63 Moons Tech Share Price: सब्सिडियरी ने FY27 के लिए रेवेन्यू अनुमान बढ़ाया, शेयर ने लगाई 12% तक की छलांग

63 मून्स टेक्नोलॉजीस के शेयरों में 12 अक्टूबर को दिन में जबरदस्त खरीद देखने को मिली। BSE पर शेयर पिछले बंद भाव से लगभग 12.5 प्रतिशत तक उछलकर 860.30 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 3800 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। कंपनी ने एक दिन पहले शेयर बाजारों को अप्रैल-सितंबर 2026 छमाही के लिए अपनी सब्सिडियरी 63SATS Cybertech Ltd का बिजनेस अच्छा रहने की जानकारी दी थी। सब्सिडियरी ने बिलिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी के बारे में बताया है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिल किए गए रेवेन्यू का अनुमान बढ़ा दिया है।

इनवेस्टर अपडेट के अनुसार, सितंबर 2026 ​छमाही के लिए 63SATS Cybertech का प्रोविजनल बिल्ड रेवेन्यू 218 करोड़ रुपये रहा। यह पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान बिल किए गए 87 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से लगभग 2.5 गुना ज्यादा है। बिलिंग जून 2026 तिमाही में 102.57 करोड़ रुपये थी। सितंबर 2026 तिमाही में यह 115.64 करोड़ रुपये हो गई।

FY27 में अब कितने रेवेन्यू का अनुमान

63SATS Cybertech ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने बिल किए गए रेवेन्यू का अनुमान 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया है। कंपनी ने अपने क्लाइंट बेस में भी बढ़ोतरी की जानकारी दी है। एंटरप्राइज क्लाइंट्स की संख्या वित्त वर्ष 2026 में 72 थी। सितंबर 2026 छमाही में यह 107 हो गई।

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63 Moons Technologies शेयर 6 महीनों में 50 प्रतिशत चढ़ा

शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 3 महीनों में 20 प्रतिशत और 6 महीनों में करीब 50 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 2 साल में यह लगभग 90 प्रतिशत और 3 साल में 230 प्रतिशत की बढ़त देख चुका है। 5 साल में कीमत 680 प्रतिशत उछली है। जून 2026 के आखिर तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 45.63 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 957.70 रुपये और एडजस्टेड लो 465.55 रुपये है।

BSE पर मौजूद डेटा के मुताबिक, 63 मून्स टेक्नोलॉजीस का जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 36.12 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 3.15 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 68 लाख रुपये दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 108.96 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 174.66 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 37.91 करोड़ रुपये रही।

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Lenskart Block Deal: एक झटके में बिके ₹1895 करोड़ के शेयर, कीमत 5% लुढ़की

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस के शेयरों में 12 अक्टूबर को सुबह के कारोबार में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। BSE पर शेयर 643.80 रुपये के लो तक गया। ब्लॉक डील के जरिए कंपनी के 2.93 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई है। ये शेयर कंपनी की 1.67 प्रतिशत इक्विटी के बराबर हैं। शेयरों को 647 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचा गया है। इन शेयरों की कुल वैल्यू 1,895 करोड़ रुपये है। शेयरों को किसने बेचा और किसने खरीदा, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

वीकेंड पर CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि अल्फा वेव वेंचर्स LP, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में 1,691 करोड़ रुपये की 1.6 प्रतिशत तक इक्विटी 640 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेच सकती है। शेयर बेचने वालों को आगे और हिस्सेदारी बेचने के लिए 30 दिन के लॉक-इन पीरियड का पालन करना होगा। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के अनुसार, जून 2026 तिमाही के आखिर तक लेंसकार्ट में प्रमोटर एंटिटीज की हिस्सेदारी 17.53 प्रतिशत थी।

Alpha Wave Ventures ने अगस्त में भी बेचा था हिस्सा

इससे पहले Alpha Wave Ventures LP ने अगस्त महीने में ब्लॉक डील के जरिए लेंसकार्ट के 2.95 करोड़ शेयर या 1.7 प्रतिशत इक्विटी 1,857 करोड़ रुपये में बेची थी। खरीदारों में नेशनल पेंशन सिस्टम, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड शामिल थे। 3 दिन पहले लेंसकार्ट में सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब केमैन ने BSE पर ब्लॉक डील के जरिए 641.75 रुपये प्रति शेयर की औसत कीमत पर 2,887.9 करोड़ रुपये के 4.5 करोड़ शेयर बेचे थे। सोसाइटे जेनरल ODI ने 688.92 करोड़ रुपये के 1.07 करोड़ शेयर खरीदे।

21 सितंबर 2026 को लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में ब्लॉक डील्स के जरिए 3.6 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई थी। ट्रांजेक्शन 688 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ और डील की कुल वैल्यू 2,468 करोड़ रुपये रही। डील से पहले CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से कहा था कि प्लेटिनम जैस्मीन ए 2018 ट्रस्ट लेंसकार्ट में हिस्सेदारी बेच सकती है। प्लेटिनम जैस्मीन, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) का एक इनवेस्टमेंट व्हीकल है।

अगस्त और जून में भी सॉफ्टबैंक ने बेचे थे Lenskart के शेयर

इस साल अगस्त में सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब (केमैन) लिमिटेड ने लेंसकार्ट में 2.58% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेची थी। 4.5 करोड़ शेयर ₹2,887.87 करोड़ में बेचे गए थे। खरीदारों में सोसाइटे जेनरल ओडीआई, गोल्डमैन सैक्स, मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड, वैनगार्ड ग्रुप, मॉर्गन स्टेनली, SBI म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया, HDFC म्यूचुअल फंड जैसे कई घरेलू और वैश्विक निवेशक शामिल थे।

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जून में भी सॉफ्टबैंक समूह ने SVF II लाइटबल्ब (केमैन) के जरिए लेंसकार्ट में 3.25% हिस्सेदारी बेची थी। उस वक्त 5,65,00,000 शेयर बेचे गए थे और ट्रांजेक्शन की वैल्यू ₹2,873.30 करोड़ रही थी। व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड (MF), मिरे एसेट MF, कोटक MF, केनरा रोबेको MF, ICICI प्रूडेंशियल MF, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, सोसाइटी जेनरल, मेट्जलर एसेट मैनेजमेंट, गोल्डमैन सैक्स, फिडेलिटी, कॉप्थॉल मॉरीशस इनवेस्टमेंट, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड, और डेंडाना इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) लिमिटेड खरीदार रहे थे।

नवंबर 2025 में हुई थी लिस्ट

लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसका IPO 7278.02 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 1.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर साल 2026 में अब तक लगभग 50 प्रतिशत चढ़ा है।

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Suzlon Energy Share Price: ये 6 बातें तय करेंगी शेयरों की चाल, समझ लें सुजलॉन में निवेश से पहले

Suzlon Energy Share Price: 8 अक्टूबर को एक साल के निचले स्तर पर आने के बाद से विंट टर्बाईन बनाने वाली सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने शानदार वापसी की है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के बुलिश रुझान से इसे और सपोर्ट मिला और यह 3% से अधिक उछल पड़ा। मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। ओवरऑल इसे कवर करने वाले 12 एनालिस्ट्स में से 10 ने इसे खरीदारी और 2 ने होल्ड रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने इसे बेचने की सलाह नहीं दी है। अब शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.84% की बढ़त के साथ ₹38.27 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.14% उछलकर ₹38.76 तक पहुंच गया था।

Suzlon पर Motilal Oswal को भरोसा क्यों कायम?

तीन महीने में सुजलॉन एनर्जी के शेयर 31% नीचे आए। इस गिरावट के साथ अब यह वित्त वर्ष 2028 की प्रति शेयर कमाई (EPS) के मुकाबले 17.5 गुना पर है जोकि इसके एक साल के औसत फारवर्ड P/E से करीब 20% डिस्काउंट पर है। ऐसे में सुजलॉन का शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक सुजलॉन की कमाई वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक होती रही है और कंपनी के सालाना EBITDA में इसकी 60-65% हिस्सेदारी रहती है। ऐसे में इस बार भी वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में ऐसी ही मजबूती के आसार हैं क्योंकि डिलीवरी पहली छमाही में 1.2 गीगावाट से बढ़कर दूसरी छमाही में 2.1 गीगावाट पहुंच सकती है।

