Commodity Cornor: क्रूड में नरमी से महंगाई की चिंता हुई कम , यील्ड में गिरावट से सोने को मिला सहारा

सोने की कीमतों में स्थिरता रही। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने सोने को और सहारा दिया। शाम के सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) लगभग 4,165 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से 0.09 प्रतिशत बढ़कर 4,185 डॉलर प्रति औंस (12:40 GMT) के करीब पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप, घरेलू बाजार में MCX पर हाजिर सोना शाम के सत्र में 1,45,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम (18:16 IST) पर आ गया।

LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “सोने में काफी हद तक स्थिरता रही। 4,190 डॉलर के ऊपरी स्तरों से प्रॉफिट बुकिंग के बाद, यह कॉमेक्स (Comex) सोने के रुझान का अनुसरण कर रहा है। 4,200 डॉलर का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस (बाधा) बना हुआ है, जबकि डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से सोने में तेजी सीमित हो रही है।”

डॉलर इंडेक्स 0.09 फीसदी बढ़कर 101.93 पर कारोबार कर रहा था, जबकि फ्यूचर्स ट्रेड में ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 108.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

PL कैपिटल के कमोडिटी प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा, “अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और यील्ड कम रहती है, तो सोने और चांदी में रिकवरी जारी रह सकती है। हालांकि, अगर तेल की कीमतों में फिर से उछाल आता है या फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की ओर से कोई सख्त रुख (hawkish signal) देखने को मिलता है, तो सोने की ये बढ़त खतरे में पड़ सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। “अब सबकी नजरें फेड के बयान के लहजे और महंगाई के आंकड़ों के अगले दौर पर टिकी हैं।” ओम्निसिएंस कैपिटल के CEO विकास गुप्ता का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हैं, लेकिन साथ ही कुछ बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो सोना बेच रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें नियंत्रित बनी हुई हैं।

गुप्ता ने कहा, “भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, फेड (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।”

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: सोना ₹1020 सस्ता हुआ, ₹1.50 लाख से नीचे आया भाव; चांदी भी ₹2887 टूटी

Gold Silver Prices Today: सोने की कीमतों में सोमवार को करीब 1% की गिरावट आई। मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने की तेजी पर दबाव बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,020 गिरकर ₹1,49,370 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

पिछले हफ्ते छुट्टियों के कारण कम कारोबार वाले सत्र में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई थी। सोना ₹2,887 यानी करीब 2% टूटकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर रहा। शुक्रवार को महात्मा गांधी जयंती के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार बंद था।

मजबूत डॉलर से सोने पर दबाव

Choice Broking की कमोडिटी टेक्निकल एनालिस्ट कावेरी मोरे ने कहा कि सोने की कीमतें फिलहाल एक दायरे में बनी हुई हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण सोने में तेजी की रफ्तार सीमित है। डॉलर इंडेक्स 102.37 के आसपास 18 महीने के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इससे सोने पर दबाव बढ़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क के कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना मामूली बढ़त के साथ 4,163.50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है। शुक्रवार को यह थोड़े समय के लिए 4,200 डॉलर के पार चला गया था।

अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद घटकर 20% से नीचे आ गई है। हालांकि, दिसंबर में दर बढ़ने की संभावना अभी करीब 70% मानी जा रही है।

पिछले हफ्ते सोना और चांदी दोनों टूटे

पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 158.9 डॉलर यानी 3.7% गिरकर 4,162.3 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी 4.38 डॉलर यानी 6.7% गिरकर 60.41 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची रहने के कारण सोने की रिकवरी पर दबाव बना हुआ है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 5.2% पर बनी हुई है। लगातार महंगाई, राजकोषीय चिंताएं और सरकार की ज्यादा उधारी इसके पीछे प्रमुख कारण हैं।

आगे किन आंकड़ों पर नजर?

