GATE 2027 Registration: आईआईटी मद्रास ने शुरू किया गेट 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन, जानें कौन कर सकता और कौन नहीं कर सकता अप्लाई

GATE 2027 Registration: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास ने ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2027 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। गेट 2027 में हिस्सा लेने के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट gate2027.iitm.ac.in पर जाकर अपनी एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। यह आवेदन प्रक्रिया 02 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है।

गेट 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन विंडो बिना लेट फीस के 27 सितंबर, 2026 तक खुली रहेगी। इस डेडलाइन तक अपना आवेदन करने से चूकने वाले उम्मीदवार, इसके बाद भी लेट फीस देकर 5 अक्टूबर तक अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन सुधार विंडो 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगी।

गेट 2027, 6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी, 2027 को होगा। सिटी अलॉटमेंट नोटिफिकेशन 4 जनवरी को आने की उम्मीद है, जबकि एडमिट कार्ड रिलीज की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। गेट 2027 का नतीजा 19 मार्च, 2027 को घोषित किया जाएगा।

गेट 2027 में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन पेपर किया गया शामिल

इस साल, गेट में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन (RA) पर एक नया पेपर होगा। नए पेपर के जुड़ने से, अब परीक्षा 30 टेस्ट पेपर्स के लिए होगी। आईआईटी मद्रास ने गेट 2027 के कुछ सिलेबस में भी बदलाव किए हैं। इनमें बायोटेक्नोलॉजी पेपर में अपडेट और टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और फाइबर साइंस, इंजीनियरिंग साइंसेज, ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज, और लाइफ साइंसेज के लिए सेक्शनल पेपर कोड में बदलाव शामिल हैं। उम्मीदवार एक या दो टेस्ट पेपर्स दे सकते हैं। हालांकि, दो पेपर्स चुनने वालों को परीक्षा अधिकारियों द्वारा मान्य कॉम्बिनेशन्स में से चुनना होगा।

गेट 2027 योग्यता

जो कैंडिडेट अंडरग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम के तीसरे साल या उससे ऊपर पढ़ रहे हैं, साथ ही जिन्होंने इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स या ह्यूमैनिटीज में सरकार से मंजूर डिग्री पूरी की है, वे इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।

भारत के बाहर के संस्थान से योग्य डिग्री वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जो अधिकारियों द्वारा बताई गई शर्तों के तहत है। भारतीय नागरिकों के लिए, DigiLocker के जरिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। आईआईटी मद्रास ने कैंडिडेट को सलाह दी है कि गेट 2027 आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह पक्का कर लें कि उनका DigiLocker अकाउंट वेरिफाई और अपडेटेड है।

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Salary vs EMI: सैलरी आते ही EMI से खाली हो जाता है अकाउंट? कर्ज के जाल से निकलने के लिए अपनाएं ये 3 आसान स्टेप्स

Debt Management Tips: महीने की पहली तारीख को सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है और कुछ ही घंटों में EMIs कटने के बाद अकाउंट खाली लगने लगता है। अगर आपकी सैलरी का भी एक बड़ा हिस्सा पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बिल और होम लोन की किश्तों में जा रहा है, तो बचत करना तो दूर, रोजमर्रा के खर्चे संभालना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसी स्थिति में अक्सर लोग किसी इमरजेंसी खर्च से निपटने के लिए एक और नया लोन या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर लेते हैं, जो उन्हें एक गंभीर ‘डेट ट्रैप’ यानी कर्ज के जाल में फंसा देता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने वित्तीय साक्षरता अभियानों में बार-बार आगाह करता है कि पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप भी EMI के दबाव से परेशान हैं, तो इन 3 आसान स्टेप्स के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति पर दोबारा नियंत्रण पा सकते हैं।

कर्ज के दबाव को कम करने का 3-स्टेप फॉर्मूला

स्टेप 1: जानिए पैसा कहां जा रहा है और महंगे कर्ज पहले खत्म कीजिए

कोई भी रणनीति बनाने से पहले आपको अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर साफ देखनी होगी। अपनी हर EMI, क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया, यूटिलिटी बिल्स और राशन/किराए जैसे फिक्स्ड खर्चों को एक कागज पर लिखें। क्रेडिट कार्ड बकाया और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बहुत ज्यादा होती हैं, जबकि होम लोन या कार लोन तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं।

सभी कर्जों को एक साथ भरने के बजाय सबसे महंगे कर्ज (हाई-इंटरेस्ट लोन) को पहले चुकाने का लक्ष्य बनाएं। बाकी कर्जों की सिर्फ मिनिमम EMI देते रहें और जितनी भी एक्स्ट्रा बचत हो, उसे सबसे महंगे लोन को बंद करने में लगाएं।

स्टेप 2: एक छोटा कैश बफर जरूर तैयार करें

जब बजट पहले से टाइट हो, तो महीने के ₹1,000 या ₹2,000 बचाना भी मुश्किल लगता है। लेकिन यही छोटी बचत आपकी ढाल बनती है। अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी या गाड़ी की खराबी आ जाए, तो इमरजेंसी फंड न होने पर आपको दोबारा क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता है।

रिजर्व बैंक का मानना है कि हर परिवार के पास एक छोटा कैश बफर होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में नया कर्ज न लेना पड़े। शुरुआत में ₹5,000 से ₹10,000 का छोटा बफर बनाएं, फिर धीरे-धीरे इसे 3-6 महीने के आवश्यक खर्चों के बराबर ले जाएं।

स्टेप 3: सैलरी इंक्रीमेंट या बोनस का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें

साल में जब भी सैलरी बढ़े, बोनस मिले या कोई टैक्स रिफंड आए, तो उस पूरे पैसे को नए शौक या लाइफस्टाइल पर खर्च करने की गलती न करें। मिली हुई एक्स्ट्रा राशि का कम से कम 50% से 70% हिस्सा अपने सबसे महंगे लोन के प्रिंसिपल को चुकाने में लगाएं। इससे आपका आने वाला ब्याज काफी घट जाता है।

लोन की प्री-पेमेंट करने से पहले अपने बैंक के नियमों और प्री-पेमेंट चार्जेस की जांच जरूर कर लें। RBI के नियमों के अनुसार बैंकों को लोन की शर्तों में प्री-पेमेंट चार्जेस का पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य है।

पुराने लोन को चुकाने के लिए कभी न लें नया लोन!

कई बार लोग EMI कम करने के लिए लोन कंसोलिडेशन या री-फाइनेंसिंग का सहारा लेते हैं। जब बैंक किसी नए लोन में कम EMI दिखाता है, तो लोग आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि EMI इसलिए कम दिखती है क्योंकि लोन की अवधि बढ़ा दी जाती है।

लोन की अवधि बढ़ाने से आपकी महीने की किस्त तो छोटी हो सकती है, लेकिन बैंक को जाने वाला कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर से भुगतान करने पर आपको न केवल लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा, बल्कि आपका CIBIL स्कोर भी खराब होगा, जिससे भविष्य में इमरजेंसी लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्या हो लोन रीपेमेंट की बेस्ट स्ट्रेटजी

कर्ज के जाल से बाहर निकलने का रास्ता किसी जादुई फॉर्मले से नहीं, बल्कि सही वित्तीय अनुशासन से निकलता है। जब धीरे-धीरे आपकी एक-एक EMI खत्म होगी, तो उससे बचने वाला पैसा ही आपकी भविष्य की बचत और निवेश की नींव बनेगा। पहला लक्ष्य स्थिति को बिगड़ने से रोकना है, और दूसरा लक्ष्य हर एक्स्ट्रा रुपये को किसी नए कर्ज में फंसाने के बजाय उससे निकलने का जरिया बनाना है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR फाइल करने की डेडलाइन चूक गए? अब भी हैं ये विकल्प, जानिए क्या करना होगा

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइल करने की 31 अगस्त की डेडलाइन निकल चुकी है। लेकिन अगर आप समय पर ITR फाइल नहीं कर पाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपके पास अभी भी कुछ विकल्प हैं।

आप बिलेटेड ITR फाइल कर सकते हैं। अगर पहले से फाइल किए गए ITR में कोई गलती है, तो उसे रिवाइज्ड ITR के जरिए ठीक कर सकते हैं। वहीं, कुछ खास मामलों में देरी माफ कराने के लिए इनकम टैक्स विभाग के पास आवेदन भी किया जा सकता है।

31 दिसंबर तक Belated ITR

अगर आपने 31 अगस्त तक ITR फाइल नहीं किया है, तो आप बिलेटेड ITR फाइल कर सकते हैं। इसे 31 दिसंबर 2026 तक फाइल किया जा सकता है। हालांकि, अगर आपका असेसमेंट इससे पहले पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे।

S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर टन्ना के मुताबिक, बिलेटेड ITR फाइल करने पर ब्याज और लेट फीस लग सकती है।

कितनी लेट फीस लगेगी?

AY 2026-27 के लिए बिलेटेड ITR फाइल करने पर अधिकतम ₹5,000 की लेट फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से कम है, तो अधिकतम ₹1,000 की फीस लगेगी।

अगर कोई टैक्स बाकी है, तो उस पर 1% प्रति महीने की दर से ब्याज भी लग सकता है। इसके अलावा बिजनेस लॉस और कैपिटल लॉस को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने का मौका भी छूट सकता है।

पुराने टैक्स रिजीम का विकल्प नहीं मिलेगा

बिलेटेड ITR फाइल करने पर एक और बात ध्यान रखना जरूरी है। आपको नए टैक्स रिजीम में रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है। ऐसे में पुराने टैक्स रिजीम में मिलने वाली डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा।

क्या बिलेटेड ITR में रिफंड मिलेगा?

हां, बिलेटेड ITR फाइल करके भी टैक्स रिफंड क्लेम किया जा सकता है। लेकिन रिफंड मिलने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

Revised ITR कब फाइल कर सकते हैं?

रिवाइज्ड ITR उन लोगों के लिए है, जिन्होंने पहले ही ITR फाइल कर दिया है। बाद में अगर कोई गलती या जानकारी छूट जाए, तो उसे रिवाइज्ड ITR के जरिए ठीक किया जा सकता है।

AY 2026-27 के लिए 31 मार्च 2027 तक रिवाइज्ड ITR फाइल किया जा सकता है। हालांकि, 31 दिसंबर 2026 के बाद रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर अतिरिक्त फीस लग सकती है।

अगर कुल आय ₹5 लाख तक है, तो ₹1,000 की फीस लग सकती है। वहीं, ₹5 लाख से ज्यादा आय होने पर ₹5,000 तक की फीस देनी पड़ सकती है।

31 दिसंबर के बाद क्या होगा?

अगर आप 31 दिसंबर 2026 तक भी ITR फाइल नहीं कर पाते, तो कुछ खास मामलों में एक और रास्ता बचता है। इसके लिए इनकम टैक्स विभाग से देरी माफ करने की मांग की जा सकती है।

यह सुविधा हर किसी को नहीं मिलती। आपको बताना होगा कि ITR समय पर फाइल क्यों नहीं कर पाए। साथ ही अपनी बात साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी देने होंगे।

यह विकल्प खासतौर पर वैध रिफंड क्लेम या लॉस को कैरी फॉरवर्ड करने जैसे मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिर्फ आवेदन करने से नहीं होगा काम

देरी माफ कराने के लिए आवेदन करना ही काफी नहीं है। आपको इनकम टैक्स अधिकारियों को बताना होगा कि देरी जानबूझकर नहीं हुई थी।

अगर वजह सही नहीं पाई गई या पर्याप्त दस्तावेज नहीं दिए गए, तो आपका आवेदन खारिज हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

GATE 2027 Registration: अब तक शुरू नहीं हुई गेट 2027 के लिए आवेदन प्रक्रिया, जानें कब से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

GATE 2027 Registration: ग्रैजुएट एप्टिट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2027 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों की परेशानी अब तक खत्म नहीं हुई है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (IIT), मद्रास अब तक गेट 2027 के लिए पंजीकरण शुरू नहीं कर सका है। दो बार पंजीरण शुरू होने की तारीख टलने के बाद अब उम्मीदवार नई तारीख घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं। समझा जा रहा है कि आईआईटी मद्रास जल्द ही गेट 2027 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकता है। रजिस्ट्रेशन की बदली हुई तारीखें आने वाले दिनों में ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी होने की उम्मीद है।

पहले जारी किए गए शेड्यूल के अनुसार, गेट 2027 आवेदन प्रक्रिया 14 अगस्त, 2026 को शुरू होने वाली थी। हालांकि, इसे बदलकर 27 अगस्त, 2026 कर दिया गया। लेकिन 27 अगस्त से भी पंजीकरण शुरू नहीं हो चका है। उम्मीदवार अब तक दो बार टल चुकी गेट 2027 पंजीकरण प्रक्रिया के जल्द शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस की बदली हुई तारीखें जल्द ही ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध होंगी।

गेट 2027 रजिस्ट्रेशन कब शुरू होगा?

ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध शेड्यूल के अनुसार, छात्रों के लिए गेट 2027 आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 27 सितंबर, 2026 है। यह देखते हुए कि कंडक्टिंग बॉडी छात्रों को प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकरण करने के लिए कम से कम एक महीने का समय देती हैं, इस बात की बहुत संभावना है कि गेट 2027 रजिस्ट्रेशन प्रोसेस सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में कभी भी शुरू हो जाएगा। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि आईआईटी मद्रास ने गेट 2027 रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोलने में देरी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।

गेट 2027 जरूरी तारीखें

गेट 2027 पंजीकरण प्रक्रिया रद्द होने के बाद, कैंडिडेट अब रजिस्ट्रेशन और एप्लीकेशन प्रोसेस की नई तारीखों का इंतजार कर रहे हैं। नीचे दी गई जरूरी तारीखें देखें

एक्टिविटी तारीख

गेट ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (GOAPS) शुरू होने की तारीख : 14 अगस्त 2026, 27 अगस्त 2026, TBA

रेगुलर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (बिना लेट फीस के) खत्म होने की तारीख : 21 सितंबर 2026, 27 सितंबर, 2026

एक्सटेंडेड ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (लेट फीस के साथ) खत्म होने की तारीख : 30 सितंबर 2026, 5 अक्टूबर, 2026

गेट 2027 एप्लीकेशन में सुधार शुरू होने की तारीख : 14 अक्टूबर, 2026

गेट 2027 एप्लीकेशन में सुधार खत्म होने की तारीख : 21 अक्टूबर, 2026

सिटी अलॉटमेंट नोटिफिकेशन : 4 जनवरी, 2027

एडमिट कार्ड डाउनलोड : TBA

गेट 2027 एग्जाम : फरवरी 6, 2027, फरवरी 7, 2027, फरवरी 13, 2027, फरवरी 14, 2027, फरवरी 20, 2027, फरवरी 21, 2027

रिजल्ट की घोषणा : मार्च 19, 2027

गेट 2027 रजिस्ट्रेशन के लिए DigiLocker क्रेडेंशियल जरूरी

गेट 2027 रजिस्ट्रेशन विंडो जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इस साल गेट के लिए रजिस्टर करने के लिए, छात्रों के पास वैलिड DigiLocker क्रेडेंशियल होना जरूरी है। कैंडिडेट्स को गेट 2027 के लिए अप्लाई करने से पहले अपने वेरिफाइड DigiLocker अकाउंट बनाने या अपडेट करने होंगे। DigiLocker के जरिए गेट 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन सभी भारतीय नागरिकों के लिए जरूरी है।

