Suzlon Energy Share Price: ये 6 बातें तय करेंगी शेयरों की चाल, समझ लें सुजलॉन में निवेश से पहले

Suzlon Energy Share Price: 8 अक्टूबर को एक साल के निचले स्तर पर आने के बाद से विंट टर्बाईन बनाने वाली सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने शानदार वापसी की है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के बुलिश रुझान से इसे और सपोर्ट मिला और यह 3% से अधिक उछल पड़ा। मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। ओवरऑल इसे कवर करने वाले 12 एनालिस्ट्स में से 10 ने इसे खरीदारी और 2 ने होल्ड रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने इसे बेचने की सलाह नहीं दी है। अब शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.84% की बढ़त के साथ ₹38.27 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.14% उछलकर ₹38.76 तक पहुंच गया था।

Suzlon पर Motilal Oswal को भरोसा क्यों कायम?

तीन महीने में सुजलॉन एनर्जी के शेयर 31% नीचे आए। इस गिरावट के साथ अब यह वित्त वर्ष 2028 की प्रति शेयर कमाई (EPS) के मुकाबले 17.5 गुना पर है जोकि इसके एक साल के औसत फारवर्ड P/E से करीब 20% डिस्काउंट पर है। ऐसे में सुजलॉन का शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक सुजलॉन की कमाई वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक होती रही है और कंपनी के सालाना EBITDA में इसकी 60-65% हिस्सेदारी रहती है। ऐसे में इस बार भी वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में ऐसी ही मजबूती के आसार हैं क्योंकि डिलीवरी पहली छमाही में 1.2 गीगावाट से बढ़कर दूसरी छमाही में 2.1 गीगावाट पहुंच सकती है।

जून तिमाही के आखिरी में सुजलॉन एनर्जी की ऑर्डर बुक 5.9 GW थी, जिससे वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक डिलीवरी की तस्वीर साफ दिख रही है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-2028 के दौरान सुजलॉन एनर्जी का EBITDA सालाना 22% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़ेगा।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में देश की विंड कैपेसिटी 3 गीगावाट बढ़ी और ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक अब तक दूसरी छमाही में पहली की तुलना में डेढ़ गुना इंस्टॉलेशन होता रहा है तो इस बार दूसरी छमाही में करीब 4.5 गीगावाट के इंस्टॉलेशन की उम्मीद है जोकि सुजलॉन जैसी विंड टर्बाईन बनाने वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। सरकार ने इस वित्त वर्ष 2027 में 7.5–8 GW नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया हुआ है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग से विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE (फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी) प्रोजेक्ट्स के जरिए विंड कैपेसिटी बढ़ोतरी को सपोर्ट मिल सकता है और यह सुजलॉन एनर्जी के लिए पॉजिटिव है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन एनर्जी को तीन वजहों- DevCo को अच्छे रिस्पांस, निर्यात और पुराने टर्बाईनों को बदलने के मौके से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। डेवको मॉडल की बात करें तो इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही 600 MW से अधिक के ऑर्डर मिले, जो कुल ऑर्डर का 60% हिस्सा हैं।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन को सरकार के स्थानीय प्रोत्साहन से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 6 नवंबर, 2025 को बीएसई पर यह ₹61.45 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 11 महीने में यह 40.93% टूटकर 8 अक्टूबर 2026 को यह एक साल के निचले स्तर ₹36.30 पर आ गया।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:   भारतीय शेयर बाज़ार के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है, क्योंकि GIFT Nifty ने 12 अक्टूबर 2026 को ऊंचे स्तर पर खुलने का संकेत दिया है। वहीं, सोमवार को एशियाई बाज़ार मिले-जुले रुख के साथ खुले, जबकि US स्टॉक फ्यूचर्स में कमाई और महंगाई के आंकड़ों से पहले बढ़त देखी गई। Gift Nifty लगभग 22,649 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो Nifty फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 47 अंक ऊपर है, जिससे भारतीय शेयर बाज़ार इंडेक्स के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत मिलता है।

Stock in Focus: सोलर कंपनी को ₹4001 करोड़ के नए ऑर्डर मिले, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सोलर सेल और मॉड्यूल बनाने वाली कंपनी Premier Energies को 4,001 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर वित्त वर्ष 2026-27 की जुलाई-सितंबर तिमाही में मिले।