जून तिमाही के आखिरी में सुजलॉन एनर्जी की ऑर्डर बुक 5.9 GW थी, जिससे वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक डिलीवरी की तस्वीर साफ दिख रही है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-2028 के दौरान सुजलॉन एनर्जी का EBITDA सालाना 22% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़ेगा।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में देश की विंड कैपेसिटी 3 गीगावाट बढ़ी और ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक अब तक दूसरी छमाही में पहली की तुलना में डेढ़ गुना इंस्टॉलेशन होता रहा है तो इस बार दूसरी छमाही में करीब 4.5 गीगावाट के इंस्टॉलेशन की उम्मीद है जोकि सुजलॉन जैसी विंड टर्बाईन बनाने वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। सरकार ने इस वित्त वर्ष 2027 में 7.5–8 GW नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया हुआ है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग से विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE (फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी) प्रोजेक्ट्स के जरिए विंड कैपेसिटी बढ़ोतरी को सपोर्ट मिल सकता है और यह सुजलॉन एनर्जी के लिए पॉजिटिव है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन एनर्जी को तीन वजहों- DevCo को अच्छे रिस्पांस, निर्यात और पुराने टर्बाईनों को बदलने के मौके से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। डेवको मॉडल की बात करें तो इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही 600 MW से अधिक के ऑर्डर मिले, जो कुल ऑर्डर का 60% हिस्सा हैं।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन को सरकार के स्थानीय प्रोत्साहन से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 6 नवंबर, 2025 को बीएसई पर यह ₹61.45 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 11 महीने में यह 40.93% टूटकर 8 अक्टूबर 2026 को यह एक साल के निचले स्तर ₹36.30 पर आ गया।

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Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:   भारतीय शेयर बाज़ार के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है, क्योंकि GIFT Nifty ने 12 अक्टूबर 2026 को ऊंचे स्तर पर खुलने का संकेत दिया है। वहीं, सोमवार को एशियाई बाज़ार मिले-जुले रुख के साथ खुले, जबकि US स्टॉक फ्यूचर्स में कमाई और महंगाई के आंकड़ों से पहले बढ़त देखी गई। Gift Nifty लगभग 22,649 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो Nifty फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 47 अंक ऊपर है, जिससे भारतीय शेयर बाज़ार इंडेक्स के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत मिलता है।

अक्टूबर में IPO का मेला, Jio Platforms और Zetwerk समेत एक दर्जन कंपनियां कतार में

IPO Fair in October: जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms), जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस (Zetwerk Manufacturing Business), और एवांडा इलेक्ट्रो (Avaada Electro) समेत करीब एक दर्जन कंपनियों का इस महीने अक्टूबर में आईपीओ आने वाला है। मर्चेंट बैंकर्स के मुताबिक इनके अलावा और भी कई कंपनियां कतार में हैं। ये आईपीओ अलग-अलग सेक्टर्स से होंगे, जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग। इनमें से कुछ कंपनियां आईपीओ के जरिए सिर्फ नए शेयर जारी करेंगी तो कुछ में सिर्फ मौजूदा शेयरहोल्डर्स ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत शेयर बेचेंगे तो कुछ में दोनों का कॉम्बिनेशनल होगा।

इस महीने आने वाले आईपीओ

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21-23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है।

HD Fire Protect IPO: फायर प्रोटेक्शन उपकरण और सिस्टम बनाने वाली एचडी फायर प्रोटेक्ट के ₹712 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड फिक्स हो चुका है। निवेशक इसमें प्रति शेयर ₹258-₹271 के भाव पर बोली लगा सकेंगे। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर का सेल का होगा और यह 12-15 अक्टूबर तक खुला रहेगा।

Fusion CX: एआई से लैस कस्टमर एक्सपीरिएंस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर फ्यूजन सीएक्स ने ₹702 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹275-₹289 पर फिक्स किया है। यह इश्यू 14-16 अक्टूबर के बीच खुला रहेगा।

Zetwerk IPO: टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म जेटवर्कका ₹5000 करोड़ का आईपीओ 15-19 अक्टूबर तक खुला रहेगा। इस इश्यू के तहत ₹2600 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे।

Tonbo Imaging IPO: थर्मल इमेजिंग और डिफेंस सेक्टर से जुड़ी टेक्नोलॉजी सिस्टम बनाने वाली टोंबो इमेजिंग ने ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत अधिकतम 1.22 करोड़ इक्विटी शेयर बेचने का प्रस्ताव पेश किया है। ययह आईपीओ 15-19 अक्टूबर के बीच खुला रहेगा।

Bonfiglioli Transmissions IPO: इटली के बोनफिगलिओली ग्रुप की भारतीय सब्सिडियरी बोनफिगलिओली ट्रांसमिशन का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा, जिसके तहत अधिकतम 4.32 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी। यह इश्यू 15-19 अक्टूबर तक खुलेगा।

Sahajanand Medical Technologies IPO: पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल इश्यू ला रही मेडिकल डिवाइस बनाने वाली सहजानंद मेडिकल का आईपीओ 15-19 अक्टूबर को खुलेगा। इसके तहत 1.39 करोड़ शेयरों की बिक्री होगी।

और भी कंपनियां कतार में

एवांडा इलेक्ट्रो (Avaada Electro) की योजना ₹7600 करोड़, पारस हेल्थकेयर (Paras Healthcare) की ₹1800 करोड़ और एनडीआर इनविट ट्रस्ट (NDR InvIT Trust) की ₹750 करोड़ का आईपीओ लाने की है। इसके अलावा गुजरात विक्ट्री फॉर्जिंग्स (Gujarat Victory Forgings) ने अधिकतम 1.97 करोड़ शेयरों का आईपीओ लाने का प्रस्ताव रखा है। इन चारों आईपीओ के तहत नए शेयर जारी होंगे और ऑफर फॉर सेल विंडे के तहत भी शेयरों की बिक्री होगी। इसके अलावा एसएफसी एंवयार्नमेंटल टेक (SFC Environmental Tech) की भी योजना आईपीओ लाने की है, जिसके तहत ₹150 करोड़ के नए शेयर जारी हो सकते हैं और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत 1.23 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री हो सकती है।

इस साल कैसा रहा आईपीओ मार्केट में हाल

जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच मार्केट में इस साल तेज उठा-पटक रही और हाहाकार का माहौल बना हुआ है। इन सबके बीच इस साल 2026 के नौ महीनों में कंपनियों ने 96 कंपनियों के जरिए ₹1.1 लाख करोड़ से अधिक जुटाए। इसमें से 35 आईपीओ तो अकेले पिछले महीने सितंबर में आए थे।

जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स की हेड और एमडी नेहा अग्रवाल का कहना है कि मार्केट की तेज उठा-पटक के बावजूद अच्छी क्वालिटी वाले शेयरों की मांग बनी हुई है। नेहा के मुताबिक सेकंडरी मार्केट में विदेशी निवेशकों का निवेश घटता-बढ़ता रहा लेकिन प्राइमरी मार्केट में देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट मिलता रहा।

नेहा का कहना है कि जिन कंपनियों की कमाई साफ तौर पर दिख रही है, जिनका कॉर्पोरेट गवर्नेंस अच्छा है और जो कैपिटल का सही इस्तेमाल कर रही हैं, उनमें निवेशकों की दिलचस्पी अधिक हो सकती है। वहीं साथ ही आगे उन्होंने यह भी कहा कि जिन कंपनियां का वैल्यूएशन सही रहेगी, उन्हें निवेशकों का शानदार रिस्पांस दिख सकता है और लिस्टिंग के बाद भी वे अच्छा परफॉर्म कर सकती हैं।

SMT IPO: Morgan Stanley और Ashish Kacholia के निवेश वाली कंपनी, 15 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है। 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SMT IPO: Morgan Stanley और Ashish Kacholia के निवेश वाली कंपनी, 15 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ

Sahajanand Medical Technologies IPO: कार्डियोवस्कुलर मेडिकल डिवाइस बनाने वाली सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज (SMT) का आईपीओ आने वाला है। समारा कैपिटल (Samara Capital), मॉर्गन स्टैनेल (Morgan Stanley), और कोटक इंवेस्टमेंट एडवाइजर्स के निवेश वाली एसएमटी का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 15 अक्टूबर को खुलेगा। हालांकि अभी इसके प्राइस बैंड का ऐलान नहीं हुआ है और यह 12 अक्टूबर को सामने आएगा। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है यानी कि इसके तहत कोई नया शेयर नहीं जारी होगा।

Sahajanand Medical Technologies IPO: डिटेल्स

सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 15 अक्टूबर को खुलेगा और 19 अक्टूबर तक खुला रहेगा। एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 14 अक्टूबर को खुलेगा। इस इश्यू के ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत कंपनी के मौजूदा शेयरहोल्डर्स को 1.38 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे जिसमें से 2.5 लाख शेयर एंप्लॉयीज के लिए आरक्षित हैं। इस इश्यू के तहत प्रमोटर्स के साथ-साथ समारा कैपिटल मार्केट्स होल्डिंग, कोटक-प्री अपॉर्च्यूनिटीज फंड और एनएचपीईए स्पार्कल होल्डिंग बीवी शेयर बेच रहे हैं।