गेट 2027 के लिए रजिस्टर करने के स्टेप्स

जीओएपीएस पोर्टल पर गेट 2027 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया खुलने के बाद, योग्य उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने और आवेदन शुल्क जमा करने से पहले रजिस्ट्रेशन लिंक में सभी जरूरी क्रेडेंशियल डालने होंगे।

  • गेट 2027 के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं।
  • गेट 2027 GOAPS पोर्टल पर क्लिक करें।
  • रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें।
  • सभी जरूरी डिटेल्स डालें।
  • एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए लॉगिन करें।
  • गेट 2027 एप्लीकेशन फीस जमा करें।
  • सेव करें और सबमिट पर क्लिक करें।

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ITR Filing Deadline: 31 अगस्त की ITR डेडलाइन छूटने पर क्या होगा? फिर कैसे भर सकते हैं रिटर्न, कितना देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, तो आपके पास सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और बकाया टैक्स पर लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

अगर 31 अगस्त तक रिटर्न नहीं भर पाए, तो भी मामला खत्म नहीं होगा। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी पड़ सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में टैक्स लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी छूट सकता है।

31 अगस्त की डेडलाइन उन कुछ टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 दाखिल करना है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन उनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

31 अगस्त की डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

डेडलाइन निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि अब ITR नहीं भर सकते। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर उससे पहले आपका असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

देरी से ITR भरने पर लेट फीस भी लगती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा है, तो ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख तक की कुल आय वालों के लिए यह फीस ₹1,000 है।

अगर आपका टैक्स भी बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लग सकता है। यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत लगता है।

क्या देर से ITR भरने पर रिफंड मिलेगा?

हां, सिर्फ डेडलाइन चूकने से आपका टैक्स रिफंड खत्म नहीं हो जाता। अगर आपको रिफंड मिलना है, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करके उसे क्लेम कर सकते हैं।

लेकिन रिटर्न दाखिल करने के बाद उसे वेरिफाई करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन का समय दिया है। रिटर्न वेरिफाई होने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान को आगे एडजस्ट करने में दिक्कत

डेडलाइन के बाद ITR भरने का एक बड़ा नुकसान हो सकता है। यह लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने से जुड़ा है। मान लीजिए आपको बिजनेस, शेयर बाजार या F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है। आप इस नुकसान को आने वाले वर्षों की कमाई से एडजस्ट करके टैक्स बचा सकते हैं। लेकिन अगर आपने ITR समय पर दाखिल नहीं किया, तो कुछ तरह के नुकसान को आगे ले जाने का फायदा नहीं मिल सकता।

यानी सिर्फ लेट फीस का मामला नहीं है। देर से ITR भरने पर भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी जा सकता है।

ITR में गलती हो गई तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल करने के बाद आपको कोई गलती दिखती है या कोई जानकारी छूट गई है, तो आप धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आम तौर पर रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि, अगर उससे पहले असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो यह सुविधा खत्म हो सकती है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पुरानी रिटर्न की जगह नई रिटर्न मानी जाती है। इसे भी दोबारा वेरिफाई करना पड़ता है।

लेकिन एक बात ध्यान रखें। देर से ITR भरने की वजह से जो टैक्स लाभ पहले ही खो चुके हैं, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से वे वापस नहीं मिलते। इसमें कुछ तरह के लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी शामिल है।

Pension Scheme: अटल पेंशन योजना या PM मानधन, किस स्कीम में ज्यादा फायदा? 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

GATE 2027 Registration: 27 अगस्त से शुरू होगा गेट 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन, इस बार से डिजीलॉकर पर अकाउंट होगा अनिवार्य

GATE 2027 Registration: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास (IITM) इस हफ्ते ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2027 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करेगा। इस महीने की शुरुआत में आईआईटी मद्रास द्वारा शेयर किए गए संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 27 अगस्त, 2026 (गुरुवार) से शुरू होगी। इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को आधिकारिक गेट 2027 वेबसाइट, यानी gate2027.iitm.ac.in पर अपना ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।

इस बार, भारतीय नागरिकता वाले सभी इच्छुक उम्मीदवारों को डिजीलॉकर पर भी रजिस्टर करना होगा। गेट 2027 में शामिल होने के इच्छुक किसी उम्मीदवार के पास अगर अभी तक डिजीलॉकर पर वेरिफाइड अकाउंट नहीं है तो उन्हें 27 अगस्त तक ऐसा कर लेना चाहिए। उम्मीदवार यह भी ध्यान दें कि गेट ऑनलाइन एप्लिकेशन प्रोसेसिंग सिस्टम्स (GOAPS) पोर्टल के जरिए गेट 2027 के लिए आवेदन करते समय उनका नाम डिजीलॉकर से वेरिफाई किया जाएगा। अगर उनके नाम में कोई गलती है, तो कैंडिडेट गेट 2027 के लिए आवेदन करने से पहले डिजीलॉकर पर उसे ठीक कर सकेंगे। नहीं तो, करेक्शन विंडो के दौरान, लागू नियमों के अनुसार इसे बदला जा सकता है।

गेट 2027 के लिए रिवाइज्ड शेड्यूल देखें

गेट ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (GOAPS) शुरू होने की तारीख : 14 अगस्त, 2026

नियमित ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख (बिना लेट फीस के): 27 अगस्त, 2026

बढ़ी हुई ऑनलाइन पंजीकरण की आखिरी तारीख (लेट फीस के साथ): 21 सितंबर, 2026

गेट 2027 आवेदन में सुधार करने की शुरुआती तारीख : 27 सितंबर, 2026

गेट 2027 आवेदन में सुधार करने की आखिरी तारीख : 30 सितंबर, 2026

सिटी अलॉटमेंट नोटिफिकेशन : 5 अक्टूबर, 2026

एडमिट कार्ड डाउनलोड : समय पर घोषित होगा

गेअ 2027 परीक्षा : 6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी, 2027

रिजल्ट की घोषणा : 19 मार्च, 2027

गेट 2027 के लिए योग्यता

शैक्षिक योग्यता : इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स या ह्यूमैनिटीज में किसी भी सरकारी-मंज़ूर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के तीसरे साल या उससे ऊपर पढ़ रहे स्टूडेंट्स एलिजिबल हैं।

डिप्लोमा के जरिए बीई में प्रवेश लेने वाले छात्र : डिप्लोमा के बाद दूसरे साल में प्रवेश लेने वाले बीई के तीसरे साल या उससे ऊपर पढ़ रहे छात्र भी योग्य हैं।

उम्र सीमा : गेट 2027 के लिए अप्लाई करने की कोई उम्र सीमा नहीं है।

प्रयास की संख्या : कोई कैंडिडेट कितनी बार गेट के लिए आवेदन कर सकता है, इस पर कोई रोक नहीं है।

पेपर का चुनाव : कैंडिडेट बताए गए कॉम्बिनेशन में से ज्यादा से ज्यादा दो गेट 2027 पेपर चुन सकते हैं। हालांकि, उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी क्वालिफाइंग डिग्री के विषय के हिसाब से सही पेपर चुनें।

गेट 2027 इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स, आर्किटेक्चर और ह्यूमैनिटीज में अंडरग्रेजुएट लेवल के विषयों के बारे में उम्मीदवारों की समझ का मूल्यांकन करने के लिए आयोजित किया जाता है। इसे आईआईएससी और आईआईटी मिलकर नेशनल कोऑर्डिनेशन बोर्ड (NCB), उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय (MoE), भारत सरकार की ओर से आयोजित करते हैं।

सफल उम्मीदवार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा समर्थित संस्थान परास्नातक और डॉक्टोरल पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए गेट स्कोर का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही इन्हें वित्तीय मदद भी मिल सकती है, जबकि कई सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान अपने यहां भर्ती के लिए गेट स्कोर का इस्तेमाल करते हैं।

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फाइनेंशियल सिक्योरिटी हासिल करना और प्रॉपर्टी या वेल्थ क्रिएट करने के लिए जरूरी नहीं कि सिर्फ आपकी कमाई ज्यादा हो। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि आप अपने कमाए हुए पैसे को कितने बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं, बचाते हैं और इन्वेस्ट करते हैं। लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन करने और अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सही फाइनेंशियल हैबिट्स को अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं पैसे की बचत और निवेश से जुड़े उन व्यावहारिक नियमों के बारे में जो आपकी वित्तीय स्थिति को एक मजबूत रास्ते पर ला सकते हैं।

इमरजेंसी फंड बनाएं

नौकरी छूटने, मेडिकल बिल या अचानक आए किसी भी खर्च जैसी स्थिति में इमरजेंसी फंड वित्तीय सपोर्ट देता है। फाइनेंशियल प्लानर आमतौर पर सलाह देते हैं कि आपको बेसिक खर्चों के करीब तीन से छह महीने के बराबर की राशि किसी ऐसे खाते में रखनी चाहिए जहां से उसे आसानी से निकाला जा सके।

बचत को प्राथमिकता दें

सैलरी आते ही सबसे पहले बचत की आदत डालें। इसके लिए अपने वेतन में से एक निश्चित राशि को बचत या निवेश खातों में तुरंत ऑटोमैटिक ट्रांसफर करने की व्यवस्था करें। नियमित रूप से पैसे को सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर करने से बचत में निरंतरता बनी रहती है और पैसे खर्च करने का ऑप्शन भी कम होता है।

खर्चों पर नजर रखें

अपने रोजाना के खर्चों को ट्रैक करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आपका पैसा वास्तव में कहां जा रहा है। गैर-जरूरी सब्सक्रिप्शन, बार-बार किए जाने वाले छोटे-छोटे खर्चों और दूसरे ऐसे पैटर्न की पहचान करने के लिए बजटिंग ऐप, स्प्रेडशीट या सिंपल एक्सपेंस ट्रैकर का इस्तेमाल करें।

