अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और सैन्य नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आगे भी ऐसा खतरा हुआ तो अमेरिका फिर से कड़ा कदम उठा सकता है। ट्रम्प बोले- ईरान से बातचीत मुश्किल ट्रम्प ने कहा कि ईरान के कई बड़े नेता अब नहीं रहे। इसके चलते नए समझौते पर बातचीत मुश्किल हो गई है। उन्होंने कहा, फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि ईरान में फैसले कौन ले रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई बहुत ज्यादा है। सेना को वेतन देने में भी दिक्कतें आ रही हैं। ईरान की मदद करने वालों को भी चेतावनी ट्रम्प का बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए नए आर्थिक प्रतिबंध का ऐलान किया है। ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि ईरान को आर्थिक मदद देने वाले देशों और संस्थाओं के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अब दुनिया के देशों को तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ खड़े हैं या ईरान के साथ। ईरान का जवाब- अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं झुकेंगे ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका की नई रणनीति को बेअसर बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान दशकों से प्रतिबंधों का सामना करता आया है। केवल आर्थिक दबाव के जरिए उसे झुकाया नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, अमेरिका की यह नीति अब तक सफल नहीं हुई है और आगे भी संभावना कम है। होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल क्यों चाहते हैं ट्रम्प? इसकी पांच बड़ी वजह है- 1. दुनिया की तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता युद्ध से पहले दुनिया के तेल और LNG की करीब 20% सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती थी। इस मार्ग पर नियंत्रण का मतलब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। 2. ईरान के दबाव बनाने वाले सबसे बड़े हथियार को कमजोर करना ईरान लंबे समय से होर्मुज को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। स्ट्रेट बंद कर या जहाजों की आवाजाही प्रभावित कर वह दुनिया और अमेरिका पर दबाव बना सकता है। 3. तेल की कीमतों को काबू में रखना होर्मुज में तनाव बढ़ते ही तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं। अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग खुला रहे ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनी रहे और कीमतें कंट्रोल में रहें। 4. खाड़ी देशों और अमेरिकी हितों की सुरक्षा सऊदी अरब, UAE, कुवैत और कतर जैसे अमेरिका के सहयोगी देशों का तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है। इसलिए वॉशिंगटन इसे अपनी रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जोड़कर देखता है। 5. अमेरिका-ईरान बातचीत में बढ़त हासिल करना अगर होर्मुज पर ईरान का प्रभाव कम होता है तो अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या वार्ता में तेहरान की सौदेबाजी की ताकत भी कमजोर पड़ सकती है। ——————————– यह भी पढ़ें… होर्मुज में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ रहा: ट्रम्प की धमकी के बावजूद जहाज ईरानी रूट से जा रहे होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Market news :अमेरिका और एशिया से खराब संकेतों के बावजूद गिफ्ट निफ्टी में मजबूती है। यह करीब 70 अंक ऊपर दिख रहा है। इधर FIIs की कैश में हल्की बिकवाली देखने को मिली है लेकिन वायदा में खरीदारी हुई है। हालांकि FIIs के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट दो लाख 12 हजार के पार चले गए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
मार्केट ओवरव्यू
20 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त वापसी देखने को मिली। US ट्रेज़री यील्ड में कमी और ग्लोबल स्तर पर अच्छे संकेतों के बीच प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी हुई,जिससे निफ्टी की लगातार सात सत्रों की गिरावट का सिलसिला थम गया। बाजार की शुरुआत मजबूत रही,लेकिन शुरुआती घंटों में कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। हालांकि,जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा बाज़ार ने फिर से तेजी पकड़ी और मीडिया,फाइनेंशियल व रियल्टी शेयरों की अगुवाई में निफ्टी ने 24,265.15 का दिन का हाई छुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत बढ़कर 77,537.72 पर और निफ्टी 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत बढ़कर 24,231.85 पर बंद हुआ।
US की ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध की तैयारी
अमेरिका की ईरान पर अब तक के सबसे सख्त प्रतिबंधो की तैयारी है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा है कि इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंधों का सोमवार को एलान होगा। ईरान ने कहा कि यह आर्थिक आतंकवाद है। चीन ने भी इसका विरोध किया है। क्रूड 93 डॉलर के पार निकल गया है। सोना-चांदी भी चमके हैं। सोना 4500 डॉलर के पार दिख रहा है।
अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट, बॉन्ड यील्ड फिर 4.7% पर पहुंची
अमेरिका-ईरान के बीच गहराते विवाद से US बॉन्ड यील्ड में फिर उछाल आया है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.7% पर पहुंचने से अमेरिकी बाजार नर्वस हो गया है। डाओ जोंस कल 700 प्वाइंट से ज्यादा फिसला। S&P और नैस्डैक भी एक परसेंट फिसले। उधर एशियाई बाजारों में भी नरमी है। निक्केई और कॉस्पी में करीब एक परसेंट का दबाव दिख रहा है।
HDFC बैंक ने बॉन्ड से जुटाए रिकॉर्ड 1.8 बिलियन डॉलर
HDFC बैंक ने तीन और पांच साल के डॉलर बॉन्ड के जरिये रिकॉर्ड पौने दो बिलियन डॉलर्स जुटाए हैं। किसी भारतीय वित्तीय कंपनी का ये सबसे बड़ा डेट इश्यू रहा। HDFC बैंक के बॉन्ड्स के लिए सात बिलियन डॉलर से ज्यादा की बोलियां मिलीं।
Market cues : 24300-24400 के ऊपर टिकने पर ही निफ्टी में आएगी तेजी, 24150 पर दिख रहा तत्काल सपोर्ट
सरकार ने 10 लाख टन चीनी इंपोर्ट को मंजूरी दी
चीनी के दाम काबू में करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 10 लाख टन चीनी आयात को मंजूरी दी गई है। 31 अक्टूबर तक बिना किसी ड्यूटी के इंपोर्ट हो सकेगा।
सेबी की नई रिपोर्ट में हुआ खुलासा, F&O में करीब 88% ट्रेडर्स को हुआ घाटा
F&O में रिटेल ट्रेडर्स को अब भी जमकर घाटा हो रहा है। सेबी की नई रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में वायदा में करीब 88% ट्रेडर्स को घाटा हुआ। हालांकि F&O में ट्रेडिंग करने वाले भी घटे हैं। इनमें पिछले साल के मुकाबले 18% की कमी आई है। ऑप्शन बॉयर्स के मुकाबले ऑप्शन सेलर्स ने कम नुकसान झेला है।
सचिवों के साथ PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग, इंफ्रा, डिफेंस, पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर चर्चा
सचिवों के साथ PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग में इंफ्रा,डिफेंस और कनेक्टिविटी पर मंथन हुआ है। पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को स्पीड देने के निर्देश दिए गए हैं। पीएम ने कहा कि डिफेंस को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत है। AI के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।
एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो
20 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों(FIIs)ने ₹583 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹3,537 करोड़ की नेट खरीदारी करके बाजार को सहारा देना जारी रखा।
Asian Market Today: शुक्रवार, 21 अगस्त को एशियाई शेयरों में गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स गुरुवार को बॉन्ड यील्ड के निचले स्तर से वापस ऊपर आने के कारण काफी नीचे बंद हुए थे। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.2% गिर गया। कोस्पी (Kospi) ने इस ट्रेंड के उलट 0.87% की बढ़त दर्ज की, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.90% और टोपिक्स (Topix) 0.31% नीचे आ गया। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
S&P 500 इंडेक्स में रात भर में 0.9% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण वॉलमार्ट (Walmart) था। कमजोर बिक्री के आंकड़ों के बाद इसमें 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) में 0.7% की गिरावट आई, जो लगातार पांचवें दिन की गिरावट थी।
US ट्रेजरी में शुरुआती तेजी के बाद एशियाई बॉन्ड गिरे और अमेरिकी डॉलर कमजोर बना रहा। निवेशकों के मन में यह सवाल था कि क्या लंबे समय के कर्ज की अमेरिकी बायबैक (buyback) प्रक्रिया से उधार लेने की लागत में केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलेगी।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बॉन्ड की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, क्योंकि गुरुवार को US 30-वर्षीय यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी, भले ही US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भविष्य में बड़े बायबैक और एक नए फिस्कल प्लान का संकेत दिया था।