कंपनी की सबसे बड़ी पब्लिक शेयरहोल्डर समारा कैपिटल मार्केट्स होल्डिंग है, जिसकी कंपनी में 29.61% हिस्सेदारी है। इसके बाद कंपनी में मार्गन स्टैनले की NHPEA स्पार्कल होल्डिंग बीवी की 15.24% और कोटक-प्री आईपीओ अपॉर्च्यूनिटीज फंड की 5.98% हिस्सेदारी है। इसके अलावा कंपनी में दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया की 1.08% हिस्सेदारी है।

इस इश्यू के तहत 50% हिस्सा QIB (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स), 15% हिस्सा NIIs (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) और 35% हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 21 अक्टूबर को फाइनल होगा और फिर एक्सचेंजों पर इसकी 23 अक्टूबर को एंट्री होगी।

सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज के बारे में डिटेल्स

साल 2021 में धीरजलाल कोटाडिया (Dhirajlal Kotadia) ने सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज को शुरू किया था। यह क्लास 3 और क्लास सी/डी मेडिकल डिवाइसेज डेवलप करती है। इसका मुख्य फोकस कोरोनरी स्टेंट और बैलून जैसे वस्कुलर इंटरवेंशन प्रोडक्ट्स, और ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) सिस्टम और ऑक्लूडर जैसे स्ट्रक्चरल हार्ट डिवाइस पर है। कंपनी के रेवेन्यू में वस्कुलर इंटरवेंशन प्रोडक्ट्स की लगभग 60% और स्ट्रक्चरल हार्ट डिवाइसेज की 16% हिस्सेदारी है। जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी के प्रोडक्ट्स की बिक्री भारत और कुछ यूरोपीय देशों समेत 65 देशों में हुई।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो जून 2026 तिमाही में इसे ₹15.1 करोड़ का मुनाफा और ₹351.6 करोड़ का रेवेन्यू मिला था। इससे पहले वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का मुनाफा 174.65% बढ़कर ₹69.1 करोड़ और रेवेन्यू 18.1% चढ़कर ₹1,210.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Jio IPO: कम हो रहा कर्ज का बोझ, आईपीओ से पहले तेजी से हो रहा कैश जेनेरेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Retiring at 45: जल्दी रिटायर होना काफी आकर्षक लग सकता है लेकिन ऐसा फंड तैयार करना जो 30-40 वर्षों तक या उससे अधिक समय तक खर्चों को पूरा कर सके, इसके लिए सावधानीपूर्वक प्लानिंग की जरूरत होती है। मान लीजिए कि 34 साल की उम्र में आपकी हर महीने की सैलरी ₹1.5 लाख है और आप 45 साल की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं। ऐसे में आपके सामने पहली बड़ी चुनौती यह अनुमान लगाने की है कि भविष्य में आपके खर्च कितने होंगे, रिटायरमेंट के लिए कितने बड़े फंड की जरूरत पड़ेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा।

Retiring at 45: ये है पूरा कैलकुलेशन

बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन और एमडी संजीव बजाज का का कहना है कि 45 साल की उम्र में रिटायर होना एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन इसकी शुरुआत निवेश के विकल्प चुनने से नहीं, बल्कि यह समझने से होनी चाहिए कि 45 साल की उम्र में आपका खर्च कितना होगा। चूंकि आपकी उम्र 34 साल है तो आपके पास 11 साल हैं इस प्लानिंग के लिए और इन्हीं 11 साल में जिंदगी भर के लिए खर्चों का इंतजाम करना है। संजीव के मुताबिक इसमें दो चीजों का हल खोजना है- एक तो कम समय में पर्याप्त बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना और दूसरा यह सुनिश्चित करना कि वह फंड लंबे समय तक आपके खर्चों को पूरा कर सके।

एक आसान उदाहरण से समझिए इसे। मान लीजिए कि आपका हर महीने का खर्च अभी ₹60 हजार है और अगर महंगाई सालाना 6% की रफ्तार से बढ़े तो जब आप 45 साल के होंगे, तब यही खर्च बढ़कर लगभग ₹1.14 लाख प्रति माह हो सकता है। अब अगर आप रिटायरमेंट के दौरान हर साल अपने फंड का 3.5% निकालने का टारगेट रखते हैं, और महंगाई के हिसाब से निकाली जाने वाले पैसे को हर साल बढ़ाते हैं, तो 40 साल से अधिक के रिटायरमेंट के लिए आपको लगभग ₹3.9 करोड़ के फंड की जरूरत हो सकती है।

