Gold Price Today: दो वजहों से और टूटा गोल्ड, 10 शहरों में अब इस भाव पर बिक रहा 24 से 18 कैरट सोना

Gold Rate Today in India: अमेरिका फेड की 29 जुलाई को आने वाली मॉनीटरी पॉलिसी को लेकर निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती से गोल्ड पर दबाव पड़ा तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी ने चांदी पर और दबाव बना दिया। गोल्ड की बात करें तो एक दिन के उछाल के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसकी चमक फीकी पड़ी है। इन दो दिनों में राजधानी दिल्ली में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹1700 और 22 कैरट वाला ₹1560 सस्ता हुआ है। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में 10 ग्राम का 24 कैरट और 22 कैरट वाला गोल्ड फिलहाल ₹10 नीचे आया है। अब चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक फीकी हुई है। लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन आज इसके भाव नीचे आए हैं। इन दो दिनो में एक किलो चांदी ₹5100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
मुंबई ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
कोलकाता ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
चेन्नई ं ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
बेंगलुरू ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
हैदराबाद ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
लखनऊ ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
पटना ₹1,44,210 ₹1,32,190 ₹1,08,170
जयपुर ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
अहमदाबाद  ₹1,44,210 ₹1,32,190 ₹1,08,170

दो दिनों की स्थिरता के बाद दूसरे दिन फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो दो दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव कम हुए हैं। इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹5100 नीचे आई है। इससे पहले दो दिनों की स्थिरता से पहले एक किलो चांदी 25 जून को ₹5 हजार महंगी हुई थी और 24 जुलाई को ₹5 हजार सस्ती हुई । अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी यह इसी भाव पर बिक रही है।

अब किस पर रहेगी नजर?

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक अब मार्केट की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर रहेगी। इसके अलावा यूरोजोन, जापान और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम रहेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका के जीडीपी के आंकड़े आएंगे। कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का डेटा भी जारी होगा। साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े भी अहम रहेंगे। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों पर होने वाले फैसले भी सोने-चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।

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कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

IT Stocks: दो दिन में आईटी इंडेक्स 6% चढ़ा, क्या TCS, इंफोसिस जैसी कंपनियों का बुरा दौर खत्म? जानिए एक्सपर्ट्स से

IT Stocks: मंगलवार, 28 जुलाई को एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली के बीच निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। ग्लोबल मार्केट में AI पर होने वाले भारी निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की टेक कंपनियों पर दिखा। हालांकि, भारतीय IT कंपनियां इस दबाव से काफी हद तक बची रहीं, क्योंकि यहां AI पर फोकस करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 6% चढ़ चुका है। इसकी एक बड़ी वजह Jefferies की रिपोर्ट रही, जिसमें ब्रोकरेज ने सेक्टर की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी। यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

भारतीय IT सेक्टर कैसे बचा?

Nexedge Capital के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर गौरव कुलश्रेष्ठ का कहना है कि दुनियाभर में AI को लेकर जो उत्साह ठंडा पड़ा है, उससे भारतीय IT सेक्टर को संभलने का मौका मिला है। हालांकि, उनका मानना है कि बड़ी IT कंपनियों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर खर्च नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर में लंबी तेजी आना मुश्किल है।

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है। इन्हें AI डेटा सेंटर या चिप बनाने वाली कंपनियों की तरह अरबों डॉलर का पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि AI निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर कम पड़ा।

उनका कहना है कि पिछले कई महीनों की गिरावट के बाद IT शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एशियाई हार्डवेयर कंपनियों से पैसा निकालकर भारतीय IT शेयरों में लगाया।

निफ्टी IT इंडेक्स का टेक्निकल आउटलुक

मयंक जैन के मुताबिक, निफ्टी IT इंडेक्स हालिया कारोबारी सत्र में 3.5% से ज्यादा चढ़कर 30,500 के करीब बंद हुआ। कई महीनों की गिरावट के बाद इसमें मजबूत रिकवरी देखने को मिली। इस तेजी के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग हुई।

टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA के ऊपर वापसी कर ली है। 28,600-28,700 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इंडेक्स अभी भी 200-डे EMA यानी करीब 31,800 के नीचे कारोबार कर रहा है। मयंक जैन का कहना है कि 31,800-32,000 का दायरा सबसे बड़ा रेजिस्टेंस है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर ही लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि होगी। फिलहाल रिकवरी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

TCS

जैन के मुताबिक, TCS का शेयर फिलहाल अपने 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, शेयर अभी भी 200 DMA से नीचे है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत डिविडेंड और बेहतर वैल्यूएशन इसे आकर्षक बनाते हैं। वहीं, ट्रेडर्स को 200 DMA के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।

Infosys

मयंक जैन का कहना है कि Infosys का शेयर 20 DMA के ऊपर लौट आया है, लेकिन अभी भी 50 DMA और 200 DMA से नीचे है। कंपनी की मजबूत कैश फ्लो, 4.3% डिविडेंड यील्ड और आकर्षक वैल्यूएशन इसे डिफेंसिव स्टॉक बनाते हैं। हालांकि, शेयर में बड़ी तेजी तभी आ सकती है, जब कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस और बिजनेस आउटलुक बेहतर हो।

HCL Technologies

जैन के हिसाब से बड़े IT शेयरों में HCL Technologies का टेक्निकल सेटअप सबसे मजबूत दिख रहा है। शेयर 20 DMA और 50 DMA के ऊपर बना हुआ है और अब 200 DMA के पास अहम रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अगर शेयर अच्छे वॉल्यूम के साथ इस स्तर को पार कर लेता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।

Tech Mahindra

मयंक जैन के मुताबिक, Tech Mahindra भी 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शेयर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 1,700 रुपये के आसपास मौजूद 200 DMA अभी बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि इस स्तर तक आने वाली छोटी गिरावटें, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकती हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

मयंक जैन का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय IT सेक्टर की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

India’s Toy Industry: भारत के खिलौनों की दुनिया में बढ़ी धाक, 7 साल में 89% बढ़ा एक्सपोर्ट, जानें ये सक्सेस स्टोरी

Toy Industry updates: वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौनों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले सात वर्षों में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के बल पर भारत के खिलौना उद्योग का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से खिलौनों के निर्यात में 89.1 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी तरफ विदेशी खिलौनों पर निर्भरता कम हुई है और आयात में 37.5 फीसदी की भारी कमी देखने को मिली है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब के जरिए इस सफलता का ब्योरा साझा किया। भारत अब खिलौने आयात करने वाले देश से उभरकर एक शुद्ध निर्यातक बन चुका है और अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स तथा जर्मनी जैसे विकसित देशों को भारतीय खिलौने निर्यात किए जा रहे हैं।

सात वर्षों में बदला व्यापार का संतुलन

ट्रेडस्टैट आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में भारत दुनिया भर से 371.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर के खिलौने आयात करता था। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 232.3 मिलियन डॉलर पर आ गया। वर्ष 2018-19 में भारत का खिलौना निर्यात 203.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 2025-26 में 89.1 फीसदी बढ़कर 384.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह बदलाव इस बात को दिखा रहा है कि देश में टॉय मैन्युफैक्चरिंग की क्षमताओं में तेजी से इजाफा हुआ है।

खिलौनों की गुणवत्ता और सुरक्षा में बड़ा सुधार

वर्ष 2018-19 में भारत आने वाले आयातित खिलौनों का एक बड़ा हिस्सा घटिया, असुरक्षित और नकली होता था। वर्ष 2019 में आयोजित एक मिस्ट्री शॉपिंग सर्वे के दौरान पाया गया था कि भारतीय बाजार में बिकने वाले सिर्फ 33 फीसदी खिलौने ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते थे। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए। इसी का नतीजा है कि साल 2025 में बीआईएस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि अब देश में उपलब्ध 95 प्रतिशत खिलौने निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

