Google Pay-PhonePe पर UPI Autopay कैसे करें सेट? यहां देखें पूरा प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप

आज के समय में लोग कई तरह की सब्सक्रिप्शन सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, जिनके लिए हर महीने या सालाना पेमेंट करना पड़ता है। लेकिन इन सभी सेवाओं की पेमेंट डेट याद रखना और उनका हिसाब रखना अक्सर मुश्किल हो जाता है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि यूजर किसी सब्सक्रिप्शन का पेमेंट करना भूल जाते हैं, जिसकी वजह से उनकी सर्विस बंद या कैंसिल हो जाती है। इसी परेशानी को आसान बनाने के लिए साल 2020 में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI Autopay सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए, आप अपनी पसंद के किसी भी UPI ऐप का इस्तेमाल करके मोबाइल बिल, बिजली बिल, EMI पेमेंट, OTT सब्सक्रिप्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम और म्यूचुअल फंड जैसे बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए ई-मैंडेट (e-mandate) चालू कर सकते हैं।

यहां UPI ऑटोपे मैंडेट और बार-बार होने वाले पेमेंट (Recurring Payments) के बारे में वे सभी बातें बताई गई हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है। इसमें इनके फायदे और Google Pay व PhonePe का इस्तेमाल करके इन्हें सेट अप करने का तरीका भी शामिल है।

ग्राहकों और व्यापारियों के लिए UPI Autopay सेट करने के फायदे

बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए UPI Autopay मैंडेट सेट करने के कई फायदे हैं। अगर आप ग्राहक हैं, तो ऑटोपे सेट करने से आप लेट फीस और पेनल्टी से बच सकते हैं, क्योंकि यह आपकी ओर से समय पर पेमेंट कर देता है। इसी तरह, यह बार-बार होने वाले पेमेंट करने का एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका है, जिसमें आपको हर महीने या साल मैन्युअल रूप से पेमेंट करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि तय समय पर पेमेंट अपने आप हो जाता है।

वहीं, व्यापारियों (Merchants) के लिए भी यह सुविधा फायदेमंद है, क्योंकि इससे समय पर भुगतान मिलने में आसानी होती है और ग्राहकों के साथ पेमेंट का मैनेजमेंट बेहतर हो जाता है।

बता दें कि UPI, यूजर्स को क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस के लिए 1,00,000 रुपये तक की लिमिट के साथ ऑटो-पे सेट करने की सुविधा देता है। आप सीधे UPI ऐप में Autopay को आसानी से बदल सकते हैं, रद्द कर सकते हैं, रोक सकते हैं या दोबारा शुरू कर सकते हैं। आप लंबी लाइनों में लगने के बजाय हर महीने या साल सीधे ऑनलाइन पेमेंट भी कर सकते हैं। खास बात यह है कि Autopay सेट करने के लिए किसी तरह के दस्तावेज या कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होती।

इसके अलावा, Autopay पेमेंट होने से कम से कम 24 घंटे पहले आपको प्री-डेबिट नोटिफिकेशन (PDN) मिल जाता है, जिससे आपको पहले ही जानकारी मिल जाती है कि आपके खाते से पेमेंट कटने वाला है।

अगर आप कोई मर्चेंट (व्यापारी) हैं, तो Autopay को इंटीग्रेट करने से ग्राहकों से समय पर भुगतान मिलना आसान हो जाता है। इससे आप ग्राहकों को बेहतर सर्विस दे सकते हैं, उनकी संतुष्टि बढ़ा सकते हैं और लंबे समय तक उनका भरोसा बनाए रख सकते हैं।

Google Pay पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए Autopay Mandate कैसे सेट करें

  • अपने फोन पर Google Pay खोलें।
  • स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर दिखाई दे रही अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  • अब, उस सेक्शन को खोलने के लिए ‘Autopay’ बटन पर क्लिक करें।
  • यहां आपको अलग-अलग सर्विस के लिए आए हुए Autopay Mandate दिखाई देंगे। किसी खास सर्विस के लिए Autopay चालू करने के लिए Pending सेक्शन में जाएं और संबंधित मैंडेट को चुनें।
  • इसके बाद Accept बटन पर टैप करें, ताकि Autopay सेट हो जाए।
  • अगर आप किसी रिक्वेस्ट किए गए मैंडेट के लिए Autopay सेट नहीं करना चाहते हैं, तो आप ‘Decline’ भी चुन सकते हैं।
  • आखिर में अपनी पसंद की पुष्टि करने के लिए UPI PIN दर्ज करें।
  • इसके बाद आपका Autopay Mandate एक्टिव हो जाएगा।

PhonePe पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए Autopay Mandate कैसे सेट करें

  • अपने स्मार्टफोन पर PhonePe ऐप खोलें।
  • इसके बाद, स्क्रीन के ऊपर बाईं ओर अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  • नीचे स्क्रॉल करके ‘Payment Settings’ सेक्शन पर जाएं।
  • अब, ‘Autopay’ बटन पर टैप करें।
  • इसके बाद एक नया पेज खुलेगा। यहां आपको वह Mandate चुनना होगा, जिसके लिए आप Autopay चालू करना चाहते हैं।
  • Autopay रिक्वेस्ट को स्वीकार करने के बाद ऐप आपसे पुष्टि के लिए UPI PIN दर्ज करने को कहेगा।
  • UPI PIN डालते ही आपका PhonePe Autopay Mandate एक्टिव हो जाएगा और आगे के पेमेंट तय समय पर अपने आप हो जाएंगे।