30-वर्षीय यील्ड छह बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.25% हो गई, जिससे ट्रेजरी के बायबैक बढ़ाने के अचानक फैसले से आई गिरावट का असर काफी हद तक खत्म हो गया।
जापानी येन स्थिर रहा क्योंकि देश का मुख्य महंगाई सूचकांक लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रही। बाजार अब सितंबर में संभावित कदम पर नजर रखे हुए हैं। येन 158.96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 159 के स्तर को पार कर गया था।
ऑफशोर युआन 6.7238 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।
टेक्नोलॉजी शेयरों में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) पर ध्यान केंद्रित रहा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुक्रवार को 110 ट्रिलियन वॉन ($79 बिलियन) तक का शेयरधारक रिटर्न पैकेज पेश करने वाली थी। इस बीच, ईरान के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “आर्थिक युद्ध” की धमकी के कारण पांच दिनों तक कीमतों में आई तेज़ी के बाद तेल की कीमतें कुछ कम हुईं। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान ने एक डील को ठुकरा दिया है।
ब्रेंट क्रूड 0.7% गिरकर $93.10 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि गुरुवार को कारोबार के दौरान यह $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% गिरकर $86.19 प्रति बैरल पर आ गया।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Market news : बॉन्ड यील्ड में नरमी से भारतीय बाजारों का भी मूड सुधरा है। गिफ्ट निफ्टी में करीब 100 प्वाइंट की तेजी है। FIIs की कैश में हल्की खरीदारी देखने को मिली है। लेकिन वायदा में बिकवाली दिखी है। उधर अमेरिका में सॉफ्टवेयर कंपनियों में जोरदार खरीदारी आई है। इंफोसिस और विप्रो के ADR दो फीसदी चढ़े हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
मार्केट ओवरव्यू
19 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। निवेशक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार बनी हुई ग्लोबल अनिश्चितता को लेकर चिंतित नजर आए। इंडेक्स गिरावट के साथ खुले और उनमें और गिरावट आई। डिफेंस और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण निफ्टी और सेंसेक्स 24,050 और 77,000 के स्तर से नीचे आ गए। हालांकि,इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया,जिससे कुल गिरावट सीमित रही। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 325.78 अंक या 0.42 प्रतिशत गिरकर 76,909.68 पर और निफ्टी 76.60 अंक या 0.32 प्रतिशत गिरकर 24,078.30 पर बंद हुआ।
SEBI ने दो एंटिटीज पर लगाई रोक, गलत तरीके से कमाए 3.68 करोड़ जब्त किए
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 13 अगस्त को सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी पर हुई गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन लिया है। सेबी ने Copthall Mauritius और Mansi Share पर शेयर बाजार में कामकाज पर रोक लगा दी है। मार्केट मैन्युपुलेशन से कमाए गए तीन करोड़ 68 लाख रुपये भी जब्त कर लिए गए हैं।
ईरान के खिलाफ ट्रंप की इकोनॉमिक स्ट्राइक
ईरान के खिलाफ ट्रंप की इकोनॉमिक स्ट्राइक हुई है। ट्रंप ने ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधो का एलान करते हुए कहा है कि ईरान ने डील करने का मौका गंवा दिया है। ईरान के मददगारों के खिलाफ भी आर्थिक एक्शन होंगे। इस खबर के चलते क्रूड 92 डॉलर के पार चला गया है।
अमेरिका में डबल होगा बॉन्ड बायबैक
अमेरिका में ट्रेजरी डिपार्टमेंट के अगले महीने से बॉन्ड बायबैक दोगुना करने के एलान से अमेरिका बाजारों में तीन दिन की गिरावट पर ब्रेक लग गई। 10 साल और 30 साल की बॉन्ड यील्ड नरम पड़ी है। डाओ जोंस में 100 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी दिखी। वहीं एशिया में भी रौनक है। निक्केई में एक परसेंट तो कॉस्पी में पांच परसेंट से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है।
सोने और चांदी में जोरदार तेजी
बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर इंडेक्स के 99 के नीचे फिसलने से सोने और चांदी में जोरदार तेजी आई है। करीब तीन महीने बाद सोने के भाव 4500 डॉलर के ऊपर निकल गए हैं। चांदी के भाव भी 66 डॉलर के ऊपर आ गए हैं।
जापान के साथ बढ़ेगा रक्षा सहयोग, BEL की जापानी कंपनी से साझेदारी पर चर्चा संभव
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आज जापान के डिफेंस मिनिस्टर के साथ अहम बैठक है। इसमें आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर होगा। जापानी कंम्यूनिकेशन सिस्टम UNICORN के तकनीक ट्रांसफर के लिए BEL के साथ साझेदारी पर चर्चा होगी।
