026 जून तक सांसद रहे। अब फिर वे झारखंड से सांसद चुने गए हैं। जैसे ही उन्होंने तय किया कि वे फिर से झारखंड से लड़ेंगे वैसे ही तय हो गया था कि एक सीट एनडीए के खाते में जाएगी। इसके बावजूद सत्तारूढ़ महागठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दलित समाज के बैद्यनाथ राम को उतारा तो कांग्रेस ने प्रणब झा को टिकट दिया। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो संख्या बल महागठबंधन के पक्ष में था। एक सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरुरत थी और सरकार के पास 56 विधायकों का समर्थन था।

अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कमान अपने हाथ में रखते। सहयोगी पार्टियों के साथ तालमेल करके चलते तो दोनों सीटें जीत सकते थे। उनकी पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि उन्होंने कांग्रेस से कहा था कि वह दोनों सीटें उनको लड़ने दे तो वे दोनों सीटें निकाल लेंगे। लेकिन कांग्रेस तैयार नहीं हुई। यह भी खबर है कि पहले परिमल नाथवानी की जेएमएम की टिकट से लड़ने की बात हुई थी। लेकिन वे दूसरा उम्मीदवार नहीं बनना चाहते थे। बहरहाल, महागठबंधन में समीकरण बिगड़ा और जेएमएम व कांग्रेस ने अलग अलग उम्मीदवार घोषित किए और नाथवानी निर्दलीय लड़ने पहुंचे।

यह हकीकत है कि भाजपा अपने दम पर उनको नहीं जीता सकती थी। क्योंकि भाजपा के अपने 21 विधायकों के अलावा आजसू, लोजपा और जदयू के तीन विधायक थे। अगर जेकेएलएम के विधायक जयराम महतो भी साथ आते तब भी आंकड़ा 25 पहुंच रहा था, जबकि जीतने के लिए 28 वोट की जरुरत थी। भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियों के 25 विधायकों को छोड़ दें तो सरकार के पास 56 का समर्थन था। फिर भी वोटिंग हुई औऱ नतीजे आए तो जेएमएम को 30 वोट मिले और कांग्रेस को सिर्फ 21 वोट मिले। बाकी पांच वोट परिमल नाथवानी को चले गए। नतीजे के बाद सभी पार्टियों ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी लाइन के हिसाब से वोट किया है। लेकिन कांग्रेस ने उसी समय स्पष्ट कर दिया कि लालू प्रसाद की पार्टी राजद के चार विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। लेफ्ट के दो विधायकों के भी क्रॉस वोटिंग करने की खबर आई। उनकी मदद से परिमल नाथवानी चुनाव जीत गए।

बताया जा रहा है कि लालू प्रसाद की पार्टी राजद को मैनेज करने का काम सीधे मुंबई से हुआ।

अंबानी परिवार ने अपनी कंपनी के ग्रुप प्रेसिडेंट के लिए राजद से बात की और तेजस्वी यादव खुशी खुशी राजी हो गए। ध्यान रहे मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव सहित परिवार के करीब एक दर्जन सदस्य शामिल हुए थे। विशेष विमान से पूरा परिवार शादी में गया था। बहरहाल, यह मामला सिर्फ तेजस्वी यादव या राजद का नहीं है। अगर हेमंत सोरेन चाहते तो कांग्रेस जीत सकती थी। उस समय यह भी खबर आई थी कि अंबानी समूह ने मुख्यमंत्री को भी मैनेज किया।

आंकड़ों के विश्लेषण से भी लगता है कि सब मिलीभगत थी। पहला सवाल तो तभी खड़ा हुआ जब हेमंत सोरेन के उम्मीदवार को 30 वोट मिले। जब जीत का आंकड़ा 28 का था और इतना नजदीकी मुकाबला था तो दो अतिरिक्त वोट उनको क्यों ट्रांसफर हुआ? ध्यान रहे नाथवानी को 29 वोट मिले थे। बताने वाले बताते हैं कि यह सीएम के यहां से ही तय हुआ था कि नाथवानी से एक वोट ज्यादा जेएमएम उम्मीदवार को आना चाहिए। यानी खेल पहले से फिक्स था। कांग्रेस उम्मीदवार का हारना पहले से तय था। अगर हेमंत चाहते तो न राजद में टूट होती और न उनके अतिरिक्त वोट जेएमएम उम्मीदवार को जाते। आराम से दोनों सीटें महागठबंधन जीतता। इस कहानी का लब्बोलुआब यह है कि नाथवानी को भले भाजपा ने राज्यसभा भेजा लेकिन उनकी जीत के लिए अंबानी समूह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजद दोनों को मैनेज किया। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि झारखंड में अडानी समूह का बड़ा इंटरेस्ट है। गोड्डा में उसका पावर प्लांट है, जहां से 16 सौ मेगावाट बिजली बांग्लादेश जाती है। सो, अंबानी समूह का भी झारखंड में इंटरेस्ट लेना समझ में आता है।