टॉय बिज़ इंटरनेशनल 2026 में दिखा भारतीय ब्रांड्स का जलवा

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा 4 से 7 जुलाई 2026 के दौरान नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 17वीं टॉय बिज़ इंटरनेशनल B2B प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस विशाल आयोजन में 400 भारतीय खिलौना ब्रांड्स, 40 से अधिक देशों के 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदार और लगभग 30000 बिजनेस विजिटर्स शामिल हुए। इस प्रदर्शनी ने भारतीय निर्माताओं को वैश्विक खरीदारों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने का एक बड़ा मंच प्रदान किया। आपको बता दें कि अभी केंद्र सरकार की कोई अलग से खिलौना नीति नहीं है, लेकिन अलग अलग मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों से इस उद्योग को जबरदस्त गति मिली है।

सरकारी नीतियों और पहलों का मिला फायदा

खिलौना उद्योग की इस सफलता के पीछे सरकार की खास रणनीति रही है। 14 मंत्रालयों और विभागों के समन्वय से 21 एक्शन पॉइंट्स वाली राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना (NAPT) लागू की गई, जिसमें भारतीय संस्कृति व इतिहास पर आधारित खिलौनों के डिजाइन और स्वदेशी क्लस्टरों को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही फरवरी 2020 में बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत और 2023 में 70 प्रतिशत किया गया जबकि बजट 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के कलपुर्जों पर शुल्क 20 प्रतिशत संशोधित किया गया। 25 फरवरी 2020 को गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) जारी कर 1 जनवरी 2021 से लागू किया गया जिसके तहत बीआईएस ने घरेलू निर्माताओं को 1800 से अधिक और विदेशी निर्माताओं को 50 से अधिक लाइसेंस जारी किए हैं।

नई शिक्षा नीति, क्लस्टर विकास और निर्यात प्रोत्साहन

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत एनसीईआरटी ने ‘टॉय बेस्ड पेडागोजी’ पर हैंडबुक जारी की, जिसने पढ़ाई में स्वदेशी खिलौनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। एमएसएमई मंत्रालय ने स्फूर्ति योजना के तहत 18 खिलौना क्लस्टरों को मंजूरी दी और कपड़ा मंत्रालय 40 क्लस्टरों को डिजाइनिंग व टूलिंग सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अलावा डीपीआईआईटी द्वारा 700 से अधिक खिलौना स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई है और RoDTEP योजना के जरिए 2200 से अधिक निर्यातकों को वित्तीय सहायता मिली है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ओमान, न्यूजीलैंड और यूके के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय खिलौनों को वैश्विक बाजारों में शून्य-शुल्क पहुंच मिली है। इसने भारत को खिलौना निर्माण का वैश्विक केंद्र बना दिया है।

iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max सितंबर में हो सकते हैं लॉन्च, बड़ी बैटरी, 2nm चिप और DSLR जैसे कैमरे की चर्चा

 Apple के अगली पीढ़ी के प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर नई लीक्स सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इस साल सितंबर में इन दोनों मॉडल्स को लॉन्च कर सकती है। लीक्स में दावा किया गया है कि नए iPhone Pro मॉडल्स में 2nm A20 प्रोसेसर, बड़ी बैटरी, बेहतर OLED डिस्प्ले और पहली बार Variable Aperture Camera जैसे बड़े अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं। हालांकि Apple ने अभी तक इन फीचर्स या लॉन्च डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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सितंबर में हो सकता है लॉन्च

 

अगर Apple अपने पुराने लॉन्च शेड्यूल का पालन करता है तो iPhone 18 Pro सीरीज का अनावरण सितंबर में किया जा सकता है। लीक्स में 12 सितंबर को संभावित लॉन्च डेट बताया जा रहा है। कुछ टिप्स्टर्स का दावा है कि कंपनी पहले Pro मॉडल्स लॉन्च कर सकती है, जबकि रेगुलर iPhone 18 को बाद में पेश किया जा सकता है। साथ ही Apple के पहले फोल्डेबल iPhone की भी चर्चा है, लेकिन फिलहाल यह केवल अफवाहों तक सीमित है।

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डिजाइन में बड़े बदलाव नहीं, नए कलर ऑप्शन मिल सकते हैं

 

रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro सीरीज का डिजाइन पिछले मॉडल जैसा ही रहेगा। हालांकि कंपनी Dark Cherry, Light Blue और Dark Grey जैसे नए रंग पेश कर सकती है। वहीं iPhone 18 Pro Max में बड़ी बैटरी के कारण फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है।

 

डिस्प्ले होगा ज्यादा ब्राइट और पावर एफिशिएंट

 

iPhone 18 Pro में 6.3 इंच और iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है। दोनों फोन में अपग्रेडेड LTPO+ OLED पैनल दिया जा सकता है, जिससे स्क्रीन ज्यादा ब्राइट होगी और बैटरी की खपत भी कम होगी।

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छोटा होगा Dynamic Island

लीक्स के मुताबिक Apple Face ID टेक्नोलॉजी का बड़ा हिस्सा डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट कर सकता है। इससे Dynamic Island का आकार करीब 35 प्रतिशत तक छोटा हो सकता है और यूजर्स को ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिलेगा।

 

पहली बार मिल सकता है Variable Aperture Camera

iPhone 18 Pro सीरीज में पहली बार Variable Aperture Camera मिलने की चर्चा है। यह कैमरा रोशनी के हिसाब से अपने आप अपर्चर एडजस्ट करेगा, जिससे कम रोशनी में बेहतर फोटो, अधिक प्राकृतिक पोर्ट्रेट, कम ओवरएक्सपोजर और बेहतर वीडियो रिकॉर्डिंग संभव हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यूजर इसे मैन्युअली कंट्रोल कर पाएंगे या नहीं।

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A20 2nm चिप दे सकती है दमदार परफॉर्मेंस

नई Pro सीरीज में Apple का A20 चिपसेट मिलने की संभावना है, जिसे TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। यह प्रोसेसर पहले से ज्यादा तेज और ऊर्जा की बचत करने वाला हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें Apple का नया C2 5G मॉडेम और बेहतर सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी देखने को मिल सकती है।

 

बड़ी बैटरी से बढ़ सकती है बैकअप

रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro Max में 5,200mAh तक की बैटरी मिल सकती है, जबकि iPhone 18 Pro की बैटरी क्षमता में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। नई बैटरी और 2nm प्रोसेसर के साथ बेहतर बैटरी बैकअप मिलने की संभावना जताई जा रही है।

 

भारत में कीमत बढ़ सकती है

लीक्स के मुताबिक iPhone 18 Pro सीरीज की कीमत भारत में मौजूदा मॉडल्स की तुलना में 20,000 से 30,000 रुपये तक बढ़ सकती है। फिलहाल iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत ₹1,34,999 और iPhone 17 Pro Max की शुरुआती कीमत ₹1,49,999 है। ऐसे में नई Pro सीरीज और अधिक महंगी हो सकती है। वैश्विक बाजार में भी कीमत करीब 200 डॉलर तक बढ़ने की चर्चा है, जिसकी वजह महंगे कंपोनेंट्स और बढ़ी हुई सप्लाई चेन लागत बताई जा रही है।

अभी कुछ भी आधिकारिक नहीं

ध्यान देने वाली बात यह है कि Apple ने अभी तक iPhone 18 Pro सीरीज की लॉन्च डेट, फीचर्स या कीमत को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल इन सभी जानकारियों को केवल लीक्स और रिपोर्ट्स के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी एक दिन में 5200 रुपये क्रैश

Gold Silver Rates Today: सोने और चांदी पर 28 जुलाई को बड़ा दबाव दिखा। देश और विदेश में दोनों की कीमतें गिर गईं। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 2,640 रुपये गिरकर 1,47,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी की कीमत 5,200 रुपये फिसलकर 2,24,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1.26 फीसदी गिरकर 4,026 डॉलर प्रति औंस था, जबकि चांदी 1.72 फीसदी गिरकर 57.39 डॉलर प्रति औंस थी।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट 

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट देखने को मिली। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,536 रुपये गिरकर 1,41,527 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 2.12 फीसदी यानी 4,792 रुपये गिरकर 2,16,3888 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। बीते तीन महीने में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 14 फीसदी क्रैश कर चुका है।

फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर नजरें 

बुलियन ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स की नजरें 29 जुलाई को आने वाली फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर लगी हैं। फेडरल रिजर्व की एफओएमसी की बैठक 28 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक देर शाम में शुरू होगी। इसके नतीजे 29 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक देर रात आएंगे। अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए अपना रुख सख्त कर सकता है।