क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करें

सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड काफी मददगार साबित हो सकते हैं। अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने से बचें और ड्यू डेट तक पूरे बिल का भुगतान करने का लक्ष्य रखें। जिम्मेदारी से क्रेडिट का इस्तेमाल करने से एक स्वस्थ क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने में मदद मिलती है और भारी लेट फीस या इंटरेस्ट से बचा जा सकता है।

जल्दी निवेश शुरू करें

कम उम्र में या जल्दी निवेश शुरू करने से आपके पैसे को कम्पाउंडिंग के जरिए बढ़ने का अधिक समय मिलता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेशक जिन विकल्पों पर विचार करते हैं उनमें कम लागत वाले इंडेक्स फंड भी शामिल हैं। हालांकि निवेश के विकल्पों का चयन हमेशा पर्सनल फाइनेंस टारगेट, जोखिम लेने की क्षमता और समय अवधि के अनुसार ही होना चाहिए।

स्किल्स बढ़ाएं और सैलरी नेगोशिएट करें

अपनी व्यावसायिक योग्यताओं और स्किल्स को सुधारने से समय के साथ आपकी कमाने की क्षमता बढ़ सकती है। सर्टिफिकेट्स, स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग और वर्कशॉप आपको बेहतर अवसरों के काबिल बनाने में मदद करते हैं।

इसके अलावा आपकी सैलरी आपके भविष्य के बोनस, बचत और रिटायरमेंट योगदान को प्रभावित करती है। इसलिए जॉब ऑफर या अप्रेजल के दौरान अपनी इंडस्ट्री के सैलरी लेबल का रिसर्च करें। अपने लिए उचित सैलरी को मैनेजमेंट के साथ हमेशा कॉन्फिडेंस से डिस्कस करें।

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46 पैसे का बिल चुकाना भूला शख्स, बैंक ने ठोक दिया ₹1200 का जुर्माना! भड़के यूजर ने X पर सुनाई खरी-खोटी

Credit Card Bill Viral News: क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करते समय अगर आप एक रुपये से भी कम की चूक करते हैं, तो यह आपको कितना भारी पड़ सकता है? इसका एक ताजा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने अपने क्रेडिट कार्ड बिल में से महज 46 पैसे कम चुकाए, जिसके बदले बैंक ने उस पर ₹1200 से अधिक का जुर्माना और अन्य फीस लगा दी।

पीड़ित ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एचडीएफसी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारियों को ‘अज्ञानी और घमंडी’ तक कह दिया। यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोग बैंक के इस रवैये पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित ग्राहक को बैंक की तरफ से ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था। भुगतान करते समय गलती से ग्राहक ने दशमलव के बाद के पैसे छोड़ दिए और सिर्फ ₹10,649 का ही पेमेंट किया। यानी कुल बिल में से महज 46 पैसे बकाया रह गए। इस 46 पैसे के मामूली शॉर्टफॉल की वजह से बैंक ने ग्राहक पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज और पेनल्टी ठोक दी।

इस पर ग्राहक ने X पर HDFC Bank को टैग करते हुए लिखा, ‘प्रिय HDFC बैंक, आपने मुझे ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल भेजा था। गलती से मैंने ₹10,649.00 का भुगतान किया, 46 पैसे छूट गए और आपने 46 पैसे की इस चूक के लिए मुझ पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया? क्या आप इसे जल्द से जल्द रिवर्स करेंगे?

यूजर बैंक के कस्टमर सपोर्ट पर भी भड़ास निकाली और लिखा कि वहां के प्रतिनिधि जितने अज्ञानी हैं, उतने ही घमंडी भी हैं।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग, मिली तरह-तरह की सलाह

यह पोस्ट सामने आते ही यूजर्स बैंक के इस एक्शन की आलोचना करने लगे और अपने पुराने अनुभव शेयर करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘क्रेडिट कार्ड कैंसल करो, उसके 4 टुकड़े करके कचरे के डिब्बे में फेंक दो। उन्हें कोर्ट में साबित करने दो कि 0.46 रुपये का ब्याज ₹1200 कैसे बन गया।’

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, ₹10,649.46 जैसे आंकड़े को राउंड ऑफ करके ₹10,649 किया जाना चाहिए, क्योंकि 50 पैसे से कम की किसी भी भिन्न को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कुछ यूजर्स ने HDFC बैंक के साथ अपने बुरे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी बैंक के खराब व्यवहार के कारण अपने अकाउंट्स और एफडी बंद करवा दिए थे।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा भी था जिसने ग्राहक को ही जिम्मेदार ठहराया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह आपकी गलती है, भाई। इसे बैंक पर मत डालो। यह उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा सबक है जो हर चीज को हल्के में लेते हैं।’

क्रेडिट कार्ड पेनल्टी और भारी-भरकम चार्ज से कैसे बचें?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:

Auto-Debit ऑन रखें: अपने बैंक अकाउंट से क्रेडिट कार्ड बिल का ‘Total Amount Due’ ऑटो-डेबिट मोड पर सेट करें, ताकि दशमलव के पैसे भी अपने आप सही समय पर कट जाएं।