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ITR: बगैर पेनाल्टी आज इनकम टैक्स रिटर्न भरने का आखिरी मौका, आपको होंगे ये फायदे

ITR: इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म 1 और फॉर्म 2 से रिटर्न फाइल करने का आज आखिरी मौका है। आज के बाद रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी लगेगी और टैक्स पर इंटरेस्ट भी देना पड़ेगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को आज रिटर्न फाइल करने की कोशिश करनी चाहिए। आज रिटर्न फाइल करने के कई फायदे हैं।

इनकम का एक सोर्स होने पर 30 मिनट में फाइल होगा रिटर्न

सैलरीड टैक्सपेयर्स जिनकी इनकम का एक सोर्स है, वे बगैर किसी दिक्कत करीब 30 मिनट में रिटर्न फाइल कर सकते हैं। टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने से पहले फॉर्म 16, फॉर्म 26एएस, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जैसे डॉक्युमेंट्स तैयार रखने होंगे। इसके अलावा बैंक अकाउंट डिटेल, इंटरेस्ट से हुई इनकम और कैपिटल गेंस का कैलकुलेशन भी तैयार रखना होगा।

सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स रिटर्न फाइल करने से पहले जुटा लें

चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रेया गुप्ता गोयल ने कहा कि 30 मिनट में रिटर्न तभी फाइल किया जा सकता है, जब टैक्सपेयर्स ने सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स पहले से जुटा लिया हो। उन्होंने कहा, “प्री-फिल्ड डेटा की वजह से खुद डेटा डालने में लगने वाला समय बच रहा है। लेकिन, टैक्सपेयर्स के लिए डेटा को एक बार चेक कर लेना जरूरी है।”

आईटीआर फॉर्म में भरे गए हर डेटा के लिए टैक्सपेयर जिम्मेदार

रिटर्न में भरे हर डेटा के लिए टैक्सपेयर जिम्मेदार होता है। इसलिए रिटर्न फाइल करते वक्त प्री-फिल्ड डेटा को भी वेरिफाय कर लेना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड डेटा फॉर्म 16, AIS और 26AS से मैच करा लेना चाहिए। सेविंग्स अकाउंट से इंटरेस्ट, फिक्स्ड डिपॉजिट से इंटरेस्ट और कैपिटल गेंस की रिपोर्टिंग अलग से होती है।

31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी और इंटरेस्ट चुकाना होगा

31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी चुकानी होगी। इसके अलावा टैक्स पर इंटरेस्ट भी देना होगा। सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर पेनाल्टी 5000 रुपये है। 5 लाख रुपये से कम सालाना इनकम पर पेनाल्टी 1000 रुपये है।

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31 जुलाई तक आईटीआर फाइल करने के ये हैं फायदे

दूसरा, फायदा यह है कि आप लॉस को कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगे। 31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर लॉस कैरी फॉरवर्ड की सुविधा नहीं मिलती है। तीसरा, रिफंड का पैसा भी जल्द अकाउंट में आ जाएगा। चौथा, 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने पर टैक्सपेयर्स के सामने इनकम टैक्स की नई और पुरानी दोनों रीजीम के इस्तेमाल का विकल्प खुला है। 31 के बाद सिर्फ इन रीजीम में रिटर्न फाइल करना होगा।

5.5 करोड़ पार हुए रिटर्न, पोर्टल पर भारी ट्रैफिक! अगर आज नहीं भरा फॉर्म तो लगेगा भारी जुर्माना?

Income Tax Return

ITR Filing Last Date: वित्तीय वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख आज यानी 31 जुलाई 2026 है। तय समय सीमा से ठीक 24 घंटे पहले तक देश भर में 5.5 करोड़ से ज्यादा ITR फाइल किए जा चुके हैं। 30 जुलाई को ही 42 लाख से अधिक लोगों ने अपने रिटर्न दाखिल किए हैं, जो अंतिम समय में मचने वाली अफरा-तफरी को साफ बयां करता है। ALSO READ: ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

 

इनकम टैक्स विभाग ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 24 घंटे से भी कम समय बचा है! असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अब तक 5.5 करोड़ से अधिक ITR फाइल किए जा चुके हैं। अकेले 30 जुलाई को 42 लाख से ज्यादा फाइल हुए।

सरकार की तरफ से राहत या सख्ती?

