Stock in Focus: पाइप कंपनी को अमेरिका से ₹960 करोड़ का ऑर्डर मिला, 6 महीने में स्टॉक 121% चढ़ा

Stock in Focus: पाइप बनाने वाली कंपनी वेलस्पन कॉर्प को अमेरिका से करीब ₹960 करोड़ का नया ऑर्डर मिला है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।

यह ऑर्डर अमेरिका के लिटिल रॉक स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से कोटेड लाइन पाइप की सप्लाई के लिए मिला है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची ऑर्डर बुक

इस नए ऑर्डर के बाद वेलस्पन कॉर्प की कुल ग्लोबल ऑर्डर बुक करीब ₹25,750 करोड़ (करीब 2.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गई है। कंपनी के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी ऑर्डर बुक है।

कंपनी का कहना है कि इससे आने वाले समय में रेवेन्यू की अच्छी तस्वीर दिखाई देती है। साथ ही, भारत और अमेरिका में मौजूद उसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी होगा।

दो साल में पूरा होगा ऑर्डर

वेलस्पन कॉर्प ने बताया कि इस ऑर्डर को वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के दौरान पूरा किया जाएगा।

कंपनी का कहना है कि लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर उसकी लंबी अवधि की ग्रोथ को मजबूत करेंगे। साथ ही, वैश्विक पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में उसकी मौजूदगी भी और मजबूत होगी।

वेलस्पन कॉर्प के शेयर

सोमवार को वेलस्पन कॉर्प के शेयर 0.19% चढ़कर 1,599.90 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 121.64% चढ़ा है। इसने बीते 5 साल में 1,055.58% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 42.19 हजार करोड़ रुपये है।

क्या बनाती है कंपनी?

वेलस्पन कॉर्प स्टील पाइप और पाइपलाइन सॉल्यूशंस बनाने वाली कंपनी है। कंपनी तेल और गैस, पानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बड़े व्यास (Large Diameter) वाले पाइप बनाती है। भारत के अलावा अमेरिका में भी इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और यह दुनिया के कई देशों में अपने उत्पादों की सप्लाई करती है।

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Gold Silver Price Today: सोना ₹2440 महंगा हुआ, चांदी का भाव ₹5300 उछला

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना ₹2,440 चढ़कर ₹1,49,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी ₹5,300 की तेजी के साथ ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई।

सोने-चांदी के दाम क्यों बढ़े?

लगातार दो दिन की गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी लौटी है। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। इससे महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई। निवेशकों का रुख फिर से सोने और चांदी की तरफ बढ़ा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से कच्चे तेल के दाम गिरे हैं। इसका फायदा सोने को मिला। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी घटी है। इससे भी सोने की कीमतों को सहारा मिला। हालांकि, रुपये की मजबूती की वजह से घरेलू बाजार में तेजी कुछ सीमित रही।

विदेशी बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 42.13 डॉलर बढ़कर 4,095.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 1.47% चढ़कर 59.04 डॉलर प्रति औंस हो गई।

Kotak Securities की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला ने कहा कि कच्चे तेल के दाम घटने से महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। इसी वजह से सोने और चांदी में खरीदारी बढ़ी।

अब किस पर रहेगी नजर?

JM Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक, अब बाजार की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर रहेगी। इसके अलावा, यूरोजोन, जापान और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम रहेंगे।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के GDP के आंकड़े आएंगे। कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का डेटा भी जारी होगा। साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े भी अहम रहेंगे। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों पर होने वाले फैसले भी सोने-चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि सोमवार को एमसीएक्स पर सोना करीब 0.50% की तेजी के साथ ₹1,43,675 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, COMEX Gold करीब 37 डॉलर चढ़कर 4,090 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। हालांकि, रुपये की मजबूती की वजह से घरेलू बाजार में सोने की तेजी वैश्विक बाजार के मुकाबले थोड़ी कम रही।

उनका कहना है कि अब बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर है। इस बैठक से ब्याज दरों के संकेत मिल सकते हैं। इसका असर आगे सोने की कीमतों पर भी दिख सकता है। तकनीकी तौर पर एमसीएक्स गोल्ड के ₹1,42,000 से ₹1,45,500 के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है।