फेडरल रिजर्व रुख को सख्त बना सकता है

सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। अगर वह 29 जुलाई को इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो भी वह अपना रुख सख्त बनाएगा। ज्यादतर एनालिस्ट्स का मानना है कि फेड सितंबर की अपनी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने का सोने की कीमतों पर खराब असर पड़ता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के अनुमान ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है।

डॉलर में मजबूती का सोने की कीमतों पर असर

उधर, अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर 28 जुलाई को चार हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। बीते कुछ महीनों में डॉलर में मजबूती देखने को मिली है।

बुलियन पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “फेडरल रिजर्व की पॉलिसी से पहले इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं। इसका असर मंगलवार को सोने की कीमतों पर दिखा।” हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आई है। लेकिन, इनवेस्टर्स का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

Sell-off in chip stocks : चिप शेयरों में उधार लेकर की गई खरीदारी दक्षिण कोरिया पर पड़ रही भारी, जानिए भारत के लिए है कितना बड़ा खतरा

Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।

रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन

अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।

मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा

मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।

कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन

27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग

कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।

मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?

भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।

एक्सपर्ट की राय

स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।

हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।

MTF क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।

मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Aurionpro Solutions Share Price: अपने पीक से 62% नीचे ये स्टॉक आज 12% गिरा, तिमाही नतीजों का दिखा असर

Aurionpro Solutions Share Price: सॉफ्टवेयर एंड आईटी सर्विसेस सेक्टर की कंपनी Aurionpro Solutions के शेयरों में आज भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर आज 12.10% गिरकर ₹735.40 प्रति शेयर पर बंद हुआ। शेयर में यह गिरावट कंपनी के जून तिमाही के बाद आई। शेयर 11 जून के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।

जून तिमाही के लिए, Aurionpro ने ₹358 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹337 करोड़ से 6.3% और पिछली तिमाही के ₹346 करोड़ से 3.6% अधिक है। हालांकि, EBITDA सालाना आधार पर 9.1% घटकर ₹61 करोड़ रह गया, जबकि EBITDA मार्जिन 300 बेसिस पॉइंट्स घटकर 17.2% हो गया। नेट प्रॉफिट (PAT) सालाना आधार पर 12.6% घटकर ₹45 करोड़ रह गया (जो पहले ₹51 करोड़ था), और PAT मार्जिन भी एक साल पहले के 15.3% से घटकर 12.6% हो गया।

मार्जिन पर दबाव के बावजूद, कंपनी ने तिमाही के दौरान 23 नए कस्टमर जोड़े। रेवेन्यू में बढ़ोतरी को बैंकिंग और फिनटेक बिजनेस से सहारा मिला, जो सालाना आधार पर 4.7% बढ़कर ₹201 करोड़ हो गया, जबकि टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप ने 8.4% की बढ़ोतरी के साथ ₹157 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।

तिमाही के दौरान, कंपनी ने बताया कि उसे अमेरिका से अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है। उसने एक प्रमुख डिजिटल इंश्योरेंस पेमेंट प्लेटफॉर्म के साथ 33 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। Aurionpro ने Ujjivan Small Finance Bank से अपने प्रमुख iCashpro+ इंटीग्रेटेड ट्रांजैक्शन बैंकिंग प्लेटफॉर्म को लागू करने के लिए 6 साल का कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया।

मल्टीबैगर रिटर्न के बावजूद स्टॉक अपने पीक से 62% नीचे

शेयर पर सितंबर 2024 से लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और इस दौरान इनकी वैल्यू में 55% से ज़्यादा की गिरावट आई है। मार्च 2023 और सितंबर 2024 के बीच आई जबरदस्त तेज़ी के बाद, जब स्टॉक ₹1,975 प्रति शेयर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था, इसकी रफ्तार कम हो गई और उसके बाद के ज़्यादातर महीनों में स्टॉक गिरावट के साथ बंद हुआ।