इन ऑर्डर के तहत कंपनी 2,308 मेगावाट (MW) के सोलर सेल और मॉड्यूल की सप्लाई करेगी। इसके अलावा, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेगी। ये ऑर्डर बिजली, मॉड्यूल और EPC कंपनियों से मिले हैं। इसमें रिटेल मार्केट से मिले ऑर्डर शामिल नहीं हैं।

सोलर सेल और मॉड्यूल बनाने की क्षमता बढ़ी

Premier Energies ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाई है। कंपनी की सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता लगभग दोगुनी होकर 11.1 गीगावाट (GW) हो गई है। वहीं, सोलर सेल की क्षमता 3.6 GW से बढ़कर 10.6 GW हो गई है।

यह बढ़ोतरी आंध्र प्रदेश के नायडुपेटा में नया प्लांट शुरू होने के बाद हुई है। कंपनी ने पिछले महीने यहां 7 GW की TOPCon सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चालू की थी।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर चिरंजीव सलूजा ने कहा कि बढ़ता ऑर्डर बुक कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को दिखाता है। उनके मुताबिक, भारतीय सोलर बाजार में ग्राहक बड़े पैमाने पर सप्लाई, भरोसेमंद कंपनियों और नई तकनीक चाहते हैं। कंपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।

FY28 तक रेवेन्यू और मार्जिन का अनुमान

अगस्त में कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विनय रुस्तगी ने कहा था कि 15,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक से कंपनी को वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) तक रेवेन्यू और मार्जिन का अनुमान लगाने में मदद मिल रही है।

कंपनी का ऑर्डर बुक वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के रेवेन्यू का करीब दोगुना है। इससे कंपनी को FY27 और FY28 तक कारोबार की स्थिति का अंदाजा मिल रहा है। रुस्तगी ने यूरोप में एक्सपोर्ट और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को कंपनी के लिए ग्रोथ के दो नए मौके बताया।

Premier Energies का शेयर शुक्रवार को BSE पर 895 रुपये पर बंद हुआ। इसमें पिछले बंद भाव के मुकाबले 9 रुपये यानी 1.02% की बढ़त दर्ज की गई।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: कम हो रहा कर्ज का बोझ, आईपीओ से पहले तेजी से हो रहा कैश जेनेरेट

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटी है। उससे पहले कंपनी की सेहत काफी मजबूत हुई है और यह अधिक नगदी जेनेरेट कर रही है तो कर्ज पर इसकी अपनी निर्भरता भी कम हो रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट लेवरेज रेश्यो वित्त वर्ष 2024 में 0.88 गुना से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 0.36 गुना रह गया। इससे कंपनी को वित्तीय फैसले लेने में अधिक सहूलियत मिली है। जियो का लक्ष्य अपनी मुनाफे वाली ग्रोथ को आगे बढ़ाने का है। आईपीओ के तहत नए शेयर जारी करके जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है, जब इसका फोकस नेटवर्क का विस्तार करने और नए ग्राहक जोड़ने से हटकर पिछले एक दशक में बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से अधिक कमाई करने पर है। इसका मतलब हुआ कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से कमाई बढ़ाने के साथ-साथ मोबाइल कनेक्टिविटी के अलावा दूसरे कारोबारों को भी डेवलप करने पर फोकस कर रही है।

एंबिट कैपिटल रिसर्च के एनालिस्ट विवेकानंद एस का कहना है कि आईपीओ से जियो की वित्तीय सेहत मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि इसके कैपिटल स्ट्रक्चर अधिक कंजर्वेटिव हो जाएगा। उनका कहना है कि अब अगले चरण की ग्रोथ में कंपनी का फोकस कमाई बढ़ाने पर होगा तो कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अधिक कंट्रोल दिख सकता है।

कैसी है Jio Platforms की सेहत

जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबारी सेहत की बात करें तो ऑपरेशंस से इसका रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में ₹1.10 लाख करोड़ से वित्त वर्ष 2026 में ₹1.47 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी ₹21,423 करोड़ से बढ़कर ₹30,049 करोड़ हो गया। साथ ही अहम बात ये है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के बाद कंपनी की नगदी वित्त वर्ष 2024 में ₹1,449 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹42,071 करोड़ हो गई, जिससे इसके सामने भविष्य में निवेश करने और कर्ज हल्का करने की गुंजाइश बढ़ी है।