*पीटीआई से इनपुट के साथ

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मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती विद्रोही सीधे इस लड़ाई में उतरने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक पकड़ और ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी 2022 में हुए युद्धविराम के बाद यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में स्थायी शांति समझौते पर बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। तनाव बना रहा, मगर दोनों पक्ष बड़े युद्ध से बचने की कोशिश करते रहे। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हालात तेजी से बदल गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ा है और चार साल पुराना युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ फिर युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला संघर्ष है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन उसे कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। उल्टा उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाकर वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश की राजनीति में बड़ी भूमिका चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं। ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। सऊदी ने 2015 में हूती के खिलाफ जंग शुरू की हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया। इससे पड़ोस के सऊदी अरब को खतरा महसूस हुआ क्योंकि हूती का समर्थन ईरान कर रहा था। ऐसे में सऊदी ने 2015 में आठ अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस गठबंधन का मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर सत्ता में लाना था। करीब आठ साल तक लड़ाई के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूतियों को हराना संभव नहीं है। इसके बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से संपर्क शुरू किया। आज उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूतियों का नियंत्रण है। वहीं दक्षिणी यमन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। गाजा युद्ध ने बिगाड़ दिया शांति समझौता 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में स्थायी शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही थी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों पुराना युद्ध खत्म हो सके। सबसे बड़ा विवाद यमन के तेल से होने वाली कमाई और सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर था। इसके बावजूद दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुंच चुके थे। लेकिन अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होते ही पूरी तस्वीर बदल गई। हूतियों ने खुद को हमास के समर्थन में उतार दिया और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। इसके जवाब में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद शांति वार्ता धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चली गई। हूती ने सऊदी पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया गाजा युद्ध के दौरान हूतियों ने सऊदी अरब पर सीधे हमले नहीं किए। लेकिन उन्होंने रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इससे दुनिया के कई देशों का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ। इसके बाद 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी का कहना है कि इस फैसले से हूतियों के कब्जे वाले इलाकों की पहले से खराब अर्थव्यवस्था और बिगड़ गई। इससे वहां रहने वाले लोगों में नाराजगी भी बढ़ने लगी। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने मौजूदा तनाव के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि सऊदी अरब ने शांति वार्ता के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं किए। खासकर हूती नियंत्रित इलाकों के सरकारी कर्मचारियों की रुकी हुई तनख्वाह बहाल नहीं की गई। हालांकि सऊदी अरब ने इन आरोपों से इनकार किया है। यमन में सऊदी राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने कहा कि उनका देश तनाव कम करना चाहता है और यमन में स्थायी शांति का समर्थन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हूती लगातार हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं और बाहरी ताकतों के हितों के लिए काम कर रहे हैं, जिसका नुकसान यमन की जनता को उठाना पड़ रहा है।

Stocks Of The Day : नतीजों के बाद लॉरेस लैब्स लाइफ हाई पर, कॉनकॉल के बाद KFIN टेक को भी लगे पंख

Stock Of The Day : नतीजों के बाद लॉरेस लैब्स के शेयर आज अपने लाइफ हाई पर जाते दिखें हैं। नतीजों और कॉनकॉल के बाद KFIN टेक का शेयर भी जोर से दौड़ा है। फार्मा सेक्टर में आज सबसे ज्यादा फोकस लॉरेस लैब्स पर है। जिसमें जोरदार तेजी आई है। लॉरेस लैब्स की बात करें तो 1 महीने में इस शेयर ने 11 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, इस साल अब तक इसने 50 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने 1 महीने में 1 फीसदी और इस साल अब तक 15 फीसदी रिटर्न दिया है।

लॉरेस लैब्स में तेजी क्यों?