LIC को HDFC बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाने को मंजूरी
HDFC बैंक में आज एक्शन दिख सकता है। RBI ने LIC को बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाकर करीब 10% करने की मंजूरी दे दी है। अभी LIC की बैंक में 4.11% हिस्सेदारी है।
एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और 19 अगस्त को 407 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार सातवें सेशन में भी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा और भारतीय शेयरों में 3,973 करोड़ रुपये का निवेश किया।
Market cues : बाजार पर मंदड़ियों की पकड़ और मजबूत होने के संकेत, 23850-23600 तक गिर सकता है निफ्टी
Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।
ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।
आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव
ये रहे 20 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।
मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।
कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।
चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।
गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।
नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।
बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।
भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।
चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।
हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।
जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।
लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।
पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।
तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।
पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?
मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।
किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?
- कच्चे तेल की कीमतें:
पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।
- डॉलर के मुकाबले रुपया:
भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।
- सरकारी टैक्स और शुल्क:
केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।
- रिफाइनिंग की लागत:
कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।
- मांग और आपूर्ति का संतुलन:
बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।
कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?
अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:
Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।
BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।
HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।
Asian Market Today: 20 अगस्त को एशियाई शेयर बाजार में तेज़ी देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबे समय वाले कर्ज़ को वापस खरीदने की योजना की घोषणा के बाद बॉन्ड मार्केट का दबाव कम हुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.8% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरियाई बाज़ार सबसे आगे रहे। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान कोस्पी (Kospi) में 3.86% की उछाल आई, जबकि जापान के निक्केई 225 में 0.95% और टोपिक्स (Topix) में 0.80% की बढ़त हुई। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.9% की बढ़ोतरी के संकेत मिले।
वॉल स्ट्रीट
बुधवार रात वॉल स्ट्रीट पर मज़बूत सेशन के बाद S&P 500 फ्यूचर्स में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ। इस तेज़ी को ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से समर्थन मिला था। S&P 500 फ्यूचर्स में लगभग 0.1% की मामूली बढ़त हुई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स भी 19 अंक या 0.04% ऊपर चढ़ा।
इससे पहले दिन में, S&P 500 ने लगातार तीन सेशन की गिरावट का सिलसिला खत्म किया, क्योंकि लंबे समय वाले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। बॉन्ड मार्केट में हालिया बिकवाली के बाद दबाव कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद यील्ड में यह गिरावट आई।
कच्चे तेल की कीमतें
गुरुवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतें ज़्यादातर स्थिर रहीं। निवेशक अमेरिका-ईरान युद्ध की संभावित दिशा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर विचार कर रहे थे।
अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 25 सेंट या 0.3% बढ़कर $91.87 प्रति बैरल हो गया। वहीं, सितंबर के लिए अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2 सेंट गिरकर $85.81 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाला अक्टूबर WTI कॉन्ट्रैक्ट 14 सेंट या 0.2% बढ़कर $84.53 प्रति बैरल हो गया। बुधवार को ब्रेंट और WTI, दोनों में लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखी गई और ये 24 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए। सितंबर WTI कॉन्ट्रैक्ट गुरुवार को बाद में एक्सपायर होने वाला है।
US-ईरान युद्ध
ट्रंप ने कहा कि इन कदमों का मतलब “अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करना” होगा। उन्होंने इसे “ECONOMIC D-DAY” बताया और सभी US सहयोगियों से वॉशिंगटन का समर्थन करने को कहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश वित्तीय संस्थानों, कंपनियों, एयरपोर्ट या सरकारी निकायों को ईरान की मदद करने की इजाज़त देंगे, उन्हें गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये सज़ाएं क्या होंगी। ट्रंप ने ईरान का समर्थन करने वाली गतिविधियों, जैसे तस्करी, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस के ऑपरेशन और शिप रजिस्ट्री के इस्तेमाल को खत्म करने की भी मांग की।
आज सोने का भाव
गुरुवार को सोने की कीमतें दो महीने से ज़्यादा के उच्चतम स्तर के करीब बनी रहीं। US ट्रेज़री की ओर से लिक्विडिटी सपोर्ट की अचानक घोषणा के बाद बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आई।
0031 GMT पर स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,512.19 प्रति औंस पर लगभग स्थिर रही, जबकि सेशन की शुरुआत में यह $4,525.79 तक पहुंच गई थी, जो 2 जून के बाद इसका उच्चतम स्तर था। बुधवार को इस कीमती धातु की कीमत में 4% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने को फायदा होता है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं, जबकि ऊंची ब्याज दरों से इसकी मांग पर असर पड़ सकता है क्योंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती है।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
ONGC Share Price: सरकारी कंपनी नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) के शेयरों में 19, अगस्त को बढ़त देखने को मिली। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने इस स्टॉक पर ₹290 प्रति शेयर के प्राइस टारगेट के साथ अपनी ‘Buy’ (खरीदने की) रेटिंग बनाए रखी है। ब्रोकरेज का मानना है कि ONGC का रिस्क-रिवॉर्ड आकर्षक बना हुआ है। अच्छा डिविडेंड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों के लिए सकारात्मक आउटलुक और इसकी विदेशी शाखा ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) के बेहतर होते हालात ऐसे कई कारण हैं।
मोतीलाल ओसवाल ने 3 मुख्य कारण बताए हैं।
1. आकर्षक डिविडेंड यील्ड: ONGC का एक साल का फॉरवर्ड डिविडेंड यील्ड 6.9% है, जो तीन साल के उच्चतम स्तर पर है। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, पिछले दशक में यह स्तर केवल दो बार पार हुआ है। कोविड-19 महामारी के दौरान और विंडफॉल टैक्स के समय न कि कंपनी की पेआउट पॉलिसी में किसी संरचनात्मक बदलाव के कारण।
2. कच्चे तेल के लिए मजबूत आउटलुक: ग्लोबल एजेंसियां कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अधिक सकारात्मक हो गई हैं। US एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने CY26 और CY27 के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः $87 और $69 प्रति बैरल कर दिया है, जबकि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने CY26 के लिए सप्लाई की कमी का अनुमान बढ़ाकर 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन कर दिया है।
मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुलता है, तब भी कच्चे तेल की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। इसका कारण ग्लोबल इन्वेंट्री का अभी भी कम होना है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 410 मिलियन बैरल कम हो गई है।
3. OVL में सुधार: पिछले दो तिमाहियों में OVL में आए सुधार और कई एसेट्स के डेवलपमेंट फेज में जाने से, अगर बेहतर रन-रेट बनी रहती है, तो मोतीलाल ओसवाल के टारगेट प्राइस में लगभग ₹15 प्रति शेयर जुड़ सकते हैं। ब्रोकरेज इस क्षमता का मूल्यांकन 8x प्राइस-टू-अर्निंग्स पर करता है।