एनालिस्ट के मुताबिक, इस हफ्ते प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सर्विसेज PMI आंकड़े, अमेरिका के व्यापार आंकड़े और महीने के मध्य में आने वाले कंज्यूमर सेंटिमेंट के आंकड़े सोने की दिशा के लिए अहम होंगे।

इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।

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El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

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Commodity Corner: क्रूड में नरमी, सोने-चांदी में दबाव, आज किन कमोडिटी कहां होगी कमाई

Commodity Corner: 24 सितंबर को कमोडिटी मार्केट में मिला-जुला कारोबार हुआ। पिछले सेशन में 4% की तेजी के बाद तेल की कीमतों में नरमी आई, जबकि एनर्जी की ऊंची कीमतों और मज़बूत US इकोनॉमिक डेटा के बीच सोना दबाव में रहा।

गुरुवार को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। पिछले सेशन में इनमें 4% की बढ़ोतरी हुई थी। ईरान ने कहा कि वह US-ईरान तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत को तैयार है, हालांकि दोनों देशों के बीच इसके तरीकों को लेकर अभी भी काफी मतभेद हैं।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 94 सेंट या 0.9% गिरकर $102.13 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर्स 59 सेंट या 0.7% गिरकर $91.56 पर आ गया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के कड़े बयानों से मध्य पूर्व में महीनों के टकराव के बाद भी दोनों देशों के बीच मौजूद बड़े मतभेदों का पता चलता है। संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए, पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और उन्होंने कई ऐसी शर्तें बताईं जिन्हें ठोस बातचीत फिर से शुरू करने से पहले पूरा करना ज़रूरी होगा।

कीमती धातुओं में, सोने में गिरावट जारी रही। एनर्जी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी और उम्मीद से बेहतर US इकोनॉमिक डेटा ने इस बात की संभावना बढ़ा दी है कि महंगाई से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

एक दिन पहले 1.7% की गिरावट के बाद बुलियन $4,290 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।

पिछले सेशन में 4% की गिरावट के बाद चांदी 0.2% गिरकर $64.31 प्रति औंस पर आ गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी थोड़ी गिरावट आई।

गुरुवार को डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर पर बना रहा। मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग डेटा ने महंगाई की आशंकाओं और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को फिर से हवा दी, जबकि कमज़ोर ट्रेजरी नीलामी से यील्ड में बढ़ोतरी हुई, जिससे US करेंसी को और मज़बूती मिली।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Commodity Market: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल! ब्रेंट $95 के पार, जानिए सोने-चांदी का हाल

Commodity Market Updates: आज शुक्रवार, 4 सितंबर को वैश्विक कमोडिटी बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से भड़की तबाही की चिंगारी के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी एंप्लॉयमेंट डेटा से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती व स्थिरता बनी हुई है।

कच्चे तेल में आई यह तेजी मध्य जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर इशारा कर रही है। आइए आपको बताते हैं कमोडिटी बाजार का पूरा अपडेट।

कच्चे तेल की कीमतों में उबाल: ब्रेंट $95 और WTI $91 के पार

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 15 सेंट (0.2%) चढ़कर $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वीकली आधार पर इसमें 7.1% की भारी बढ़त देखी जा रही है। वही अमेरिकी WTI क्रूड 26 सेंट (0.3%) की बढ़त के साथ $91.56 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हफ्ते भर में WTI में 9.8% का उछाल दर्ज किया गया है। यह 20 जुलाई के बाद कच्चे तेल में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

सोने-चांदी का हाल: US Fed के नरम रुख से मिला सहारा

कच्चे तेल की आग के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और यह भी मामूली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,477.10 प्रति औंस के मजबूत स्तर पर टिका हुआ है। दिसंबर का अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,522.60 प्रति औंस पर रहा। सिल्वर (चांदी) 0.1% बढ़कर $66.90 प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में मामूली सुस्ती रही।

निवेशक अब आज शाम जारी होने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर अगला कदम उठाने का संकेत मिलेगा।

गुरुवार को गोल्ड में क्यों आई थी 2% की तेजी?

अमेरिकी फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा था कि अगर महंगाई दर स्थिर रहती है तो वे ब्याज दरें न बढ़ाने का समर्थन करेंगे। उनके इस बयान के बाद ट्रेडर्स ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदें कम कर दीं, जिससे गुरुवार को सोने में 2% का बड़ा उछाल आया था।

डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी

दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05% घटकर 99.54 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कोटेड कमोडिटी (सोना-तेल) खरीदना तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलता है।

यूरो (Euro): $1.1589 पर स्थिर।

जापानी येन (Yen): डॉलर के मुकाबले 0.07% मजबूत होकर 158.59 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

Gold Outlook: क्या सोना और चांदी खरीदने का यह सही समय है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold Outlook: सोने की कीमत में $4,600 प्रति औंस से ऊपर की तेजी ने निवेशकों के मन में फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है। क्या हालिया गिरावट (करेक्शन) के बाद सोना और चांदी में दोबारा निवेश करने का यह सही समय है? ऐसा करने के पक्ष में राय मजबूत हो रही है। वैलम कैपिटल की अगस्त मैक्रो ग्रिड चार्टबुक के अनुसार, अगस्त में सोने से 9% रिटर्न मिला, जो व्यापक इक्विटी मार्केट के रिटर्न का लगभग 5 गुना है, जबकि गोल्ड माइनर्स (सोना निकालने वाली कंपनियों) को 21% का फ़ायदा हुआ। वैलम कैपिटल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को सोना और चांदी “फिर से खरीदने” (reload) का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि कीमतों में आई गिरावट से कीमती धातुओं के प्रति सकारात्मक नजरिए (थीसिस) पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इस हालिया तेजी में US ट्रेज़री यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से मदद मिली है। ऐसा तब हुआ जब US ट्रेज़री ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की ज़्यादा खरीद की घोषणा की। कम यील्ड से सोना रखने की ‘अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है, जबकि राजकोषीय चिंताओं के कारण करेंसी की वैल्यू घटने (करेंसी-डिबेसमेंट) की बहस फिर से शुरू हो गई है।

वैलम कैपिटल का नजरिया सकारात्मक क्यों है?

फर्म ने अपनी हालिया रिपोर्ट में सेंट्रल बैंकों की मांग में भारी बढ़ोतरी की ओर इशारा किया है। सेंट्रल बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 288.9 टन सोना खरीदा, जो तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 411% ज़्यादा है। यह तब हुआ जब वेस्टर्न ETF से 44.8 टन सोने की निकासी हुई और ज्वेलरी की मांग में 17% की गिरावट आई।

वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सप्लाई में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। वैलम के अनुसार, माइन प्रोडक्शन (खदानों से उत्पादन) में सिर्फ़ 2% की बढ़ोतरी हुई, रीसाइकल किए गए सोने में 6% की गिरावट आई और कुल सप्लाई स्थिर रही।

फर्म का यह भी तर्क है कि जैसे-जैसे ग्लोबल डेट (वैश्विक कर्ज) बढ़ रहा है, करेंसी की वैल्यू घटने के खिलाफ बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जा रही है। उनका अनुमान है कि जमीन के ऊपर मौजूद सोने की कुल कीमत लगभग $31 ट्रिलियन है, जबकि प्रमुख सेंट्रल बैंकों की मनी सप्लाई $102 ट्रिलियन और ग्लोबल डेट लगभग $350 ट्रिलियन है।

फर्म का कहना है कि चांदी भी इस सकारात्मक नजरिए को और मजबूत करती है। 2021 से 2026 के बीच, चांदी में 263% और सोने में 164% की की बढ़ोतरी हुई। फिर भी, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो लगभग 69 गुना बना हुआ है, जो इसके लंबे समय के औसत (मीडियन) 45-50 गुना से ज़्यादा है।

सोने-चांदी के तेजी के पीछे आंख बंद कर ना करें भरोसा

लेकिन हर कोई इस स्थिति को एक ही नजरिए से नहीं देखता। YES सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ रिसर्च के स्ट्रैटेजिस्ट हितेश जैन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा है कि वे इस नए कदम को अलग नजरिए से देखते हैं। वे इसे सोने के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव के बजाय एक टैक्टिकल राहत मानते हैं।

US ट्रेजरी के लॉन्ग-एंड बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम दोगुना करके $4 बिलियन करने के फैसले से लॉन्ग-टर्म यील्ड कम हुई है, जिससे सोने को थोड़े समय के लिए बढ़ावा मिला है। लेकिन जैन का तर्क है कि इस दखल से US की मूल फिस्कल समस्या हल नहीं होती क्योंकि बायबैक की गई सिक्योरिटीज की जगह नए इश्यू ले लेंगे।