राउंड ऑफ न करें: जब भी खुद से मैनुअल पेमेंट करें, बिल में लिखी दशमलव वाली सटीक रकम ही ट्रांसफर करें, खुद से कोई आंकड़ा न घटाएं।

गलती होने पर तुरंत नोडल अधिकारी से संपर्क करें: अगर गलती से ऐसा लेट चार्ज लग भी जाए, तो कस्टमर केयर के अलावा बैंक के Grievance Redressal Officer / Nodal Officer को ईमेल करें और चार्जेस रिवर्स करने की रिक्वेस्ट करें।

RBI Ombudsman में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी जायज बात नहीं सुनता है और पैसे वापस नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल दौर में ऑटोमेटेड बैंकिंग सिस्टम बिल का पूरा भुगतान न होने पर अपने आप लेट फीस और पेनल्टी जनरेट कर देते हैं, फिर चाहे बकाया राशि 1 रुपये से भी कम क्यों न हो। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बिल की पाई-पाई का भुगतान करें ताकि बैंकों के इन कड़े पेनल्टी रूल्स से बचा जा सके।

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया (X) पर वायरल यूजर पोस्ट पर आधारित है। यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। मनीकंट्रोल इसकी पुष्टि नहीं करता है।

पहली एंट्री सफलता की गारंटी नहीं; Google, Netflix और Facebook आए लेट लेकिन बदल दी कहानी

मार्केट में पहली एंट्री का शुरुआती फायदा मिल सकता है लेकिन बिजनेस हिस्ट्री के हिसाब से यह इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सबसे पुराना ही मार्केट में लंबे समय तक राज करेगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट सर्च से लेकर सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट तक कई कंपनियों ने बाद में इंडस्ट्री में एंट्री की और लीडर बन गए। उन्होंने तेजी से अपने को बढ़ाया और ग्राहकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से अपनाया। इंडस्ट्री में पहली बार जिस कंपनी की एंट्री हुई, वे नए बाजार बनाते है या मौजूदा मार्केट को बदलते हैं लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि बाद में आने वाली कंपनियों ने शानदार प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाकर मार्केट लीडर बन जाते हैं। यहां ऐसे ही पांच उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती मार्केट लीडर को पछाड़ दिया

Android vs Apple’s iOS

जून 2007 में जब एपल (Apple) ने आईफोन (iPhone) लॉन्च किया, तो उसने स्मार्टफोन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी। इसने मॉडर्न टचस्क्रीन डिवाइस और ऐप-बेस्ड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। इसके 18 महीने से भी कम समय बाद अक्टूबर 2008 में गूगल ने एंड्रॉयड को एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया। एपल के इंटीग्रेटेड हार्डवेयर अप्रोच के विपरीत इसने सैमसंग (Samsung), एचटीसी (HTC) और मोटोरोला (Motorola) जैसी कई हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की। इससे एंड्रायड को अलग-अलग प्राइस रेंज और इलाकों में तेजी से फैलने में मदद मिली। साल 2010 के आखिर तक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका था और आगे भी बना रहा। आज भी लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ यह दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बना हुआ है।

Facebook vs Yahoo

मायस्पेस (MySpace) अगस्त 2003 में आया और जल्द ही सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बन गया। इसके लाखों यूजर्स बने और इसने अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की। फिर फरवरी 2024 में फेसबुक ने मार्केट में एंट्री की। शुरुआत में तो यह सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए था और सितंबर 2006 में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। साफ-सुथरे इंटरफेस, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, अधिक दिलचस्प न्यूज फीड और कम स्पैम के जरिए इसने खुद को दूसरों से अलग बनाया। आम लोगों के लिए खुलने के लगभग 20 महीने बाद अप्रैल 2008 में फेसबुक ने ग्लोबल मंथली विजिटर्स के मामले में मायस्पेस को पीछे छोड़ दिया और 2009 तक इसने यूएस ट्रैफिक में भी पछाड़ दिया। यह सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।

Google vs Yahoo

गूगल से पहले इंटरनेट सर्च और वेब डायरेक्टरी पर 1994 में लॉन्च हुई याहू (Yahoo), 1994 में लॉन्च हुई लाइकोस (Lycos) और 1995 में लॉन्च हुई अल्टाविस्टा (AltaVista) जैसी कंपनियों का दबदबा था। फिर गूगल ने साल 1998 में पेज-रैंक (PageRank) के साथ मार्केट में एंट्री की। यह एक ऐसा सर्च एल्गोरिदम था जो सिर्फ वेबसाइटों की लिस्ट बनाने की बजाय, उनकी महत्ता यानी रेलेवेंस के आधार पर पेजों को रैंक करता था। इसने एक तेज़ और साफ-सुथरा होमपेज भी पेश किया, जो पोर्टल-स्टाइल वाले कॉम्पिटिटर्स से बिल्कुल अलग था। यही सादगी लोगों को भा गया। साल 2000 तक गूगल याहू का सर्च प्रोवाइडर बन गया और तेजी से एक प्रमुख सर्च इंजन के तौर पर उभरा। आगे चलकर ऑनलाइन सर्च का पर्यायवाची बन गया।