मोतीलाल ओसवाल ने हाल ही में ONGC की रेटिंग बढ़ाई थी। इसके पीछे सस्ते वैल्यूएशन, मामूली प्रोडक्शन ग्रोथ और एनर्जी सिक्योरिटी पर सरकार के कई सालों से जारी फोकस के बीच बेहतर ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी जैसे कारण थे। उन्हें उम्मीद है कि ONGC का प्रोडक्शन FY26-FY28E के दौरान 1% CAGR की दर से बढ़ेगा। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, वैल्यूएशन के मामले में ONGC अभी FY28E के लिए 5.7x कंसोलिडेटेड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके लंबे समय के औसत एक-साल के फॉरवर्ड P/E (6.5x) से कम है।
ONGC के लिस्टेड इन्वेस्टमेंट की वैल्यू (₹65 प्रति शेयर) और OVL की वैल्यूएशन (₹23 प्रति शेयर) को एडजस्ट करने के बाद, ब्रोकरेज का अनुमान है कि मार्केट असल में 2QFY27-FY28 के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत सिर्फ़ $65 प्रति बैरल मानकर चल रहा है। मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि इंडस्ट्री के मौजूदा हालात को देखते हुए यह अनुमान बहुत ज़्यादा सावधानी भरा है।
इस बीच, ONGC ने 18 अगस्त को असम के गोलाघाट ज़िले में खोराघाट GGS-1 पर गैस निकालने की सुविधाओं (गैस इवैक्यूएशन फैसिलिटीज़) के सफल चालू होने की घोषणा की। यह सुविधा अपर असम शेल्फ से अतिरिक्त जुड़ी हुई नेचुरल गैस को प्रोसेस करने और उसे नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड (NEGG) के ज़रिए बाहर भेजने में मदद करेगी। NEGG को इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड (IGGL) ने विकसित किया है।
यह डेवलपमेंट डेरगांव-दीमापुर पाइपलाइन के चालू होने के बाद हुआ है, जिसने नागालैंड को नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड और नेशनल गैस ग्रिड से जोड़ दिया है। नई कनेक्टिविटी से ONGC के जोरहाट एसेट से हर दिन लगभग 1 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) गैस का इस्तेमाल आसान हो जाएगा।
ONGC अपने जोरहाट एसेट से अतिरिक्त प्रोडक्शन वाले फील्ड्स को नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड से जोड़ने के लिए जनतापाथर और कासोमारीगांव में हुक-अप सुविधाएं भी विकसित कर रहा है। इन प्रोजेक्ट्स से गैस की उपलब्धता बढ़ने, फ्लेयरिंग कम होने और इस क्षेत्र में गैस-आधारित इकॉनमी को मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
बेहतर कनेक्टिविटी से असम और पूरे नॉर्थ-ईस्ट में घरों, इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट और पावर सेक्टर में गैस की खपत को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ONGC को कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स में से 22 ने ‘Buy’ (खरीदने) की रेटिंग दी है, 5 ने ‘hold’ (बनाए रखने) की सलाह दी है और 4 ने ‘Sell’ (बेचने) की रेटिंग दी है।
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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Gold Silver Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में दबाव देखने को मिल रहा है। दरअसल, निवेशकों ने US ट्रेजरी यील्ड, तेल की कीमतों और ब्याज दरों के आउटलुक पर विचार किया, जिसके चलते सोने के मुकाबले चांदी में ज़्यादा गिरावट आई। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, COMEX सोना $4,406 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें 0.33% की गिरावट थी, जबकि COMEX चांदी $63.145 प्रति औंस पर थी, जिसमें 1.39% की गिरावट थी।
ये बदलाव पिछले सेशन में दोनों कीमती धातुओं में गिरावट के बाद आए हैं। मंगलवार (18 अगस्त) को सोने में लगभग 2% की गिरावट आई थी, जबकि चांदी में भी तेज़ गिरावट देखी गई थी।
सोना और चांदी क्यों गिर रहे हैं?
US ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव इसका मुख्य कारण है। ज़्यादा यील्ड आम तौर पर सोने पर दबाव डालती है क्योंकि इस धातु पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जिससे यील्ड देने वाली संपत्तियां ज़्यादा आकर्षक हो जाती हैं। US यील्ड अपने हालिया ऊंचे स्तरों से नीचे आई हैं, लेकिन ग्लोबल बॉन्ड बिकवाली के कारण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय के लिए उधार लेने की लागत कई सालों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने के बाद भी वे ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
बाजार US फेडरल रिज़र्व की जुलाई की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) का भी इंतज़ार कर रहा है। निवेशक सेंट्रल बैंक की ब्याज दर की दिशा के बारे में संकेत तलाशेंगे, खासकर इसलिए क्योंकि हालिया US डेटा में कमज़ोर रोज़गार और रिटेल खर्च के साथ-साथ कम महंगाई दर दिखाई दी है।
चांदी पर क्यों है ज़्यादा दबाव?