इस दौरान कंपनी का ARPU यानी प्रति यूजर औसतन मंथली रेवेन्यू ₹181.7 से ₹214 पर पहुंच गया तो प्रति यूजर मासिक डेटा खपत 28.7 GB से बढ़कर 42.3 GB हो गई। विवेकानंद का कहना है कि ग्राहक अनलिमिटेड डेटा और सस्ती सेवाओं का भरपूर फायदा उठा रहे हैं, जिससे कंपनी को कस्टमर सरप्लस के रूप में काफी फायदा मिल रहा है।

जियो ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश और आक्रामक प्राइसिंग के जरिए देश के मोबाइल मार्केट को बदल दिया, जिससे कॉम्पिटिटर्स को भी ऐसा ही करना पड़ा। हालांकि अब टेलीकॉम इंडस्ट्री को अपनी सर्विस से ज्यादा रेवेन्यू कमाने की जरूरत है। कंपनी ने मोबाइल सर्विस के अलावा एक एंड-टू-एंड 5जी स्टैक डेवलप किया है जिसमें कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजी, रेडियो इक्विपमेंट और नेटवर्क सॉफ्टवेयर शामिल हैं। मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी यूनिट्स ने 6,817 पेटेंट एप्लीकेशन फाइल किए थे, जिनमें से 1,009 को वैश्विक मंजूरी मिल चुकी थी। जियो ने अपना प्री-6G स्टैक और Giga MIMO रेडियो भी डेवलप किया है, जिसे कंपनी ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखाया था।

जियो अपने होम ब्रॉडबैंड बिजनेस का भी विस्तार कर रही है। आईपीओ के ड्राफ्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के आखिरी तक उसके पास 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कस्टमर थे, जिससे उसका मार्केट शेयर 42.6% हो गया।

कंपनी की योजना पार्टनरशिप और मैनेज्ड-सर्विस अरेंजमेंट के जरिए अपनी खास नेटवर्क टेक्नोलॉजी को विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर्स तक पहुंचाने की भी है। इसके सफल होने पर भारतीय ऑपरेशन्स के अलावा कंपनी के लिए रेवेन्यू का एक और जरिया बन सकता है।

How to read stock chart: चार्ट पढ़ने का सही तरीका, धड़ाधड़ बनेगा शेयर मार्केट से पैसा

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

How to read stock chart: चार्ट पढ़ने का सही तरीका, धड़ाधड़ बनेगा शेयर मार्केट से पैसा

How to read stock chart: अगर आप स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो प्राइस चार्ट में एक चीज जरूर नोटिस की होगी कि भाव एक सीधी रेखा में नहीं चलते हैं। वे अक्सर कुछ खास प्राइस लेवल पर रुकती हैं, उछाल लेती हैं या अपनी दिशा बदल देती हैं। ऐसा बार-बार होता है, जैसे कि कोई फर्श (Floor) या छत (Ceiling) मौजूद हो। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि टेक्निकल एनालिसिस की सबसे पुरानी और अहम अवधारधाओं में से एक है। ऐसे में ट्रेडिंग के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यह सिर्फ चार्ट देखने वाले शख्स और इसे वास्तव में समझने वाले के बीच बड़ा फर्क पैदा करता है।

क्या है Support और Resistance

सपोर्ट वह प्राइस लेवल होता है, जहां किसी गिरावट के दौरान भाव का नीचे जाना रुक सकता है या यह ऊपर की तरफ मुड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस लेवल पर खरीदारी करने वालों की दिलचस्पी इतनी बढ़ जाती है कि वे बिकवाली के दबाव को कम कर देते हैं। यह एक तरह से फर्श की तरह काम करता है, जहां से नीचे जाने में शेयर को कठिनाई हो सकती है।

रेजिस्टेंस इसके बिल्कुल विपरीत होता है। यह वह प्राइस लेवल है, जहां तेजी के दौरान शेयरों के भाव का ऊपर जाना रुक सकता है या कीमत वापस नीचे की तरफ मुड़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस स्तर पर बिकवाली का दबाव खरीदारी के दबाव से अधिक हो जाता है। यह एक छत (Ceiling) की तरह होता है, जिसे ऊपर की तरफ तोड़ना मुश्किल होता है।