कंपनी ने लगातार शानदार नतीजे पेश किए हैं। अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू और EBITDA ग्रोथ देखने को मिली है। कंपनी के CDMO और फॉर्मूलेशन बिजनेस ने दम दिखाया है। सिंथेसिस (SYNTHESIS) बिजनेस में 69% की तगड़ी ग्रोथ देखने को मिली है।

लॉरेस लैब्स: कमेंट्री

कंपनी की मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि कैपेक्स बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपए किया गया। यह पहले 1500 करोड़ रुपए था। विशाखापत्तनम का बड़ा पेप्टाइड प्लांट ट्रैक पर है।

लॉरेस लैब्स: वैल्युएशन

यह स्टॉक FY27 के EPS के 65 गुना वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। FY26-28 में 24% CAGR अर्निंग संभव है।

लॉरेस लैब्स:शेयर प्राइस हिस्ट्री

3 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 121.90 रुपए यानी 7.61% फीसदी की बढ़त के साथ 1725 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 1,734.50 रुपए और दिन का लो 1,617.10 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 1,734.50 रुपए और 52 वीक लो 810.05 रुपए है। 1 हफ्ते में इस शेयर ने 10.49 फीसदी और 1 महीने में 18.76 फीसदी रिटर्न दिया है। 1 साल में इसने 105.42 फीसदी और 3 साल में 400.29 फीसदी रिटर्न दिया है।

KFIN (KFin Technologies) में भी रफ्तार

नतीजों और कॉनकॉल के बाद KFIN टेक भी दौड़ा है। कंपनी ने कॉनकॉल में बताया है कि बैंक बेस्ड वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म डील जल्द संभव है। NPS बिजनेस ब्रेकइवेन पर पहुंच गया है। MF मार्केट शेयर 37% से बढ़ाकर 40% करने का लक्ष्य है। पहली तिमाही में कंपनी के साथ 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा AUM वाले 6 नए फंड मैनेजर्स जुड़े है। FY27 के अंत तक 40% EBITDA मार्जिन का लक्ष्य है। इंटरनेशनल बिजनेस से मार्जिन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

शेयर की चाल पर एक नजर

3 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 92.25 रुपए यानी 10.75% की तेजी के साथ 950 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 955.30 रुपए और दिन का लो 862 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 1,215 रुपए है। 1 हफ्ते में इसने 7.51 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, 1 महीने में इसने 8.40 फीसदी तेजी दिखाई है। 1 साल में शेयर 18.56 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 साल में इसने 140.17 फीसदी रिटर्न दिया है।

 

 

Trading Plan : कच्चे तेल की नरमी और मजबूत रुपये के दम पर बाजार हुआ गुलजार, जानिए अब क्या हो इंडेक्स में कमाई की रणनीति

कौन हैं डॉ.कैरिना जिन्हें मिलेगी एपस्टीन की अरबों की संपत्ति! मौत से पहले दी थी 33 कैरेट की हीरे की अंगूठी

जेफरी एपस्टीन की मौत से ठीक पहले बनाई गई ट्रस्ट में उनकी गर्लफ्रेंड को सबसे ज्यादा हिस्सा देने का खुलासा हुआ है। जेफरी एपस्टीन की संपत्ति के दस्तावेजों में कहीं एक बेशकीमती हीरे की अंगूठी का जिक्र है, जिसे शादी के विचार के साथ एक महिला के लिए रखा गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह महिला 37 वर्षीय बेलारूसी डेंटिस्ट डॉ. कैरिना शुलियाक हैं। कैरिना, एपस्टीन की गर्लफ्रेंड थी और दोनों करीब आठ साल तक साथ रहे थे। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेलारूस में जन्मी अमेरिकी डेंटिस्ट डॉ. कैरिना शुलियाक को जेफरी एपस्टीन की संपत्ति से 100 मिलियन डॉलर तक मिल सकता है।

एपस्टीन की संपत्ति का बड़ा हिस्सा डॉ. कैरिना के नाम

डॉ. कैरिना शुलियाक हाल तक अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के ब्रुकलिन में डेंटिस्ट के रूप में काम कर रही थीं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वह जेफरी एपस्टीन की करीबी साथी थीं। बताया जाता है कि अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में आत्महत्या करने से पहले एपस्टीन ने आखिरी बार उन्हें ही फोन किया था। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों करीब आठ साल तक रिश्ते में रहे। अपनी मौत से कुछ समय पहले जेफरी एपस्टीन ने अपनी वसीयत में बदलाव किया था और अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा डॉ. कैरिना शुलियाक के नाम कर दिया था। यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने उन्हें 33 कैरेट की हीरे की अंगूठी दी थी। एक हाथ से लिखे गए नोट में कथित तौर पर एपस्टीन ने लिखा था कि यह अंगूठी “शादी के इरादे से” दी गई थी।