शेयर अपने पीक से स्टॉक में 62% की गिरावट आई है। कैलेंडर ईयर के हिसाब से देखें तो 2025 में इसमें 40% की गिरावट आई और 2026 में अब तक यह 29% और गिर चुका है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नौकरी ढूंढ़ने नहीं, नौकरी देने की सोच पैदा कर रहा ‘यूथ अड्डा’

CM Yuva Yojana: आज की जेनरेशन जेड (Gen Z) पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह पीढ़ी नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और आत्मनिर्भरता में अपना भविष्य देखती है। जिन युवाओं का जन्म 1997 के बाद हुआ, वे इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि अवसर, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम चाहिए।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बहुत पहले समझ लिया था। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने केवल रोजगार योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने की सोच के साथ सीएम युवा और यूथ अड्डा जैसी अभिनव अवधारणा को विकसित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इस पहल का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विचार, कौशल, तकनीक, मार्गदर्शन और बाजार सभी को एक मंच पर उपलब्ध करवा कर युवाओं के लिए उद्यमिता का नया इकोसिस्टम तैयार करना है। 

 

Gen Z की क्षमता और भविष्य की कार्यशक्ति में उसकी अहम भूमिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक वर्ष पहले ही पहचान लिया था। इसी सोच के तहत युवाओं और उद्यमिता के बीच मौजूद दूरी को कम करने की पहल की गई। कॉफी या चाय पर सहज, खुले और व्यावहारिक संवाद के माध्यम से युवाओं को कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास हुआ। इसी अनौपचारिक लेकिन प्रभावी मॉडल को ‘यूथ अड्डा’ नाम दिया गया, जहां कॉफी शॉप जैसे माहौल में युवा अपने विचार साझा कर सकें, विशेषज्ञों से संवाद कर सकें और अपने उद्यमी सपनों को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

Gen Z की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ यूथ अड्डा

आज का युवा केवल ऋण या अनुदान नहीं चाहता। वह चाहता है कि कोई उसके विचार को समझे, बिजनेस मॉडल बनाने में मदद करे, अनुभवी मेंटर्स से जोड़े, बैंकिंग प्रक्रिया आसान बनाए और बाजार तक पहुंच दिलाए। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ अड्डा को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र के बजाय एक समग्र उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, फ्रेंचाइजी मॉडल, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

 

यूथ अड्डा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सरकारी सेवा वितरण की पारंपरिक सोच को बदलता है। यहां युवा केवल किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि अवसर का आकांक्षी है, जिसकी जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

कॉलेज से सीधे स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर

प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि उद्यमिता की शुरुआत नौकरी मिलने के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज और तकनीकी संस्थानों के दिनों से ही होनी चाहिए। इसलिए यूथ अड्डा का फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विद्यार्थियों पर रखा गया है। यहां छात्रों को प्रेरित किया जाता है कि वे डिग्री पूरी होने के बाद केवल नौकरी के लिए आवेदन करने की बजाय यह सोचें कि वे किस समस्या का समाधान कर सकते हैं और उससे किस प्रकार सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है। योगी सरकार ने यह भी समझा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी। इसी कारण यूथ अड्डा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और आधुनिक डिजिटल टूल्स पर विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रदेश का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, पूरे बिजनेस सफर में साथ

यूथ अड्डा केवल प्रशिक्षण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यहां युवाओं को बिजनेस आइडिया तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, डिजिटल ब्रांडिंग, गूगल बिजनेस प्रोफाइल, वॉट्सएप बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और व्यवसाय विस्तार तक लगातार मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही 100 से अधिक तैयार फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं का जोखिम काफी कम हो सके।

ग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

यूथ अड्डा की अवधारणा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सहयोग देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूरे वर्ष चलता रहेगा उद्यमिता का अभियान

यूथ अड्डा को केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि वर्षभर सक्रिय रहने वाले उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया गया है। यहां बैंकर्स मीट, टेक फेस्ट, स्टार्टअप क्लिनिक, बिजनेस आइडिएशन वर्कशॉप, फाउंडर्स टॉक, नारी शक्ति श्रृंखला, कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम और सफल उद्यमियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पांच लाख युवाओं को इस पहल से जोड़ना, ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराना, 10,000 से अधिक नए उद्यम एवं फ्रेंचाइजी स्थापित करना तथा 25,000 से अधिक एमएसएमई को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनते हैं, तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