अजय राय की छुट्टी! कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी यूपी की कमान, जानिए कौन हैं ये, क्यों बनाया गया इन्हें अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाते हुए उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल की नेता और वरिष्ठ विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और लगातार तीन बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचने वाली आराधना मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस ने प्रदेश में अपने पारंपरिक वोट बैंक और महिला नेतृत्व दोनों को एक साथ साधने का बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जानिए पारिवारिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मी आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के दिग्गजों में गिने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मिसाल माना जाता है। प्रमोद तिवारी ने प्रतापगढ़ जिले की ऐतिहासिक रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था। आराधना मिश्रा की शुरुआती और उच्च शिक्षा प्रयागराज में ही हुई। उन्होंने 1997 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया और मानवाधिकार विषय की पढ़ाई भी पूरी की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 34.1 करोड़ रुपये है। इसमें 6.1 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 28 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

त्रिस्तरीय पंचायत से विधानमंडल तक: ऐसा रहा राजनीतिक सफर

आराधना मिश्रा को राजनीति विरासत में जरूर मिली, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत धरातल से की। उन्होंने वर्ष 2001 से लगातार तीन कार्यकाल के लिए ब्लॉक प्रमुख के रूप में काम किया और स्थानीय निकायों में काम करने का लंबा अनुभव हासिल किया। वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत मनरेगा की उत्तर प्रदेश राज्य निगरानी एवं सतर्कता समिति की सदस्य भी मनोनीत की गईं। इसके अलावा 2012 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस की मीडिया कैंपेन कमेटी की सक्रिय सदस्य रहीं।

वर्ष 2014 में जब उनके पिता प्रमोद तिवारी राज्यसभा के लिए चुने गए, तब रामपुर खास सीट पर हुए उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने जीत दर्ज कर पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में कदम रखा। वर्ष 2017 की प्रचंड बीजेपी लहर में भी उन्होंने रामपुर खास सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वह उन चुनिंदा 7 कांग्रेस विधायकों में शामिल थीं जो उस चुनाव में जीत दर्ज कर पाए थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 14000 से अधिक वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।

2019 से संभाल रही हैं विधानमंडल दल की नेता की कमान

आराधना मिश्रा ‘मोना’ की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने अक्टूबर 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर कांग्रेस की मुख्य रणनीतिकार बनी हुई हैं। इसके अलावा वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रमुख पैनलों की सदस्य हैं और राष्ट्रीय टीवी बहसों में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती रही हैं।

क्यों बनाया गया उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कई अहम रणनीतिक और राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा प्रभाव रहा है। आराधना मिश्रा एक प्रमुख और स्थापित ब्राह्मण चेहरा हैं। कांग्रेस लंबे समय से अपने पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है, ऐसे में उन्हें कमान सौंपना एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

महिला नेतृत्व को बढ़ावा

कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार जोर देती रही है। आराधना मिश्रा राज्य की अग्रिम पंक्ति की महिला नेताओं में शामिल हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में प्रमोद तिवारी का मजबूत जनाधार रहा है। आराधना मिश्रा ने उस विरासत को न सिर्फ संभाला है बल्कि तीन बार लगातार चुनाव जीतकर अपनी खुद की मजबूत जनस्वीकार्यता भी साबित की है। ब्लॉक स्तर से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक काम करने का उनका लंबा अनुभव पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में मददगार साबित हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि आराधना मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पार्टी एक नए उत्साह और मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरेगी।