कैसा होगा मुंबई की धारावी का नया अवतार? 22500 वर्ग फुट के एक्सपीरियंस सेंटर में दिखा भविष्य के घरों का 3D मॉडल

मुंबई की धारावी की तस्वीर बदलने वाली है। अब लोगों के लिए धारावी के रीडेवलपमेंट की योजना को समझना पहले से ज्यादा आसान होगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को 22,500 वर्ग फुट में बने ‘धारावी एक्सपीरियंस सेंटर’ का उद्घाटन किया। इस सेंटर में प्रस्तावित नए घरों के मॉडल, कामकाज के लिए जगह, सड़कें, परिवहन व्यवस्था, स्कूल, अस्पताल, पार्क और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी दी गई है। इससे लोग रीडेवलपमेंट की योजना को आसानी से समझ सकते हैं।

सीएम ने जारी किया एंथम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धारावी से जुड़ी एक खास एंथम भी जारी की और एक कॉफी-टेबल बुक भी जारी किया। इस किताब में धारावी के पुराने इतिहास, संस्कृति और लोगों की खास पहचान को हाईलाइट किया गया है। धारावी मुंबई का एक महत्वपूर्ण इलाका है और एशिया की सबसे बड़ी इनफॉर्मल बस्तियों में से एक है। गांधी जयंती पर शुरू किए गए इस एक्सपीरियंस सेंटर में धारावी में बनने वाले नए घरों के मॉडल दिखाए गए हैं।इस सेंटर में रीडेवलपमेंट के बाद पूरी धारावी कैसी दिखेगी इसे 3डी मॉडल के जरिए दिखाया जाएगा। यहां 350 और 500 वर्ग फुट के नए घरों के मॉडल दिखाए गए हैं, ताकि लोग उनकी जगह और बनावट समझ सकें। धारावी में दस लाख से ज्यादा लोग रहते हैं।

क्या है पूरी योजना

अडानी ग्रुप की धारावी रीडेवलपमेंट योजना में करीब 600 एकड़ के इलाके को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें नए घर, बेहतर दुकानें और कारोबार की जगह, स्कूल, अस्पताल, बेहतर परिवहन, पार्क और खुले स्थान शामिल हैं। साथ ही मीठी नदी को साफ करने और करीब 3.3 किलोमीटर लंबे रिवरफ्रंट को विकसित करने की भी योजना है। वहीं एक्सपीरियंस सेंटर में लोगों को धारावी के प्रस्तावित नए स्वरूप की जानकारी आसान और रोचक तरीके से दी जा रही है।

धारावी के पुराने इतिहास, यहां चलने वाले कारोबार और छोटे उद्योगों को भी खास जगह दी गई है। धारावी के इतिहास और कारोबार को ध्यान में रखते हुए योजना में मौजूदा रोजगार को बनाए रखने, करीब 40 हजार पेड़ लगाने और नए पार्क व सार्वजनिक जगहें बनाने का प्रस्ताव है।

देख सकेंगे घर की बनावट

डिजिटल स्क्रीन और इंटरैक्टिव मॉडल के जरिए आने वाले समय में इलाके में किस तरह की सुविधाएं विकसित की जाएंगी ये दिखाया जाएगा। इसमें नए आवासीय भवनों के साथ सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र, धार्मिक स्थल और लोगों के लिए सामुदायिक स्थान शामिल हैं। एक्सपीरियंस सेंटर में आने वाले लोग प्रस्तावित घरों के सजे हुए और खाली दोनों तरह के मॉडल देख सकते हैं, जिससे उन्हें घर की बनावट और जगह के इस्तेमाल का बेहतर अंदाजा मिल सके। सेंटर में स्थानीय निवासियों को सर्वे, पात्रता, जरूरी कागजात और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी।

LPG Cylinder Price: 3 अक्टूबर को LPG के नए रेट जारी, जानें आपके शहर में 14.2 किलो और 19 किलो सिलेंडर कितने का मिल रहा है

LPG Price 03 October 2026: अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया गया है। तेल कंपनियों की ओर से जारी नए रेट में 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ाई गई है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में घरेलू बजट पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है, लेकिन होटल और रेस्तरां जैसे कारोबारों की लागत बढ़ गई है।

कमर्शियल LPG सिलेंडर पर बढ़ा बोझ

अक्टूबर की शुरुआत में सबसे बड़ा बदलाव कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में देखने को मिला। दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब ₹2,810 में मिलेगा। सितंबर में इसकी कीमत ₹2,747.50 थी।इस तरह दिल्ली में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹62.50 महंगा हो गया है। कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, रेस्तरां, ढाबों और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसलिए कीमत बढ़ने से इन कारोबारों के गैस खर्च में इजाफा हो सकता है।

घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अक्टूबर की शुरुआत में कीमतें स्थिर रखी गई हैं। 14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की दिल्ली में कीमत ₹942 पर बनी हुई है। अन्य बड़े शहरों में भी घरेलू सिलेंडर के रेट में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। मुंबई में यह ₹941.50, कोलकाता में ₹968 और चेन्नई में ₹957.50 का है।

इन शहरों में कमर्शियल सिलेंडर के नए रेट

कमर्शियल LPG की कीमत अलग-अलग शहरों में अलग है। अक्टूबर में मुंबई में 19 किलो का सिलेंडर ₹2,763.50, जबकि कोलकाता में ₹2,946.50 का हो गया है। चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,978.50 है। वहीं बेंगलुरु में ₹2,893.50, हैदराबाद में ₹3,058.50 और रांची में ₹2,988 का रेट है।

घरेलू गैस के लिए कहां ज्यादा कीमत चुकानी होगी?

शहरवार आंकड़ों के मुताबिक रांची में 14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹1,010.50 है, जो इस सूची में सबसे अधिक है। हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर ₹994 और कोलकाता में ₹968 का है।मुंबई में घरेलू LPG सिलेंडर ₹941.50 का है, जबकि दिल्ली में इसकी कीमत ₹942 है।

03 अक्टूबर के LPG रेट: एक नजर में

शहरघरेलू LPG सिलेंडरकमर्शियल LPG सिलेंडर
दिल्ली₹942₹2,810
मुंबई₹941.50₹2,763.50
कोलकाता₹968₹2,946.50
बेंगलुरु₹944.50₹2,893.50
हैदराबाद₹994₹3,058.50
चेन्नई₹957.50₹2,978.50
कटक₹968₹2,947.50
कोयंबटूर₹959₹3,002.50
रांची₹1,010.50₹2,988

हर महीने की शुरुआत में क्यों बदलते हैं LPG के रेट?

तेल कंपनियां आमतौर पर हर महीने की शुरुआत में LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी समीक्षा के बाद घरेलू और कमर्शियल गैस के नए रेट जारी किए जाते हैं। अक्टूबर में जहां कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, वहीं घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम को स्थिर रखा गया है। इसलिए इसका असर मुख्य रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जबकि घरेलू ग्राहकों के लिए मौजूदा रेट बरकरार हैं।

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मुंबई में जंतर मंतर जैसा प्रदर्शन

मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क को जंतर मंतर में बदल दिया। शुक्रवार, दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग लेकर मुंबई के लोग सड़कों पर उतरे। बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क में इकट्ठा हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके साथ राजनीति और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियां भी शामिल हुईं। देर शाम तक प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क में जमा रहे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी आंदोलन में शामिल हुए। फिल्मी हस्तियों की बात करें तो नसीरूद्दीन शाह से लेकर शबाना आजमी और विशाल ददलानी से लेकर विशाल भारद्वाज तक अनके अभिनेता, गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्माता और निर्देशक शिवाजी पार्क पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए। इससे पहले सीजेपी ने ऐलान किया था कि अगर प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी तो जेल भरो अभियान चलेगा। हालांकि उसकी नौबत नहीं आई।

सीजेपी के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। वे सोशल मीडिया में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे मीम्स के पोस्टर बना कर पहुंचे थे। सब एक सुर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान मंच पर मौजूद सभी लोगों ने महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनी थी। गौरतलब है कि इससे पहल सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ था।

बहरहाल, शुक्रवार के प्रदर्शन में अभिजीत दीपके ने कहा, ‘जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका जाते हैं, तब भी वहां कहा जाता है कि ये गांधी के देश से आए हैं। गांधी देश की आत्मा हैं, आंबेडकर रीढ़ की हड्डी और नेहरू दिमाग हैं’। दीपके ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा ‘एक देश, एक पार्टी’ चाहती है। प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी तीन मांगें रखीं, जिसमें पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की है। इसके बाद जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की गई।

सीजेपी के प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा, ‘हमारा वोट हमारा अधिकार है, हमारी आवाज है। जब मतदाता सूची से हमारे नाम हटा दिए जाएं, तो हम क्या करेंगे’? गायक संगीतकार विशाल ददलानी ने प्रदर्शन के दौरान गाना गाया। मशहूर फिल्मकार विशाल भारद्वाज अपनी पत्नी रेखा भारद्वाज के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे। उन्होंने इस दौरान कहा, ‘मैं यहां केवल अपना समर्थन देने आया हूं’। मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का जिक्र किया और कहा, ‘दिल्ली पुलिस ने फिर से बर्बरता की है, सुधर जाओ वरना हम तुम्हें सुधार देंगे’।

Gold Price Today: सोने में तेजी बरकरार; दिल्ली, लखनऊ, जयपुर में ₹150460 हुआ 24 कैरेट का भाव

देश में सोने की कीमत में तेजी का दौर जारी है। 3 अक्टूबर की सुबह 24 और 22 कैरेट गोल्ड दोनों के भाव में उछाल है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड 150460 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। दूसरे शहरों में भी कीमत चढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,140.06 डॉलर प्रति औंस पर है। इस सप्ताह अब तक इसकी वैश्विक कीमत लगभग 3.4 प्रतिशत नीचे आई है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 150460 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137910 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 137760 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 150290 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 150290 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 150290 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 137760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली137910150460
मुंबई137760150290
अहमदाबाद137810150360
चेन्नई137760150290
कोलकाता137760150290
हैदराबाद137760150290
जयपुर137910150460
भोपाल137810150360
लखनऊ137910150460
चंडीगढ़137910150460

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रॉयटर्स के मुताबिक, HSBC ने 2026 और 2027 के लिए सोने की औसत कीमत का अनुमान घटाकर क्रमशः 4,490 डॉलर प्रति औंस और 4,825 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। बैंक का कहना है कि सोने की कीमत पर निकट भविष्य में और दबाव पड़ सकता है। HSBC को उम्मीद है कि कीमतें गिरने पर, खासकर 4,000 डॉलर के आसपास या उससे नीचे जाने पर, केंद्रीय बैंक फिर से सोना खरीदना शुरू कर देंगे।

चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में गिरावट है। 3 अक्टूबर की सुबह चांदी देश में 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 60.36 डॉलर प्रति औंस है। इस साल जनवरी में देश के अंदर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी।

नाथवानी की झारखंड वापसी का मतलब

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट परिमल नाथवानी के बेटे धनराज परिमल नाथवानी को जब अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी का राज्यसभा उम्मीदवार बनाया तब नए सिरे से परिमल नाथवानी के नाम की भी चर्चा शुरू हुई। पिछले छह साल तक वे आंध्र प्रदेश से जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस समर्थित राज्यसभा सांसद थे। इसलिए दिल्ली या उत्तर भारत में उनकी चर्चा थोड़ी कम थी। परिमल नाथवानी छह साल के बाद अब फिर से वापस लौटे हैं। पहले वे खुद झारखंड से राज्यसभा सांसद बने और उसके बाद बेटे को उत्तर प्रदेश से उच्च सदन में भेजने का इंतजाम किया है।

दोनों के उच्च सदन जाने का जो रास्ता चुना गया उसमें दिन रात का फर्क है। परिमल नाथवानी खुद निर्दलीय सांसद हैं।

तकनीकी रूप से उनको भारतीय जनता पार्टी समर्थित कहा जाता है लेकिन असल में वे भाजपा के ही सांसद हैं। झारखंड से भाजपा समर्थित सांसद होने का मतलब होता कि उनके पास चुनाव जीतने के लिए आवश्यक 28 मतों में से 20 या उससे ज्यादा मत थे और भाजपा ने बाहर से उनको समर्थन देकर चुनाव जिताया। लेकिन ऐसा नहीं है। उनके पास अपने इंतजाम से सिर्फ पांच विधायक थे, जिनके दम पर वे नामांकन भी नहीं कर सकते थे। भाजपा उनकी प्रस्तावक बनी और भाजपा ने अपने 21 व एनडीए के तीन सहयोगी विधायकों के वोट दिला करके उनको उच्च सदन में पहुंचाया। इसलिए वे भाजपा के सांसद ही कहे जाएंगे, तकनीकी स्थिति चाहे जो हो, जबकि वे अपने बेटे को भाजपा की धुर विरोधी और उत्तर प्रदेश में भाजपा से सत्ता छीनने के लिए लड़ रही समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद बनाने का फैसला किया है। ऐसा नहीं है कि पिता, पुत्र में मतभेद हैं और दोनों ने अलग अलग रास्ता चुना है। यह विशुद्ध रूप से कॉरपोरेट और राजनीति के नेक्सस की एक बेशर्म तस्वीर है।

बहरहाल, परिमल नाथवानी पहले 12 साल तक झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे थे। वे गुजरात के रहने वाले हैं लेकिन 2008 से 2020 तक झारखंड से सांसद रहे। उसके बाद आंध्र प्रदेश चले गए, जहां से 2026 जून तक सांसद रहे। अब फिर वे झारखंड से सांसद चुने गए हैं। जैसे ही उन्होंने तय किया कि वे फिर से झारखंड से लड़ेंगे वैसे ही तय हो गया था कि एक सीट एनडीए के खाते में जाएगी। इसके बावजूद सत्तारूढ़ महागठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दलित समाज के बैद्यनाथ राम को उतारा तो कांग्रेस ने प्रणब झा को टिकट दिया। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो संख्या बल महागठबंधन के पक्ष में था। एक सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरुरत थी और सरकार के पास 56 विधायकों का समर्थन था।

अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कमान अपने हाथ में रखते। सहयोगी पार्टियों के साथ तालमेल करके चलते तो दोनों सीटें जीत सकते थे। उनकी पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि उन्होंने कांग्रेस से कहा था कि वह दोनों सीटें उनको लड़ने दे तो वे दोनों सीटें निकाल लेंगे। लेकिन कांग्रेस तैयार नहीं हुई। यह भी खबर है कि पहले परिमल नाथवानी की जेएमएम की टिकट से लड़ने की बात हुई थी। लेकिन वे दूसरा उम्मीदवार नहीं बनना चाहते थे। बहरहाल, महागठबंधन में समीकरण बिगड़ा और जेएमएम व कांग्रेस ने अलग अलग उम्मीदवार घोषित किए और नाथवानी निर्दलीय लड़ने पहुंचे।

यह हकीकत है कि भाजपा अपने दम पर उनको नहीं जीता सकती थी। क्योंकि भाजपा के अपने 21 विधायकों के अलावा आजसू, लोजपा और जदयू के तीन विधायक थे। अगर जेकेएलएम के विधायक जयराम महतो भी साथ आते तब भी आंकड़ा 25 पहुंच रहा था, जबकि जीतने के लिए 28 वोट की जरुरत थी। भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियों के 25 विधायकों को छोड़ दें तो सरकार के पास 56 का समर्थन था। फिर भी वोटिंग हुई औऱ नतीजे आए तो जेएमएम को 30 वोट मिले और कांग्रेस को सिर्फ 21 वोट मिले। बाकी पांच वोट परिमल नाथवानी को चले गए। नतीजे के बाद सभी पार्टियों ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी लाइन के हिसाब से वोट किया है। लेकिन कांग्रेस ने उसी समय स्पष्ट कर दिया कि लालू प्रसाद की पार्टी राजद के चार विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। लेफ्ट के दो विधायकों के भी क्रॉस वोटिंग करने की खबर आई। उनकी मदद से परिमल नाथवानी चुनाव जीत गए।

बताया जा रहा है कि लालू प्रसाद की पार्टी राजद को मैनेज करने का काम सीधे मुंबई से हुआ।

अंबानी परिवार ने अपनी कंपनी के ग्रुप प्रेसिडेंट के लिए राजद से बात की और तेजस्वी यादव खुशी खुशी राजी हो गए। ध्यान रहे मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव सहित परिवार के करीब एक दर्जन सदस्य शामिल हुए थे। विशेष विमान से पूरा परिवार शादी में गया था। बहरहाल, यह मामला सिर्फ तेजस्वी यादव या राजद का नहीं है। अगर हेमंत सोरेन चाहते तो कांग्रेस जीत सकती थी। उस समय यह भी खबर आई थी कि अंबानी समूह ने मुख्यमंत्री को भी मैनेज किया।

आंकड़ों के विश्लेषण से भी लगता है कि सब मिलीभगत थी। पहला सवाल तो तभी खड़ा हुआ जब हेमंत सोरेन के उम्मीदवार को 30 वोट मिले। जब जीत का आंकड़ा 28 का था और इतना नजदीकी मुकाबला था तो दो अतिरिक्त वोट उनको क्यों ट्रांसफर हुआ? ध्यान रहे नाथवानी को 29 वोट मिले थे। बताने वाले बताते हैं कि यह सीएम के यहां से ही तय हुआ था कि नाथवानी से एक वोट ज्यादा जेएमएम उम्मीदवार को आना चाहिए। यानी खेल पहले से फिक्स था। कांग्रेस उम्मीदवार का हारना पहले से तय था। अगर हेमंत चाहते तो न राजद में टूट होती और न उनके अतिरिक्त वोट जेएमएम उम्मीदवार को जाते। आराम से दोनों सीटें महागठबंधन जीतता। इस कहानी का लब्बोलुआब यह है कि नाथवानी को भले भाजपा ने राज्यसभा भेजा लेकिन उनकी जीत के लिए अंबानी समूह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजद दोनों को मैनेज किया। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि झारखंड में अडानी समूह का बड़ा इंटरेस्ट है। गोड्डा में उसका पावर प्लांट है, जहां से 16 सौ मेगावाट बिजली बांग्लादेश जाती है। सो, अंबानी समूह का भी झारखंड में इंटरेस्ट लेना समझ में आता है।

एक्टर डिनो मोरिया के अरेस्ट होने के दावे का पूरा सच आया सामने, मीठी नदी घोटाला वाला केस भी जान लीजिए

बॉलीवुड एक्टर डिनो मोरिया इन दिनों मीठी नदी की सफाई से जुड़े 65 करोड़ रुपये के घोटाला मामले में को लेकर चर्चा में है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 2 अक्टूबर को उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी गिरफ्तारी का दावा किया गया था। डिनो मोरिया ने खुद इन खबरों को गलत बताया। वहीं EOW की ओर से भी गिरफ्तारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मीठी नदी से जुड़े मामले में जांच जारी है। आइए जानते हैं क्या है मीठी नदी की सफाई घोटाले से जुड़ा मामला

डिनो मोरिया को नहीं किया गया गिरफ्तार

डिनो मोरिया ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की खबरों को खारिज कर दिया। इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बांद्रा स्थित उनके घर पर पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। मोरिया की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद एक्टर ने व्हाट्सऐप के जरिए संबंधित मीडिया आउटलेट को बताया कि ये खबरें “सच नहीं हैं”। बाद में सामने आई रिपोर्ट में भी मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से डीनो मोरिया की गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

EOW के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर डीनो मोरिया से पूछताछ की जा रही थी। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद तय की जाएगी।

 

क्या है पूरा मामला

ये मामला मुंबई की मीठी नदी की सफाई और सुधार से जुड़े ठेकों में कथित आर्थिक गड़बड़ी को लेकर EOW जांच कर रहा है। जांच एजेंसी ठेकेदारों, बिचौलियों और कुछ नगर निगम अधिकारियों की भूमिका के साथ-साथ प्रोजेक्ट से जुड़े ठेकों और पेमेंट की भी जांच कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में बीएमसी को करीब 65.54 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है।

पहले भी हो चुकी है पूछताछ

इस मामले में डीनो मोरिया से पहले भी पूछताछ हो चुकी है। मई 2025 में EOW ने उनसे और उनके भाई सैंटिनो मोरिया से सवाल किए थे। जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ ऐसे फोन रिकॉर्ड मिले थे, जिनसे कथित तौर पर मामले से जुड़े लोगों के साथ उनके संपर्क की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा, जांच एजेंसी सैंटिनो की कंपनी UBO Ridez और केस से जुड़े लोगों के बीच हुए पैसों के लेनदेन की भी जांच कर रही थी।

इस मामले की जांच में केतन कदम का नाम भी सामने आया है, जिन्हें 2025 में हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मोरिया के घर पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई मीठी नदी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की बड़ी जांच के तहत की गई थी।

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Dove Soft IPO: दूसरे दिन इश्यू 0.87 गुना सब्सक्राइब, कारोबारी सेहत के साथ जानिए क्या करती है कंपनी

Dove Soft Limited के ₹73.26 करोड़ के SME IPO को दूसरे दिन के अंत तक 0.87 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। 5 अक्टूबर 2026 को इश्यू बंद होगा। अब तक नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर यानी NII कैटेगरी 1.19 गुना सब्सक्राइब हुई है।

QIB और मार्केट मेकर हिस्से को भी 1.00 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका है। 1 अक्टूबर तक IPO में करीब ₹63.86 करोड़ की बोलियां आ चुकी थीं।

SMS से CPaaS की तरफ बढ़ रही कंपनी

Dove Soft का मुख्य कारोबार कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी से जुड़ा है। कंपनी पहले मुख्य रूप से SMS आधारित बिजनेस पर फोकस करती थी। अब वह AI आधारित और ओमनीचैनल CPaaS यानी Communication Platform as a Service मॉडल की तरफ बढ़ रही है।

इसके प्लेटफॉर्म पर RCS, WhatsApp, वॉइस, ईमेल और दूसरे डिजिटल कम्युनिकेशन चैनल शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य कारोबारों को एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग चैनलों पर ग्राहकों से जुड़ने की सुविधा देना है।

Dove Soft की कारोबारी सेहत

FY2025 से FY2026 के बीच कंपनी का रेवेन्यू 46% बढ़ा। इसी दौरान टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT 42% बढ़ा। कंपनी की शुरुआत 2011 में हुई थी।

आज इसकी मौजूदगी मुंबई, अहमदाबाद, गुरुग्राम और दुबई में है। कंपनी बड़े कॉर्पोरेट्स और OTT प्लेटफॉर्म्स को कम्युनिकेशन सॉल्यूशंस देती है।

IPO में क्या ऑफर है?

Dove Soft के IPO में कुल 53.28 लाख नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा 12.72 लाख शेयरों का OFS यानी Offer for Sale है।

IPO का प्राइस बैंड ₹104 से ₹111 प्रति शेयर है। कंपनी के शेयरों को BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपनी आगे की कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी।

बिजनेस कम्युनिकेशन बदल रहा है

Dove Soft के मुताबिक, अब कंपनियों का ग्राहक से संपर्क सिर्फ SMS तक सीमित नहीं है। WhatsApp, RCS, वॉइस और ईमेल जैसे चैनल भी कस्टमर कम्युनिकेशन का हिस्सा बन चुके हैं।

एक ही ग्राहक के साथ अलग-अलग चरणों में अलग चैनल इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मसलन, ऑर्डर अपडेट के लिए SMS या WhatsApp और प्रमोशनल कम्युनिकेशन के लिए दूसरे डिजिटल चैनल का इस्तेमाल हो सकता है। Dove Soft इसी बदलाव को अपने कारोबार के लिए ग्रोथ का अगला मौका मान रही है।

AI और ऑटोमेशन पर भी फोकस

कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म में AI आधारित ऑटोमेशन को भी शामिल किया है। इसमें इंटेलिजेंट चैनल सिलेक्शन और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी सुविधाएं हैं।

इसके अलावा वर्कफ्लो बेस्ड कम्युनिकेशन भी प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। इसका मकसद कंपनियों के कम्युनिकेशन को ज्यादा ऑटोमेटेड और डेटा आधारित बनाना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zerodha पर ट्रेडिंग शुरू की, 45 मिनट में कमाए ₹12 हजार; फिर ऐसी लगी लत कि माता-पिता की बचत गंवाकर ₹38 लाख के कर्ज में डूबा टेक्नीशियन

शेयर बाजार में जल्दी पैसा कमाने का सपना कई लोगों को ट्रेडिंग की ओर खींचता है। शुरुआत में अगर कुछ मुनाफा मिल जाए, तो बाजार से कमाई का भरोसा और बढ़ जाता है। लेकिन कई बार यही उत्साह धीरे-धीरे ऐसी आदत में बदल जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सोशल मीडिया यूजर Hemdharpan ने अपने 35 वर्षीय दोस्त की ऐसी ही कहानी साझा की है।

2 लाख की सैलरी और 14 लाख की बचत

Hemdharpan के मुताबिक, उनका दोस्त एक IT प्रोफेशनल था और करीब 2 लाख रुपये महीने कमाता था। उसके पास 14 लाख रुपये की बचत थी। शादीशुदा होने के साथ उसका एक बच्चा भी था। यानी नौकरी, कमाई और सेविंग के मामले में उसकी जिंदगी काफी स्थिर थी।

करीब दो साल पहले एक सहकर्मी ने उसे शेयर बाजार में ट्रेडिंग के बारे में बताया। यहीं से उसकी जिंदगी का एक नया दौर शुरू हुआ।

45 मिनट में 12 हजार का मुनाफा

कहानी के मुताबिक, सहकर्मी ने लंच के दौरान अपना Zerodha अकाउंट दिखाया। उसने Nifty options की इंट्राडे ट्रेडिंग से करीब 45 मिनट में 12 हजार रुपये कमाए थे। यह देखकर टेकie को भी लगा कि बाजार में कम समय देकर अच्छी कमाई की जा सकती है।

शुरुआत में उसे सफलता भी मिली। उसने करीब दो घंटे में 18 हजार रुपये कमाए। इस कमाई ने उसका उत्साह और बढ़ा दिया।

फिर शुरू हुआ नुकसान का सिलसिला

दूसरे महीने बाजार ने उसे बड़ा झटका दिया। उसने कुछ ही मिनटों में करीब 50 हजार रुपये गंवा दिए। पोस्ट के मुताबिक, उसने समय पर stop-loss नहीं लगाया और नुकसान को स्वीकार करने के बजाय उसे वापस पाने की कोशिश शुरू कर दी।

उसने परिवार की बचत से 1 लाख रुपये बाजार में लगा दिए। इसके बाद वह नुकसान की भरपाई के लिए लगातार ट्रेड करने लगा। बताया गया कि वह एक दिन में 30-40 ट्रेड तक करने लगा था।

बचत खत्म हुई तो लिया कर्ज

2024 में शुरू हुई ट्रेडिंग का असर 2025 के मध्य तक दिखने लगा। उसकी करीब 14 लाख रुपये की बचत खत्म हो गई, लेकिन ट्रेडिंग नहीं रुकी। पोस्ट के अनुसार, वह परिवार से ट्रेडिंग छिपाने लगा और काम के बीच भी बाजार पर नजर रखता था।

बचत खत्म होने के बाद उसने तीन बैंकों से पर्सनल लोन लिया। कथित तौर पर उसने इन पैसों के लिए घर की मरम्मत का कारण बताया। बाद में इंस्टेंट लोन ऐप्स से भी पैसे लिए।

38 लाख का नुकसान सामने आया

2025 के आखिर में जब रिकवरी एजेंट घर पहुंचने लगे, तब परिवार को पूरी स्थिति का पता चला। पोस्ट के मुताबिक, 14 लाख रुपये की बचत खत्म होने के अलावा उस पर करीब 24 लाख रुपये का कर्ज भी था। यानी कुल नुकसान करीब 38 लाख रुपये बताया गया।

इसका असर परिवार पर भी पड़ा। बच्चे की स्कूल फीस बाउंस होने की बात सामने आई और उसकी पत्नी बच्चे को लेकर मायके चली गई।

अब कर्ज से निकलने की कोशिश

Hemdharpan के अनुसार, अब वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटा है। उसने कार बेच दी है और लोन को संभालने के लिए restructuring plan अपनाया है। यह कहानी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक व्यक्ति के अनुभव पर आधारित है। इससे यह जरूर सामने आता है कि ट्रेडिंग में लगातार नुकसान की भरपाई करने की कोशिश आर्थिक जोखिम को तेजी से बढ़ा सकती है।

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‘हनुमान चालीसा का कर रहा था पाठ, सबको मरने नहीं दे सकता था…’ स्मित मच्छार ने PM मोदी को सुनाई डरावने वक्त की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की। फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में को-पायलट के हमले में भारतीय स्मित मच्छार घायल हो गए हैं। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित काफी इमोशनल हो गए। पीएम मोदी ने पायलट की हिम्मत और धैर्य की तारीफ की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर के लोग उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं पीएम से बात करते हुए स्मित मच्छार ने बताया कि कैसे उन्होंने मुश्किल वक्त में संयम बनाए रखा।

पीएम से बात हुए इमोशनल हुए कैप्टन

PM मोदी के सामने घटना को याद करते हुए मच्छार इमोशनल हो गए और कहा कि, वह उस मुश्किल वक्त में वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। कैप्टन के लिए हनुमान चालीसा मुश्किल वक्त में हिम्मत देने का सहारा बनी। पीएम से बात करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार ने कहा, वह उनके सबसे बड़े आदर्श हैं और उनसे बात करना उनके लिए बहुत खास है। मच्छार ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से सीधे बात करने का मौका मिलेगा। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित मच्छार काफी भावुक थे।

‘हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मच्छार ने पीएम से कहा, “मुझे बहुत चोटें आईं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस समय, मैंने खुद को धक्का देकर कॉकपिट का दरवाजा खोला।” पीएम मोदी ने मच्छार से बातचीत के दौरान कहा कि, भारत को अपने उन लोगों पर गर्व है, जो किसी की जान लेने के बजाय दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डालने का साहस रखते हैं। मच्छार ने बताया कि ‘जब मैं मुश्किल में होता हूं तो हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मुश्किल हालत का किया सामना

मच्छार ने बताया कि, जब भी वह मुश्किल में होते हैं, तो हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। फ्लाईदुबई विमान की घटना के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही किया। उनके को-पायलट ने कॉकपिट में उन पर हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी और हालात को संभालने की कोशिश करते रहे। उन्होंने चोट लगने के बाद काफी कोशिश करके कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों ने आगे आकर स्थिति को काबू में किया। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई इस घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लैंड कराया गया। राहत की बात थी कि विमान में सवार सभी 174 लोगों की जान बच गई।