करदाताओं (Taxpayers) की भारी तादाद और आखिरी घंटों में इनकम टैक्स पोर्टल पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए सोशल मीडिया पर तारीख बढ़ाने (Extension) की मांग उठ रही थी। हालांकि, वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग की ओर से अभी तक डेडलाइन बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में जानकारों का यही सुझाव है कि टैक्सपेस्ट्स किसी भी भरोसे के बिना आज ही अपना रिटर्न हर हाल में पूरा कर लें।

आखिरी वक्त में रिटर्न भरते समय इन बातों का रखें खास ख्याल

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि आपने अभी तक ITR फाइल नहीं किया है, तो इन जरूरी बातों का ध्यान रखें ताकि पेनल्टी और नोटिस से बच सकें:

 

फॉर्म 26AS और AIS का मिलान जरूर करें: जल्दबाजी में डेटा गलत न भरें। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दिए गए टीडीएस (TDS) और इनकम डेटा का मिलान अपने बैंक स्टेटमेंट से जरूर करें।

 

पोर्टल धीमा होने पर घबराएं नहीं: आखिरी घंटों में इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर भारी लोड के कारण सर्वर स्लो हो सकता है। अगर पेज अटक रहा है, तो कुछ देर इंतजार करें या दूसरे ब्राउज़र/नेटवर्क का इस्तेमाल करें।

 

बैंक अकाउंट री-वैलिडेट (Re-validate) करें: रिफंड समय पर पाने के लिए यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड हो और पैन से लिंक हो।

 

देर से फाइल करने पर कितना लगेगा जुर्माना?

  • यदि आप आज (31 जुलाई) रात 12 बजे तक अपना ITR फाइल नहीं कर पाते हैं, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत आपको लेट फीस चुकानी पड़ सकती है। 
  • जिनकी कुल आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें 5,000 रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
  • जिनकी आय 5 लाख रुपये से कम है, उनके लिए लेट फीस अधिकतम 1,000 रुपए हो सकती है। इसलिए, किसी भी तरह की लेट फीस और कानूनी झंझट से बचने के लिए बिना एक पल गंवाए अपना रिटर्न तुरंत सबमिट करें।

ITR Filing Deadline: क्या 31 जुलाई के बाद बढ़ेगी आईटीआर की डेडलाइन? जानिए क्या है इनकम टैक्स विभाग का अपडेट

Income Tax Return Deadline Extension: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आज 31 जुलाई 2026 आखिरी तारीख है। हर साल की तरह इस बार भी सोशल मीडिया और करदाताओं के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकार या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस डेडलाइन को आगे बढ़ाएगा?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आधिकारिक रुझानों के मुताबिक, इस बार ITR फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ने की संभावना बेहद कम है। करदाताओं को किसी भी तरह की राहत या तारीख बढ़ाए जाने का इंतजार किए बिना आज ही अपना आईटीआर दाखिल कर देना चाहिए।

क्या बढ़ेगी ITR फाइल करने की आखिरी तारीख?

इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार की तरफ से 31 जुलाई की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई विचार नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे की वजह ये है कि, इस बार इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (e-Filing Portal) काफी सुचारू रूप से काम कर रहा है और भारी ट्रैफिक के बावजूद कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं देखी गई है।

अब तक पांच करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर फाइल कर चुके हैं। विभाग का मानना है कि करदाताओं को पर्याप्त समय दिया गया था, इसलिए डेडलाइन बढ़ाने का कोई ठोस कारण नहीं है।

अगर आज 31 जुलाई तक ITR फाइल नहीं किया तो क्या होगा?

अगर आप 31 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में चूक जाते हैं, तो आपको ये नुकसान और पेनाल्टी झेलनी पड़ेगी:

लेट फीस (Section 234F): अगर आपकी कुल सालाना कमाई ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 की लेट फीस देनी होगी। वहीं अगर आपकी कुल कमाई ₹5 लाख तक है, तो लेट फीस ₹1,000 होगी।

ब्याज का बोझ (Section 234A): अगर आपका कोई टैक्स बकाया निकलता है, तो 1 अगस्त से आपको बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से साधारण ब्याज देना होगा।

घाटे को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना: अगर आप शेयर बाजार, F&O या प्रॉपर्टी से हुए नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई के बाद बिलेटेड रिटर्न में यह सुविधा नहीं मिलेगी।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने का मौका

जो लोग 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे, वे 31 दिसंबर 2026 तक अपना बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) जमा कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें पेनल्टी और ब्याज चुकाना पड़ेगा।

टैक्सपेयर्स के लिए काम की सलाह

इनकम टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही डेडलाइन एक्सटेंशन की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। आखिरी समय के रश और सर्वर पर दबाव से बचने के लिए आज ही तुरंत अपना ITR-1 या संबंधित फॉर्म भरकर प्रोसेस पूरा करें और रिटर्न को e-Verify करना न भूलें।

ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

income tax

अगर आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) अभी तक दाखिल नहीं किया है, तो तुरंत सावधान हो जाएं! व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगियों के लिए बिना  किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।

 

अंतिम समय में इनकम टैक्स पोर्टल पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से सर्वर स्लो होने या पेमेंट अटकने की समस्या हो सकती है। यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आपको  भारी लेट फीस, ब्याज और कई वित्तीय नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।
 

धारा 234F के तहत पेनल्टी (Late Fee Slabs) 

आयकर कानून की धारा 234F के अनुसार, नियत तारीख के बाद रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने पर निम्नलिखित जुर्माना लागू होता है:

 

कुल वार्षिक आय (Total Income) 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करने पर लेट फीस

2.5 लाख तक रुपए (मूल छूट सीमा) कोई पेनल्टी नहीं

2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक 1,000 रुपए अधिकतम लेट फीस

5 लाख रुपए से अधिक 5,000 रुपए लेट फीस

 