एक उदाहरण से समझें। नीचे चार्ट में Siemens के शेयरों की छह महीने में ₹3300 और ₹4200 के बीच की उठा-पटक का चार्ट है। इसमें देख सकते हैं कि जब भी शेयर की कीमत ₹3,300 के करीब गिरती है, तो खरीदार एक्टिव हो जाते हैं और भाव चढ़ने लगते हैं तो दूसरी तरफ जब भी शेयर की कीमत ₹4,150–₹4,200 के करीब पहुंचती है, तो सेलर्स एक्टिव हो जाते हैं और भाव फिसलने लगते हैं। इस स्थिति में ₹3300 सपोर्ट और ₹4150-₹4200 रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहा है।

support

क्यों होते हैं ये लेवल्स

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल कोई मैजिक लाइन नहीं हैं, जो किस्मत से नहीं बनती हैं बल्कि ये ट्रेडर्स के खरीदारी-बिक्री के पैटर्न को दिखाते हैं। इनके बनने की कुछ वजह हैं-

मार्केट साइकोलॉजी: ट्रेडर्स को पुराने अहम प्राइस लेवल याद रहते हैं। जब शेयरों की कीमत दोबारा उन लेवल पर पहुंचती है, तो वे फिर से खरीदने या बेचने का फैसला ले सकते हैं। इससे ये लेवल मजबूत हो सकते हैं।

सप्लाई और डिमांड: सपोर्ट के पास खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि रेजिस्टेंस के पास बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

मनोवैज्ञानिक स्तर: ₹1,000, ₹2,000 या ₹5,000 जैसे राउंड नंबर्स अक्सर अहम प्राइस लेवल के तौर पर काम करती हैं।

संस्थागत ट्रेडिंग: बड़े संस्थागत निवेशक और ट्रेडर्स कई बार अहम प्राइस लेवल के आसपास बड़े ऑर्डर लगाते हैं।

ऑर्डर क्लस्टरिंग: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के आस-पास स्टॉप लॉस ऑर्डर और प्रॉफिट टारगेट हो सकते हैं। जब शेयर ये लेवल तोड़ती हैं, तो कई ऑर्डर एक साथ एक्टिव हो सकते हैं, जिससे तेज ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन देखने को मिल सकता है।

Role Reversal: सपोर्ट बन सकता है रेजिस्टेंस तो रेजिस्टेंस नया सपोर्ट

सपोर्ट और रेजिस्टेंस फिक्स्ड नहीं होते हैं बल्कि ऐसा भी हो सकता है कि सपोर्ट अगला रेजिस्टेंस बन जाए या रेजिस्टेंस नया सपोर्ट बन जाए। इस रोल रिवर्सल को पोलरिटी फ्लिपिंग कहते हैं।

अगर कोई प्राइस लेवल काफी समय से सपोर्ट का काम कर रहा था, लेकिन भाव उससे भी नीचे आ गए। ऐसे में जिन ट्रेडर्स ने उस स्तर पर शेयर खरीदे थे, वे घाटे में आ गए तो शेयर जब दोबारा पुराने सपोर्ट लेवल तक पहुंचती है, तो उनमें से कुछ ट्रेडर्स अपने नुकसान से बाहर निकलने या ब्रेक-ईवन पर बेचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे उस लेवल पर बिकवाली बढ़ सकती है और जो स्तर पहले सपोर्ट था, वह अब रेजिस्टेंस बन सकता है।

वहीं दूसरी तरफ जब शेयर किसी रेजिस्टेंस को तोड़कर ऊपर निकलते हैं, तो बाद में उसी लेवल पर वापस आने पर वहां खरीदारी बढ़ सकती है। इस तरह पुराना रेजिस्टेंस नया सपोर्ट बन सकता है।