अब आता है असली गणित। 11 साल में इस ₹3.9 करोड़ के फंड को तैयार करने के लिए अगर मान लेते हैं कि निवेश की गई पूंजी पर सालाना 10% की रफ्तार से रिटर्न मिल रहा है तो आपको हर महीने लगभग ₹1.7 लाख निवेश करना होगा जोकि ₹1.5 लाख की मौजूदा इनकम से कम है। ऐसे में मौजूदा जीवनशैली और इनकम के हिसाब से 45 साल की उम्र में पूरी तरह रिटायर होना मुश्किल होगा। हालांकि इस कैलकुलेशन से आपको पता चल गया कि कहां क्या बदलाव करना है।

अगर अर्ली-रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 45 साल से 50 वर्ष कर दी जाए तो हर महीने ₹1.15 लाख के निवेश में काम हो जाएगा। इसके अलावा कुछ और तरीके भी अपना सकते हैं जैसे कि रिटायरमेंट के बाद अनुमानित खर्चों को कम करना, सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम बढ़ाना और 45 साल की उम्र के बाद पूरी तरह काम छोड़ने के बजाय पार्ट-टाइम काम या कंसल्टिंग से कुछ कमाई जारी रखना।

कुछ सावधानी और रिस्क समझना भी जरूरी

जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाते समय स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर नौकरी छोड़ने के बाद कंपनी की तरफ से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में आपको अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और भविष्य में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से योजना बनानी होगी।

एक और अहम रिस्क मार्केट में बिकवाली का दबाव है। अगर रिटायरमेंट के तुरंत बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ जाती है और आपको अपने खर्चों के लिए गिरते हुए निवेश से पैसा निकालना पड़ता है, तो आपके रिटायरमेंट फंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कुछ वर्षों के खर्च के बराबर पैसे कम रिस्क वाले एसेट्स में रखने चाहिए। इससे जब शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हो, तब जल्दबाजी में पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तीन काम करें सबसे पहले

अर्ली-रिटायरमेंट के लिए तीन काम सबसे पहले करना चाहिए-

तीन महीने तक के अपने वास्तविक खर्चों का रिकॉर्ड रखें। इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने आपकी जरूरतों पर वास्तव में कितना पैसा खर्च होता है।

म्यूचुअल फंड, शेयर, पीपीएफ और ईपीएफ समेत अपने सभी मौजूदा निवेशों की पूरी लिस्ट बनाएं।

अपने मौजूदा फंड और लक्ष्य के बीच का अंतर निकालें। इससे पता चलेगा कि आपको कितना अतिरिक्त निवेश करना होगा और अपने लक्ष्य के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: कम हो रहा कर्ज का बोझ, आईपीओ से पहले तेजी से हो रहा कैश जेनेरेट

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटी है। उससे पहले कंपनी की सेहत काफी मजबूत हुई है और यह अधिक नगदी जेनेरेट कर रही है तो कर्ज पर इसकी अपनी निर्भरता भी कम हो रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट लेवरेज रेश्यो वित्त वर्ष 2024 में 0.88 गुना से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 0.36 गुना रह गया। इससे कंपनी को वित्तीय फैसले लेने में अधिक सहूलियत मिली है। जियो का लक्ष्य अपनी मुनाफे वाली ग्रोथ को आगे बढ़ाने का है। आईपीओ के तहत नए शेयर जारी करके जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है, जब इसका फोकस नेटवर्क का विस्तार करने और नए ग्राहक जोड़ने से हटकर पिछले एक दशक में बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से अधिक कमाई करने पर है। इसका मतलब हुआ कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से कमाई बढ़ाने के साथ-साथ मोबाइल कनेक्टिविटी के अलावा दूसरे कारोबारों को भी डेवलप करने पर फोकस कर रही है।

एंबिट कैपिटल रिसर्च के एनालिस्ट विवेकानंद एस का कहना है कि आईपीओ से जियो की वित्तीय सेहत मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि इसके कैपिटल स्ट्रक्चर अधिक कंजर्वेटिव हो जाएगा। उनका कहना है कि अब अगले चरण की ग्रोथ में कंपनी का फोकस कमाई बढ़ाने पर होगा तो कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अधिक कंट्रोल दिख सकता है।