समय पर ITR न भरने के 4 बड़े नुकसान

1. धारा 234A के तहत ब्याज : यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो समय सीमा समाप्त होने के बाद आपको बकाए टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा। 
 

2. नुकसान (Losses) को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना : शेयर बाजार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस से हुए नुकसान को अगले वर्षों के मुनाफे से एडजस्ट (Carry Forward) करने का विकल्प समाप्त हो जाता है।
 

3. ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प बंद: यदि आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनना चाहते थे, तो समय सीमा बीत जाने के बाद आप केवल न्यू टैक्स  रिजीम (New Tax Regime) के तहत ही बेलैटेड रिटर्न भर पाएंगे।

4. रिफंड में देरी : यदि आपका TDS कटा है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देर से फाइल करने पर आपका रिफंड अटक सकता है या उसमें काफी देरी हो सकती है।

 

पोर्टल पर ऑनलाइन ITR फाइल करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

समय सीमा समाप्त होने से पहले घर बैठे आधिकारिक पोर्टल (incometax.gov.in) पर आसानी से ITR फाइल करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:
 

1.ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: PAN और पासवर्ड तैयार रखें।

आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपनी यूजर आईडी (PAN) और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें।
 

2.File Income Tax Return चुनें:

लॉगिन के बाद मुख्य डैशबोर्ड पर e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प पर क्लिक करें।
 

3.आकलन वर्ष (Assessment Year) का चयन करें:

आकलन वर्ष में AY 2026-27 का चयन करें। इसके बाद ऑनलाइन फाइलिंग (Online Mode) चुनें और 'Start New Filing' पर क्लिक करें।
 

4.करदाता स्थिति एवं सही ITR फॉर्म का चुनाव करें:

अपनी स्थिति Individual चुनें। यदि आपकी केवल वेतन, एक मकान संपत्ति या ब्याज से आय है, तो ITR-1 (Sahaj) चुनें।
 

5.AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें:

अपने फॉर्म 16, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के आंकड़ों की जांच करें। यदि कोई टैक्स बकाया दिखता है, तो e-Pay Tax  के माध्यम से तुरंत भुगतान करें।
 

6.समीक्षा करें और e-Verify पूरा करें:

अपनी सभी जानकारियों की दोबारा समीक्षा करके Submit पर क्लिक करें। इसके बाद अपने आधार OTP या नेट बैंकिंग का उपयोग करके e-Verification प्रक्रिया तुरंत पूरी  करें (बिना ई-वेरिफिकेशन के ITR अमान्य माना जाता है)।
 

ITR सबमिट करने से पहले अंतिम चेकलिस्ट 

– AIS/TIS की जांच: अपने पोर्टल पर जाकर AIS जरूर डाउनलोड करें और उसमें दर्ज ब्याज, डिविडेंड या शेयर ट्रेडिंग की जानकारी अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।

– बैंक खाता वैलिडेट करें: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता पोर्टल पर पूर्व-सत्यापित (Pre-validated) है ताकि रिफंड सीधे आपके खाते में आ सके।

– ई-वेरिफिकेशन न भूलें: ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।

सलाह: यदि पोर्टल पर अत्यधिक लोड के कारण तकनीकी समस्या आए, तो स्क्रीनशॉट लेकर रखें और थोड़ा रुककर पुनः प्रयास करें। 31 जुलाई की मध्यरात्रि से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। 

 

आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को 'Defective Return' (धारा  139(9)) करार दे सकता है। 

व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals) के लिए ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 सबसे आम फॉर्म हैं। 

ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 में मुख्य अंतर 

विषय ITR-1 (Sahaj) ITR-2

पात्रता (Eligibility) केवल भारत के निवासी (Resident Individuals) निवासी (Resident), अनिवासी (NRI) और HUF

कुल आय सीमा ₹50 लाख तक ₹50 लाख से अधिक (कोई सीमा नहीं)

मकान संपत्ति (House Property) केवल 1 मकान संपत्ति से आय 1 से अधिक मकान संपत्तियों से आय

कैपिटल गेन्स (शेयर, MF, प्रॉपर्टी) केवल Section 112A के तहत ₹1.25 लाख तक LTCG सभी प्रकार के Capital Gains (STCG/LTCG,  प्रॉपर्टी, सोना आदि)

विदेशी संपत्ति / आय (Foreign Assets) अनुमति नहीं है विदेश में संपत्ति, शेयर (RSUs/ESOPs) या आय होने पर अनिवार्य

कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 तक ₹5,000 से अधिक होने पर

डायरेक्टर / अनलिस्टेड शेयर कंपनी में डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल नहीं कर सकते कंपनी के डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल कर सकते हैं

आपके लिए कौन सा फॉर्म सही है?