मिल सकते हैं 100 मिलियन डॉलर

जेफरी एपस्टीन की मौत के समय उनकी कुल संपत्ति करीब 600 मिलियन डॉलर आंकी गई थी। हालांकि, बाद में पीड़ितों को मुआवजा देने, समझौता राशि चुकाने और अन्य कानूनी खर्चों के बाद उनकी बची हुई संपत्ति 120 से 200 मिलियन डॉलर के बीच मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संपत्ति में से डॉ. कैरिना शुलियाक को 100 मिलियन डॉलर तक मिल सकते हैं।

कौन हैं डॉ. कैरिना शुलियाक

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. कैरिना शुलियाक साल 2010 में स्टूडेंट वीजा पर बेलारूस से अमेरिका के न्यूयॉर्क आई थीं। उनका सपना डेंटिस्ट बनने का था। बताया जाता है कि जेफरी एपस्टीन ने उन्हें कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में दाखिला दिलाने में मदद की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने उनकी पढ़ाई, रहने के लिए घर और दूसरे खर्च भी उठाए थे। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि एपस्टीन ने शादी के जरिए उन्हें अमेरिकी ग्रीन कार्ड दिलाने में मदद की थी। इसके बाद वर्ष 2018 में डॉ. कैरिना शुलियाक अमेरिका की नागरिक बन गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेफरी एपस्टीन ने डॉ. कैरिना शुलियाक की डेंटल स्कूल की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया था।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में उनका दाखिला होने के बाद उन्होंने उनकी मां को भी बेलारूस से अमेरिका बुलाने का इंतजाम कराया था। बताया जाता है कि वर्ष 2012 में डॉ. कैरिना शुलियाक ने एक संदेश में एपस्टीन का धन्यवाद करते हुए लिखा था कि उन्होंने उनकी पढ़ाई, रहने के लिए घर और उनके माता-पिता की मदद की। उन्होंने उस मैसेज में एपस्टीन को “सबसे नेक इंसान” भी बताया था। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. कैरिना शुलियाक ने कभी खुद को जेफरी एपस्टीन के पीड़ितों में शामिल नहीं बताया। वहीं, अमेरिकी जांच एजेंसियों ने भी उन पर एपस्टीन के यौन तस्करी से जुड़े मामलों में किसी तरह की संलिप्तता का आरोप नहीं लगाया है। जेफरी एपस्टीन ने 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर जेल में आत्महत्या कर ली थी। उस समय वह संघीय स्तर पर यौन तस्करी के आरोपों का सामना कर रहे थे और उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा था। अधिकारियों ने उनकी मौत को आधिकारिक तौर पर आत्महत्या माना था।

Trading Plan : कच्चे तेल की नरमी और मजबूत रुपये के दम पर बाजार हुआ गुलजार, जानिए अब क्या हो इंडेक्स में कमाई की रणनीति

Trading Plan : कच्चे तेल की नरमी और मजबूत रुपये के दम पर बाजार गुलजार नजर आ रहा है। निफ्टी करीब 200 प्वाइंट ऊपर करोबार कर रहा है। निफ्टी के कदम 24,000 की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं। इधर मिडकैप और स्मॉलकैप में भी रौनक लौटी है। क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। रुपया भी 70 पैसे मजबूत हुआ है। फीयर इंडेक्स India VIX 7% घटा है। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 2.5 फीसदी चढ़ा है। HCL टेक और एम्फैसिस में शानदार तेजी है। लॉरेस लैब्स करीब 8 फीसदी की उछाल के साथ लाइफ हाई पर जाता दिखा है। साथ में एस्ट्रल और 360 ONE WAM भी चले है।