कैसी है Jio Platforms की सेहत

जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबारी सेहत की बात करें तो ऑपरेशंस से इसका रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में ₹1.10 लाख करोड़ से वित्त वर्ष 2026 में ₹1.47 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी ₹21,423 करोड़ से बढ़कर ₹30,049 करोड़ हो गया। साथ ही अहम बात ये है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के बाद कंपनी की नगदी वित्त वर्ष 2024 में ₹1,449 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹42,071 करोड़ हो गई, जिससे इसके सामने भविष्य में निवेश करने और कर्ज हल्का करने की गुंजाइश बढ़ी है।

इस दौरान कंपनी का ARPU यानी प्रति यूजर औसतन मंथली रेवेन्यू ₹181.7 से ₹214 पर पहुंच गया तो प्रति यूजर मासिक डेटा खपत 28.7 GB से बढ़कर 42.3 GB हो गई। विवेकानंद का कहना है कि ग्राहक अनलिमिटेड डेटा और सस्ती सेवाओं का भरपूर फायदा उठा रहे हैं, जिससे कंपनी को कस्टमर सरप्लस के रूप में काफी फायदा मिल रहा है।

जियो ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश और आक्रामक प्राइसिंग के जरिए देश के मोबाइल मार्केट को बदल दिया, जिससे कॉम्पिटिटर्स को भी ऐसा ही करना पड़ा। हालांकि अब टेलीकॉम इंडस्ट्री को अपनी सर्विस से ज्यादा रेवेन्यू कमाने की जरूरत है। कंपनी ने मोबाइल सर्विस के अलावा एक एंड-टू-एंड 5जी स्टैक डेवलप किया है जिसमें कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजी, रेडियो इक्विपमेंट और नेटवर्क सॉफ्टवेयर शामिल हैं। मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी यूनिट्स ने 6,817 पेटेंट एप्लीकेशन फाइल किए थे, जिनमें से 1,009 को वैश्विक मंजूरी मिल चुकी थी। जियो ने अपना प्री-6G स्टैक और Giga MIMO रेडियो भी डेवलप किया है, जिसे कंपनी ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखाया था।

जियो अपने होम ब्रॉडबैंड बिजनेस का भी विस्तार कर रही है। आईपीओ के ड्राफ्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के आखिरी तक उसके पास 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कस्टमर थे, जिससे उसका मार्केट शेयर 42.6% हो गया।

कंपनी की योजना पार्टनरशिप और मैनेज्ड-सर्विस अरेंजमेंट के जरिए अपनी खास नेटवर्क टेक्नोलॉजी को विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर्स तक पहुंचाने की भी है। इसके सफल होने पर भारतीय ऑपरेशन्स के अलावा कंपनी के लिए रेवेन्यू का एक और जरिया बन सकता है।

How to read stock chart: चार्ट पढ़ने का सही तरीका, धड़ाधड़ बनेगा शेयर मार्केट से पैसा

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

How to read stock chart: चार्ट पढ़ने का सही तरीका, धड़ाधड़ बनेगा शेयर मार्केट से पैसा

How to read stock chart: अगर आप स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो प्राइस चार्ट में एक चीज जरूर नोटिस की होगी कि भाव एक सीधी रेखा में नहीं चलते हैं। वे अक्सर कुछ खास प्राइस लेवल पर रुकती हैं, उछाल लेती हैं या अपनी दिशा बदल देती हैं। ऐसा बार-बार होता है, जैसे कि कोई फर्श (Floor) या छत (Ceiling) मौजूद हो। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि टेक्निकल एनालिसिस की सबसे पुरानी और अहम अवधारधाओं में से एक है। ऐसे में ट्रेडिंग के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यह सिर्फ चार्ट देखने वाले शख्स और इसे वास्तव में समझने वाले के बीच बड़ा फर्क पैदा करता है।

क्या है Support और Resistance

सपोर्ट वह प्राइस लेवल होता है, जहां किसी गिरावट के दौरान भाव का नीचे जाना रुक सकता है या यह ऊपर की तरफ मुड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस लेवल पर खरीदारी करने वालों की दिलचस्पी इतनी बढ़ जाती है कि वे बिकवाली के दबाव को कम कर देते हैं। यह एक तरह से फर्श की तरह काम करता है, जहां से नीचे जाने में शेयर को कठिनाई हो सकती है।

रेजिस्टेंस इसके बिल्कुल विपरीत होता है। यह वह प्राइस लेवल है, जहां तेजी के दौरान शेयरों के भाव का ऊपर जाना रुक सकता है या कीमत वापस नीचे की तरफ मुड़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस स्तर पर बिकवाली का दबाव खरीदारी के दबाव से अधिक हो जाता है। यह एक छत (Ceiling) की तरह होता है, जिसे ऊपर की तरफ तोड़ना मुश्किल होता है।