1. आपको ITR-1 (Sahaj) चुनना चाहिए यदि:
 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख तक है। 

आपकी आय का मुख्य स्रोत वेतन (Salary), पेंशन (Pension) या ब्याज/डिविडेंड (Other Sources) है। 

आपके पास केवल 1 मकान संपत्ति (Single House Property) है। 

आपकी कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 या उससे कम है। 

आपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचे हैं, लेकिन आपका कुल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Section 112A u/s) ₹1.25 लाख के अंदर है और कोई अन्य कैपिटल गेन  या लॉस नहीं है। 

2. आपको ITR-2 चुनना चाहिए यदि: 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख से अधिक है। 

आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान या सोना बेचा है और आपको Short-Term Capital Gain (STCG) या अधिक LTCG हुआ है। 

आपके पास 2 या उससे अधिक मकान हैं जिनसे किराया या आय आती है। 

आपकी विदेशी आय है या विदेश में कोई बैंक खाता/कंपनी शेयर (जैसे MNCs से मिले US Stocks/ESOPs) हैं। 

आपकी कृषि आय ₹5,000 से अधिक है। 

आप किसी कंपनी में डायरेक्टर (Director) हैं या आपके पास अनलिस्टेड कंपनियों के शेयर हैं। 

आपका आवासीय दर्जा NRI (Non-Resident Indian) या RNOR है। 

ध्यान दें: बिजनेस या प्रोफेशन से आय (जैसे फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग या बिज़नेस प्रॉफिट) कमाने वाले व्यक्ति ITR-1 या ITR-2 का उपयोग नहीं कर सकते। उनके लिए ITR-3  या ITR-4 लागू होता है। 

 

 

आयकर पोर्टल (Income Tax Portal) से AIS (Annual Information Statement) डाउनलोड करना और उसका Form 16 से मिलान  (Reconciliation) करना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इससे आपके ITR में किसी प्रकार के मिसमैच की संभावना खत्म हो जाती है।
 

1. AIS कैसे डाउनलोड करें? (Step-by-Step Guide) 
 

1.इ-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें:

आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपने PAN (यूजर ID) और पासवर्ड से लॉगिन करें।

2.Services मेनू में जाएं:

लॉगिन के बाद मुख्य मेनू बार पर Services टैब पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से Annual Information Statement (AIS) चुनें।

3.AIS पोर्टल पर रिडायरेक्ट हों:

स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज आएगा, वहां Proceed पर क्लिक करें। यह आपको एक नए Compliance Portal पर ले जाएगा।

4.असेसमेंट ईयर और फाइल फॉर्मेट चुनें:

Compliance Portal पर AIS टैब पर क्लिक करें। ऊपर से सही असेसमेंट ईयर (जैसे AY 2026-27) चुनें।

5.PDF या Excel में डाउनलोड करें:PDF खोलने के लिए पासवर्ड डालें.

आप पूरे विवरण को PDF या JSON/Excel फॉर्मेट में डाउनलोड करने के लिए Download बटन पर क्लिक करें।
 

PDF खोलने का पासवर्ड Format: 

AIS की PDF फाइल पासवर्ड प्रोटेक्टेड होती है। इसका पासवर्ड आपका PAN (स्मॉल लेटर्स में) + आपकी जन्मतिथि (DDMMYYYY) होता है। 

उदाहरण: यदि आपका PAN ABCDE1234F और DOB 15/08/1990 है, तो पासवर्ड होगा: abcde1234f15081990।

2. Form 16 और AIS का मिलान (Reconciliation) कैसे करें? 

Form 16 आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) द्वारा दी गई सैलरी और काटे गए TDS का प्रमाण है, जबकि AIS में आपकी सैलरी के अलावा बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रेडिंग आदि की भी  जानकारी होती है। 

दोनों का मिलान करते समय निम्नलिखित बिंदुओं को क्रमानुसार जांचें:

1. ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) का मिलान 

Form 16 (Part B): अपनी कुल ग्रॉस सैलरी और एम्प्लॉयर द्वारा काटे गए कुल TDS की जांच करें। 

AIS (Part B – TDS/TCS section): सैलरी कोड (192) के सामने दिख रही रकम और काटे गए TDS का मिलान Form 16 के Part A से  करें। 

ध्यान दें: यदि आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों एम्प्लॉयर्स के Form 16 की कुल रकम का जोड़ AIS की कुल सैलरी से मिलना चाहिए। 

2. TDS और Form 26AS से क्रॉस-चेक 

Form 16 में दर्ज कुल TDS कटौती, AIS के TDS/TCS टैब और आपके Form 26AS में दिख रहे टैक्स क्रेडिट से पूरी तरह मैच होनी चाहिए। 

3. अन्य आय (Other Income) की पहचान 

AIS में सैलरी के अलावा कई ऐसी आय दर्ज होती हैं जो Form 16 में नहीं होतीं: 

बैंक ब्याज (Savings/FD Interest): पासबुक और बैंक से मिले इंटरेस्ट सर्टिफिकेट से इसका मिलान करें। 

डिविडेंड (Dividend Income): शेयर या म्यूचुअल फंड से मिले डिविडेंड को क्रॉस-चेक करें। 

कैपिटल गेन्स (Shares/MF Sale): शेयर या प्रॉपर्टी बिक्री से हुई कमाई AIS के SFT Information में दिखती है।
 

यदि AIS में गलत जानकारी या अंतर दिखाई दे तो क्या करें? 
 