IT के साथ साथ रियल्टी,फार्मा और ऑटो में भी रफ्तार देखने को मिल रही है। तीनों सेक्टर इंडेक्स 1 से 1.5 फीसदी मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। साथ ही FMCG, केमिकल और कैपिटल मार्केट शेयरों में भी रौनक है। IDFC फर्स्ट बैंक का शेयर करीब 9 फीसदी उछलकर आज का हीरो ऑफ द डे बना है। साथ ही अच्छे नतीजों के दम पर AU बैंक 5% भागा है। साथ ही टाटा कंज्यूमर,NTPC में भी खरीदारी है। उधर कच्चे तेल में नरमी से इडिंगो ने उड़ान भरी है। यह शेयर निफ्टी के टॉप गेनरों में शामिल है।

पहली तिमाही के नतीजों के बाद KFIN टेक और कॉनकॉर ने रफ्तार पकड़ी है। KFINTECH करीब 10% उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना है। CONCOR भी 7% दौड़ा है। साथ ही रिजल्ट के बाद SBI कार्ड और लोढ़ा में भी रौनक है।

पहली तिमाही में केनरा बैंक का मुनाफा दो फीसदी बढ़ा है। इसके ब्याज से होने वाली कमाई यानी NII में करीब 14% का उछाल दिखा है। बैंक की असेट क्वॉलिटी में सुधार दिखा है। नतीजों के बाद शेयर में रौनक है। बाजार को अब कोल इंडिया,BEL के साथ वायदा की चार कंपनियों के नतीजों का इंतजार है।

नतीजों के लिहाज कल अहम दिन है। कल निफ्टी की दो दिग्गज कंपनियां HUL और L&T के नतीजे आएंगे। HUL में 6-7% वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान है। आय में 10 फीसदी ग्रोथ संभव है। इधर L&T के नतीजों पर वेस्ट एशिया संकट का असर दिख सकता है। साथ ही रेडिको और वरुण वेबरेजेज समेत वायदा की छह कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

बाजार: शानदार रैली

बाजार की आगे की चाल पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार ने एक बार फिर रेंज का सम्मान किया है। कच्चे तेल और रुपये ने बाजार का सेंटिमेंट सुधारा है। कच्चा तेल $90 प्रति बैरल के करीब आ गया है। रुपये में डॉलर के मुकाबले बड़ी रैली आई है। आज की रैली कुछ सेक्टर्स तक सीमित नहीं, सभी सेक्टर हरे निशान में हैं। बैंक निफ्टी ऊंचे स्तरों से थोड़ा फीका पड़ा है। IT सेक्टर में लगातार शानदार तेजी देखने को मिली है। सरकारी बैंकों में नतीजों के बाद मिला-जुला रुख है। लॉरस लैब्स और इंटरग्लोबल ने तगड़ी कमाई कराई है।

बाजार: अब क्या?

हमने शुक्रवार को लॉन्ग का नजरिया लिया था और उसे कैरी करने को कहा था। अब 23,800 आपके लिए वापस ट्रेलिंग स्टॉप लॉस होगा। अगर सब सही रहा तो हम वापस 24,300 जा सकते हैं। 24,000-24,050 पर थोड़ी रुकावट की जगह है। बैंक निफ्टी में 57,200-57,400 पर थोड़ी रुकावट है। लेकिन आज का सबसे मजबूत पॉइंट है इंडिया VIX और मार्केट ब्रेथ। ये दोनों इंडिकेटर वापस तेजी के बड़े ट्रेंड की तरफ इशारा कर रहे हैं। कल मंथली एक्सपायरी है और सिस्टम में काफी शॉर्ट पोजीशन हैं। अगर 24,050 के ऊपर निकले तो बड़ी रैली हो सकती है

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,800-23,850 पर सपोर्ट और 24,050-24,150 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 56,500 पर सपोर्ट और 57,200-57,400 पर रेजिस्टेंस है।

 

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बैंक में 100 करोड़ रुपये, सिलिकॉन वैली में करोड़ों की कंपनी… फिर भी गांव में क्यों रह रहा है ये करोड़पति

सफलता को अक्सर पैसा, बड़ा बिजनेस और शानदार जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन कई बार जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं, जहां आर्थिक मजबूती भी परेशानियों को कम नहीं कर पाती। एक उद्यमी द्वारा साझा की गई कहानी ने इसी सोच को सामने रखा है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र है, जिसने अपनी मेहनत से विदेश में बड़ी कामयाबी हासिल की, करोड़ों की संपत्ति बनाई और खुद को सफल साबित किया। हालांकि, निजी जिंदगी की चुनौतियों ने उसकी राह बदल दी।