हालिया कारोबार में सोने के मुकाबले चांदी में ज़्यादा तेज़ गिरावट आई है। सोने के विपरीत, चांदी की औद्योगिक मांग का एक बड़ा हिस्सा होता है, जिसका मतलब है कि इसकी कीमतें ग्लोबल आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी उम्मीदों पर भी प्रतिक्रिया दे सकती हैं। यह हालिया कमज़ोरी कीमती धातुओं में व्यापक गिरावट के बाद आई है।
घरेलू बाज़ार में क्या हो रहा है?
ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, भारत में मंगलवार (18 अगस्त) को सोने की कीमतें ₹2,000 बढ़कर 99.9% शुद्धता वाले सोने के लिए ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम हो गईं। वहीं चांदी की कीमत भी ₹730 बढ़कर ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम हो गई। घरेलू कीमतें ग्लोबल स्पॉट कीमतों में गिरावट के अनुरूप थीं, साथ ही रुपया, आयात लागत और स्थानीय मांग ने भी भारतीय बुलियन दरों को प्रभावित किया।
क्रूड प्राइस बढ़ा रही अनिश्चितता
US-ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और सेंट्रल बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर स्थिति और मुश्किल हो सकती है। अगर निवेशकों को लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी, तो इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।
वहीं, जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) के तौर पर सोने की मांग बढ़ सकती है। इससे बुलियन मार्केट दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है — एक तरफ सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग और दूसरी तरफ ऊंची यील्ड/ब्याज दरों को लेकर चिंता।
अब निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव की तत्काल वजह US फेड की बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) हो सकते हैं। अगर इससे कोई संकेत मिलता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई को लेकर चिंतित हैं और ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में नहीं हैं, तो बुलियन पर दबाव बना रह सकता है।
दूसरी ओर, अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर रहते हैं या फेड की तरफ से ब्याज दरें कम रखने का संकेत (डोविश सिग्नल) मिलता है, तो ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कम होने से सोने और चांदी को सहारा मिल सकता है।
फिलहाल, US ट्रेजरी यील्ड, डॉलर, कच्चे तेल की कीमतें, जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और फेड के संकेत ही वे मुख्य कारक हैं जिन पर कीमती धातुओं की कीमतों में अगले बदलाव के लिए नज़र रखनी होगी।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Market news : खराब ग्लोबल संकतों से भारतीय बाजारों के सेंटिमेंट कमजोर हो सकते हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्का दबाव है। FIIs की कैश में खरीदारी देखने को मिली है। लेकिन वायदा में तगड़ी बिकवाली हुई है। FIIs के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी दो लाख के करीब पहुंच गए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
मार्केट ओवरव्यू
18 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए,निफ्टी 24,200 के निशान से नीचे फिसल गया और लगातार छठे सेशन में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। ईरान और US के बीच बढ़ते तनाव के बीच बड़े पैमाने पर बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की वजह से यह गिरावट आई। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 492.70 अंक या 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 पर और निफ्टी 132.75 अंक या 0.55 प्रतिशत गिरकर 24,154.90 पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत गिरा।
हॉर्मुज को लेकर टेंशन बढ़ी
हॉर्मुज को लेकर टेंशन बढ़ गई है। ट्रंप ने नक्शा जारी करके बताया है कि हॉर्मुज अमेरिका का हिस्सा है। इधर ईरान ने किसी भी बातचीत से इनकार किया है। विदेश मंत्री अराघची ने कहा है कि बातचीत हमारी शर्तों पर ही होगी। US- ईरान टेंशन से कच्चा तेल लगातार चौथे दिन चढ़ा है। इसके भाव 92 डॉलर के करीब पहुंच गए हैं।
अमेरिकी और एशियाई बाजार