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पेरिस जैसी दुनिया की मशहूर सिटी से मुंबई आकर नई जिंदगी शुरू करना 23 साल के निको के लिए किसी एडवेंचर से कम नहीं है। फ्रांस से करीब 7 हजार किलोमीटर दूर मुंबई पहुंचे निको यहां नई नौकरी के साथ एक बिल्कुल अलग माहौल को समझने में जुटे हैं। शुरुआत के कुछ हफ्तों में उन्हें शहर की कई ऐसी बातें देखने को मिलीं, जिनकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की थी। कभी पांच किलोमीटर का सफर ट्रैफिक की वजह से लंबा हो जाता है, तो कभी गर्मी, चाय और लोकल खाने का अनुभव उन्हें मुंबई के और करीब ले आता है।

नई भाषा सीखने से लेकर नए लोगों से मिलने और शहर के अलग-अलग हिस्सों को घूमने तक, निको हर दिन कुछ नया अनुभव कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्हें मुंबई पसंद आने लगी है। सोशल मीडिया पर शेयर किए उनके अनुभव अब लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

5 किलोमीटर की दूरी भी लग सकती है लंबी

मुंबई आने के बाद निको को सबसे पहले जिस चीज ने चौंकाया, वह थी शहर की दूरी और ट्रैफिक। उनके मुताबिक, यहां पांच किलोमीटर की दूरी का मतलब यह जरूरी नहीं कि सफर जल्दी पूरा हो जाएगा। ट्रैफिक की वजह से छोटी दूरी तय करने में भी काफी समय लग सकता है। यही वजह है कि अब निको को अपनी दिनचर्या और काम की प्लानिंग पहले से अलग तरीके से करनी पड़ती है।

अब दिन की प्लानिंग में ट्रैफिक और चाय भी शामिल

मुंबई में रहने के बाद निको की रोजमर्रा की जिंदगी भी बदल गई है। अब उन्हें कहीं जाने से पहले ट्रैफिक का ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा गर्मी, चाय और अच्छा खाना भी उनकी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

उनके लिए शहर की यही छोटी-छोटी बातें मुंबई को पेरिस से बिल्कुल अलग बनाती हैं।

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7 हजार किलोमीटर दूर आकर शुरू की नई जिंदगी

निको ने बताया कि वह पेरिस से करीब 7 हजार किलोमीटर दूर आकर मुंबई में एक नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं। नई नौकरी, नए दोस्त, नई भाषा और नया माहौल सबकुछ उनके लिए नया है। उन्होंने अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि 23 साल की उम्र में उन्हें लगभग हर चीज खुद समझनी पड़ रही है। कभी रास्ता भटक जाते हैं, तो कभी हिंदी सीखने की कोशिश करते हैं।

मुंबई से होने लगा प्यार

मुंबई में कुछ हफ्ते बिताने के बाद निको को एक और एहसास हुआ, जिसकी शायद उन्होंने शुरुआत में उम्मीद नहीं की थी। उन्हें धीरे-धीरे यह शहर पसंद आने लगा।

वह कहते हैं कि कई बार उन्हें खुद हैरानी होती है कि आखिर वह मुंबई कैसे पहुंच गए। लेकिन यही अनिश्चितता इस पूरे अनुभव को उनके लिए खास भी

गणपति उत्सव से लेकर समुद्र तक, सब एक्सप्लोर कर रहे निको

मुंबई आने के बाद निको ने शहर को सिर्फ काम के नजरिए से नहीं देखा। उन्होंने गणेश विसर्जन के नजारे देखे, शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमे और समुद्र किनारे भी समय बिताया।

इसके अलावा वह स्थानीय खाना और मुंबई की अलग-अलग चीजों को भी आजमा रहे हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वह इन अनुभवों की झलक लगातार शेयर कर रहे हैं।

‘कभी-कभी सबसे सही फैसला अजीब लगता है’

निको का मानना है कि जिंदगी में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जिन्हें घर बैठे समझाना मुश्किल होता है, लेकिन वही फैसले बाद में सबसे यादगार अनुभव बन जाते हैं। पेरिस से मुंबई आने का उनका फैसला भी कुछ ऐसा ही है। फिलहाल वह शहर की भाषा, रास्तों और जिंदगी को समझ रहे हैं और उनकी मुंबई वाली कहानी अभी शुरू ही हुई है।

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