परिवार से जुड़े विवाद, मानसिक तनाव और बदलते हालातों के बीच उसने अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने का फैसला किया। यह कहानी सिर्फ सफलता और असफलता की नहीं, बल्कि मानसिक शांति, रिश्तों और जीवन में संतुलन की अहमियत को भी उजागर करती है।

सिलिकॉन वैली में बनाई अपनी पहचान

विनीथ के अनुसार, उनके कॉलेज साथी ने अपनी मेहनत के दम पर अमेरिका में एक सफल कंपनी बनाई और खुद को डॉलर मिलियनेयर बनाया। करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और एक शानदार भविष्य उसके साथ था। लेकिन कुछ समय बाद जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

परिवारिक विवादों ने बदली पूरी जिंदगी

विनीथ ने बताया कि उनके साथी को पत्नी, ससुराल पक्ष और परिवार से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा। इसके बाद कानूनी मामलों और मानसिक तनाव ने उनकी जिंदगी को काफी प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि इन परिस्थितियों के बीच वह डिप्रेशन से भी गुजरे और अपने बच्चे से दूरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। आखिरकार उन्होंने अमेरिका छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।

₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति, लेकिन जिंदगी गांव में

विनीथ के मुताबिक, आज उनके पूर्व साथी के पास बैंक में ₹100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, लेकिन वह अब शहरों की चमक-दमक से दूर एक छोटे गांव में रहते हैं। वह अपना समय आध्यात्मिक गतिविधियों में बिताते हैं और मानसिक शांति, उपचार और जीवन के अनुभवों से जुड़े वीडियो साझा करते हैं।

पैसे से ज्यादा जरूरी है मन की शांति

विनीथ ने इस कहानी के जरिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां आर्थिक सफलता के बावजूद लोग मानसिक परेशानियों से जूझते हैं। उनका संदेश था कि जिस तरह लोग अपनी संपत्ति की सुरक्षा करते हैं, उसी तरह अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

विनीथ की पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी और माना कि जिंदगी में मानसिक शांति और अच्छे रिश्तों की अहमियत को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। एक यूजर ने लिखा कि अच्छी नींद और मन की शांति को लोग कम आंकते हैं। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि कई बार हालात इंसान के नियंत्रण में नहीं होते और मुश्किल समय का सामना करना ही एकमात्र रास्ता रह जाता है।

दौलत बड़ी है, लेकिन सुकून उससे भी ज्यादा जरूरी

इस कहानी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि असली सफलता सिर्फ पैसा कमाने में है या फिर एक संतुलित और शांत जीवन जीने में। करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद अगर मन अशांत हो, तो जिंदगी की खुशियां अधूरी रह सकती हैं।

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5 वजहों से Nifty में पांच दिनों की गिरावट के बाद तेजी, IT Stocks के दम पर Sensex में 600 अंकों का उछाल

Share Market Rally: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आज लगातार पांच कारोबारी दिनों की गिरावट का सिलसिला टूटा। अमेरिका और ईरान के बीच हमले थमे तो मार्केट उछल पड़ा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स इंट्रा-डे में 500 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24150 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 एक-एक फीसदी से अधिक मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:13 AM पर सेंसेक्स 564.06 प्वाइंट्स यानी 0.74% की बढ़त के साथ 76,623.83 और निफ्टी 50 भी 159.35 प्वाइंट्स यानी 0.67% की बढ़त के साथ 23,926.80 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 655.87 प्वाइंट्स चढ़कर 76,715.64 और निफ्टी 197.05 प्वाइंट्स उछलकर 23,964.50 तक पहुंचा था।

Share Market Rally: ये है वजह

अमेरिका और ईरान के थमे हमले

पश्चिमी एशिया में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया था लेकिन अब जब हमले थमे हैं तो इसने मार्केट में रौनक बिखेर दी।

कच्चे तेल में गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुके तो इससे वैश्विक जियोपोलिटिकल टेंशन ढीला पड़ा और कच्चा तेल फिसल पड़ा। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 5% टूटकर प्रति बैरल $86 के करीब आ गया। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