उदाहरण के लिए, पेटीएम का शेयर ₹1,250–₹1,270 के लेवल के ऊपर टिक नहीं पा रहा था और यह लेवल रेजिस्टेंस का काम कर रहा था। हालांकि जब शेयर इस रेजिस्टेंस को तोड़कर ऊपर निकल गया और ₹1,400 तक पहुंच गया और इसके बाद शेयर वापस गिरकर ₹1,290 तक आए और फिर वहां से उछलकर ऊपर जाने लगे। इस स्थिति में ₹1,250–₹1,270 का पुराना रेजिस्टेंस अब नए सपोर्ट के रूप में काम करने लगा।

resistance

Amitabh Bachchan Portfolio: 84 साल के शहंशाह, स्टॉक मार्केट में भी तगड़ा निवेश, यह शेयर पोर्टफोलियो में

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

न सेटअप बिगड़ा, न मार्केट चकमा दिया… फिर भी एक ही दिन में गंवा दिए ₹61 लाख! गलती ऐसी की हैरान रह जाएंगे आप

Stock Market Viral Story: शेयर बाजार के F&O सेगमेंट से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक ट्रेडर को न तो खराब टेक्निकल चार्ट्स की वजह से नुकसान हुआ और न ही बाजार की चाल ने उसे चकमा दिया, बल्कि एक छोटी सी चूक की वजह से उसके ₹61 लाख साफ हो गए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मयंक राज नाम के इस ट्रेडर ने अपनी आपबीती साझा करते हुए लिखा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि देर तक सो जाना मुझे इतना महंगा पड़ जाएगा।’ दरअसल, 9 अक्टूबर को समय पर नींद न खुलने की वजह से वे अपना स्टॉप-लॉस नहीं लगा सके और एक झटके में उनका लाखों की पोजीशन लाल निशान में चला गया।

मयंक ने अपनी पोस्ट में बताया कि, ‘कल मैंने कॉल ऑप्शंस शॉर्ट किए थे, लेकिन आज सुबह मैं समय पर नहीं उठ सका। जब मैं आखिरकार उठा और अपनी ओपन पोजीशन चेक की, तो मुझे बहुत बड़ा नुकसान हो चुका था। यह नुकसान मेरे ट्रेड सेटअप की गलती से ज्यादा अनुशासन की कमी के कारण हुआ। अगर मैं समय पर उठ जाता, तो अपने तय स्टॉप-लॉस के अनुसार ₹15-20 लाख के आसपास नुकसान सीमित करके बाहर निकल जाता।’

कैसे हुआ नुकसान और कैसे रिकवर हुए 10 लाख?

ट्रेडर ने अपने X अकाउंट पर अपने ट्रेडिंग डैशबोर्ड का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसमें 13 अक्टूबर की एक्सपायरी वाले Nifty 22,000 Call को शॉर्ट करने पर ₹71 लाख का घाटा दिखाई दे रहा था। वैसे उसने उसी एक्सपायरी के Nifty 22,500 Call को खरीदकर ₹10 लाख का मुनाफा कमाया, जिससे उसका कुल शुद्ध नुकसान घटकर ₹61 लाख रह गया।

मयंक ने आगे लिखा, ‘लेकिन कोई बात नहीं। मैंने पिछले हफ्ते कुछ अच्छा मुनाफा कमाया था, हालांकि इस नुकसान ने अब मेरे अक्टूबर महीने के कुल P&L को लाल निशान में धकेल दिया है। देखते हैं बाकी महीना कैसा रहता है। अब मेरा ध्यान धीरे-धीरे रिकवरी करने, अनुशासित रहने और अक्टूबर को हरे निशान में बंद करने पर होगा। मैं अपनी यह यात्रा आपके साथ साझा करता रहूंगा।’

सोशल मीडिया पर नेटीजंस ने दी ये सलाह

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स और अनुभवी ट्रेडर्स ने मयंक को भविष्य में BTST ट्रेड्स से बचने की सलाह दी। यूजर्स ने कहा कि ओवरनाइट पोजीशन ले जाते समय सिस्टम में पहले से स्टॉप लॉस सेट कर देना चाहिए, ताकि खुद मौजूद न रहने पर भी भारी नुकसान से बचा जा सके। एक X यूजर ने लिखा कि 8 अक्टूबर को जब निफ्टी 1.5% गिरा था, तब इतने निचले स्तर पर मार्केट को शॉर्ट करना ही एक बड़ी गलती थी।