Netflix vs Blockbuster

ब्लॉकबस्टर ने 80 के दशक के आखिरी से हजारों फिजिकल स्टोर के जरिए दुनिया के सबसे बड़े वीडियो रेंटल बिजनेस में से एक खड़ा किया। साल 1997 में नेटफ्लिक्स ने ‘मेल के जरिए डीवीडी’ सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ डीवीडी रेंटल मार्केट में एंट्री की। इसमें लेट फीस हटा दी गई और फिर साल 2007 में इसने सब्सक्रिप्शन-बेस्ड वीडियो स्ट्रीमिंग में कदम रखा। एक तरफ ब्लॉकबस्टर कर्ज और स्टोर पर ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रहा था, वहीं नेटफ्लिक्स नए डिलीवरी मॉडल और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करती रही। ब्लॉकबस्टर ने साल 2010 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी, तो नेटफ्लिक्स दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।

Nintendo vs Atari

मैग्नावॉक्स (Magnavox) ने 1972 में पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था, लेकिन अटारी ने 1970 के दशक के आखिरी में अटारी 2600 के साथ इस कैटेगरी को मशहूर कर दिया। हालांकि सॉफ्टवेयर की गिरती क्वालिटी और मार्केट में जरूरत से अधिक सप्लाई की वजह से साल 1983 में वीडियो गेम इंडस्ट्री क्रैश हो गई। इसके बाद निनटेंडो ने अक्टूबर 1985 में निनटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम के साथ नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में एंट्री की। इसने गेम डेवलपर्स के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया और एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी में भारी निवेश किया, जिससे इसका इकोसिस्टम मजबूत हुआ। साल 1988 तक नॉर्थ अमेरिकन कंसोल मार्केट के अधिकतर हिस्से पर निनटेंडो का कब्जा हो गया, जिससे इंडस्ट्री को फिर से खड़ा करने में मदद मिली और साथ ही अटारी का हार्डवेयर बिजनेस कमजोर पड़ गया।

मां का ITR भरते समय हुई देरी, बेटे को लगा 5,000 रुपये का झटका, वायरल हुआ मामला

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में हुई थोड़ी सी देरी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने दावा किया कि सिर्फ कुछ घंटों की देरी के कारण मामूली टैक्स राशि पर हजारों रुपये की लेट फीस जुड़ गई। इस मामले ने एक बार फिर टैक्स नियमों, समय पर रिटर्न भरने की जरूरत और आम लोगों से होने वाली छोटी गलतियों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे नियमों का जरूरी हिस्सा बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का मानना है कि पहली बार फाइल करने वालों या कुछ घंटे की देरी जैसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट के बाद लोग जुर्माने की व्यवस्था और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

पहली बार मां का ITR भर रहा था शख्स

एक्स यूजर @poojaofficial5 ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक व्यक्ति पहली बार अपनी मां का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल भर रहा था। पोस्ट के मुताबिक, वह चाहता था कि रिटर्न में कोई गलती न हो, इसलिए उसने एक जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार किया। उसका मकसद सही जानकारी के साथ ITR जमा करना था। लेकिन इसी इंतजार के दौरान फाइलिंग की आखिरी तारीख निकल गई।

सिर्फ ढाई घंटे की देरी और लग गया ₹5,000 जुर्माना

पोस्ट में दावा किया गया कि जब वह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन कर पाया, तब तक डेडलाइन खत्म हुए सिर्फ करीब ढाई घंटे हुए थे। हालांकि, सिस्टम ने देरी के लिए तय लेट फाइलिंग फीस जोड़ दी। इसके बाद जो टैक्स राशि पहले ₹850 थी, वह बढ़कर ₹5,850 हो गई। यूजर ने सवाल उठाया कि जब टैक्स की असली रकम इतनी कम थी और देरी भी कुछ घंटों की थी, तो क्या जुर्माना इतना ज्यादा होना उचित है?

यूजर ने नियमों में मानवीय गलती की जगह देने की बात कही

पोस्ट में कहा गया कि टैक्स नियमों का उद्देश्य लोगों को समय पर रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन कई बार आम लोगों से छोटी गलतियां हो सकती हैं। यूजर ने लिखा कि पहली बार ITR भरने वालों या कुछ घंटों की देरी जैसे मामलों में कुछ राहत या ग्रेस पीरियड पर विचार किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर इंटरनेट यूजर्स भी दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने सिस्टम को सख्त बताया और कहा कि छोटी देरी पर इतना बड़ा जुर्माना परेशान करने वाला है। एक यूजर ने लिखा कि टैक्स फाइलिंग के लिए लोगों के पास काफी समय होता है, इसलिए आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी से की गई कोशिश और छोटी मानवीय गलतियों के लिए कुछ गुंजाइश होनी चाहिए।

लोगों ने दी समय से ITR भरने की सलाह

कई यूजर्स ने इस घटना को लेकर लोगों को सलाह दी कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पहले से दस्तावेज तैयार रखकर समय पर ITR दाखिल करने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। यह मामला एक बार फिर चर्चा में ले आया है कि टैक्स नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे स्तर की गलतियों और जानबूझकर की गई लापरवाही में अंतर कैसे तय किया जाए।

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