अमेरिकी बाजार दूसरे दिन भी फिसले हैं। क्रूड के साथ बाजारों को US बॉन्ड यील्ड की भी टेंशन है। 30 साल की बॉन्ड यील्ड 19 साल की ऊंचाई पर आ गई है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.7% के ऊपर बरकरार है। इधर अमेरिकी बाजारों में दूसरे दिन भी दबाव रहा। चिप शेयरों में 9% तक की भारी बिकवाली से नैस्डैक 1.25 फीसदी से ज्यादा फिसला है। चिप शेयरों की पिटाई से कॉस्पी 4 फीसदी से ज्यादा नीचे आया है। निक्केई में भी 2.5 फीसदी की गिरावट है।
IT कंपनियों के लिए सेंटिमेंट पॉजिटिव, इंफोसिस का ADR करीब 2% चढ़ा
चिप शेयरों की बिकवाली से IT कंपनियों के सेंटिमेंट पॉजिटिव दिख रहे हैं। कल अमेरिका में एक्सेंचर,सेल्सफोर्स और एडोबी जैसी सॉफ्टवेयर कंपनियां दो से चार फीसदी उछलीं। इंफोसिस का ADR भी करीब 2% चढ़ा।
Aster DM में आज बड़ी ब्लॉक डील संभव
Aster DM में आज करीब 4,780 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। सेंटेला मॉरिशस होल्डिंग्स (Centella Mauritius Holdings) 7.2% हिस्सा बेच सकता है। इसके लिए 6.3% डिस्काउंट पर 766 रुपए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस तय की गई है।
घरेलू PNG कनेक्शन के लिए इन्सेंटिव स्कीम
घरेलू PNG कनेक्शन के लिए इन्सेंटिव स्कीम को सरकार ने मंजूरी दे दी है। PNG कनेक्शन के लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के प्रोत्साहन के लिए यह स्कीम 1 सितंबर से लागू होगी। इस खबर के चलते आज IGL, MGL और गुजरात एनर्जी के शेयरों में एक्शन आज बढ़ सकता है
एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो
18 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ₹1,651 करोड़ के शेयर खरीदे और वे नेट खरीदार बन गए। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार छठे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और भारतीय शेयरों में ₹2,579 करोड़ का निवेश किया।
Patanjali Foods: ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG सेक्टर की कंपनी Patanjali Foods (PFL) पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹560 का टारगेट प्राइस दिया है। यह ₹351 के मौजूदा स्तर से ₹560 करीब 60% तक की तेजी का संकेत है।
Patanjali Foods पर क्यों बुलिश है Jefferies?
Jefferies के मुताबिक, Patanjali Foods अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के मुकाबले करीब 23 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच कंपनी का PAT 23% CAGR से बढ़ सकता है। साथ ही ROCE में करीब 590 बेसिस पॉइंट का सुधार होकर यह 18% तक पहुंच सकता है।
इन्हीं अनुमानों के आधार पर Jefferies ने Sum-of-the-Parts (SOTP) वैल्यूएशन मॉडल से ₹560 का टारगेट तय किया है।
जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन
Patanjali Foods ने FY27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का रेवेन्यू 29% बढ़कर करीब ₹11,300 करोड़ पहुंच गया, जो Jefferies के अनुमान से करीब 20% ज्यादा रहा। वहीं EBITDA में 69% और PAT में 86% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एडिबल ऑयल बिजनेस बना सबसे बड़ा सहारा
एडिबल ऑयल सेगमेंट ने अब तक की सबसे मजबूत तिमाही दर्ज की। इस कारोबार का रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹8,500 करोड़ पहुंच गया। खासकर सरसों तेल की बिक्री बेहतर रही। पश्चिम एशिया में तनाव और कमोडिटी महंगाई के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जिसका फायदा कंपनी को मिला। इस सेगमेंट का EBIT सालाना आधार पर लगभग पांच गुना बढ़ गया।
कंपनी के प्लांटेशन बिजनेस में भी 25% की ग्रोथ रही। खेती वाला क्षेत्र बढ़कर 1.16 लाख हेक्टेयर हो गया है। मैनेजमेंट ने FY27 में एडिबल ऑयल बिजनेस में 3-5% वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा है।
Foods & FMCG बिजनेस में क्या रहा?
पतंजलि फूड्स के Foods & FMCG सेगमेंट का रेवेन्यू भी 28% बढ़ा। बिस्किट कारोबार ने सबसे मजबूत तिमाही दर्ज करते हुए ₹560 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया और इसका मार्जिन बढ़कर 15.4% पहुंच गया।
हालांकि इस सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बना रहा, क्योंकि कच्चे माल की लागत तेजी से बढ़ी और कंपनी पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचा सकी। Jefferies का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में लागत का दबाव कम होने पर इस सेगमेंट की मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।
‘निफ्टी के लिए 27000 टारगेट बरकरार’, JP Morgan को इन सेक्टरों में दिख रहा बड़ा मौका
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