उनकी बड़ी चिंता ग्लोबल कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) साइकिल है। सरकारें और कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, एनर्जी और रीशोरिंग के लिए कैपिटल जुटाने की होड़ में हैं, जिससे कैपिटल की लागत स्ट्रक्चरल रूप से ज़्यादा बनी रह सकती है। जैन ने कहा, “अगले तीन से पांच वर्षों में , हमें उम्मीद है कि सोना इक्विटी और इंडस्ट्रियल मेटल्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करेगा।”

सतर्क हैं भारतीय निवेशक

घरेलू निवेश का ट्रेंड भी बताता है कि निवेशक आंख बंद करके सोने की तेजी के पीछे नहीं भाग रहे हैं। वैलम (Vallum) के अनुसार, जुलाई में प्रेशियस-मेटल फंड में निवेश घटकर ₹4,084 करोड़ रह गया, जो जून में ₹8,680 करोड़ था। वहीं, जून में ₹65,530 करोड़ की निकासी के बाद जुलाई में मनी-मार्केट फंड में ₹1.40 लाख करोड़ का निवेश हुआ। जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के बीच, भारतीय रिटेल निवेशकों ने गोल्ड फंड और ETF में लगभग ₹93,000 करोड़ का निवेश किया, जिसमें अकेले जनवरी में रिकॉर्ड ₹33,837 करोड़ का निवेश हुआ।

जो निवेशक फिर से निवेश करना चाहते हैं। उनके लिए एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि रियल यील्ड, डॉलर, फिस्कल पॉलिसी और सेंट्रल बैंक की खरीदारी मुख्य संकेतक बने रहेंगे।

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Silver Price Today: चांदी हुई सस्ती, खरीदारी से पहले चेक करें 10 शहरों के ताजा भाव

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Gold- Silver Price Today: सोना ₹1.63 लाख के नीचे, चांदी ₹2600 हुई सस्ती, क्या यह है खरीदारी का सही समय

Gold- Silver Price Today: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मंगलवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 500 रुपये गिरकर 1,62,933 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। 595 लॉट का कारोबार हुआ। जानकारों का मानना ​​है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है।

वहीं फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स 903 रुपये या 0.37 प्रतिशत गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,702 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 4,641.42 डॉलर प्रति औंस हो गए।न्यूयॉर्क में चांदी 1.04 प्रतिशत गिरकर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

गिरावट की क्या है वजह 

डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।

बाजार की नजरें बुधवार को आने वाले US पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर हैं, जो US फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है। साथ ही, शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में चेयरमैन केविन वॉर्श के पहले भाषण पर भी नजरें टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों की चाल के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

क्या है निवेश का सही समय

VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि अगस्त में चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। इसकी वजहें हैं – ब्याज दरों को लेकर कम होती उम्मीदें, कमज़ोर USD, कीमती धातुओं की फिर से बढ़ती मांग और सरकारी कर्ज़ व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं। चांदी को मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे टेक्नोलॉजी सेक्टर से) का भी फ़ायदा मिल रहा है, और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी इसे और सहारा दे रही हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए इसे बनाए रखना एक अच्छा फ़ैसला हो सकता है, खासकर अगर यह उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो का हिस्सा है। लेकिन नए निवेशकों के लिए, महीने भर में हुई लगभग 20% की तेज़ी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। इतनी ज़बरदस्त तेज़ी के बाद एक ही बार में खरीदने के बजाय, डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है।

निवेशकों को तभी बेचने के बारे में सोचना चाहिए जब उनके निवेश का आधार (investment thesis) बदल गया हो या पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा हो गया हो।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: विदेश में 3 महीने के हाई के करीब पहुंचा सोना, जैक्सन होल से पहले फेड के कदम पर बाजार की नजर

Gold Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बॉन्ड मार्केट में US ट्रेजरी के आने वाले कदमों का आकलन कर रहे हैं। यह आकलन एक अप्रत्याशित दखल के बाद हो रहा है जिसने फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।