9 अक्टूबर को कैसी रही बाजार की चाल

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 9 अक्टूबर को बढ़त के साथ बंद हुए और पिछले 25 वर्षों में अपनी सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला को तोड़ दिया। Nifty 50 1.3% की बढ़त के साथ 22,520.45 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Sensex 1.23% उछलकर 72,472.33 के स्तर पर पहुंचा।

बाजार में इस रिकवरी की मुख्य वजह आईटी (IT) शेयर रहे। दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मजबूत तिमाही नतीजों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कमाई में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में मजबूत वृद्धि ने शेयर बाजार की बढ़त की कमान संभाली।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Rally: फैब फ्राइडे, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा; निफ्टी 22500 के पार, निवेशकों की दौलत ₹3 लाख करोड़ बढ़ी

2 दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजारों में शानदार तेजी लौटी। सेंसेक्स 879.09 अंकों या 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। निफ्टी 288.65 अंकों या 1.3 प्रतिशत के उछाल के साथ 22,520.45 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 1,075.96 अंक तक चढ़कर 72,669.20 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 348.95 अंक तक चढ़कर 22,580.75 के हाई तक गया।

गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 462.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने के बाद यह 465.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यानि कि 3 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। IT स्टॉक्स में तेजी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, रुपये में बढ़त जैसे फैक्टर्स के चलते बाजार में तेजी आई।

निफ्टी पर ऑयल एंड गैस को छोड़कर दूसरे सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा 3 प्रतिशत की तेजी IT इंडेक्स में दिखी। निफ्टी पर अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, ITC, आयशर मोटर्स, TCS और HCL टेक्नोलॉजीस टॉप गेनर रहे। वहीं BSE, रिलायंस इंडस्ट्रीज, JSW स्टील और सिप्ला टॉप लूजर रहे।

एक दिन पहले क्या रहा था हाल

गुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी रही। यह अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 16 पैसे चढ़कर 96.72 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।

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शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।

अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Acme India Industries Listing: SME कंपनी की शानदार शुरुआत, 13% बढ़त में लिस्ट; शेयर में तुरंत लगा अपर सर्किट

SME सेक्टर में एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज की 9 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लिस्टिंग शानदार रही। BSE SME पर शेयर लगभग 13 प्रतिशत बढ़त के साथ 221 रुपये पर लिस्ट हुआ। कुछ ही देर में शेयर लिस्टिंग प्राइस से 5 प्रतिशत उछला और 232.05 रुपये पर अपर सर्किट लगा। IPO प्राइस ₹196 प्रति शेयर था। कंपनी का ₹121.69 करोड़ का IPO 124.23 गुना भरकर बंद हुआ था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 137.93 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 196.27 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 85.50 गुना सब्सक्राइब हुआ।

क्या करती है Acme India Industries

एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारतीय रेलवे रोलिंग स्टॉक सेक्टर में काम करती है। इसका फोकस रेलवे कोच के इंटीरियर और पुर्जों की डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन और वॉरंटी मेंटेनेंस पर है। कंपनी नए रेलवे कोच के लिए टर्नकी फर्निशिंग सॉल्यूशन; पुराने कोच के रिफर्बिशमेंट, अपग्रेडेशन, कन्वर्जन; और टॉयलेट सुविधाओं के आधुनिकीकरण का काम करती है।

यह कई तरह के प्रोडक्ट बनाती और सप्लाई करती है, जैसे ब्रेल साइनेज, FRP प्रोडक्ट, सैनिटरी वेयर, एपॉक्सी फ्लोरिंग, डेकोरेटिव ग्लास FRP, टॉयलेट और कंपार्टमेंट के दरवाजे, सीटें और बर्थ, फायर बैरियर कोटिंग, हाइजीन से जुड़े प्रोडक्ट आदि। एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज 16 रेलवे जोन में ऑपरेशनल है। कंपनी मुख्य रूप से टेंडर-बेस्ड बिजनेस मॉडल के जरिए काम करती है।

IPO में ₹105.98 करोड़ के 54.07 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹15.71 करोड़ के 8.02 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहा। कंपनी ने इश्यू की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹34.61 करोड़ जुटाए।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, कर्ज चुकाने के​ लिए, अतिरिक्त प्लांट और मशीनरी की खरीद के लिए, और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

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