डॉलर की कमजोरी

वीकेंड में अमेरिका ने ईरान पर बमबारी रोक दी जिससे तेल की कीमतें नीचे आई और ग्लोबल बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इसके चलते डॉलर पर दबाव बना है। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.2 के लेवल पर दिख रहा है। डॉलर की कमजोरी से मार्केट को सपोर्ट मिला है।

India VIX में गिरावट

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने रौनक बढ़ा दी। फिलहाल यह 5.63% की फिसलन के साथ 13.24 पर है। इसमें गिरावट का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना और इसमें उछाल का मतलब वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका है।

IT Stocks में जोरदार तेजी

मार्केट को आईटी शेयरों की ताबड़तोड़ खरीदारी से शानदार सपोर्ट मिला है जिसका निफ्टी इंडेक्स ढाई फीसदी मजबूत हुआ है। इसे एफएमसीजी, फार्मा, और रियल्टी सेक्टर से भी अच्छा सपोर्ट मिला है जिनके निफ्टी इंडेक्सेज में 1-1% से अधिक बढ़त है। सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में भी आधे-आधे फीसदी की बढ़त है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LPG Cylinder Price Today: गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले चेक करें कीमत, 27 जुलाई को ये है LPG का रेट

LPG Cylinder Price Today: सोमवार, 27 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मचे उथल-पुथल के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, आज कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से काफी नीचे आ गई है। आज सुबह 6 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 5.52% की गिरावट के साथ 91.44 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि, इसका असर LPG सिलेंडर की कीमतों पर नहीं पड़ा है। भारत में आज भी 14.2 किलो वाले घरेलू और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं। ऐसे में अगर आप आज LPG सिलेंडर बुक कराने की सोच रहे हैं तो, सबसे पहले आपको अपने शहर का रेट जरूर जानना चाहिए।

चेक करें अपने शहर का रेट

शहरघरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलोग्राम)
दिल्ली₹942.00₹1,766.00
मुंबई₹941.50₹1,717.00
कोलकाता₹968.00₹1,879.00
चेन्नई₹957.50₹1,929.00
बेंगलुरु₹945.50₹1,837.00
हैदराबाद₹995.50₹1,978.00
जयपुर₹956.50₹1,804.00
लखनऊ₹980.50₹1,910.00
चंडीगढ़₹955.50₹1,786.00
पटना₹1,001.00₹2,018.00

घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में नहीं हुआ बदलाव

देशभर में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम जस के तस बने हुए हैं। हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा करती हैं, लेकिन 27 जुलाई तक घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई नई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की गई है।

कमर्शियल सिलेंडर का क्या है हाल?

1 जुलाई को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों की गई 183.50 रुपये की कटौती के बाद से अभी तक किमतों में बदलाव नहीं हुआ है। जिसका लाभ होटल, रेस्तरां और अन्य व्यवसायिक उपभोक्ताओं को मिल रहा है।

गैस सिलेंडर की कीमतें कैसे तय होती हैं?

एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को तय करने में कई कारकों की अहम भूमिका होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के दाम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन खर्च और सरकार की नीतियां शामिल होती हैं। यही वजह है कि समय-समय पर एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ते या घटते रहते हैं।

कहां चेक करें अपने शहर का रेट?

वैसे अगर आप घर बैठे अपने शहर का सटीक LPG रेट जानना चाहते हैं तो Indane, Bharat Gas या HP Gas की  वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट कीमत देख सकते हैं।

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Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के नए रेट लागू, घर बैठे जानें आपके शहर का ताजा भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 27 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.20

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 | डीजल ₹97.83

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 | डीजल ₹99.82

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 | डीजल ₹99.55

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 | डीजल ₹95.44

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.56

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 | डीजल ₹98.80

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 | डीजल ₹100.92

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 | डीजल ₹86.09

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 | डीजल ₹103.82

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 | डीजल ₹97.78

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 | डीजल ₹95.55

पटना: पेट्रोल ₹113.35 | डीजल ₹99.36

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 | डीजल ₹104.40

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।