COMEX गोल्ड में 1% यानी 46.90 की बड़ी बढ़त हुई और यह पिछले क्लोज 4,710.10 से बढ़कर 4,744.70 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, COMEX सिल्वर 1.26% या 0.861 बढ़कर 69.455 पर पहुंच गई, जबकि पिछला क्लोज 68.96 था।

ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-टर्म सरकारी कर्ज की बायबैक (वापसी खरीद) बढ़ाने के बाद लगातार चार सेशन में 7% से अधिक की बढ़त के साथ बुलियन की कीमत $4,680 प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।

इस अप्रत्याशित कदम ने कर्ज लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और डॉलर पर दबाव डाला है। जिससे सोना (जिसकी कीमत डॉलर में तय होती है) कई खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है।

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की अपनी तैयारी का संकेत दिया है, हालांकि सोमवार को उन्होंने कोई अतिरिक्त संकेत नहीं दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि केविन वॉर्श शुक्रवार को सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल बैंक के चेयरमैन के तौर पर लगातार बनी हुई महंगाई पर फेडरल रिजर्व को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे।

US कर्ज की लागत को मैनेज करने के हालिया कदमों ने महंगाई और डॉलर की कमजोरी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे उस ‘डीबेसमेंट नैरेटिव’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट की धारणा) की वापसी का संकेत मिलता है, जिसने 2025 में सोने की जबरदस्त तेजी में योगदान दिया था।

सोने की इस उल्लेखनीय रिकवरी ने धातु को महत्वपूर्ण 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसे अक्सर तेजी का संकेत (बुलिश टेक्निकल इंडिकेटर) माना जाता है।

बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) से इस धातु की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) वाली खासियत को भी चुनौती मिल रही है। US ने ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बातचीत विफल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कनाडा के साथ व्यापारिक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

 

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MCX पर सोना ₹1.61 लाख के पार, चांदी ₹2.50 लाख के करीब ,जानें आगे तेजी रहेगी जारी या फिर होगा प्रॉफिट-बुकिंग का दौर शुरू

Gold Silver Price: शुक्रवार को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों में तेज़ उछाल थी, जो कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर इनकी लगातार मांग के कारण हुआ।

एक्सचेंज की वेबसाइट पर मौजूद ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोपहर 4:55 बजे सोना फ्यूचर्स ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। ये कीमतें क्रमशः 5 अक्टूबर के सोने और 4 सितंबर के चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

यह तेज़ी तब आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे यह धातु लगातार तीसरे हफ़्ते बढ़त की ओर अग्रसर है। इस साल जनवरी में, भारत में सोने की कीमत ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि चांदी की कीमत ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम तक उछल गई थी।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों ने बुलियन की कीमतों को सहारा दिया है। चॉइस ब्रोकिंग की पिंकी यादव के अनुसार, COMEX पर बढ़त के अनुरूप MCX पर कीमतें ऊंचे स्तर पर खुलीं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज ने अस्थिरता को बढ़ावा दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों (जो ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी हैं) ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जबकि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया है।

कमज़ोर डॉलर से बुलियन को सहारा

अमेरिकी डॉलर यहां एक अहम कारक रहा है। डॉलर इंडेक्स 98.8 के आसपास बना हुआ था और साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा था।चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के कमज़ोर होने से अन्य करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए ये सस्ती हो जाती हैं, जिससे मांग बढ़ सकती है और कीमतें ऊपर जा सकती हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, गोल्डसिल्वर सेंट्रल के ब्रायन लैन ने कहा कि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को व्यापक रूप से सहारा दिया है, साथ ही यील्ड में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है।

ट्रेजरी बायबैक से अनिश्चितता

अमेरिकी ट्रेजरी डेट मैनेजमेंट (कर्ज प्रबंधन) एक और कारक है जिस पर बाज़ार की पैनी नज़र है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि सरकार ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज (वापसी खरीद) को और बढ़ा सकती है। उन्होंने पहले ही अगले तिमाही में लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 बिलियन तक दोगुना करने की योजना का संकेत दिया था।

इस कदम से बाजार में उतार-चढ़ाव आया है और यील्ड, दरों और कर्ज की व्यापक स्थिति पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।