यूपीकॉन निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी पहल के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीकॉन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह के मुताबिक,  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के अंतर्गत यूपीकॉन द्वारा संचालित यूथ अड्डा को प्रदेश में उद्यमिता के एक सशक्त मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूपीकॉन युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, परियोजना परामर्श, बैंकिंग सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल योजनाओं का लाभ दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में सहभागी बनाना है।

SpaceX आया रिकॉर्ड हाई से 50% नीचे, इस कारण कमजोर हो रहा Elon Musk का शेयर

Elon Musk’s SpaceX Big Fall: एलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री की। इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और अमीर हो गए और वह दुनिया के इकलौते ट्रिलेनियनर यानी कि एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ की दौलत वाले शख्स बन गए। हालांकि अब स्पेसएक्स के शेयरों की भारी गिरावट ने मस्क की दौलत गिरा दी और अब वह ट्रिलेनियनर नहीं रह गए। 24 जुलाई को एलॉन मस्क ने X (पूर्व नाम Twitter) पर मजाकिया अंदाज में लिखा, पूर्व ट्रिलेनियर।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को $135 के भाव पर जारी हुए थे। 12 जून को मार्केट में इसकी $150 के भाव पर एंट्री हुई थी और पहले ही कारोबारी दिन $176.52 के हाई पर पहुंचने के बाद $160.95 के भाव पर बंद हुआ। इसके दो ही दिन बाद 16 जून को यह $225.64 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन अब नास्डाक पर यह $113.50 पर यानी कि हाई लेवल से यह 49.70% नीचे आ चुका है। वैसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर $108.66 है जो इसने 27 जुलाई को इंट्रा-डे में छुआ।

क्यों टूट रहा SpaceX का शेयर?

स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग में सामने आया था कि कंपनी कितना खर्च कर रही है और इसका टारगेट क्या है। अब जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे से लेटेस्ट तस्वीर सामने आई है जैसे कि कंपनी को जून तिमाही में करीब $430 करोड़ का नेट लॉस हुआ, $470 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, कैपिटल एक्सपेंडिचर $1010 करोड़ रहा जिसमें से $772 करोड़ सिर्फ एआई पर खर्च हुए। जब शेयर चढ़ रहे थे तो निवेशकों ने इन खर्चों पर ध्यान नहीं दिया और इसे एलॉन मस्क के उस अनुमान से भी सपोर्ट मिला जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2030 के आखिरी तक स्पेसएक्स सालाना $1 ट्रिलियन रेवेन्यू हासिल कर सकती है जोकि साल 2025 के $1870 करोड़ के रेवेन्यू से 50 गुना से भी अधिक है।

हालांकि निवेशक अब इसके खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं जिसके चलते शेयरों पर दबाव दिखा। इसके अलावा स्टारशिप की 13वीं टेस्ट फ्लाइट रद्द होने से इसके मार्केट कैप में करीब $10 हजार करोड़ की गिरावट आई। स्पेसएक्स के लिए स्टारशिप काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की एआई और मंगल ग्रह से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अब आगे कैसी रहेगी चाल?

निवेशकों की नजरें अब 4 अगस्त को आने वाले स्पेसएक्स के कारोबारी नतीजे पर हैं। यह पहली बार होगा, जब एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी के तौर पर यह अपना रिजल्ट पेश करेगी। इसके अवावा 6 अगस्त को लॉक-अप एक्सपायरी होने को लेकर भी निवेशकों की नजर है। लॉक-अप एक्सपायरी से लाखों शेयर मार्केट में आ सकते हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडिंगकी की रिपोर्ट के मुताबिक इसे कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स ने 12 महीने के लिए इसका औसत टारगेट प्राइस $235.18 तय किया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक हाइएस्ट टारगेट प्राइस $800 और लोएस्ट टारगेट $115 का है। स्पेसएक्स में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले और Atreides Management के सीआईओ गैविन बेकर ने सीएनबीसी पर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि आईपीओ के बाद शुरुआती दौर में गिरावट सामान्य बात है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।