अगर AIS में कोई ऐसी इनकम दर्ज दिख रही है जो आपकी नहीं है या कोई आंकड़ा दो बार (Duplicate) दर्ज हो गया है, तो आप पोर्टल पर Feedback दे सकते हैं: 

1. AIS Portal पर उस गलत एंट्री/लाइन आइटम पर क्लिक करें। 

2. Optional / Feedback बटन चुनें।

3. उपयुक्त विकल्प चुनें (जैसे: Information is not correct, Income is not taxable, या Information relates to  other PAN/Year)।

4. इसे सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद आपकी TIS (Taxpayer Information Summary) अपने आप अपडेट हो जाएगी।

ITR Deadline Alert: 31 जुलाई के बाद ITR भरा तो लगेगा जुर्माना! जानिए लेट रिटर्न दाखिल करने पर कितना होगा नुकसान

ITR Filing Deadline AY 2026-27: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख में सिर्फ 4 दिन बचे हैं। करदाताओं के लिए 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन बेहद करीब है। टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आखिरी वक्त के रश और ई-फाइलिंग पोर्टल के संभावित सर्वर डाउन या तकनीकी खराबी से बचने के लिए तुरंत अपना रिटर्न दाखिल कर दें।

आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 तक 4.10 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 3.85 करोड़ का ई-वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। आइए आपको बताते हैं 31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने पर आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।

क्या 31 जुलाई के बाद भी भरा जा सकता है ITR?

हां, अगर आप 31 जुलाई की डेडलाइन मिस कर देते हैं, तो भी आप अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसे बिलेटेड आईटीआर कहा जाता है। AY 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम सीमा 31 दिसंबर 2026 तक है। हालांकि, 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको भारी जुर्माना, ब्याज और कई टैक्स लाभों से हाथ धोना पड़ सकता है।

लेट ITR फाइल करने पर कितना लगेगा जुर्माना?

आयकर अधिनियम की सेक्शन 234F के तहत समय सीमा खत्म होने के बाद रिटर्न भरने पर लेट फीस वसूल की जाती है:

₹5 लाख से अधिक आय पर: अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 का जुर्माना देना होगा।

₹5 लाख तक की आय पर: अगर कुल आय ₹5 लाख तक है, तो लेट फीस ₹1,000 होगी।

बेसिक छूट सीमा से कम आय पर: अगर आपकी आय टैक्स फ्री लिमिट से कम है और रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं था, तो कोई लेट फीस नहीं लगेगी।

बकाया टैक्स पर लगेगा भारी ब्याज

31 जुलाई तक अगर आपका कोई टैक्स बकाया रह जाता है, तो धारा 234A के तहत हर महीने या महीने के हिस्से पर 1% की दर से ब्याज वसूला जाएगा। यह ब्याज तब तक जुड़ता रहेगा जब तक आप अपना रिटर्न और बकाया टैक्स जमा नहीं कर देते।

घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार खत्म

31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने का सबसे बड़ा नुकसान उन टैक्सपेयर्स को होता है जिन्हें कैपिटल गेन या बिजनेस में नुकसान हुआ है। समय पर ITR फाइल न करने पर आप इस नुकसान को भविष्य के सालों में अपने मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते।

टैक्स रिफंड मिलने में होगी देरी

अगर आपका टीडीएस अधिक कट गया है और आप टैक्स रिफंड के हकदार हैं, तो देरी से रिटर्न भरने पर रिफंड की प्रक्रिया और भुगतान में काफी वक्त लग सकता है। जितना जल्दी रिटर्न फाइल और वेरिफाई होगा, रिफंड उतनी ही तेजी से आपके बैंक खाते में आएगा।

किसके लिए कौन-सी डेडलाइन है लागू?

  • 31 जुलाई 2026: वेतनभोगी कर्मचारियों, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स तथा ₹1.25 लाख तक के LTCG वाले व्यक्तियों के लिए।
  • 31 अगस्त 2026: ऐसे कारोबारी और पेशेवर जिनकी खातों की टैक्स ऑडिट की आवश्यकता नहीं होती (ITR-3 / ITR-4)।
  • 30 सितंबर 2026: टैक्स ऑडिट कराने की अंतिम तिथि।
  • 31 अक्टूबर 2026: ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके खातों का ऑडिट होना अनिवार्य है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹4 लाख से कम सैलरी वाले सावधान! टैक्स तो नहीं लगेगा, पर ITR भरना है जरूरी; जानिए ये 6 कड़े नियम

ITR Filing Rules Below Exemption Limit: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना लेट फीस इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है जो बेहद करीब है। आयकर विभाग के अनुसार, अब तक 3 करोड़ से अधिक करदाता अपना ITR फाइल कर चुके हैं।

आमतौर पर माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹4 लाख और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ₹2.5 लाख से अधिक की सालाना कमाई पर ही आईटीआर भरना अनिवार्य होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सालाना कमाई इस बेसिक छूट सीमा से कम होने के बावजूद भी आपको जेल या पेनल्टी से बचने के लिए ITR दाखिल करना पड़ सकता है?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के तहत ऐसे 6 विशेष नियम तय किए गए हैं, जिनके दायरे में आने पर आईटीआर भरना अनिवार्य हो जाता है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

इन 6 स्थितियों में कम कमाई पर भी अनिवार्य है ITR भरना

अगर आपकी सालाना आय बेसिक छूट सीमा से कम है, फिर भी इनमें से कोई एक शर्त पूरी होने पर आपको ITR दाखिल करना ही होगा:

1- करंट अकाउंट में ₹1 करोड़ से ज्यादा का डिपॉजिट: अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक चालू खातों में ₹1 करोड़ या उससे अधिक की नकदी जमा की है।

2- विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक का खर्च: अगर आपने अपने या किसी अन्य व्यक्ति के फॉरेन ट्रैवल जैसे- हवाई टिकट, टूर पैकेज आदि पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं।

3- ₹1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल: अगर पूरे साल में आपका बिजली बिल कुल मिलाकर ₹1 लाख से अधिक आया है।

4- TDS या TCS की सीमा पार होना: अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका कुल TDS/TCS कटान ₹25,000 या उससे अधिक है (60 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए)। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे ऊपर) के लिए यह सीमा ₹50,000 रखी गई है।

5- सेविंग्स अकाउंट में ₹50 लाख या उससे अधिक जमा: अगर वित्त वर्ष में आपके एक या एक से अधिक बचत खातों में कुल ₹50 लाख या उससे ज्यादा जमा हुए हैं।

6- विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खाते में साइनिंग अथॉरिटी: अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेश में कोई संपत्ति, फाइनेंशियल शेयर या किसी विदेशी बैंक खाते का साइनिंग राइट रखते हैं।

कम कमाई के बावजूद ITR फाइल करने के 4 बड़े फायदे

भले ही कानूनन आपके लिए आईटीआर भरना अनिवार्य न हो, फिर भी वॉलंटरी रिटर्न दाखिल करने के कई बड़े फायदे मिलते हैं:

लोन मिलने में आसानी: होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के आवेदन के दौरान ITR सबसे मजबूत ‘इनकम प्रूफ’ का काम करता है।

वीजा प्रोसेसिंग: कई देशों जैसे- अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन देश का वीजा हासिल करने के लिए पिछले 2-3 सालों का ITR जमा करना अनिवार्य होता है।

TDS रिफंड का दावा: अगर आपका टीडीएस कटा है, तो उसे वापस पाने के लिए रिटर्न भरना ही एकमात्र तरीका है।

नुकसान को आगे ले जाना: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए समय पर ITR फाइल करना जरूरी होता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, इमरजेंसी के वक्त किसका इस्तेमाल करें? समझिए पूरा हिसाब

Personal Loan vs Credit Card: अगर अचानक अस्पताल का बड़ा बिल आ जाए। घर में कोई इमरजेंसी आ जाए। या नौकरी छूटने की वजह से तुरंत पैसों की जरूरत पड़ जाए। ऐसे समय में ज्यादातर लोगों के सामने दो विकल्प होते हैं- क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन-सा विकल्प कम महंगा पड़ता है? क्या हर इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना सही है? या फिर सीधे पर्सनल लोन लेना बेहतर रहेगा? जवाब आपकी जरूरत, रकम और उसे लौटाने की क्षमता पर निर्भर है।

पहले एक आसान उदाहरण समझिए

अब मान लीजिए आपको अचानक ₹2 लाख की जरूरत पड़ गई। यह पैसा आपको अस्पताल के बिल के लिए चाहिए। अब आपके पास दो रास्ते हैं। बैंक से 3 साल के लिए 12% ब्याज पर पर्सनल लोन लें। या क्रेडिट कार्ड से पूरा भुगतान कर दें। यहीं से दोनों विकल्पों का फर्क शुरू हो जाता है।

अगर पर्सनल लोन लेते हैं

मान लीजिए बैंक ने आपको ₹2 लाख का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए दे दिया।

डिटेलपैसों का हिसाब
लोन अमाउंट₹2,00,000
ब्याज दर12% सालाना
अवधि3 साल
अनुमानित EMIकरीब ₹6,640
कुल भुगतानकरीब ₹2.39 लाख
कुल ब्याजकरीब ₹39,000

EMI तय रहती है। आपको पहले से पता होता है कि हर महीने कितना पैसा देना है।

अगर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं?

अब मान लीजिए आपने पूरे ₹2 लाख का भुगतान क्रेडिट कार्ड से कर दिया। लेकिन बिल आने पर आप सिर्फ Minimum Due भरते रहे। यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल ₹2 लाख आया है। बैंक कहता है कि फिलहाल सिर्फ ₹10,000 का मिनिमम ड्यू भर दीजिए। इससे लेट फीस तो नहीं लगेगी, लेकिन बाकी ₹1,90,000 पर हर महीने ब्याज लगता रहेगा।

ज्यादातर क्रेडिट कार्ड 30% से 48% सालाना तक ब्याज वसूलते हैं। यानी करीब 2.5% से 4% हर महीने। अगर आपने पूरा बिल नहीं चुकाया, तो ब्याज तेजी से बढ़ने लगता है। कई बार उस पर GST और दूसरे चार्ज भी जुड़ जाते हैं। ऐसे में ₹2 लाख का बकाया कुछ ही महीनों में काफी महंगा साबित हो सकता है।

एक नजर में सीधी तुलना

डिटेलपर्सनल लोनक्रेडिट कार्ड
ब्याज10%-18% सालाना
30%-48% सालाना

भुगतानतय EMIMinimum Due का विकल्प
बड़ी रकम के लिएबेहतरमहंगा
छोटी अवधि के लिएठीकअगर पूरा बिल समय पर चुका दें तो बेहतर

तो क्रेडिट कार्ड कब इस्तेमाल करें?