OCBC के क्रिस्टोफर वोंग ने रॉयटर्स को बताया कि अब ध्यान इस बात पर होगा कि क्या यह कदम टिकाऊ है या नहीं। अमेरिकी डेटा और 27-29 अगस्त को होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम डॉलर और यील्ड की दिशा तय कर सकते हैं।

फेड की दरे अहम

सोने के आउटलुक के लिए फेड की दरों की उम्मीदें अहम बनी हुई हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में इस बात की 67% संभावना है कि फेड अगले महीने दरों को स्थिर रखेगा, जबकि दरों में बढ़ोतरी की संभावना 33% है।

चूंकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ऊंची दरों के कारण ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में इसकी अपील आमतौर पर कम हो जाती है। लेकिन पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, साथ ही यील्ड और डॉलर में बदलाव, सोने की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) अपील को बढ़ा सकते हैं।

जियोपॉलिटिकल टेंशन से ‘सेफ-हेवन’ की मांग में बढ़त

भू-राजनीतिक जोखिम भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाएगा। तेल की आपूर्ति पर इसके असर की चिंता ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे महंगाई की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

ऐसी अनिश्चितता निवेशकों को सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर ले जाती है। यादव ने कहा कि मजबूत निवेश मांग और चीनी केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी के कारण पूंजी सुरक्षित धातुओं की ओर बढ़ी है।

केंद्रीय बैंक की खरीदारी अभी भी एक अहम आधार

केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग सोने के लिए एक बड़ा संरचनात्मक आधार बनी हुई है, क्योंकि देश अपने रिजर्व में विविधता ला रहे हैं। यादव ने जुलाई में ग्लोबल गोल्ड ETF में आए निवेश और केंद्रीय बैंकों की जारी खरीदारी की ओर भी इशारा किया, जो ज्वैलरी और रिटेल निवेश के अलावा मांग बढ़ाने वाले अन्य कारक हैं।

चांदी की कीमतों में भी तेजी

चांदी भी इस तेजी में शामिल हो गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतें 1.8% बढ़कर लगभग $69.31 प्रति औंस हो गई हैं। प्लैटिनम 2.6% बढ़कर $1,875.75 और पैलेडियम 1.7% बढ़कर $1,356.59 हो गया।

चांदी पर भी सोने की तरह ही कई मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों का असर पड़ता है – जिसमें डॉलर की कमजोरी और दरों को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं – लेकिन इसकी औद्योगिक मांग के कारण इसकी कीमतों में स्वतंत्र रूप से भी बदलाव हो सकता है। हाल की तेज़ी से MCX पर चांदी की कीमत ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है, जिससे यह ₹2.50 लाख के स्तर के बहुत करीब आ गई है।

सोने और चांदी के लिए आगे क्या होगा?

निकट भविष्य में इनकी चाल डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिका से आने वाले डेटा और फेड के संकेतों पर निर्भर करेगी, जिसमें जैक्सन होल पर खास नज़र रहेगी।

भारतीय निवेशकों के लिए रुपया-डॉलर का रेट भी मायने रखता है। अगर रुपया कमज़ोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाली चीज़ें देश में महंगी हो जाती हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें स्थिर रहें। इस तेज़ी की वजह से भारत में फिजिकल डिमांड पर कुछ असर पड़ा है, क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण रिटेल खरीदार पीछे हट रहे हैं, जबकि चीन में डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई है।

MCX पर सोना ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर है। अब सवाल यह है कि क्या ये ग्लोबल हालात तेज़ी को बनाए रख पाएंगे या फिर इससे मुनाफावसूली (प्रॉफिट-बुकिंग) का नया दौर शुरू हो जाएगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Outlook: सोने से भी ज्यादा रिटर्न देने वाली है चांदी? जानिए एक्सपर्ट जोनाथन बैरट की क्या है राय

Gold Silver Price Outlook : कीमती धातुओं के बाजार में इंवेस्टमेंट को लेकर प्लान कर रहे निवेशकों के लिए एक जरूरी आउटलुक सामने आया है। कमोडिटी बाजार के एक्सपर्ट और ईटीओ मार्केट्स के CIO जोनाथन बैरट का मानना है कि आने वाले समय में चांदी का प्रदर्शन सोने से भी बेहतर रह सकता है। बैरट का अनुमान है कि चांदी आने वाले समय में 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छू सकती है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक जोनाथन बैरट ने सोने और तांबे को लेकर भी एक बेहद मजबूत और सकारात्मक आउटलुक पेश किया है। उनका मानना है कि अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, चीन से बढ़ती मांग और ग्रीन टेक्नोलॉजी के तेजी से होते विस्तार के दम पर कमोडिटी बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है।