एक उदाहरण से समझें। नीचे चार्ट में Siemens के शेयरों की छह महीने में ₹3300 और ₹4200 के बीच की उठा-पटक का चार्ट है। इसमें देख सकते हैं कि जब भी शेयर की कीमत ₹3,300 के करीब गिरती है, तो खरीदार एक्टिव हो जाते हैं और भाव चढ़ने लगते हैं तो दूसरी तरफ जब भी शेयर की कीमत ₹4,150–₹4,200 के करीब पहुंचती है, तो सेलर्स एक्टिव हो जाते हैं और भाव फिसलने लगते हैं। इस स्थिति में ₹3300 सपोर्ट और ₹4150-₹4200 रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहा है।

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क्यों होते हैं ये लेवल्स

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल कोई मैजिक लाइन नहीं हैं, जो किस्मत से नहीं बनती हैं बल्कि ये ट्रेडर्स के खरीदारी-बिक्री के पैटर्न को दिखाते हैं। इनके बनने की कुछ वजह हैं-

मार्केट साइकोलॉजी: ट्रेडर्स को पुराने अहम प्राइस लेवल याद रहते हैं। जब शेयरों की कीमत दोबारा उन लेवल पर पहुंचती है, तो वे फिर से खरीदने या बेचने का फैसला ले सकते हैं। इससे ये लेवल मजबूत हो सकते हैं।

सप्लाई और डिमांड: सपोर्ट के पास खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि रेजिस्टेंस के पास बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

मनोवैज्ञानिक स्तर: ₹1,000, ₹2,000 या ₹5,000 जैसे राउंड नंबर्स अक्सर अहम प्राइस लेवल के तौर पर काम करती हैं।

संस्थागत ट्रेडिंग: बड़े संस्थागत निवेशक और ट्रेडर्स कई बार अहम प्राइस लेवल के आसपास बड़े ऑर्डर लगाते हैं।

ऑर्डर क्लस्टरिंग: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के आस-पास स्टॉप लॉस ऑर्डर और प्रॉफिट टारगेट हो सकते हैं। जब शेयर ये लेवल तोड़ती हैं, तो कई ऑर्डर एक साथ एक्टिव हो सकते हैं, जिससे तेज ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन देखने को मिल सकता है।

Role Reversal: सपोर्ट बन सकता है रेजिस्टेंस तो रेजिस्टेंस नया सपोर्ट

सपोर्ट और रेजिस्टेंस फिक्स्ड नहीं होते हैं बल्कि ऐसा भी हो सकता है कि सपोर्ट अगला रेजिस्टेंस बन जाए या रेजिस्टेंस नया सपोर्ट बन जाए। इस रोल रिवर्सल को पोलरिटी फ्लिपिंग कहते हैं।

अगर कोई प्राइस लेवल काफी समय से सपोर्ट का काम कर रहा था, लेकिन भाव उससे भी नीचे आ गए। ऐसे में जिन ट्रेडर्स ने उस स्तर पर शेयर खरीदे थे, वे घाटे में आ गए तो शेयर जब दोबारा पुराने सपोर्ट लेवल तक पहुंचती है, तो उनमें से कुछ ट्रेडर्स अपने नुकसान से बाहर निकलने या ब्रेक-ईवन पर बेचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे उस लेवल पर बिकवाली बढ़ सकती है और जो स्तर पहले सपोर्ट था, वह अब रेजिस्टेंस बन सकता है।

वहीं दूसरी तरफ जब शेयर किसी रेजिस्टेंस को तोड़कर ऊपर निकलते हैं, तो बाद में उसी लेवल पर वापस आने पर वहां खरीदारी बढ़ सकती है। इस तरह पुराना रेजिस्टेंस नया सपोर्ट बन सकता है।

उदाहरण के लिए, पेटीएम का शेयर ₹1,250–₹1,270 के लेवल के ऊपर टिक नहीं पा रहा था और यह लेवल रेजिस्टेंस का काम कर रहा था। हालांकि जब शेयर इस रेजिस्टेंस को तोड़कर ऊपर निकल गया और ₹1,400 तक पहुंच गया और इसके बाद शेयर वापस गिरकर ₹1,290 तक आए और फिर वहां से उछलकर ऊपर जाने लगे। इस स्थिति में ₹1,250–₹1,270 का पुराना रेजिस्टेंस अब नए सपोर्ट के रूप में काम करने लगा।

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