अगर आपको भरोसा है कि 30 से 45 दिन के भीतर पूरा पैसा चुका देंगे, तो क्रेडिट कार्ड अच्छा विकल्प हो सकता है।

मान लीजिए आपने ₹50,000 का अस्पताल का बिल कार्ड से भरा। सैलरी आने में सिर्फ 20 दिन बाकी हैं। अगर बिल की Due Date तक पूरा भुगतान कर दिया, तो आमतौर पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा। यही क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी ताकत है।

और पर्सनल लोन कब लेना चाहिए?

अगर रकम बड़ी है और उसे लौटाने में कई महीने या साल लगेंगे, तो पर्सनल लोन बेहतर रहता है।

मान लीजिए शादी, इलाज या घर की मरम्मत के लिए ₹3 लाख चाहिए। आपको पता है कि इसे एक-दो महीने में नहीं चुका पाएंगे। ऐसे में पर्सनल लोन लेना ज्यादा समझदारी होगी। इसकी EMI तय रहती है और ब्याज भी क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होता है।

₹1 लाख पर कितना पड़ेगा फर्क?

मान लीजिए आपको ₹1 लाख की जरूरत है। आप यह रकम क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं और सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते रहते हैं। ऐसे में एक साल में ब्याज और दूसरे चार्ज मिलाकर आपको ₹30,000-₹40,000 या उससे भी ज्यादा अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

वहीं, अगर आप यही ₹1 लाख 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, तो आपकी EMI करीब ₹3,320 महीने बनेगी। तीन साल में कुल भुगतान करीब ₹1.20 लाख होगा। यानी कुल ब्याज करीब ₹19,500-₹20,000 पड़ेगा।

सबसे अच्छा विकल्प क्या है?

इमरजेंसी में सबसे बड़ा फैसला पैसा जुटाना नहीं, सही तरीके से पैसा जुटाना होता है। अगर कुछ हफ्तों में पैसा लौटा सकते हैं, तो क्रेडिट कार्ड ठीक है। लेकिन अगर कर्ज लंबे समय तक चलेगा, तो पर्सनल लोन आपकी जेब पर कम बोझ डालेगा।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा विकल्प इमरजेंसी फंड है। अगर आपके पास 6 महीने के खर्च जितनी बचत अलग रखी है, तो ऐसी स्थिति में आपको न महंगा ब्याज देना पड़ेगा और न ही कर्ज लेना पड़ेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ITR Filing 2026: 1.7 करोड़ लोगों ने भरा इनकम टैक्स रिटर्न, 31 जुलाई की डेडलाइन चूके तो क्या होगा?

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की रफ्तार तेज हो गई है। आयकर विभाग के मुताबिक, असेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26 की आय) के लिए अब तक 1.7 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना ITR दाखिल कर चुके हैं। सिर्फ शुक्रवार को ही 10 लाख से ज्यादा रिटर्न फाइल किए गए।

विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों से समय रहते रिटर्न भरने की अपील भी की है, ताकि आखिरी समय की परेशानी से बचा जा सके।

ITR डेडलाइन 31 जुलाई है

वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए ITR-1 (सहज) और ITR-2 दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। अगर आपका अकाउंट ऑडिट के दायरे में नहीं आता है, तो आपको इसी तारीख तक रिटर्न फाइल करना होगा।

ITR-1 कौन भर सकता है?

ITR-1 यानी सहज फॉर्म ज्यादातर इंडिविजुअल के लिए होता है। इनमें ये लोग शामिल हैं…

  • सालाना कमाई ₹50 लाख तक हो।
  • कमाई आय का जरिया सैलरी हो।
  • एक मकान से आय हो।
  • कृषि आय ₹5,000 तक हो।

ITR-2 कौन भरता है?

ITR-2 उन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है, लेकिन उन्हें कैपिटल गेन जैसी आय होती है।

31 जुलाई की डेडलाइन चूकने पर क्या होगा?

अगर आप तय समय तक ITR दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

1. लेट फीस : आयकर कानून की धारा 234F के तहत देरी से ITR भरने पर ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख तक है, तो यह फीस ₹1,000 तक सीमित रहती है।

2. ब्याज भी : अगर आपके ऊपर टैक्स बकाया है, तो धारा 234A के तहत हर महीने या उसके हिस्से के लिए 1% ब्याज देना पड़ सकता है।

3. रिफंड में देरी : अगर आपको इनकम टैक्स रिफंड मिलना है, तो देर से ITR भरने पर उसका प्रोसेस भी देर से होगा। यानी आपका पैसा मिलने में ज्यादा समय लग सकता है।

4. टैक्स बेनिफिट नहीं : देर से रिटर्न दाखिल करने पर कुछ मामलों में नुकसान (Loss) को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने जैसी टैक्स सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।

आखिरी समय का इंतजार न करें

हर साल डेडलाइन के करीब पोर्टल पर ट्रैफिक काफी बढ़ जाता है। ऐसे में तकनीकी दिक्कतें भी आ सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि जरूरी दस्तावेज जुटाकर समय रहते ITR दाखिल कर दें। इससे लेट फीस, ब्याज और दूसरी परेशानियों से बचा जा सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।