100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है चांदी: एक्सपर्ट

जोनाथन बैरट का साफ कहना है कि चांदी कीमती धातुओं में सबसे बेहतर रिटर्न देने वाला मेटल साबित हो सकती है। उन्होंने सीएनबीसी टीवी 18 से बात करते हुए कहा कि,’मुझे लगता है कि चांदी ही निवेश के लिए सही जगह है।’उनके मुताबिक चांदी सबसे पहले 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर को टारगेट करेगी। अगर अमेरिकी ट्रेजरी की लिक्विडिटी से जुड़ी पॉलिसी का सपोर्ट मिला तो चांदी की कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।

बैरट ने बताया कि चीन द्वारा सिल्वर ओर के आयात में साल-दर-साल आधार पर 62% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सौर पैनल जैसी ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन का दबदबा बढ़ रहा है और इस विस्तार के चलते चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बनी रहेगी।

सोना भी छू सकता है 5000 डॉलर प्रति औंस का स्तर

सोने पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए बैरट ने कहा कि वे गोल्ड को लेकर भी काफी बुलिश हैं। उनका अनुमान है कि अगर मौजूदा नीतियां जारी रहती हैं तो सोना प्रति औंस 5000 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकता है। सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे उन्होंने कई मैक्रो-इकोनॉमिक वजहें गिनाई हैं। उनके मुताबिक डॉलर इंडेक्स अभी 101 के आसपास है जिसके गिरकर 90 से 95 के स्तर तक आने की संभावना है। डॉलर में इस गिरावट से कीमती धातुओं को सीधा सहारा मिलेगा।

इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व से अलग अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और लिक्विडिटी बनाए रखने के उपायों का इस्तेमाल कर रही है। सीधे ब्याज दरों में बदलाव किए बिना लिक्विडिटी बढ़ाने की यह नीति डॉलर पर दबाव बनाए रखेगी, जो सोने-चांदी के लिए फायदेमंद है।

उनके मुताबिक अमेरिका पर लगातार बढ़ रहा कर्ज निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने की ओर रुख करने पर मजबूर कर रहा है। निवेशक सोने और चांदी को वैल्यू के बेहतर एसेट के रूप में देखना जारी रखेंगे।

ETF की वापसी और शेयर बाजार से बुलियन में लौटेगा पैसा

जोनाथन बैरट का मानना है कि आने वाले दिनों में एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की ओर से कीमती धातुओं में फिर से खरीदारी देखने को मिलेगी। जैसे-जैसे निवेशकों को अमेरिकी ट्रेजरी की लिक्विडिटी नीतियों के जारी रहने का एहसास होगा इक्विटी बाजार से कुछ पूंजी वापस सोने और चांदी में शिफ्ट हो सकती है। इसके साथ ही अलग अलग देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही खरीदारी भी सोने-चांदी की कीमतों को सहारा देगी।

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तांबे पर भी बुलिश: स्ट्रक्चरल बुल मार्केट में बेस मेटल

सिर्फ कीमती धातुएं ही नहीं बल्कि बेस मेटल्स में जोनाथन बैरट तांबे पर भी पूरी तरह सकारात्मक हैं। वे कॉपर को एक स्ट्रक्चरल बुल मार्केट के रूप में देखते हैं। इसे चीन से बढ़ती मांग और ग्रीन इकोनॉमी की ओर दुनिया के बदलाव से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। हाल के दिनों में अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कॉपर की कीमतों में आई कुछ रुकावट या कंसोलिडेशन पर उन्होंने कहा कि यह हेल्दी पॉज है। माइंस से जुड़ी आपूर्ति की समस्याओं और स्ट्रक्चरल डेफिसिट यानी सप्लाई की कमी की वजह से कॉपर का लॉन्ग-टर्म तेजी का रुझान पूरी तरह से बरकरार है।

 

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